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व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /भारत में कई नदियां बहती हैं जिन्हें पवित्र माना जाता है और इन नदियों की पूरे श्रद्धाभाव से पूजा भी की जाती है. माना जाता है कि माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि के दिन मां नर्मदा का जन्म हुआ था. इसीलिए मान्यतानुसार हर साल नर्मदा जयंती मनाई जाती है. मध्य प्रदेश के अमरकंटक से नर्मदा नदी का उद्गम होता है. नर्मदा जयंती के दिन मां नर्मदा की पूजा तो होती ही है, इस दिन अन्य पवित्र नदियों का पूजन किया जाता है और नदियों में स्नान करना शुभ मानते हैं.
नर्मदा जयंती का महत्व
पंचांग के अनुसार इस साल 16 फरवरी, शुक्रवार यानी आज नर्मदा जयंती मनाई जा रही है. नर्मदा जयंती हर साल माघ शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर मनाई जाती है. इस तिथि की शुरूआत 15 फरवरी की सुबह 10 बजकर 12 मिनट पर हुई थी और 16 फरवरी सुबह 8 बजकर 54 मिनट पर इसका समापन होगा. इस चलते उदयातिथि के मुताबिक नर्मदा जयंती और नर्मदा नदी में स्नान करने का शुभ मुहूर्त 16 फरवरी के दिन है.
नर्मदा जयंती के महत्व की बात करें तो इस दिन पवित्र नदियों में डुबकी लगाना शुभ होता है. कहते हैं ऐसा करने पर घर-परिवार में खुशहाली आती है और जीवन मं सुख-समृद्धि के द्वार खुलते हैं. नदी में स्नान के पश्चात फूल, हल्दी और कुमकुम आदि मां नर्मदा को अर्पित किए जाते हैं. अमरकंटक के उद्गम स्थान होने के चलते नर्मदा नदी की पूजा के लिए इस स्थान को अतिउत्तम माना जाता है.
माना जाता है कि नर्मदा जयंती के दिन नर्मदा नदी में स्नान करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिल जाती है. इससे पुण्यफल की प्राप्ति भी होती है. कहते हैं नाग राजाओं ने मां नर्मदा को यह वरदान दिया था कि नर्मदा नदी में स्नान करने वाले व्यक्ति को सभी पापों से मुक्ति मिलेगी और मोक्ष की प्राप्ति भी होगी. नर्मदा जयंती के दिन नदियों के स्नान से कालसर्प दोष भी दूर हो जाता है.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /रथ सप्तमी का व्रत माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को रखा जाता है. यह व्रत सूर्य देव को समर्पित है और इस दिन विधि-विधान से भगवान सूर्य की पूजा की जाती है. इस वर्ष 16 फरवरी शुक्रवार को रथ सप्तमी का व्रत रखा जाएगा. मान्यता है कि रथ सप्तमी के दिन प्रात: काल किसी कुंड या पवित्र नदी में स्नान करने से आरोग्य का वरदान प्राप्त होता है. मत्स्य पुराण के वर्णन के अनुसार रथ सप्तमी को व्रत भगवान सूर्य को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है. आइए जानते हैं रथ सप्तमी की पूजा का मुर्हूत और व्रत की कथा.
रथ सप्तमी पूजा का मुहूर्त
पंचांग के अनुसार माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि की शुरुआत 15 फरवरी को सुबह 10 बजकर 12 मिनट से होगी और 16 फरवरी को सुबह 8 बजकर 54 मिनट तक रहेगी. रथ सप्तमी का व्रत 16 फरवरी को रखा जाएगा.
पूजन विधि व मंत्र
रथ सप्तमी के दिन प्रातः किसी नदी में स्नान कर लाल, गुलाबी या केसरिया रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए. इसके बाद तांबे के लोटे में जल लेकर उसमें अष्टगंध , लाल पुष्प व अक्षत डालकर ''ॐ सूर्याय नमः '' मंत्र का पाठ करते हुए सूर्य देव को जल चढ़ाना चाहिए. इसके बाद सूर्य भगवान के नाम का स्मरण कर तिल के तेल का दीपक जलाएं. पूर्व दिशा की ओर मुख करके सूर्य मंत्र का 108 बार जाप करें.
''एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते।
करुणामयी माता, गृहस्थभक्ति, दिवाकर।''
रथ सप्तमी व्रत कथा
भविष्य पुराण की पौराणिक कथा में वर्णन है कि प्राचीन समय में एक गणिका थी जिसने अपने जीवन में कभी कोई दान-पुण्य नहीं किया. उम्र बढ़ने पर जब उसे अपनी गलती का एहसास हुआ तो वह ऋषि वशिष्ठ के पास गईं और उनसे जीवन के पापों से छुटकारा पाने का उपाय पूछा. वशिष्ठ ऋषि उसे रथ सप्तमी का व्रत का महत्व बताया और कहा कि इस व्रत को करने और भगवान सूर्य को जल अर्घ्य देकर दीप दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है. गणिका ने ऋषि के बताए अनुसार रथ सप्तमी का व्रत किया और उसे जीवन के सभी पापों से छुटकारा मिल गया.
ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ /भागती दौड़ती जिंदगी में हम अक्सर खुद के लिए समय नहीं निकाल पाते. प्रदूषण, खानपान और ऐसे कई अन्य कारणों से चेहरे पर दाग-धब्बे आ जाते हैं और इसका असली निखार कहीं खो जाता है. स्किन पर ग्लो पाने के लिए कई लोग महंगे-महंगे ट्रीटमेंट्स करवाते हैं या ब्यूटी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक चीज़ है, जिससे आपके चेहरे पर नेचुरल ग्लो आ सकता है और इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं है. ये एक चीज है कॉफी. कॉफी के कई फायदे हैं और स्किन केयर भी उनमें से एक है. एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-एजिंग गुणों से भरपूर, कॉफी स्किन हेल्थ को सुधारती है. दरअसल, कॉफी को फेस पैक के रूप में लगाने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होकर स्किन की सूजन कम हो जाती है.
निखरी त्वचा के लिए कॉफी फेस मास्क
दही-कॉफी फेस मास्क
एक चम्मच कॉफी लें उसमें चम्मच ही दही मिला लें. अब इसमें आधे चम्मच बेसन और चुटकी भर हल्दी मिलाएं. इसे अच्छे से मिक्स करें और फिर इसे अपने चेहरे के साथ ही गर्दन पर लगा लें. इस फेस पैक को करीब 20 मिनट लगा रहने दें और फिर गुनगुने पानी से धो लें. इसे रात के समय लगाना सबसे अधिक फायदेमंद है.
कॉफी और दूध का फेस मास्क
कॉफी और दूध के फेस मास्क के ढेरों फायदे हैं. इस मास्क को तैयार करने के लिए एक चम्मच पिसी हुई कॉफी में एक-दो चम्मच दूध मिलाएं. दोनों को मिलाकर पेस्ट बना लें और इसे अपने चेहरे पर लगाएं. इसे 10-15 मिनट तक चेहरे पर लगा रहने देने के बाद गुनगुने पानी से धो लें.
कॉफी और नींबू का फेस मास्क
एक कटोरी में एक चम्मच कॉफी पाउडर को एक चम्मच नींबू के रस के साथ मिलाएं. इसे अच्छी तरह मिलाकर पेस्ट बना लें और इसे अपने चेहरे और गर्दन पर समान रूप से और धीरे से लगाएं. इसे 15 मिनट तक सूखने दें और फिर ठंडे पानी से धो लें. कॉफी के साथ नींबू टैन को हटाने और त्वचा को हल्का करने में मदद करता है.
टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ / उम्र बढ़ने के साथ आंखों की रोशनी बेहतर रखने के लिए आंखों की सेहत पर ध्यान देना जरूरी है. तीस की उम्र के बाद आंखों की रोशनी से संबंधित परेशानियां शुरू होने लगती है. इस उम्र से आंखों की ज्यादा देखभाल शुरू कर देनी चाहिए. हमारे जन्म लेने के साथ ही हमारी आंखे काम करना शुरू कर देती हैं. 30 वर्ष की उम्र तक पहुंचते पहुंचते किसी भी व्यक्ति की आंखें दुनिया को 2 लाख घंटे तक देख चुकी होती हैं. इनमें नैचुरल चीजें जैसे सन लाइट, पेड़ पौधे से लेकर आर्टिफिशियल चीजें जैसे स्क्रीन से निकलने वाली रोशनी और आर्टिफिशियल लाइट तक शामिल हैं. इन सभी को आंखों पर कुछ न कुछ दबाव पड़ता है जिसके कारण आंखों की सेहत पर असर पड़ता है. आइए जानते हैं तीस की उम्र के बाद आंखों की सेहत बेहतर रखने के कुछ टिप्स
यूवी लाइट से बचाव
बोर्ड एग्जाम से पहले बच्चों को खिलाएं ये चीजें, याद होगा तेजी से, फिर कभी नहीं भूलेगा
बोर्ड एग्जाम से पहले बच्चों को खिलाएं ये चीजें, याद होगा तेजी से, फिर कभी नहीं भूलेगा
लंबे समय तक सन लाइट में रहने के दौरान आंखों को यूवी लाइट से बचाने के लिए सुरक्षा धूप का चश्मा या यूवी चश्मे का यूज करना चाहिए. यह और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है अगर आप आपकी स्किन हल्के रंग की है, आप अधिक ऊंचाई पर रहते हैं या ऐसा काम करते हैं जिसके कारण आपको लंबे समय तक आऊटडोर रहना पड़ता है. यूवी लाइट से आंखों को नुकसान पहुंचाता है और इससे मोतियाबिंद, आंखों से जुड़ी उम्र से संबंधित बीमारियों रेटिनोपैथी का खतरा बढ़ जाता है.
ढेर सारा पानी पिएं
हमारी आंखों में बड़ी मात्रा में पानी होता है और ये टियर फिल्म से सुरक्षित रहती हैं . टियर फिल्म वॉटर बेस्ड होती है. टियर फिल्म पानी के साथ-साथ इलेक्ट्रोलाइट्स, प्रोटीन और एंजाइम से बनी होती हैं. लंबे समय तक स्क्रीन के संपर्क और एयरकंडीशनर कमरे में रहने के कारण हमारी आंखें ड्राई हो जाती हैं. ढेर सारा पानी पीने से आपकी आंखों को नम रखने में मदद मिल सकती है. नम आंखें खुश आंखें हैं. वे आपको आंखों का तनाव कम करके अच्छी तरह देखने में मदद करते हैं.
आंखों के एक्सरसाइज
आंखों की रोशनी बेहतर रखने के लिए आंखों का एक्सरसाइज करना जरूरी है. इसके लिए दूर क्षितिज पर देखने आऊटडोर एक्टिविटी में भाग लेना जरूरी है. स्टडीज में पाया गया है कि दो घंटे बाहर खेलने और आऊटडोर एक्टिविटी में शामिल होने वाले बच्चों में मायोपिया या पूअर आईसाइट की समस्या होने का खतरा कम रहता है. पेंसिल पुशअप्स जैसे आंखों के व्यायाम आंखों की मांसपेशियों को मजबूत कर सकते हैं और उम्र बढ़ने के साथ आंखों की रोशनी को खराब होने से बचा सकते हैं.
बैलेंस डाइट
विटामिन ए, सी और ई, जिंक, ल्यूटिन और जेक्सैन्थिन जैसे एंटीऑक्सिडेंट और आवश्यक फैटी एसिड से भरपूर डाइट आंखों की सेहत के लिए अच्छी होती है. ये सूक्ष्म पोषक तत्व हरी पत्तेदार सब्जियों, गाजर, चुकंदर, बादाम, अंडे, मछली, एवोकाडो, आड़ू, खट्टे फल और आंवले में भरपूर मात्रा में मिलते हैं.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /क्या चश्मे या कॉन्टैक्ट लेंस के उपयोग के बिना आंखों की रोशनी को ठीक किया जा सकता है? कुछ डाइट और लाइफस्टाइल बदलाव हैं जिन्हें करके आप आंखों की रोशनी को बढ़ा सकते हैं और अपना सालों पुराना चश्मा हटा सकते हैं. हालांकि सलाह के लिए आई केयर प्रोफेशनल्स से सलाह लेना सबसे बेस्ट है, लेकिन कुछ प्राकृतिक तरीके हैं जो कुछ लोगों को अपनी आंखों की रोशनी में सुधार करने के लिए अपना सकते हैं. हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये तरीके हर किसी के लिए काम नहीं कर सकते हैं और रिजल्ट अलग-अलग हो सकते हैं. यहां कुछ प्राकृतिक तरीके दिए गए हैं जिन्हें आप फॉलो कर सकते हैं.
आंखों की रोशनी कैसे बढ़ाएं? आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए नुस्खे |
आंखों की एक्सरसाइज: रेगुलर आई एक्सरसाइज करना चश्मा हटने की संभवाना को बढ़ा सकता है. इसमें आंखों को घुमाना, आंखों को बंद करके पुतली को घुमाना, लंबे दूरी के लक्ष्य पर नजर लगाना और अन्य आसान व्यायाम शामिल होते हैं.
न्यूट्रिशन: आपकी आंखों के लिए सही न्यूट्रिशन बहुत जरूरी है. अपनी डाइट में आंखों के लिए पोषक तत्वों जैसे कि विटामिन ए, सी और जिंक शामिल करें.
आयुर्वेदिक उपाय: कई आयुर्वेदिक चीजें चश्मा कम करने में सहायक हो सकते हैं, जैसे कि त्रिफला, आंवला, शतावरी, शंकुपुष्पी, ब्राह्मी आदि.
अच्छी नींद: पर्याप्त नींद लेना भी आपकी आंखों के लिए जरूरी है. अच्छी नींद आंखों के लिए जरूरी आराम देती है और चश्मा की जरूरत को कम कर सकती है.
अच्छी आंख की देखभाल: अपनी आंखों की अच्छी देखभाल करना जैसे कि लंबे समय तक कंप्यूटर या मोबाइल स्क्रीन के सामने न बैठना, नियमित रूप से आंखों को आराम देना, नियमित रूप से आंखों को धोना और आंखों के लिए नियमित चेकअप कराना भी जरूरी है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ / मोटापा सिर्फ पेट और बाकी शरीर का ही नहीं होता बल्कि चेहरे का फैट भी काफी परेशान करने वाला है. फूले गाल किसी को भी असहज महसूस करवा सकते हैं. आजकल की लाइफस्टाइल के चलते चेहरे का मोटापा होना आम बात है. ये हर बार शीशे में चेहरे देखने के साथ आपको और परेशान करता है. चेहरे की चर्बी से जूझना निराशाजनक है, खासकर जब यह आपके आत्मविश्वास को कम करता है. हालांकि चेहरे का मोटापा कम करने के लिए कुछ नेचुरल तरीके हैं जो कमाल कर सकते हैं. जी हां, चेहरे की चर्बी कम करने और अच्छा लुक पाने में मदद करने के लिए प्राकृतिक तरीके मौजूद हैं, जिसमें कुछ डाइट एडजस्टमेंट और फेस एक्सरसाइज शामिल हैं. यहां जानिए आप अपने मोटे गालों को कैसे पतला कर सकते हैं.
चेहरे का फैट कम करने के कारगर उपाय |
पूरे दिन में पानी का सेवन बढ़ाएं: अपने शरीर को हमेशा हाइड्रेटेड रखने के लिए दिन भर में पानी पीना बेहद जरूरी है. यह चेहरे की चर्बी को कम करने में मदद करता है.
रोज एक्सरसाइज: नियमित व्यायाम चेहरे की मांसपेशियों को ढालने और चर्बी को घटाने में मदद कर सकता है. चेहरे की चर्बी कम करने के लिए चेहरे के व्यायाम जैसे चीखने, गाल उठाना, ठुड्डी उठाना और अपने होठों को सिकोड़ना और दूसरे योगासन की सलाह दी जाती है.
हेल्दी डाइट: आपके खाने में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, सब्जियां, फल और अनाज शामिल होना चाहिए. ज्यादा मात्रा में फास्ट फूड और प्रोसेस्ड फूड्स का सेवन कम करें.
नींबू पानी: नींबू पानी में विटामिन सी होता है, जो आपके शरीर के लिए बेहद लाभकारी होता है और चर्बी को घटाने में मदद करता है.
हेल्दी डाइट लें: फलों, सब्जियों, लीन प्रोटीन और साबुत अनाज से भरपूर बैलेंस डाइट पर ध्यान दें. प्रोसेस्ड फूड्स, मीठे स्नैक्स और बहुत ज्यादा नमक के सेवन से बचें, क्योंकि ये सूजन को बढ़ाते हैं.
कार्डियो एक्सरसाइज: कैलोरी बर्न करने और चेहरे सहित पूरे शरीर की चर्बी कम करने के लिए दौड़ने, तैरने या साइकिल चलाने जैसे व्यायाम करें.
शराब और नमक का सेवन कम करें: शराब और बहुत ज्यादा नमक के सेवन से चेहरे में पानी जमा होने और सूजन की समस्या हो सकती है. इन्हें सीमित करने से चेहरे की सूजन को कम करने में मदद मिल सकती है.
पर्याप्त नींद: हर रात अच्छी नींद लें, क्योंकि नींद की कमी से वजन बढ़ने और चेहरे सहित सूजन की समस्या हो सकती है.
स्ट्रेस को मैनेज करें: स्ट्रेस वजन बढ़ने और सूजन को बढ़ा सकता है. योग, ध्यान या डीप ब्रीदिंग लेने के व्यायाम जैसी स्ट्रेस कम करने वाली एक्टिविटीज करें.
प्रोसेस्ड कार्ब्स और शुगर का सेवन कम करें: हाई प्रोसेस्ड कार्बोहाइड्रेट और शुगर वाले फूड्स ब्लड शुगर लेवल में उतार-चढ़ाव का कारण बन सकते हैं, जिससे वजन बढ़ सकता है और सूजन हो सकती है. इसके बजाय साबुत अनाज का सेवन करें.
चेहरे की मालिश: चेहरे की हल्की मालिश से ब्लड सर्कुलेशन और लसीका जल को रिलीज करने में मदद कर सकता है, जो चेहरे की सूजन को कम करने में मदद कर सकता है.
ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / फेशियल एक ब्यूटी ट्रीटमेंट है जो चेहरे को निखारता है. ज्यादातर लोग ऐसे स्किन केयर रूटीन को फॉलो करते हैं जिससे स्किन डल हो जाती है, लेकिन आपको अपनी स्किन को न्यूट्रिशन और ताजगी देने के लिए समय-समय पर फेशियल करवाना चाहिए. फेशियल आपके स्किन केयर का एक मल्टी-स्टेप तरीका है. इसमें स्किन से गंदगी, डेड स्किन और अशुद्धियों को साफ करने के लिए एक्सफोलिएशन और क्लीजिंग शामिल है. स्ट्रेस को कम करने, चमकती और मुलायम त्वचा और उम्र बढ़ने से रोकने से लेकर ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ावा देने, स्किन को फिर से जवां करने, स्किन को डिटॉक्सीफाई करने और एक्ने के निशानों को गायब करने तक फेशियल बेहद फायदेमंद और प्रभावी है, लेकिन एक बार जब आप फेशियल करवाते हैं तो आपको अपनी स्किन को लेकर सतर्क रहने और कुछ चीजों से परहेज करने की जरूरत होती है. यहां हम कुछ ऐसी चीजों के बारे में बता रहे हैं जिन्हें आपको फेशियल के बाद करने से बचना चाहिए.
फेशियल करने के बाद बिल्कुल न करें ये काम |
1. एक्सफोलिएशन से बचें
फेशियल करवाने के बाद एक्सफोलिएशन स्किन की नेचुरल बैरियर को नष्ट कर सकता है और स्किन की प्रोटेक्टिव लेयर को नुकसान पहुंचा सकता है. यह आपकी स्किन को ड्राई कर सकता है और जलन, मुंहासे, ब्रेकआउट का कारण बन सकता है.
2. मेकअप
फेशियल करवाने के तुरंत बाद मेकअप लगाने से बचें. सभी मेकअप प्रोडक्ट्स जैसे फाउंडेशन, ब्लशर आदि में ऐसे रसायन होते हैं जो स्किन के लिए हानिकारक हो सकते हैं. यह आपकी स्किन में जलन पैदा कर सकता है और मुंहासों का कारण बन सकता है.
3. स्क्रब से बचें
फेशियल के बाद अपने चेहरे को स्क्रब करने से बचना जरूरी है. अगर आप अपने चेहरे को किसी एक्सफोलिएटिंग पैक से रगड़ते हैं, तो इससे आपकी त्वचा में जलन हो सकती है और लालिमा और सूजन हो सकती है.
4. धूप में बाहर जाना
अपनी स्किन को पराबैंगनी किरणों से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए धूप में बाहर जाने से बचने की सलाब हमेशा दी जाती है, लेकिन फेशियल के बाद स्किन और ज्यादा सेंसिटिव और नाजुक हो जाती है, इसलिए धूप, गंदगी और पॉल्यूशन से स्किन की समस्याएं हो सकती हैं.
5. अपना चेहरा छूने से बचें
फेशियल करवाने के बाद आपको अपने चेहरे को बार-बार छूने से बचना चाहिए। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जब फेशियल किया जाता है तो त्वचा के रोमछिद्र खुल जाते हैं और अगर आप फेशियल के बाद अपने चेहरे को छूते हैं तो इससे बैक्टीरिया आपके हाथ से आपके चेहरे पर आ सकते हैं। इससे त्वचा संबंधी समस्याएं जैसे ब्रेकआउट, मुंहासे, जलन आदि हो सकती हैं.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / पंचांग के अनुसार, हर महीने कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है. प्रदोष व्रत की विशेष धार्मिक मान्यता होती है. कहते हैं यदि प्रदोष व्रत के दिन पूरे श्रद्धाभाव से भगवान शिव का पूजन किया जाए तो भोलेनाथ प्रसन्न होकर भक्तों को आरोग्य का वरदान देते हैं. जीवन से कष्ट दूर करने के साथ ही भगवान शिव घर-परिवार को सुख, शांति और समृद्धि का वरदान देते हैं. जानिए फरवरी माह में दूसरा प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा और किस तरह इस प्रदोष व्रत में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए पूजा की जा सकती है.
प्रदोष व्रत की पूजा विधि
इस महीने का दूसरा प्रदोष व्रत 21 फरवरी, बुधवार के दिन रखा जाना है. बुधवार के दिन पड़ने के चलते इसे बुध प्रदोष व्रत भी कहते हैं. त्रयोदशी तिथि की शुरूआत 21 फरवरी सुबह 11 बजकर 28 मिनट पर हो रही है और इस तिथि का समापन अगले दिन 22 फरवरी, 1 बजकर 22 मिनट पर हो जाएगी. प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त 21 फरवरी की शाम 6 बजकर 21 मिनट से रात 8 बजकर 53 मिनट के बीच की जा सकती है. इसे प्रदोष काल कहते हैं. प्रदोष काल में प्रदोष व्रत की पूजा अत्यधिक लाभकारी और शुभ कही जाती है.
प्रदोष व्रत की पूजा करने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान किया जाता है. स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं इसके बाद भगवान शिव का ध्यान किया जाता है और व्रत का संकल्प लेते हैं. सुबह के समय भक्त शिव मंदिर भी जाते हैं लेकिन प्रदोष व्रत की असल पूजा रात के समय होती है. शाम के समय भगवान शिव के साथ ही मां पार्वती की पूजा की जाती है. पूजा में पंचामृत, गंगाजल, बेलपत्र, चावल, गंध, फूल, धूप, फल, दीप और लौंग आदि पूजा सामग्री में सम्मिलित किए जाते हैं.
भगवान शिव को घी और शक्कर मिले जौ के सत्तू का भोग लगाना बेहद शुभ होता है. इसके बाद शिव जी की आरती होती है और शिव मंत्रों का जाप भी भक्त करते हैं. कहते हैं पूरे मनोभाव से महादेव का पूजन किया जाए तो भगवान शिव भक्तों की इच्छाएं पूरी करते हैं.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ/हमारे खानपान और लाइफस्टाइल की वजह से अक्सर कब्ज होना आम बात है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना सेहत के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है. कब्ज न सिर्फ असहज महसूस कराती है बल्कि पेट दर्द, पेट फूलना, एसिडिटी और खराब पाचन तंत्र का कारण भी बनती हैं. अपनी लाइफस्टाइल में कब्ज के कारण का पता लगाना जरूरी है. कब्ज किसी को भी प्रभावित कर सकती है. यह समस्या अक्सर अनहेल्दी डाइट और खराब जीवनशैली के कारण होती है. अगर आपको भी कब्ज की समस्या है और आप नेचुरल तरीके से इसे दूर करना चाहते हैं, तो घर पर तैयार की गई चिया सीड्स ड्रिंक एक अच्छा घरेलू नुस्खा है. चिया सीड्स में फाइबर, प्रोटीन और विटामिन सी जैसे पोषक तत्व होते हैं, जो कब्ज को दूर करने में मदद कर सकते हैं.
कब्ज के लिए आसान और हेल्दी चिया सीड्स ड्रिंक |
सामग्री:
2 चमच चिया सीड्स.
1 कप पानी.
1 चमच शहद.
1 नींबू का रस.
कब्ज को ठीक करने के लिए ऐसे करें चिया सीड्स का सेवन:
चिया सीड्स को अच्छे से धो लें.
एक कप पानी को गरम करें, लेकिन उसे उबालने न दें.
गरम पानी में धोखर डालें और उसे लगभग 10-15 मिनट के लिए छोड़ दें. चिया सीड्स फैट और विटामिन ए को पानी में बहुत अच्छे से अच्छे से घुलने में मदद करते हैं.
अगर आप चाहें तो शहद और नींबू का रस डालें.
अच्छे से मिलाएं और ये तैयार हैं, अब आप इसे पी सकते हैं.
यह चिया सीड्स ड्रिंक आपको न केवल कब्ज से निजात दिलाने में मदद कर सकता है, बल्कि इसमें मौजूद विटामिन सी आपके इम्यून सिस्टम को भी मजबूत बनाने में मददगार है. इसे नियमित रूप से सेवन करने से आपका स्वास्थ्य बेहतर हो सकता है और आप कब्ज की समस्या से निजात पा सकते हैं.
ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / झाइयों की दिक्कत होने पर माथे, गालों और नाक के आसपास गहरे काले धब्बे नजर आने लगते हैं. ऐसा मेलानिन के एक्सेस प्रोडक्शन के कारण होता है. मेलानिन त्वचा पर ज्यादा बनता है तो त्वचा का रंग गहरा होने लगता है. वहीं, धूप, हार्मोनल चेंजेस और डाइट भी त्वचा पर पिग्मेंटेशन का कारण हो सकती है. अगर आप भी झाइयों से परेशान हैं और चेहरा निखारना चाहते हैं तो यहां ऐसे कुछ फेस पैक्स और घरेलू नुस्खे दिए जा रहे हैं जो त्वचा से गहरे धब्बों को हल्का करने में असरदार होते हैं.
झाइयां कम करने के लिए फेस पैक्स |
हल्दी का फेस पैक
इस फेस पैक को बनाने के लिए हल्दी, बेसन और गुलाबजल को साथ मिला लें. एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर इस फेस पैक से चेहरे को एक नहीं बल्कि कई फायदे मिलते हैं. गहरे दाग-धब्बे और पिग्मेंटेशन को कम करने में खासतौर से इस फेस पैक का असर नजर आता है. हफ्ते में एक बार यह फेस पैक चेहरे पर लगाया जा सकता है.
आलू का फेस पैक
आलू पावरफुल एंटी-ऑक्सीडेंट होता है. इसमें आयरन और रिबोफ्लेविन भी पाया जाता है साथ ही इसमें नेचुरल ब्लीचिंग गुण होते हैं जो झाइयों को हल्का कर देते हैं. ऐसे में बेजान त्वचा में जान डालने और गहरे धब्बों को हल्का करने के लिए आलू के इस फेस पैक को लगाया जा सकता है. आधा आलू लेकर घिस लें और इसका रस निचोड़कर कटोरी में निकालें. इसके बाद एक चम्मच शहद इस आलू में मिलाकर झाइयों पर अच्छी तरह लगा लें. 15 से 20 मिनट बाद चेहरा धोकर साफ कर लें. त्वचा निखर जाती है. हफ्ते में 2 बार इस नुस्खे को आजमाकर देखें.
एलोवेरा का फेस पैक
एलोवेरा के औषधीय गुण त्वचा के लिए फायदेमंद होते हैं. इससे पिग्मेंटेशन कम होती है और गहरे धब्बे हल्के होने लगते हैं. एलोवेरा मेलानिन के ओवर प्रोडक्शन को भी रोकता है. इस्तेमाल के लिए एलोवेरा का ताजा गूदा लें और उसमें गुलाबजल मिला लें. इस मिश्रण को पूरे चेहरे पर लगाएं और 20 मिनट बाद चेहरा धोकर साफ कर लें.
दूध और शहद
झाइयों पर दूध और शहद लगाए जाने पर स्किन का टेक्सचर बेहतर होता है और त्वचा निखरी हुई नजर आती है. शहद त्वचा को एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण देता है और इससे स्किन एक्सफोलिएट भी होने लगती है. एक चम्मच शहद और एक चम्मच दूध को साथ मिलाकर झाइयों पर 20-25 मिनट लगाकर रखें और फिर चेहरा धो लें. इस नुस्खे को रोजाना रात के समय आजमाया जा सकता है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /कब्ज पेट से जुड़ी ऐसी समस्या है जिसमें मलत्याग करने में दिक्कत होती है. कब्ज होने पर मल कड़ा हो जाता है और घंटों बाथरूम में बैठे रहने के बाद भी पेट सही तरह से साफ नहीं होता. पानी की कमी, खानपान में फाइबर से भरपूर फूड्स को शामिल ना करना, एक्सरसाइज ना करना, किसी तरह की दवाइयां लेना और समय पर मलत्याग ना करना कब्ज की वजह बन सकता है. ऐसे में अगर आप भी कब्ज सो दोचार हो रहे हैं और इस दिक्कत से छुटकारा पाना चाहते हैं तो यहां बताए जूस पी सकते हैं. ये जूस कब्ज से राहत दिलाने में असरदार साबित होते हैं.
कब्ज के लिए जूस |
सेब का जूस
फाइबर से भरपूर सेब का जूस कब्ज से छुटकारा दिलाने में कमाल का साबित होता है. सेब का जूस नेचुरल लैक्सेटिव की तरह काम करता है और पाचन को बेहतर करने में असरदार है. इससे मल मुलायम होने लगता है और कब्ज से छुटकारा मिल जाता है.
खीरे का जूस
पाचन के लिए खीरा अच्छा है. इसमें लैक्सेटिव गुण भी होता है और वॉटर कंटेंट भी अत्यधिक होता है जोकि कब्ज से राहत दिलाने में फायदेमंद है. रोजाना खीरे का जूस पीने पर कब्ज की दिक्कत दूर हो सकती है.
संतरे का जूस
विटामिन सी से भरपूर संतरा कब्ज दूर करने के लिए एक अच्छा फल है. संतरे में फाइबर की अच्छी मात्रा होती है जिससे मल पर भार पड़ता है और मलत्याग आसान बनता है. कब्ज से छुटकारा पाने और पाचन संबंधी दिक्कतें कम करने के लिए संतरे का जूस पी सकते हैं.
पालक का जूस
पालक फाइबर और मैग्नीशियम से भरपूर होता है. पालक के सेवन से मलत्याग आसान बनता है. रोजना 2 कप ताजा पालक को पीसकर इसका जूस पिया जाए तो कब्ज से राहत मिल सकती है. इस जूस को स्वादिष्ट बनाने के लिए हल्का काला नमक भी डाल सकते हैं.
अनानास का जूस
कब्ज से छुटाकारा दिलाने में अनानास का जूस कुछ कम प्रभावी नहीं होता है. अनानास में ऐसे एंजाइम पाए जाते हैं जो बाउल मूवमेंट्स को बेहतर करते हैं और कब्ज दूर होती है.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / नवरात्रि को हिंदू धर्म में बेहद शुभ माना जाता है. कहते हैं इन दिनों में मां दुर्गा की पूजा की जाए तो घर परिवार पर मां की कृपा बनी रहती है और माता रानी अपना आशीर्वाद जातक और उसके घर-परिवार पर बनाए रखती हैं. माघ मास की गुप्त नवरात्रि का समापन 18 फरवरी के दिन हो जाएगा. नवरात्रि के नौ दिनों में दुर्गा मां की 10 महाविद्याओं का पूजन किया जाता है. मान्यतानुसार जो भक्त मां दुर्गा को प्रसन्न करते हैं उनके जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और उन्हें माता का आशीर्वाद मिलता है सो अलग. यहां जानिए गुप्त नवरात्रि में किन मंत्रों (Mantra) का जाप करना बेहद शुभ माना जाता है. मान्यतानुसार इन मंत्रों का जाप करने पर खुशहाली आती है.
गुप्त नरवात्रि के मंत्र |
“हे गौरी शंकरार्धांगी, यथा त्वं शंकर प्रिया। तथा मां कुरू कल्याणी, कान्त कान्तां सुदुर्लभाम।।”
“सब नर करहिं परस्पर प्रीति। चलहिम स्वधर्म निरत श्रुति नीति।।”
“ऊँ ह्लीं वाग्वादिनी भगवती मम कार्य सिद्धि कुरु कुरु फट् स्वाहा।”
“श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:।”
“ऊं शं शंकराय सकल-जन्मार्जित-पाप-विध्वंसनाय, पुरुषार्थ-चतुष्टय-लाभाय च पतिं मे देहि कुरु कुरु स्वाहा।।”
या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।
ॐ क्रां क्रीं क्रूं कालिका देव्यै नम:
ॐ दुं दुर्गायै नम:
ॐ ललिता देव्यै नम:
गुप्त नवरात्रि की आरती
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी तुम को निस दिन ध्यावत
मैयाजी को निस दिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवजी।
ॐ जय अम्बे गौरी...॥
मांग सिन्दूर विराजत टीको मृग मद को।
मैया टीको मृगमद को।।
उज्ज्वल से दो नैना चन्द्रवदन नीको।।
ॐ जय अम्बे गौरी...॥
कनक समान कलेवर रक्ताम्बर साजे।
मैया रक्ताम्बर साजे।।
रक्त पुष्प गले माला कण्ठ हार साजे।।
ॐ जय अम्बे गौरी...॥
गुप्त नवरात्रि : अपनी राशि अनुसार करें माँ दुर्गा की ऐसे पूजा
केहरि वाहन राजत खड्ग कृपाण धारी।
मैया खड्ग कृपाण धारी।।
सुर नर मुनि जन सेवत तिनके दुख हारी।।
ॐ जय अम्बे गौरी...॥
कानन कुण्डल शोभित नासाग्रे मोती। मैया नासाग्रे मोती।।
कोटिक चन्द्र दिवाकर सम राजत ज्योति।।
ॐ जय अम्बे गौरी...॥
शम्भु निशम्भु बिडारे महिषासुर घाती।
मैया महिषासुर घाती।।
धूम्र विलोचन नैना निशदिन मदमाती।।
ॐ जय अम्बे गौरी...॥
चण्ड – मुण्ड संहारे, शौणित बीज हरे।
मैया शौणित बीज हरे।।
मधु – कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ऊँ जय अम्बे गौरी...॥
ब्रह्माणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी।
मैया तुम कमला रानी।।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी।।
ऊँ जय अम्बे गौरी...॥
चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैरु।
मैया नृत्य करत भैरू।।
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू।।
ऊँ जय अम्बे गौरी...॥
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
मैया तुम ही हो भरता।।
भक्तन की दुःख हरता, सुख सम्पत्ति करता।।
ऊँ जय अम्बे गौरी...॥
भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी।
मैया वर मुद्रा धारी।।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी।।
ऊँ जय अम्बे गौरी...॥
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती। मैया अगर कपूर बाती।।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति।।
ऊँ जय अम्बे गौरी...॥
अम्बे जी की आरती, जो कोई नर गावे।मैया जो कोई नर गावे।।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख – सम्पत्ति पावे।।
ऊँ जय अम्बे गौरी...॥
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / पंचांग के अनुसार, हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा की रात होलिका दहन किया जाता है. होलिका दहन होली से एक दिन पहले किया जाता है. होली हिंदुओं का लोकप्रिय त्योहार है और इस दिन एक-दूसरे को रंग लगाए जाते हैं. वहीं, धार्मिक परिपाटी पर होलिका दहन का विशेष महत्व है. होलिका दहन को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में देखा जाता है. माना जाता है कि एक समय में हिरण्यकश्यप नामक राजा रहा करता था जिसका एक पुत्र था प्रह्लाद. हिरण्यकश्यप भगवान विष्णु को पसंद नहीं करता था जबकि प्रह्लाद विष्णु भक्त था. ऐसे में हिरण्यकश्यप अपने पुत्र प्रह्लाद को मार देना चाहता था. हिरण्यकश्यप की एक बहन थी जिसका नाम होलिका था. होलिका को यह वरदान था कि उसे कोई आग जला नहीं सकती है. इसीलिए हिरण्यकश्यप ने होलिका से कहा कि वह प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ जाए. होलिका ने ऐसा ही किया. लेकिन, भगवान विष्णु की कृपा से होलिका तो जलकर राख हो गई पर प्रह्लाद बच गया. इसी दिन से हर साल होलिका जलाई जाती है. जानिए इस साल होलिका दहन किस समय किया जाएगा और होलिका दहन किस तरह करते हैं.
होलिका दहन की तिथि |
पंचांग के अनुसार, इस साल होलिका दहन 24 मार्च, रविवार की रात किया जाएगा. होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रात 11 बजकर 13 मिनट से शुरू होकर रात 12 बजकर 27 मिनट तक रहेगा. इस समयावधि में विधि अनुसार होलिका दहन किया जा सकता है. इसके अतिरिक्त प्रदोष काल में भी होलिका दहन किया जाता है. होलिका दहन के अगले दिन रंगों वाली होली मनाई जाएगी. इस साल रंगों से 25 मार्च के दिन खेला जाएगा. कहते हैं होली के दिन लोग सभी बैर भुलाकर एकदूसरे को गले लगा लेते हैं.
होलिका दहन की पूजा विधि
मान्यतानुसार होलिका दहन के दिन सुबह स्नान पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं. गली के किनारे या चौक पर होलिका दहन करने के लिए कुछ दिनों पहले से ही लकड़ियां इकट्ठी करके रखी जाती हैं. होलिका दहन के दिन तैयार की गई होलिका की दिशा में मुख करके बैठा जाता है और भगवान गणेश का स्मरण किया जाता है. होलिका दहन की पूजा सामग्री में फल, फूल, नारियल, रोली, गोबर के कंडे, अनाज, कच्चा सूत. चावल, गुलाल, बताशे, हल्दी, और लोटे में जल भरकर रखा जाता है. 'असृक्पाभयसंत्रस्तै: कृता त्वं होलि बालिशै:। अतस्त्वां पूजायिष्यामि भूते भूतिप्रदा भव' मंत्र का जाप करते हुए होलिका की परिक्रमा की जाती है.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / इस साल 20 फरवरी 2024, मंगलवार के दिन जया एकादशी मनाई जाएगी. यह दिन हर साल माघ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है जिसका संबंध भगवान विष्णु से होता है. पद्म पुराण में जया एकादशी का महत्व भगवान श्री कृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया था और कहा था कि जया एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के सभी पापों का नाश हो जाता है और वो मोक्ष प्राप्त करता है. इतना ही नहीं जया एकादशी के दिन अगर भगवान विष्णु की पूजा पूरे मन से की जाए और उन्हें कुछ विशेष फूल अर्पित किए जाएं, तो इससे श्रीहरि सुख-समृद्धि और सौभाग्य का आशीर्वाद देते हैं.
भगवान विष्णु को चढ़ाएं यह फूल
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, भगवान विष्णु को गेंदे के फूल जरूर अर्पित किए जाने चाहिए. कहते हैं कि भगवान विष्णु को पीले रंग के फूल अति प्रिय होते हैं, ऐसे में जया एकादशी के मौके पर अगर उन्हें पीले रंग के गेंदे के फूल अर्पित किए जाएं तो इससे वे सुख-समृद्धि का आशीर्वाद अपने भक्तों को देते हैं.
सूरजमुखी का फूल
गेंदे के फूल की तरह ही सूरजमुखी का फूल भी पीला होता है और अगर भगवान विष्णु को जया एकादशी के मौके पर सूरजमुखी का एक फूल भी अर्पित किया जाए तो इससे व्यक्ति की कुंडली में मौजूद गुरु दोष को खत्म किया जा सकता है. इतना ही नहीं सूरजमुखी का फूल भगवान को अर्पित करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है.
अशोक के फूल
भगवान विष्णु का संबंध अशोक के पेड़ से माना जाता है. कहते हैं कि अशोक के फूल अगर भगवान विष्णु को अर्पित किए जाएं तो इससे सभी समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है, साथ ही आपको नौकरी, व्यापार और वर्कप्लेस में सफलता मिलती है.
कदम के फूल
जया एकादशी के मौके पर भगवान विष्णु के चरणों पर अगर कदम के फूल चढ़ाए जाएं और भगवान विष्णु के मंत्र का जाप किया जाए, तो इससे आपको सफलता मिल सकती है. अगर लंबे समय से आप कोशिश कर रहे हैं लेकिन किसी भी क्षेत्र में सफलता नहीं मिल रही तो इस बार जया एकादशी के मौके पर कदम का फूल श्री हरि के चरणों पर जरूर अर्पित करें.
कमल का फूल
भगवान विष्णु को कमल के फूल (Lotus) बहुत प्रिय होते हैं, कहते हैं कमल के फूल में मां लक्ष्मी का वास होता है, इसलिए जया एकादशी के मौके पर अगर भगवान विष्णु को कमल का फूल अर्पित किया जाए तो इससे जातकों की हर मनोकामना पूरी होती है और भगवान विष्णु प्रसन्न होकर आपको मनचाहा आशीर्वाद देते हैं.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
