August 16, 2026
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    कहती नहीं पर हर बेटी विदा होने से पहले पिता से सुनना चाहती है ये 5 बातें

    • doing of business

     शौर्यपथ /हर पिता अपनी बेटी के लिए एक ऐसा ससुराल खोजने की कोशिश करता है जहां उसे कोई तकलीफ ना हो। लेकिन इतना काफी नहीं बेटी के खुशहाल जीवन के लिए उसे कुछ हिदायत और हमेशा साथ खड़े होने का भरोसा दिलाने की भी जरूरत होती है।
        हर बेटी के लिए उसके पिता रियल लाइफ सुपरहीरो होते हैं। वह पहले पुरुष होते है, जिन्हें वह आंख बंद करके विश्वास करती है। एक बेटी के जीवन में उसके पिता के लिए जो प्यार और स्थान होता है कई बार उसे वह खुद भी शब्दों में बयां नहीं कर पाती है। पिता से खुलकर यह भी नहीं बता पाती कि शादी करके जब वह अपनी एक नई दुनिया बसा रही होगी तो हिम्मत के लिए उनकी कितनी जरूरत होगी।
    ऐसे में हर पिता का यह कर्तव्य है कि अपनी बेटी को दूसरे के घर भेजने से पहले कुछ बातों को बहुत ही साफ तरीके से कह दें, जिससे वह अनजानों के बीच भी खुद को अकेला ना पाए।
    शादी के बाद भी ये घर तुम्हारा रहेगा
        ऐसा कहा जाता है कि शादी के बाद लड़की के लिए उसका मायका पराया हो जाता है। इसलिए जरूरी है कि एक पिता अपनी बेटी की विदाई से पहले उसे यह कहे कि यह घर हमेशा तुम्हारा रहेगा। ताकि उससे यहां आने से पहले कभी सोचना ना पड़े।
    कोई भी परेशानी हो, मैं हूं
        शादी के बंधन में बंधकर किसी दूसरे घर में अपना नया संसार बसाने के लिए आगे बढ़ रही एक लड़की के लिए यह समय बहुत ही उलझनों से भरा होता है। ऐसे में उसके लिए अपने पिता से यह सुनना कि 'चिंता मत करना मैं हू' सबसे बड़ा सुकून है। इससे ससुराल में अगर गलत हो तो उसे चुपचाप सहते रहने के लिए उसे मजबूर नहीं होना पड़ता है।
    ससुराल में सबका सम्मान करना
        विदा करने से पहले बेटी को पिता का यह समझाना बहुत जरूरी है कि अपने ससुराल वालों को अपने माता-पिता के रूप में सोचना और उन्हें उसी तरह प्यार और सम्मान करना जैसे हमसे करती हो। बिना किसी अपेक्षा के अपने ससुराल वालों से प्यार करना और उनको अहमियत देना, ठीक वैसे ही जैसा तुम अपने पति से हम लोगों के लिए चाहती हो।
    आत्मसम्मान से समझौता नहीं करना
         ससुराल में एक लड़की को किन-किन चीजों से समझौता करना पड़ता है यह सिर्फ वही जानती है। इसलिए यह जरूरी होता है कि विदा करने से पहले पिता अपनी बेटी को आत्मसम्मान की रक्षा करने का पाठ पढ़ाए। ताकि उसमें अपने लिए खड़ा रहने की हिम्मत रहे।
    पति से भी अपमान सहने की जरूरत नहीं
        एक पति को अपनी पत्नी का उतना ही सम्मान करना चाहिए जितना कि वह अपने लिए उम्मीद करता है। इसलिए एक पिता को अपनी बेटी को गलत चीजों के साथ एडजस्टमेंट करने से बचाने के लिए और उसे जीवन भर खुश रखने के लिए उसे पति का बुरा व्यवहार चुपचाप नहीं सहने की हिदायत देनी चाहिए।

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