Google Analytics —— Meta Pixel
April 11, 2026
Hindi Hindi
बस्तर

बस्तर (1114)

 

पुनर्वास केंद्र के 116 आत्मसमर्पित युवाओं का बना मतदाता कार्ड

रायपुर /छत्तीसगढ़ शासन की नक्सल पुनर्वास नीति के तहत समाज की मुख्यधारा में लौट रहे आत्मसमर्पित युवाओं को अब लोकतंत्र से जोड़ने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक ऐतिहासिक पहल की है। सुकमा जिले के पुनर्वास केंद्र में निवासरत 116 हितग्राहियों का मतदाता परिचय पत्र (वोटर आईडी कार्ड) बनाकर उन्हें मतदान का अधिकार सुनिश्चित किया गया है।

जिला शासन के इस सकारात्मक कदम से अब ये पुनर्वासित युवा अपने मताधिकार का प्रयोग कर पंच, सरपंच, जनपद सदस्य, जिला पंचायत सदस्य, विधायक सहित अन्य जनप्रतिनिधियों का चयन कर सकेंगे। इतना ही नहीं, लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उनकी भागीदारी को और मजबूत करते हुए अब वे भविष्य में स्वयं भी चुनाव लड़ने के पात्र बन गए हैं। यह बदलाव उनके जीवन में सम्मान, अधिकार और आत्मविश्वास की नई शुरुआत माना जा रहा है।

सरकार की नीति से बदली जिंदगी
जिला प्रशासन द्वारा बताया गया कि छत्तीसगढ़ शासन की नक्सल पुनर्वास नीति का लाभ आत्मसमर्पित युवाओं को लगातार दिया जा रहा है। पुनर्वास केंद्र में निवासरत 116 हितग्राहियों के राशन कार्ड, जॉब कार्ड, आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, श्रम कार्ड पंजीयन के साथ-साथ पीएम आवास योजना सर्वे भी पूरा कराया गया है। इससे उन्हें सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिलना सुनिश्चित हो गया है।

कौशल प्रशिक्षण से आत्मनिर्भरता की ओर कदम
पुनर्वासित युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा उन्हें विभिन्न प्रकार के कौशल प्रशिक्षण भी प्रदान किए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि कृषि उद्यमिता प्रशिक्षण में 48 हितग्राही, सिलाई मशीन प्रशिक्षण में 5 हितग्राही, कृषि उद्यमी एवं राजमिस्त्री प्रशिक्षण में 265 हितग्राही, वाहन चालक प्रशिक्षण में 14 हितग्राही और मुर्गी पालन प्रशिक्षण में 25 हितग्राही कुल मिलाकर 317 पुनर्वासित युवा कौशल प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। जिला प्रशासन की यह पहल न केवल पुनर्वासित युवाओं को पहचान और अधिकार दिला रही है, बल्कि उन्हें एक बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर भी कर रही है।

By - नरेश देवांगन 

जगदलपुर, शौर्यपथ। ग्राम पंचायत बनियागांव क्षेत्र में भसखंली नदी से कथित अवैध रेत उत्खनन और बड़े पैमाने पर डंपिंग को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, कुछ प्रभावशाली तत्वों द्वारा नदी से रेत निकालकर बनियागांव में भारी मात्रा में डंप किया गया है। आरोप है कि यह पूरा खेल जिम्मेदारों के नाक के नीचे संचालित हो रहा है, लेकिन कार्रवाई लगभग शून्य नजर आ रही है।

अवैध रेत डंपिंग पर रोक लगाने एवं कार्रवाई की मांग को लेकर ग्रामीणों ने पूर्व में जिला कलेक्टर को लिखित शिकायत भी सौंपी थी, जिसमें कथित अवैध उत्खनन और भंडारण का उल्लेख है। बावजूद इसके, अब तक कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आने से प्रशासनिक निष्क्रियता पर सवाल उठ रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतों के बाद अधिकारी मौके पर पहुंचे जरूर, लेकिन कार्रवाई सीमित और औपचारिक रही। जिससे कथित रूप से जुड़े लोगों के हौसले और बढ़े हैं और अवैध डंपिंग का सिलसिला जारी है।

यदि आरोपों में तथ्य पाए जाते हैं, तो इस तरह की गतिविधियों से शासन को रेत रॉयल्टी के रूप में भारी राजस्व नुकसान होने की आशंका है। साथ ही, अनियंत्रित उत्खनन से पर्यावरणीय असंतुलन की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।

सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी सामने आ रही है कि उक्त रेत का उपयोग औद्योगिक कार्यों एवं खुले बाजार में किया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर “भारती” नामक व्यक्ति का नाम भी चर्चाओं में है, हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

जांच के घेरे में व्यवस्था

शिकायत के बाद भी प्रभावी कार्रवाई नहीं होना कई सवाल खड़े कर रहा है। यह प्रशासनिक शिथिलता है या अन्य कारण—यह निष्पक्ष जांच का विषय है। परिस्थितियों को देखते हुए यह संदेह भी जताया जा रहा है कि कहीं न कहीं उदासीनता इस पूरे प्रकरण को बढ़ावा तो नहीं दे रही।

 

ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष जांच कर तथ्य सामने लाने तथा दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि अवैध रेत डंपिंग के इस खेल पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

अजय चंद्राकर की खास रिपोर्ट 

सुकमा, शौर्यपथ। ग्राम जगरगुंडा जिला सुकमा क्षेत्र अंतर्गत खसरा नंबर 386 पर प्रस्तावित सड़क निर्माण कार्य को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। संबंधित भूमि के भू-स्वामी माड़वी सत्यानारायण ने आरोप लगाया है कि उनकी असहमति के बावजूद उनकी निजी भूमि पर सड़क निर्माण से संबंधित प्रारंभिक कार्य किया गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सड़क निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदार द्वारा भूमि की सफाई एवं मुरूम डालने का कार्य किया गया, जबकि भू-स्वामी का दावा है कि उन्होंने पूर्व में ही इस पर आपत्ति दर्ज कराई थी। भू-स्वामी ने मामले में स्थानीय राजस्व अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

मामले को लेकर यह प्रश्न भी उठ रहा है कि क्या निर्माण कार्य से पूर्व नियमानुसार भूमि का सर्वे एवं आवश्यक अनुमति की प्रक्रिया पूरी की गई थी। यदि प्रक्रिया का विधिवत पालन हुआ होता, तो विवाद की स्थिति से बचा जा सकता था।

इस संबंध में पटवारी बुधराम बघेल ने बताया कि संबंधित दिन वे कार्यालयीन कार्य से तहसील कार्यालय में थे और उन्हें मौके पर चल रहे कार्य की जानकारी नहीं थी। 

इस सम्बन्ध मे तहसीलदार योपेंद्र पात्रे से फ़ोन पे जानकारी चाही गई तो उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि संबंधित भू-स्वामी भूमि उपलब्ध कराने के लिए सहमत नहीं हैं, तो वैकल्पिक रूप से अन्य शासकीय भूमि पर सड़क निर्माण कार्य किया जायेगा।

इधर, यह मुद्दा भी उभरकर सामने आया है कि यदि सड़क निर्माण अंततः अन्य भूमि पर किया जाना है, तो निजी भूमि पर किए गए प्रारंभिक कार्य में हुए व्यय की जवाबदेही किसकी होगी। इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टता सामने नहीं आई है।

भू-स्वामी का कहना है कि उनकी भूमि का सीमांकन पूर्व में किया जा चुका है और बिना अनुमति किसी भी प्रकार का कार्य किया जाना उचित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे अपनी भूमि सड़क निर्माण हेतु देने के पक्ष में नहीं हैं।

फिलहाल, यह मामला प्रशासनिक प्रक्रिया, पारदर्शिता एवं नागरिक अधिकारों से जुड़ा विषय बन गया है। संबंधित अधिकारियों द्वारा मामले की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

जगदलपुर, शौर्यपथ । विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल द्वारा हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर एक भव्य एवं दिव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत सिरासार भवन में दीप प्रज्वलित कर की गई। इसके पश्चात सभी पदाधिकारी एवं बजरंगी कार्यकर्ता रैली के रूप में टेकरी स्थित हनुमान मंदिर पहुँचे, जहाँ सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया गया।

प्रांत सह मंत्री रवि ब्रह्मचारी ने कहा कि हमारी संस्कृति ही हमारी पहचान है, और हम सभी को मिलकर सनातन एकता का परिचय देना आवश्यक है। जिलाध्यक्ष शंकर लाल गुप्ता ने कहा कि हमारे बजरंगी ही हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने धर्मांतरण कानून का समर्थन करते हुए सरकार का धन्यवाद किया और कहा, "यह कानून हमारी संस्कृति और धर्म की रक्षा के लिए आवश्यक है, और हम इसका स्वागत करते हैं।" उन्होंने आगे कहा कि बजरंग दल इस कानून को लागू करने में सरकार का हर संभव सहयोग करेगा।

अरविंद नेताम ने संबोधन करते हुए कहा कि धर्मांतरण आज हमारे समाज के लिए सबसे बड़ा खतरा बना है, "हम अपनी संस्कृति और धर्म की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर हैं, और किसी भी प्रकार के धर्मांतरण को बर्दाश्त नहीं करेंगे।"सरकार द्वारा लाए गए कानून का समर्थन कर स्वागत करते हैं।

कार्यक्रम में राजा राम तोड़ेम, दशरथ कश्यप, जागेश्वर साहू, प्रेम चालकी, जविता मंडावी, जिला संयोजक विष्णु ठाकुर, सहसंयोजक योगेश, सेवा प्रमुख अनिल अग्रवाल, अर्चक पुरोहित पंकज मिश्रा, सेवा प्रमुख पवन राजपूत, योगेंद्र कौशिक, विभाग सह मंत्री श्रीनिवास रेड्डी विक्रम सिंह ठाकुर, प्रतिक गुरु,मनोज कुमार ठाकुर, प्रेमसागर ठाकुर ,सहित अनेक कार्यकर्ता एवं सनातनी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन योगेंद्र कौशिक द्वारा सभी अतिथियों का आभार व्यक्त कर किया गया।

नरेश देवांगन की खास रिपोर्ट 

जगदलपुर, शौर्यपथ। राज्य सरकार द्वारा रेत माफियाओं पर लगाम कसने के लिए लगातार सख्त निर्देश जारी किए जा रहे हैं। अवैध उत्खनन, परिवहन और पर्यावरणीय क्षति को रोकने के उद्देश्य से समय-समय पर समीक्षा और निगरानी भी की जा रही है। शासन की मंशा स्पष्ट है कि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग नियमों के दायरे में हो और किसी भी प्रकार की अनियमितता पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

इसके बावजूद ताज़ा मामला ग्राम पंचायत बेलगांव का है, जहां शासन की मंशा के विपरीत गतिविधियों के सामने आने के आरोप लग रहे हैं। प्राप्त जानकारी और सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र में कथित रूप से अवैध रेत उत्खनन जारी है, जहां नियमों की अनदेखी करते हुए रेत निकासी की जा रही है।

बताया जाता है कि माइनिंग विभाग द्वारा पूर्व में कार्रवाई करते हुए एक पोकलेन मशीन को सील किया गया था, लेकिन इसके बाद भी संबंधित मशीन के उपयोग में आने की बात सामने आई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जब विभागीय टीम पुनः मौके पर पहुंची और मशीन को जब्त कर थाना ले जाने का प्रयास किया गया, तब कुछ ग्रामीणों द्वारा विरोध किए जाने की सूचना है।

सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी मिल रही है कि कुछ बाहरी प्रभावशाली लोगों द्वारा ग्रामीणों को प्रलोभन देकर अपने पक्ष में करने की कोशिश की जा रही है। कथित तौर पर ग्रामीणों से यह कहा जा रहा है कि गांव में होने वाले बाली पर्व धार्मिक आयोजन का खर्च उठाया जाएगा, जिसके बदले रेत निकालने की अनुमति दी जाए। वहीं, कार्रवाई के दौरान ग्रामीणों को आगे कर यह प्रस्तुत किया जाता है कि रेत का उपयोग गांव के निजी कार्यों के लिए किया जा रहा है।

बुधवार को हुई कार्रवाई के दौरान स्थिति उस समय और जटिल हो गई, जब माइनिंग विभाग की टीम सील मशीन को अपने कब्जे में लेने पहुंची और विरोध के चलते मौके पर भीड़ एकत्रित हो गई। सूचना पर तहसीलदार, एसडीएम एवं नगरनार थाना की टीम भी मौके पर पहुंची, जहां अधिकारियों द्वारा समझाइश दी गई कि यदि ग्रामीण अपने सीमित उपयोग के लिए रेत निकालते हैं तो वह नियमों के अनुरूप हो, लेकिन किसी भी स्थिति में मशीनों का उपयोग न किया जाए।

हालांकि, सूत्रों के अनुसार, इसके बाद भी कथित रूप से रात के समय मशीनों के जरिए नदी से रेत उत्खनन और बाहरी परिवहन की गतिविधियां जारी रहने की बातें सामने आ रही हैं। यदि यह तथ्य जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल नियमों का उल्लंघन होगा बल्कि प्रशासनिक कार्रवाई को भी चुनौती माना जाएगा।

 

टेंडर प्रक्रिया पर भी मंडराया संकट, राजस्व नुकसान की आशंका

इसी बीच सूत्र यह भी संकेत दे रहे हैं कि संबंधित क्षेत्र की रेत खदान को लेकर विभाग द्वारा आगामी समय में टेंडर प्रक्रिया प्रस्तावित है। ऐसे में यदि वर्तमान में कथित रूप से अवैध उत्खनन इसी प्रकार जारी रहा और रेत का अत्यधिक दोहन होता रहा, तो भविष्य में खदान का वास्तविक भंडार प्रभावित हो सकता है। इससे न केवल संभावित ठेकेदार को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है, बल्कि शासन को मिलने वाली रॉयल्टी पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

ऐसी स्थिति में आवश्यक है कि प्रशासन पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए तथ्यों की निष्पक्ष जांच कराए और यदि अनियमितताएं पाई जाती हैं तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि शासन की मंशा, पर्यावरणीय संतुलन और राजस्व हितों की प्रभावी सुरक्षा हो सके।

   जगदलपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक धरोहर के केंद्र बस्तर में सोमवार से खेलों का एक नया इतिहास लिखा जाने वाला है। 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026' के प्रथम संस्करण के तहत रायपुर में हुए भव्य उद्घाटन के बाद अब खेल प्रेमियों की नजरें जगदलपुर के धरमपुरा स्थित क्रीड़ा परिसर पर टिकी हैं, जहाँ 30 मार्च से एथलेटिक्स की रोमांचक स्पर्धाएं शुरू होने जा रही हैं। इस आयोजन का शुभंकर 'मोर वीर' जनजातीय युवाओं के अदम्य साहस और ऊर्जा का प्रतिनिधित्व कर रहा है। केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया के मुख्य आतिथ्य और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में शुरू हुआ यह महाकुंभ अब अपने सबसे प्रतीक्षित चरण में प्रवेश कर रहा है, जिसमें देश के 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 443 प्रतिभावान खिलाड़ी अपनी खेल प्रतिभा का लोहा मनवाएंगे।
बस्तर में आयोजित होने वाली एथलेटिक्स स्पर्धाओं में कुल 17 विधाएं शामिल हैं, जिनमें 100 मीटर की फर्राटा दौड़ से लेकर 10,000 मीटर की लंबी दूरी की रेस, हर्डल्स, रिले रेस, और ऊँची व लंबी कूद जैसी श्रेणियाँ आकर्षण का केंद्र रहेंगी। पहले ही दिन डिस्कस थ्रो, लॉन्ग जंप और 110 मीटर हर्डल्स जैसे फाइनल मुकाबले देखने को मिलेंगे। शाम होते-होते 400 मीटर और रिले रेस के रोमांच के बीच विजेता खिलाड़ियों को पदक प्रदान किए जाएंगे। इस पूरे आयोजन के दौरान एथलेटिक्स में कुल 102 पदकों के लिए खिलाड़ी पसीना बहाएंगे, जिनमें छत्तीसगढ़ के 33 स्थानीय खिलाड़ी भी राज्य का मान बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
प्रशासनिक स्तर पर इस आयोजन को 'खेलो इंडिया' के अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप भव्य बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है। खेल एवं युवा कल्याण विभाग और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में खिलाड़ियों के आवास के लिए शहर के 13 प्रमुख होटलों को चिन्हित किया गया है, जबकि उनके आवागमन के लिए एसी वाहनों की सुविधा सुनिश्चित की गई है। सुरक्षा, चिकित्सा और अग्निशमन की पुख्ता व्यवस्था के साथ-साथ पर्यटन विभाग द्वारा आगंतुक खिलाड़ियों और ऑफिशियल्स को बस्तर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों का भ्रमण भी कराया जाएगा, ताकि वे खेल के साथ-साथ यहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य और अनूठी संस्कृति से भी रूबरू हो सकें। भारतीय खेल प्राधिकरण के मार्गदर्शन में आयोजित यह स्पर्धा न केवल जनजातीय प्रतिभाओं को एक राष्ट्रीय मंच प्रदान करेगी, बल्कि बस्तर की वैश्विक छवि को एक खेल गंतव्य के रूप में भी स्थापित करेगी।

जगदलपुर, शौर्यपथ। राज्य शासन की पशुधन संवर्धन एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता एक बार फिर जमीन पर नजर आई, जब पशुधन विकास विभाग द्वारा ग्राम पंचायत हल्बाकचोरा (शासन कचोरा) में शनिवार को भव्य पशु मेला सह पशु प्रदर्शनी का सफल आयोजन किया गया। इस आयोजन ने न केवल पशुपालकों को नई दिशा दी, बल्कि क्षेत्र में उन्नत पशुपालन के प्रति जागरूकता भी बढ़ाई।

सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी कलचा बृजमोचन देवांगन ने बताया कि विभाग लगातार पशुपालकों को आधुनिक तकनीक, उन्नत नस्ल एवं वैज्ञानिक पद्धतियों से जोड़ने के लिए ऐसे आयोजनों को बढ़ावा दे रहा है, जिससे पशुपालकों की आय में वृद्धि हो सके।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जनपद पंचायत अध्यक्ष पदलाम नाग रहे। उपाध्यक्ष पुरुषोत्तम बघेल, कृषि एवं पशुधन सभापति भूपेंद्र ठाकुर, जनपद सदस्य श्रुति शर्मा, सरपंच जयमनी कश्यप एवं उप सरपंच लोकनाथ बघेल की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को और भव्य बनाया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अपर उप संचालक डॉ. जे. तिग्गा ने की।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां शीतला मंदिर में दीप प्रज्वलित कर देवी के आशीर्वाद के साथ किया गया, जिससे पूरे आयोजन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ।

मेले में दुधारू गाय, देसी भैंस वंश, बकरी-भेड़, बतख एवं कुक्कुट वंश के साथ-साथ असील प्रजाति और हरियाणा नस्ल के बैलों की आकर्षक प्रदर्शनी ने सभी का मन मोह लिया। पशुपालकों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपने श्रेष्ठ पशुओं का प्रदर्शन किया।

विशेष रूप से कृत्रिम गर्भाधान से उत्पन्न उत्कृष्ट दुधारू पशु, उन्नत नस्ल के बकरों (जमुनापारी) एवं बेहतर कुक्कुट वंश के पक्षियों को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार देकर पशुपालकों को प्रशस्ति पत्र के साथ सम्मानित किया गया। इससे पशुपालकों में नई ऊर्जा और प्रतिस्पर्धा की भावना देखने को मिली।

कार्यक्रम के सफल संचालन में डॉ. गीतिका ध्रुव, डॉ. योगेश देवांगन, डॉ. नंदकिशोर मांझी, डॉ. अभिषेक तिर्की, डॉ. सिन्हा सहित अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों का सराहनीय योगदान रहा। साथ ही कामधेनु विश्वविद्यालय जगदलपुर के प्रशिक्षु विद्यार्थी, प्राचार्य एवं स्टाफ की सक्रिय सहभागिता ने कार्यक्रम को और समृद्ध बनाया।

ग्रामीणों एवं पशुपालकों ने राज्य सरकार एवं पशुधन विकास विभाग के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।

जगदलपुर, शौर्यपथ। जगदलपुर स्थित महारानी अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों के लिए लगाए गए पेयजल व्यवस्था को लेकर लापरवाही सामने आने का दावा किया गया है। जन कल्याण संघ के प्रदेश महासचिव विपिन कुमार तिवारी ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि अस्पताल परिसर में लगाया गया आर.ओ. वाटर प्यूरीफायर काफी समय से बंद पड़ा हुआ है। उनके अनुसार मशीन के भीतर जमा पानी भी काफी पुराना हो चुका है, जिससे उसमें काई या अन्य प्रकार की अशुद्धियाँ पनपने की आशंका जताई जा रही है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में ग्रीष्मकाल की शुरुआत हो चुकी है और अस्पताल में आने वाले मरीजों व उनके परिजनों के लिए स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता अत्यंत आवश्यक है। यदि अनजाने में कोई व्यक्ति उक्त प्यूरीफायर का पानी पी लेता है, तो उसके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इस स्थिति को देखते हुए अस्पताल प्रशासन द्वारा समय रहते आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता बताई गई है।

जन कल्याण संघ के अनुसार अस्पताल प्रबंधन को तत्काल आर.ओ. प्यूरीफायर की मरम्मत कराने या वैकल्पिक स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर ध्यान देना चाहिए, ताकि मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

संघ के प्रदेश महासचिव ने यह भी कहा कि सामान्यतः शासकीय व्यवस्थाओं में यह देखा जाता है कि यदि कोई अधिकारी लंबे समय तक एक ही पद पर बना रहता है तो कई बार व्यवस्थागत कमियों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा पाता। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि महारानी अस्पताल के अधीक्षक लंबे समय से उक्त पद पर पदस्थ बताए जाते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि शासन की स्थानांतरण नीति के अनुसार समय-समय पर अधिकारियों का स्थानांतरण होने से नई कार्यशैली और जवाबदेही के साथ व्यवस्थाओं में सुधार का अवसर मिलता है। फिलहाल अस्पताल की पेयजल व्यवस्था को लेकर उठे इस मुद्दे पर प्रशासन की प्रतिक्रिया और सुधारात्मक कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है।

नोटिस का पालन या दिखावा? कई पोलों पर अब भी साफ पढ़ा जा रहा ‘WILD WADI’

By – नरेश देवांगन

जगदलपुर, शौर्यपथ। आड़ावाल से कुरंदी मुख्य मार्ग पर शासकीय विद्युत लाइट खंभों पर पेंट के माध्यम से निजी प्रचार लिखे जाने संबंधी खबर “शौर्यपथ” में प्रकाशित हुए लगभग दो सप्ताह बीत चुके हैं, लेकिन स्थिति पूरी तरह सामान्य होती दिखाई नहीं दे रही है। खबर के प्रकाशन के बाद संबंधित विभाग ने संज्ञान लेने, नोटिस जारी करने और नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया था।

मौके पर अवलोकन करने पर यह सामने आया कि खंभों पर लिखे गए प्रचार पर सफेद रंग पोतकर उसे ढकने का प्रयास किया गया है। हालांकि, कई स्थानों पर “WILD WADI” नाम अब भी स्पष्ट रूप से पढ़ा जा सकता है। प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि मूल पेंट को तकनीकी तरीके से हटाने के बजाय उस पर रंग चढ़ाया गया है।

विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार विभाग ने मामले की आंतरिक गणना कराई है, जिसमें लगभग 130 शासकीय खंभों पर उक्त नाम पेंट से लिखे जाने की जानकारी सामने आई है। यदि यह तथ्यात्मक रूप से सही है, तो यह उल्लंघन सीमित नहीं बल्कि व्यापक स्तर का माना जाएगा। ऐसे में यह प्रश्न स्वाभाविक है कि क्या नोटिस जारी कर आंशिक सफेदी कर देना पर्याप्त अनुपालन की श्रेणी में माना जा सकता है?

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शासकीय संपत्ति पर बिना विधिवत अनुमति किसी भी प्रकार का लेखन या विज्ञापन नियमानुसार प्रतिबंधित है। इसलिए कार्रवाई भी ऐसी होनी चाहिए जो स्पष्ट, पारदर्शी और उदाहरणात्मक हो। कई खंभों पर उभरते अक्षर संकेत देते हैं कि कार्य पूर्णतः संतोषजनक नहीं हुआ है।

दूसरे मार्ग पर नए फ्लेक्स, उठे नए सवाल

इसी बीच हाटगुड़ा से माड़पाल मार्ग पर मुख्य विद्युत खंभों पर “SIDDHARTH COMPUTER ACADEMY” के फ्लेक्स लगाए जाने की जानकारी भी सामने आई है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह हालिया स्थापना है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि एक मामले में सख्त और उदाहरणात्मक कार्रवाई होती, तो संभवतः अन्य स्थानों पर इस प्रकार की पुनरावृत्ति नहीं होती।

यदि संबंधित संस्थान या व्यक्ति के पास विधिवत अनुमति है, तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। यदि अनुमति नहीं है, तो नियमानुसार समान रूप से कार्रवाई अपेक्षित है। नागरिकों का मत है कि नियमों का अनुपालन सभी पर समान रूप से होना चाहिए, अन्यथा कार्रवाई की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठते हैं।

पारदर्शिता और जवाबदेही की अपेक्षा

प्रशासनिक कार्रवाई का उद्देश्य केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन होना चाहिए। यदि लगभग 130 खंभों पर उल्लंघन दर्ज हुआ है, तो सुधारात्मक और संभावित दंडात्मक कदमों की स्थिति भी स्पष्ट की जानी चाहिए। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि भविष्य में इस प्रकार की पुनरावृत्ति पर भी रोक लगेगी।

यह खबर किसी व्यक्ति या संस्था विशेष के विरुद्ध आरोप स्थापित करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि शासकीय संपत्ति के संरक्षण और नियमों के समान अनुपालन की अपेक्षा को रेखांकित करने के लिए प्रकाशित की जा रही है।

अब सबकी निगाहें संबंधित विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं—क्या पेंट प्रचार को पूर्णतः तकनीकी तरीके से हटाकर एक स्पष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया जाएगा, या वर्तमान स्थिति को ही पर्याप्त मान लिया जाएगा?

सवाल सीधा है: क्या नियम व्यवहार में भी उतनी ही गंभीरता से लागू होंगे, जितनी कागज़ों में दिखाई देते हैं?

Page 1 of 124

हमारा शौर्य

हमारे बारे मे

whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
 
CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
CONTECT NO.  -  8962936808
EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)