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टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ / अगर आपके पैर पर पपड़ी नजर आ रही है जिसके कारण पैर भद्दे नजर आने लगे हैं तो आपको इसको गंभीरता से लेना चाहिए. क्योंकि ये किसी बीमारी के लक्षण हो सकते हैं.वैसे पैर पर पपड़ी धूल मिट्टी के कारण भी हो सकता है. इके अलावा सोरायसिस भी पपड़ीदार पैर होने की वजह हो सकती है. ऐसे में आपको अपने पैर की अतिरिक्त देखभाल करने की जरूरत है. आज हम इसी के बारे में बताएंगे.
कैसे करें पैरों की देखभाल
- नहाते समय आप अपने पैरों को ब्रश से रगड़कर साफ करें. ब्रश से एड़ियों को रगड़ें. इससे पैर आपके साफ और चमकदार होते हैं.
- वहीं, आप बाहर जाते समय पैर में मोजें जरूर पहनें, क्योंकि धूल मिट्टी के कारण स्किन पर पपड़ी जम सकती है. वहीं, आप घर में नंगे पांव होकर ज्यादा न चलें.
- इसके अलावा आप सप्ताह में डीप क्लीनिंग जरूर करें. आप गरम पानी में पैरों को करीब 10 से 15 मिनट तक डुबोकर रखें. इसके बाद ब्रश से रगड़िए.
- पैरों को लंबे समय तक गिला रखने से उसकी स्किन निकलने लगती है. जिसके कारण भी पपड़ी नजर आती है. इसलिए पैरों को सुखाकर रखें.
- वहीं, सोने से पहले पैरों को मॉइस्चराइज जरूर करें. इससे स्किन को गहराई से पोषण मिलता है. इससे पैर खिले-खिले नजर आते हैं.
सेहत /शौर्यपथ /हरी सब्जियों के फायदों के बारे में आपको ज्यादा बताने की जरूरत नहीं है. ऐसी ही एक स्वास्थ्यवर्धक सब्जी है लौकी, जिसे कद्दू भी कहते हैं. इसका न केवल शरीर में ठंडा प्रभाव पड़ता है, बल्कि हृदय के लिए भी बहुत लाभकारी है. यहां तक कि नींद संबंधी विकारों को भी कम करने में मदद करता है. इसके कई और भी फायदे हैं, जिसके बारे में हम आपको बताने वाले हैं. हैप्पी चॉकलेट डे 2024: डार्क चॉकलेट खाने के होते हैं 9 बड़े फायदे
लौकी खाने के फायदे
- आयरन, विटामिन और पोटैशियम से भरपूर लौकी का जूस रोजाना पीने से आपको वजन कम करने में मदद मिलेगी.
- जिन लोगों को नींद की समस्या है उन्हें लौकी के जूस में तिल का तेल मिलाकर सेवन करना चाहिए. इससे आपके नींद की गुणवत्ता बेहतर होता है.
- प्रदूषण के कारण समय से पहले बालों का सफेद होना कम उम्र में आम हो गया है. रोजाना एक गिलास लौकी का जूस पीने से आपको बालों का रंग और बनावट बरकरार रखने में मदद मिल सकती है.
- लौकी पाचन में भी मदद करती है. फाइबर और क्षार सामग्री से भरपूर, यह एसिडिटी के इलाज में मदद करता है.
- लौकी का रस एक प्राकृतिक क्लींजर के रूप में काम करता है और शरीर से विषाक्त पदार्थों को दूर करता है.
ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / बढ़ते प्रदूषण के कारण आजकल कम उम्र में ही बालों का सफेद होना आम बात होती जा रही है. ऐसे में लोग इसे छिपाने के लिए तरह-तरह के केमिकल हेयर डाई का इस्तेमाल करते हैं. जिससे बाल कुछ समय के लिए काले तो हो जाते हैं, लेकिन उनका सफेद होना नहीं रोकता है. ऐसे में फिर आपको हर 15 से 20 दिन पर बालों को रंगने के लिए हेयर डाई का इस्तेमाल करना पड़ता है. यह एक रूटीन बन जाती है. ऐसे में हम आपको यहां पर कुछ ऐसे छिलकों के बारे में बताएंगे जो आपके बाल को काला कर सकते हैं.
छिलकों से डाई बनानी की समाग्री
इसको बनाने के लिए 1 नारियल का छिलका, 1 चम्मच एलोवेरा जेल, 1 चम्मच नारियल का तेल चाहिए.
बनाने का तरीका
नारियल के छिलके से हेयर डाई बनाने के लिए सबसे पहले नारियल के छिलके को अच्छी तरह से साफ कर लीजिए फिर इसे छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ दीजिए. अब इसे एक लोहे की कड़ाही में डालकर अच्छी तरह भून लीजिए.
30 मिनट तक भुनने के बाद हाथों की मदद से पीसकर इसमें नारियल का तेल और एलोवेरा जेल मिक्स करिए. इच्छानुसार इसमें थोड़ा सा सरसों तेल भी मिक्स कर सकती हैं. इन सारी चीजों को मिक्स करने के बाद आप इन्हें 10 मिनट के लिए छोड़ दीजिए सेट होने के लिए.
हेयर डाई लगाने का तरीका
छिलके की डेयर डाई को बालों में लगाने के लिए एक ब्रश ले लीजिए. अब इस ब्रश की मदद से डाई को अपने बालों पर लगाएं. करीब 20 से 30 मिनट इसे लगाकर छोड़ दीजिए. फिर नॉर्मल पानी से इसे धो दीजिए.
टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ / क्या आपके बच्चे के साथ भी ऐसा होता है कि चीजें याद करने के बाद वो भूल जाते हैं. किसी भी चीज को समझने में काफी समय लगता है उनकी समझ आती है लेकिन कुछ दिन बाद वो भूल जाते हैं. हमने देखा है कि कई बच्चों को एक समय में बहुत सारी चीजें याद रखने में डिफिकल्टी होती है और इसके कारण स्कूल में उनके ग्रेड कम आते हैं. कई पेरेंट्स अपने बच्चों को डराते हैं, डांटते है चीजें भूल जाने के लिए उनको पनिशमेंट भी देते हैं. लेकिन यह न केवल आपके बच्चे की मेंटल हेल्थ के लिए नुकसानदायक है बल्कि उसके रिपोर्ट कार्ड पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ेगा. अगर आपके बच्चे को कुछ याद रखने में कठिनाई हो रही है, तो यहां कुछ तरीके दिए गए हैं जिनसे आप उसकी याददाश्त बढ़ाने में मदद कर सकते हैं.
मेमोरी बढ़ाने वाले गेम: ऐसे कई गेम हैं जो ऑनलाइन और ऑफलाइन मिलते हैं, जो बच्चों को उनकी मेमोरी बढ़ाने में मदद करने के लिए तैयार किए गए हैं. कई तरह के गेमों में अलग-अलग सवाल और ट्रिक्स शामिल होती हैं जो बच्चे को चीजें याद रखने में मदद कर सकती हैं.
याददाश्त बढ़ाने वाले फूड्स: आपके बच्चे की याददाश्त बढ़ाने में अच्छा और पोषण से भरपूर खाना बहुत अहम है. अपने बच्चे की याददाश्त बढ़ाने के लिए उन्हें ये फ्रूट्स खिलाएं. आप किसी एक्सपर्ट से भी उनकी हेल्दी डाइट बनवा सकते हैं जो आपके बच्चे के ब्रेन को स्ट्रांग करने और याददाश्त बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है.
पूरी नींद: चाहे आपका बच्चा कितनी भी देर तक पढ़ाई करे अगर वो पूपी नींद नहीं लेगा तो सब कुछ बर्बाद हो जाएगा. एक अच्छी नींद आपके शरीर को फिर से एनर्जेटिक कर देती है और ब्रेन को आराम करने के लिए टाइम देती है. आप शायद जानना चाहेंगे कि सुपरफूड जल्दी याददाश्त बढ़ा सकते हैं और आपके मूड को अच्छा कर सकती है. तो आप अपने बच्चे को सोने से पहले थोड़ा हल्दी वाला दूध यानी हल्दी का दूध दे सकते हैं.
पढ़ाई का समय: पढ़ाई का समय भी बहुत अहम भूमिका निभाता है. अपने बच्चे की पढ़ाई के लिए सबसे बेहतर टाइम के बेस पर अपने बच्चे के लिए एक फ्लैक्सिबल रूटीन बनाएं जिसमें खेलने और रिफ्रेश होने के लिए कुछ अच्छा समय भी शामिल हो.
बात करें: अपने बच्चे से बात करें, उससे पूछें कि क्या पढ़ाई का ये तरीका उसे सही लग रहा है उस पर कोई प्रेशर नहीं पड़ रहा है. क्योंकि उसकी मेंटल हेल्थ से ज्यादा जरूरी कुछ नही है.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / सालभर में चार तरह की नवरात्रि मनाई जाती हैं जिनमें से 2 गुप्त नवरात्रि, एक चैत्र नवरात्रि और एक शारदीय नवरात्रि होती है. माघ माह की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहते हैं. माना जाता है कि गुप्त नवरात्रि के दिनों में मां जगदंबे की पूजा-आराधना करने पर घर-परिवार में सुख और खुशहाली का वास होता है और दुख-दर्द दूर होते हैं सो अलग. इस साल गुप्त नवरात्रि 10 फरवरी से शुरू हो गई है और यह 18 फरवरी तक रहने वाली है. नवरात्रि के दौरान दुर्गा चालीसा का पाठ करना बेहद शुभ और फलदायी माना जाता है और आप भी रोजाना दुर्गा चालीसा का पाठ कर सकते हैं.
दुर्गा चालीसा का पाठ |
॥दुर्गा चालीसा॥
नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो अंबे दुःख हरनी॥
शशि ललाट मुख महाविशाला। नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥
रूप मातु को अधिक सुहावे। दरश करत जन अति सुख पावे॥
अन्नपूर्णा हुई जग पाला। तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥
प्रलयकाल सब नाशन हारी। तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥
शिव योगी तुम्हरे गुण गावें। ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥
धरयो रूप नरसिंह को अम्बा। परगट भई फाड़कर खम्बा॥
रक्षा करि प्रह्लाद बचायो। हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥
लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं। श्री नारायण अंग समाहीं॥
हिंगलाज में तुम्हीं भवानी। महिमा अमित न जात बखानी॥
मातंगी अरु धूमावति माता। भुवनेश्वरी बगला सुख दाता॥
श्री भैरव तारा जग तारिणी। छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी॥
कर में खप्पर खड्ग विराजै। जाको देख काल डर भाजै॥
सोहै अस्त्र और त्रिशूला। जाते उठत शत्रु हिय शूला॥
नगरकोट में तुम्हीं विराजत। तिहुँलोक में डंका बाजत॥
महिषासुर नृप अति अभिमानी। जेहि अघ भार मही अकुलानी॥
रूप कराल कालिका धारा। सेन सहित तुम तिहि संहारा॥
परी गाढ़ सन्तन पर जब जब। भई सहाय मातु तुम तब तब॥
ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी। तुम्हें सदा पूजें नर-नारी॥
प्रेम भक्ति से जो यश गावें। दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें॥
ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई। जन्म-मरण ताकौ छुटि जाई॥
शंकर अचरज तप कीनो। काम क्रोध जीति सब लीनो॥
निशिदिन ध्यान धरो शंकर को। काहु काल नहिं सुमिरो तुमको॥
शक्ति रूप का मरम न पायो। शक्ति गई तब मन पछितायो॥
भई प्रसन्न आदि जगदम्बा। दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा॥
मोको मातु कष्ट अति घेरो। तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो॥
आशा तृष्णा निपट सतावें। रिपु मुरख मोही डरपावे॥
करो कृपा हे मातु दयाला। ऋद्धि-सिद्धि दै करहु निहाला।
जब लगि जियऊं दया फल पाऊं। तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊं॥
श्री दुर्गा चालीसा जो कोई गावै। सब सुख भोग परमपद पावै॥
॥ इति श्रीदुर्गा चालीसा सम्पूर्ण ॥
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /बसंत पंचमी की अत्यधिक धार्मिक मान्यता होती है. हर साल माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पचंमी मनाई जाती है. इस दिन कला, वाणी और विद्या की देवी मां सरस्वती का पूजन किया जाता है. कहते हैं माता का पूजन करने पर बुद्धि बढ़ती है और कलात्मक गुण बढ़ता है. इस साल 14 फरवरी के दिन बसंत पंचमी मनाई जाएगी. बसंत पंचमी पर इस साल रेवती और अश्विनी नक्षत्र का शुभ योग बन रहा है. माना जाता है कि बसंत पंचमी के दिन ही मां सरस्वती का जन्म हुआ था. ऐसे में मां सरस्वती की पूजा ना सिर्फ मंदिरों बल्कि शैक्षिक संस्थानों में भी की जाती है. जानिए बसंत पंचमी के दिन पूजा करने वाले भक्तों को किन बातों का खास ख्याल रखने की आवश्यक्ता होती है और कौनसे काम करने से बचना चाहिए.
बसंत पंचमी पर क्या करें और क्या नहीं
बसंत पंचमी के दिन स्नान किए बिना भोजन करना अच्छा नहीं माना जाता है. इस दिन बिना स्नान कराए बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहिए.
इस दिन काले रंग के कपड़े पहनने से परहेज करना चाहिए. मां सरस्वती का प्रिय रंग पीला माना जाता है इसीलिए बसंत पंचमी की पूजा में पीले रंग (Yellow Color) का अत्यधिक महत्व होता है. इस दिन सरस्वती मां के समक्ष पीले फूल अर्पित करने भी बेहद शुभ माने जाते हैं और उन्हें पीले रंग का प्रसाद चढ़ाया जा सकता है.
इस दिन बच्चों को पूजा में बैठाना बेहद शुभ होता है. मां सरस्वती की पूजा करते समय बच्चों को पीले रंग के वस्त्र पहनाएं.
इस दिन पीले रंग के चावल का भोग अत्यधिक शुभ माना जाता है. पीले लड्डू और पेठा भी भोग में चढ़ा सकते हैं और प्रसाद स्वरूप इनका वितरण किया जा सकता है.
बसंत पंचमी के दिन अपनी वाणी पर काबू रखने के लिए कहा जाता है. इस दिन किसी को अपशब्द नहीं कहने चाहिए और अपने मन में बुरी बातें नहीं लानी चाहिए.
इस दिन तामसिक भोजन से परहेज करना चाहिए. पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचाने से बचना चाहिए और अपने कॉपी-किताबों को सम्मानपूर्वक रखना चाहिए.
ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / आप अपनी सुंदरता को बढ़ाना चाहती हैं तो फिर कुछ घरेलू उपाय को अपना लीजिए. हम आपको यहां पर कुछ ऐसे टिप्स बताने वाले हैं, जिससे आपके चेहरे के सारे दाग धब्बे चुटकियों में गायब हो जाएंगे. हम आपको यहां पर एक ऐसे तेल को रोज रात में नाभि में डालने के बारे में बताने वाले हैं, जिससे आपकी सुंदरता में चार चांद लग जाएगा. तो बिना देर किए आइए जानते हैं.
नीम का तेल के फायदे
आप अपनी नाभि में नीम का तेल डाल सकती हैं. यह ब्लड सर्कुलेशन को सुधारता है. इसकी मदद से एक्ने कम होता है और पिंपल की भी समस्या से छुटकारा मिलता है.
एजिंग होती है दूर
यह एजिंग की भी परेशानी को दूर करता है. इससे चेहरे पर झुर्रियां नजर नहीं आती हैं. यह फाइन लाइन को भी कम करता है. इससे त्वचा की रंगत में भी सुधार आता है.
इंफेक्शन करे दूर
इससे इंफेक्शन के लक्षण भी कम होते हैं. यह स्किन के टेक्सचर को भी सुधारता है.
बाल करे घना
अपने बाल को काला घना रखना चाहते हैं औऱ सफेद हो रहे बालों पर रोक लगाना चाहते हैं, तो फिर रोज रात में सरसों का तेल अपनी नाभि में लगाइए. इससे आपके बाल नैचुरल ब्लैक तो होंगे ही साथ ही उनमें चमक भी आएगी.
बाल में बनाए नमी
इसके अलावा आप अपनी नाभि में नारियल तेल भी डाल सकते हैं. इससे आपके ड्राई बाल में नमी आएगी. यह बालों की रूसी को भी कम करते हैं. इससे बाल लंबे और घने भी बन सकते हैं.
हेयर ग्रोथ करे तेज
आप रात में सोने से पहले अपनी नाभि में घी भी डाल सकते हैं. यह तरीका भी बाल की ग्रोथ के लिए अच्छा माना जाता है. यह हेयर को सफेद होने से भी रोकता है.
टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ / खाने का स्वाद बढ़ाने वाला तेज पत्ता वास्तु शास्त्र और आयुर्वेद में भी बहुत महत्व रखता है. यह सेहत के लिए जितना अच्छा होता है उतना ही इससे जुड़े उपाय भी प्रभावकारी हैं. इसके उपायों में रात को सोने के पहले बेडरूम में तेज पत्ता को जलाना भी शामिल है. आइए जानते हैं रात को सोने से पहले बेडरूम में तेज पत्ता जलाने से होते हैं क्या-क्या फायदे.
टेंशन दूर
तेज पत्ता की अपनी खुशबू होती है और इसे जलाने पर वह खुशबू आसपास फैलने लगती है. रात में सोने से पहले इसे जलाने से इसकी खुशबू के कारण तनाव दूर हो जाता है और मन को शांति मिलती है.
बुरी नजर से बचाव
तेज पत्ता जलाने का उपाय बुरी नजर से बचाने का प्रभावशाली तरीका है. रात में सोने से पहले तेज पत्त जलाने का उपाय कर लेने से दिन भर की लगी बुरी नजर उतर जाती है.
इम्युनिटी पर असर
अपने औषधीय गुणों के कारण तेज पत्ता जलाने का असर बॉडी में इम्युनिटी पर पड़ता है . इससे बीमारियों से बचने में मदद मिलती है. तेज पत्ता जलाने से उसके गुण सांसों के जरिए बॉडी में पहुंच जाते हैं.
निगेटिव एनर्जी और बुरे सपनों से बचाव
वास्तु शास्त्र के अनुसार रात में बेडरूम में तेजपत्ता जलाने का उपाय निगेटिव एनर्जी और बुरे सपनों को दूर रखने में मदद करता है. इससे आप सुकून से अच्छी नींद ले सकते हैं.
आर्थिक परेशानी करे दूर
रात के समय तेजपत्ता जलाने के कारण घर का वातावरण शुद्ध हो जाता है जिससे घन की देवी लक्ष्मी प्रसन्न होकर कृपा करती हैं. इससे आर्थिक परेशानियां कम होने लगती हैं.
बेहतर रिश्ते
बेडरूम में तेजपत्ता जलाने का उपाय दंपति के आपसी रिश्ते में मधुरता लाता है. इससे घर में क्लेश और मनमुटावों को दूर करने में मदद मिलती है.
आस्था /शौर्यपथ / हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे की बहुत मान्यता है. हर घर में तुलसी के पेड़ की पूजा जरूर होती है. लोग तुलसी के पेड़ के आगे दीया जलाते हैं और जल भी चढ़ाते हैं. धार्मिक कारणों के साथ स्वास्थ्य के लिए भी तुलसी का पेड़ बहुत अच्छा माना जाता है. तुलसी में कई औषधीय गुण होते हैं जो शरीर को बीमारियों से दूर रखने में मदद करते हैं. मगर कई बार तुलसी के पत्ते काले पड़ जाते हैं. इतना ही नहीं पत्ते झड़ने भी लगते हैं और ये पौधा सूख जाता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आप पौधे का अच्छे से ध्यान नहीं रख रहे होते हैं. तुलसी का पौधा (Tulsi Plant) खराब होने की शुरुआत कुछ पत्तों के काले होने से होती है मगर धीरे-धीरे ये बढ़ता जाता है और सारे पत्ते काले हो जाते हैं.
तुलसी के पत्तों का सेवन करने के फायदे |
तुलसी की पत्तियां एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर होने के चलते इम्यून सिस्टम को मजबूत करती हैं. ये एसेंशियल ऑयल से भरपूर होती हैं. जो इम्यूनिटी बढ़ाता है.
तुलसी के पत्ते पाचन बेहतर करने में भी मददगार हैं. ये एसिडिटी और गैस की समस्या को दूर करते हैं. तुलसी आपको स्ट्रेस फ्री बनाने में मददगार है.
तुलसी के पत्तों की चाय पीने या इनको चबाने से तनाव और चिंता को कम करने में मदद मिल सकती है.
तुलसी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट ब्लड प्यूरिफिकेशन का काम कर सकते हैं. ये आपकी स्किन और बालों के लिए कमाल कर सकते हैं.
तुलसी को डाइट में शामिल करने से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और खांसी जैसी श्वसन स्थितियों से राहत मिल सकती है.
तुलसी पत्तों को काले होने से रोकने के उपाय | तुलसी के पत्ते काले होने पर क्या करें?
ज्यादा पानी ना डालें
तुलसी में अगर ज्यादा पानी डाल दो तो भी इसके नुकसान होते हैं और कम डालो तो भी. तुलसी के पत्ते को काला होने से बचाने के लिए पौधे में उतना ही पानी डालें जितने में मिट्टी गीली हो जाए. बहुत अधिक पानी डालने से बचे, ये आपके पौधों की सेहत के लिए अच्छा नहीं है.
नमी चेक करें
तुलसी के पौधे को काला होने से बचाने के लिए इसकी नमी चेक करना बेहद जरुरी होता है. ज्यादा पानी की वजह से पौधे की जड़ें गीली रहने लगती हैं जिसकी वजह से पौधा सड़ने लगता है. इसलिए हमेशा मिट्टी की नमी अंगुली से चेक करें उसके बाद ही पानी डालें. ताकि आपको आइडिया रहेगा कितना पानी डालना है और कितना नहीं.
कीटनाशक का इस्तेमाल
तुलसी के पत्ते काले कई कारणों की वजह से होते हैं. इसका सबसे मेन कारण कीड़े लगना है. जब पौधे में कीड़े लग जाते हैं तो पत्ते काले पड़ना शुरू हो जाते हैं. ये कीड़े नजर नहीं आते हैं. ये तब पता चलता है जब पत्ते नीचे से काले होने लगते हैं. कीड़ों से बचाने के लिए घर में ही कीटनाशक दवाई बनाकर डालें. इससे तुलसी के पौधे में कीड़े नहीं लगते हैं.
आस्था /शौर्यपथ / मान्यता है कि श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की पूजा और सेवा से जीवन की हर मनोकमाना पूरी होती है. अगर आप लड्डू गोपाल के भक्त हैं तो उनकी सेवा के कुड खास नियमों का जरूर पालन करें. लड्डू गोपाल को नियम के साथ समय पर भोग लगाने का बहुत महत्व है. शास्त्रों के अनुसार लड्डू गोपाल को हर दिन सुबह से रात सोने तक चार बार भोग जरूर लगाना चाहिए. आइए जानते हैं लड्डू गोपाल को भोग लगाने का सही समय क्या है.
चार बार भोग
लड्डू गोपाल को सुबह से रात तक चार बार भोग लगाने का नियम है. उन्हें हर बार सही समय पर अगल अलग चीजों का भोग लगाना चाहिए और भोग में तुलसी के पत्ते जरूर डालना चाहिए.
पहले भोग का समय
बाल गोपाल को दिन का सबसे पहला भोग सुबह 6 से 7 बजे के बीच लगाना चाहिए. इसके लिए भगवान को घंटी या फिर ताली बजाकर जगाएं. सुबह के पहले भोग में दूध या चाय के साथ सात्विक बिस्कुट चढ़ाया जा सकता है.
दूसरे भोग का समय
प्रभु को दूसरा भोग लगाने से पूर्व स्वयं स्नान जरूर कर लें. इससे प्रभु को स्नान करवाएं और उन्हें वस्त्र पहनाकर उनका श्रृंगार करें. उन्हें तिलक लगाएं. बाल गोपाल को दूसरे भोग में मक्खन और मिश्री या लड्डू का भोग चढ़ाया जा सकता है.
तीसरा भोग कब लगाएं
बाल गोपाल को तीसरा भोग दोपहर में लगाना चाहिए. इस समय अपने लिए बनाए भोजन से ही भगवान को भोग लगाएं. भोग के भोजन में प्याज और लहसुन का उपयोग वर्जित होता है इसका ध्यान रखें. लड्डू गोपाल को भोग लगाने के लिए मीठी पूरी या परांठा भी बना सकते हैं.
चौथे भोग का समय
बाल गोपाल को चौथा भोग शाम को सात से आठ बजे की बीच लगाना चाहिए. इस समय भगवान को घर में बने सात्विक भोजन से भोग चढ़ाएं. इसके लिए भोजन बनते ही भोग को अलग कर लें. प्रभु को सुलाने से पहले दूध का भोग लगाना जरूरी है.
आस्था /शौर्यपथ /पूजा पाठ से लेकर संध्या के समय दिया जलाने का बहुत महत्व है. सनातन धर्म में पूजा के समय भगवान के सामने दिया जलाकर प्रार्थना की जाती है और संध्या के समय तुलसी के चौरे और मुख्य दरवाजे पर दिया जलाया जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार दिए की लौ से कई तरह के संकेत मिलते हैं. आमतौर पर दिऐ की लौ तब ऊंची होती जब तेल या घी समाप्त होने के कारण दिया बुझने वाला होता है, लेकिन दिया जलाते ही अगर लौ ऊंची हो तो उसका अलग अर्थ होता है. आइए जानते हैं दिऐ की ऊंची लौ से क्या संकेत मिलते हैं
प्रभु प्रसन्न
दिया जलाते ही अगर लौ ऊंची तो यह बहुत शुभ संकेत है. यह बताता है कि प्रभु आपसे प्रसन्न हैं. उन्हें आपकी पूजा स्वीकार है और वे आप पर अपनी कृपा बनाए हुए हैं. भगवान की आप पर कृपा दिए की लौ में प्रतिबिंबित होती है.
वास्तु दोष से मुक्त
दिए की लौ का ऊंचा रहना बताता है कि घर की ऊर्जा सकारात्मक है और नकारात्मकता का कोई अंश मौजूद नहीं है. इसके साथ ही दिए की ऊंची लौ संकेत है कि घर वास्तु दोष से पूरी तरह से मुक्त है. वास्तु के अनुसार दोष मुक्त घर में ही दिए की लौ ऊंची उठती है.
अनुकूल हैं ग्रह
दिया जलाने पर ऊंची और अच्छी प्रकाश वाली लौ संकेत है कि घर परिवार पर ग्रहों की कृपा है और कोई ग्रह प्रतिकूल स्थिति का निर्माण नहीं कर रहे हैं. आपके और आपके परिजनों की कुंडली में ग्रह दोष नहीं बन रहा है.
शुभ समाचार
दिए की ऊंची लौ संकेत है कि जल्दी ही आपको कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है. आपको लंबे समय से किसी विशेष चीज का इंतजार है तो वह पूर्ण होने के करीब आ गया है. यह आपके घर और परिवार के लिए समय के बेहतर होने का संकेत है.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / हर साल 24 एकादशी पड़ती हैं और हर एकादशी का अपना अलग महत्व होता है. माघ के महीने में शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को जया एकादशी कहा जाता है. माना जाता है कि इस एकादशी पर विधि-विधान से भगवान विष्णु का पूजन किया जाए तो घर में सुख-समृद्धि आती है और पापों से मुक्ति मिल जाती है. इस साल पंचांग के अनुसार, जया एकादशी की तिथि 19 फरवरी की सुबह 8 बजकर 49 मिनट से शुरू होगी और इस तिथि का समापन 20 फरवरी की सुबह 9 बजकर 55 मिनट पर हो जाएगा. उदया तिथि को ध्यान में रखते हुए जया एकादशी का व्रत 20 फरवरी को रखा जाएगा और इसी दिन पूजा भी की जाएगी.
जया एकादशी की व्रत कथा |
माना जाता है कि एक समय की बात है जब चिरकाल में स्वर्ग में स्थित नंदन वन में एक उत्सव का आयोजन किया जा रहा था. इस उत्सव में स्वर्ग के सभी देवगण, सिद्धगण और मुनि आदि उपस्थित हुए थे. इस समय नृत्य और गायन चल रहे थे जो गंधर्व और गंधर्व कन्याओं द्वारा किया जा रहा था. इसी समूह में एक नृतिका पुष्यवती की दृष्टि गंधर्व माल्यवान पर पड़ गई और वह उसके यौवन पर मोहित हो गई और अमर्यादित ढंग से नृत्य करने लगी. इस चलते माल्यवान ने बेसुरा गाना गाना शुरू कर दिया.
इस घटना को देख-सुन सभी क्रोधित होने लगे. स्वर्ग नरेश इंद्र देव ने क्रोधित होकर दोनों को स्वर्गलोक से निष्कासित कर दिया. इसके साथ ही दोनों को शाप दिया कि दोनों को अधम योनि प्राप्त होगी और दोनों इसके बाद से ही हिमालय में पिशाच योनि में कष्टदारी जीवन व्यतीत करने लगे.
सदियों बाद माघ मास की एकादशी अर्थात् जया एकादशी के दिन माल्यवान और पुष्यवती ने कुछ नहीं खाया और फल खाकर दिन व्यतीत किया. इसके बाद रातभर जागरण किया और श्रीहरि का स्मरण किया. इससे भगवान विष्णु प्रसन्न हुए और दोनों को प्रेत योनि से मुक्त कर दिया. इसके बाद से ही भगवान विष्णु को प्रसन्न करने और जीवन के कष्टों से मुक्ति पाने के लिए जया एकादशी का व्रत रखा जाता है.
आस्था /शौर्यपथ / भोलेनाथ की पूजा-अर्चना में बेलपत्र, धतूरा दूध आदि विशेष रूप से शामिल किया जाता है. लेकिन अब से आप काली मिर्च को भी शामिल कर सकते हैं. इसे शिव जी को अर्पित करने से कई लाभ मिलते हैं, जिसके बारे में आपको बताने वाले हैं. आइए जानते हैं छोटे से दिखने वाले इस मसाले का धार्मिक महत्व क्या है.
भोलेनाथ की पूजा में काली मिर्च के उपाय
1- अगर आप शिवलिंग पर काली मिर्च और तिल चढ़ाते हैं, तो फिर शिव की पूजा का आपको दोगुना लाभ मिलेगा. इससे शिव जी प्रसन्न होंगे. आपको शिवलिंग पर 1 कालीमिर्च 7 काले तिल चढ़ाने चाहिए. इससे आपको बहुत फायदे होंगे.
2- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस उपाय को तो आप हफ्ते के किसी दिन भी कर सकते हैं. आप इस तरीके से पूजा शिवरात्रि में करते हैं तो इसका विशेष लाभ आपको मिलेगा.
3- आपको बता दें कि जिनकी कुंडली में राहु, शनि और केतु अशुभ स्थिति में हैं तो उनके लिए काली मिर्च और तिल का उपाय बहुत अच्छा होता है. शिवलिंग पर कालीमिर्च अर्पित करने से रोगों का नाश होता है.
4- भगवान भोलेनाथ की कृपा से असंभव कार्य पूरे किए जा सकते हैं. साथ ही मासिक शिवरात्रि का व्रत करने से सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. शिवरात्रि के दिन शिवलिंग का रुद्राभिषेक करना फलदायी होता है. यह व्रत क्रोध, ईर्ष्या, अभिमान और लालच जैसी भावनाओं पर रोक लगाता है.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल माघ महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी का त्योहार मनाया जाता है, लेकिन पिछले कुछ समय से देखा जा रहा है कि कोई भी हिंदू त्योहार एक दिन नहीं बल्कि दो दिन मनाया जाता है. ऐसे में बसंत पंचमी की तारीख को लेकर भी लोगों को कई सारी कन्फ्यूजन है कि बसंत पंचमी 13 फरवरी 2024 को मनाई जाएगी या 14 फरवरी को मनाई जाएगी? तो चलिए आज हम आपको बताते हैं ज्योतिषों के अनुसार बसंत पंचमी की सही तिथि कौन सी है और किस दिन आप व्रत, पूजन और दान आदि कर सकते हैं.
बसंत पंचमी 2024 डेट - हिंदू पंचांग के अनुसार, बसंत पंचमी की शुरुआत 13 फरवरी को दोपहर 2:41 से हो जाएगी और अगले दिन यानी कि 14 फरवरी को दोपहर 12:09 तक रहेगी, हालांकि उदया तिथि 14 जनवरी को है. ऐसे में बसंत पंचमी का त्योहार 14 फरवरी को ही मनाया जाएगा.इतना ही नहीं इस बार बसंत पंचमी के मौके पर रेवती नक्षत्र भी बन रहा है. इसके अलावा रवि योग, अश्विनी नक्षत्र और शुक्ल योग भी बनने जा रहा है.
क्यों मनाई जाती है बसंत पंचमी - धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बसंत पंचमी के दिन सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा के मुख से ज्ञान और विद्या की देवी मां सरस्वती प्रकट हुई थी. ऐसे में बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा अर्चना की जाती है और पीले रंग के वस्त्र धारण किए जाते हैं. उन्हें पीले रंग का भोग लगाया जाता है और इस दिन नई किताबों की पूजा करना भी बहुत शुभ माना जाता है.
बसंत पंचमी की पूजा - अब बात आती है कि बसंत पंचमी की पूजा हमें कैसे करनी चाहिए? तो सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, सरस्वती पूजा के लिए पीले रंग के कपड़े पहने. साथ ही देवी मां को भी पीले रंग के वस्त्र पहनाएं या केसर का तिलक जरूर लगाएं. इसके अलावा मां सरस्वती को पीले रंग के फूल और पीले रंग का भोग अर्पित करें. पूजा के दौरान ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।। कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्। वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।। रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्। मंत्र का जाप करें. कहते हैं सच्चे दिल से बसंत पंचमी के दिन अगर मां सरस्वती की पूजा अर्चना की जाए तो वह धन, बुद्धि और ज्ञान का आशीर्वाद देती हैं.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
