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April 11, 2026
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भारत

भारत (989)

नई दिल्ली ।
देश में सड़क सुरक्षा को जनआंदोलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत सड़क सुरक्षा सम्मेलन 2026 का आयोजन दिल्ली के विवेकानंद स्कूल आनंद विहार में सफलतापूर्वक किया गया। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, शिक्षकों, छात्रों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता को व्यवहारिक कार्रवाई में बदलने का संकल्प लिया।

4,000 छात्र और 500 शिक्षक बने सड़क सुरक्षा के संदेशवाहक

सम्मेलन में कक्षा 3 से 12 तक के लगभग 4,000 छात्रों और करीब 100 स्कूलों के 500 से अधिक शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में पोस्टर निर्माण, नुक्कड़ नाटक, भूमिका-निर्वाह, पैनल चर्चा, वृत्तचित्र निर्माण और नवाचार प्रतियोगिताओं जैसी गतिविधियों के माध्यम से छात्रों को सड़क सुरक्षा राजदूत बनने के लिए प्रेरित किया गया।

इस अवसर पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विधायक ओम प्रकाश शर्मा सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भी उपस्थिति रही।

राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क में तेजी, सुरक्षा पर विशेष जोर

अपने संबोधन में मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और नितिन गडकरी के मार्गदर्शन में देश में राजमार्ग विकास में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने बताया कि भारत में आज लगभग 1.46 लाख किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क विकसित हो चुका है, जो विश्व के सबसे बड़े सड़क नेटवर्क में से एक है।

उन्होंने यह भी कहा कि सड़क सुरक्षा केवल नियमों का पालन नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिकता का प्रतीक है। हेलमेट पहनना, सीट बेल्ट लगाना और मोबाइल फोन से ध्यान भटकाने से बचना जैसी आदतें हजारों जीवन बचा सकती हैं।

‘4E रणनीति’ से सड़क दुर्घटनाओं में कमी का लक्ष्य

सरकार द्वारा सड़क सुरक्षा के लिए अपनाई गई 4E रणनीति

  • Engineering (इंजीनियरिंग)
  • Enforcement (प्रवर्तन)
  • Education (शिक्षा)
  • Emergency Care (आपातकालीन देखभाल)

—को प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम 2019 के माध्यम से कड़े दंड प्रावधान लागू कर प्रवर्तन को मजबूत किया गया है।

दुर्घटना पीड़ितों के लिए राहत और आधुनिक सुविधाएं

मंत्री ने बताया कि दुर्घटना पीड़ितों की सहायता के लिए 1.5 लाख रुपये तक की नकद सहायता उपलब्ध कराने वाली योजनाएं लागू की गई हैं। इसके साथ ही—

  • आधुनिक एम्बुलेंस नेटवर्क
  • ट्रॉमा केयर सेंटर
  • ब्लैक स्पॉट सुधार कार्यक्रम
  • एआई-आधारित निगरानी और इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम
  • फास्टैग आधारित टोलिंग

जैसी तकनीकों से सड़क सुरक्षा को मजबूत किया जा रहा है।

स्कूल स्तर पर सुरक्षा संस्कृति विकसित करने पर जोर

सम्मेलन में स्कूल स्तर पर सड़क सुरक्षा क्लब स्थापित करने, गेट सुरक्षा गश्ती प्रणाली लागू करने और डेटा-आधारित निर्णयों को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया। छात्रों ने कार्यक्रम के अंत में यातायात नियमों का पालन करने और दूसरों को भी जागरूक करने का सामूहिक संकल्प लिया।

निष्कर्ष:
सड़क सुरक्षा सम्मेलन-2026 ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि सुरक्षित सड़कें केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य हैं। छात्रों और शिक्षकों की बड़ी भागीदारी ने यह संकेत दिया है कि जागरूकता और जिम्मेदारी के माध्यम से ही “सुरक्षित सड़कें, सुरक्षित भारत” का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

नई दिल्ली ।
पश्चिम एशिया में चल रहे घटनाक्रमों और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े हालात को देखते हुए भारत सरकार ने ईंधन आपूर्ति, समुद्री सुरक्षा और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक कदम उठाए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की उपलब्धता पर्याप्त है तथा नागरिकों को घबराकर खरीदारी न करने की सलाह दी गई है।

ईंधन आपूर्ति सामान्य, रिफाइनरियां पूरी क्षमता से चालू

सरकार के अनुसार सभी तेल शोधन कारखाने पूरी क्षमता से कार्य कर रहे हैं और कच्चे तेल के पर्याप्त भंडार उपलब्ध हैं। देशभर में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है तथा एलपीजी का उत्पादन भी बढ़ाया गया है। तेल विपणन कंपनियों ने किसी भी पेट्रोल पंप पर ईंधन की कमी की सूचना नहीं दी है।

पीएनजी को बढ़ावा, एलपीजी पर दबाव कम करने की तैयारी

सरकार ने सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे होटल, रेस्तरां और कैंटीन जैसे वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को पीएनजी कनेक्शन प्राथमिकता से दें। प्रमुख शहरों में वाणिज्यिक एलपीजी उपभोक्ताओं को एलपीजी के स्थान पर पीएनजी अपनाने का परामर्श दिया गया है।

राज्यों और मंत्रालयों को सीजीडी नेटवर्क के विस्तार और अनुमोदन प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही सभी सरकारी कार्यालयों और कैंटीनों को भी जहां संभव हो पीएनजी का उपयोग शुरू करने की सलाह दी गई है।

वाणिज्यिक एलपीजी का अतिरिक्त आवंटन

सरकार ने राज्यों को 20 प्रतिशत अतिरिक्त वाणिज्यिक एलपीजी स्वीकृत की है, जिससे कुल आवंटन अब 50 प्रतिशत हो गया है। यह अतिरिक्त गैस मुख्य रूप से—

  • रेस्तरां, होटल और ढाबों
  • औद्योगिक एवं सामुदायिक कैंटीन
  • डेयरी एवं खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों
  • प्रवासी श्रमिकों के लिए 5 किलो एफटीएल सिलेंडर
  • रियायती कैंटीन और सामुदायिक रसोई

जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर दी जाएगी।

जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्ती

सरकार ने एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए कई राज्यों में बड़े पैमाने पर छापेमारी शुरू की है। अब तक 3,500 से अधिक छापे मारे जा चुके हैं और लगभग 1,400 सिलेंडर जब्त किए गए हैं।

इसके अलावा देशभर में 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नियंत्रण कक्ष और जिला स्तरीय निगरानी समितियां स्थापित की गई हैं।

समुद्री संचालन सामान्य, बंदरगाहों पर कोई भीड़ नहीं

सरकार ने बताया कि भारत का समुद्री क्षेत्र सामान्य रूप से कार्य कर रहा है और किसी भी बंदरगाह पर भीड़भाड़ की सूचना नहीं है। पश्चिमी फारस की खाड़ी क्षेत्र में भारतीय ध्वज वाले 22 जहाज और 611 भारतीय नाविक मौजूद हैं, जिनकी सुरक्षा पर लगातार नजर रखी जा रही है।

अब तक 534 से अधिक भारतीय नाविकों को सुरक्षित स्वदेश वापस लाया जा चुका है।

भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

विदेश मंत्रालय ने बताया कि पश्चिम एशिया में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता है। क्षेत्र में भारतीय दूतावास 24×7 हेल्पलाइन और सहायता सेवाएं संचालित कर रहे हैं।

इस बीच, नरेन्द्र मोदी ने मसूद पेज़ेशकियान तथा हामद बिन ईसा अल खलीफा से बातचीत कर क्षेत्रीय स्थिति पर चर्चा की और समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर जोर दिया।

एक सकारात्मक घटनाक्रम में एमटी सेफसी विष्णु जहाज के 15 भारतीय चालक दल सदस्य इराक से सुरक्षित स्वदेश लौट आए हैं।

नागरिकों के लिए सलाह

सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि—

  • घबराकर एलपीजी या ईंधन की बुकिंग न करें
  • केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें
  • वैकल्पिक ईंधन जैसे पीएनजी या इंडक्शन कुकटॉप अपनाएं
  • ऊर्जा संरक्षण के उपायों को अपनाएं

निष्कर्ष:
पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति के बावजूद भारत सरकार ने ईंधन आपूर्ति, समुद्री सुरक्षा और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक और बहु-स्तरीय व्यवस्था की है। सरकार का कहना है कि स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और आवश्यकतानुसार अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे। ⚡?

नई दिल्ली ।
भारत सरकार के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन प्रकृति 2026 का शुभारंभ नई दिल्ली में केंद्रीय ऊर्जा एवं आवास-शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने किया। इस अवसर पर भारतीय कार्बन बाजार पोर्टल का भी शुभारंभ किया गया, जो देश में कार्बन बाजार के संचालन और प्रशासन के लिए केंद्रीय डिजिटल मंच के रूप में कार्य करेगा।

यह सम्मेलन ऊर्जा दक्षता ब्यूरो द्वारा विद्युत मंत्रालय तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के संरक्षण में आयोजित किया जा रहा है। यह आयोजन भारत विद्युत शिखर सम्मेलन 2026 के अंतर्गत हो रहा है, जिसमें देश-विदेश के विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।

भारतीय कार्बन बाजार को मिला डिजिटल मंच

कार्यक्रम के दौरान लॉन्च किया गया भारतीय कार्बन बाजार पोर्टल देश के कार्बन क्रेडिट तंत्र को पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि भारत ने यह सिद्ध कर दिया है कि जलवायु उत्तरदायित्व और आर्थिक विकास साथ-साथ चल सकते हैं

उन्होंने बताया कि भारत में कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS) के तहत अब तक 9 अधिसूचित पद्धतियां तैयार की जा चुकी हैं और बायोगैस, हाइड्रोजन तथा वानिकी क्षेत्रों में 40 से अधिक संस्थाएं पंजीकृत हैं। साथ ही 7 ऊर्जा-गहन क्षेत्रों की लगभग 490 संस्थाओं के लिए उत्सर्जन लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।

‘तीन C’ से मजबूत होंगे कार्बन बाजार

कार्यक्रम में केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री श्रीपद नाइक ने कार्बन बाजारों को मजबूत बनाने के लिए तीन प्रमुख स्तंभ—विश्वसनीयता, पूंजी और सहयोग—पर जोर दिया।

  • विश्वसनीयता: डिजिटल एमआरवी (Monitoring, Reporting, Verification) के माध्यम से उत्सर्जन की सटीक निगरानी
  • पूंजी: नवीकरणीय ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन में बड़े निवेश
  • सहयोग: पेरिस समझौता के अनुच्छेद-6 के तहत अंतरराष्ट्रीय साझेदारी

उन्होंने कहा कि भारत नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा दक्षता के क्षेत्र में तेजी से वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है।

किसानों और उद्योगों को मिलेगा लाभ

दो दिवसीय इस सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाएगी, जिनमें—

  • डिजिटल एमआरवी प्रौद्योगिकियां
  • कार्बन सीमा नीतियां
  • भवन एवं शीतलन प्रणालियों का कार्बन बाजार में एकीकरण
  • किसानों और एमएसएमई को कार्बन वित्त से जोड़ना
  • स्वच्छ प्रौद्योगिकियों के लिए वित्तपोषण

विशेषज्ञों का मानना है कि कार्बन बाजार न केवल उत्सर्जन कम करने में मदद करेंगे, बल्कि नवाचार, निवेश और उद्यमिता के नए अवसर भी पैदा करेंगे।

जलवायु नेतृत्व की ओर बढ़ता भारत

प्रकृति-2026 सम्मेलन भारत के हरित विकास और जलवायु प्रतिबद्धताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पारदर्शी और विश्वसनीय कार्बन बाजार ढांचा तैयार कर भारत न केवल अपने घरेलू हरित परिवर्तन को गति दे रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर सतत विकास की दिशा में भी अग्रणी भूमिका निभाने की ओर बढ़ रहा है। ??

निष्कर्ष:
‘प्रकृति-2026’ और भारतीय कार्बन बाजार पोर्टल का शुभारंभ भारत के जलवायु लक्ष्यों को गति देने, उद्योगों को हरित दिशा में प्रेरित करने तथा किसानों और उद्यमियों के लिए नए आर्थिक अवसर सृजित करने की दिशा में एक निर्णायक पहल साबित हो रही है।

मुंबई ।
भारत के उभरते तकनीकी नवाचारों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारत इनोवेट्स डीप-टेक प्री-समिट का उद्घाटन मुंबई स्थित आईआईटी बॉम्बे परिसर के एस्पायर–आईआईटी बॉम्बे रिसर्च पार्क फाउंडेशन में किया गया। यह दो दिवसीय राष्ट्रीय आयोजन देश के सर्वश्रेष्ठ डीप-टेक स्टार्टअप्स को वैश्विक मंच तक पहुंचाने की तैयारी का अहम चरण माना जा रहा है।

कार्यक्रम का उद्घाटन भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद ने किया। इस अवसर पर उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. विनीत जोशी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. अभय करंदीकर, आईआईटी बॉम्बे बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन तथा आईआईटी बॉम्बे के निदेशक प्रो. शिरीष केदारे सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

3,000 आवेदनों में से 137 स्टार्टअप्स का चयन

देशभर से प्राप्त 3,000 से अधिक स्टार्टअप आवेदनों में से बहु-स्तरीय चयन प्रक्रिया के बाद 13 प्रमुख तकनीकी क्षेत्रों में 137 उत्कृष्ट डीप-टेक स्टार्टअप्स का चयन किया गया है। इनमें एडवांस्ड कंप्यूटिंग, हेल्थकेयर एवं मेडटेक, स्पेस एवं डिफेंस, सेमीकंडक्टर, बायोटेक्नोलॉजी, स्मार्ट सिटीज, एग्री-फूड टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, आपदा प्रबंधन और इंडस्ट्री 4.0 जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

उद्घाटन के बाद 70 से अधिक स्टार्टअप्स ने पिच सत्रों में अपने नवाचार प्रस्तुत किए, वहीं निवेशकों और उद्योग प्रतिनिधियों ने रिवर्स पिच के माध्यम से तकनीकी आवश्यकताओं और निवेश प्राथमिकताओं पर चर्चा की।

भारत का बढ़ता स्टार्टअप इकोसिस्टम

अपने संबोधन में प्रो. अभय करंदीकर ने बताया कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है, जहां लगभग 2 लाख स्टार्टअप और करीब 125 यूनिकॉर्न कंपनियां सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि डीप-टेक क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार ने जुलाई 2025 में 1 लाख करोड़ रुपये के अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (RDI) कोष को मंजूरी दी है, जिससे निजी क्षेत्र और स्टार्टअप्स को दीर्घकालिक वित्तीय सहयोग मिलेगा।

वैश्विक मंच पर भारत की तैयारी

प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद ने कहा कि भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में तकनीकी नेतृत्व स्थापित करने के लिए डीप-टेक नवाचार अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों, शोध संगठनों और स्टार्टअप्स की भूमिका को देश के भविष्य के लिए निर्णायक बताया।

उच्च शिक्षा सचिव डॉ. विनीत जोशी ने कहा कि भारत इनोवेट्स 2026 एक “पूरे सरकार का प्रयास” है, जो शिक्षा, विज्ञान, रक्षा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों को एक साझा मंच पर लाता है। उन्होंने निवेशकों से महानगरों के साथ-साथ छोटे शहरों के स्टार्टअप्स को भी पहचानने का आह्वान किया।

फ्रांस में होगा वैश्विक समापन

यह प्री-समिट भारत इनोवेट्स 2026 अभियान का प्रारंभिक चरण है, जिसका भव्य समापन जून 2026 में फ्रांस के नीस शहर में आयोजित वैश्विक नवाचार प्रस्तुतीकरण के साथ होगा। यह आयोजन भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026 का हिस्सा है।

22 मार्च को ग्रैंड फिनाले

कार्यक्रम का दूसरा दिन 22 मार्च 2026 को आयोजित होगा, जिसमें अतिरिक्त स्टार्टअप पिच सत्र, नीति चर्चा, निवेशक सहभागिता तथा ग्रैंड फिनाले और पुरस्कार समारोह आयोजित किए जाएंगे। इसमें सर्वश्रेष्ठ स्टार्टअप प्रस्तुतियों को सम्मानित किया जाएगा।

निष्कर्ष:
‘भारत इनोवेट्स डीप-टेक प्री-समिट’ भारत के नवाचार इकोसिस्टम को नई गति देने के साथ देश के स्टार्टअप्स को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है। यह आयोजन भारत को तकनीकी नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाने वाला एक सशक्त कदम माना जा रहा है।

'कैद में देखभाल: चिड़ियाघरों की सर्वोत्तम प्रथाओं को प्रदर्शित करने वाला एक संकलन' शीर्षक से एक प्रकाशन भी जारी किया गया
नई दिल्ली / शौर्यपथ /
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने आज देहरादून स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी में आयोजित केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की 45 वीं बैठक की अध्यक्षता की। बैठक के दौरान चिड़ियाघरों के प्रभावी प्रबंधन मूल्यांकन के दूसरे चरण के प्रगति की समीक्षा की गई।

बैठक में निम्नलिखित निर्णय लिए गए, जिनका विवरण नीचे दिया गया है:
' मेरा चिड़ियाघर ' की अवधारणा पर एक समिति का गठन किया जाए ताकि विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख व्यक्तियों को चिड़ियाघरों से जोड़ा जा सके।
केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की आगामी बैठकों में चिड़ियाघरों द्वारा प्रति बैठक 2 से 3 प्रजातियों के संरक्षण प्रजनन पर हुई प्रगति को प्रस्तुत किया जाएगा।
मानव-तेंदुआ नकारात्मक अंतःक्रियाओं में शामिल तेंदुओं को उन चिड़ियाघरों में स्थानांतरित करने के संबंध में अद्यतन जानकारी दी जानी चाहिए , जिन चिड़ियाघरों ने उनके दीर्घकालिक देखभाल के लिए दूर क्षेत्रों में सुविधाओं की उपलब्धता की सूचना दी हो और जो उचित आवास, रखरखाव और स्वास्थ्य देखभाल सुनिश्चित करती हों।
नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय चिड़ियाघर के आधुनिकीकरण की अवधारणा को अन्य चिड़ियाघरों के लाभ के लिए साझा किया जा सकता है।
चिड़ियाघर के पशु चिकित्सकों के लिए बंदी पशुओं के पोषण पर एक क्षमता निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया जाए।
आगामी बैठकों में नीतिगत मामलों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की अगली बैठक में चिड़ियाघर निदेशक द्वारा एक प्रस्तुति को शामिल किया जाए।
बैठक के दौरान 'कैद में देखभाल: चिड़ियाघरों की सर्वोत्तम प्रथाओं को प्रदर्शित करने वाला संकलन' शीर्षक से एक प्रकाशन जारी किया गया। यह संकलन पशु कल्याण, संरक्षण प्रजनन, अनुसंधान और शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करते हुए चिड़ियाघर प्रबंधन के प्रति भारत के विकसित होते दृष्टिकोण को उजागर करता है।

नई दिल्ली / शौर्यपथ /
भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने आज हाल ही में मुंबई में आयोजित ऐतिहासिक जैन दीक्षा समारोह के आयोजकों, दानदाताओं और इससे जुड़े परिवारों को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि दीक्षा समारोह में प्रतिबिंबित त्याग और सेवा भाव पूरे समाज के लिए प्रेरणा स्रोत है।

लोक भवन में सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि जैन धर्म हमेशा से ही समाज सेवा और अहिंसा, अपरिग्रह और सहिष्णुता के मूल्यों का प्रतीक रहा है, जो आज के समय में अत्यंत प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि जहां अधिकांश लोग सांसारिक जिम्मेदारियों में लिप्त रहते हैं, वहीं दीक्षा लेने वालों द्वारा किया गया त्याग समाज को चिंतन करने, जीवन को सरल बनाने और सचेत जीवन शैली अपनाने के लिए प्रेरित करता है।

उपराष्ट्रपति ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत जैन धर्म सहित कई धर्मों की जन्मभूमि है। यूटी तमिलनाडु और जैन धर्म के बीच गहरे ऐतिहासिक संबंध को रेखांकित किया। उपराष्ट्रपति ने संगम और उत्तर-संगम काल के दौरान तमिल साहित्य और संस्कृति में जैन विद्वानों और भिक्षुओं के महत्वपूर्ण योगदान को याद किया और सिलप्पथिकारम जैसी शास्त्रीय रचनाओं और जैन धर्म के दार्शनिक और नैतिक आदर्शों को प्रतिबिंबित करने वाली अन्य साहित्यिक कृतियों का उल्लेख किया।

जैन दर्शन की सार्वभौमिक प्रासंगिकता पर जोर देते हुए, उपाध्यक्ष ने कहा कि अहिंसा, अपरिग्रह और अनेकांतवाद के सिद्धांत संघर्ष, पर्यावरण क्षरण और सामाजिक विभाजन सहित कई समकालीन वैश्विक चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने कहा कि सादा जीवन जीना, सोच-समझकर उपभोग करना और करुणा का अभ्यास करना न केवल आध्यात्मिक ज्ञान है, बल्कि एक सतत और सामंजस्यपूर्ण भविष्य के लिए मार्गदर्शक भी है।

उपाध्यक्ष ने कहा कि यद्यपि हर कोई संसार का त्याग नहीं कर सकता, लेकिन हर कोई दयालुता, नैतिक जीवन और सभी जीवित प्राणियों के प्रति सम्मान के माध्यम से इन मूल्यों को अपने दैनिक जीवन में अपना सकता है। उन्होंने आगे कहा कि अपने परिवार के सदस्यों को ऐसे महान आध्यात्मिक मार्ग पर समर्पित करना महान आस्था और शक्ति का कार्य है, और ऐसे कार्य समाज की नैतिक और आध्यात्मिक शक्ति में योगदान करते हैं।

उपाध्यक्ष ने भव्य दीक्षा समारोह के आयोजकों, दानदाताओं और इससे जुड़े परिवारों को बधाई दी और विश्वास व्यक्त किया कि समाज के उत्थान के लिए उनके प्रयास आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेंगे।

उपराष्ट्रपति ने गैलरी का भी दौरा किया और जैन पूजा सामग्री, जिसे अष्ट द्रव्य के नाम से जाना जाता है, जैन पवित्र ग्रंथों, जिन्हें सामूहिक रूप से आगम या आगम सूत्र के रूप में जाना जाता है, भगवान महावीर की शिक्षाओं और भगवान महावीर के पवित्र आभूषणों वाले मूलभूत ग्रंथों के प्रदर्शन को देखा।

इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के राज्यपाल श्री जिष्णु देव वर्मा, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस, महाराष्ट्र सरकार में कौशल, रोजगार, उद्यमिता और नवाचार मंत्री श्री मंगल प्रभात लोढ़ा, न्यासी, दानदाता, जैन समुदाय के सदस्य और अन्य विशिष्ट अतिथि उपस्थित थे।

  नई दिल्ली / एजेंसी / राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने चैत्र शुक्लादि, उगादी, गुड़ी पाड़वा, चेटी चांद, नवरेह और सादिबुचेरोबा के शुभ अवसर पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। राष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहा, “चैत्र शुक्लादि, उगादी, गुडी पड़वा, चेती चांद, नवरेह और सादिबुचेरोबा के शुभ अवसर पर, मैं देश-विदेश में रहने वाले सभी देशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं देती हूं।
नव वर्ष के आगमन पर मनाए जाने वाले ये पर्व भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता और प्रकृति के साथ हमारे गहरे संबंध के प्रतीक हैं। उत्सव नई आशाओं, नए संकल्प और सकारात्मक ऊर्जा के साथ जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। हमारी संस्कृत के वाहक ये पर्व मिलकर खुशियां बांटने की हमारी गौरवशाली परंपरा को भी दर्शाते हैं।
मैं कामना करती हूं कि ये सभी त्यौहार भारत के विभिन्न समुदायों को प्रेम, सौहार्द और स्नेह के बंधन में बांधें और सभी के लिए खुशहाली तथा सुख-समृद्धि लेकर आएं।”

नई दिल्ली / 
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कुवैत के क्राउन प्रिंस शेख सबाह अल-खालिद अल-हमद अल-मुबारक अल-सबाह से मुलाकात कर त्योहार की शुभकामनाएं दीं और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े घटनाक्रमों की समीक्षा की।
प्रधानमंत्री ने कुवैत के युवराज शेख सबाह अल-खालिद अल-हमद अल-मुबारक अल-सबाह से बातचीत की और आगामी ईद के त्योहार की शुभकामनाएं दीं। बातचीत के दौरान, श्री मोदी और युवराज ने पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति पर विचार-विमर्श किया और हाल के घटनाक्रमों पर चिंता व्यक्त की। प्रधानमंत्री ने कुवैत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर हमलों की भारत की निंदा को दोहराते हुए इस बात पर जोर दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित और निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए निरंतर राजनयिक जुड़ाव को अनिवार्य माना। प्रधानमंत्री ने कुवैत में भारतीय समुदाय की सुरक्षा और कल्याण के लिए युवराज द्वारा दिए जा रहे निरंतर समर्थन के लिए उन्हें धन्यवाद भी दिया।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा;

"कुवैत के क्राउन प्रिंस शेख सबाह अल-खालिद अल-हमद अल-मुबारक अल-सबाह से बात की और आगामी ईद के त्योहार पर बधाई दी।
हमने पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति पर विचार-विमर्श किया और हाल के घटनाक्रमों पर चिंता व्यक्त की। हमने कुवैत की संप्रभुता और क्षेत्रीय जुड़ाव पर हमलों की भारत की निंदा को दोहराया। होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित और निर्बाध नौवहन सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
हम इस बात पर सहमत हुए कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए निरंतर राजनयिक जुड़ाव अनिवार्य बना हुआ है। मैंने कुवैत में भारतीय समुदाय की सुरक्षा और कल्याण के लिए उनके निरंतर समर्थन के लिए उन्हें धन्यवाद दिया।"

  नई दिल्ली/पटना। देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए चल रही चुनावी प्रक्रिया सोमवार को अपने अंतिम चरण में पहुंच गई। इनमें से 26 उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुके थे, जबकि शेष 11 सीटों पर बिहार, ओडिशा और हरियाणा में मतदान हुआ। सुबह 9 बजे शुरू हुई वोटिंग के बाद मतगणना हुई और नतीजे घोषित किए गए।

इस बार सबसे अधिक राजनीतिक नजरें बिहार की 5 सीटों पर टिकी हुई थीं, जहां 6 उम्मीदवारों के मैदान में होने से मुकाबला बेहद रोचक हो गया था। अंततः परिणामों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने बड़ा राजनीतिक प्रदर्शन करते हुए सभी पांचों सीटों पर जीत दर्ज कर ली

बिहार में एनडीए का दबदबा

बिहार राज्यसभा चुनाव में एनडीए के उम्मीदवारों नीतीश कुमार (JDU), नितिन नवीन (BJP), उपेंद्र कुशवाहा (RLM), शिवेश राम (BJP) और रामनाथ ठाकुर (JDU) को जीत मिली।
महागठबंधन की ओर से आरजेडी के अमरेंद्र धारी सिंह मैदान में थे, लेकिन समीकरण उनके पक्ष में नहीं बन पाए।

बताया जा रहा है कि कांग्रेस के तीन और आरजेडी के एक विधायक ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया, जिससे महागठबंधन की संभावनाओं को बड़ा झटका लगा। द्वितीय वरीयता के वोटों की गिनती के आधार पर एनडीए के पांचवें उम्मीदवार शिवेश राम की जीत सुनिश्चित हो गई। हालांकि परिणामों की आधिकारिक अधिसूचना जारी होना अभी बाकी है

तेजस्वी यादव का आरोप

परिणाम आने के बाद बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव में धनतंत्र और मशीनतंत्र का इस्तेमाल किया गया

तेजस्वी यादव ने कहा,
“हमारी जितनी भी संख्या होती, हम भाजपा से लड़ते। अगर हमारे विधायकों ने धोखा नहीं दिया होता तो हम यह चुनाव जीत सकते थे। हमारे विधायक क्यों नहीं आए, इस पर आगे प्रक्रिया होगी। भाजपा के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी।”

विधानसभा परिसर में नारेबाजी

राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बिहार विधानसभा के पोर्टिको में एनडीए और महागठबंधन के विधायकों के बीच नारेबाजी भी देखने को मिली।
एनडीए विधायकों ने “जय श्री राम” के नारे लगाए, जबकि महागठबंधन के विधायकों ने “लोकतंत्र की हत्या बंद करो” के नारे लगाकर विरोध जताया।

अन्य राज्यों में भी मुकाबला

राज्यसभा की जिन सीटों पर मतदान हुआ उनमें बिहार (5 सीट), ओडिशा (4 सीट) और हरियाणा (2 सीट) शामिल हैं। ओडिशा में 4 सीटों के लिए 5 उम्मीदवार मैदान में हैं, जबकि हरियाणा में 2 सीटों के लिए 3 उम्मीदवारों के बीच मुकाबला हुआ।

विजय शर्मा ने दी बधाई

छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बिहार में एनडीए उम्मीदवारों की जीत पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह जीत बिहार में विकास और सुशासन के संकल्प को और मजबूत करेगी।

उन्होंने अपने संदेश में कहा,
“बिहार राज्यसभा चुनाव में एनडीए के सभी पांचों उम्मीदवारों की ऐतिहासिक विजय पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
श्री नीतीश कुमार जी, श्री नितिन नवीन जी, श्री उपेंद्र कुशवाहा जी, श्री शिवेश राम जी और श्री रामनाथ ठाकुर जी को इस शानदार जीत पर बहुत-बहुत बधाई।
आप सभी के नेतृत्व में बिहार के विकास, सुशासन और जनसेवा का संकल्प और मजबूत होगा।”

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में एनडीए की यह जीत राज्य की आगामी राजनीतिक रणनीतियों और राष्ट्रीय स्तर की राजनीति पर भी असर डाल सकती है

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