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June 17, 2026
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मनोरंजन

मनोरंजन (821)

इस्पात नगरी भिलाई के फिल्मकार मंसूरी की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘मानव मार्केट’ का ट्रेलर आएगा अगले हफ्ते, फिल्म रिलीज 19 दिसंबर 2025 को

      छत्तीसगढ़ / शौर्यपथ / इस्पात नगरी भिलाई के जाने-माने रंगकर्मी और फिल्मकार गुलाम हैदर मंसूरी की बहुप्रतीक्षित हिंदी फिल्म ‘मानव मार्केट’ रिलीज के लिए तैयार है। इसका टीजर रिलीज हो चुका है, जिसे दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है। अब एक दिसंबर को फिल्म का ट्रेलर रिलीज होने जा रहा है, वहीं सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ में फिल्म की रिलीज 19 दिसंबर 2025 को रखी गई है। यह फिल्म चिकित्सा सेवाओं के बाजारीकरण के विरुद्ध जन जागरूकता के मकसद से बनाई गई है।
           ‘मानव मार्केट’ के निर्माता गण कैलाश चंद्र अग्रवाल और निम्मी रोशन सावने बताते हैं कि छत्तीसगढ़ में एक संवेदनशील मुद्दे को लेकर फिल्म बनाने का प्रयास किया गया है क्योंकि यह एक ऐसा विषय है, जिससे समाज का हर वर्ग प्रभावित है। निर्मातागण का कहना है कि चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में जिस तरह एक तबका लूट पर उतारू है, उसके विरुद्ध आम जनता को जागरूक करने के उद्देश्य से यह फिल्म बनाई गई है।
निर्माता कैलाश चंद्र अग्रवाल ने बताया कोरोना काल में वह स्वयं भी चिकित्सा पेशे के बाजारीकरण के भुक्तभोगी रहे हैं और उनका मकसद है कि इस लूटपाट पर रोक लगनी चाहिए। निर्देशक गुलाम हैदर मंसूरी ने बताया कि ‘मानव मार्केट’ बनाने का मकसद सिर्फ यही है कि हम सभी समाज में बढ़ती बाजारवाद की सोच के खिलाफ एकजुट और जागरूक रहें। जिससे स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सेवाओं का लाभ समाज के हर तबके को बराबर मिले।
फिल्म में ओम त्रिपाठी, नेहा शुक्ला, बाली कुर्रे, योगेश अग्रवाल, सुरेश गोंडाले, प्रिया शर्मा, हर्षा सहारे, आरुषि पॉल, विनायक अग्रवाल, मुस्कान खान, शहाना परवीन, अनूप रे, देवेंद्र मोयल, मनोज शर्मा और हनी शर्मा ने मुख्य भूमिकाएं निभाई है।
‘       मानव मार्केट’ के निर्देशक गुलाम हैदर मंसूरी और निर्माता कैलाश चंद्र अग्रवाल व निम्मी रोशन सावने ने उम्मीद जताई है कि दर्शक उनकी इस फिल्म को भरपूर प्यार देंगे। वान्या फिल्म्स प्रोडक्शन, निम्स फिल्म प्रोडक्शन और भिलाई टॉकीज पिक्चर्स के बैनर तले बनी इस फिल्म के निर्माता कैलाश चंद्र अग्रवाल, निम्मी रोशन सावने और गुलाम हैदर मंसूरी, निर्देशक-गुलाम हैदर मंसूरी, रिलीजिंग पार्टनर-मेघा अग्रवाल,डी.ओ.पी-राजकुमार बघेल और एम.डी. फिरोज कुरैशी, कैमरा : रेड ड्रैगन विद अल्ट्रा प्राइम लेंस, स्टोरी, स्क्रीनप्ले और डायलॉग गुलाम हैदर मंसूरी, एडिटिंग और डीआई सतीश देवांगन, वीएफएक्स स्मृति एंटरटेनमेंट, बीजीएम-संजू नंदा, डबिंग रॉयल स्टूडियो और आशु, मेक-अप विलास राउत और राजेश सिंह, हेयर रजिया परवीन, संगीतकार प्रदीप साठे, अनुग्रह जियो डेन और सिराज अहमद, गीतकार- गुलाम हैदर मंसूरी, भरत द्विवेदी, राहुल मंत्रा और अनुग्रह जियो डेन, पार्श्वगायन-मीरा त्रिपाठी, राहुल मंत्रा, इरफान जिंद्रन, ज़ोहेब अहमद और राहुल मंत्रा,प्रोडक्शन मैनेजर-मनीष तिवारी, प्रोडक्शन डिजाइनर डॉ. अरुण मिश्रा, कोरियोग्राफर : सुहान खान, मनोजदीप और विलास राउत, चीफ असिस्टेंट डायरेक्टर- सुहान खान, एसोसिएट डायरेक्टर और एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर-शहाना परवीन और असिस्टेंट डायरेक्टर- कुमकुम, श्वेता यादव, अमित चंद्रिकापुरे, रवींद्र जगबंधु और प्रगति तिवारी हैं।

शौर्यपथ फिल्मी दुनिया। दृश्यम फ़िल्म से इन्हें शोहरत तो मिली। मगर वो शोहरत नफ़रत भी साथ लेकर आई। पता नहीं कौन-कौन लोग इन्हें गालियां बका करते थे फोन करके। सड़क पर देखते तो लोग चिढ़ने लग जाते थे इनसे। और इस सारी नफ़रत की जड़ थी दृश्यम फ़िल्म में अजय देवगन की फ़ैमिली को इनके द्वारा टॉर्चर किए जाना। इंस्पैक्टर गायतोंडे के किरदार को इन्होंने इतना रियलिस्टिक बना दिया कि लोग सच में इन्हें घटिया इंसान समझने लगे। लेकिन निगेटिव किरदार निभाने वाले एक एक्टर के लिए लोगों की गालियां वास्तव में ईनाम होता है। क्योंकि इससे पता चलता है कि एक्टर ने इतना बढ़िया काम किया है कि लोगों के ज़ेहन में उसकी वही छवि बस गई है।

लेकिन इंस्पैक्टर गायतोंडे यानि कमलेश सावंत का क्लॉज़ शॉट उन्होंने लिया ही नहीं। दृश्यम का वो आखिरी सीन रामोजी फिल्म सिटी में शूट किया गया था। शूटिंग कंप्लीट करने के बाद जब पूरी यूनिट मुंबई वापस आ गई और फिल्म की फाइनल एडिटिंग की जाने लगी तो अजय देवगन को आइडिया आया कि इस सीन पर कमलेश सावंत का भी एक क्लॉज़ शॉट होना चाहिए। अजय ने तुरंत शूटिंग अरेंज कराई और कमलेश सावंत को फिल्म सिटी बुलाया। और वहीं के एक पार्क में इंस्पैक्टर गायतोंडे की पिटाई वाला वो सीन शूट कराया गया। 

और ये सीन इतनी सफाई के साथ शूट किया गया कि किसी को पता ही नहीं चल सका कि इस सीन का ज़्यादातर हिस्सा कहीं और शूट किया गया है। अजय ने ये सारा काम दृश्यम की रिलीज़ से महज़ 4 दिन पहले ही कराया था। और इस पूरे घटनाक्रम में अजय देवगन ने ये साबित किया कि वो ना सिर्फ बड़े स्टार हैं। बल्कि बड़े दिल वाले इंसान भी हैं। वरना एक छोटे कलाकार को दृश्यम जैसी बड़ी फिल्म में इतनी आसानी से क्लॉज़ शॉट भला कहां मिल पाता है।

साथियों कमलेश सावंत जितने शानदार कलाकार हैं उतनी ही शानदार एक्टर बनने की इनकी कहानी है। स्टेप बाय स्टेप कमलेश सावंत जी कामयाबी की सीढ़ियां चढ़े हैं। और स्टेप बाय स्टेप ही काफ़ी पहले मैंने बहुत विस्तार से इनकी जीवनी लिखी थी। इनकी जीवनी आप यहां पढ़ सकते हैं- https://shorturl.at/HTxm5 कुछ साल पहले मेरी फोन पर कमलेश सावंत जी से बात हुई थी। तब उन्होंने अपनी कहानी पूरे विस्तार से बताई थी। पढ़िए-पढ़िए। पसंद आएगी आपको इनकी कहानी। #kamleshsawant #biography #BiographyinHindi #KissaTV #shouryapathnews.in 

फिल्मी दुनिया। शौर्यपथ। डैनी के शोले छोड़ने के बाद सिप्पी कैंप में खलबली मची थी। शूटिंग शुरू होने में एक महीने से भी कम वक्त रह गया था। और गब्बर सिंह कोई मामूली नहीं, फिल्म का केंद्रीय किरदार था। गब्बर का किरदार निभाने के लिए ऐसा शख्स चाहिए था जो ना सिर्फ अच्छा एक्टर हो, बल्कि एक करिश्माई व्यक्तित्व का मालिक भी हो। गब्बर सिंह उतना ही मजबूत दिखना चाहिए था जितने कि फिल्म के दूसरे स्टार्स थे। गलत कास्टिंग करने की कोई गुंजाइश नहीं थी। अगर गब्बर सिंह के लिए किसी गलत एक्टर को चुन लिया जाता तो पूरी फिल्म बर्बाद हो सकती थी। रमेश सिप्पी और उनके पिता गोपालदास परमानंद सिप्पी(जी.पी.सिप्पी) ने रंजीत और प्रेम चोपड़ा के नामों पर विचार किया। रंजीत के नाम पर तो मुहर लगने ही वाली थी। मगर जाने क्यों, रमेश सिप्पी के मन को संतुष्टी नहीं मिली। और रंजीत को कास्ट करने का विचार ड्रॉप कर दिया गया।

रमेश सिप्पी उस वक्त गब्बर सिंह के कैरेक्टर को लेकर इतने डैस्पेरेट थे कि वो प्रेमनाथ जी को भी गब्बर के रोल में इमैजिन करने लगे थे। प्रेमनाथ जी को साइन करने के बारे में सोचने लगे थे। लेकिन जब रमेश सिप्पी यथार्थ के धरातल पर वापस लौटे तो उन्हें अहसास हुआ कि प्रेमनाथ जी के साथ काम करना किसी भी डायरेक्टर के लिए बड़ा मुश्किल होता है। और वैसे भी शोले में पहले ही कई बड़े कलाकार थे। एक साथ इतनी स्टार ईगो झेलना भी तो हैक्टिक होता। उस वक्त सलीम खान ने अमजद खान का नाम सुझाया।

अमजद खान के पिता ज़कारिया खान उर्फ जयंत एक वक्त पर हीरो और बाद में मशहूर चरित्र अभिनेता थे। अमजद उनके छोटे बेटे थे। पिता बेशक नामी कलाकार रहे हों। लेकिन अमजद खान तब सिर्फ एक स्ट्रगलिंग एक्टर थे। एक दफा अमजद के पिता ने उन्हें हीरो के तौर पर लॉन्च करने के लिए 'पत्थर के सनम' नाम से एक फिल्म अनाउंस की थी। लेकिन वो फिल्म कभी बन ना सकी। अमजद ने के.आसिफ को फिल्म 'लव एंड गॉड' में असिस्ट किया था। लव एंड गॉड में अमजद के पिता जयंत ने भी काम किया था। और विकीपीडिया की मानें तो वो उनकी आखिरी फिल्म भी थी। अमजद ने भी एक छोटा सा रोल 'लव एंड गॉड' फिल्म में निभाया था। 

कुल मिलाकर फिल्म जगत में अमजद खान की तब कोई पहचान नहीं थी। लेकिन थिएटर जगत में वो बहुत मशहूर थे तब। सबसे पहले साल 1963 में जावेद अख्तर ने अमजद को दिल्ली के ताल कटोरा स्टेडियम में हुए यूथ फैस्टिवल के दौरान हुए 'ऐ मेरे वतन के लोगों' नाम के नाटक में आर्मी अफसर का किरदार निभाते देखा था। कुछ साल बाद रमेश सिप्पी ने भी मुंबई में हुए एक नाटक में अमजद खान को देखा था। उस नाटक में रमेश सिप्पी की बहन सुनीता सिप्पी उर्फ सोनी ने अमजद खान की मां का किरदार जिया था। लेकिन गब्बर सिंह के किरदार के लिए जब माथापच्ची चल रही थी तब ना तो रमेश सिप्पी को और ना ही जावेद अख्तर को अमजद खान का नाम याद आया। 

डैनी के शोले छोड़ने के कुछ दिनों बाद इत्तेफाक से बांद्रा के बैंडस्टैंड इलाके में सलीम खान और अमजद खान की मुलाकात हुई। सलीम खान अमजद के पिता को जानते थे। अमजद जब छोटे थे तब उनके पिता से मिलने सलीम खान उनके घर जाते भी थे। उस दिन अमजद खान और सलीम खान की बात हुई तो सलीम खान ने अमजद से पूछा कि वो क्या कर रहे हैं आजकल। अमजद ने बताया कि वो थिएटर कर रहे हैं। फिल्मी काम तब कुछ खास था नहीं अमजद के पास। सलीम खान ने अमजद के बारे में काफी सुन रखा था। उस दिन अमजद से मिलने के बाद गब्बर के किरदार की गुंजाइश सलीम खान को दिखी भी। उन्होंने अमजद से कहा कि मैं तुमसे कोई वादा तो नहीं करूंगा। लेकिन एक बड़ी फिल्म में एक बहुत अच्छा रोल है। मैं तुम्हें डायरेक्टर से मिला दूंगा। क्या पता तुम्हारी किस्मत से या कोशिश से ये रोल तुम्हें मिल जाए। ये इस फिल्म का सबसे फाइन रोल है। 

सलीम खान ने रमेश सिप्पी से अमजद खान का ज़िक्र किया। अमजद को मिलने के लिए बुलाया गया। उनसे दाढ़ी बढ़ाने को कहा गया। सलीम-जावेद और रमेश सिप्पी ने अमजद के बारे में काफी विचार किया। अमजद लग तो फिट रहे थे। लेकिन उनकी कोई पहचान तब नहीं थी। सलीम-जावेद की तरफ से तो अमजद खान फाइनल थे। लेकिन आखिरी फैसला तो रमेश सिप्पी को ही लेना था। इत्तेफाक से उसी दिन एक्टर सत्येन कप्पू जी भी सिप्पीज़ के ऑफिस आए थे। रामलाल का कैरेक्टर निभाने के लिए उन्हें तब तक साइन किया जा चुका था। सलीम खान ने उस दिन सत्येन कप्पू से पूछा,"कप्पू साहब, क्या अमजद खान आपसे अच्छा आर्टिस्ट है?" कप्पू जी ने फौरन जवाब दिया,"हां, मुझसे अच्छा एक्टर है। यंग है। उसकी थिंकिंग भी फ्रैश है।"

चार दिन बाद अमजद खान का एक स्क्रीनटेस्ट हुआ। सिप्पीज़ के ऑफिस के गार्डन में अमजद खान की कुछ तस्वीरें ली गई। कहने के मुताबिक अमजद खान ने दाढ़ी बढ़ा ली थी। अपने दांत भी उन्होंने काले किए थे। उनका डिक्शन एकदम सही था। भाषा भी एकदम परफेक्ट थी। आखिरकार अमजद खान को गब्बर सिंह के रोल के लिए फाइनल कर दिया गया। वो तारीख थी 20 सितंबर 1973. अमजद खुशी-खुशी हॉस्पिटल की तरफ दौड़े। उसी दिन उनकी पत्नी शैला ने एक बेटे को जन्म दिया। अमजद ने बेटे का नाम रखा शादाब। जो शादाब खान नाम से कुछ फिल्मों में एक्टिंग भी कर चुका है। #AmjadKhan #DannyDenzongpa #RameshSippy #Sholay

भिलाई/शौर्यपथ।
भोजपुरी सिनेमा को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाले चर्चित निर्देशक मंजुल ठाकुर इन दिनों एक बेहद अलग और ऐतिहासिक फिल्म “परिणय-सूत्र” की शूटिंग में व्यस्त हैं। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के पास जोर-शोर से चल रही इस फिल्म की शूटिंग में 1970 के दशक के भारत की पारिवारिक संस्कृति, रहन-सहन और सामाजिक मूल्यों को पर्दे पर सजीव रूप में दिखाने की कोशिश की जा रही है।

इस फिल्म का निर्माण संदीप सिंह एवं मंजुल ठाकुर द्वारा किया जा रहा है, जबकि इसकी पटकथा अरविंद तिवारी ने लिखी है। फिल्म आद्या फिल्म्स एंटरटेनमेंट के बैनर तले बन रही है।

? फिल्म की विशेषताएं:

निर्देशक मंजुल ठाकुर के अनुसार, “यह फिल्म एक पारंपरिक पारिवारिक गाथा है, जिसमें 70 के दशक के हर पहलू को बड़ी बारीकी से दर्शाया जा रहा है — चाहे वह खानपान हो, पहनावा हो, मकानों की बनावट हो या शादी-विवाह की रस्में। बैलगाड़ी, एक्का, पीतल के बर्तन और उस समय की मुद्रा तक की व्यवस्थित रूप से व्यवस्था की गई है, जिससे दर्शकों को उस दौर की एक सजीव झलक मिल सके।”

उन्होंने बताया कि आज के आधुनिक दौर की फिल्में बनाना जितना सहज है, उतना ही चुनौतीपूर्ण है अतीत के परिवेश को रच पाना। “उस समय की वास्तुकला, जीवनशैली और व्यवहार की झलक को पुनः खड़ा करना एक बेहद कठिन और दिलचस्प यात्रा रही,” उन्होंने कहा।

? कलाकारों की प्रभावशाली टीम:

इस ऐतिहासिक फिल्म में भोजपुरी सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री रानी चटर्जी मुख्य भूमिका में हैं, उनके साथ तनुश्री, राकेश बाबू, प्रशांत सिंह, ललित उपाध्याय, विद्या सिंह और शमशीर सिवानी जैसे सशक्त कलाकार अपने अभिनय से फिल्म को संजीवता प्रदान कर रहे हैं।
इसके अलावा अशोक गुप्ता, नीलम सिंह, रामनरेश श्रीवास्तव, रीमा, रिंकू आयुषी, अंजु रस्तोगी, बबीता, रंजीत सिंह, आदर्श सहित कई कलाकार अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे।

? बाल कलाकारों की भी चमक:

फिल्म में बाल कलाकार ढोलू यादव, दीक्षा, गोकुल और आरजू ने अपने सहज अभिनय से सभी का ध्यान आकर्षित किया है।

? तकनीकी टीम:

फिल्म के दृश्य को कैमरे में कैद करने का कार्य अनुभवी कैमरामैन इमरान शगुन ने किया है। पार्थ मिश्रा एसोसिएट डायरेक्टर हैं, वहीं सहायक निर्देशक के रूप में अमृतराज, सूरज वर्मा और पियुष उपाध्याय का योगदान है। प्रोडक्शन की कमान श्री रौशनसोनू के पास है, जबकि नाज़िर भाई इस प्रोजेक्ट के आर्ट डायरेक्टर हैं।

? निर्माता संदीप सिंह की सोच:

निर्माता संदीप सिंह ने कहा, “जब मैंने यह कहानी सुनी तो मुझे लगा कि आज के दौर में ऐसी फिल्म की सख्त ज़रूरत है जो नई पीढ़ी को बताए कि हमारे पूर्वजों ने किन हालात में जीवन जिया और कैसे सादगी में भी खुशहाल जीवन जीया। यही सोच लेकर मैंने फिल्म निर्माण का निर्णय लिया।”

? निष्कर्ष:

“परिणय-सूत्र” न केवल एक फिल्म है, बल्कि यह समय की यात्रा है, जिसमें दर्शक 1970 के दशक के भारतीय परिवेश, संस्कृति और मूल्यों को अनुभव करेंगे। यह फिल्म निश्चित ही भोजपुरी सिनेमा के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगी।


✍️ रिपोर्ट: शरद पंसारी
? शौर्यपथ न्यूज़

दुर्ग/शौर्यपथ /(विशेष व्यंग्य रिपोर्ट):
शक्ति नगर तालाब में हजारों मछलियों ने हाल ही में सामूहिक रूप से आत्महत्या कर प्रशासन को झकझोर कर रख दिया है। हालांकि प्रशासन फिलहाल असमंजस में है कि मामला हत्या का है, आत्महत्या का, या फिर मछलियों की कोई वैश्विक साजिश?

बताया जा रहा है कि मछलियों ने तालाब के दूषित होते पानी और बढ़ते रासायनिक अत्याचारों से तंग आकर स्वेच्छा से जीवन त्याग दिया। पर्यावरणविद् इसे जल-जागृति आंदोलन का "मूक" रूप बता रहे हैं, जबकि कुछ वरिष्ठ अधिकारी इस पर विचार कर रहे हैं कि "क्या मछलियाँ मानसिक अवसाद में थीं?"

तालाब के किनारे कुछ बचे-खुचे मछली परिजन फिलहाल अज्ञातवास में हैं। बताया जा रहा है कि वे तालाब के एक कोने में सीसीटीवी कैमरों से बचते हुए छिपे हुए हैं, ताकि कोई उन्हें बुलाकर "मुख्य गवाह" ना बना ले। कुछ मछलियाँ तो अब वकीलों से सलाह ले रही हैं कि क्या मछलियों को भी गवाही से छूट दिलाने वाला कोई धारा लागू होती है या नहीं।

नगर निगम प्रशासन की मानें तो "हमने तो सिर्फ जड़ी-बूटी की दवा डाली थी, मछलियों को क्या हुआ हमें नहीं मालूम।" वहीं विशेषज्ञों की मानें तो यह वही जड़ी-बूटी थी जो पहले खरपतवार को मारती थी, अब मछलियों के आत्मबल को भी समाप्त कर चुकी है।

विपक्ष ने इसे "मछली संहार कांड" का नाम दे दिया है और इस मुद्दे पर बयानबाजी तेज कर दी है, जबकि सत्तापक्ष ने इसे "प्राकृतिक चक्र" कहकर रफा-दफा करने की कोशिश की। एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “जब हिरण आत्महत्या कर सकता है, तो मछलियाँ क्यों नहीं?”—बात में वजन तो था, पर पानी में नहीं।
राजनीति भी इस आत्महत्या पर दो हिस्सों में बंटी हुई है। एक ओर नेता कह रहे हैं:

    "हमने कोई दवा नहीं डाली, मछलियाँ खुद ही अवसाद में थीं।"
    दूसरी ओर विपक्ष इसका "जल संहार कांड" घोषित कर चुका है और सीधे एसपी ऑफिस जाकर अपनी राजनीति का जाल बिछा चुका है।
  विपक्ष ने इसे "मछली संहार कांड" का नाम दे दिया है और इस मुद्दे पर बयानबाजी तेज कर दी है, जबकि सत्तापक्ष ने इसे "प्राकृतिक चक्र" कहकर रफा-दफा करने की कोशिश की। एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “जब हिरण आत्महत्या कर सकता है, तो मछलियाँ क्यों नहीं?”—बात में वजन तो था, पर पानी में नहीं।
जिला प्रशासन ने मामले की जांच का आदेश दिया है और मत्स्य विभाग की एक टीम मौके पर भेज दी गई है। सूत्रों की मानें तो टीम के सदस्य तालाब के आसपास मौन धारण कर चुके जीवों से पूछताछ करने की तैयारी में हैं। हालांकि अभी तक कोई मछली CBI को चुपचाप बयान नहीं दे पाई है।

इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ी चुप्पी उस पत्रकार जगत की है, जिनके पास अब सवाल पूछने की जगह, जवाब देने की जिम्मेदारी लाद दी गई है। खबर उठाने पर दबाव इतना गहरा है कि पत्रकारों को भी अब ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत पड़ने लगी है।

अंत में हम सब यही कह सकते हैं:
हे मछलियों, तुमने जो त्याग किया है, वह इतिहास के गहरे जल में अमिट रहेगा।
भगवान तुम्हारी मूक आत्माओं को वही शांति दें, जो इस देश की जांच समितियों को हमेशा मिलती रही है।
इस पूरे घटनाक्रम को देखते हुए व्यंग्यकार लेखक शरद पंसारी लिखते हैं—

    “यह देश वही है जहाँ हिरण की मौत पर बहसें होती हैं, पर मछलियों की सामूहिक आत्महत्या बस जांच आदेशों की फाइलों में जल समाधि ले लेती है। शायद इसीलिए इन मछलियों ने इंसानों से पहले इंसानों को ही समझा दिया— अब और नहीं।”

मनोरंजन /शौर्यपथ /साउथ की फिल्म जिसका बजट 300 करोड़ रुपये था, उसे बॉक्स ऑफिस पर अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है. फिल्म ने 17 दिन के अंदर 521 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है. इसके ताबड़तोड़ एक्सन फिल्म को दुनियाभर में काफी पसंद किया जा रहा है. हम यहां बात कर रहे हैं जूनियर एनटीआर की फिल्म देवरा पार्ट 1 की. जिसमें जूनियर एनटीआर के अलावा सैफ अली खान और जाह्नी कपूर भी नजर आईं. इस एक्शन फिल्म का निर्देशन कोराटला शिवा ने किया है. साउथ की फिल्म देवरा ना सिर्फ भारत बल्कि विदेश में भी अच्छा कलेक्शन कर रही है. इसे पैन इंडिया रिलीज किया गया था. फिल्म ने नॉर्थ अमेरिका में भी जमकर कमाई जारी है. इतना ही नहीं, इस फिल्म ने अमेरिकी बाजार में बीटलजूस बीटलजूस, ट्रांसफॉर्मर्स: वन और मेगालोपोलिस जैसी हॉलीवुड ब्लॉकबस्टर फिल्मों के कलेक्शन को भी पीछे छोड़ दिया है.
साउथ की फिल्म देवरा ने खराब रिव्यू के बावजूद पहले दिन लगभग 150 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया था. हालांकि इसके बाद इसके कलेक्शन में गिरावट दर्ज की गई थी. बताया जाता है कि जूनियर एनटीआर ने फिल्म के लिए 60 करोड़ रुपये की फीस ली थी. देवरा का दूसरा पार्ट भी आना है, और कहा जा रहा है कि इसमें भी गजब का एक्सन देखने को मिलेगा. जाह्नवी कपूर ने इस फिल्म के जरिये तेलुगू सिनेमा में कदम रखा था.

मनोरंजन /शौर्यपथ /अमिताभ बच्चन ने बॉलीवुड को कई यादगार फिल्में दी हैं, फिल्म कुली उन्हीं में से एक है. इस फिल्म के लिए उन्हें दुनिया भर में सराहा गया था. इस फिल्म में अमिताभ बच्चन के बचपन का किरदार निभाने वाला बच्चा तो आपको याद ही होगा. यह बच्चा इंडस्ट्री में मास्टर रवि के नाम से काफी मशहूर हो गया, लेकिन जैसे-जैसे वह बड़ा हुआ, उसे रवि वलेचा के नाम से पहचाना जाने लगा. रवि ने कई सुपरहिट फिल्मों में बाल कलाकार के तौर पर काम किया. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कभी फिल्मों का जाना माना चेहरा रहे मास्टर रवि कहां हैं और क्या करते हैं.
मास्टर रवि ने इन फिल्मों में किया काम
मास्टर रवि, जिन्होंने अब अपना नाम बदलकर रवि वलेचा कर लिया है, ने 1977 में रिलीज़ हुई एक और सुपरहिट फिल्म अमर अकबर एंथोनी में 'बाल अमिताभ' की भूमिका निभाई. विभिन्न भाषाओं की 300 से अधिक फिल्मों में काम कर चुके रवि अब 46 साल के हैं. उन्होंने शुरुआत फिल्मों में अपना करियर बनाया है. मास्टर रवि ने कुली, अमर अकबर एंथोनी, देश प्रेमी, शक्ति, मिस्टर नटवरलाल और कई अन्य फिल्मों में एक्टिंग की. रवि ने 90 के दशक के लोकप्रिय शो 'शांति' के कुछ एपिसोड में भी काम किया है.
आज कर रहे ये काम
लेकिन आज रवि हॉस्पिटैलिटी में एक लोकप्रिय नाम है. सूत्रों के मुताबिक, वह उन बच्चों को व्यक्तित्व विकास और अन्य कौशल का प्रशिक्षण भी देते हैं जो हॉस्पिटैलिटी के क्षेत्र में कुछ बड़ा करने की इच्छा रखते हैं. ग्लेमर की दुनिया को छोड़ रवि आज खुद का बिजनेस चला रहे हैं.

मुंबई / शौर्यपथ / बी फॉर मोशन पिकचर्स द्वारा प्रस्तुत और निलाभ तिवारी फिल्म्स ओपीसी प्राईवेट लिमिटेड के बेनर तले घर की मालकि फिल्म का निर्माण होने जा रहा है। इस फिल्म के प्रोडयूसर निलाभ तिवारी ने हमारे संवाददाता को बताया कि ये लो भोजपूरी फिल्म घर की मालकिन का निर्माण हो रहा है। यह फिल्म घर घर में होने वाली घटनाओं पर आधारित एक महिला प्रधान के साथ ही पारिवारिक व मनोरंजक फिल्म है जिसको भोजपूरी फिल्मों के सुप्रसिद्ध डायरेक्टर राजकिशोर निर्देशित कर रहे है।  इस फिल्म में अंजना सिंह एवं शुभी शर्मा प्रमुख भूमिका निभा रही है और इसके प्रोडसयूसर संदीप सिंह, अंजनी तिवारी एवं निलाभ तिवारी है। इस फिल्म का गीत संगीत भी बेहद कर्णप्रिय है जो लोगों के दिल तक उतर जायेगा और लोग गुनगुनाते रहेंगे।
कथा,पटकथा,संवाद अरबिंद तिवारी का हैं। कला अंजनी तिवारी हैं। छायांकन विजय मंडल /डीके शर्मा का है। नृत्य कानू मुखर्ज़ी, सोनू प्रीतम का है। पी आर ओ रंजन सिन्हा हैं।  संगीतकार साजन मिश्रा हैं और गीतकार प्यारेलाल यादव, अरबिंद तिवारी हैं। संकलन धरम सोनी हैं। पोस्ट प्रोडक्शन बॉलीवुड उमंग का है। बी फॉर क्रिएटिव टीम -मारुदा शर्मा ( ईपी), नेहा उपाध्याय,विशाल यादव और कार्यकारी निर्माता अभिषेक त्रिपाठी हैं।  इस फिल्म को लेकर अंजना सिंह ने कहा कि फिल्म महिला प्रधान है और इसमें मेरी भूमिका बेहद दमदार है। मैं फिल्म में अपना हंड्रेड परसेंट देने को तैयार हूं और मेरी कोशिश होगी कि यह फिल्म भोजपुरी सिनेमा के इतिहास में सबसे अधिक मनोरंजन करने वाली फिल्म बने। वही फिल्म के अभिनेत्री शुभी शर्मा ने भी फिल्म की जमकर तारीफ  की ओर कहा कि ऐसी फिल्में भोजपुरी सिनेमा में महिलाओं की उपस्थिति को स्थापित करती है। मुझे गर्व है कि मैं इस फिल्म को कर रही हूं और अपना हंड्रेड परसेंट देते हुए इस फिल्म के सफलता की कामना करूंगी। मैं अपने दर्शकों से आग्रह करूंगी की आप इस फिल्म को खूब प्यार और आशीर्वाद दें।

बब्लू पंडित ने दोनो फिल्मों का निर्देशन की जिम्मेदारी दी गौरव पटेल को

   अयोध्या / शौर्यपथ / भोजपूरी फिल्मों के प्रसिद्ध निर्माता जनार्दन पाण्डेय उर्फ बब्लू पंडित ने अपने शादी के सिल्वर जुबली सालगिरह यानी शादी के 25 वी सालगिरह के अवसर पर दो भोजपूरी फिल्मों नालायक और छोटकी दुल्हिन के निर्माण करने की घोषणा की है। प्रोडयूसर जनार्दन पाण्डेय ने इन दोनो फिल्मों के निर्देशन की जवाबदारी भोजलीवुड के जाने माने डायरेक्टर गौरव पटेल को दी है। जिसमें पहली फिल्म नालायक  में गुंजन सिंह मुख्य भूमिका में नजऱ आयेंगे। बाकी सभी कलाकार को चयनित करना बाकी है जिसके निर्देशक एवं लेखक गौरव पटेल उर्फ गुड्डू है। सह निर्माता के रूप में विनय प्रकाश तिवारी एवं राकेश कुमार है वहीं इस फिल्म का संगीत आर्य शर्मा दे रहे हैं साथ ही इस फिल्म का छायांकन डी .के शर्मा मारधाड़ दिनेश यादव फिल्म का पटकथा लेखन गौरव पटेल गुड्डू और नन्हे पांडे हैं। वहीं दूसरी फिल्म छोटकी दुल्हिंन इस फिल्म का भी निर्देशन गौरव पटेल गुड्डू ही कर रहे हैं इस फिल्म  के को- प्रोड्यूसर के रूप में विनय प्रकाश तिवारी और राकेश कुमार हैं तथा इस फिल्म का संगीत ओम झा एवं आर्य शर्मा दे रहे हैं इस फिल्म का छायांकन प्रमोद पांडे एवं लेखक प्रकाश तिवारी तथा एक्शन डायरेक्टर दिनेश यादव है। इस फिल्म के कलाकारों का चयन अभी बाकी है बहुत जल्द ही इस फिल्म के कलाकारों का चयन कर लिया जाएगा। आपको हम बताते चलें जनार्दन पाण्डेय उर्फ बब्लू  पंडित इस फिल्म से पहले इन्होंने गुंजन सिंह अभिनीत हमार परिवार हमार संसार सुपरहिट फिल्म बना चुके हैं। बातचीत के दौरान जनार्दन पांडे उर्फ बब्लू पंडित ने बताया कि हम अच्छी अच्छी भोजपुरी फिल्म एवं समाज को कुछ नई दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं की भोजपुरी समाज के लोग भी अपने आप को गौरवान्वित समझे तथा उनको अपने भाषा की फिल्मों पर गर्व हो सके।
 आपको बता दे कि इस अवसर पर  गायक अभिनेता विवेक पाण्डेय के टीम के द्धारा सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया किया गया।

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