
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /कई बार ऐसा होता है कि रात को सोते समय हमारे पैरों में क्रैम्प्स आ जाते हैं। पैरों में दर्द होने की वजह से नींद तो भंग होती ही है लेकिन उसके साथ क्रैम्प के दर्द को झेल पाना असहनीय हो जाता है। खासतौर पर काल्फ, फूट और जांघों की मांसपेशियों में इतनी तेजी से दर्द होता है कि इंसान चिल्ला उठता है। हालांकि ऐसे क्रैंप कुछ सेंकेंड तक ही रहते हैं और खुद ही रिलैक्स भी हो जाते हैं। लेकिन कई बार ये जल्दी खत्म नहीं होते ऐसे में आप इन आसन नुस्खों की मदद से आराम पा सकते हैं।
इन वजहों से होता है लेग्स क्रैम्प
जब पैर के मसल्स में ब्लड का सर्कुलेशन बंद हो जाता है तब ज़ोरदरा क्रैम्प आता है। इसके साथ ही , स्ट्रेस और हाई इंटेंसिटी एक्सरसाइज के कारण भी ये परेशानी पैदा होती है। कैल्शियम और B-12 की कमी से भी आपको बार बार क्रैम्प आ सकता है। रात के वक्त क्रैंप की वजह, लंबे समय तक डेस्क जॉब करने, किडनी फेलियर, डायबिटिक नर्व डैमेज, मिनरल की कमी, ब्लड फ्लो की समस्या के कारण हो सकता है।
तुरंत आराम पाने के लिए करें ये उपाय
क्रैम्प आने पर अपने अंगूठे को पकड़ कर पैर को स्ट्रेच करें। जांघों में क्रैंप हो तो खड़े होकर स्ट्रेच करें।
मसल्स में जैसे ही क्रैंप आए, तुरंत हाथ या मसाजर की मदद से उस जगह को दबाएं और मसल्स को मसाज करें।
जहाँ क्रैम्प आया है वहां गर्म कपड़े से सिंकाई करें। या गर्म पानी में पैर को डुबोकर रख लें। गर्म पानी से स्नान भी कर सकते हैं।
क्रैम्प वाली जगह पर आइसिंग करें। एक टॉवल में आइस पैक रखें और मसल्स को इससे अच्छी तरह रैप करें। कुछ मिनट तक सेक लगाएं।
विटामिन बी12 कॉम्प्लेक्स या मैग्नीशियम सेप्लीमेंट का सेवन करें।
रात में सोने से पहले अपनी बॉडी को अच्छी तरह स्ट्रेच करें। दरअसल अपनी बॉडी को डिब भर स्ट्रेच करते रहें एशिया करने से आपको क्रैम्प की शिकायत नहीं होगी। साथ ही एक्सरसाइज करना न भूलें।
अपने आप को डिहाइड्रेटेड को रखना ज़रूरी है। इसलिए रोज 8 ग्लास पानी जरूर पिएं। जहां तक हो कैफीन और एल्कोहल का सेवन ना करें।
योग /शौर्यपथ /हेल्दी फेफड़े के लिए ये योगासन है बेस्ट
उष्ट्रासन- इस आसन से आपके लंग्स मजबूत रहते है। इसके साथ ही किडनी, लिवर भी हेल्दी रहेगा। इस आसन को आधा से एक मिनट रहें।
अर्द्ध उष्ट्रासन- अगर आप उष्ट्रासन नहीं कर पा रहे हैं तो अर्द्ध उष्ट्रासन कर सकते है। इससे भी पूरा शरीर हेल्दी रहता है।
गौमुखासन- इस आसन को करने फेफड़े स्वस्थय रहेंगे। इसके साथ-साथ गैस्ट्रिक, सर्वाइकल पेन से छुटकारा मिलेगा। इसके अलावा पाचन तंत्र भी फिट रहते हैं। शरीर का पॉश्चर सुधरता है। इसके साथ ही थकान, तनाव, चिंता दूर करता है
वक्रासन- इस आसन को करने से फेफड़ों से जुड़ी परेशानियों से निजात मिलता है। किडनी, लिवर हेल्दी होता है। पेट की चर्बी भी कम होती है।
भुजंगासन- फेफड़ों को स्वस्थ और मजबूत करें। फेफड़ों से जुड़ी समस्याओं से दिलाएं निजात। लिवर से जुड़ी हर समस्या से निजात मिलेगा। इसके साथ-साथ वजन कम करने में मदद करता है।
मर्कटासन- यह आसन फेफड़ों के लिए अच्छा है। इसके अलावा ये रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने में मदद करें। जोड़ों के दर्द को जड़ से खत्म करें। पीठ का दर्द, पेट का दर्द से भी निजात मिलता है
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /वेट लॉस के लिए हम क्या नहीं करते। तरह-तरह की डाइट फॉलो करते हैं या फिर जिम जाते हैं। जबकि, ये सब करके किया हुआ वेट लॉस भी ज्यादा फायदेमंद नहीं होता है। दरअसल, ऐसी स्थिति में आपको एक इफेक्टिव एक्सरसाइज करनी चाहिए जो हमेशा आपके लिए काम करे। ऐसे में सीढ़ियां चढ़ना वेट लॉस में तेजी से मदद कर सकता है। आपका पेट कितना भी बाहर क्यों न हो इससे आपका पेट अपनी साइज में लौट सकता है। इसके अलावा भी सीढ़ियां चढ़ने के फायदे कई हैं। तो, आइए जानते हैं वजन घटाने में ये एक्सरसाइज कैसे प्रभावी है।
वेट लॉस के लिए सीढ़ियां चढ़ने के फायदे
1. फैट मेटाबोलिज्म तेज करता है
वेट लॉस के लिए सीढ़ियां चढ़ने के फायदे कई हैं। पहले तो ये फैट मेटाबोलिज्म को तेज करता है और ये शरीर में जमा बैड फैट और ट्राइग्लिसराइड के लेवल को कम करता है। जब आप सीढ़ियां चढ़ते हैं तो इससे पेट पर जोड़ पड़ता है और फैट तेजी से पिघलने लगता है। इससे मोटापा नहीं बढ़ता और वजन कंट्रोल में रहता है।
2. बैली फैट कम करता है
बैली फैट कम करने में सीढ़ियां चढ़ना बहुत फायदेमंद है। ये पेट के निचले हिस्से में जमा फैट को कम करता है और फिर इन्हें पिघलाने में मदद करता है। ये आपके पेट से जुड़ी कई समस्याओं को कम करता है जैसे स्लो मेटाबोलिज्म। इसकी वजह से होता ये है कि आंत में ज्यादा गंदगी जमा होने लगती है और वजन बढ़ने लगता है। तो,बस बैली फैट कम करने के लिए आप सीढ़ियां चढ़ना शुरू करें।
3. तेजी से कैलोरी बर्न करता है
आप जो भी खाते हैं उसे अगर शरीर सही से पचा नहीं पाता है तो ये वजन बढ़ाता है। कुछ फूड्स जो हाई कैलोरी वाले होते हैं वो पाचन क्रिया को तो प्रभावित करते ही हैं बल्कि वजन भी बढ़ाते हैं। ऐसे में सीढ़ियां चढ़ना हाई कैलोरी को तेजी से बर्न करने में मदद करता है। इससे वेट लॉस में तेजी आती है। तो, इन तमाम कारणों से आपको वजन घटाने के लिए जरूर सीढ़ियां चढ़ना चाहिए। कम से कम 10 मिनट तो ये काम जरूर करें। पर इसे करने से पहले वॉर्मअप एक्सरसाइज जरूर कर लें।
सेहत टिप्स /शौर्यपथ / सर्दियों में शरीर को गर्म रखने के लिए डाइट में कुछ बदलाव जरूर करने चाहिए। सर्दियों में ड्राई फ्रूट्स के अलावा खाने में सीड्स जरूर शामिल कर लें। फलों और सब्जियों के बीज खाने से शरीर को ताकत मिलती है। आप खरबूजे, तरबूज, कद्दू, सूरजमुखी, अलसी, चिया और खीरा-ककड़ी के बीज खा सकते हैं। सीड्स खाने से शरीर गर्म रहता है और इम्यूनिटी भी मजबूत बनती है। आप मल्टी सीड्स अपनी डाइट में शामिल कर लें। रोजाना एक चम्मच सीड्स खाने से आपको ठंड में हीटर की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। ठंड और बीमारी आपसे कोसों दूर रहेंगी। जानिए सर्दियों में कौन-कौन सी सीड्स खानी चाहिए।
अलसी सीड्स- ठंड में अलसी सीड्स बहुत फायदेमंद होते हैं। अलसी के बीज खाने से शरीर में गर्माहट बनी रहती है। इससे जोड़ों में दर्द और कमर दर्द में भी आराम मिलता है। आप चाहें तो अलसी के लड्डू बनाकर खा सकते हैं। ठंड में गुड़ और अलसी के लड्डू खाने में बहुत टेस्टी लगते हैं। इससे हार्ट भी मजबूत बनता है।
चिया सीड्स- ठंड में चिया सीड्स भी जरूर खाएं। इसमें अच्छी मात्रा में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है जिससे शरीर को एनर्जी मिलती है। चिया सीड्स खाने से इम्यूनिटी मजबूत बनती है। इसमें कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम और पोटेशियम होता है और वजन घटाने में सहायता करता है।
तिल- ठंड आते ही तिल का इस्तेमाल डाइट में शुरू कर देना चाहिए। इससे शरीर गर्म रहता है। सर्दियों में तिल के लड्डू, तिल की गजक जरूर खाएं। तिल खाने से विटामिन B1, फाइबर, हेल्दी फैट्स और कैल्शियम की कमी को पूरा किया जा सकता है। तिल खाने से हेल्दी कोलेस्ट्राल बढ़ता है।
कद्दू के बीज- पंपकिन सीड्स बहुत फायदेमंद होते हैं। कद्दू के बीज डाइट में शामिल करने से इम्यूनिटी मजबूत होती है। इससे शरीर को ऊर्जा मिलती है और बॉडी गर्म बनी रहती है। कद्दू के बीज दिमाग को मजबूत बनाते हैं और तनाव दूर करते हैं। कद्दू के बीज में मैग्नीशियम, विटामिन-बी, विटामिन ई, विटामिन सी और जिंक की अच्छी मात्रा होती है।
तरबूज-खरबूज के बीज- अगर आप अलग-अलग सीड्स नहीं खा सकते तो मिक्स सीड्स भी खा सकते हैं। सर्दियों में खरबूज-तरबूज के बीज भी फायदा करते हैं। सीड्स खाने से बाल हेल्दी बनते हैं। इससे शरीर को गर्मी और एनर्जी मिलती है। सीड्स में जिंक, पोटैशियम, मैंगनीज, सोडियम, कैल्शियम, आयरन, प्रोटीन, फाइबर और कार्बोहाइड्रेट काफी अच्छी मात्रा में पाया जाता है।
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /आजकल ज्यादातर बीमारियों की बड़ी वजह हमारी खराब लाइफस्टाइल है। खाने-पीने की गलत आदतों की वजह से मोटापा बढ़ रहा है, जो कई खतरनाक बीमारियों को जन्म दे रहा है। मोटापा बढ़ने से डायबिटीज और ब्लड प्रेशर की समस्या पैदा हो सकती है। अगर आप फिट नहीं है तो शरीर के जरूर अंग जैसे हार्ट, किडनी और लिवर से जुड़ी परेशानियां भी होने लगती हैं. ऐसे में खुद को हेल्दी और फिट रखने के लिए डाइट में कुछ खास चीजों को जरूर शामिल करें। आप रोजाना किशमिश का पानी जरूर पिएं। इससे शरीर में जमा गंदा कोलेस्ट्रॉल बाहर निकालने और खून को साफ करने में मदद मिलती है। किशमिश का पानी पीने से दिल और लिवर भी मजबूत बनते हैं। हफ्ते में सिर्फ 4 दिन किशमिश का पानी पीने से शरीर को चौंकाने वाले फायदे मिलेंगे। विटामिन ए, विटामिन सी, फाइबर और आयरन भरपूर किशमिश शरीर को हेल्दी रखने में मदद करती है।
कैसे बनाएं किशमिश का पानी
इसके लिए 2 कप पानी लें और उसमें करीब 150 ग्राम किशमिश को पहले धो कर भिगो दें। ध्यान रखें किशमिश गहरे रंग की और मुलायम होनी चाहिए। ज्यादा शाइन वाली किशमिश में कैमिकल पॉलिशिंग की गई होती है। अब एक पैन में पानी को उबाल लें। इसमें किशमिश डालकर रातभर के लिए छोड़ दें। सुबह किशमिश निकाल लें और पानी को हल्का गुनगुना करके खाली पेट पी लें। इसके आधा घंटे बाद तक कुछ भी न खाएं। आप हफ्ते में कम से कम 4 दिन किशमिश वाली पानी जरूर पिएं।
किशमिश का पानी पीने से फायदा
किशमिश का पानी पीने से नसों में जमा खराब कोलेस्ट्रॉल कम होता है। इससे शरीर में गुड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ती है।
हफ्ते में 4 दिन किशमिश का पानी पीने से लीवर में बायोकैमिकल प्रोसेस शुरु हो जाता है, जिससे खून को तेजी से साफ करने में मदद मिलती है।
लिवर के लिए किशमिश का पानी बहुत फायदेमंद है। इससे लिवर तेज होता है और पाचन बेहतर होता है। किशमिश का पानी पीने से पेट में एसिड कम की मात्रा कम होती है।
किशमिश का पानी पीने से पेट बिल्कुल सही रहता है। इससे पाचन, गैस और अपच की समस्या खत्म हो जाती है। शरीर को एनर्जी मिलती है और हीमोग्लोबिन में सुधार आता है।
रोजाना किशमिश का पानी पीने से मोटापा तेजी से कम होता है। आप कुछ ही दिनों में अपने वजन में आसानी से फर्क देख पाएंगे। जो लोग किशमिश का पानी पीते हैं उनका हार्ट मजबूत बनता है।
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /आजकल दिल की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। स्थिति ऐसी है कि हर दूसरा व्यक्ति हाई बीपी से पीड़ित है और इसकी वजह से हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा है। ऐसे में जब बीपी कंट्रोल करने की बात आती है तो इस पर भी चर्चा होती है कि आखिरकार हाई बीपी में चाय पिएं या नहीं। क्योंकि हम में से जयादातर इंसान बिना चाय के अपने दिन की शुरुआत नहीं करता है। लेकिन, क्या आम दूध वाली चाय का सेवन हाई बीपी के मरीजों के लिए फायदेमंद है? तो, आइए जानते हैं क्या कहती है रिपोर्ट और फिर जानेंगे हाई बीपी में किस चाय को पीना फायदेमंद है।
हाई ब्लड प्रेशर में चाय पीना चाहिए या नहीं-
हाई ब्लड प्रेशर में चाय पिएं पर दूध वाली चाय पीने से बचें। दूध वाली चाय पीना बीपी बढ़ाने का कारण बन सकता है। ये सीधे तौर पर काम नहीं करता लेकिन, इनडायरेक्ट तरीके से काम करता है। जैसे कि ये चाय गैस बनाती है और ब्लड वेसेल्स के सकड़ेपन को और बढ़ाती है। इससे दिल को ब्लड पंप करने में और प्रेशर पड़ता है जिससे कि हाई बीपी की समस्या हो सकती है। वहीं, जिन लोगों को पहले से हाई बीपी की दिक्कत है उनमें ये स्थिति को और खराब कर सकती है।
हाई बीपी में कौन सी चाय पिएं-
हाई बीपी में सबसे अच्छी चाय है ग्रीन टी । इसे पीना आपके ब्लड वेसेल्स को खोलने में मदद करता है और फिर हाई बीपी की समस्या को कम करता है। असल में इसके एंटीऑक्सीडेंट्स और कैटेचिन ब्लड वेसेल्स को खोलने का काम करते हैं और ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाते हैं। इससे ब्लड पंप करने में दिल पर प्रेशर नहीं पड़ता है।
इससे अलावा आप ब्लैक टी का भी सेवन कर सकते हैं। ये आपके ब्लड वेसेल्स के लिए फायदेमंद है और दिल से जुड़ी कई समस्याओं को कम करने में मदद करता है। साथ ही आप नींबू वाली चाय भी पी सकते हैं जो कि हाई बीपी के मरीजों के लिए फायदेमंद है। तो, इन तमाम बातों का ध्यान रखें और हाई बीपी को कंट्रोल करने के लिए दूध की चाय पीने से बचें।
आस्था /शौर्यपथ /गणेश भगवान हिंदू धर्म में प्रथम पूज्यनीय देव हैं। कोई भी धार्मिक अनुष्ठान या पूजा शुरू करने से पहले इनकी पूजा करने का विधान है। बुधवार का दिन यानी आज का दिन भगवान गणेश की पूजा करने के लिए शास्त्रों में सबसे उत्तम बताया गया है। भगवान गणेश के वैसे तो कई सारे नाम हैं, लेकिन उनमें से एक नाम उनका एकदंत भी है।भगवान गणेश का एक दांत टूट जाने के कारण उन्हें इस नाम से संबोधित किया जाने लगा। आखिर उनका नाम एकदंत कैसे पड़ा इससे जुड़ी कई पौराणिक कथाएं हैं। लेकिन उनमे से एक सबसे लोकप्रिय पौराणिक कथा आज हम आपको बता रहे हैं।
परशुराम जी और भगवान गणेश के बीच हुआ युद्ध
भगवान गणेश का एक दांत टूटा हुआ है, इसलिए उन्हें एकदंत कहा जाता है। एक पौराणिक कथा के अनुसार इसके पीछे परशुराम जी और भगवान गणेश का युद्ध है। एक समय की बात है जब भगवान शिव से मिलने के लिए परशुराम जी पहुंचे। तब उन्होनें भगवान गणेश को द्वार पर बाहर खड़ा देख कहा कि, मुझे भगवान शिव से मिलना है मुझे अंदर जाने दें। गणेश जी ने परशुराम को अंदर नहीं जाने दिया। इस पर परशुराम जी को क्रोध आ गया और उन्होनें गणेश जी से कहा की अगर मुझे अंदर नहीं जानें दिया तो मुझसे आपको युद्ध करना पड़ेगा। यदि में जीता तो आपको मुझे भगवान शिव से मिलने के लिए अंदर जाने देना होगा। भगवान गणेश ने युद्ध की चुनौती स्वीकार की। दोनों के बीच बड़ा भीषण युद्ध चला। युद्ध के दौरान परशुरान जी ने अपने फरसे से भगवान गणेश पर वार किया और परशुराम जी के फरसे से उनका एक दांत टूट कर वहीं गिर गया। एक टांट टूट कर गिर जाने के कारण भगवान गणेश एकदंत कहलाय।
गणेश जी को प्रसन्न करने का उपाय
शास्त्रों के अनुसार बुधवार के दिन यानी आज भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन में चल रही सभी परेशानियां मिट जाती हैं। आज के दिन भगवान गणेश को दूर्वा चढ़ाने से उनकी कृपा मिलती है। भगवान गणेश को आज के दिन मोदक भी चढ़ाया जाता है। विघ्नहर्ता भगवान गणेश के आशीर्वाद से जीवन में अपार सफलता मिलती है। इसलिए आज के दिन उनकी पूजा करने के बाद आरती जरूर करें। आज के दिन आप चाहें तो उनके मंत्र का भी जाप कर सकते हैं। मंत्र इस प्रकार से - वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरुमे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।।
आस्था /शौर्यपथ / 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक विश्व प्रशिद्ध केदारनाथ धाम के कपाट आज यानी 15 नवंबर को बंद कर दिए गए हैं। अब बाबा बर्फानी के दर्शन करने के लिए भक्तों को 6 महीने का इतंजार करना होगा। आज विधि-विधान के साथ समाधि पूजा के बाद गृर्भ ग्रह को बंद कर दिया गया है। बाबा केदार के दर्शन करने के लिए यहां हर साल भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती हैं। इस मंदिर से भोलेनाथ के भक्तों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है।
वहीं आपको बता दें कि हर भाई दूज के दिन ही शीतकाल के लिए केदारनाथ धाम के कपाट पूरे छह माह के लिए बंद कर दिए जाते हैं। इस दौरान भक्तगण बाबा केदारनाथ के दर्शन ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में कर सकते हैं। दरअसल, केदारनाथ मंदिर के कपाट बंद होने के बाद बाबा केदारनाथ की पंचमुखी डोली ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर तक बड़े ही धूमधाम के साथ निकाली जाती है। इसके बाद अगले 6 महीने तक श्रद्धालु ओंकारेश्वर मंदिर में शिवजी के दर्शन कर सकते हैं।
भाई दूज के दिन ही क्यों बंद होते हैं केदारनाथ मंदिर के कपाट
मालूम हो कि केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने और बंद होने की एक तिथि तय होती है। इसी तिथि में मंदिर के कपाट खोले और बंद किए जाते हैं। बाबा केदारनाथ धाम के कपाट भी हर भाई दूज यानी दिवाली के दो दिन बाद बंद कर दिए जाते हैं। तो आज हम आपको बताएंगे कि आखिर मंदिर के द्वार इसी दिन क्यों बद किए जाते हैं। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, महाभारत युद्ध के बाद पांडव अपनी पत्नी द्रौपदी के साथ हिमालय पहुंचे जहां उन्होंने भगवान शिव के मंदिर का निर्माण किया। इसके बाद उन्होंने यहीं पर अपने पितरों का तर्पण किया है। इसके बाद ही उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति हुई। कहते हैं कि जिस दिन पांडवों ने अपने पूर्वजों का तर्पण किया था वो भाई दूज का ही दिन था, इसलिए तब से इसी दिन केदारनाथ के कपाट बंद होने लगे।
दूसरी वजह यह है कि भैया दूज के दिन से ही शीतकाल का आरंभ होता है। इस दौरान हिमालय क्षेत्र में रहना बहुत मुश्किल होता है। दरअसल, शीतकाल के समय हिमालय में जबरदस्त बर्फबारी होती है। इन कारणों से भी भैया दूज के बाद बाबा केदारनाथ के दर्शन रोक दिए जाते हैं और मंदिर के कपाट अगले 6 महीनों के लिए बंद कर दिए जाते हैं।
केदारनाथ धाम के कपाट 2024 में इस दिन खोले जाएंगे
साल 2024 में केदारनाथ धाम के कपाट 25 अप्रैल को खुलेंगे। बता दें कि मंदिर के कपाट खुलने का फैसला पुजारियों द्वारा अक्षय तृतीया के दिन लिया जाता है, जिसका ऐलान महाशिवरात्रि पावन अवसर पर की जाती है। इस साल बाबा केदारनाथ मंदिर के कपाट 25 अप्रैल 2023 को खुले थे।
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /आजकल काम के दबाव और प्रतिस्पर्धा की दौड़ में लोगों की मेंटल हेल्थ बहुत खराब हो रही है. कुछ लोग की हालत तो इतनी खराब है कि वो साइकोलॉजिस्ट तक का सहारा ले रहे हैं, इससे निकलने के लिए. वहीं, कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो समझ ही नहीं पाते हैं कि वो मानसिक रूप से बीमार हैं. आज हम इस आर्टिकल में मेंटल हेल्थ खराब होने के क्या लक्षण हैं उसके बारे में बताएंगे ताकि आप समय रहते है इसका ट्रीटमेंट ले सकें.
मेंटल हेल्थ खराब होने के लक्षण |
1- अगर आप आजकल बहुत दुखी रहने लगे हैं किसी भी बात पर हंसी नहीं आती है, तो ये दिमागी रूप से बीमार होने के लक्षण हैं और हां अगर आपको हर बात पर रोने का मन करता है तो ये भी मेंटल हेल्थ खराब होना को दर्शाता है.
2- अगर आप बात-बात पर चिंता में आ जाते हैं बहुत ज्यादा सोचने लगते हैं तो इसका मतलब आपकी मानसिक हालत ठीक नहीं है. तो अगर आपको ऐसा कुछ फील होने लगा है तो फिर आप इसका जितना जल्दी हो इलाज कर लीजिए.
3- वहीं, आपको अचानक से रोना, हंसना आने लगे तो ये मेंटल डिसऑर्डर के लक्षण हैं. वहीं, आपको किसी चीज पर रिएक्शन देने का मन ना करना भी मेंटल हेल्थ खराब होने के लक्षण हैं.
4- इसके अलावा खाने के पैटर्न में बदलाव आना भी खराब मेंटल हेल्थ के लक्षण हैं. इसमें भूख ज्यादा भी लग सकती है और कम भी. नींद न आना रात-रात भर जगना भी खराब मेंटल हेल्थ के लक्षण हैं.
5- अपने आपको बेकार समझना भी खराब मानसिक सेहत के लक्षण हैं. मेंटल हेल्थ खराब होने पर लोग अपने आप पर डाउट करने लग जाते हैं. उन्हें लगता है वो किसी काम के नहीं हैं. यह डिप्रेशन के लक्षण हैं.
टिप्स शौर्यपथ /शौर्यपथ / अक्सर देखा जाता है कि बच्चा जल्दी ही बातें भूल जाता है, कहीं खिलौने रखकर उसे याद नहीं रहता तो कभी पढ़ा हुआ भूल जाता है. ऐसे में बच्चे की याद्दाश्त मजबूत बनाने के लिए माता-पिता कुछ तरीके आजमा सकते हैं. तेज याद्दाश्त बच्चों को पढ़ने-लिखने में तो काम आती ही है, इसके अलावा अलग-अलग एक्टिविटी में और देखा जाए तो जीवन के अलग-अलग पड़ाव पर भी उनकी तेज बुद्धि और तेज याद्दाश्त बेहद काम की साबित होती है. यहां बच्चों का दिमाग तेज करवाने वाली कुछ टिप्स दिए जा रहे हैं जिन्हें पैरेंट्स आजमाकर देख सकते हैं.
बच्चों की याद्दाश्त बढ़ाने के टिप्स |
किताबों से अलग भी पढ़ाएं
कई बार बच्चे स्कूल की किताबों को पढ़ना नहीं चाहते हैं लेकिन अलग से कहानियां या किस्से पढ़ने उन्हें अच्छे लगते हैं. बच्चे कुछ ना कुछ पढ़ते रहते हैं तो उनमें पढ़ने की आदत भी आती है और मेमोरी तेज होती है सो अलग.
सवाल पूछने के लिए करें प्रोत्साहित
बच्चे को ऐसे पढ़ाएं या एक्टिविटीज करवाएं कि वो अपने मन से सवाल पूछता रहे. बच्चे की सवाल पूछने की आदत होगी तो वो चीजों को बेहतर तरीके से याद भी रख सकेगा.
गाने और तुकबंदी
अक्सर बच्चे को गाने और तुकबंदी याद रह जाते हैं लेकिन पेपर पर लिखा हुआ कुछ याद नहीं होता. आप उसकी लर्निंग को एक एक्साइटिंग और मजेदार सेशन बना सकते हैं. पढ़ाई की चीजें गानों के माध्यम से उसे याद करवा सकते हैं. यह याद्दाश्त बढ़ाने की भी अच्छी एक्सरसाइज होती है.
खिलाएं पोषण से भरपूर भोजन
खानपान की चीजें दिमागी सेहत पर बेहद प्रभाव डालती हैं. अखरोट, बादाम, हरी सब्जियां और दूध ऐसे ही कुछ फूड्स हैं जो याद्दाश्त बढ़ाने में कारगर साबित होते हैं. इन फूड्स से बच्चे का दिमाग तेज तो होता ही है साथ ही स्वस्थ रहता है सो अलग.
ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / हर किसी की चाहत होती है कि वो ताउम्र जवां दिखे, लेकिन ऐसा होता नहीं है. उम्र बढ़ने के साथ आपके हाथ पैर की ताकत कम होने लगती है और चेहरे की चमक और कसावट भी फीकी पड़ने लगती है. लेकिन आप अपनी स्किन रूटीन को फॉलो करके अपनी त्वचा की खूबसूरती को बरकरार रख सकती हैं. इसके लिए आपको पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं है. बस आपको अपनी रूटीन में कुछ जरूरी बदलाव करना है. तो चलिए जानते हैं क्या हैं वो चेंजेज.
1- अगर आप चाहती हैं कि आपकी स्किन हमेशा चमकदार दिखे तो इसके लिए आप सबसे पहले तो नहाने से शुरूआत करें. आप गर्मी में ठंडे पानी से तो नहाएं ही साथ ही, सर्दी में भी ठंडे पानी का इस्तेमाल करें. ठंडे पानी से नहाने से कोलेजन का स्तर बढ़ता है. इससे चेहरे पर झुर्रियां कम होती हैं. साथ ही तनाव भी नहीं होता और नींद भी अच्छी आती है.
2- हालांकि कोल्ड शॉवर ना सिर्फ आपकी स्किन के लिए बल्कि ओवर ऑल हेल्थ के लिए अच्छा होता है. लेकिन कोई भी नई दिनचर्या शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लीजिए. क्योंकि कुछ लोगों को इससे नुकसान भी हो सकता है. वहीं, गर्भवती महिलाएं तो बिना डॉक्टर से सलाह लिए यह रूटीन फॉलो ना करें.
3- अवसाद का भी इलाज करती है कोल्ड थेरेपी . आपको बता दें कि ठंडा शॉवर लेने से एड्रेनालाईन में 540 प्रतिशत और डोपामाइन में 250 प्रतिशत की वृद्धि होती है. आपको बता दें कि यह डिप्रेशन की दवाएं हैं. इससे शरीर में बेहतर ब्लड सर्कुलेशन होता है.
4- आप ठंडे पानी से पहले दिन 15 सेकेंड नहाएं, फिर अगले दिन 30 सेकेंड. ऐसे ही आप 2 मिनट के कोल्ड शॉवर तक पहुंचे. अब से आप इस थेरेपी को अपनाकर देखिए, फिर देखिए कैसे आपके चेहरे पर चमक और कसाव आती है.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /छठ के पर्व का हिंदू धर्म में विशेष महत्व बताया गया है. छठ का पर्व बिहार, झारखंड, और उत्तर प्रदेश की कई जगहों पर घूमधाम से मनाया जाता है. पंचांग के अनुसार कार्तिक छठ पूजा की शुरूआत 17 नंवबर 2023, शुक्रवार से होगी, सोमवार को कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष की षष्ठी यानी छठी तिथि से आरंभ होगा. ये पर्व चार दिनों तक मनाया जाता है. छठ का पर्व दिवाली के 6 दिन बाद मनाया जाता है. छठ की शुरूआत नहाय-खाय के साथ होती है. छठ के दूसरे दिन को खरना कहते हैं. इस दिन व्रती को पूरे दिन व्रत रखना होगा. शाम को व्रती महिलाएं मिट्टी के चूल्हे पर गुड़वाली खीर का प्रसाद बनाती हैं. छठ व्रत के तीसरे दिन सूर्य देव की पूजा की जाती है. इस दिन महिलाएं शाम के समय तालाब या नदी में जाकर सूर्य भगवान को अर्घ्य देती है. चौथे दिन सूर्य देव को जल देकर छठ का समापन किया जाता है.
छठ पूजा की पारंपरिक ठेकुआ रेसिपीः
इस बार इन तरीकों से बनाएं ठेकुआ, सब करेंगे तारीफ
छठ में ठेकुआ बनाया जाता है। यह एक ऐसा प्रसाद है जो आटे और सूजी से बनता है। आज हम आपको इस तरह से बनाने का तरीका बताएंगे।
ठेकुआ छठ पूजा में बनने वाला एक प्रमुख प्रसाद है, जिसके बिना छठ अधूरा होता है। इसे ठेकरी और खजूरिया के नाम से भी जाना जाता है और यह बिहार में बहुत पॉपुलर है। इसके मुख्य इंग्रीडिएंट्स में चीनी, गेहूं का आटा और घी शामिल है। कई लोग इसमें घी की जगह गुड़ भी डालते हैं।
इसे तेल और घी में डीप फ्राई किया जाता है और फिर छठ में ही नहीं, उसके बाद भी इसे खूब चाव से खाया जाता है। कुछ लोग इसे बेक करके भी बनाने लगे हैं। चूंकि छठ त्यौहार नजदीक है, इसलिए हम इस रेसिपी को आपके साथ शेयर करने से कैसे पीछे रहते?
आज इस आर्टिकल में हम ठेकुआ की रेसिपीज बताने जा रहे हैं, वो भी दो अलग-अलग तरीके से। अब आप इन्हें देखें और खुद ही फैसला करें इस बार प्रसाद में किस तरह का ठेकुआ चढ़ाना पसंद करेंगे। तो चलिए बिना देरी के जानते हैं इसे कैसे बनाया जाता है।
डीप फ्राई कर बनाएं ठेकुआ
जो पहला तरीका हम आपके साथ शेयर कर रहे हैं, वो आम घरों में इस्तेमाल होता है। ठेकुआ बनाकर उसे घी में फ्राई किया जाता है और फिर उसका मजा लिया जाता है।
सामग्री-
1 कप गेहूं का आटा
2 चम्मच बादाम
1 बड़ा चम्मच सौंफ
1/2 चम्मच किशमिश
1/2 कप गुड़
2 बड़े चम्मच ग्रेट किया नारियल
बनाने का तरीका-
सबसे पहले एक पैन में गुड़ और पानी डालकर मिलाएं। फिर इसे धीमी आंच पर रखकर पिघलने दें।
अब एक परात में आटा डालें और घी डालकर मिलाएं। इसके बाद इसमें ड्राई फ्रूट्स और सौंफ डालकर अच्छी तरह से मिक्स करें।
अब गुड़ के पानी को ठंडा कर, इस आटे में डालें और आटे को टाइट गूंथ लें। आटा गूंथ लेने के बाद इसे 15 मिनट के लिए ढककर रखें।
15 मिनट के बाद आटा से छोटी-छोटी बॉल्स बनाकर रख लें। अब इन बॉल्स को हाथ में लेकर हथेली से दबाएं।
आप छलनी, कांटे, ग्रेटर की मदद से इसमें तरह-तरह के डिजाइन बना सकती हैं। अब एक कढ़ाही में तेल और घी डालकर गर्म करें। इसमें ये तैयार ठेकुआ डालकर डीप फ्राई कर लें।
आपके क्रंची और क्रिस्पी ठेकुआ प्रसाद तैयार है। छठी मैया को इसका भोग लगाएं।
छठ पूजा में ठेकुआ का बहुत महत्व होता है. ठेकुआ ज्यादातर बिहार और झारखंड के लोग बनाते और खाते हैं. ठेकुआ को छठ पूजा के मौके पर विशेष रूप से तैयार किया जाता हैं. ठेकुआ को खजुरिया या थिकारी के नाम से भी जाना जाता है. इसे विशेष रूप से छठ पूजा के समय बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों में ज्यादा बनाया जाता है.
छठ से जुड़ी कथाः
मान्यता के अनुसार छठ देवी सूर्य देव की बहन हैं और उन्हीं को प्रसन्न करने के लिए भगवान सूर्य की आराधना की जाती है. व्रत करने वाले मां गंगा और यमुना या किसी नदी या जलाशयों के किनारे आराधना करते हैं. इस पर्व में स्वच्छता और शुद्धता का विशेष ख्याल रखा जाता है. वहीं, पुराणों में मां दुर्गा के छठे रूप कात्यायनी देवी को भी छठ माता का ही रूप माना जाता है. छठ मईया को संतान देने वाली माता के नाम से भी जाना जाता है. माना जाता है कि ये व्रत संतान प्राप्ति और संतान की मंगलकामना के लिए रखा जाता है.
खाना खजाना /शौर्यपथ /दीपावली का त्यौहार बेहद नजदीक है और जाहिर है हम सभी तैयारियों में लगे हुए हैं. घर की साफ सफाई से लेकर बाजार के सामान तक. दिवाली के त्यौहार की रौनक रोशनी, खुशियां, मिठाइयां पटाखों और ढेर सारी मस्ती के साथ. एक चीज जो हम सभी दिवाली के त्यौहार में इंजॉय करते हैं वो है टेस्टी स्वीट्स. अगर आपके पास भी इस दिवाली समय की कमी है तो आप परेशान ना हो हम आपके लिए लेकर आए हैं कुछ आसान और स्वादिष्ट मिठाई रेसिपी , जिन्हें आप महज 30 मिनट से कम समय में बना सकते हैं. तो चलिए बिना किसी देरी के रेसिपी पर चलते हैं.
दिवाली पर बनाएं ये स्वादिष्ट और आसान मिठाई-
1. गुलाब जामुन-
गुलाब जामुन हर त्यौहार में बनाई जाने वाली एक आम रेसिपी में से एक है. गुलाब जामुन. बनाने के लिए सबसे पहले एक कटोरी में 1 कप नरम खोया डालकर मैश कर लें. फिर मैश किए हुए खोये में कप या 100 ग्राम कद्दूकस किया हुआ पनीर, बारीक रवा, 2 बड़े चम्मच मैदा, एक चम्मच बेकिंग पाउडर और एक छोटी चम्मच इलायची पाउडर मिलाएं. 1 बड़ा चम्मच दूध डालें और दूध के साथ आटा गूंथ लें. बस धीरे से मिलाएं. आटे को ढककर 30 मिनट के लिए अलग रख दें. 30 मिनट बाद आटे से बिना दरार के छोटी-छोटी लोइयां बना लीजिए और मध्यम गरम तेल में आटे की लोइयां डाल दें. इन्हें सुनहरा होने तक तलें. फिर बाहर निकाल कर चाशनी में डाल दें. गुलाब जामुन बनकर तैयार हैं.
2. शक्करपारे-
पर्व चाहे जो भी हो मीठे शक्कर पारे के बिना अधूरा सा लगता है. दीपावली के त्यौहार में खासतौर पर शक्कर पारे बनाएं जाते हैं. इन्हें बनाने के लिए सबसे पहले एक बड़े कटोरे में 1 कप पानी में 1 कप चीनी घोलें. 1 कप मैदा, 1 छोटा चम्मच रवा, छोटा चम्मच इलायची पाउडर, 2 बड़े चम्मच घी और 1/2 छोटा चम्मच नमक डालें. अच्छी तरह मिलाकर नरम आटा गूंथ लें. फिर इसे पराठे की तरह थोड़ा मोटा बेल लें. हीरे के आकार में काटें, अपनी पसंद के आकार में. गरम तेल में तलें, बीच-बीच में चलाते हुए, आंच को मध्यम करके गोल्डन और करारे होने तक तलें.
3. बालूशाही-
बालूशाही एक ट्रेडिशनल डिश है, जिसे आमतौर पर दिवाली, भाई दूज जैसे बड़े पर्व में बनाया जाता है. बालूशाही बनाने के लिए सबसे पहले एक प्याले में एक कप घी, एक कप ठंडा ताजा दही लें और हल्का और चिकना होने तक फेंटें. अब 2 कप मैदा लें जिसमें 1 चुटकी नमक, 1 चुटकी बेकिंग सोडा और आधा चम्मच बेकिंग पाउडर मिलाएं. अब इसमें फेंटा हुआ मिश्रण डालकर नरम आटा गूंथ लें. आटे को ढककर 15 मिनिट के लिए अलग रख दीजिए. आटे से छोटी से मध्यम आकार की लोइयां निकाल लीजिए. उन्हें धीरे से बालूशाही के आकार में बेल लें. फिर इसे मध्यम धीमी आंच पर सुनहरा होने तक बैचों में मिनटों के लिए भूनें. फिर इन्हें निकाल कर गरम चीनी की चाशनी में डुबोएं.
खाना खजाना /शौर्यपथ / दिवाली के त्यौहार में महज कुछ ही दिन रह गए हैं. और घर में इसकी तैयारी जोरों जोरों से चल रही है. मार्केट में दिवाली की चमक साफ देखी जा सकती है. लेकिन इन सबके अलावा दिवाली पर जो हमारा इंट्रेस्ट बढ़ाता है वो है दिवाली पर बनाने वाला स्वादिष्ट व्यंजन. तो अगर आप भी इस दिवाली मार्केट से खरीदने की जगह घर पर कुछ बनाना चाहते हैं तो आप इस स्वीट डिश को बना सकते हैं. हम बात कर रहे हैं काजू कतली की. काजू की बर्फी या काजू कतली एक बहुत ही लोकप्रिय मिठाई है. इसे खासतौर पर दिवाली जैसे बड़े-बड़े त्योहारों में बनाया जाता है. आपको बता दें कि काजू को सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. काजू से कई तरह की रेसिपीज बनाई जा सकती हैं. तो चलिए बिना किसी देरी के रेसिपी पर चलते हैं.
कैसे बनाएं काजू कतली-
सामग्रीः
ग्राम काजू
चीनी
दूध
इलायती पाउडर
चांदी का वर्क
(बर्फी जमाने के लिए) घी लगा बर्तन
विधिः
काजू कतली एक बहुत ही यम्मी डिश है और सबसे अच्छी बात ये की आप इसे फ्रिज में स्टोर कर कई दिनों तक रख सकते हैं. काजू कतली को बनाने के लिए सबसे पहले काजू और दूध को एक साथ मिलाकर पेस्ट तैयार कर लें. इसके बाद इसमें चीनी डालकर हल्की आंच पर कुछ देर तक पकाएं. लगातार चलाते रहे जब तक की गूंथे आटे की तरह न हो जाए. इसके बाद आंच को बंद कर घी लगे बर्तन में इसे डालें और और ऊपर से चांदी का वर्क लगा के जमने के लिए रख दें. जब ये अच्छे से जम जाए तो आप इसे डायमंड शेप में काट लें. आप इसे घर आए गेस्ट को खिलाएं और दिवाली का जश्न मनाएं.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
