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असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में चुनावी तैयारियां शुरू; दलों की रणनीति और बयानबाजी तेज
नई दिल्ली / शौर्यपथ / :
असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा के साथ ही देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। चुनाव आयोग के ऐलान के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं और सभी दल अपनी-अपनी जीत का दावा करते हुए चुनावी रणनीति में जुट गए हैं।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने चुनाव कार्यक्रम का स्वागत करते हुए भरोसा जताया है कि जनता विकास, स्थिरता और सुशासन के पक्ष में मतदान करेगी। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि पांचों राज्यों में एनडीए और भाजपा के कार्यकर्ता पूरी तरह चुनाव के लिए तैयार हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में असम और पुडुचेरी में एनडीए की सरकार फिर से बनेगी, वहीं पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में भी जनता के आशीर्वाद से एनडीए को विजय प्राप्त होगी।
वहीं कांग्रेस ने चुनाव की घोषणा का स्वागत करते हुए पश्चिम बंगाल में दो चरणों में चुनाव कराने के फैसले को सकारात्मक कदम बताया है। कांग्रेस नेताओं ने निर्वाचन आयोग से मांग की है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान स्वतंत्र, निष्पक्ष और भयमुक्त मतदान सुनिश्चित किया जाए ताकि मतदाता बिना किसी दबाव के अपने मताधिकार का उपयोग कर सकें।
इधर केरल में सत्तारूढ़ वाम मोर्चा (एलडीएफ) की प्रमुख पार्टी सीपीआई(एम) ने भी चुनावी तैयारी तेज कर दी है। पार्टी ने आगामी चुनाव में 86 सीटों पर उम्मीदवार उतारने का निर्णय लिया है, जिनमें से 56 वर्तमान विधायकों को फिर से टिकट देने का फैसला किया गया है।
विधानसभा कार्यकाल समाप्ति की स्थिति
निर्वाचन आयोग के अनुसार सभी राज्यों में मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही चुनाव संपन्न कराए जाएंगे।
पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को समाप्त होगा।
तमिलनाडु विधानसभा का कार्यकाल 10 मई तक है।
असम विधानसभा का कार्यकाल 20 मई को समाप्त हो जाएगा।
केरल विधानसभा का कार्यकाल 23 मई तक है।
पुडुचेरी विधानसभा का कार्यकाल 15 जून को समाप्त होगा।
चुनाव की तारीखों की घोषणा के साथ ही इन पांचों राज्यों में राजनीतिक दलों की सक्रियता, रैलियां, गठबंधन और उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है। आने वाले दिनों में चुनावी माहौल और भी गर्म होने के आसार हैं, क्योंकि सभी दल जनता को अपने पक्ष में करने के लिए पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में हैं।
दुर्ग / शौर्यपथ समाचार
छत्तीसगढ़ के दुर्ग शहर के लिए गौरव का क्षण तब सामने आया जब शहर के प्रतिष्ठित उद्योगपति एवं समाजसेवी मनीष पारख को अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पत्रिका Forbes India की प्रतिष्ठित सूची “Game-Changing Leaders” में स्थान मिला है। यह सम्मान उन्हें स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक विकास के क्षेत्रों में किए जा रहे उनके नवाचारी और प्रभावशाली कार्यों के लिए प्रदान किया गया है।
फोर्ब्स इंडिया द्वारा जारी इस सूची में देशभर के उन चुनिंदा व्यक्तित्वों को शामिल किया जाता है जिन्होंने अपने कार्यों और दूरदर्शी नेतृत्व से समाज में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में उल्लेखनीय योगदान दिया है। ऐसे में दुर्ग शहर के निवासी मनीष पारख का इस सूची में शामिल होना न केवल उनके लिए बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और विशेष रूप से दुर्ग जिले के लिए गर्व का विषय बन गया है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में उल्लेखनीय पहल
मनीष पारख मेघ गंगा ग्रुप के संस्थापक एवं चेयरमैन हैं। उनके नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में लाइफ केयर डायग्नोस्टिक सेंटर का संचालन किया जा रहा है, जो आधुनिक तकनीक और विश्वसनीय जांच सेवाओं के माध्यम से लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने की दिशा में कार्यरत है।
आज के समय में सटीक और समय पर जांच स्वास्थ्य सेवाओं की आधारशिला मानी जाती है। ऐसे में लाइफ केयर डायग्नोस्टिक सेंटर के माध्यम से मनीष पारख ने दुर्ग और आसपास के क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण डायग्नोस्टिक सेवाओं को सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है।
शिक्षा क्षेत्र में नए आयाम
स्वास्थ्य के साथ-साथ मनीष पारख शिक्षा के क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनकी संस्था Avish Educom के माध्यम से आधुनिक शिक्षा, कौशल विकास और नई पीढ़ी को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में उनकी पहल का उद्देश्य युवाओं को केवल डिग्री तक सीमित न रखकर उन्हें व्यावहारिक ज्ञान, तकनीकी दक्षता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप तैयार करना है।
“मोर शहर-मोर जिम्मेदारी” के तहत शहर सौंदर्यीकरण
मनीष पारख केवल उद्योग और संस्थागत विकास तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे दुर्ग शहर के सामाजिक और सांस्कृतिक विकास में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
“मोर शहर-मोर जिम्मेदारी” अभियान के तहत दुर्ग शहर के विभिन्न चौक-चौराहों के सौंदर्यीकरण और शहर की सुंदरता बढ़ाने के लिए वे लगातार पहल कर रहे हैं। उनका मानना है कि शहर की पहचान केवल विकास से नहीं बल्कि उसकी स्वच्छता, सौंदर्य और नागरिक जिम्मेदारी से भी बनती है।
फोर्ब्स में स्थान मिलने पर क्या बोले मनीष पारख
फोर्ब्स इंडिया की सूची में शामिल होने पर मनीष पारख ने इसे समाज के विश्वास और सहयोग का परिणाम बताया।
उन्होंने कहा –
“आप सभी के साथ और आपके विश्वास का यह परिणाम मेरे और मेरे परिवार के लिए हर्ष और उल्लास का विषय है। इस भरोसे को बनाए रखने के लिए मैं सदैव कर्तव्यबद्ध रहूँगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि यह सम्मान केवल उनका नहीं बल्कि उन सभी सहयोगियों, कर्मचारियों और समाज के लोगों का है जिन्होंने उनके प्रयासों पर विश्वास किया और साथ दिया।
समाज के लिए प्रेरणा
फोर्ब्स जैसी प्रतिष्ठित वैश्विक पत्रिका में नाम दर्ज होना इस बात का संकेत है कि दुर्ग जैसे शहरों से भी ऐसे नेतृत्व उभर रहे हैं जो राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहे हैं।
स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्रों में किए जा रहे मनीष पारख के कार्य न केवल स्थानीय समाज के लिए लाभकारी हैं बल्कि युवा उद्यमियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रहे हैं।
फोर्ब्स इंडिया की “Game-Changing Leaders” सूची में स्थान मिलने से यह स्पष्ट हो गया है कि दूरदर्शी सोच, सामाजिक प्रतिबद्धता और नवाचार के साथ किया गया कार्य किसी भी व्यक्ति को वैश्विक मंच तक पहुंचा सकता है।
नई दिल्ली / शौर्यपथ / ✈️
देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनियों में शामिल इंडिगो (IndiGo) ने विमान ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के चलते 14 मार्च 2026 से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर फ्यूल सरचार्ज लागू करने की घोषणा की है। इस फैसले के बाद हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों को अब पहले की तुलना में अधिक किराया देना होगा।
एयरलाइन कंपनी के अनुसार यह अतिरिक्त शुल्क नई टिकट बुकिंग पर ही लागू होगा, यानी 14 मार्च या उसके बाद बुक किए गए टिकटों पर यह सरचार्ज लिया जाएगा।
दूरी और सेक्टर के आधार पर बढ़ा किराया
इंडिगो द्वारा लागू किए गए फ्यूल सरचार्ज को यात्रा की दूरी और अंतरराष्ट्रीय सेक्टर के आधार पर तय किया गया है।
घरेलू उड़ानें और भारतीय उपमहाद्वीप: ₹425 प्रति सेक्टर
मिडल ईस्ट (Middle East): ₹900 प्रति सेक्टर
दक्षिण पूर्व एशिया और चीन: ₹1,800 प्रति सेक्टर
अफ्रीका और पश्चिम एशिया: ₹1,800 प्रति सेक्टर
यूरोप: ₹2,300 प्रति सेक्टर
इस निर्णय के बाद छोटी दूरी की उड़ानों से लेकर लंबी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों तक यात्रियों के किराए में वृद्धि देखने को मिलेगी।
ईंधन की कीमतों में 85% से अधिक उछाल
इंडिगो ने बताया कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और तनावपूर्ण हालात के कारण वैश्विक बाजार में एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में 85 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।
एयरलाइन उद्योग में ईंधन सबसे बड़ा खर्च माना जाता है। इंडिगो के अनुसार कुल परिचालन लागत का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा ईंधन पर ही खर्च होता है, जिसके कारण कंपनी को यह अतिरिक्त शुल्क लागू करना पड़ा।
पहले एयर इंडिया ने भी किया था ऐलान
गौरतलब है कि इंडिगो से पहले एयर इंडिया ने भी ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी को देखते हुए टिकटों पर फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने का फैसला किया था। अब इंडिगो के इस कदम के बाद अन्य एयरलाइनों के भी इसी दिशा में कदम उठाने की संभावना जताई जा रही है।
यात्रियों पर पड़ेगा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा की लागत बढ़ेगी, जिससे यात्रियों के बजट पर असर पड़ सकता है। हालांकि एयरलाइन कंपनियों का कहना है कि ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच परिचालन संतुलन बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी हो गया है।
✈️ विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और विमान ईंधन की कीमतें आगे भी बढ़ती रहीं, तो आने वाले समय में हवाई किराए में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
नई दिल्ली / शौर्यपथ /
भारतीय राजनीति और संवैधानिक व्यवस्था से जुड़ी एक महत्वपूर्ण घटना में तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संसद के दोनों सदनों में महाभियोग का नोटिस प्रस्तुत किया है। जानकारी के अनुसार, यह भारत के इतिहास में किसी मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग की पहल का पहला मामला माना जा रहा है।
इस प्रस्ताव को लेकर देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। टीएमसी और अन्य विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए यह कदम उठाया है।
ममता बनर्जी की पहल पर तैयार हुआ प्रस्ताव
सूत्रों के अनुसार इस महाभियोग प्रस्ताव की रणनीति और निर्णय पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी की पहल पर तैयार किया गया। टीएमसी का कहना है कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता और पारदर्शिता को बनाए रखना लोकतंत्र के लिए अत्यंत आवश्यक है और इसी उद्देश्य से यह प्रस्ताव लाया गया है।
193 सांसदों के हस्ताक्षर
महाभियोग प्रस्ताव पर कुल 193 सांसदों के हस्ताक्षर बताए जा रहे हैं, जिनमें
लोकसभा के 130 सांसद
राज्यसभा के 63 सांसद शामिल हैं।
संवैधानिक नियमों के अनुसार महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों और राज्यसभा में 50 सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं। इस लिहाज से प्रस्ताव को प्रारंभिक समर्थन की आवश्यक संख्या प्राप्त हो चुकी है।
17 विपक्षी दलों का समर्थन
टीएमसी के इस कदम को कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (SP), द्रमुक (DMK), आम आदमी पार्टी (AAP), शरद पवार की एनसीपी सहित लगभग 17 विपक्षी दलों का समर्थन बताया जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि हाल के समय में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कई प्रश्न खड़े हुए हैं, जिन्हें संसद के माध्यम से स्पष्ट किया जाना आवश्यक है।
लगाए गए गंभीर आरोप
विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण आचरण के आरोप लगाए हैं। इसके अलावा चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कई मुद्दों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
प्रमुख आरोपों में शामिल हैं –
चुनावी अनियमितताओं की जांच में कथित रूप से बाधा उत्पन्न करना
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव
बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने के आरोप
विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नाम काटने को लेकर आपत्ति
विपक्ष का दावा है कि इन मामलों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
क्या कहता है संविधान
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324(5) के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया अत्यंत कठिन और कठोर होती है। यह प्रक्रिया लगभग उसी प्रकार होती है जैसे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को पद से हटाने की प्रक्रिया।
इसके लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत आवश्यक होता है, जिसमें:
सदन के कुल सदस्यों का बहुमत
तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत का समर्थन शामिल होता है।
आगे की प्रक्रिया क्या होगी
अब यह महाभियोग नोटिस लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति के पास जाएगा। यदि वे इसे स्वीकार करते हैं तो आरोपों की जांच के लिए एक विशेष जांच समिति गठित की जा सकती है। समिति की रिपोर्ट के आधार पर संसद में आगे की कार्रवाई तय होगी।
राजनीतिक और संवैधानिक महत्व
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम केवल एक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई भर नहीं है, बल्कि इससे चुनाव आयोग की स्वायत्तता, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को लेकर व्यापक बहस छिड़ सकती है।
यदि यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो यह आने वाले समय में भारतीय लोकतंत्र और चुनावी प्रणाली के लिए एक महत्वपूर्ण संवैधानिक परीक्षण साबित हो सकता है।
लखनऊ।
उत्तर प्रदेश में आगामी दिनों में कई महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व और बड़ी प्रतियोगी परीक्षा आयोजित होने जा रही है। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक कर कानून-व्यवस्था को लेकर सख्त निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि सभी अधिकारी पूरी सतर्कता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें और यह सुनिश्चित करें कि सभी कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हों।
बैठक में मुख्यमंत्री ने बताया कि 13 मार्च को अलविदा की नमाज, 14 और 15 मार्च को उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा सब-इंस्पेक्टर एवं समकक्ष पदों की लिखित परीक्षा, 19 मार्च से चैत्र नवरात्र तथा 20-21 मार्च को ईद-उल-फितर मनाए जाने की संभावना है। इन सभी आयोजनों के कारण प्रदेश में बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही और धार्मिक गतिविधियां होंगी, इसलिए प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि त्योहारों के दौरान सांप्रदायिक सौहार्द और शांति बनाए रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए कि संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जाए, पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती हो और हर स्थिति पर सतत नजर रखी जाए।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने परीक्षा के दौरान पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि परीक्षा केंद्रों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखी जाए, ताकि परीक्षार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों से कहा कि त्योहारों और परीक्षाओं के इस संवेदनशील समय में प्रशासनिक समन्वय, सतर्कता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करना बेहद जरूरी है, ताकि प्रदेश में शांति और व्यवस्था कायम रहे।
रायपुर/नई दिल्ली / शौर्यपथ / प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 11 मार्च 2026 को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली से दो अमृत भारत एक्सप्रेस, दो एक्सप्रेस ट्रेन और एक पैसेंजर ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर देश को समर्पित करेंगे। साथ ही केरल के एर्णाकुलम से एक और पैसेंजर ट्रेन की शुरुआत की जाएगी। इन नई रेल सेवाओं से तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा और झारखंड के लाखों यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा।
प्रधानमंत्री इस अवसर पर पोदानूर–धनबाद अमृत भारत एक्सप्रेस और नागरकोइल–चारलापल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस को भी शुरू करेंगे। पोदानूर–धनबाद अमृत भारत एक्सप्रेस पहली बार कोयंबटूर के औद्योगिक क्षेत्र को झारखंड के कोयला और इस्पात क्षेत्र से सीधे जोड़ेगी, जिससे विशेष रूप से प्रवासी मजदूरों और उद्योगों को बड़ी सुविधा मिलेगी। वहीं नागरकोइल–चारलापल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस कन्याकुमारी और केरल-तमिलनाडु तट को तेलंगाना से जोड़ेगी, जिससे विद्यार्थियों, श्रमिकों और यात्रियों के लिए नई कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी।
इसके अलावा रामेश्वरम–मंगलुरु एक्सप्रेस और तिरुनेलवेली–मंगलुरु एक्सप्रेस ट्रेनें तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक के तीर्थयात्रियों और तटीय क्षेत्रों के यात्रियों को सीधी रेल सुविधा प्रदान करेंगी। साथ ही मयिलादुथुराई–तिरुवरूर–काराईकुडी पैसेंजर और पालक्काड–पोल्लाची पैसेंजर ट्रेन सेवाएं भी क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करेंगी।
इस कार्यक्रम के दौरान केरल के शोरनूर, कुट्टिप्पुरम और चंगनास्सेरी रेलवे स्टेशनों को अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत पुनर्विकसित कर राष्ट्र को समर्पित किया जाएगा। इसके साथ ही शोरनूर–निलांबुर रेलवे लाइन के विद्युतीकरण का भी उद्घाटन किया जाएगा, जिससे क्षेत्र में तेज, स्वच्छ और आधुनिक रेल सेवाएं सुनिश्चित होंगी।
अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को सामान्य और स्लीपर श्रेणी के यात्रियों के लिए किफायती और आधुनिक सुविधाओं के साथ तैयार किया गया है। इन ट्रेनों के शुरू होने से देश के विभिन्न औद्योगिक, तटीय और तीर्थ क्षेत्रों के बीच संपर्क मजबूत होगा और यात्रियों को बेहतर एवं तेज़ रेल सेवाओं का लाभ मिलेगा।
नई दिल्ली / शौर्यपथ / केंद्र सरकार ने किसानों के हित में बड़ा निर्णय लेते हुए प्राकृतिक गैस (आपूर्ति विनियमन) आदेश 2026 जारी किया है, जिसके तहत उर्वरक संयंत्रों को प्राकृतिक गैस आपूर्ति के लिए प्राथमिकता क्षेत्र में शामिल किया गया है। इस फैसले का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश में उर्वरक उत्पादन प्रभावित न हो और किसानों को समय पर खाद उपलब्ध हो सके।
सरकार के अनुसार उर्वरक संयंत्रों को उनके पिछले छह महीनों की औसत गैस खपत का कम से कम 70 प्रतिशत प्राकृतिक गैस उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे उत्पादन निरंतर जारी रह सके। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक LNG आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
उर्वरक विभाग ने बताया कि संभावित वैश्विक संकट को देखते हुए सरकार ने पहले से ही उर्वरकों का बड़ा बफर स्टॉक तैयार कर लिया है। 10 मार्च 2026 तक देश में कुल 180.12 लाख मीट्रिक टन उर्वरक भंडार उपलब्ध है, जो पिछले वर्ष इसी अवधि के 131.79 लाख मीट्रिक टन की तुलना में लगभग 36.6 प्रतिशत अधिक है। इसमें यूरिया 61.51 लाख मीट्रिक टन, डीएपी 25.17 लाख मीट्रिक टन और एनपीके 56.30 लाख मीट्रिक टन का प्रमुख योगदान है।
सरकार ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि खरीफ सीजन में उर्वरकों की किसी प्रकार की कमी नहीं होने दी जाएगी। इसके लिए आवश्यक शिपमेंट की व्यवस्था पहले ही कर ली गई है। फरवरी 2026 तक भारत 98 लाख मीट्रिक टन यूरिया का आयात कर चुका है और अगले तीन महीनों में 17 लाख मीट्रिक टन से अधिक यूरिया का अतिरिक्त आयात भी पाइपलाइन में है।
उर्वरक विभाग के अनुसार यह निर्णय किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने और खेती-किसानी को निर्बाध बनाए रखने की दिशा में सरकार की प्राथमिकता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
कोटा-बून्दी एयरपोर्ट का हुआ शिलान्यास, प्रधानमंत्री ने हाड़ौती क्षेत्र को दी बधाई
कोटा / एजेंसी / बहुप्रतीक्षित नए कोटा एयरपोर्ट का भूमि पूजन शनिवार को शंभुपुरा में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और केन्द्रीय मंत्री किंजारापु राममोहन नायडू ने किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी अपने वर्चुअल सम्बोधन में कोटा-बून्दी सहित हाड़ौतीवासियों को शुभकामनाएं दी।
श्री मोदी ने कहा कि पिछले दिनों वे अजमेर गए थे, जहां हजारों करोड़ रुपये के विकास प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण किया गया। उसी कार्यक्रम में राजस्थान के लगभग 21 हजार युवाओं को नियुक्ति पत्र भी सौंपे गए थे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अजमेर यात्रा के कुछ ही दिनों बाद उन्हें कोटा से जुड़े इस महत्वपूर्ण एयरपोर्ट प्रोजेक्ट को शुरू करने का अवसर मिला है। एक ही सप्ताह में राजस्थान के इन दो बड़े कार्यों की शुरुआत इस बात का संकेत है कि आज राजस्थान तेज गति से विकास की ओर बढ़ रहा इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर, किसानों और माताओं-बहनों के लिए योजनाएं, हर क्षेत्र में राजस्थान में तेजी से काम हो रहा है। आज का दिन कोटा, बूंदी, बारां एवं झालावाड़ सहित पूरे हाड़ौती क्षेत्र के लिए नई आशा और उपलब्धि का दिन है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि करीब 1500 करोड़ रुपये की लागत से बनने जा रहा यह एयरपोर्ट आने वाले समय में पूरे क्षेत्र के विकास को नई गति देगा। उन्होंने कहा कि नवंबर 2023 में जब वे कोटा आए थे, तब उन्होंने जनता से वादा किया था कि कोटा का एयरपोर्ट केवल सपना बनकर नहीं रहेगा, बल्कि उसे साकार किया जाएगा। आज वही क्षण आ गया है, जब कोटा एयरपोर्ट का निर्माण कार्य शुरू होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब तक कोटा के लोगों को फ्लाइट पकड़ने के लिए जयपुर एवं जोधपुर जाना पड़ता था। एयरपोर्ट शुरू होने के बाद यात्रा का समय कम होगा और व्यापार को भी गति मिलेगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कोटा ऊर्जा का भी एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां ऊर्जा के लगभग सभी स्रोतों से बिजली का उत्पादन होता है। हाड़ौती की धरती अपनी सांस्कृतिक और आर्थिक धरोहरों के लिए भी प्रसिद्ध है। कोटा की कचौरी, कोटा डोरिया साड़ी, सैंडस्टोन की चमक, यहां का धनिया और बूंदी के बासमती चावल की पहचान विदेशों तक है।
उन्होंने कहा कि कोटा की यह धरती आस्था का भी बड़ा केंद्र है। सदियों से देश-दुनिया के श्रद्धालु यहां श्री मथुराधीश जी पावन पीठ, श्री खड़े गणेश जी महाराज एवं श्री गोदावरी धाम के बालाजी जैसे पवित्र स्थलों के दर्शन के लिए आते रहे हैं। हवाई कनेक्टिविटी मिलने से इन सभी धार्मिक और पर्यटन स्थलों को भी नया लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि कोटा एयरपोर्ट बनने से हाड़ौती क्षेत्र में पर्यटन, व्यापार, उद्योग और शिक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुलेंगी और यह क्षेत्र विकास की नई ऊंचाइयों को छुएगा।
इस संदर्भ में लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला की सराहना करते हुए श्री मोदी ने कहा कि वे जितने शानदार सांसद हैं, उतने ही बेहतरीन लोकसभा अध्यक्ष भी हैं। वे संविधान को पूरी तरह समर्पित हैं और संसदीय प्रणालियों के प्रति पूरी तरह निष्ठा रखते हैं। बिरला जी ऐसे स्पीकर महोदय हैं, जो सांसदों का सर्वाधिक सम्मान करने का स्वभाव रखते हैं। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि कभी-कभी कुछ बड़े घरानों के अहंकारी, उत्पाती छात्र आ भी जाते हैं, तो भी वे सदन के मुखिया की तरह सबको संभालते हैं। वे किसी को भी अपमानित नहीं करते, सबके कड़वे बोल भी वो झेल लेते हैं।
कोटा विकास की नई इबारत लिखेगा: लोक सभा अध्यक्ष
लोकसभा स्पीकर एवं कोटा-बूंदी सांसद ओम बिरला ने अपने संबोधन में कहा कि कोटा की जनता का बहुप्रतीक्षित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का सपना साकार होने जा रहा है। कोटा एयरपोर्ट के निर्माण में कई बाधाएं आई लेकिन प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में आज हाड़ौती को बड़ी सौगात मिली है। उन्होनें कहा कि कोटा में इंडस्ट्रीज लाने के लिए मैं कई बार उद्यमियों से मिलता था लेकिन एयरपोर्ट नहीं होने से वे पीछे हट जाते हैं। वर्ष 2027 में एयरपोर्ट बनने के बाद कोटा विकास की नई इबारत लिखेगा। इडस्ट्रीज के आने के साथ ही आईटी सेक्टर भी कोटा में विकसित होगा, पर्यटन क्षेत्र में नए आयाम विकसित होंगे।
बड़ा औद्योगिक केन्द्र बनेगा कोटा - सीएम, राजस्थान
सीएम भजनलाल शर्मा ने कहा कि कोटा रेल व सड़क के साथ अब एयर से भी जुड़ने जा रहा है। यहां पानी प्रचुर मात्रा में है और आने वाले समय में कोटा शिक्षा के साथ-साथ उद्यम के क्षेत्र में भी अग्रणी रहने वाला है। कनेक्टिविटी बढ़ने से औद्योगिक क्षेत्र भी विकसित होगा। देश के कोने-कोने से लोग कोटा पहुंचेंगे। राजस्थान में सरकार के आने के साथ ही हमने रोड मैप बनाया था। प्रधानमंत्री मोदी के निर्देशन में सरकार लगातार काम कर रही है। राइजिंग राजस्थान के तहत 35 लाख करोड़ के एमओयू किए। जिसमें से 8 लाख करोड़ रूपए के एमओयू हमने धरातल पर उतार दिए। इससे 3 लाख युवाओं को रोजगार मिला है।
कोटा पूरे देश से कह रहा - पधारो सा
शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नागरिक उड्डयन मंत्री किंजारापु राममोहन नायडू ने कहा कि एयरपोर्ट के बाद कोटा की रेल व सड़क के साथ-साथ एयर कनेक्टिविटी भी पूरे देश से हो जाएगा। ऐसा लग रहा है कि मानो कोटा पूरे देश से कह रहा हो कि पधारो सा। प्रधानमंत्री श्री मोदी के विजन में देश में हर 45 दिन में एक नया एयरपोर्ट खुल रहा है। उन्होनें कहा कि करीब 440 हैक्टर क्षेत्रफल में 3 हजार 200 मीटर लंबे रनवे के साथ 1507 करोड़ रुपए की लागत से नए कोटा-बूंदी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का निर्माण किया जा रहा है। श्री नायडू ने कहा कि एयरपोर्ट के खुलने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। कोटा में पर्यटन, शिक्षा सहित सभी सेक्टर्स में वृद्धि होगी।
पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। लगभग दो दशकों तक राज्य की सत्ता संभालने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 5 मार्च 2026 को राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल कर दिया, जिसके बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनने की चर्चा तेज हो गई है। उनके इस निर्णय को जहां वे अपनी व्यक्तिगत संसदीय यात्रा की अधूरी इच्छा से जोड़ रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक रणनीति और जनादेश के साथ विश्वासघात बता रहा है।
नीतीश कुमार ने अपने इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया के माध्यम से स्पष्ट किया कि उनकी लंबे समय से इच्छा थी कि वे बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों (विधानसभा और विधान परिषद) और संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सदस्य रहें।
वे पहले ही तीन सदनों के सदस्य रह चुके हैं, इसलिए राज्यसभा जाना उनकी इस राजनीतिक यात्रा को पूर्ण करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने से बिहार की सत्ता संरचना में बड़ा बदलाव संभव है। करीब 20 वर्षों तक मुख्यमंत्री रहने के बाद उनके पद छोड़ने से भाजपा को बिहार में अपना मुख्यमंत्री बनाने का अवसर मिल सकता है।
सूत्रों के अनुसार यह कदम भाजपा और जदयू के बीच हुए बड़े राजनीतिक समझौते का हिस्सा भी माना जा रहा है।
इस घटनाक्रम के बीच यह भी चर्चा तेज है कि नीतीश कुमार अपने बेटे निशांत कुमार को सक्रिय राजनीति में उतारने की तैयारी कर रहे हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि उन्हें जदयू में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है और नई सरकार में उपमुख्यमंत्री पद भी मिल सकता है।
नीतीश कुमार ने कहा है कि मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी वे नई सरकार को अपना सहयोग और मार्गदर्शन देते रहेंगे और गठबंधन की मजबूती के लिए काम करेंगे।
नीतीश कुमार के इस फैसले पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने इसे बिहार में “महाराष्ट्र जैसा खेल” बताते हुए आरोप लगाया कि भाजपा ने सत्ता परिवर्तन की रणनीति के तहत यह कदम उठाया है।
वहीं आरजेडी के राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा ने इसे “Kidnapping with consent” यानी “सहमति से अपहरण” की संज्ञा दी।
विपक्ष का कहना है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में जनता से नीतीश कुमार के चेहरे पर वोट मांगे गए थे, ऐसे में बीच कार्यकाल में उनका पद छोड़ना जनता के जनादेश के साथ विश्वासघात है।
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि बिहार विधानसभा में अब भाजपा के विधायक जदयू से अधिक (भाजपा 85, जदयू 77) हैं। ऐसे में भाजपा लंबे समय से राज्य में अपना मुख्यमंत्री बनाने की इच्छुक थी और यह घटनाक्रम उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा जा रहा है कि स्वास्थ्य संबंधी कारणों से भी नीतीश कुमार सक्रिय प्रशासनिक जिम्मेदारी से पीछे हटना चाहते थे।
वहीं उनके इस अचानक फैसले से जदयू कार्यकर्ताओं में भी असंतोष देखने को मिला और पटना में पार्टी कार्यालय के बाहर कुछ कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन भी किया।
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की स्थिति में बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर भाजपा खेमे में कई नाम चर्चा में हैं।
मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं —
1. सम्राट चौधरी – वर्तमान उपमुख्यमंत्री और भाजपा के मजबूत ओबीसी चेहरा, जिन्हें सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है।
2. नित्यानंद राय – केंद्रीय गृह राज्य मंत्री और अमित शाह के करीबी नेता, यादव समुदाय से आने के कारण सामाजिक समीकरण में महत्वपूर्ण।
3. विजय कुमार सिन्हा – वर्तमान उपमुख्यमंत्री और विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष, संगठन व प्रशासनिक अनुभव के कारण मजबूत विकल्प।
4. दिलीप कुमार जायसवाल – बिहार सरकार में मंत्री और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री पद भाजपा के पास रह सकता है, जबकि जदयू को दो उपमुख्यमंत्री पद दिए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।
बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों के लिए चुनाव 16 मार्च 2026 को होना तय है।
नामांकन की अंतिम तिथि 5 मार्च थी और कुल 6 उम्मीदवारों ने पर्चा दाखिल किया है, जिससे चुनाव रोचक होने की संभावना बढ़ गई है।
एनडीए ने अपनी ओर से 5 उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं —
नीतीश कुमार (JD-U)
नितिन नबीन (BJP)
शिवेश कुमार राम (BJP)
रामनाथ ठाकुर (JD-U)
उपेन्द्र कुशवाहा (RLM)
वहीं आरजेडी ने पांचवीं सीट के लिए अपना उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है, हालांकि संख्या बल के लिहाज से एनडीए की स्थिति मजबूत मानी जा रही है।
ये सीटें हरिवंश नारायण सिंह, रामनाथ ठाकुर, प्रेमचंद गुप्ता, अमरेंद्र धारी सिंह और उपेंद्र कुशवाहा का कार्यकाल पूरा होने के कारण रिक्त हो रही हैं।
राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कम से कम 41 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है।
एनडीए के पास चार सीटें जीतने का स्पष्ट गणित मौजूद है, जबकि पांचवीं सीट को लेकर मुकाबला दिलचस्प हो सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार का राज्यसभा की ओर यह कदम केवल व्यक्तिगत संसदीय यात्रा का विस्तार नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत भी साबित हो सकता है। अब सबकी नजर भाजपा नेतृत्व के अंतिम निर्णय और बिहार के अगले मुख्यमंत्री के नाम पर टिकी हुई है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
