August 09, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    दुर्ग खाद्य एवं औषधि विभाग की निगरानी पर सवाल, अवैध निर्माण पर रोक या सिर्फ दिखावे की कार्रवाई?

    दुर्ग।

    खाद्य एवं औषधि विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। पिछले महीने सितार गुटखा के अवैध निर्माण और विक्रय के खिलाफ की गई बड़ी कार्रवाई के बाद शहरवासियों को उम्मीद थी कि अब प्रतिबंधित और नियम विरुद्ध संचालित इस कारोबार पर पूरी तरह लगाम लगेगी। लेकिन कुछ ही समय बाद शहर में एक बार फिर सितार गुटखा की बिक्री शुरू होने की चर्चाओं ने विभागीय कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    अगर बाजार में सितार गुटखा दोबारा उपलब्ध हो रहा है तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर इसका निर्माण कहां से हो रहा है? क्या कार्रवाई के बाद भी अवैध निर्माण करने वालों ने दोबारा अपना नेटवर्क सक्रिय कर लिया है या फिर विभाग की निगरानी व्यवस्था सिर्फ कार्रवाई तक सीमित रह गई है?

    बड़ी कार्रवाई के बाद भी क्यों लौट आया अवैध कारोबार?

    पिछले महीने खाद्य एवं औषधि विभाग ने सितार गुटखा के अवैध निर्माण और विक्रय के खिलाफ कार्रवाई कर अपनी सक्रियता दिखाई थी। लेकिन इस कार्रवाई के बाद भी यदि वही उत्पाद बाजार में फिर दिखाई देने लगे हैं तो यह विभाग के लिए गंभीर चुनौती है।

    सिर्फ विक्रेताओं पर कार्रवाई करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि उन लोगों तक पहुंचना जरूरी है जो अवैध निर्माण और सप्लाई नेटवर्क को संचालित कर रहे हैं। सवाल यह भी है कि क्या विभाग ने कार्रवाई के बाद लगातार निगरानी रखी या फिर मामला कार्रवाई की खबरों तक ही सीमित रह गया?

    त्योहारी सीजन में मिठाई दुकानों पर जांच सिर्फ औपचारिकता?

    त्योहारी सीजन शुरू होने वाला है और हर साल की तरह खाद्य एवं औषधि विभाग द्वारा मिठाई दुकानों, खाद्य प्रतिष्ठानों और मिलावट की जांच की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। लेकिन आम जनता के बीच यह सवाल भी बना हुआ है कि आखिर कितनी जांचों का परिणाम ठोस कार्रवाई के रूप में सामने आता है?

    लोगों का आरोप है कि जांच अभियान तो चलते हैं, लेकिन ऐसी कड़ी कार्रवाई कम ही दिखाई देती है जिससे मिलावटखोरों और नियम तोड़ने वालों में वास्तविक डर पैदा हो।

    विभाग के दावों और जमीनी हकीकत में अंतर?

    खाद्य सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले विभाग पर सबसे बड़ी जिम्मेदारी है कि वह अवैध निर्माण, प्रतिबंधित उत्पादों और मिलावटी खाद्य सामग्री के खिलाफ लगातार कार्रवाई करे। लेकिन यदि कार्रवाई के कुछ दिनों बाद ही वही अवैध कारोबार फिर सक्रिय हो जाए तो विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

    अब देखना होगा कि दुर्ग खाद्य एवं औषधि विभाग केवल त्योहारी सीजन में जांच अभियान और प्रेस नोट जारी करने तक सीमित रहता है या फिर अवैध गुटखा निर्माण और विक्रय के पूरे नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई करता है।

    बड़ा सवाल —

    क्या दुर्ग में अवैध गुटखा कारोबारियों को सिर्फ कुछ दिनों की कार्रवाई का डर है, या फिर ऐसी सख्त कार्रवाई होगी जिससे दोबारा अवैध निर्माण करने की हिम्मत ही न हो?

    मोर बिजली ऐप से हर घंटे की खपत पर नजर, दुर्ग के रितेश सोनी को मिली राहत

    दुर्ग। बिजली बिल आने का इंतजार और अधिक खपत की चिंता अब कई उपभोक्ताओं के लिए पुरानी बात होती जा रही है। स्मार्ट मीटर और मोर बिजली ऐप जैसी आधुनिक सुविधाओं ने बिजली उपयोग को पारदर्शी और आसान बना दिया है। इसका अनुभव दुर्ग शहर के वार्ड क्रमांक-9, गिरधारी नगर निवासी रितेश कुमार सोनी कर रहे हैं।

    रितेश सोनी बताते हैं कि स्मार्ट मीटर लगने से पहले उन्हें पूरे महीने बिजली खपत का सही अंदाजा नहीं होता था। बिल आने के बाद ही पता चलता था कि कितनी बिजली खर्च हुई है। कई बार अपेक्षा से अधिक बिल आने पर परेशानी भी होती थी। लेकिन स्मार्ट मीटर लगने के बाद अब वे मोबाइल ऐप के माध्यम से हर दिन और हर घंटे बिजली खपत की जानकारी देख पा रहे हैं।

    उन्होंने बताया कि मोर बिजली ऐप में यह स्पष्ट दिखाई देता है कि किस समय बिजली की खपत ज्यादा हुई और कब कम। इससे अनावश्यक बिजली उपयोग को पहचानना और नियंत्रित करना आसान हो गया है।

    “अब बिजली बिल को लेकर चिंता नहीं रहती”

    रितेश सोनी कहते हैं, “स्मार्ट मीटर लगने के बाद सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि अब हमें पहले से पता रहता है कि बिजली की खपत कितनी हो रही है और अनुमानित बिल कितना आएगा। इससे हम अपने उपयोग को नियंत्रित कर पाते हैं।”

    स्मार्ट मीटर की एक खास सुविधा यह भी है कि इसमें पिछले वर्ष की समान अवधि की बिजली खपत की तुलना की जा सकती है। इससे उपभोक्ता यह समझ सकते हैं कि उनका बिजली उपयोग बढ़ा है या कम हुआ है और उसी के अनुसार ऊर्जा बचत के उपाय अपना सकते हैं।

    परिवार में बढ़ी बिजली बचत की आदत

    रितेश सोनी के परिवार में भी अब बिजली बचाने को लेकर जागरूकता बढ़ी है। अनावश्यक लाइट बंद रखना, ऊर्जा दक्ष उपकरणों का उपयोग करना और जरूरत के अनुसार बिजली खर्च करना परिवार की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है।

    उनका कहना है कि स्मार्ट मीटर केवल एक तकनीकी उपकरण नहीं, बल्कि उपभोक्ता को जागरूक बनाने का माध्यम है। वास्तविक समय में बिजली खपत की जानकारी मिलने से उपभोक्ता अपने खर्च को नियंत्रित कर सकता है और ऊर्जा संरक्षण में योगदान दे सकता है।

    स्मार्ट मीटर और मोर बिजली ऐप का यह अनुभव बताता है कि तकनीक के सही उपयोग से बिजली प्रबंधन आसान हो सकता है। रितेश सोनी जैसे उपभोक्ताओं की कहानी अन्य लोगों के लिए भी संदेश है कि जागरूकता और आधुनिक सुविधाओं के माध्यम से बिजली बिल की चिंता को कम किया जा सकता है।

    जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की पहल, रैगिंग रोकथाम, महिला अधिकार और ट्रैफिक नियमों पर किया जागरूक

    दुर्ग। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा युवाओं में कानून के प्रति जागरूकता बढ़ाने और नशामुक्त समाज के निर्माण के उद्देश्य से छत्रपति शिवाजी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, दुर्ग में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को उनके संवैधानिक अधिकारों, कानूनी कर्तव्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों की विस्तृत जानकारी दी गई।

    माननीय अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के. विनोद कुजूर के मार्गदर्शन में आयोजित शिविर में व्यवहार न्यायाधीश (वरिष्ठ श्रेणी) श्रीमती श्वेता पटेल, श्री रवि कश्यप तथा व्यवहार न्यायाधीश (कनिष्ठ श्रेणी) श्रीमती महिमा शर्मा ने विद्यार्थियों को विभिन्न विधिक विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने रैगिंग की रोकथाम, उसके कानूनी परिणाम और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण बनाए रखने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।

    कार्यक्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश का प्रेरक संदेश भी विद्यार्थियों को सुनाया गया, जिसमें शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने, उपलब्ध अवसरों का सदुपयोग करने और लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा दी गई।

    शिविर के दौरान मध्यस्थता के माध्यम से विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान, महिलाओं के संवैधानिक एवं कानूनी अधिकार, उनकी सुरक्षा से जुड़े कानून तथा यातायात नियमों के पालन के महत्व पर भी विस्तृत जानकारी दी गई। लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम (LADCS) के अधिवक्ताओं ने विद्यार्थियों को ई-चालान से संबंधित कानूनी प्रावधानों और अधिकारों से भी अवगत कराया।

    कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण विषय नशामुक्ति भी रहा। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को नशे के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आर्थिक दुष्प्रभावों की जानकारी देते हुए स्वयं नशे से दूर रहने तथा परिवार और समाज को भी नशामुक्ति के प्रति जागरूक करने का संकल्प दिलाया।

    शिविर में पैरालीगल वॉलेंटियर्स ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा पात्र नागरिकों को उपलब्ध कराई जाने वाली निःशुल्क विधिक सहायता, कानूनी परामर्श और विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। अंत में विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया। विद्यार्थियों ने कार्यक्रम को उपयोगी और प्रेरणादायी बताते हुए ऐसे जागरूकता शिविरों का नियमित आयोजन करने की मांग की।

    जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य युवाओं में कानून के प्रति सम्मान, सामाजिक उत्तरदायित्व और जागरूक नागरिक बनने की भावना विकसित करना है, ताकि न्यायपूर्ण, सुरक्षित और नशामुक्त समाज के निर्माण में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

    दुर्ग। जिले में मानसून की सक्रियता के बीच 1 जून से 5 अगस्त 2026 तक 501.0 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई है। कलेक्टर कार्यालय की भू-अभिलेख शाखा से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस अवधि में पाटन तहसील में सबसे अधिक 620.7 मिमी तथा धमधा तहसील में सबसे कम 346.1 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई है।

    आंकड़ों के अनुसार दुर्ग तहसील में 564.0 मिमी, बोरी में 561.1 मिमी, भिलाई-3 में 517.1 मिमी तथा अहिवारा में 396.8 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। जिले में अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश की मात्रा में स्पष्ट अंतर देखने को मिला है।

    5 अगस्त 2026 को हुई वर्षा की बात करें तो भिलाई-3 में सर्वाधिक 28.9 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा धमधा में 24.9 मिमी, दुर्ग में 14.1 मिमी, बोरी में 2.0 मिमी, अहिवारा में 1.2 मिमी वर्षा हुई, जबकि पाटन तहसील में वर्षा दर्ज नहीं की गई।

    जिला प्रशासन ने बताया कि मानसून की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है तथा वर्षा से संबंधित आंकड़ों का नियमित संकलन किया जा रहा है। किसानों एवं आम नागरिकों को मौसम की ताजा जानकारी पर ध्यान देने और आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    भिलाई। शहर में यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने और सड़कों पर अवैध पार्किंग की समस्या पर अंकुश लगाने के लिए नगर पालिक निगम भिलाई ने अभियान तेज कर दिया है। इसी कड़ी में निगम के जोन-3 राजस्व विभाग एवं पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम ने पावर हाउस सर्विस रोड पर अवैध रूप से खड़े वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कई वाहनों को जब्त किया।

    निगम प्रशासन के अनुसार पावर हाउस सर्विस रोड पर सड़क किनारे बेतरतीब ढंग से वाहन खड़े किए जाने के कारण आवागमन प्रभावित हो रहा था। अवैध पार्किंग से न केवल यातायात बाधित हो रहा था, बल्कि दुर्घटनाओं की आशंका भी लगातार बनी हुई थी। नागरिकों की सुविधा और सुरक्षित यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर सड़क पर अवैध रूप से खड़े वाहनों को हटाया और उन्हें जब्त कर लिया।

    कार्रवाई के दौरान जब्त किए गए वाहनों को पुलिस प्रशासन के सहयोग से थाना छावनी पहुंचाया गया। निगम अधिकारियों ने वाहन चालकों को चेतावनी देते हुए कहा कि सार्वजनिक सड़क, सर्विस रोड अथवा यातायात प्रभावित करने वाले स्थानों पर वाहन खड़ा करना नियमों का उल्लंघन है और ऐसे मामलों में आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    निगम प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे केवल निर्धारित पार्किंग स्थलों का ही उपयोग करें तथा सड़क पर वाहन खड़े कर यातायात व्यवस्था में बाधा उत्पन्न न करें। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शहर को व्यवस्थित, सुरक्षित और सुगम यातायात उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अवैध पार्किंग के विरुद्ध यह अभियान निरंतर जारी रहेगा।

    भिलाई। नगर पालिक निगम भिलाई ने मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना एवं महिला समृद्धि बाजार योजना के अंतर्गत प्राप्त आवेदनों की सूची जारी कर दी है। अब दावापत्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र आवेदकों के बीच नियमानुसार लॉटरी के माध्यम से दुकानों एवं चबूतरों का किरायेदारी पर आवंटन किया जाएगा।

    निगम प्रशासन के अनुसार मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना के तहत 25 दुकानें एवं 8 चबूतरे, जबकि महिला समृद्धि बाजार योजना के तहत 6 दुकानों का विभिन्न स्थलों पर किरायेदारी के आधार पर आवंटन किया जाना है। इसके लिए इच्छुक नागरिकों से आवेदन आमंत्रित किए गए थे।

    प्रारंभिक रूप से आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 30 जून 2026 निर्धारित थी, लेकिन अपेक्षित संख्या में आवेदन प्राप्त नहीं होने के कारण निगम ने अंतिम तिथि बढ़ाकर 25 जुलाई 2026 कर दी थी। विस्तारित अवधि तक प्राप्त आवेदनों के आधार पर अब आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

    निगम मुख्यालय के सूचना पटल पर सभी प्राप्त आवेदनों की सूची दावापत्ति के लिए चस्पा कर दी गई है। निगम प्रशासन ने सभी आवेदकों से आग्रह किया है कि वे मुख्य कार्यालय पहुंचकर सूची में अपना नाम एवं आवेदन संबंधी विवरण का अवलोकन करें। यदि किसी आवेदक को सूची में दर्ज जानकारी पर कोई आपत्ति या दावा प्रस्तुत करना हो, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत समय पर दावापत्ति दर्ज करा सकता है।

    दावापत्ति प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र आवेदकों के बीच संवर्गवार पारदर्शी लॉटरी प्रणाली के माध्यम से दुकानों एवं चबूतरों का आवंटन किया जाएगा।

    निगम प्रशासन ने सभी आवेदकों से अपील की है कि वे समय रहते अपने आवेदन की स्थिति की जांच कर लें, ताकि आगामी आवंटन प्रक्रिया में किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

    भिलाई। नगर पालिक निगम भिलाई ने शहर को स्वच्छ एवं सुंदर बनाए रखने के अभियान के तहत सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ एक बार फिर सख्त कार्रवाई की है। निगम आयुक्त एवं स्वास्थ्य अधिकारी के निर्देश पर बुधवार 5 अगस्त को जोन क्रमांक-01 के वार्ड क्रमांक-03 अंतर्गत मॉडल टाउन स्थित विनोबा नगर क्षेत्र में विभिन्न दुकानों का निरीक्षण किया गया।

    निरीक्षण के दौरान कई प्रतिष्ठानों में सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग, डस्टबिन की व्यवस्था नहीं होना, अनुज्ञप्ति (लाइसेंस) का अभाव तथा साफ-सफाई में लापरवाही पाई गई। निगम की टीम ने नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ चालानी कार्रवाई करते हुए कुल ₹2600 का जुर्माना वसूला।

    कार्रवाई के तहत संतोष किराना स्टोर पर सिंगल यूज प्लास्टिक मिलने पर ₹700, वर्मा किराना स्टोर पर सिंगल यूज प्लास्टिक के लिए ₹700 तथा डस्टबिन नहीं रखने पर ₹100, मंटू प्रसाद कानू पर सिंगल यूज प्लास्टिक उपयोग के लिए ₹500, आनंद पान पैलेस पर साफ-सफाई नहीं रखने पर ₹100 तथा चाय चस्का प्रतिष्ठान पर अनुज्ञप्ति लाइसेंस नहीं होने के कारण ₹500 का जुर्माना लगाया गया।

    निगम प्रशासन ने सभी प्रतिष्ठान संचालकों को भविष्य में सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग पूरी तरह बंद करने, परिसर में स्वच्छता बनाए रखने, डस्टबिन की अनिवार्य व्यवस्था करने तथा आवश्यक अनुज्ञप्ति लाइसेंस प्राप्त करने के निर्देश दिए। साथ ही चेतावनी दी गई कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आगे भी नियमित रूप से कार्रवाई जारी रहेगी।

    भिलाई। भिलाई शहर के वरिष्ठ पत्रकार एवं 'इस्पात की धड़कन' के संपादक आर.पी. सिंह (70 वर्ष) का गुरुवार को निधन हो गया। उनके निधन से पत्रकारिता जगत, सामाजिक क्षेत्र और उनके असंख्य शुभचिंतकों में गहरा शोक व्याप्त है। उनके जाने से भिलाई की पत्रकारिता ने एक ऐसे निर्भीक, निष्पक्ष और जनसरोकारों के प्रति समर्पित व्यक्तित्व को खो दिया है, जिन्होंने अपने पूरे जीवन में पत्रकारिता को केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज सेवा का माध्यम माना।

    आर.पी. सिंह लंबे समय तक पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहे। उन्होंने सदैव सत्य, निष्पक्षता और सामाजिक सरोकारों को अपनी लेखनी का आधार बनाया। उनकी स्पष्ट सोच, सहज व्यवहार और जनहित के मुद्दों को मुखरता से उठाने की प्रतिबद्धता ने उन्हें पत्रकारिता जगत में एक विशिष्ट पहचान दिलाई। वे युवा पत्रकारों के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शक के रूप में भी सदैव याद किए जाएंगे।

    उनके निधन का समाचार मिलते ही भिलाई सहित पूरे दुर्ग जिले के पत्रकारों, सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों एवं शुभचिंतकों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। सभी ने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिवार को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति दें।

    स्वर्गीय आर.पी. सिंह का अंतिम संस्कार 6 अगस्त 2026 (गुरुवार) प्रातः 10:00 बजे रामनगर मुक्तिधाम, भिलाई में किया जाएगा। वे अपने पीछे तीन पुत्रियां—वंदना, विभा एवं वीणा सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।

    शौर्यपथ परिवार दिवंगत वरिष्ठ पत्रकार आर.पी. सिंह को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता है तथा ईश्वर से उनकी पुण्य आत्मा की शांति एवं शोकाकुल परिवार को संबल प्रदान करने की प्रार्थना करता है।

    दुर्ग। भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) से जुड़े कथित अवैध आयरन स्क्रैप परिवहन प्रकरण में एक नया और महत्वपूर्ण मोड़ सामने आया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने व्यवसायी हिमांशु खंडेलवाल को अग्रिम जमानत प्रदान करते हुए माना कि उनका नाम मूल एफआईआर में दर्ज नहीं है, उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं है और उनसे हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं है।

    न्यायमूर्ति रेणुका सिंह की एकलपीठ ने 4 अगस्त को पारित आदेश में यह राहत प्रदान की। मामला मई 2026 में दर्ज कथित अवैध आयरन स्क्रैप परिवहन प्रकरण से जुड़ा है, जिसमें पुलिस ने बिना वैध अनुमति स्क्रैप परिवहन के आरोप में दो ट्रकों को पकड़ा था और जांच के आधार पर अपराध दर्ज किया था।

    सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत के समक्ष स्पष्ट किया कि हिमांशु खंडेलवाल का नाम एफआईआर में कहीं भी दर्ज नहीं है। वे केवल मैसर्स हिमांशु ट्रेडर्स के संचालक हैं तथा संबंधित वाहनों का स्वामित्व वैध प्रक्रिया के तहत पहले ही तीसरे पक्ष को हस्तांतरित किया जा चुका था। इसके अलावा उनके कब्जे से कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई और उनका कोई आपराधिक इतिहास भी सामने नहीं आया।

    दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि उपलब्ध परिस्थितियों में आवेदक की गिरफ्तारी या हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं है। इसी आधार पर अदालत ने उन्हें अग्रिम जमानत प्रदान कर दी।

    अब उठ रहे हैं बड़े सवाल

    हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और जनचर्चाओं में यह सवाल उठने लगा है कि जिस हिमांशु खंडेलवाल को दुर्ग पुलिस फरार बताती रही, उसका नाम मूल एफआईआर में दर्ज ही नहीं था। ऐसे में जांच की दिशा, आरोपी बनाए जाने की प्रक्रिया और पुलिस कार्रवाई को लेकर कई प्रश्न खड़े हो रहे हैं।

    हालांकि, इस संबंध में दुर्ग पुलिस का आधिकारिक स्पष्टीकरण अभी सामने आना बाकी है। पुलिस का पक्ष आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

    अब सबसे बड़ा सवाल यही है—यदि किसी व्यक्ति का नाम एफआईआर में ही नहीं था, तो उसे फरार घोषित करने का आधार क्या था? यही प्रश्न अब पूरे प्रकरण में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

    वन महोत्सव-2026 के तहत 15 एकड़ में 2500 से अधिक पीपल के पौधे रोपे गए, प्रदेश में इस वर्ष ढाई करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य

    रायपुर/शौर्यपथ। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने वन महोत्सव-2026 का शुभारंभ करते हुए नया रायपुर में अपनी मां के नाम पर पीपल का पौधा लगाकर 'पीपल फॉर पीपुल' अभियान की शुरुआत की। अभियान के तहत 15 एकड़ क्षेत्र में 2500 से अधिक पीपल के पौधे लगाए गए।

    मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान से जुड़कर अधिक से अधिक वृक्षारोपण एवं पौधों के संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण हमारी सांस्कृतिक विरासत और आने वाली पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले दो वर्षों में प्रदेश में 7 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं, जबकि इस वर्ष ढाई करोड़ पौधों के रोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

    वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि 'पीपल फॉर पीपुल' अभियान स्वच्छ, हरित और स्वस्थ भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा सहित मंत्रिमंडल के सदस्य, जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी एवं बड़ी संख्या में नागरिकों ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।

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