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April 11, 2026
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भारत

भारत (989)

शौर्यपथ विशेष

साल 2025 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर अभूतपूर्व सम्मान का वर्ष रहा है। इस वर्ष उन्होंने विभिन्न महाद्वीपों की यात्रा की, जहाँ उन्हें कई देशों ने अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाज़ा।
साल 2025 में प्रधानमंत्री मोदी को निम्नलिखित देशों द्वारा सर्वोच्च सम्मान दिए गए:

// मॉरीशस (12 मार्च 2025): 'ग्रैंड कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द स्टार एंड की ऑफ द इंडियन ओशन" (Grand Commander of the Order of the Star and Key of the Indian Ocean)। यह सम्मान पाने वाले वह पहले भारतीय नेता बने।
// श्रीलंका (अप्रैल 2025): राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायक द्वारा 'श्रीलंका मित्र विभूषणÓ (Sri Lanka Mitra Vibhushana) सम्मान।
// साइप्रस (16 जून 2025): 'ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ मकारियोस IIIÓ (Grand Cross of the Order of Makarios III) । यह साइप्रस का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।
// घाना (2 जुलाई 2025): 'ऑफिसर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द स्टार ऑफ घानाÓ (Officer of the Order of the Star of Ghana)।
// त्रिनिदाद और टोबैगो (4 जुलाई 2025): 'ऑर्डर ऑफ द रिपब्लिक ऑफ त्रिनिदाद एंड टोबैगोÓ (Order of the Republic of Trinidad and Tobago)।
 // ब्राजील (8 जुलाई 2025): 'ग्रैंड कॉलर ऑफ द नेशनल ऑर्डर ऑफ द साउदर्न क्रॉसÓ (Grand Collar of the National Order of the Southern Cross)  ।
// नामीबिया (9 जुलाई 2025): 'ऑर्डर ऑफ द मोस्ट एंशिएंट वेलविट्सचिया मिराबिलिसÓ (Order of the Most Ancient Welwitschia Mirabilis) । वह इस सम्मान को पाने वाले पहले भारतीय नेता हैं।
// इथियोपिया (16 दिसंबर 2025): 'ग्रेट ऑनर निशान ऑफ इथियोपियाÓ (Great Honour Nishan of Ethiopia)।
// ओमान (18 दिसंबर 2025): 'ऑर्डर ऑफ ओमानÓ (Order of Oman)। यह ओमान का विशिष्ट नागरिक सम्मान है।
// बारबाडोस (2025): 'मानद ऑर्डर ऑफ फ्रीडमÓ (Honorary Order of Freedom)।

इन पुरस्कारों के साथ ही 2025 के अंत तक प्रधानमंत्री मोदी को मिलने वाले कुल अंतरराष्ट्रीय नागरिक सम्मानों की संख्या 29 तक पहुँच गई है, जो वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा का प्रमाण है।

शौर्यपथ विशेष 

वर्ष 2025 में भारतीय राजनीति में उस वक्त एक बड़ा संवैधानिक शून्य और आश्चर्य पैदा हुआ, जब 21 जुलाई 2025 को उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया।
इस्तीफे का कारण: उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपे अपने पत्र में "स्वास्थ्य संबंधी कारणों" और "चिकित्सीय सलाह का पालन करने" को मुख्य वजह बताया। हालांकि, उनके इस कदम ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाओं और अटकलों को भी जन्म दिया।
अपूर्ण कार्यकाल: अगस्त 2022 में निर्वाचित हुए श्री धनखड़ का कार्यकाल 2027 तक था, लेकिन उनके इस निर्णय के कारण कार्यकाल के बीच में ही मध्यावधि चुनाव की स्थिति बनी।
नए उपराष्ट्रपति का चुनाव (सितंबर 2025)
उपराष्ट्रपति पद के खाली होने के बाद निर्वाचन आयोग ने चुनाव की घोषणा की, जो 9 सितंबर 2025 को संपन्न हुए।
सी.पी. राधाकृष्णन की जीत: राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (हृष्ठ्र) के उम्मीदवार और महाराष्ट्र के तत्कालीन राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन को भारत का नया (15वां) उपराष्ट्रपति चुना गया।
चुनावी परिणाम: उन्होंने विपक्षी 'इंडियाÓ (ढ्ढहृष्ठढ्ढ्र) गठबंधन के उम्मीदवार और पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी को हराया। राधाकृष्णन को 452 वोट मिले, जबकि विपक्षी उम्मीदवार को 300 वोट प्राप्त हुए।
शपथ ग्रहण: सी.पी. राधाकृष्णन ने 12 सितंबर 2025 को भारत के 15वें उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति के रूप में शपथ ली।

फ्लैशबैक 2025: न्याय, राजनीति और मैदान-ए-जंग में भारत का बुलंद परचम

शौर्यपथ विशेष

वर्ष 2025 भारत के इतिहास में एक ऐसे कालखंड के रूप में दर्ज किया जाएगा, जहाँ देश ने एक तरफ अंतरिक्ष और खेल के मैदान में नई ऊंचाइयों को छुआ, तो दूसरी ओर जटिल भू-राजनीतिक और न्यायिक चुनौतियों का दृढ़ता से सामना किया। यह वर्ष 'विकसित भारतÓ के संकल्प की ओर बढ़ते कदमों का गवाह बना।

1. खेल और राष्ट्रीय गौरव: स्वर्णिम क्षण
भारतीय खेल इतिहास में 2025 का साल महिलाओं के नाम रहा। भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने दक्षिण अफ्रीका को हराकर अपना पहला icc वनडे विश्व कप जीतकर इतिहास रच दिया। वहीं, पुरुष टीम ने भी ढ्ढष्टष्ट चैंपियंस ट्रॉफी जीतकर क्रिकेट जगत में भारत का दबदबा कायम रखा।

2. न्यायपालिका और संवैधानिक घटनाक्रम
न्याय के क्षेत्र में यह वर्ष बड़े बदलावों का रहा। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (cji) के रूप में कार्यभार संभाला। इसी दौरान न्यायपालिका की शुचिता तब और बढ़ गई जब सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत पर रोक लगा दी, जिससे यह संदेश गया कि जघन्य अपराधों में कानून की पकड़ ढीली नहीं होगी।

3. चुनाव सुधार और राजनीतिक हलचल
निर्वाचन आयोग (eci) ने चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया का आरंभ किया, ताकि मतदाता सूची से विसंगतियों को दूर किया जा सके।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025: साल के अंत में हुए बिहार चुनाव इस वर्ष की सबसे बड़ी राजनीतिक घटना रही। नवंबर 2025 में घोषित परिणामों में भाजपा नीत NDA ने 202 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत हासिल किया। नीतीश कुमार ने रिकॉर्ड 10 वीं बार मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, जबकि भाजपा पहली बार राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।
RSS का शताब्दी वषर्: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने 100 वर्ष पूरे किए, जो सामाजिक और सांस्कृतिक विमर्श का केंद्र बना रहा।
दिल्ली चुनाव: दिल्ली विधानसभा चुनावों के परिणामों ने देश की राजनीतिक दिशा में एक नया मोड़ दिया।

4. रक्षा, सुरक्षा और अंतरिक्ष में बढ़ता कद
ऑपरेशन सिंदूर: भारत ने सीमा पार आतंकी शिविरों पर 'सटीक हमलोंÓ(Precision Strikes) के जरिए अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा की प्रतिबद्धता दोहराई।
गगनयान और ISS: भारत के शुभांशु शुक्ला ने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पहुंचकर अंतरिक्ष विज्ञान में भारत का परचम लहराया।

5. वैश्विक कूटनीति और चुनौतियां
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं ने भारत के सामरिक हितों को मजबूत किया, लेकिन वैश्विक पटल पर चुनौतियां भी कम नहीं रहीं:
अमेरिका के टैरिफ: अमेरिका द्वारा आयात शुल्क (ञ्जड्डह्म्द्बद्घद्घह्य) बढ़ाए जाने के फैसले ने वैश्विक व्यापार और भारतीय निर्यातकों के सामने नई चुनौतियां पेश कीं।
बांग्लादेश संकट: पड़ोसी देश बांग्लादेश में बढ़ते जनांदोलनों और अस्थिरता ने भारत की विदेश नीति और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चिंताएं बढ़ाईं।

6. बुनियादी ढांचा और आर्थिक सुधार
भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा में 253 त्रङ्ख की क्षमता हासिल की और सेमीकंडक्टर हब बनने की दिशा में बड़ी प्रगति की। प्रयागराज के महाकुंभ ने जहाँ भारत की सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन किया, वहीं बुनियादी ढांचे के विस्तार ने अर्थव्यवस्था को गति दी।

7. चुनौतियां और प्राकृतिक आपदाएं
सफलता के बीच 2025 ने कुछ गहरे जख्म भी दिए। एयर इंडिया विमान दुर्घटना और चक्रवात 'मोंथाÓ जैसी प्राकृतिक आपदाओं ने देश को झकझोर दिया, लेकिन आपदा प्रबंधन के त्वरित कार्यों ने राहत प्रदान की।

संक्षेप में, साल 2025 भारत के लिए केवल एक कैलेंडर वर्ष नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता एक मजबूत कदम रहा। चाहे वह महिला आरक्षण की तैयारी हो, डिजिटल हेल्थ मिशन की सफलता हो, या अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की मुखर आवाज़; 2025 ने सिद्ध किया कि भारत हर परिस्थिति में अपनी प्रगति का मार्ग प्रशस्त करने में सक्षम है।

 

कर्नाटक निकाय चुनाव: बैलेट पर कांग्रेस की करारी हार, भाजपा का क्लीन स्वीप!

    कर्नाटक। शौर्यपथ । कर्नाटक में शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में सत्ताधारी कांग्रेस को बड़ा झटका लगा, जहां भाजपा ने चार टाउन पंचायतों—बजपे, किन्निगोली, मानकी और बसेट्टीहल्ली—में सभी वार्ड जीत लिए। बैलेट पेपर से हुए इन चुनावों को भाजपा ने कांग्रेस सरकार के कुप्रबंधन के खिलाफ जनादेश बताया।

प्रमुख परिणाम

बजपे (दक्षिण कन्नड़): भाजपा ने 11 सीटें जीतीं, कांग्रेस को 4 मिलीं।

दो अन्य टाउन पंचायतें: भाजपा ने पूर्ण कंट्रोल हासिल किया, जहां कांग्रेस पहले दो पर काबिज थी।

उपचुनाव: दोद्दाबल्लापुर और तुर्विहाला में भाजपा की जीत।

भाजपा का दावा

राज्य अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र येदियुरप्पा ने इसे कांग्रेस की नाकामियों का सबूत ठहराया, जबकि बीएल संतोष ने पूरे देश में भाजपा की लगातार जीतों का जिक्र किया। भटकल जैसे क्षेत्रों में भी कांग्रेस को शिकस्त मिली, जहां उनका मंत्री विधायक है।

राजनीतिक प्रभाव

ये नतीजे सिद्धरामैया सरकार के लिए चेतावनी हैं, खासकर आंतरिक कलह के बीच। BBMP जैसे बड़े चुनाव लंबित हैं, जो आगे की चुनौतियां बढ़ा सकते हैं।

नई दिल्ली / शौर्यपथ
केंद्रीय ग्रामीण विकास तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ग्रामीण रोजगार, ग्राम पंचायत के अधिकार और मजदूरों की सुरक्षा को लेकर विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे “भ्रम” को पूरी तरह तथ्यहीन और भ्रामक बताया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लाई गई विकसित भारत–जी राम जी योजना ने न सिर्फ मजदूरों के अधिकारों को मजबूत किया है, बल्कि ग्रामीण भारत को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और सशक्त शासन-व्यवस्था उपलब्ध कराई है।
शिवराज सिंह ने तीखे शब्दों में कहा कि कांग्रेस के शासन में मनरेगा भ्रष्टाचार के “दलदल” में फंसी रहती थी, जबकि मोदी सरकार ने पारदर्शिता और जवाबदेही की नई मिसाल स्थापित की है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस न नीयत रखती थी, न नीति; वही कांग्रेस आज राजनीतिक लाभ के लिए “घड़ियाली आंसू” बहा रही है।
केंद्रीय मंत्री ने साफ किया कि सरकार ने रोजगार सुरक्षा को कम नहीं, बल्कि और मजबूत किया है। नए अधिनियम में ग्रामीण परिवारों को 100 की जगह 125 दिनों की वैधानिक रोजगार-गारंटी दी गई है। मांग के आधार पर काम उपलब्ध कराना अब सरकार की कानूनी जिम्मेदारी होगी। समय पर काम नहीं मिलने पर अनिवार्य बेरोज़गारी भत्ता, और मजदूरी में देरी पर विलंबित भुगतान (एक्स्ट्रा पेमेंट) का स्पष्ट प्रावधान किया गया है।
ग्राम पंचायत और ग्राम सभा के अधिकारों पर उठाए जा रहे सवालों को भी उन्होंने खारिज किया। मंत्री के अनुसार, नए प्रावधानों में ग्राम सभा, पंचायत और स्थानीय समुदाय की भूमिका और अधिक निर्णायक बनाई गई है। कार्यों की पहचान, प्राथमिकता, गुणवत्ता निगरानी, खर्च और भुगतान की सोशल ऑडिट—सब कुछ गांव स्तर पर ही सुनिश्चित किया जाएगा ताकि “ऊपर से थोपे गए निर्णयों” की गुंजाइश समाप्त हो सके।
उन्होंने बताया कि महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण समुदाय की भागीदारी को योजना में विशेष प्राथमिकता दी गई है। शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत किया गया है और डिजिटल निगरानी के माध्यम से पारदर्शिता को नई गति दी गई है।
मजदूरों के अधिकारों पर बोलते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार का उद्देश्य मजदूरों को “खैरात” नहीं, बल्कि सम्मानजनक अधिकार, सुरक्षित कार्य-परिस्थितियाँ और समयबद्ध पारदर्शी भुगतान सुनिश्चित करना है। ग्रामीण सम्पत्तियों और आजीविका आधारित कार्यों से गांवों की स्थायी प्रगति इस योजना का मुख्य आधार है।
गांधीजी के नाम और विचार हटाने के विपक्षी आरोपों पर उन्होंने कहा कि यह आरोप राजनीतिक भ्रम फैलाने का प्रयास है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नया अधिनियम गांधीजी के ग्राम स्वराज, आत्मनिर्भरता, श्रम के सम्मान और जनभागीदारी जैसे मूल सिद्धांतों पर आधारित है। यह गांवों को सशक्त, मजदूरों को सम्मानित और विकास को स्थायी बनाने का निर्णायक कदम है।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “विपक्ष भले भ्रम फैलाए, लेकिन सरकार की प्रतिबद्धता स्पष्ट है—मजदूरों का सशक्तीकरण और ग्रामीण भारत का सर्वांगीण विकास।”

नई दिल्ली। शौर्यपथ  ।

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) अनिल चौहान ने कहा कि भारत को न केवल कम समय के तीव्र युद्ध बल्कि लंबे समय तक चलने वाले संघर्षों के लिए भी तैयार रहना चाहिए। उन्होंने यह टिप्पणी मुंबई स्थित आईआईटी बॉम्बे में आयोजित एक कार्यक्रम में भारत के समक्ष मौजूद सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा करते हुए की।
सीडीएस ने बिना नाम लिए पाकिस्तान और चीन की ओर संकेत करते हुए कहा कि भारत को अपनी रणनीतिक तैयारी ऐसे माहौल में करनी होगी, जहां उसके दोनों प्रमुख प्रतिद्वंद्वी परमाणु हथियार संपन्न हैं। उनके अनुसार, "हमारे दोनों दुश्मन—एक परमाणु हथियार वाला देश, दूसरा परमाणु हथियार संपन्न देश—इसलिए हमें इस स्तर के अवरोध का उल्लंघन नहीं होने देना चाहिए।"
चौहान ने कहा कि भारत को आतंकवाद और सीमापार हमलों से निपटने के लिए कम अवधि के तीव्र संघर्षों के लिए सक्षम रहना होगा, जैसा कि ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों में देखा गया। साथ ही, लंबे समय तक चलने वाले जमीनी विवादों की परिस्थितियों के लिए भी तैयारी जरूरी है। उन्होंने कहा, "हमारा जमीनी विवाद है, और ऐसी स्थितियों में दीर्घकालिक संघर्ष की आशंका बनी रहती है। हालांकि, हमें इससे दूर रहने की कोशिश भी करनी चाहिए।"
चौहान के संकेत क्रमश: आतंकवाद-विरोधी त्वरित अभियानों और रूस-यूक्रेन जैसे लंबे संघर्षों की ओर माने जा रहे हैं, जिनसे भारत को अपनी रक्षा नीति और तैयारी का स्तर निर्धारित करना होगा।

नई दिल्ली / शौर्यपथ / / बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा को लेकर भारत के कई शहरों में मंगलवार को विरोध प्रदर्शन हुए। हाल ही में मैमनसिंह में एक हिंदू युवक दीपू चंद्र दास को भीड़ द्वारा पीट-पीटकर मार डालने और शव को आग के हवाले किए जाने की घटना के बाद दोनों देशों के बीच राजनयिक तनाव गहरा गया है।
हिंसा के विरोध में भारत में बांग्लादेशी दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों के पास बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए। बढ़ते तनाव को देखते हुए भारतीय मिशनों की सुरक्षा बढ़ा दी गई और कांसुलर सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित कर दी गईं। इसी क्रम में भारत ने बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हामिदुल्लाह को तलब किया। इससे पहले बांग्लादेश सरकार ने भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा को अपने मिशनों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताने के लिए बुलाया था। हिंसा की श्रृंखला राजनीतिक कार्यकर्ता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद शुरू हुई, जिसके बाद बांग्लादेश में भी तनाव फैल गया। धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर उठी चिंताओं ने भारत में आक्रोश को और बढ़ाया।
कोलकाता में बंगीय हिंदू जागरण सहित कई संगठनों ने बांग्लादेश के डिप्टी हाई कमीशन के पास प्रदर्शन करते हुए दीपू चंद्र दास की हत्या की कड़ी निंदा की। प्रदर्शनकारियों द्वारा ज्ञापन सौंपने की तैयारी के बीच भारी भीड़ जमा हो गई, जिस पर पुलिस ने स्थिति नियंत्रण से बाहर होने की आशंका में लाठीचार्ज किया।

नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में ठंड, घने कोहरे और गंभीर प्रदूषण ने स्थिति बेहद चिंताजनक बना दी है। कई इलाकों में सोमवार सुबह AQI 400 के पार दर्ज हुआ—बवाना 408, नरेला 418, आनंद विहार 404 और अक्षरधाम 438 तक पहुंच गया। राजधानी के ऊपर जहरीली स्मॉग की मोटी परत छाई रही, जबकि AIIMS क्षेत्र में AQI 363 रिकॉर्ड किया गया।
हालात बिगड़ने पर CAQM ने GRAP स्टेज-IV के तहत सभी कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। प्रशासन ने दिल्ली में 50% कर्मचारियों को वर्क-फ्रॉम-होम का आदेश दिया है और कक्षा 5 तक के स्कूल ऑनलाइन संचालित हो रहे हैं।
नोएडा व गाज़ियाबाद में भी वायु गुणवत्ता बेहद खराब बनी हुई है—नोएडा सेक्टर-1 में AQI 381 और वसुंधरा में 394 दर्ज हुआ।
मौसम विभाग के अनुसार 23 व 24 दिसंबर को कोहरे में कमी की उम्मीद नहीं है। अधिकतम तापमान 19–22°C और न्यूनतम 9–10°C के आसपास रहेगा। ठंडी हवाओं की कमी और उच्च आर्द्रता के चलते फिलहाल राहत की संभावना नहीं है।

नई दिल्ली: बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की हत्या के विरोध में वीएचपी और बजरंग दल के संभावित प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में बांग्लादेश उच्चायोग के बाहर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। पुलिस और अर्धसैनिक बलों को तैनात कर क्षेत्र को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
इससे पहले बांग्लादेशी मीडिया ने दावा किया था कि दिल्ली में हुए एक प्रदर्शन के दौरान उच्चायोग की सुरक्षा भेदने की कोशिश की गई, हालांकि भारत ने इन दावों को भ्रामक बताया है।

उधर, बांग्लादेश में हिंसा का दौर जारी है। खुलना में छात्र आंदोलन से जुड़े नेता मोतालेब सिकदर की गोली मारकर हत्या कर दी गई, जो कुछ दिन पहले युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद हुई दूसरी बड़ी वारदात है। मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने इन मामलों में त्वरित कार्रवाई के आदेश दिए हैं।

मयमनसिंह में हिंदू युवक की हत्या के मामले में बांग्लादेश पुलिस ने दस लोगों को हिरासत में लिया है, जिसके बाद पूरे देश में तनाव व्याप्त है।
भारत में भी इसका प्रभाव दिखा—जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में कई हिंदू संगठनों और भाजपा ने विरोध प्रदर्शन करते हुए बंद का आह्वान किया, जिसके चलते बाजार और प्रतिष्ठान बंद रहे।

यह घटनाक्रम अगस्त में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद बांग्लादेश में बढ़ रही अल्पसंख्यक विरोधी घटनाओं को और उजागर करता है।

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