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May 10, 2026
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PANKAJ CHANDRAKAR

PANKAJ CHANDRAKAR

उन्होंने कहा कि मैं साल 1958 में पुणे आया था. मेरे जैसे युवा गांधी, नेहरू और चव्हाण की विचारधाराओं से प्रेरित थे. हमने उस विचार को अपनाया और आगे काम किया.

पुणे /शौर्यपथ /

एनसीपी प्रमुख  शरद पवार  ने बुधवार को कहा कि उन्होंने अपनी पार्टी बनाने के लिए कांग्रेस से अलग होने के बाद भी महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू और यशवंतराव चव्हाण की विचारधाराओं को कभी नहीं छोड़ा. वह पुणे में एक कार्यक्रम में बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का पछतावा नहीं है कि उन्होंने 1999 तक राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी  बनाने के लिए इंतजार किया.

 उन्होंने कहा कि मैं साल 1958 में पुणे आया था. मेरे जैसे युवा गांधी, नेहरू और चव्हाण की विचारधाराओं से प्रेरित थे. हमने उस विचार को अपनाया और आगे काम किया. कांग्रेस उस विचारधारा का मुख्य आधार थी और इसीलिए कभी इससे दूर जाने के बारे में नहीं सोचा. कभी कुछ अलग करने के बारे में नहीं सोचा. मुझे यह फैसला (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी बनाने का) लेना पड़ा. क्योंकि कांग्रेस ने मुझे छह साल के लिए पार्टी से हटा दिया था.

 उन्होंने कहा कि उन्होंने कांग्रेस कार्यकारिणी की बैठक में कुछ राय रखने की कीमत चुकाई जो "पचा" नहीं गया. उन्होंने जोर देकर कहा कि हमने कांग्रेस छोड़ दी और एनसीपी का गठन किया, लेकिन हमने गांधी, नेहरू और चव्हाण के विचारों को कभी नहीं छोड़ा. यह पूछे जाने पर कि एक आम धारणा है कि कांग्रेस को मुख्यधारा में लाने के लिए पवार की मदद की आवश्यकता होगी. तो इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि आज जरूरत इस बात की है कि सभी समान विचारधारा वाले लोग एक साथ आएं.

 

 

 

 

धान खरीदी केंद्र में लापरवाही को देखते हुए समिति प्रभारी व संचालक पर कार्यवाही के निर्देश दिए

रायपुर /शौर्यपथ/

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री  अमरजीत भगत खराब मौसम के बीच मंदिर हसौद धान खरीदी केंद्र औचक निरीक्षण बेमौसम की मार के बीच यहां अव्यवस्था देखकर वे बेहद नाराज हुए और

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री  अमरजीत भगत खराब मौसम के बीच मंदिर हसौद धान खरीदी केंद्र औचक निरीक्षण हेतु पहुंचे। बेमौसम की मार के बीच यहां अव्यवस्था देखकर वे बेहद नाराज हुए और अधिकारियों को धान खरीदी केंद्र के संचालक पर कार्यवाही के निर्देश दिए।

आज बेमौसम बारिश को देखते हुए मंत्री अमरजीत भगत ने धान खरीदी केंद्रों के औचक निरीक्षण का निर्णय लियाए ताकि धान खरीदी केंद्रों की वस्तुस्थिति मालूम चल जाए। यहां अव्यवस्था देखकर बिफर पड़े। साथ ही संचालक के मौके पर मौजूद न रहने पर उन्हें फटकार लगाई। मंत्री श्री अमरजीत भगत ने मौके पर ही कलेक्टर को फोन लगाया और बात की। उन्होंने तत्काल सभी धान खरीदी केंद्रों के रखरखाव एवं धान के बारिश से बचाव हेतु उचित व्यवस्था करने हेतु कलेक्टर को निर्देशित किया।

मंत्री  अमरजीत नगर ने इस औचक निरीक्षण से पहले कैंप कार्यालय सरगुजा कुटीर में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम के आला अधिकारियों की बैठक ली। उन्होंने बैठक में खराब मौसम में धान खरीदी केंद्रों में उपार्जित धान के रख-रखाव एवं बारिश से बचाव हेतु व्यवस्थाओं की समीक्षा की। तत्पश्चात मंत्री  भगत सभी अधिकारियों को लेकर रायपुर शहर के पास मंदिर हसौद धान खरीदी केंद्र अचानक पहुंचे और वहां की अव्यवस्था देख कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने तुरंत जिला कलेक्टर को फोन कर जिले में स्थित सभी धान खरीदी केंद्रों में व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी मंगाने को कहा और धान को बेमौसम की मार से यथा संभव बचाने के लिये जल्द से जल्द समुचित व्यवस्था करने को की बात कही। मंत्री भगत ने धान खरीदी केंद्र के संचालक को फटकार लगाते हुए कहा कि जब बारिश से बचाव हेतु सामग्री के लिये राशि स्वीकृत की है, तो व्यवस्था क्यों नहीं की गई। इसके बाद मंत्री भगत ने विभागीय अधिकारियों को धान खरीदी केंद्र के संचालक पर उचित कार्यवाही करने के निर्देश दिए और यह भी कहा कि प्रदेश में वह कभी भी और कहीं भी औचक निरीक्षण के लिए पहुंच सकते हैं। व्यवस्थाओं में गड़बड़ी पाए जाने पर जिम्मेदार व्यक्ति पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। राज्य सरकार किसान के मेहनत की फसल को खराब नहीं होने देगी। इसके लिए समुचित व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

गौरतलब है मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल व खाद्य मंत्री  अमरजीत भगत लगातार प्रदेश के अलग-अलग इलाके में धान खरीदी केंद्र के औचक निरीक्षण के लिए पहुंच रहे हैं और वहां की व्यवस्थाओं का जायजा भी ले रहे हैं। मंत्री  अमरजीत भगत ने आज मंदिर हसौद धान खरीदी केंद्र के साथ-साथ ग्राम नारा, ग्राम जरोद और ग्राम गोढ़ी धान खरीदी केंद्र का भी निरीक्षण किया।

एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों की राज्य स्तरीय क्रीड़ा, सांस्कृतिक एवं बौद्धिक प्रतियोगिता का रंगारंग समापन

रायपुर /शौर्यपथ/

अनुसूचित जाति और जनजाति विकास मंत्री डॉ. प्रेम साय सिंह टेकाम

अनुसूचित जाति और जनजाति विकास मंत्री डॉ. प्रेम साय सिंह टेकाम की अध्यक्षता में आज एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों की तीन दिवसीय राज्य स्तरीय क्रीड़ा, सांस्कृतिक एवं बौद्धिक प्रतियोगिता का समापन पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में किया गया। प्रतियोगिता में बस्तर संभाग ओवर ऑल चैम्पियन रहा। राज्य खेल प्रतियोगिता में बस्तर संभाग ने प्रथम, सरगुजा ने द्वितीय और बिलासपुर संभाग ने तृतीय स्थान प्राप्त किया है। इसी प्रकार सांस्कृतिक और बौद्धिक प्रतियोगिता में 14 वर्ष से कम आयु वर्ग और 19 वर्ष तक के आयु वर्ग समूह के लिए सांस्कृतिक एवं बौद्धिक प्रतियोगिता में बिलासपुर संभाग ने प्रथम स्थान, दुर्ग संभाग ने द्वितीय और रायपुर सभाग ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। मंत्री डॉ. टेकाम ने सभी विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान किए। इस अवसर पर अनुसूचित जाति और जनजाति विकास विभाग के सचिव  डी.डी. सिंह, आयुक्त  शम्मी आबिदी सहित प्रशिक्षक, कोच और प्रतिभागी विद्यार्थी उपस्थित थे।

मंत्री  डॉ. टेकाम ने समापन समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि एकलव्य विद्यालय निःसंदेह आदिवासी छात्र-छात्राओं के सम्पूर्ण विकास का केन्द्र है। जहां न केवल बच्चे शिक्षा ग्रहण करते है, बल्कि शारीरिक मानसिक और सांस्कृतिक विकास भी होता है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता के माध्यम से दिसम्बर माह के द्वितीय सप्ताह से राज्य स्तर की इस प्रतियोगिता में विद्यार्थी विद्यालय, जिला, संभाग स्तर की प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के बाद शामिल हुए हैं। विगत दो साल से कोरोना काल के प्रकोप के बाद भी बच्चों की मेहनत और उत्साह में कमी नहीं आई है, खेलकूद की गतिविधियां हो या फिर सांस्कृतिक और बौद्धिक प्रतियोगिता में बच्चों ने उत्साह के साथ भाग लिया है। समापन अवसर पर भी बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम मनमोहक प्रस्तुतियां देने के साथ ही शासन की योजनाओं जैसे-स्वच्छता अभियान, जैविक उत्पादन और अन्य योजना का संदेश भी दिया है।

एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों की तीन दिवसीय राज्य स्तरीय क्रीड़ा

मंत्री डॉ. टेकाम ने कहा कि राज्य स्थापना दिवस पर आदिवासी नृत्य महोत्सव में 7 देशों के कलाकार ने भी अपने देश की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी थी। इससे हमारी सांस्कृतिक विरासत बढ़ी है। उन्होंने विभिन्न प्रतियोगिता में विजयी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। डॉ. टेकाम ने कहा कि प्रतियोगिता के माध्यम से प्रतिभागियों को अपनी प्रतिभा को संवारने का मौका मिलता है। इस प्रतियोगिता में जो बच्चे सफल नहीं हुए वे और अधिक मेहनत करें, आने वाले भविष्य में उन्हें अवश्य सफलता मिलेगी।
अनुसूचित जाति और जनजाति विकास विभाग के सचिव  डी.डी. सिंह ने कहा कि राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में 15 हजार से अधिक बच्चों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। क्रीड़ा प्रतियोगिता में 16 प्रकार की खेल विधाओं में प्रतिभागियों ने प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता 14 वर्ष और 19 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में बालक और बालिकाओं के लिए आयोजित की गई।

सांस्कृतिक एवं बौद्धिक प्रतियोगिता का समापन

अनुसूचित जाति एवं जनजाति विभाग की आयुक्त  शम्मी आबिदी ने प्रतियोगिता के संबंध में प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि प्रदेश में कुल 71 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय संचालित हैं, जिसमें बस्तर संभाग में 29, सरगुजा संभाग में 21, बिलासपुर संभाग में 11, दुर्ग और रायपुर संभाग में 5-5 विद्यालय हैं इनमें 10 कन्या, 6 बालक और 55 संयुक्त विद्यालय हैं। राज्य स्तरीय क्रीड़ा प्रतियोगिता में एथलेटिक्स, बैंडमिंटन, बास्केटबॉल, बॉक्सिंग, फुटबाल, हैंडबाल, हॉकी, कबड्ड़ी, खो-खो, तैराकी, ताईक्वांडों, वालीबॉल, तीरंदाजी, कराटे, कुश्ती, टेबल टेनिस शामिल हैं। इसके अतिरिक्त सांस्कृतिक प्रतियोगिता के अंतर्गत संगीत, नृत्य और बौद्धिक प्रतियोगिता के अंतर्गत तात्कालीक भाषण, निबंध, वाद-विवाद, प्रश्न मंच, पोस्टर एवं चित्रकला प्रतियोगिता को शामिल किया गया।

धान को बारिश से बचाने लगाए गए हैं कैप कव्हर: पानी निकासी के लिए ड्रेनेज की व्यवस्था
सहकारी समितियों को धान के समुचित रख-रखाव और भण्डारण हेतु पहले ही जारी की जा चुकी है लगभग 65.86 करोड़ रूपये की राशि

सभी जिलों और अपैक्स बैंक से समन्वय स्थापित करने मार्कफेड मुख्यालय में बना कंट्रोल रूम

प्रबंध संचालक, अपैक्स बैंक एवं उनके मैदानी अमले द्वारा भी की जा रही है उपार्जन केन्द्रों की सतत् मॉनिटरिंग

रायपुर /शौर्यपथ/

धान के सुरक्षित रख-रखाव हेतु जिला स्तरीय अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है सभी उपार्जन केन्द्रों का सतत् निरीक्षण

मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल द्वारा उपार्जन केन्द्रों में धान को बारिश से बचाने के लिए दिए गए निर्देशों पर त्वरित अमल किया जा रहा है। मौसम में हुए आकस्मिक परिवर्तन व वर्षा को दृष्टिगत रखते हुए, जिला कलेक्टरों के माध्यम से सभी उपार्जन केन्द्रों का निरीक्षण जिला स्तरीय अधिकारियों के द्वारा सतत् रूप से किया जा रहा है और धान के सुरक्षित रख-रखाव हेतु सभी आवश्यक प्रबंध किये जा रहे हैं। धान को बारिश से बचाने के लिए कैप कव्हर लगाए गए हैं और पानी निकासी की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री  बघेल द्वारा धान को बचाने के लिए कैप कव्हर लगाने और उपार्जन केन्द्रों में पानी की निकासी के लिए ड्रेनेज की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए थे। मार्कफेड, मुख्यालय में बनाये गये कंट्रोल रूम के माध्यम से भी सभी जिलों व अपैक्स बैंक से समन्वय कर धान के बेहतर व सुरक्षित रख-रखाव हेतु यथा-संभव समस्त आवश्यक प्रयास किये जा रहे हैं।

उपार्जन केन्द्रों में धान को बारिश से बचाने के लिए दिए गए निर्देशों पर त्वरित अमल

राज्य में धान खरीदी प्रारंभ होने के पूर्व ही सभी सहकारी समितियों को उपार्जित धान के समुचित रख-रखाव तथा भण्डारण हेतु लगभग 65.86 करोड़ रूपये की धन-राशि जारी की जा चुकी है। समितियों को धान सुरक्षा एवं रख-रखाव मद में 2.00 रूपये प्रति क्विंटल के मान से लगभग 18.40 करोड़ रूपये की राशि का अग्रिम भुगतान किया जा चुका है, ताकि समितियों द्वारा धान के रख-रखाव व भण्डारण हेतु ड्रेनेज, प्लास्टिक बोरी एवं तारपोलिन आदि की पर्याप्त व समुचित व्यवस्था की जा सके। इसके अलावा समितियों को प्रासंगिक व्यय मद में 9.00 रूपये प्रति क्विंटल के मान से लगभग 47.46 करोड़ रूपये की राशि भी अब तक अंतरित की जा चुकी है। इस प्रकार समितियों को उपार्जित धान के समुचित व सुरक्षित रख-रखाव हेतु अब तक लगभग 65.86 करोड़ रूपये की पर्याप्त धन-राशि जारी की जा चुकी है।

राज्य में धान खरीदी प्रारंभ होने के पूर्व ही समितियों में धान के सुरक्षित रख-रखाव

इसके अलावा समितियों में धान के सुरक्षित रख-रखाव और भण्डारण को सुनिश्चित करने हेतु अपैक्स बैंक को 5.50 रूपये प्रति क्विंटल के मान से पर्यवेक्षण शुल्क का भुगतान मार्कफेड द्वारा किया जाता है, ताकि उनके मैदानी अमले द्वारा भी मॉनिटरिंग कर समितियों में धान के सुरक्षित रख-रखाव को सुनिश्चित किया जाए। प्रबंध संचालक, अपैक्स बैंक एवं उनके मैदानी अमले द्वारा भी उपार्जन केन्द्रों की सतत् रूप से मॉनिटरिंग व पर्यवेक्षण किया जा रहा है। गौरतलब है कि खरीफ विपणन वर्ष 2021-22 में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अब तक लगभग 52.79 लाख मेट्रिक टन धान का उपार्जन राज्य में किया जा चुका है।

रायपुर /शौर्यपथ/

बीएसएफ के महानिदेशक  पंकज सिंह ने आज यहां पुलिस मुख्यालय, नवा रायपुर में पुलिस महानिदेशक छत्तीसगढ़  अशोक जुनेजा से सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर बस्तर क्षेत्रांतर्गत जिला कांकेर, नारायणपुर एवं कोण्डागांव में माओवादियों के विरूद्ध प्रभावी कार्यवाही हेतु नक्सल विरोधी अभियान के संचालक, क्षेत्र में सुरक्षित माहौल निर्मित कर आम जनता का विश्वास अर्जन तथा सुरक्षा प्रदान कर विकास कार्यों को गति प्रदान करने संबंधी विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। उक्त भ्रमण एवं चर्चा के दौरान बीएसएफ एवं छत्तीसगढ़ पुलिस के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

 

प्रदेश में मनरेगा कार्यों की तेज चाल, कुछ जिलों में दिसम्बर तक चालू वित्तीय वर्ष के कुल लक्ष्य से ज्यादा रोजगार, कुछ जिले वर्ष भर के लक्ष्य के करीब

छत्तीसगढ़ ने ग्रामीण विकास मंत्रालय को 2.39 करोड़ अतिरिक्त मानव दिवस रोजगार का भेजा प्रस्ताव

रायपुर /शौर्यपथ/

छत्तीसगढ़ में मनरेगा

छत्तीसगढ़ में मनरेगा  कार्यों की तेज चाल को देखते हुए पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  टी.एस. सिंहदेव के निर्देश पर मनरेगा आयुक्त ने चालू वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए लेबर बजट बढ़ाने भारत सरकार को पत्र लिखा है। प्रदेश के कुछ जिलों ने चालू दिसम्बर माह में ही पूरे वित्तीय वर्ष (मार्च-2022 तक) के लिए निर्धारित लक्ष्य से अधिक रोजगार सृजन कर लिया है। वहीं कुछ जिले वर्ष भर का लक्ष्य इसी महीने में ही हासिल करने के करीब हैं।

मनरेगा आयुक्त  मोहम्मद कैसर अब्दुलहक ने केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय में संचालक, मनरेगा को पत्र लिखकर दो करोड़ 39 लाख मानव दिवस का अतिरिक्त लेबर बजट स्वीकृत करने का आग्रह किया है। वित्तीय वर्ष की शुरूआत में केंद्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ के लिए 13 करोड़ 50 लाख मानव दिवस का लेबर बजट मंजूर किया गया था। राज्य के प्रस्ताव को हरी झंडी मिलने पर इस वर्ष के लिए संशोधित लेबर बजट 15 करोड़ 89 लाख मानव दिवस हो जाएगा।

प्रदेश में मनरेगा के अंतर्गत चालू वित्तीय वर्ष के लिए स्वीकृत 13 करोड़ 50 लाख मानव दिवस के विरूद्ध अब तक नौ करोड़ 15 लाख मानव दिवस से अधिक का रोजगार सृजन किया जा चुका है। पिछले वित्तीय वर्ष 2020-21 में जनवरी, फरवरी और मार्च माह में सृजित मानव दिवस के आधार पर इस बार वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर 15 करोड़ 89 लाख मानव दिवस रोजगार सृजन की संभावना है। इसे देखते हुए गांवों में रोजगार के पर्याप्त अवसर मुहैया कराने राज्य सरकार द्वारा लेबर बजट में वृद्धि का प्रस्ताव केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय को भेजा गया है।

चालू वित्तीय वर्ष मे अब तक राजनांदगांव जिले में सर्वाधिक 87 लाख 25 हजार मानव दिवस रोजगार का सृजन किया गया है। कबीरधाम जिले में 66 लाख 51 हजार, बलौदाबाजार-भाटापारा में 51 लाख 73 हजार, रायगढ़ में 48 लाख 52 हजार, महासमुंद में 45 लाख 95 हजार, बिलासपुर में 41 लाख 48 हजार, सूरजपुर में 40 लाख 82 हजार, कोरिया में 40 लाख 78 हजार, धमतरी में 39 लाख 15 हजार, गरियाबंद में 37 लाख 53 हजार, जांजगीर-चांपा में 35 लाख 32 हजार, कांकेर में 32 लाख 93 हजार, बालोद में 31 लाख 38 हजार, जशपुर में 31 लाख दस हजार और मुंगेली में 30 लाख 95 हजार मानव दिवस का रोजगार उपलब्ध कराया गया है।

बलरामपुर-रामानुजगंज में 29 लाख 53 हजार, रायपुर में 28 लाख 50 हजार, कोरबा में 27 लाख 35 हजार, सरगुजा में 26 लाख 33 हजार, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में 20 लाख 66 हजार, बेमेतरा में 20 लाख 54 हजार, सुकमा में 20 लाख, कोंडागांव में 19 लाख 30 हजार, दुर्ग में 17 लाख 69 हजार, बीजापुर में 14 लाख 42 हजार, बस्तर में 13 लाख 40 हजार, दंतेवाड़ा में 12 लाख 54 हजार और नारायणपुर जिले में तीन लाख 63 हजार मानव दिवस रोजगार इस साल मनरेगा श्रमिकों को मुहैया कराया गया है।

 

अन्य खबर /शौर्यपथ/ 

ध्यान क्या है?

वह बल, जो हमें इस सब (प्रकृति के प्रति हमारी दासता) का प्रतिरोध करने का सामर्थ्य देता है। प्रकृति हमसे कह सकती है, ‘देखो, वहां एक सुंदर वस्तु है।’ मैं नहीं देखता। अब वह कहती है, ‘यह गंध सुहावनी है, इसे सूंघो।’ मैं अपनी नाक से कहता हूं, ‘इसे मत सूंघ।’ और नाक नहीं सूंघती। ‘आंखो, देखो मत!’ प्रकृति जघन्य कार्य करती है, और कहती है, ‘अब, बदमाश, बैठ और रो! गर्त में गिर!’ मैं कहता हूं, ‘मुझे न रोना है, न गिरना है।’ मैं उछल पड़ता हूं। मुझे मुक्त होना ही चाहिए। कभी इसे करके देखो। ध्यान में, एक क्षण के लिए, तुम इस प्रकृति को बदल सकते हो। अब, यदि तुममें यह शक्ति आ जाती है, तो क्या वह स्वर्ग या मुक्ति नहीं होगी? यही ध्यान की शक्ति है। इसे कैसे प्राप्त किया जाए? दर्जनों विभिन्न रीतियों से प्रत्येक स्वभाव का अपना मार्ग है। पर सामान्य सिद्धांत यह है कि मन को पकड़ो। मन एक झील के समान है, और उसमें गिरने वाला हर पत्थर तरंगें उठाता है। ये तरंगें हमें देखने नहीं देतीं कि हम क्या हैं। झील के पानी में पूर्ण चंद्रमा का प्रतिबिम्ब पड़ता है, पर उसकी सतह इतनी आंदोलित है कि वह प्रतिबिम्ब हमें स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता। इसे शांत होने दो। प्रकृति को तरंगें मत उठाने दो। शांत रहो, और तब कुछ समय बाद वह तुम्हें छोड़ देगी। तब हम जान सकेंगे कि हम क्या हैं। ईश्वर वहां पहले से है, पर मन बहुत चंचल है, सदा इन्द्रियों के पीछे दौड़ता रहता है। तुम इन्द्रियों को रोकते हो और (फिर भी) बार-बार भ्रमित होते हो। अभी, इस क्षण मैं सोचता हूं कि मैं ठीक हूं और मैं ईश्वर में ध्यान लगाऊंगा, लेकिन एक मिनट में मेरा मन लंदन पहुंच जाता है। यदि मैं उसे वहां से खींचता हूं तो वह न्यूयॉर्क चला जाता है, और मेरे द्वारा वहां अतीत में किए गए क्रियाकलापों के बारे में सोचने लगता है। इन तरंगों को ध्यान की शक्ति से रोकना है।

परम आनंद का द्वार

ध्यान के द्वार से हम उस परम आनंद तक पहुंचते हैं। प्रार्थनाएं, अनुष्ठान और पूजा के अन्य रूप ध्यान की शिशुशाला मात्र हैं। तुम प्रार्थना करते हो, तुम कुछ अर्पित करते हो।
एक सिद्धांत था- सभी बातों से मनुष्य का आध्यात्मिक बल बढ़ता है। कुछ विशेष शब्दों, पुष्पों, प्रतिमाओं, मंदिरों, ज्योतियों को घुमाने के समान अनुष्ठानों- आरतियों- का उपयोग मन को उस अभिवृत्ति में लाता है, पर वह अभिवृत्ति तो सदा मनुष्य की आत्मा में है, कहीं बाहर नहीं। लोग यह कर रहे हैं; पर वे जो अनजाने कर रहे हैं, उसे तुम जान-बूझकर करो। यही ध्यान की शक्ति है।
हमें धीरे-धीरे अपने को प्रशिक्षित करना है। यह प्रश्न एक दिन का, या वर्षों का, और हो सकता है कि, जन्मों का नहीं है। चिंता मत करो! अभ्यास जारी रहना चाहिए! इच्छापूर्वक, जान-बूझकर, अभ्यास जारी रखना चाहिए। हम उन वास्तविक सम्पदाओं को अनुभव करने लगेंगे, प्राप्त करने लगेंगे, जिन्हें हमसे कोई नहीं ले सकता- वह सम्पत्ति जिसे कोई नहीं छीन सकता; नष्ट नहीं कर सकता; वह आनंद जिसे कोई दुःख छू नहीं सकता।

 


साधना की पद्धति

ब्राह्ममुहूर्त और गोधूलि, इन दो समयों में प्रकृति अपेक्षाकृत शांत भाव धारण करती है। ये दो समय मन की स्थिरता के लिए अनुकूल हैं। इस दौरान शरीर बहुत कुछ शांत भावापन्न रहता है। इस समय साधना करने से प्रकृति हमारी काफ़ी सहायता करेगी, इसलिए इन्हीं दो समयों में साधना करना आवश्यक है।
तुममें से जिनको सुभीता हो वे साधना के लिए स्वतंत्र कमरा रख सकें तो अच्छा हो। इसे सोने के काम में न लाओ। बिना स्नान किए और शरीर-मन को शुद्ध किए इस कमरे में प्रवेश न करो। इस कमरे में सदा पुष्प और हृदय को आनंद देने वाले चित्र रखो। सुबह और शाम वहां धूप और चंदन-चूर्ण आदि जलाओ। उस कमरे में क्रोध, कलह और अपवित्र चिंतन न किया जाए। ऐसा करने पर शीघ्र वह कमरा सत्वगुण से पूर्ण हो जाएगा। यहां तक कि जब किसी प्रकार का दु:ख या संशय आए अथवा मन चंचल हो तो उस समय उस कमरे में प्रवेश करते ही मन शांत हो जाएगा।
शरीर सीधा रखकर बैठो। संसार में पवित्र चिंतन का एक स्रोत बहा दो। मन ही मन कहो- संसार में सभी सुखी हों, शांति लाभ करें, आनंद पाएं। इस प्रकार चहुंओर पवित्र चिंतन की धारा बहा दो। ऐसा जितना करोगे, उतना ही अच्छा अनुभव करने लगोगे।

 

 

इंस्पायरिंग /शौर्यपथ /

आज के दौर में सबसे मुश्किल काम है प्रासंगिक बने रहना। आप कितनी भी ऊंचाई पर क्यों ना हो, अप्रासंगिक होने के डर में आप दौड़ते चले जाते हैं। समाज में, परिवार में, जॉब में अप्रासंगिक होने का डर आपको खाता है। हमारी लड़ाई इन दिनों रिलेवेंट बने रहने की है। जब मैं सफल हुआ तो अपने कुछ बुजुर्गों को देखकर सोचता था कि ये कैसे इतने शांत, खुश हैं।

इसे डीएनए थ्योरी से समझने में मदद मिली। ये क्यों होता है कि एक घटना पर हर इंसान अलग प्रतिक्रियाएं देता है? किसी ने आपकी बेटी को छेड़ दिया तो हो सकता है आप उसकी शिकायत पुलिस में करें, यह भी हो सकता है कि आप उसका कत्ल कर दें... तो ऐसा कैसे! दरअसल ये सब डीएनए से होता है कि किस वक्त पर कौन-सा डीएनए एक्टिव है।

मैं प्रैक्टिकल इंसान हूं इसलिए सही वक्त पर सही डीएनए एक्टिवेट करने का सिद्धांत समझने ऑस्ट्रिया गया। इस कोर्स के लिए तगड़ी रकम खर्च की। ये एक वेलनेस इंस्टिट्यूट था, जहां मेरा स्वागत इस बात से हुआ कि - आप इतने पैसे खर्च करके भारत से आए हैं, वो बातें सीखने के लिए जो हमने खुद भारत से ही सीखी हैं।

अगले दिन सुबह डॉक्टर से मिला। मैं भूखा था, मैंने उनसे पूछा कि मुझे क्या खाना चाहिए। उन्होंने मुझे ब्रेड के चार पीस दिए, जो थोड़े सख्त थे। साथ में सूप जैसा कुछ था। वो बोले यही अगले तीन दिन तक आपका नाश्ता, लंच और डिनर है। मैं हैरान हुआ तो उन्होंने मुझे शांत किया और कहा आपको मनपसंद नाश्ता, खाना सब मिलेगा, लेकिन पहले आपको ये खाना होगा, वो भी हमारे दिए निर्देशों के अनुसार। मैंने मंजूर किया। उन्होंने मुझे बताया कि हम यहां एक रूल फॉलो करते हैं, 'ड्रिंक योर फूड, च्यू योर वॉटर'(अपने खाने को पीजिए और पानी को चबाइए)।

मैंने उनसे इसका मतलब पूछा तो वो बोले - ब्रेड को 40 बार चबाइए, ऐसा करेंगे तो यह लिक्विड हो जाएगी, तभी उसे निगलिए। ये आसान नहीं होगा, आपका दिमाग आपको ऐसा करने से रोकेगा, लेकिन आपको फोकस बनाना है। जब सूप लेना चाहें, उसे सीधे मत निगलिए। मुंह में रखकर उसे महसूस कीजिए और फिर निगलिए।

मैंने बिल्कुल ऐसा ही किया और यकीन मानिए मैं 14 मिनट में ब्रेड खत्म नहीं कर पाया, सूप तो भूल जाइए। मेरा पेट भर चुका था। आगे कुछ खाने लायक नहीं था। उन्होंने इसका राज मुझे बताया - मि.माधवन, आपका दिमाग जानता है कि आपको क्या चाहिए। 14 या 15 मिनट चबाने के बाद दिमाग कहता है बस बहुत हुआ! और आप तृप्त महसूस करने लगते हैं।

मैंने इस बारे में और जानना चाहा तो उन्होंने बताया - आप अपने दिमाग और शरीर को बेहद कम आंकते हैं। जंगल में बैल से ज्यादा मसल किसी जानवर के नहीं होते...और बैल का दिमाग जानता है कि घास से उसे कैसे प्रोटीन हासिल करना है। तो आप क्यों प्रोटीन शेक पीकर, एक्सरसाइज करके मसल बनाने में लगे रहते हैं।

दुनिया में जो भी सफल और महान हुए हैं एलेक्जेंडर से लेकर महात्माओं तक, सभी ने खाने को लेकर अनुशासन का पालन किया है। उन्होंने समझाया कि हम गलत वक्त पर खाना खाते हैं तो दिमाग को जब कई दूसरे कामों में लगना चाहिए, वो बेचारा केवल खाने को जहर बनने से रोकने में लगा होता है। इस तरह आप स्वस्थ नहीं रह सकते हैं। अगर आप स्वस्थ नहीं हैं तो दिमाग का सही चलना असंभव है। कोई भी समाज तब तक विकसित नहीं हो सकता जब तक वो स्वस्थ नहीं है, इस तरह हमारी दिमागी स्वास्थ्य भी पेट से जुड़ा है।

प्रासंगिकता पर लौटते हैं, 50 साल का हीरो आखिर 17 साल की हीरोइन से कैसे तालमेल बैठाएगा। यह वाकई मुश्किल है लेकिन अगर आपकी जेब में किस्से हैं, आप अपनी उम्र से छोटे नजर आते हैं, ज्यादा यंग दिखते हैं, एनर्जी से भरपूर हैं तो आप वाकई वो हीरो हैं जिसकी प्रासंगिकता कभी खत्म नहीं होगी। ये सब सही वक्त पर सही खाने से संभव है। आप भी कोशिश कीजिएगा।

(2016 में आरडब्लूसी के मंच पर एक्टर आर.माधवन)

अन्य खबर /शौर्यपथ/ 

कनाडा के वैज्ञानिकों ने एक हालिया रिसर्च में पाया है कि क्लास रूम में बैठने के बजाय ऑनलाइन पढ़ाई करने से बच्चों में डिप्रेशन और चिंता का खतरा बढ़ रहा है। साथ ही, कोरोनाकाल के दौरान ज्यादा टीवी देखने और ऑनलाइन गेम खेलने से 2 से 4 साल तक के बच्चों में भी डिप्रेशन और व्यवहार संबंधी समस्याएं जन्म ले रही हैं।

बच्चों की मेंटल हेल्थ और डिजिटल स्क्रीन का कनेक्शन

कनाडा के हॉस्पिटल फॉर सिक चिल्ड्रन के विशेषज्ञों ने रिसर्च में बच्चों की मेंटल हेल्थ और डिजिटल स्क्रीन के कनेक्शन का पता लगाया। उन्होंने करीब 2 हजार स्कूली बच्चों के माता-पिता से बात कर कोरोना के समय बच्चों की मानसिक स्थिति की रिपोर्ट बनाई। बच्चों में लड़के और लड़कियों की संख्या समान थी।

रिसर्च में यह बात सामने आई कि बच्चों की मेंटल हेल्थ से डिजिटल स्क्रीन के इस्तेमाल का सीधा कनेक्शन है। औसतन 11 साल के बच्चों में ऑनलाइन पढ़ाई करने के कारण डिप्रेशन और चिंता का खतरा बढ़ा है। साथ ही, इनमें ज्यादा टीवी देखने, इंटरनेट पर गेम्स खेलने और वीडियो चैट करने से भी मानसिक बीमारियों का स्तर बढ़ गया है। देर तक ध्यान न लगा पाना भी बच्चों में एक बढ़ती मुसीबत है।

 
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह परेशानी केवल बड़े बच्चों में नहीं है। 2 से 4 साल तक के बच्चे भी टीवी और डिजिटल स्क्रीन के ज्यादा इस्तेमाल से व्यवहार संबंधी समस्याओं की चपेट में आ रहे हैं।

रिसर्च में या भी पाया गया कि बच्चों की मेंटल हेल्थ पर कोरोनाकाल में सोशल आइसोलेशन का भी बुरा असर हुआ है। इसके अलावा, नींद में गड़बड़ी, फिजिकल एक्टिविटी न होना, तनावपूर्ण खबरें और ऑनलाइन बुलिंग का शिकार होना भी बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने के कुछ महत्वपूर्ण कारण हैं।

कैसे रखें अपने बच्चों को मानसिक बीमारियों से दूर

1. मोबाइल पर पेरेंटल कंट्रोल का करें इस्तेमाल

बच्चों को स्क्रीन से दूर रखने के लिए आप अपने मोबाइल या कम्प्यूटर पर पैरेंटल कंट्रोल सेटिंग का उपयोग कर सकते हैं। इससे आपका बच्चा एक सीमित समय तक ही स्क्रीन देख पाएगा। साथ ही, उसके काम में न आने वाली चीजें ब्लॉक हो जाएंगी। इसके अलावा, चाइल्ड एक्टिविटी कंट्रोल में रखने के लिए आप ऐप्स भी यूज कर सकते हैं।

 
2. बच्चों से बात करें

हम अक्सर जीवन में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि अपने बच्चों को समय देना ही भूल जाते हैं। महामारी के इस वक्त में आप अपने बच्चों का सहारा बनें। उनके मन की बातों को जानने और समझने की कोशिश करें। उनकी परेशानियों का उपाय ढूंढे। इससे वे तनाव की स्थिति में नहीं आ पाएंगे।

3. टेक्नो-फ्रेंडली बनें

आपका बच्चा कब कौन सी वेबसाइट पर जाता है, कौन से गेम खेलता है, कौन से सोशल मीडिया प्लैटफार्म चलाता है, इसकी जानकारी रखें। इससे भविष्य में यदि उनको कोई परेशानी होती है, तो आप उसे समझने में सक्षम होंगे। अगर बच्चे छोटे हैं, तो वेबसाइट्स की एज रिस्ट्रिकशन गाइडलाइंस को जरूर पढ़ लें।

4. बच्चों के स्क्रीन टाइम को सीमित करें

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, 2 से 5 साल की उम्र के बच्चों को हर दिन अधिकतम एक घंटा स्क्रीन देखनी चाहिए। वहीं, 2 साल से छोटे बच्चों को टीवी समेत कोई भी स्क्रीन नहीं देखनी चाहिए।

अधिकारियों ने पीयूष जैन के ठिकानों से कुल 196 करोड़ रुपये नकदी के अलावा 23 किलो सोना सहित अन्य सामान की बरामदगी की है.

नई दिल्ली /शौर्यपथ/

 उत्तर प्रदेश  के इत्र कारोबारी पीयूष जैन  के घर टैक्स छापेमारी  पूरी हो गई है. वहीं इत्र कारोबारी पीयूष जैन से संबंध को लेकर बीजेपी और सपा के नेता एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं . सपा नेता अखिलेश यादव ने कहा है कि गलत पहचान की वजह से बीजेपी ने अपने ही आदमी के यहां छापा मरवा दिया है. लेकिन जांच एजेंसी के सूत्रों ने कहा है कि व्यवसायी पीयूष जैन पर छापेमारी 'गलत पहचान' का मामला नहीं है. छापेमारी विशिष्ट इनपुट के आधार पर एक केंद्रित जांच का परिणाम था.

 पीयूष जैन के कानपुर और कन्नौज परिसर से अधिकारियों ने कुल 196 करोड़ रुपये नकदी के अलावा 23 किलो सोना सहित अन्य सामान की बरामदगी की है. वहीं, इन सबके बीच यूपी में इत्र कारोबारी के घर छापेमारी बड़ा सियासी मुद्दा बनता जा रहा है. कानपुर में पीएम मोदी ने इत्र कारोबारी पीयूष जैन को समाजवादी पार्टी से जोड़ा. साथ ही सभी योजनाओं का क्रेडिट लेने को लेकर अखिलेश यादव पर तंज भी कसा. बीजेपी ने आरोप लगाया है कि पीयूष जैन ने हाल ही में "समाजवादी परफ्यूम" लॉन्च किया था. पीएम मोदी ने कहा कि पिछले दिनों बक्से भर-भर के जो नोट मिली है, उसके बाद भी वे यही कहेंगे, ये भी हमने किया.

वहीं समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इत्र व्यापारी पीयूष जैन के उनकी पार्टी से किसी तरह के संबंध से इनकार किया और कहा कि भाजपा ने 'गलती से' अपने ही व्यवसायी पर छापा मारा. उन्होंने दावा किया कि समाजवादी इत्र (इत्र) सपा एमएलसी पुष्पराज जैन द्वारा लांच गया था न कि पीयूष जैन ने लांच किया था. भाजपा पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘सत्तारूढ़ भाजपा ने डिजिटल भूल से अपने ही व्यवसायी (पीयूष जैन) के यहां छापा मारा.'' वहीं पुष्पराज जैन ने एनडीटीवी को बताया है कि उनका पीयूष जैन से कोई संबंध नहीं है और वह "राजनीति के निम्न स्तर से दुखी हैं. "

वहीं डायरेक्टर जेनरल ऑफ जीएसटी इंटीलेजेंस  के सूत्रों ने 'गलत पहचान' थ्योरी को खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा है कि उन्हें शिखर पान मसाला समूह द्वारा कथित कर चोरी के संबंध में विशेष जानकारी मिली थी. सूत्रों ने कहा कि एक जांच ने उन्हें ट्रांसपोर्ट कंपनी गणपति रोड कैरियर्स  और पीयूष जैन की ओडोकेम इंडस्ट्रीज  तक पहुंचाया. पीयूष जैन ने शिखर समूह को इत्र से संबंधित कंपाउड की आपूर्ति की और केवल कैश में भुगतान की वजह से जांच के दायरे में आया. सूत्रों ने कहा कि यह गलत पहचान का मामला नहीं था.

 

 

 

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