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April 11, 2026
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भारत

भारत (989)

संभल / लखनऊ।

   संभल में नवंबर 2024 की जामा मस्जिद सर्वे हिंसा से जुड़े बहुचर्चित मामले में न्यायपालिका ने बड़ा और दूरगामी असर डालने वाला आदेश दिया है। चंदौसी स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) विभांशु सुधीर की अदालत ने 13 जनवरी 2026 को तत्कालीन क्षेत्राधिकारी अनुज चौधरी (वर्तमान में एएसपी), इंस्पेक्टर अनुज तोमर तथा 15–20 अन्य अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश जारी किया है।

24 वर्षीय युवक को गोली लगने का आरोप

यह आदेश यामीन, निवासी खग्गू सराय अंजुमन, की याचिका पर दिया गया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि 24 नवंबर 2024 को संभल की जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान भड़की हिंसा के समय उनका 24 वर्षीय बेटा आलम, जो बिस्कुट और रस बेचने घर से निकला था, को पुलिस द्वारा कथित रूप से गोली मारी गई। गोली लगने से आलम गंभीर रूप से घायल हो गया था।

याचिका में दावा किया गया है कि युवक हिंसा में शामिल नहीं था, इसके बावजूद पुलिस ने उस पर फायरिंग की।

अखिलेश यादव का भाजपा पर हमला

कोर्ट के आदेश के बाद इस मामले ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह आदेश पुलिस अधिकारियों के लिए चेतावनी है। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा—

“अब कोई बचाने नहीं आएगा। भाजपा का फॉर्मूला है—पहले इस्तेमाल करो, फिर बर्बाद करो।”

पुलिस ने आदेश मानने से किया इनकार

वहीं, संभल पुलिस प्रशासन ने इस न्यायिक आदेश को मानने से फिलहाल इनकार कर दिया है। संभल के पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने अदालत के आदेश को “अवैध” बताते हुए कहा कि इस पूरे मामले की न्यायिक जांच पहले ही पूरी हो चुकी है, जिसमें पुलिस को क्लीन चिट दी जा चुकी है।

एसपी ने स्पष्ट किया कि पुलिस इस आदेश को ऊपरी अदालत में चुनौती देगी

हिंसा की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि 24 नवंबर 2024 को संभल में जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हिंसा भड़क गई थी। इस दौरान पत्थरबाजी और गोलीबारी की घटनाएं सामने आई थीं, जिसमें 5 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई पुलिसकर्मी और नागरिक घायल हुए थे। यह मामला प्रदेश भर में कानून-व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई को लेकर लंबे समय तक चर्चा में रहा।

कानूनी और प्रशासनिक टकराव

इस प्रकरण में अब न्यायपालिका के आदेश और पुलिस प्रशासन के रुख के बीच स्पष्ट टकराव नजर आ रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला न केवल कानूनी बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी बड़ा मुद्दा बनने की संभावना जता रहा है।

नई दिल्ली।
भारत–चीन संबंधों में तनाव के दौर के बीच राजनीतिक संवाद की दिशा में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। 12 जनवरी 2026 को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली स्थित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मुख्यालय का दौरा किया और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की।

चीनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सन हैयान ने किया

चीनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व CPC के अंतरराष्ट्रीय विभाग (IDCPC) की उप-मंत्री सन हैयान (Sun Haiyan) ने किया। बैठक में भारत में चीन के राजदूत जू फीहोंग (Xu Feihong) भी उपस्थित रहे। इस मुलाकात को कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर 2020 के गलवान संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में आई तल्खी के संदर्भ में।

भाजपा की ओर से अरुण सिंह और विजय चौथाईवाले शामिल

भाजपा की ओर से राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह और विदेश मामलों के विभाग के प्रभारी विजय चौथाईवाले ने प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। बैठक के दौरान दोनों राजनीतिक दलों के बीच संवाद और संपर्क बढ़ाने (Inter-party Communication) के उपायों पर चर्चा की गई।

भाजपा नेताओं ने इसे औपचारिक, संस्थागत और पारदर्शी संवाद बताते हुए कहा कि राजनीतिक दलों के बीच बातचीत अंतरराष्ट्रीय संबंधों को बेहतर समझने में सहायक होती है।

RSS और अन्य दलों से भी मुलाकात

अपने भारत दौरे के दौरान चीनी प्रतिनिधिमंडल ने 13 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले से भी मुलाकात की। इसके अलावा प्रतिनिधिमंडल ने कांग्रेस के विदेश विभाग के प्रमुख सलमान खुर्शीद तथा वामपंथी दलों के नेताओं से भी अलग-अलग बैठकें कीं।

कांग्रेस ने भाजपा पर लगाया ‘दोगलेपन’ का आरोप

इस मुलाकात को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस नेताओं ने भाजपा पर “दोगलापन” का आरोप लगाते हुए कहा कि एक ओर चीन को लेकर सख्त बयान दिए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर पार्टी स्तर पर बैठकें की जा रही हैं। कांग्रेस ने बैठक के एजेंडे और चर्चा के बिंदुओं को सार्वजनिक करने की मांग की है।

भाजपा का जवाब

भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह बैठक किसी गुप्त एजेंडे के तहत नहीं बल्कि राजनीतिक दलों के बीच सामान्य कूटनीतिक संवाद का हिस्सा थी। पार्टी का कहना है कि संवाद से पीछे हटना समाधान नहीं है और ऐसे संपर्क वैश्विक राजनीति में सामान्य प्रक्रिया हैं।

राजनीतिक और कूटनीतिक मायने

विशेषज्ञों के अनुसार, यह बैठक ऐसे समय हुई है जब भारत–चीन संबंध अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। ऐसे में यह संवाद भविष्य की कूटनीतिक दिशा, राजनीतिक संदेश और आंतरिक राजनीति—तीनों स्तरों पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

नई दिल्ली/कोलकाता।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच चल रहा कानूनी टकराव अब देश की शीर्ष अदालत तक पहुंच चुका है। 14 और 15 जनवरी 2026 को कलकत्ता उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई ने इस विवाद को संवैधानिक, प्रशासनिक और राजनीतिक संकट के रूप में स्थापित कर दिया है।


कलकत्ता हाई कोर्ट: TMC की याचिका खारिज, ED ने लगाए गंभीर आरोप

14 जनवरी 2026 को कलकत्ता उच्च न्यायालय में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका में मांग की गई थी कि I-PAC कार्यालय पर छापेमारी के दौरान जब्त किए गए पार्टी के संवेदनशील चुनावी डेटा को सुरक्षित रखा जाए।

हालांकि, ED के वकील ने अदालत को स्पष्ट किया कि छापेमारी के दौरान कोई भी डेटा या दस्तावेज जब्त नहीं किया गया। इस बयान के बाद न्यायमूर्ति सुभ्रा घोष ने TMC की याचिका को निपटा दिया।

इसी सुनवाई के दौरान ED ने अभूतपूर्व और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कोयला तस्करी मामले की जांच के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं I-PAC कार्यालय पहुंचीं और जांच से जुड़े अहम सबूत—एक लैपटॉप और एक ‘हरा फोल्डर’—अपने साथ ले गईं।

ED ने इसे जांच में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप बताते हुए मुख्यमंत्री और राज्य के शीर्ष पुलिस अधिकारियों के खिलाफ CBI जांच की मांग की। लेकिन, चूंकि इसी विषय पर ED पहले ही सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा चुकी थी, इसलिए हाई कोर्ट ने अपनी कार्यवाही स्थगित कर दी।


सुप्रीम कोर्ट: FIR पर रोक, CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश

15 जनवरी 2026 को मामला सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए आया। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने इस मामले को “अत्यंत गंभीर” करार दिया।

शीर्ष अदालत ने—

  • मुख्यमंत्री ममता बनर्जी,

  • पश्चिम बंगाल सरकार,

  • पुलिस महानिदेशक (DGP) और

  • कोलकाता पुलिस कमिश्नर

को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा ED अधिकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR पर तत्काल अंतरिम रोक लगा दी और स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक ED अधिकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी।

कोर्ट ने राज्य सरकार को यह भी आदेश दिया कि 8 जनवरी 2026 को I-PAC कार्यालय और उसके आसपास की सभी CCTV फुटेज व इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं, ताकि सबूतों से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न हो।


अदालत की कड़ी टिप्पणियाँ

सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि—

“केंद्रीय जांच एजेंसियों के काम में राज्य एजेंसियों का हस्तक्षेप अराजकता (lawlessness) की स्थिति पैदा कर सकता है।”

ED की ओर से अदालत में कहा गया कि यह मामला केवल ‘दखल’ का नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री द्वारा की गई ‘चोरी’ और ‘डकैती’ का है, क्योंकि वह सशस्त्र पुलिस बल के साथ जांच में बाधा डालने पहुंचीं।

वहीं, मुख्यमंत्री की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि ममता बनर्जी वहां पार्टी के गोपनीय और संवेदनशील डेटा की सुरक्षा के लिए गई थीं और ED की कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण व राजनीतिक रूप से प्रेरित है।


अब क्या तय करेगा सुप्रीम कोर्ट?

सुप्रीम कोर्ट अब इस मूल प्रश्न पर विचार करेगा कि—

  • क्या किसी मुख्यमंत्री का छापेमारी स्थल पर पहुंचना,

  • और वहां से कथित रूप से दस्तावेज ले जाना,
    कानूनी रूप से “जांच में बाधा” और आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता है या नहीं।

मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी 2026 को निर्धारित की गई है।


राजनीतिक और संवैधानिक मायने

यह मामला केवल कानून तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह केंद्र बनाम राज्य, संवैधानिक मर्यादा, और जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। आने वाली सुनवाई देश की राजनीति और संघीय ढांचे के लिए दूरगामी प्रभाव डाल सकती है।

नई दिल्ली / : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया पूरी करने जा रही है। वर्तमान कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन 19 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे। चुनाव की औपचारिक घोषणा अगले दिन, 20 जनवरी, को की जाएगी।

नामांकन प्रक्रिया के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह प्रस्तावक के रूप में मौजूद रहेंगे। नितिन नबीन वर्तमान में भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष हैं और बिहार की बांकेपुर सीट से पांच बार विधायक रह चुके हैं। 46 वर्ष की आयु में वे भाजपा के इतिहास के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेंगे।

भाजपा के संविधान के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नामांकन हेतु किसी भी व्यक्ति के पास कम से कम 15 वर्षों की सदस्यता और 12 वर्षों का सक्रिय कार्यकाल होना आवश्यक है। इसके अलावा, नामांकन के लिए कम से कम 5 राज्यों की प्रदेश परिषदों के 20 सदस्यों का संयुक्त प्रस्तावक होना अनिवार्य है।

वर्तमान में नितिन नबीन सबसे प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। पूर्व में वरिष्ठ नेताओं धर्मेंद्र प्रधान, शिवराज सिंह चौहान और भूपेंद्र यादव के नाम चर्चा में रहे थे, लेकिन कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद अन्य दावेदारों द्वारा नामांकन की संभावना कम है।

इस चुनाव में छत्तीसगढ़ की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में प्रदेश इकाइयों की सक्रिय भागीदारी होती है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव 19 जनवरी को दिल्ली में होने वाली नामांकन प्रक्रिया में उपस्थित रहेंगे। नितिन नबीन लंबे समय तक छत्तीसगढ़ के प्रदेश प्रभारी रहे हैं और उनके कार्यकाल में भाजपा ने राज्य में सत्ता वापसी की थी। उनके अध्यक्ष बनने से राज्य भाजपा में उत्साह देखा जा रहा है।

चुनाव के बाद छत्तीसगढ़ को नया प्रदेश प्रभारी मिलने की संभावना है, क्योंकि नितिन नबीन अब राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी संभालेंगे।

नई दिल्ली | 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए 13 जनवरी 2026 का दिन राजनयिक गतिविधियों, राष्ट्रनिर्माण से जुड़े संवाद और सांस्कृतिक उत्सवों के संदेशों से भरपूर रहा। इस दिन उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति से लेकर युवाओं के सशक्तिकरण और भारतीय परंपराओं के उत्सव तक कई अहम कार्यक्रमों में सहभागिता की।

फ्रांस के राष्ट्रपति के सलाहकार से अहम मुलाकात

प्रधानमंत्री मोदी ने नई दिल्ली में फ्रांस के राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार मिस्टर इमैनुएल बोने से मुलाकात की। इस दौरान भारत–फ्रांस रणनीतिक साझेदारी, वैश्विक मुद्दों और द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने पर विचार-विमर्श हुआ। यह बैठक दोनों देशों के बीच गहरे होते कूटनीतिक संबंधों का संकेत मानी जा रही है।

लोहड़ी पर देशवासियों को शुभकामनाएं

प्रधानमंत्री ने लोहड़ी के पावन अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए समृद्धि, खुशहाली और एकता का संदेश दिया। उन्होंने इस पर्व को कृषि, प्रकृति और सामूहिक उत्सव का प्रतीक बताया।

‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026’ में युवाओं को संदेश

पीएम मोदी ने नई दिल्ली में आयोजित ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026’ में दिए गए अपने संबोधन की झलकियां साझा कीं। उन्होंने युवाओं को विकसित भारत के संकल्प में भागीदार बनने का आह्वान करते हुए नेतृत्व, नवाचार और राष्ट्रसेवा पर जोर दिया।

संस्कृत सुभाषित से प्रेरणा

प्रधानमंत्री ने नागरिकों को उच्च उद्देश्यों के लिए प्रेरित करते हुए एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें आत्मविश्वास, परिश्रम और जागरूकता के साथ आगे बढ़ने का संदेश निहित था।

भारत–जर्मनी संबंधों में नई ऊर्जा

इसी दिन जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की भारत यात्रा का समापन हुआ। इससे पहले 12 जनवरी को प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर मर्ज़ ने अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट पर आयोजित पतंग उत्सव में भाग लिया था। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता भी हुई, जिसमें व्यापार, तकनीक और रणनीतिक सहयोग को लेकर सहमति बनी।


समग्र संदेश

13 जनवरी का दिन प्रधानमंत्री मोदी की सक्रिय कार्यशैली को दर्शाता है, जहां एक ओर वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को सशक्त किया गया, वहीं दूसरी ओर युवाओं, संस्कृति और परंपराओं को भी समान महत्व दिया गया।

नई दिल्ली। उत्तर भारत इन दिनों कड़ाके की ठंड और घने कोहरे की चपेट में है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, दिल्ली समेत कई मैदानी इलाकों में बारिश की संभावना जताई गई है, जिससे ठिठुरन और बढ़ सकती है।

ताजा स्थिति

मौसम विभाग ने दिल्ली में शीतलहर और अत्यंत कम दृश्यता के चलते रेड अलर्ट जारी किया है। कई इलाकों में दृश्यता शून्य के करीब पहुंच गई है। लोगों को केवल आवश्यक होने पर ही बाहर निकलने की सलाह दी गई है।

पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के बड़े हिस्से घने कोहरे की चादर में ढके हुए हैं। कोहरे के कारण रेल, सड़क और हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई ट्रेनें देरी से चल रही हैं, जबकि अनेक उड़ानें रद्द या विलंबित की गई हैं।

बारिश और बर्फबारी का अनुमान

पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। वहीं हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में भारी बर्फबारी का अनुमान जताया गया है।

तापमान में गिरावट

शीतलहर के चलते कई शहरों में न्यूनतम तापमान गिरकर 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।

सावधानी की अपील

मौसम विभाग ने लोगों से वाहन चलाते समय फॉग लाइट के इस्तेमाल, धीमी गति बनाए रखने और ठंड से बचाव के लिए गर्म कपड़े पहनने की अपील की है। यात्रियों को उड़ान और ट्रेन की स्थिति जानने के लिए मौसम विभाग व संबंधित विभागों की आधिकारिक सूचनाएं देखने की सलाह दी गई है।

अहमदाबाद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव के उद्घाटन के दौरान जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ के साथ भगवान हनुमान की तस्वीर वाली पतंग उड़ाए जाने को लेकर देश में सियासी और सामाजिक बहस तेज हो गई है। जहां विपक्ष और कुछ वर्ग इसे धार्मिक भावनाओं से जोड़कर आपत्ति जता रहे हैं, वहीं समर्थक इसे सांस्कृतिक कूटनीति और परंपराओं के सम्मान से जोड़कर देख रहे हैं।

क्या है पूरा मामला

12 जनवरी 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने गुजरात दौरे पर अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट पहुंचे, जहां उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव का उद्घाटन किया। इस मौके पर जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ भी मौजूद थे, जो दो दिवसीय भारत यात्रा पर आए थे। कार्यक्रम के दौरान दोनों नेताओं ने एक बड़ी पतंग उड़ाई, जिस पर भगवान हनुमान का चित्र अंकित था। यह दृश्य सामने आते ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

आलोचना क्यों हो रही है

इस घटना को लेकर विपक्षी दलों और कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि भगवान हनुमान करोड़ों हिंदुओं के आराध्य हैं और उनकी तस्वीर को पतंग के रूप में उड़ाना, फिर पतंगबाजी के बाद उसका क्या होता है, यह धार्मिक भावनाओं का अपमान है।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया:
उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने इस कदम को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताते हुए कहा कि यह सनातन धर्मियों की आस्था का अपमान है। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।

सोशल मीडिया पर बहस:
कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि क्या किसी पूजनीय देवता की तस्वीर को पतंग पर दर्शाना उचित है। कुछ ने यह भी तर्क दिया कि यदि यही कार्य किसी विपक्षी नेता द्वारा किया गया होता, तो भारतीय जनता पार्टी और दक्षिणपंथी संगठनों की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आती।

समर्थन में क्या दलीलें दी जा रही हैं

विवाद के बीच बड़ी संख्या में लोग और विश्लेषक इस कदम का समर्थन भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि—

  • यह आयोजन सांस्कृतिक कूटनीति (Cultural Diplomacy) का हिस्सा था, जिसके जरिए भारत ने अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक प्रतीकों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया।

  • हनुमान जी की आकृति वाली पतंग को भारत-जर्मनी के बीच बढ़ते सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंधों के प्रतीक के रूप में देखा जाना चाहिए।

  • कुछ समर्थकों ने धार्मिक संदर्भ देते हुए कहा कि भगवान हनुमान पवन पुत्र हैं, ऐसे में उनका हवा में प्रतीकात्मक रूप से होना स्वाभाविक और सकारात्मक संदेश देता है।

कूटनीतिक संदर्भ भी अहम

यह आयोजन ऐसे समय में हुआ जब भारत और जर्मनी की रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य व्यापार, निवेश, हरित प्रौद्योगिकी और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करना है। ऐसे में यह प्रतीकात्मक कार्यक्रम केवल सांस्कृतिक नहीं, बल्कि कूटनीतिक संदेश देने वाला भी माना जा रहा है।

 अहमदाबाद पतंग महोत्सव की यह घटना एक बार फिर यह दिखाती है कि भारत में संस्कृति, धर्म और राजनीति कितनी गहराई से एक-दूसरे से जुड़े हैं। जहां एक पक्ष इसे आस्था का विषय मानकर आलोचना कर रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे परंपरा और कूटनीति के संगम के रूप में देख रहा है। फिलहाल यह मुद्दा सार्वजनिक विमर्श का केंद्र बना हुआ है और आने वाले दिनों में राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

 
 
 

नई दिल्ली।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026 का मूल उद्देश्य ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को साकार करने की दिशा में एक ठोस, अनुशासित और परिणामोन्मुख आर्थिक रोडमैप तैयार करना है। बजट में जहां एक ओर राजकोषीय अनुशासन को प्राथमिकता दी गई है, वहीं दूसरी ओर दीर्घकालिक विकास के लिए आवश्यक क्षेत्रों में संसाधनों के कुशल आवंटन पर विशेष जोर दिखाई देता है।

राजकोषीय सुदृढ़ीकरण: मजबूत अर्थव्यवस्था की बुनियाद
वित्त मंत्री और उनकी टीम ने बजट 2026 में राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखने की स्पष्ट प्रतिबद्धता दोहराई है। सरकार का मानना है कि संतुलित घाटा ही निवेशकों का भरोसा बनाए रखता है और महंगाई पर नियंत्रण में सहायक होता है। बजट से जुड़े आधिकारिक आंकड़े और नीति विवरण पीआईबी (PIB) के माध्यम से सार्वजनिक किए जा रहे हैं, जिससे नीतिगत पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

पूंजीगत व्यय पर जोर: इंफ्रास्ट्रक्चर बनेगा ग्रोथ इंजन
बजट 2026 में पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) को आर्थिक विकास का प्रमुख इंजन माना गया है। सड़क, रेल, लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा और शहरी बुनियादी ढांचे में निवेश को प्राथमिकता देकर सरकार रोजगार सृजन, निजी निवेश को प्रोत्साहन और उत्पादकता बढ़ाने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार यह दृष्टिकोण मध्यम और दीर्घकाल में अर्थव्यवस्था को स्थायी गति देने में सहायक होगा।

पारदर्शिता और जवाबदेही: हर रुपये का डिजिटल हिसाब
डिजिटल गवर्नेंस को और मजबूत करते हुए बजट में ‘हर रुपये का हिसाब’ सुनिश्चित करने की नीति अपनाई गई है। सरकारी योजनाओं और खर्चों की विस्तृत जानकारी बजट इंडिया पोर्टल पर उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे नागरिकों को यह पता चल सके कि करदाताओं का पैसा कहां और कैसे खर्च हो रहा है। इससे न केवल भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा, बल्कि योजनाओं का लाभ सीधे लक्षित लाभार्थियों तक पहुंचेगा।

समावेशी विकास: मानव पूंजी पर निवेश
‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए बजट 2026 में शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास को केंद्र में रखा गया है। सरकार का फोकस ऐसी मानव पूंजी तैयार करने पर है जो वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत को अग्रणी बना सके। ग्रामीण-शहरी अंतर को कम करने और वंचित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने की मंशा भी बजट की प्राथमिकताओं में स्पष्ट झलकती है।

2047 का रोडमैप
वित्त मंत्रालय की टीम का मानना है कि राजकोषीय अनुशासन + पूंजी निवेश + पारदर्शी शासन + समावेशी विकास—इन चार स्तंभों पर आधारित यह बजट भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाएगा।
कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट 2026 केवल एक साल का आय-व्यय विवरण नहीं, बल्कि आने वाले दो दशकों के लिए भारत की आर्थिक दिशा तय करने वाला दस्तावेज़ बनकर सामने आया है।

कोलकाता।
कोलकाता में 8 जनवरी 2026 को राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के ठिकानों पर हुई प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी ने अब गंभीर कानूनी और राजनीतिक संकट का रूप ले लिया है। यह मामला कलकत्ता हाई कोर्ट से होते हुए सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुँच चुका है, जहाँ केंद्र की जांच एजेंसी और पश्चिम बंगाल सरकार आमने-सामने खड़ी नजर आ रही हैं।

क्या है पूरा मामला

ED ने वर्ष 2020 के कोयला तस्करी प्रकरण से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत कोलकाता स्थित I-PAC कार्यालय और इसके निदेशक प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी की थी। ED का दावा है कि छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मौके पर पहुँचीं और जांच में हस्तक्षेप करते हुए कुछ डिजिटल उपकरण व दस्तावेज अपने साथ ले गईं।

वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ED आगामी 2026 विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) का गोपनीय राजनीतिक डेटा हासिल करने की कोशिश कर रही थी। उन्होंने इस कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया।

हाई कोर्ट में हंगामा, सुनवाई टली

ED ने मुख्यमंत्री के खिलाफ FIR दर्ज कराने और मामले की CBI जांच की मांग को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया।
9 जनवरी 2026 को सुनवाई के दौरान वकीलों के बीच तीखी नोक-झोंक और हंगामे के चलते कार्यवाही बाधित हो गई। इसके बाद जस्टिस सुभ्रा घोष ने मामले की अगली सुनवाई 14 जनवरी 2026 तक के लिए स्थगित कर दी।

सुप्रीम कोर्ट में सीधी दस्तक

हाई कोर्ट में सुनवाई टलने के बाद ED ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी। एजेंसी का तर्क है कि जब राज्य की शीर्ष राजनीतिक कार्यपालिका पर ही हस्तक्षेप के आरोप हों, तब निष्पक्ष जांच केवल CBI से ही संभव है।

इधर, संभावित याचिका को भांपते हुए पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पहले ही कैविएट दाखिल कर दी थी। इसका सीधा अर्थ है कि राज्य सरकार का पक्ष सुने बिना शीर्ष अदालत कोई भी एकतरफा आदेश पारित नहीं कर सकती।

ताज़ा घटनाक्रम: पुलिस बनाम ED

मामले ने नया मोड़ तब लिया जब कोलकाता पुलिस ने ED अधिकारियों के खिलाफ भी मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। पुलिस ने प्रतीक जैन के आवास से CCTV फुटेज जब्त किए हैं, जिन्हें छापेमारी के दौरान की घटनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है।
यह स्थिति अभूतपूर्व मानी जा रही है, जहाँ एक केंद्रीय जांच एजेंसी और राज्य पुलिस आमने-सामने आ गई हैं।

राजनीतिक तापमान चरम पर

तृणमूल कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को चुनावी साजिश करार देते हुए इसे अपने राजनीतिक अभियान का हिस्सा बना लिया है। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर राज्य की राजनीति को प्रभावित करना चाहती है। वहीं, विपक्ष इसे कानून के राज का मामला बताकर मुख्यमंत्री से जवाबदेही की मांग कर रहा है।

आगे क्या?

अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं। यह मामला केवल एक छापेमारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह केंद्र-राज्य संबंध, जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता, और संवैधानिक सीमाओं की बड़ी परीक्षा बन चुका है।
शीर्ष अदालत का फैसला न सिर्फ इस प्रकरण की दिशा तय करेगा, बल्कि भविष्य में ऐसे टकरावों के लिए भी एक महत्वपूर्ण न्यायिक मिसाल साबित हो सकता है।

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