Google Analytics —— Meta Pixel
April 11, 2026
Hindi Hindi
भारत

भारत (989)

नई दिल्ली/दोहा / शौर्यपथ /
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी 9 से 10 अप्रैल 2026 तक कतर की राजधानी दोहा के दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर रहे। दौरे के दौरान उन्होंने कतर के ऊर्जा कार्य राज्य मंत्री एवं कतर एनर्जी के अध्यक्ष व सीईओ साद शेरिदा अल-काबी से महत्वपूर्ण मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों और ऊर्जा सहयोग को और सुदृढ़ करने पर विस्तृत चर्चा की।

बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से कतर के आमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी और प्रधानमंत्री व विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी को शुभकामनाएं और सहयोग का संदेश प्रेषित किया।

चर्चा में हालिया वैश्विक परिस्थितियों का भी उल्लेख हुआ। मार्च 2026 में प्रधानमंत्री मोदी और कतर के आमीर के बीच हुई टेलीफोन वार्ताओं को याद करते हुए क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए संवाद और कूटनीति की आवश्यकता पर जोर दिया गया। साथ ही, कतर में रह रहे भारतीय समुदाय के प्रति वहां की सरकार द्वारा किए जा रहे सहयोग के लिए आभार भी व्यक्त किया गया।

दोनों पक्षों ने भारत-कतर रणनीतिक संबंधों के विभिन्न आयामों—व्यापार, निवेश, ऊर्जा, संस्कृति और जन-से-जन संपर्क—पर व्यापक चर्चा की। कतर ने भारत के लिए एक विश्वसनीय ऊर्जा आपूर्तिकर्ता बने रहने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और भविष्य में ऊर्जा सहयोग को और मजबूत करने की इच्छा जताई।

बैठक में अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल को हुए दो सप्ताह के युद्धविराम समझौते का भी स्वागत किया गया। दोनों नेताओं ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में स्थिरता बहाल करने, आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुचारू बनाए रखने और निर्बाध नौवहन सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

दौरे के अंत में हरदीप सिंह पुरी ने कतर सरकार के आतिथ्य के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। दोनों देशों ने आने वाले समय में नियमित संवाद बनाए रखने और आपसी सहयोग को और गहरा करने पर सहमति जताई।

बस्तर के लिए 360° प्लान-टूरिज्म, स्टार्टअप, इंफ्रा और इनोवेशन पर फोकस

पीएम का बस्तर दौरा बनेगा टर्निंग पॉइंट, बड़े प्रोजेक्ट्स की सौगात

नई दिल्ली / रायपुर / छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर बस्तर के भविष्य की एक नई तस्वीर पेश की। इस मुलाकात में मुख्यमंत्री ने न केवल नक्सलवाद के अंत के बाद प्रदेश में आई शांति के लिए प्रधानमंत्री का आभार जताया, बल्कि बस्तर के समग्र विकास का एक विस्तृत और दूरदर्शी ब्लूप्रिंट भी सौंपा। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री को मानसून के बाद बस्तर आने का आमंत्रण दिया, जहां उनकी मौजूदगी में कई बड़ी परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण प्रस्तावित है।

उन्होंने बताया कि बस्तर समेत पूरे राज्य में नक्सलवाद समाप्त हो चुका है और अब शांति स्थापित है। शिक्षा व स्वास्थ्य सुधार के तहत नए एजुकेशन सिटी, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज बनाए जा रहे हैं, जबकि इंद्रावती नदी पर बैराज, रेल लाइन और एयरपोर्ट विस्तार से कनेक्टिविटी मजबूत हो रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस ब्लूप्रिंट के जरिए बस्तर में अब विकास, रोजगार और बेहतर सुविधाओं का नया दौर शुरू होगा।

मुख्यमंत्री ने अपने विकास दस्तावेज़ में उल्लेख किया कि एक दशक पहले प्रधानमंत्री द्वारा बस्तर के लिए देखा गया शांति और विकास का सपना अब जमीन पर साकार हो रहा है। नक्सलवाद खत्म होने के बाद अब लोगों में डर नहीं, बल्कि उम्मीद और विकास की नई चमक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन से बस्तर को नई दिशा और गति मिलेगी, जिससे क्षेत्र में विश्वास और उत्साह बढ़ेगा।

मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तुत विकास ब्लूप्रिंट ‘सैचुरेशन, कनेक्ट, फैसिलिटेट, एम्पावर और एंगेज’ रणनीति पर आधारित है। इसके तहत बस्तर में बुनियादी सुविधाओं को तेजी से विस्तार देने का लक्ष्य रखा गया है। सड़कों के व्यापक जाल के माध्यम से दूर-दराज के गांवों को जोड़ा जाएगा। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अधूरे कार्यों को 2027 तक पूरा करने के साथ-साथ नई 228 सड़कों और 267 पुलों का निर्माण प्रस्तावित है। इसके अलावा 61 नई परियोजनाओं के लिए विशेष केंद्रीय सहायता की मांग भी की गई है।

ऊर्जा और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में भी बड़े बदलाव की योजना है। हर घर तक बिजली पहुंचाने के कार्य तेज होंगे। शिक्षा के क्षेत्र में 45 पोटा केबिन स्कूलों को स्थायी भवनों में बदला जाएगा। युवाओं के लिए 15 स्टेडियम और 2 मल्टीपर्पज हॉल बनाए जाएंगे, जबकि स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का विस्तार और डॉक्टरों के लिए ट्रांजिट हॉस्टल बनाए जा रहे हैं।

कृषि और सिंचाई के क्षेत्र में इंद्रावती नदी पर दो बड़े प्रोजेक्ट देउरगांव और मटनार में स्वीकृत किए गए हैं, जिनसे 31,840 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। यह परियोजनाएं बस्तर की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगी।

आजीविका और आय बढ़ाने के लिए सरकार ने तीन वर्षीय योजना तैयार की है, जिसका लक्ष्य 2029 तक 85% परिवारों की मासिक आय 15,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये करना है। ‘नियद नेल्ला नार 2.0’ योजना के तहत अब अधिक जिलों को जोड़ा जा रहा है, जिससे विकास का लाभ व्यापक स्तर पर पहुंचेगा। 10 जिलों में शुरू की गई यह योजना अब 7 जिलों और 3 नए जिलों (गरियाबंद, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई) तक विस्तारित हो रही है।

‘अंजोर विजन 2047’ और ‘विकसित भारत@2047’ के तहत स्टार्टअप नीति भी लागू की गई है, जिसमें 2030 तक 5,000 स्टार्टअप तैयार करने का लक्ष्य है।

पर्यटन के क्षेत्र में बस्तर की पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की दिशा में भी तेजी से काम हो रहा है। चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी नेशनल पार्क, एडवेंचर टूरिज्म, कैनोपी वॉक और ग्लास ब्रिज जैसी परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं। बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजन क्षेत्र को नई पहचान दे रहे हैं। वहीं, एक लाख से अधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिनमें से 40 हजार को रोजगार भी मिल चुका है।

नक्सलवाद से मुक्त बस्तर के विकास के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज प्रधानमंत्री के सामने जो कार्ययोजना प्रस्तुत की, उसमें ‘बस्तर मुन्ने’ (अग्रणी बस्तर) कार्यक्रम एक अहम पहल है। इस कार्यक्रम के तहत हर ग्राम पंचायत में शिविर लगाए जाएंगे, जहाँ अधिकारियों की मौजूदगी में लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे दिया जाएगा, जरूरी दस्तावेज वहीं बनाए जाएंगे और उनकी समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया जाएगा। इसका उद्देश्य है कि हर व्यक्ति तक सरकार की योजनाएँ आसानी से पहुँचें और बस्तर तेजी से विकास की राह पर आगे बढ़े।

प्रधानमंत्री के प्रस्तावित दौरे के दौरान जिन प्रमुख परियोजनाओं के शिलान्यास और लोकार्पण की योजना है, उनमें रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन, जगदलपुर एयरपोर्ट का विस्तार, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, दंतेवाड़ा में मेडिकल कॉलेज, जगरगुंडा और ओरछा में एजुकेशन सिटी जैसी महत्वपूर्ण पहल शामिल हैं। ये परियोजनाएं बस्तर को शिक्षा, स्वास्थ्य और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगी।

 

  रायपुर / राजधानी रायपुर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के अंतर्गत स्वामी विवेकानंद एथलेटिक्स स्टेडियम, कोटा में खेले गए पुरुष फुटबॉल के सेमीफाइनल मुकाबलों में छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल ने शानदार जीत दर्ज करते हुए फाइनल में प्रवेश किया।

खेले गए एक रोमांचक सेमीफाइनल मुकाबले में छत्तीसगढ़ ने अरुणाचल प्रदेश को 3-2 से हराया। मैच की शुरुआत से ही छत्तीसगढ़ टीम ने आक्रामक खेल दिखाया और पहले हाफ की समाप्ति तक 2-0 की बढ़त बना ली। दूसरे हाफ में अरुणाचल प्रदेश ने वापसी की कोशिश की, लेकिन छत्तीसगढ़ ने बढ़त कायम रखते हुए मैच 3-2 से अपने नाम किया।
इसी प्रकार पहले खेले गए सेमीफाइनल मैच में पश्चिम बंगाल ने गोवा को 5-2 से हराकर फाइनल में अपनी जगह सुनिश्चित की।

इस अवसर पर केन्द्रीय युवा कार्य एवं खेल राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा निखिल खडसे ने खिलाड़ियों से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने खिलाड़ियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर भारतीय खेल प्राधिकरण के उप महानिदेशक श्री मयंक श्रीवास्तव एवं खेल विभाग के सचिव श्री यशवंत कुमार, खेल विभाग के अधिकारी, आयोजन समिति के सदस्य, बड़ी संख्या में खिलाड़ी तथा अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

 

श्रीमती खडसे ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 के दौरान जगदलपुर का दौरा किया और 2500 से अधिक आदिवासी एथलीटों को 'भविष्य का ओलंपियन' बताया

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में अस्मिता लीग के पूर्व छात्रों ने हॉकी, वेटलिफ्टिंग, फुटबॉल और तैराकी में पदकों पर अपना दबदबा बनाया

रायपुर / युवा मामले और खेल राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा खडसे ने 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026' के दौरान बुधवार को रायपुर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने यहां के माहौल को ऊर्जा, आशा और बदलाव से भरपूर बताया। उन्होंने इस आयोजन को सफल बनाने में भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) टीम के प्रयासों की सराहना की और कहा कि एथलीटों, स्थानीय समुदाय और इस क्षेत्र के लोगों की ओर से मिली प्रतिक्रिया बेहद उत्साहजनक रही है।

देशभर के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 2,500 से ज्यादा एथलीट अलग-अलग खेलों में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में हिस्सा ले रहे हैं। श्रीमती खडसे ने कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026, केंद्र सरकार की उस प्रतिबद्धता को दिखाता है जिसके तहत आदिवासी युवाओं को अपना भविष्य बनाने के लिए एक मंच दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के लोगों के लिए यह खेल एक नई उम्मीद हैं और यह संकेत कि उनकी काबिलियत को पहचाना जा रहा है और उस पर सबसे ऊंचे स्तर पर निवेश किया जा रहा है।

युवा मामले एवं खेल राज्य मंत्री ने कहा, '' एक समय था जब छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद के लिए जाना जाता था, और यहां के लोगों को एक पिछड़ा समुदाय माना जाता था। आज, मुझे लगता है कि इस क्षेत्र के लिए एक नई दिशा खुल रही है। नक्सलवाद का खात्मा हो चुका है और खेल के माध्यम से, इस धरती के युवा अब अपनी ऊर्जा और क्षमता को सामने ला सकते हैं और देश के लिए खेल सकते हैं।''

खेल राज्य मंत्री ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 को एक ऐतिहासिक पहल बनाने का श्रेय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विजन, गृह मंत्री श्री अमित शाह (जिन्होंने पूरे देश से नक्सलवाद के खात्मे की घोषणा की है), कैबिनेट मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया और पूरी साई टीम को दिया। उन्होंने पूरा भरोसा जताया कि इन खेलों में हिस्सा लेने वाले कई एथलीट आगे चलकर ओलंपिक, एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे और पदक जीतेंगे।

युवा मामले और खेल राज्य मंत्री, श्रीमती रक्षा खडसे ने 'अस्मिता लीग' के परिवर्तनकारी प्रभाव पर भी प्रकाश डाला। इस लीग को 2021 में प्रधानमंत्री मोदी के उस विज़न के तहत शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य ग्रामीण भारत की महिलाओं को प्रतिस्पर्धी खेलों में लाना और उन्हें एक पहचान व अवसर प्रदान करना है।

युवा मामले एवं खेल राज्य मंत्री, श्रीमती रक्षा खडसे ने कहा, '' खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में, नतीजे ज़बरदस्त रहे हैं। हॉकी, वेटलिफ्टिंग और फुटबॉल में हिस्सा लेने वाली लगभग 60 से 70 प्रतिशत लड़कियां ‘अस्मिता लीग’ खेल चुकी हैं और पदक जीत चुकी हैं। इनमें अंजली मुंडा जैसी बेहतरीन खिलाड़ी भी शामिल हैं। तैराकी में जीते गए सभी पांचों स्वर्ण पदक भी ‘अस्मिता लीग’ की खिलाड़ियों ने ही हासिल किए हैं। उन्होंने कहा, '' हमारा प्रयास जारी है कि हम ‘अस्मिता लीग’ को और भी निचले स्तर तक यानी के गांवों तक ले जाएं ताकि खेलों में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ती रहे।''

दक्षिण गोवा | विशेष रिपोर्ट

गोवा के दक्षिण जिले के कुर्चोरेम से सामने आया एक सनसनीखेज मामला अब पूरे प्रदेश में आक्रोश और सियासी हलचल का कारण बन गया है। भाजपा पार्षद सुशांत नाइक के 20 वर्षीय बेटे सोहम नाइक पर 25 से 30 नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण, अश्लील वीडियो बनाने और ब्लैकमेलिंग जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।

तीन साल तक चलता रहा ‘साइलेंट क्राइम’

प्रारंभिक जांच के अनुसार, आरोपी पिछले तीन वर्षों से नाबालिग लड़कियों को अपने जाल में फंसा कर उनका शोषण करता रहा। आरोप है कि वह उनके आपत्तिजनक वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल करता था, जिससे पीड़िताएं लंबे समय तक डर के साए में चुप रहीं।

पार्टी में खुला ‘काला राज’

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब आरोपी ने कथित तौर पर एक सामाजिक समारोह/पार्टी में अपने दोस्तों के बीच इन अश्लील वीडियो को दिखाया और अपनी हरकतों का बखान किया।

यहीं से मामला बाहर निकला और देखते ही देखते स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया।

जनता के दबाव में पुलिस हरकत में

घटना के बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस स्टेशन के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया, जिसके बाद पुलिस ने 23 मार्च 2026 को सोहम नाइक को हिरासत में लिया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच अब क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है।

कानूनी शिकंजा: POCSO से IT एक्ट तक

आरोपी के खिलाफ दर्ज की गई FIR में शामिल हैं:

POCSO एक्ट (नाबालिगों के यौन अपराध)

गोवा चिल्ड्रन्स एक्ट

आईटी एक्ट (डिजिटल अपराध और वीडियो रिकॉर्डिंग)

अब तक कम से कम तीन FIR दर्ज की जा चुकी हैं।

कोर्ट ने बढ़ाई हिरासत

27 मार्च 2026 को पणजी चिल्ड्रन्स कोर्ट ने आरोपी की पुलिस रिमांड 4 दिन और बढ़ा दी, ताकि पूरे नेटवर्क और अन्य संभावित पीड़ितों की पहचान की जा सके।

सियासी संग्राम तेज

इस घटना के सामने आते ही विपक्ष—खासतौर पर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी—ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है।

विपक्ष का आरोप है कि ऐसे मामलों में प्रभावशाली परिवारों के कारण अक्सर कार्रवाई में देरी होती है, जबकि सरकार ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है।

नासिक/मुंबई | विशेष रिपोर्ट

महाराष्ट्र के नासिक से सामने आया स्वयंभू ज्योतिषी अशोक कुमार खरात उर्फ “कैप्टन खरात” का मामला अब केवल आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सत्ता, अंधविश्वास और संगठित शोषण के खतरनाक गठजोड़ की तस्वीर पेश कर रहा है। तंत्र-मंत्र और वशीकरण के नाम पर महिलाओं को अपने जाल में फंसाने वाला यह कथित बाबा अब गंभीर आरोपों और राजनीतिक विवादों के केंद्र में है।

58 वीडियो और ‘आस्था’ के नाम पर शोषण का जाल

पुलिस जांच में बरामद एक पेन ड्राइव ने पूरे मामले को झकझोर कर रख दिया है। इसमें कथित तौर पर करीब 58 महिलाओं के आपत्तिजनक वीडियो पाए गए हैं। आरोप है कि खरात महिलाओं को तंत्र-मंत्र, वशीकरण और ‘अभिमंत्रित वस्तुओं’ का लालच देकर न सिर्फ आर्थिक रूप से ठगता था, बल्कि उनका यौन शोषण कर उन्हें ब्लैकमेल भी करता था।

साधारण पृष्ठभूमि से ‘करोड़ों के बाबा’ तक

जांच में सामने आया है कि खरात का असली नाम लक्ष्मण एकनाथ खरात है, जो नासिक के सिन्नर का निवासी है। बताया जाता है कि वह पढ़ाई में असफल रहा, लेकिन बाद में नाम बदलकर ‘अशोक कुमार’ रखा और खुद को न्यूमरोलॉजिस्ट और तांत्रिक बताकर एक विशाल नेटवर्क खड़ा कर लिया।

आज उसकी संपत्ति करीब 200 करोड़ रुपये आंकी जा रही है, और वह 150 से अधिक विदेश यात्राएं कर चुका है—जो उसके ‘आध्यात्मिक कारोबार’ की असलियत पर सवाल खड़े करती हैं।

कानूनी शिकंजा: 8 FIR, गंभीर धाराएं

अब तक खरात के खिलाफ 8 अलग-अलग FIR दर्ज हो चुकी हैं। इन मामलों में शामिल हैं:

बलात्कार और यौन शोषण

ब्लैकमेलिंग और धोखाधड़ी

नशीला पदार्थ देकर अपराध

जबरन गर्भपात

अंधविश्वास विरोधी कानून के तहत अपराध

फिलहाल वह पुलिस रिमांड में है और उससे लगातार पूछताछ जारी है।

SIT जांच और ‘नरबलि’ एंगल

मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने IPS अधिकारी तेजस्विनी सातपुते के नेतृत्व में SIT का गठन किया है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जांच एजेंसियां अब नरबलि और अघोरी प्रथाओं के एंगल की भी जांच कर रही हैं, क्योंकि छापेमारी के दौरान हथियार और संदिग्ध सामग्री मिली है।

छापेमारी में क्या-क्या मिला?

पुलिस की कार्रवाई में खरात के विभिन्न ठिकानों से बरामद हुआ:

58 आपत्तिजनक वीडियो

पिस्तौल और कारतूस

₹6.5 लाख नकद

करोड़ों की संपत्ति के दस्तावेज

राजनीतिक कनेक्शन: तस्वीरें और आरोपों की राजनीति

इस मामले ने राजनीतिक गलियारों में भी भूचाल ला दिया है। कई नेताओं के साथ खरात की तस्वीरें और कथित संबंध सामने आने के बाद आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

रूपाली चाकणकर (NCP): उनकी संस्था से जुड़ाव के आरोपों के बाद उन्होंने महिला आयोग अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया।

एकनाथ शिंदे: उनके साथ मंदिर दौरे की तस्वीरें वायरल।

दीपक केसरकर और सुनील तटकरे: संपर्क में होने के आरोप।

अमित शाह: विपक्ष ने पुरानी तस्वीरों का दावा किया, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

विपक्ष का हमला: “सत्ता की छत्रछाया में अपराध?”

विपक्षी नेताओं का आरोप है कि खरात ने अपने राजनीतिक संपर्कों का इस्तेमाल कर लंबे समय तक अपने अपराधों को छिपाए रखा। वहीं, सत्ता पक्ष इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बता रहा है।

पुलिस की अपील: सामने आएं पीड़ित

पुलिस प्रशासन ने सार्वजनिक रूप से अपील की है कि यदि कोई अन्य महिला भी इस नेटवर्क का शिकार हुई है, तो वह आगे आए और शिकायत दर्ज कराए।

निष्कर्ष: अंधविश्वास, सत्ता और शोषण का त्रिकोण

अशोक खरात का मामला केवल एक व्यक्ति का अपराध नहीं, बल्कि उस सामाजिक मानसिकता का आईना है जहां अंधविश्वास के सहारे अपराध फलते-फूलते हैं—और जब उसमें सत्ता की परछाईं जुड़ जाए, तो सच सामने आने में वर्षों लग जाते हैं।

अब सवाल यही है—

क्या यह सिर्फ एक ‘बाबा’ का पतन है, या पूरे सिस्टम की पोल खुलने की शुरुआत?

नासिक/मुंबई | विशेष रिपोर्ट

महाराष्ट्र के नासिक से सामने आया स्वयंभू ज्योतिषी अशोक कुमार खरात उर्फ “कैप्टन खरात” का मामला अब केवल आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सत्ता, अंधविश्वास और संगठित शोषण के खतरनाक गठजोड़ की तस्वीर पेश कर रहा है। तंत्र-मंत्र और वशीकरण के नाम पर महिलाओं को अपने जाल में फंसाने वाला यह कथित बाबा अब गंभीर आरोपों और राजनीतिक विवादों के केंद्र में है।

58 वीडियो और ‘आस्था’ के नाम पर शोषण का जाल

पुलिस जांच में बरामद एक पेन ड्राइव ने पूरे मामले को झकझोर कर रख दिया है। इसमें कथित तौर पर करीब 58 महिलाओं के आपत्तिजनक वीडियो पाए गए हैं। आरोप है कि खरात महिलाओं को तंत्र-मंत्र, वशीकरण और ‘अभिमंत्रित वस्तुओं’ का लालच देकर न सिर्फ आर्थिक रूप से ठगता था, बल्कि उनका यौन शोषण कर उन्हें ब्लैकमेल भी करता था।

साधारण पृष्ठभूमि से ‘करोड़ों के बाबा’ तक

जांच में सामने आया है कि खरात का असली नाम लक्ष्मण एकनाथ खरात है, जो नासिक के सिन्नर का निवासी है। बताया जाता है कि वह पढ़ाई में असफल रहा, लेकिन बाद में नाम बदलकर ‘अशोक कुमार’ रखा और खुद को न्यूमरोलॉजिस्ट और तांत्रिक बताकर एक विशाल नेटवर्क खड़ा कर लिया।

आज उसकी संपत्ति करीब 200 करोड़ रुपये आंकी जा रही है, और वह 150 से अधिक विदेश यात्राएं कर चुका है—जो उसके ‘आध्यात्मिक कारोबार’ की असलियत पर सवाल खड़े करती हैं।

कानूनी शिकंजा: 8 FIR, गंभीर धाराएं

अब तक खरात के खिलाफ 8 अलग-अलग FIR दर्ज हो चुकी हैं। इन मामलों में शामिल हैं:

बलात्कार और यौन शोषण

ब्लैकमेलिंग और धोखाधड़ी

नशीला पदार्थ देकर अपराध

जबरन गर्भपात

अंधविश्वास विरोधी कानून के तहत अपराध

फिलहाल वह पुलिस रिमांड में है और उससे लगातार पूछताछ जारी है।

SIT जांच और ‘नरबलि’ एंगल

मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने IPS अधिकारी तेजस्विनी सातपुते के नेतृत्व में SIT का गठन किया है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जांच एजेंसियां अब नरबलि और अघोरी प्रथाओं के एंगल की भी जांच कर रही हैं, क्योंकि छापेमारी के दौरान हथियार और संदिग्ध सामग्री मिली है।

छापेमारी में क्या-क्या मिला?

पुलिस की कार्रवाई में खरात के विभिन्न ठिकानों से बरामद हुआ:

58 आपत्तिजनक वीडियो

पिस्तौल और कारतूस

₹6.5 लाख नकद

करोड़ों की संपत्ति के दस्तावेज

राजनीतिक कनेक्शन: तस्वीरें और आरोपों की राजनीति

इस मामले ने राजनीतिक गलियारों में भी भूचाल ला दिया है। कई नेताओं के साथ खरात की तस्वीरें और कथित संबंध सामने आने के बाद आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

रूपाली चाकणकर (NCP): उनकी संस्था से जुड़ाव के आरोपों के बाद उन्होंने महिला आयोग अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया।

एकनाथ शिंदे: उनके साथ मंदिर दौरे की तस्वीरें वायरल।

दीपक केसरकर और सुनील तटकरे: संपर्क में होने के आरोप।

अमित शाह: विपक्ष ने पुरानी तस्वीरों का दावा किया, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

विपक्ष का हमला: “सत्ता की छत्रछाया में अपराध?”

विपक्षी नेताओं का आरोप है कि खरात ने अपने राजनीतिक संपर्कों का इस्तेमाल कर लंबे समय तक अपने अपराधों को छिपाए रखा। वहीं, सत्ता पक्ष इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बता रहा है।

पुलिस की अपील: सामने आएं पीड़ित

पुलिस प्रशासन ने सार्वजनिक रूप से अपील की है कि यदि कोई अन्य महिला भी इस नेटवर्क का शिकार हुई है, तो वह आगे आए और शिकायत दर्ज कराए।

निष्कर्ष: अंधविश्वास, सत्ता और शोषण का त्रिकोण

अशोक खरात का मामला केवल एक व्यक्ति का अपराध नहीं, बल्कि उस सामाजिक मानसिकता का आईना है जहां अंधविश्वास के सहारे अपराध फलते-फूलते हैं—और जब उसमें सत्ता की परछाईं जुड़ जाए, तो सच सामने आने में वर्षों लग जाते हैं।

अब सवाल यही है—

क्या यह सिर्फ एक ‘बाबा’ का पतन है, या पूरे सिस्टम की पोल खुलने की शुरुआत?

महेश्वर/खरगोन (मध्यप्रदेश)।

नर्मदा नदी के पावन तट पर बसा ऐतिहासिक नगर महेश्वर आज न केवल अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि विश्व पटल पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए महेश्वरी साड़ियों और पारंपरिक हथकरघा उद्योग के लिए भी जाना जाता है। 18वीं सदी में देवी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा संरक्षित और प्रोत्साहित यह कला आज भी उसी गौरव के साथ जीवित है और हजारों परिवारों की आजीविका का आधार बनी हुई है।

हाल ही में छत्तीसगढ़ के मीडिया दल के सदस्यों ने महेश्वर स्थित हथकरघा संस्थानों का भ्रमण किया, जहां उन्होंने न केवल बुनाई की बारीक तकनीकों को करीब से देखा, बल्कि केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से स्थानीय कारीगरों को मिल रहे लाभों की भी विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

हर घर में करघा, हर हाथ में हुनर

करीब 14-15 हजार की आबादी वाले महेश्वर में हथकरघा उद्योग जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। स्थानीय लोगों के अनुसार, हर दूसरे घर में करघा संचालित होता है, जिससे यह शहर पूरी तरह “हैंडलूम हब” के रूप में विकसित हो चुका है। विशेष बात यह है कि यहां लगभग 4000 बाहरी कारीगर, विशेषकर लखनऊ क्षेत्र से आए बुनकर, इस उद्योग से जुड़े हुए हैं।

अहिल्याबाई की विरासत, आज की पहचान

इतिहासकार बताते हैं कि अहिल्याबाई होल्कर ने न केवल मंदिरों और घाटों का निर्माण कराया, बल्कि बुनकरों को बसाकर इस कला को संरक्षित किया। उनके प्रयासों से महेश्वर बुनाई का प्रमुख केंद्र बना, जिसकी पहचान आज भी बरकरार है।

महेश्वरी साड़ियों की खासियत

महेश्वर में बनने वाली साड़ियां अपनी विशिष्टता के कारण देश-विदेश में अत्यधिक लोकप्रिय हैं—

पिटलूम तकनीक: पारंपरिक जमीन में गड़े करघों पर महीन बुनाई

डिजाइन: ज्यामितीय पैटर्न, धारियां और चेक्स, जिनमें ज़री का आकर्षक उपयोग

धागा: कॉटन और सिल्क का मिश्रण, साथ में सोने-चांदी की ज़री

हल्कापन और शालीनता: ये साड़ियां पहनने में हल्की और बेहद आकर्षक होती हैं

महिलाओं के सशक्तिकरण का केंद्र

महेश्वर का हथकरघा उद्योग महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का भी प्रमुख माध्यम बन चुका है। बड़ी संख्या में महिलाएं घर बैठे इस कार्य से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं, जिससे परिवार की आय में वृद्धि हो रही है और सामाजिक स्थिति भी मजबूत हो रही है।

केंद्र सरकार की योजनाओं से मिला संबल

मीडिया दल को जानकारी दी गई कि केंद्र सरकार द्वारा हैंडलूम क्लस्टर डेवलपमेंट, कौशल प्रशिक्षण, मार्केटिंग सपोर्ट और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसी योजनाओं के माध्यम से कारीगरों को निरंतर प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इन योजनाओं के चलते उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार, बाजार तक पहुंच और निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

पर्यटन और संस्कृति का संगम

हथकरघा उद्योग के साथ-साथ महेश्वर अपने अहिल्या किला, नर्मदा घाट और प्राचीन मंदिरों के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां आने वाले पर्यटक न केवल ऐतिहासिक स्थलों का आनंद लेते हैं, बल्कि हथकरघा उद्योग को करीब से देखने का भी अवसर प्राप्त करते हैं।

वैश्विक पहचान की ओर अग्रसर

आज महेश्वर की साड़ियां देश की सीमाओं को पार कर अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बना रही हैं। पारंपरिक कला और आधुनिक विपणन के मेल ने इस उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।

निष्कर्षतः, महेश्वर का हथकरघा उद्योग केवल एक व्यापार नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और आत्मनिर्भरता का जीवंत उदाहरण है—जहां अहिल्याबाई की विरासत आज भी हर करघे की आवाज में गूंजती है।

  नई दिल्ली / एजेंसी / केंद्र सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को व्यावसायिक एलपीजी (LPG) की उपलब्धता बढ़ाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मंत्रालय द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, 23 मार्च 2026 से अगली सूचना तक अतिरिक्त 20 प्रतिशत एलपीजी आवंटित किया जाएगा, जिससे कुल आवंटन पूर्व-संकट स्तर के 50 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा।
इससे पूर्व, राज्यों को 20 प्रतिशत एलपीजी आवंटन के साथ-साथ ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ सुधारों के आधार पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत आवंटन प्रदान किया गया था। इस प्रकार अब कुल 50 प्रतिशत तक व्यावसायिक एलपीजी उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अतिरिक्त 20 प्रतिशत एलपीजी का उपयोग प्राथमिकता के आधार पर निम्न क्षेत्रों में किया जाएगा—
रेस्टोरेंट, ढाबे एवं होटल
औद्योगिक कैंटीन
खाद्य प्रसंस्करण एवं डेयरी इकाइयाँ
राज्य सरकारों/स्थानीय निकायों द्वारा संचालित सब्सिडी युक्त कैंटीन एवं सामुदायिक रसोई
प्रवासी श्रमिकों के लिए 5 किलोग्राम एफटीएल सिलेंडर
इसके साथ ही, पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु सभी व्यावसायिक एवं औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के साथ पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। संबंधित उपभोक्ताओं को अपने कार्यक्षेत्र, एलपीजी उपयोग और वार्षिक आवश्यकता का विवरण भी दर्ज कराना होगा।
मंत्रालय ने यह भी निर्देश दिया है कि एलपीजी प्राप्त करने के लिए सभी व्यावसायिक/औद्योगिक उपभोक्ताओं को अपने क्षेत्र की सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) इकाई के साथ पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) के लिए आवेदन करना और आवश्यक तैयारियाँ पूरी करना अनिवार्य होगा।
इस निर्णय से खाद्य सेवा, उद्योग एवं सार्वजनिक वितरण से जुड़े क्षेत्रों को राहत मिलने की उम्मीद है, साथ ही दीर्घकालिक रूप से पीएनजी के उपयोग को बढ़ावा देने में भी सहायता मिलेगी।

Page 1 of 110

हमारा शौर्य

हमारे बारे मे

whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
 
CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
CONTECT NO.  -  8962936808
EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)