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June 13, 2026
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प्रदेश कांग्रेस सचिव अय्यूब खान ने की जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग

दुर्ग। जिला अस्पताल दुर्ग में एक चिकित्सक की कथित लापरवाही और मरीज को गलत जानकारी देकर गुमराह करने का मामला सामने आया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी छत्तीसगढ़ के सचिव अय्यूब खान ने इस संबंध में सिविल सर्जन को लिखित शिकायत सौंपकर दोषी डॉक्टर के खिलाफ विभागीय जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार 5 जून की रात लगभग 11 बजे आलिया खान नामक छात्रा, जो नीट परीक्षा की तैयारी कर रही है, तेज बुखार की शिकायत के चलते जिला अस्पताल दुर्ग पहुंची थी। आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने बिना समुचित जांच किए छात्रा के परिजनों को बताया कि उसकी किडनी और लीवर खराब हैं तथा उसका उपचार जिला अस्पताल में संभव नहीं है। डॉक्टर ने तत्काल मरीज को रायपुर स्थित मेकाहारा अस्पताल रेफर करने की सलाह दी।

परिजनों के अनुसार डॉक्टर की बात सुनकर वे घबरा गए और छात्रा को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां चिकित्सकीय जांच के बाद पता चला कि उसे केवल सामान्य बुखार था। उपचार के बाद छात्रा पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट आई।

मामले की जानकारी मिलने पर प्रदेश कांग्रेस सचिव अय्यूब खान पीड़ित परिवार के साथ जिला अस्पताल पहुंचे और सिविल सर्जन डॉ. मिंज से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया। उन्होंने इस संबंध में लिखित शिकायत भी सौंपी। शिकायत प्राप्त होने के बाद सिविल सर्जन ने दो दिनों के भीतर मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

अय्यूब खान ने कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित डॉक्टर पर मरीज को गलत जानकारी देकर गुमराह करने, परिजनों से दुर्व्यवहार करने तथा बिना पर्याप्त जांच के रेफर करने के आरोप में कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं से गरीब और सामान्य मरीजों का सरकारी अस्पतालों पर से भरोसा उठ सकता है। जिला प्रशासन को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच कर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना चाहिए।

सिविल सर्जन से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में मो. रफीक, अज्जू वाजिद, श्रीमती रुक्कैया, अनीस अकील चौहान तथा अख्तर चौहान भी शामिल थे।

(नोट: यह समाचार शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों और प्रस्तुत शिकायत के एवं उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर तैयार किया गया है। मामले की जांच एवं संबंधित पक्ष का पक्ष आना शेष है।)

भिलाई। भिलाई टाउनशिप क्षेत्र में लीज, सब-लीज, रिटेंशन एवं लाइसेंस नवीनीकरण शुल्क से संबंधित नई नीति लागू होने के बाद सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं में खुशी का माहौल है। इसी क्रम में हिन्दू मिलन मंदिर प्रगति नगर रिसाली, भारत सेवा आश्रम एवं काली बाड़ी समिति के पदाधिकारियों ने Vijay Baghel से उनके सेक्टर-5 स्थित निवास कार्यालय में सौजन्य भेंट कर अभिनंदन किया तथा इस महत्वपूर्ण पहल के लिए आभार व्यक्त किया।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में लीज एवं सब-लीज नवीनीकरण शुल्क में हुई भारी वृद्धि के कारण सामाजिक, धार्मिक एवं जनसेवा से जुड़ी संस्थाओं के समक्ष आर्थिक चुनौतियां खड़ी हो गई थीं। नई नीति के तहत ऐसी संस्थाओं के लिए मात्र एक रुपये की प्रतीकात्मक राशि पर लीज आवंटन एवं नवीनीकरण का प्रावधान किए जाने से उन्हें बड़ी राहत मिली है।

हिन्दू मिलन मंदिर प्रगति नगर रिसाली एवं भारत सेवा आश्रम के पदाधिकारियों ने बताया कि इस विषय को सांसद विजय बघेल ने लगातार गंभीरता से उठाया। उन्होंने केंद्रीय इस्पात मंत्रालय एवं संबंधित अधिकारियों के समक्ष सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं की समस्याओं को प्रभावी ढंग से रखा और समाधान के लिए लगातार प्रयास किए। उनके निरंतर प्रयासों का ही परिणाम है कि नई नीति लागू हो सकी, जिससे अनेक संस्थाओं को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

नई नीति लागू होने पर काली बाड़ी समिति सेक्टर-6 के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने भी सांसद का अभिनंदन करते हुए इसे सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं के लिए ऐतिहासिक राहत बताया। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से संस्थाओं की आर्थिक चिंता कम होगी और वे समाजसेवा, सांस्कृतिक तथा धार्मिक गतिविधियों को और अधिक प्रभावी ढंग से संचालित कर सकेंगी।

इस अवसर पर विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने सांसद के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनहित से जुड़े मुद्दों पर उनकी सक्रियता क्षेत्र के लिए लाभकारी सिद्ध हो रही है।

अभिनंदन के दौरान सांसद विजय बघेल ने सभी पदाधिकारियों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि सामाजिक, धार्मिक एवं जनसेवा संस्थाएं समाज की महत्वपूर्ण धरोहर हैं। उनके हितों की रक्षा तथा क्षेत्र की जनसमस्याओं के समाधान के लिए वे भविष्य में भी निरंतर प्रयासरत रहेंगे।

नई नीति से भिलाई टाउनशिप की सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं को मिली राहत को क्षेत्र में जनहित से जुड़ा महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।

नवनियुक्त अधिकारी-कर्मचारी कल्याण संघ की बैठक में हड़ताल की रणनीति पर मंथन, कर्मचारी हितों की लड़ाई तेज करने का ऐलान

दुर्ग। दुर्ग नगर निगम में कर्मचारियों के बीच बढ़ते असंतोष और कर्मचारी हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर नवनियुक्त अधिकारी-कर्मचारी कल्याण संघ (छत्तीसगढ़) ने संगठनात्मक गतिविधियों को तेज कर दिया है। इसी क्रम में दुर्ग नगर निगम के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें कर्मचारियों ने निगम प्रशासन की कार्यशैली, लगातार हो रही प्रशासनिक कार्यवाहियों तथा कर्मचारी हितों की कथित उपेक्षा को लेकर खुलकर अपनी बात रखी।

बैठक में संघ के प्रदेश अध्यक्ष राजेश सोनी, प्रदेश संयोजक संजय शर्मा, प्रदेश सचिव ऋषभ सिंह ठाकुर, प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश तिवारी सहित प्रदेश स्तरीय पदाधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम का आयोजन जिला अध्यक्ष राजूलाल चन्द्राकर के नेतृत्व में किया गया।

बैठक के दौरान कर्मचारियों ने प्रदेश पदाधिकारियों को बताया कि निगम प्रशासन के कुछ निर्णयों और कार्यप्रणाली को लेकर कर्मचारियों में लगातार असंतोष बढ़ रहा है। कर्मचारियों का कहना था कि हाल के समय में हुई प्रशासनिक कार्यवाहियों ने कर्मचारियों के बीच असुरक्षा का माहौल पैदा किया है, जिससे कार्यस्थल का वातावरण प्रभावित हो रहा है।

प्रदेश पदाधिकारियों ने कर्मचारियों की समस्याओं और शिकायतों को गंभीरता से सुनते हुए आश्वस्त किया कि कर्मचारी हितों से जुड़े सभी मुद्दों को नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव तथा शासन स्तर तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि संगठन कर्मचारियों के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करने के लिए प्रतिबद्ध है।

बैठक की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि संगठन विस्तार रही। सदस्यता अभियान के दौरान 45 अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने नवनियुक्त अधिकारी-कर्मचारी कल्याण संघ की सदस्यता ग्रहण की, जिससे संगठन को नई ऊर्जा और मजबूती मिली। प्रदेश नेतृत्व ने इसे कर्मचारियों के बढ़ते विश्वास का प्रतीक बताते हुए कहा कि मजबूत संगठन ही कर्मचारी हितों की प्रभावी लड़ाई लड़ सकता है।

बैठक में आगामी आंदोलन और प्रस्तावित हड़ताल की रणनीति पर भी विस्तार से चर्चा की गई। प्रदेश संयोजक संजय शर्मा ने बताया कि 13 जुलाई 2026 से रायपुर के तूताग्राउंड में प्रस्तावित अनिश्चितकालीन हड़ताल को सफल बनाने के लिए प्रदेशभर में कर्मचारियों को संगठित किया जा रहा है। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में समय पर वेतन भुगतान, चुंगी क्षतिपूर्ति राशि का नियमित भुगतान, शासन से प्राप्त अनुदान की उपलब्धता तथा कर्मचारियों को ट्रेजरी (कोषालय) प्रणाली से जोड़ना शामिल है।

प्रदेश अध्यक्ष राजेश सोनी ने कर्मचारियों का आह्वान करते हुए कहा कि अधिकार और सम्मान की लड़ाई एकजुटता से ही जीती जा सकती है। उन्होंने कहा कि यदि कर्मचारी एक मंच पर संगठित होकर अपनी बात रखते हैं तो उनकी समस्याओं के समाधान की संभावनाएं और मजबूत होती हैं।

बैठक में शुभम गोईर, चित्ररेखा चन्द्राकर, नरेंद्र मनहरे, महेंद्र धर्मकार, तरुण चन्द्राकर, शिवा परिहार, साक्षी चौहान, सत्येंद्र, गंगाधर ठाकरे, गुमान निर्मलकर, हर्ष चन्द्राकर, नीरज, रतनदीप, राजदीप, निखिल, अनुपम, विनीत वर्मा, गुलशन यादव, कविता कश्यप, नेहा यादव, सोमलता साहू, संजू जाटव, निक्की बंछोर, रूपेश नायक, युवराज, मनोज सोनी, सिद्धांत शर्मा, गंगा यादव, राखी कुंडे, बलदाऊ पटेल, विजेंद्र पटेल सहित बड़ी संख्या में अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

बैठक के अंत में उपस्थित कर्मचारियों ने संगठन को और अधिक मजबूत बनाने, कर्मचारी हितों की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने तथा आगामी अनिश्चितकालीन हड़ताल को सफल बनाने का संकल्प लिया। कर्मचारियों का मानना है कि यदि उनकी मांगों पर समय रहते सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आने वाले समय में आंदोलन और व्यापक स्वरूप ले सकता है।

  रायपुर / शौर्यपथ / उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव के निर्देश पर विभाग ने रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण की धीमी प्रगति पर ठेकेदार को नोटिस जारी किया है। उप मुख्यमंत्री श्री साव ने अपने बस्तर प्रवास के दौरान 6 जून को राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर केशलूर-जगदलपुर मार्ग में किरंदुल-विशाखापट्टनम रेलवे लाइन के ऊपर बन रहे फोरलेन रेलवे ओवरब्रिज का निरीक्षण किया था। उन्होंने निरीक्षण के दौरान काम के पिछडऩे एवं लेट-लतीफी पर ठेकेदार और अधिकारियों को फटकार लगाई थी। उन्होंने अनुबंध के अनुसार कार्य में अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर गहरी नाराजगी जताते हुए ठेकेदार को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए थे। बस्तर जिले में केशलूर के पास 69 करोड़ 36 लाख रुपए की लागत से इस रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण किया जा रहा है।
लोक निर्माण विभाग के राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता ने निर्माण एजेंसी मेसर्स अशोक कुमार मित्तल को जारी नोटिस में कहा है कि साइट उपलब्ध होने के बावजूद मैन-पॉवर, मटेरियल और मशीनरी की खराब व्यवस्था के कारण अलग-अलग चरणों में निर्माण के समयबद्ध लक्ष्यों को हासिल नहीं किया जा सका है। कार्यस्थल पर काम की प्रगति मंजूर किए गए निर्माण कार्यक्रम से काफी पीछे है और तय किए गए माइलस्टोन्स (महत्वपूर्ण पड़ावों) के अनुरूप नहीं है। विभाग द्वारा प्रगति की लगातार समीक्षा कर कार्यों में तेजी लाने के लिए बार-बार निर्देशित और नोटिस जारी करने के बावजूद काम की गति असंतोषजनक है।
विभाग ने ठेकेदार को जारी नोटिस में कहा है कि उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री द्वारा विगत 6 जून को साइट के निरीक्षण के दौरान काम की बेहद धीमी प्रगति पर गंभीर चिंता जताई गई थी। उन्होंने अनुबंध के प्रावधानों के अनुसार ठेकेदार के विरूद्ध तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए थे। उप मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुख्य अभियंता ने ठेकेदार को नोटिस जारी कर तुरंत पर्याप्त मैन-पॉवर, मशीनरी, सामग्री और अन्य जरूरी संसाधन जुटाकर काम में तेजी लाने तथा प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने के लिए तय लक्ष्यों को हासिल करने सभी जरूरी उपाय करने के निर्देश दिए हैं। काम की प्रगति में उल्लेखनीय सुधार नहीं पाए जाने पर विभाग द्वारा अनुबंध के प्रावधानों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

रायपुर / शौर्यपथ / नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की सचिव श्रीमती शंगीता आर. ने आज राजनांदगांव में चल रहे प्रमुख विकास कार्यों और अधोसंरचना परियोजनाओं का निरीक्षण कर उनकी प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान महापौर मधुसूदन यादव और कलेक्टर जितेंद्र यादव भी मौजूद थे।
नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव ने राज्य शासन की प्राथमिकता वाली योजना के तहत निर्माणाधीन नालंदा परिसर का निरीक्षण कर कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने निर्माण कार्य को निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही भवन निर्माण पूर्ण होने से तीन-चार माह पहले ही लाइब्रेरी और कैंटीन संचालन की तैयारियां शुरू करने तथा आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा। इस दौरान उन्होंने परिसर में पौधरोपण भी किया।
उन्होंने शहर के प्रमुख जलाशय रानीसागर का भी जायजा लिया और इसके सौंदर्यीकरण की कार्ययोजना पर चर्चा की। उन्होंने आसपास के दुकानदारों को स्वच्छता बनाए रखने तथा कचरा तालाब में नहीं फेंकने की हिदायत दी। उन्होंने 18 एकड़ में विकसित एसएलआरएम सेंटर पहुंचकर स्वच्छता दीदियों से कचरा संग्रहण एवं प्रसंस्करण की जानकारी ली तथा कर्मचारियों को सुरक्षा मानकों का पालन करने के निर्देश दिए। उन्होंने मिशन अमृत 2.0 के तहत मोहारा-सिंगदई स्थित एसटीपी का निरीक्षण कर संचालन व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने तुमड़ीबोड़ स्थित 120 मेगावाट सोलर पावर प्लांट का निरीक्षण कर परियोजना की प्रगति और उत्पादन क्षमता की जानकारी ली।

स्कूल शिक्षा विभाग के कड़े निर्देश- 15 जून तक पूरे करें मरम्मत के कार्य, प्रिंट-रिच और आकर्षक बनाए जाएंगे स्कूल
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही राज्य सरकार विद्यार्थियों के लिए स्वच्छ, सुंदर और गुणवत्तापूर्ण माहौल तैयार करने जा रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (हृश्वक्क 2020) के अनुरूप, प्रदेशभर में 16 जून 2026 से शाला प्रवेश उत्सव 2026 का गरिमामय आयोजन किया जाएगा। इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने मंत्रालय महानदी भवन (नवा रायपुर) से विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।

गांवों और शहरों में होगी मुनादी, जनभागीदारी पर जोर

प्रवेश उत्सव को एक उत्सव का रूप देने के लिए इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। इसके तहत गांवों और शहरी वार्डों में मुनादी कराई जाएगी। बैनर-पोस्टर और रैलियों के जरिए जागरूकता बढ़ाई जाएगी। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, शाला विकास समितियों और पालकों (अभिभावकों) की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

विभाग ने निर्देश दिया है कि स्कूल खुलने से पहले भवनों, परिसरों और कक्षाओं की पूरी साफ-सफाई और आवश्यक मरम्मत कर ली जाए। मरम्मत योग्य भवनों का काम 15 जून 2026 तक हर हाल में पूरा करने को कहा गया है ताकि बच्चों को एक आकर्षक और प्रिंट-रिच (शैक्षणिक चित्रों और दीवारों पर लिखी जानकारियों से लैस) वातावरण मिल सके।

शाला त्यागी बच्चों की वापसी और अगली कक्षा में सीधा प्रवेश

प्रवेश प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने एक सुव्यवस्थित ढांचा तैयार किया है। कक्षा पहली में आंगनबाड़ी केंद्रों से बच्चों की सूची प्राप्त कर सीधे स्कूलों में प्रवेश दिया जाएगा। कक्षा छठवीं में प्राथमिक शालाओं से कक्षा 5वीं उत्तीर्ण छात्रों की सूची और टीसी (स्थानांतरण प्रमाण-पत्र) लेकर कक्षा 6वीं में उनका दाखिला सुनिश्चित किया जाएगा। शाला त्यागी बच्चे, जो बच्चे पढ़ाई छोड़ चुके हैं, उन्हें ढूंढकर दोबारा मुख्यधारा से जोडऩे पर विशेष जोर रहेगा। इसके अलावा, स्कूलों में विद्यार्थियों और शिक्षकों की 100 प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने तथा शिक्षकों के लंबित मामलों का त्वरित निपटारा करने के निर्देश दिए गए हैं। सभी विषय शिक्षकों को आगामी तीन महीनों का शैक्षणिक रोडमैप भी तैयार करना होगा।

मिलेगी मुफ्त किताबें, यूनिफॉर्म और साइकिल

उत्सव के दौरान स्कूल पहुंचने वाले नवप्रवेशी बच्चों का तिलक लगाकर आत्मीय स्वागत किया जाएगा। इस मौके पर पात्र छात्रों को नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकें (किताबें), स्कूल गणवेश (यूनिफॉर्म), साइकिल का वितरण किया जाएगा। बोर्ड और स्थानीय परीक्षाओं में टॉप करने वाले होनहार विद्यार्थियों और उत्कृष्ट पालकों को भी सम्मानित किया जाएगा। इस अभियान में स्थानीय समुदाय, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, स्व-सहायता समूहों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों का सहयोग लिया जाएगा। इच्छुक नागरिक अपनी ओर से बच्चों को स्लेट, पेंसिल, कॉपी, कंपास बॉक्स और स्कूल बैग जैसी सामग्रियां भी दान कर सकेंगे।

स्थानीय संसाधनों से होगा आयोजन

स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि शाला प्रवेश उत्सव के लिए कोई पृथक (अलग से) बजट जारी नहीं किया जाएगा। इसका आयोजन जिलों में पहले से उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से ही करना होगा। कार्यक्रम के सुचारू संचालन के लिए संयुक्त संचालक, जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मिशन समन्वयक, प्राचार्य डाइट, विकासखंड शिक्षा अधिकारी एवं अन्य अधिकारियों को विद्यालयों का सतत निरीक्षण कर आवश्यक अकादमिक मार्गदर्शन प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।

सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने उम्मीद जताई है कि सभी अधिकारी और कर्मचारी छात्रहित में व्यक्तिगत रुचि लेकर इस अभियान को सफल बनाएंगे, जिससे नए शिक्षा सत्र 2026-27 में प्रदेश को बेहतर शैक्षणिक परिणाम हासिल हो सकें।

मनपसंद समितियों को प्राथमिकता देने और कथित लेन-देन के आरोपों पर स्वाभिमान मंच ने संभाग आयुक्त से की शिकायत

दुर्ग। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेह प्रशासन को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। शासन की मंशा स्पष्ट है कि प्रत्येक योजना का लाभ निष्पक्षता के साथ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं में किसी प्रकार का भेदभाव या मनमानी न हो। इसके बावजूद कुछ विभागों में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यशैली शासन की इस सकारात्मक छवि को धूमिल करने का प्रयास करती दिखाई दे रही है।

इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूरन लाल साहू ने दुर्ग संभाग के आयुक्त को एक विस्तृत शिकायत सौंपते हुए जिला विपणन कार्यालय (DMO), दुर्ग में धान उठाव एवं डिलीवरी ऑर्डर (DO) जारी करने की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, पक्षपातपूर्ण रवैये तथा संदिग्ध कार्यप्रणाली की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

शिकायत के अनुसार जिले की सेवा सहकारी समितियों द्वारा किसानों से धान का उपार्जन कर शासन को सौंपने की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है और किसानों को उनके धान का भुगतान भी प्राप्त हो चुका है। वर्तमान विवाद किसानों के भुगतान से नहीं, बल्कि समितियों से धान उठाव एवं मिलरों को DO जारी करने की प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है।

स्वाभिमान मंच का आरोप है कि DMO कार्यालय में DO जारी करने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं दिखाई दे रही है। शिकायत में कहा गया है कि कई समितियां नियमों के अनुरूप अपने क्रम की प्रतीक्षा कर रही हैं, लेकिन उन्हें समय पर DO नहीं मिल पा रहा है। वहीं कुछ चुनिंदा समितियों एवं मिलरों को प्राथमिकता दिए जाने की चर्चाएं लगातार सामने आ रही हैं। इससे विभागीय निष्पक्षता पर प्रश्नचिन्ह लग रहा है तथा समितियों के बीच असंतोष का वातावरण निर्मित हो रहा है।

शिकायत में विशेष रूप से DMO कार्यालय में पदस्थ कंप्यूटर ऑपरेटर कमल चंद्राकर की भूमिका का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया है कि DO वितरण की प्रक्रिया में मनमानी एवं पक्षपातपूर्ण निर्णय लिए जा रहे हैं। शिकायतकर्ता ने आशंका व्यक्त की है कि कुछ समितियों और मिलरों को प्राथमिकता देने के पीछे कथित आर्थिक लेन-देन की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही संभव होगी, लेकिन शिकायत में लगाए गए आरोपों की गंभीरता को देखते हुए मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक मानी जा रही है।

स्वाभिमान मंच का कहना है कि यदि DO वितरण और धान उठाव की प्रक्रिया में इसी प्रकार का भेदभाव जारी रहा तो इसका सीधा प्रभाव सहकारी समितियों की वित्तीय एवं संचालन क्षमता पर पड़ सकता है। कई समितियां निर्धारित समय पर धान उठाव नहीं होने के कारण अतिरिक्त प्रबंधन संबंधी समस्याओं का सामना कर रही हैं। ऐसी स्थिति में शासन की योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू करने वाली समितियों का मनोबल भी प्रभावित होने की आशंका है।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि पूर्व में भी कुछ समितियों के बीच DO वितरण को लेकर असंतोष की स्थिति बनी थी। ऐसे में आवश्यक है कि पूरे मामले की विभागीय स्तर पर गहन जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि DO जारी करने की प्राथमिकता किन मानकों के आधार पर तय की जा रही है और कहीं किसी स्तर पर पक्षपात या अनियमितता तो नहीं हो रही।

पूरन लाल साहू ने संभाग आयुक्त से मांग की है कि जिले की सभी धान उठाव प्रभावित समितियों से संबंधित अभिलेखों की जांच कराई जाए, DO वितरण की प्रक्रिया का ऑडिट कराया जाए तथा शिकायत में नामित कर्मचारियों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी शिकायतों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए DO प्रणाली को पूर्णतः ऑनलाइन, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए, जिससे किसी भी व्यक्ति विशेष की मनमर्जी या हस्तक्षेप की गुंजाइश समाप्त हो सके।

प्रदेश में सुशासन और पारदर्शी प्रशासन को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता को देखते हुए अब सभी की निगाहें संभागीय प्रशासन पर टिकी हैं। यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों में सत्यता पाई जाती है तो यह केवल एक कर्मचारी का मामला नहीं होगा, बल्कि पूरी व्यवस्था की जवाबदेही तय करने का विषय बन जाएगा। वहीं यदि जांच निष्पक्ष और समयबद्ध होती है तो इससे शासन की पारदर्शिता के प्रति जनता का विश्वास और अधिक मजबूत होगा तथा समितियों के हितों की भी रक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।

महापौर अलका बाघमार के सामने निष्पक्षता की अग्निपरीक्षा

दुर्ग। नगर पालिका निगम दुर्ग द्वारा हाल ही में शहर को पोस्टर-बैनर मुक्त बनाने और बिजली के खंभों, सार्वजनिक दीवारों तथा अन्य सरकारी संपत्तियों पर अवैध प्रचार सामग्री लगाने पर प्रतिबंध की घोषणा की गई है। 10 जून को जारी प्रेस विज्ञप्ति में निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया था कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

इस अभियान के दौरान एक सकारात्मक उदाहरण स्वयं महापौर अलका बाघमार ने प्रस्तुत किया था। अपने जन्मदिन के अवसर पर लगाए गए पोस्टर और बैनरों को उन्होंने हटवाकर यह संदेश देने का प्रयास किया कि नियम सभी के लिए समान हैं और शहर की सुंदरता तथा स्वच्छता सर्वोपरि है।

लेकिन अब शहर की राजनीति में एक नया सवाल खड़ा हो गया है। 15 जून को स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का जन्मदिन है और उनके समर्थकों द्वारा शहर के विभिन्न क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पोस्टर-बैनर लगाए जा रहे हैं। कई स्थानों पर बिजली के खंभों और सार्वजनिक स्थलों पर मंत्री के जन्मदिन की शुभकामनाओं वाले पोस्टर दिखाई दे रहे हैं।

ऐसे में नगर निगम की घोषित नीति और जमीनी स्थिति के बीच तुलना स्वाभाविक रूप से होने लगी है। शहर में चर्चा इस बात की है कि क्या निगम प्रशासन और महापौर अपने ही जारी निर्देशों का पालन कराते हुए इन पोस्टरों को भी हटवाएंगे, या फिर राजनीतिक दबाव और सत्ता समीकरणों के कारण नियमों के पालन में भेदभाव दिखाई देगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल पोस्टर-बैनर का मामला नहीं, बल्कि प्रशासनिक निष्पक्षता और कानून के समान अनुपालन की परीक्षा भी है। यदि नियम बनाए गए हैं तो उनका पालन हर व्यक्ति, संगठन और राजनीतिक दल पर समान रूप से लागू होना चाहिए। वहीं यदि कार्रवाई नहीं होती है तो निगम प्रशासन की मंशा और उसकी विश्वसनीयता पर प्रश्न उठ सकते हैं।

अब सबकी निगाहें महापौर अलका बाघमार और निगम प्रशासन पर टिकी हैं। संविधान और कानून के प्रति समान निष्ठा की बात करने वाली शहरी सरकार क्या अपने ही आदेशों को प्रभावी ढंग से लागू करेगी, या फिर यह मामला भी राजनीतिक अपवाद बनकर रह जाएगा? आने वाले दिनों में निगम का कदम इस प्रश्न का उत्तर तय करेगा।

(नोट: यह विषय सार्वजनिक स्थलों पर पोस्टर-बैनर संबंधी नियमों के समान अनुपालन और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा राजनीतिक-प्रशासनिक प्रश्न है।)

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