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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
प्रदेश कांग्रेस सचिव अय्यूब खान ने की जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग
दुर्ग। जिला अस्पताल दुर्ग में एक चिकित्सक की कथित लापरवाही और मरीज को गलत जानकारी देकर गुमराह करने का मामला सामने आया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी छत्तीसगढ़ के सचिव अय्यूब खान ने इस संबंध में सिविल सर्जन को लिखित शिकायत सौंपकर दोषी डॉक्टर के खिलाफ विभागीय जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार 5 जून की रात लगभग 11 बजे आलिया खान नामक छात्रा, जो नीट परीक्षा की तैयारी कर रही है, तेज बुखार की शिकायत के चलते जिला अस्पताल दुर्ग पहुंची थी। आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने बिना समुचित जांच किए छात्रा के परिजनों को बताया कि उसकी किडनी और लीवर खराब हैं तथा उसका उपचार जिला अस्पताल में संभव नहीं है। डॉक्टर ने तत्काल मरीज को रायपुर स्थित मेकाहारा अस्पताल रेफर करने की सलाह दी।
परिजनों के अनुसार डॉक्टर की बात सुनकर वे घबरा गए और छात्रा को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां चिकित्सकीय जांच के बाद पता चला कि उसे केवल सामान्य बुखार था। उपचार के बाद छात्रा पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट आई।
मामले की जानकारी मिलने पर प्रदेश कांग्रेस सचिव अय्यूब खान पीड़ित परिवार के साथ जिला अस्पताल पहुंचे और सिविल सर्जन डॉ. मिंज से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया। उन्होंने इस संबंध में लिखित शिकायत भी सौंपी। शिकायत प्राप्त होने के बाद सिविल सर्जन ने दो दिनों के भीतर मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
अय्यूब खान ने कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित डॉक्टर पर मरीज को गलत जानकारी देकर गुमराह करने, परिजनों से दुर्व्यवहार करने तथा बिना पर्याप्त जांच के रेफर करने के आरोप में कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं से गरीब और सामान्य मरीजों का सरकारी अस्पतालों पर से भरोसा उठ सकता है। जिला प्रशासन को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच कर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना चाहिए।
सिविल सर्जन से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में मो. रफीक, अज्जू वाजिद, श्रीमती रुक्कैया, अनीस अकील चौहान तथा अख्तर चौहान भी शामिल थे।
(नोट: यह समाचार शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों और प्रस्तुत शिकायत के एवं उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर तैयार किया गया है। मामले की जांच एवं संबंधित पक्ष का पक्ष आना शेष है।)
भिलाई। भिलाई टाउनशिप क्षेत्र में लीज, सब-लीज, रिटेंशन एवं लाइसेंस नवीनीकरण शुल्क से संबंधित नई नीति लागू होने के बाद सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं में खुशी का माहौल है। इसी क्रम में हिन्दू मिलन मंदिर प्रगति नगर रिसाली, भारत सेवा आश्रम एवं काली बाड़ी समिति के पदाधिकारियों ने Vijay Baghel से उनके सेक्टर-5 स्थित निवास कार्यालय में सौजन्य भेंट कर अभिनंदन किया तथा इस महत्वपूर्ण पहल के लिए आभार व्यक्त किया।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में लीज एवं सब-लीज नवीनीकरण शुल्क में हुई भारी वृद्धि के कारण सामाजिक, धार्मिक एवं जनसेवा से जुड़ी संस्थाओं के समक्ष आर्थिक चुनौतियां खड़ी हो गई थीं। नई नीति के तहत ऐसी संस्थाओं के लिए मात्र एक रुपये की प्रतीकात्मक राशि पर लीज आवंटन एवं नवीनीकरण का प्रावधान किए जाने से उन्हें बड़ी राहत मिली है।
हिन्दू मिलन मंदिर प्रगति नगर रिसाली एवं भारत सेवा आश्रम के पदाधिकारियों ने बताया कि इस विषय को सांसद विजय बघेल ने लगातार गंभीरता से उठाया। उन्होंने केंद्रीय इस्पात मंत्रालय एवं संबंधित अधिकारियों के समक्ष सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं की समस्याओं को प्रभावी ढंग से रखा और समाधान के लिए लगातार प्रयास किए। उनके निरंतर प्रयासों का ही परिणाम है कि नई नीति लागू हो सकी, जिससे अनेक संस्थाओं को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
नई नीति लागू होने पर काली बाड़ी समिति सेक्टर-6 के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने भी सांसद का अभिनंदन करते हुए इसे सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं के लिए ऐतिहासिक राहत बताया। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से संस्थाओं की आर्थिक चिंता कम होगी और वे समाजसेवा, सांस्कृतिक तथा धार्मिक गतिविधियों को और अधिक प्रभावी ढंग से संचालित कर सकेंगी।
इस अवसर पर विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने सांसद के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनहित से जुड़े मुद्दों पर उनकी सक्रियता क्षेत्र के लिए लाभकारी सिद्ध हो रही है।
अभिनंदन के दौरान सांसद विजय बघेल ने सभी पदाधिकारियों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि सामाजिक, धार्मिक एवं जनसेवा संस्थाएं समाज की महत्वपूर्ण धरोहर हैं। उनके हितों की रक्षा तथा क्षेत्र की जनसमस्याओं के समाधान के लिए वे भविष्य में भी निरंतर प्रयासरत रहेंगे।
नई नीति से भिलाई टाउनशिप की सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं को मिली राहत को क्षेत्र में जनहित से जुड़ा महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।
राज्यसभा नामांकन विवाद में कांग्रेस की अगली रणनीति पर नजर, 45 दिनों के भीतर चुनाव याचिका दायर करने का विकल्प खुला
नई दिल्ली/भोपाल। मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव से जुड़े बहुचर्चित नामांकन विवाद में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी रिट याचिका खारिज किए जाने के बाद अब राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा इस बात की है कि कांग्रेस की अगली रणनीति क्या होगी और क्या मीनाक्षी नटराजन चुनाव याचिका दायर कर इस मामले को आगे बढ़ाएंगी।
हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज ही आया है और फिलहाल मीनाक्षी नटराजन द्वारा चुनाव याचिका दायर किए जाने की कोई आधिकारिक घोषणा या पुष्टि सामने नहीं आई है। ऐसे में कांग्रेस की विधिक टीम सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का अध्ययन कर आगे की कानूनी रणनीति तय कर सकती है।
हाई कोर्ट में चुनौती देने का रास्ता खुला
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब मीनाक्षी नटराजन के पास चुनाव याचिका के माध्यम से मामले को आगे बढ़ाने का विकल्प उपलब्ध है। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दायर की जा सकती है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कांग्रेस इस मामले को आगे बढ़ाने का निर्णय लेती है, तो मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दायर कर नामांकन निरस्तीकरण की वैधता को चुनौती दी जा सकती है।
राज्यसभा चुनाव का परिणाम पूरी तरह बदल गया
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने और न्यायालय से तत्काल राहत नहीं मिलने का सीधा असर राज्यसभा चुनाव की दिशा पर पड़ा। कांग्रेस की प्रमुख दावेदार के चुनावी मैदान से बाहर होने के बाद मध्य प्रदेश में राजनीतिक समीकरण बदल गए और भारतीय जनता पार्टी के तीनों उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने का मार्ग प्रशस्त हो गया।
कांग्रेस ने लगाए लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने के आरोप
कांग्रेस नेताओं ने पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया है। पार्टी के कई नेताओं ने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया से विपक्षी प्रतिनिधित्व प्रभावित हुआ है और लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचा है। वहीं भाजपा ने निर्वाचन प्रक्रिया को नियमसम्मत और वैधानिक बताते हुए सभी आरोपों को खारिज किया है।
अब सबकी नजर कांग्रेस के अगले कदम पर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल एक राज्यसभा सीट तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि चुनावी प्रक्रिया, नामांकन की वैधता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका से जुड़े व्यापक सवाल भी इससे जुड़े हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में कांग्रेस हाई कोर्ट का रुख करती है या नहीं, इस पर पूरे देश की राजनीतिक नजरें टिकी रहेंगी।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भाजपा को तत्काल राजनीतिक लाभ मिला है, जबकि कांग्रेस के सामने कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर अपनी रणनीति तय करने की चुनौती खड़ी हो गई है।
नवनियुक्त अधिकारी-कर्मचारी कल्याण संघ की बैठक में हड़ताल की रणनीति पर मंथन, कर्मचारी हितों की लड़ाई तेज करने का ऐलान
दुर्ग। दुर्ग नगर निगम में कर्मचारियों के बीच बढ़ते असंतोष और कर्मचारी हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर नवनियुक्त अधिकारी-कर्मचारी कल्याण संघ (छत्तीसगढ़) ने संगठनात्मक गतिविधियों को तेज कर दिया है। इसी क्रम में दुर्ग नगर निगम के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें कर्मचारियों ने निगम प्रशासन की कार्यशैली, लगातार हो रही प्रशासनिक कार्यवाहियों तथा कर्मचारी हितों की कथित उपेक्षा को लेकर खुलकर अपनी बात रखी।
बैठक में संघ के प्रदेश अध्यक्ष राजेश सोनी, प्रदेश संयोजक संजय शर्मा, प्रदेश सचिव ऋषभ सिंह ठाकुर, प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश तिवारी सहित प्रदेश स्तरीय पदाधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम का आयोजन जिला अध्यक्ष राजूलाल चन्द्राकर के नेतृत्व में किया गया।
बैठक के दौरान कर्मचारियों ने प्रदेश पदाधिकारियों को बताया कि निगम प्रशासन के कुछ निर्णयों और कार्यप्रणाली को लेकर कर्मचारियों में लगातार असंतोष बढ़ रहा है। कर्मचारियों का कहना था कि हाल के समय में हुई प्रशासनिक कार्यवाहियों ने कर्मचारियों के बीच असुरक्षा का माहौल पैदा किया है, जिससे कार्यस्थल का वातावरण प्रभावित हो रहा है।
प्रदेश पदाधिकारियों ने कर्मचारियों की समस्याओं और शिकायतों को गंभीरता से सुनते हुए आश्वस्त किया कि कर्मचारी हितों से जुड़े सभी मुद्दों को नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव तथा शासन स्तर तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि संगठन कर्मचारियों के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करने के लिए प्रतिबद्ध है।
बैठक की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि संगठन विस्तार रही। सदस्यता अभियान के दौरान 45 अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने नवनियुक्त अधिकारी-कर्मचारी कल्याण संघ की सदस्यता ग्रहण की, जिससे संगठन को नई ऊर्जा और मजबूती मिली। प्रदेश नेतृत्व ने इसे कर्मचारियों के बढ़ते विश्वास का प्रतीक बताते हुए कहा कि मजबूत संगठन ही कर्मचारी हितों की प्रभावी लड़ाई लड़ सकता है।
बैठक में आगामी आंदोलन और प्रस्तावित हड़ताल की रणनीति पर भी विस्तार से चर्चा की गई। प्रदेश संयोजक संजय शर्मा ने बताया कि 13 जुलाई 2026 से रायपुर के तूताग्राउंड में प्रस्तावित अनिश्चितकालीन हड़ताल को सफल बनाने के लिए प्रदेशभर में कर्मचारियों को संगठित किया जा रहा है। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में समय पर वेतन भुगतान, चुंगी क्षतिपूर्ति राशि का नियमित भुगतान, शासन से प्राप्त अनुदान की उपलब्धता तथा कर्मचारियों को ट्रेजरी (कोषालय) प्रणाली से जोड़ना शामिल है।
प्रदेश अध्यक्ष राजेश सोनी ने कर्मचारियों का आह्वान करते हुए कहा कि अधिकार और सम्मान की लड़ाई एकजुटता से ही जीती जा सकती है। उन्होंने कहा कि यदि कर्मचारी एक मंच पर संगठित होकर अपनी बात रखते हैं तो उनकी समस्याओं के समाधान की संभावनाएं और मजबूत होती हैं।
बैठक में शुभम गोईर, चित्ररेखा चन्द्राकर, नरेंद्र मनहरे, महेंद्र धर्मकार, तरुण चन्द्राकर, शिवा परिहार, साक्षी चौहान, सत्येंद्र, गंगाधर ठाकरे, गुमान निर्मलकर, हर्ष चन्द्राकर, नीरज, रतनदीप, राजदीप, निखिल, अनुपम, विनीत वर्मा, गुलशन यादव, कविता कश्यप, नेहा यादव, सोमलता साहू, संजू जाटव, निक्की बंछोर, रूपेश नायक, युवराज, मनोज सोनी, सिद्धांत शर्मा, गंगा यादव, राखी कुंडे, बलदाऊ पटेल, विजेंद्र पटेल सहित बड़ी संख्या में अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
बैठक के अंत में उपस्थित कर्मचारियों ने संगठन को और अधिक मजबूत बनाने, कर्मचारी हितों की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने तथा आगामी अनिश्चितकालीन हड़ताल को सफल बनाने का संकल्प लिया। कर्मचारियों का मानना है कि यदि उनकी मांगों पर समय रहते सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आने वाले समय में आंदोलन और व्यापक स्वरूप ले सकता है।
रायपुर / शौर्यपथ / उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव के निर्देश पर विभाग ने रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण की धीमी प्रगति पर ठेकेदार को नोटिस जारी किया है। उप मुख्यमंत्री श्री साव ने अपने बस्तर प्रवास के दौरान 6 जून को राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर केशलूर-जगदलपुर मार्ग में किरंदुल-विशाखापट्टनम रेलवे लाइन के ऊपर बन रहे फोरलेन रेलवे ओवरब्रिज का निरीक्षण किया था। उन्होंने निरीक्षण के दौरान काम के पिछडऩे एवं लेट-लतीफी पर ठेकेदार और अधिकारियों को फटकार लगाई थी। उन्होंने अनुबंध के अनुसार कार्य में अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर गहरी नाराजगी जताते हुए ठेकेदार को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए थे। बस्तर जिले में केशलूर के पास 69 करोड़ 36 लाख रुपए की लागत से इस रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण किया जा रहा है।
लोक निर्माण विभाग के राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता ने निर्माण एजेंसी मेसर्स अशोक कुमार मित्तल को जारी नोटिस में कहा है कि साइट उपलब्ध होने के बावजूद मैन-पॉवर, मटेरियल और मशीनरी की खराब व्यवस्था के कारण अलग-अलग चरणों में निर्माण के समयबद्ध लक्ष्यों को हासिल नहीं किया जा सका है। कार्यस्थल पर काम की प्रगति मंजूर किए गए निर्माण कार्यक्रम से काफी पीछे है और तय किए गए माइलस्टोन्स (महत्वपूर्ण पड़ावों) के अनुरूप नहीं है। विभाग द्वारा प्रगति की लगातार समीक्षा कर कार्यों में तेजी लाने के लिए बार-बार निर्देशित और नोटिस जारी करने के बावजूद काम की गति असंतोषजनक है।
विभाग ने ठेकेदार को जारी नोटिस में कहा है कि उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री द्वारा विगत 6 जून को साइट के निरीक्षण के दौरान काम की बेहद धीमी प्रगति पर गंभीर चिंता जताई गई थी। उन्होंने अनुबंध के प्रावधानों के अनुसार ठेकेदार के विरूद्ध तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए थे। उप मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुख्य अभियंता ने ठेकेदार को नोटिस जारी कर तुरंत पर्याप्त मैन-पॉवर, मशीनरी, सामग्री और अन्य जरूरी संसाधन जुटाकर काम में तेजी लाने तथा प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने के लिए तय लक्ष्यों को हासिल करने सभी जरूरी उपाय करने के निर्देश दिए हैं। काम की प्रगति में उल्लेखनीय सुधार नहीं पाए जाने पर विभाग द्वारा अनुबंध के प्रावधानों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
रायपुर / शौर्यपथ / नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की सचिव श्रीमती शंगीता आर. ने आज राजनांदगांव में चल रहे प्रमुख विकास कार्यों और अधोसंरचना परियोजनाओं का निरीक्षण कर उनकी प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान महापौर मधुसूदन यादव और कलेक्टर जितेंद्र यादव भी मौजूद थे।
नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव ने राज्य शासन की प्राथमिकता वाली योजना के तहत निर्माणाधीन नालंदा परिसर का निरीक्षण कर कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने निर्माण कार्य को निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही भवन निर्माण पूर्ण होने से तीन-चार माह पहले ही लाइब्रेरी और कैंटीन संचालन की तैयारियां शुरू करने तथा आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा। इस दौरान उन्होंने परिसर में पौधरोपण भी किया।
उन्होंने शहर के प्रमुख जलाशय रानीसागर का भी जायजा लिया और इसके सौंदर्यीकरण की कार्ययोजना पर चर्चा की। उन्होंने आसपास के दुकानदारों को स्वच्छता बनाए रखने तथा कचरा तालाब में नहीं फेंकने की हिदायत दी। उन्होंने 18 एकड़ में विकसित एसएलआरएम सेंटर पहुंचकर स्वच्छता दीदियों से कचरा संग्रहण एवं प्रसंस्करण की जानकारी ली तथा कर्मचारियों को सुरक्षा मानकों का पालन करने के निर्देश दिए। उन्होंने मिशन अमृत 2.0 के तहत मोहारा-सिंगदई स्थित एसटीपी का निरीक्षण कर संचालन व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने तुमड़ीबोड़ स्थित 120 मेगावाट सोलर पावर प्लांट का निरीक्षण कर परियोजना की प्रगति और उत्पादन क्षमता की जानकारी ली।
स्कूल शिक्षा विभाग के कड़े निर्देश- 15 जून तक पूरे करें मरम्मत के कार्य, प्रिंट-रिच और आकर्षक बनाए जाएंगे स्कूल
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही राज्य सरकार विद्यार्थियों के लिए स्वच्छ, सुंदर और गुणवत्तापूर्ण माहौल तैयार करने जा रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (हृश्वक्क 2020) के अनुरूप, प्रदेशभर में 16 जून 2026 से शाला प्रवेश उत्सव 2026 का गरिमामय आयोजन किया जाएगा। इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने मंत्रालय महानदी भवन (नवा रायपुर) से विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
गांवों और शहरों में होगी मुनादी, जनभागीदारी पर जोर
प्रवेश उत्सव को एक उत्सव का रूप देने के लिए इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। इसके तहत गांवों और शहरी वार्डों में मुनादी कराई जाएगी। बैनर-पोस्टर और रैलियों के जरिए जागरूकता बढ़ाई जाएगी। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, शाला विकास समितियों और पालकों (अभिभावकों) की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
विभाग ने निर्देश दिया है कि स्कूल खुलने से पहले भवनों, परिसरों और कक्षाओं की पूरी साफ-सफाई और आवश्यक मरम्मत कर ली जाए। मरम्मत योग्य भवनों का काम 15 जून 2026 तक हर हाल में पूरा करने को कहा गया है ताकि बच्चों को एक आकर्षक और प्रिंट-रिच (शैक्षणिक चित्रों और दीवारों पर लिखी जानकारियों से लैस) वातावरण मिल सके।
शाला त्यागी बच्चों की वापसी और अगली कक्षा में सीधा प्रवेश
प्रवेश प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने एक सुव्यवस्थित ढांचा तैयार किया है। कक्षा पहली में आंगनबाड़ी केंद्रों से बच्चों की सूची प्राप्त कर सीधे स्कूलों में प्रवेश दिया जाएगा। कक्षा छठवीं में प्राथमिक शालाओं से कक्षा 5वीं उत्तीर्ण छात्रों की सूची और टीसी (स्थानांतरण प्रमाण-पत्र) लेकर कक्षा 6वीं में उनका दाखिला सुनिश्चित किया जाएगा। शाला त्यागी बच्चे, जो बच्चे पढ़ाई छोड़ चुके हैं, उन्हें ढूंढकर दोबारा मुख्यधारा से जोडऩे पर विशेष जोर रहेगा। इसके अलावा, स्कूलों में विद्यार्थियों और शिक्षकों की 100 प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने तथा शिक्षकों के लंबित मामलों का त्वरित निपटारा करने के निर्देश दिए गए हैं। सभी विषय शिक्षकों को आगामी तीन महीनों का शैक्षणिक रोडमैप भी तैयार करना होगा।
मिलेगी मुफ्त किताबें, यूनिफॉर्म और साइकिल
उत्सव के दौरान स्कूल पहुंचने वाले नवप्रवेशी बच्चों का तिलक लगाकर आत्मीय स्वागत किया जाएगा। इस मौके पर पात्र छात्रों को नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकें (किताबें), स्कूल गणवेश (यूनिफॉर्म), साइकिल का वितरण किया जाएगा। बोर्ड और स्थानीय परीक्षाओं में टॉप करने वाले होनहार विद्यार्थियों और उत्कृष्ट पालकों को भी सम्मानित किया जाएगा। इस अभियान में स्थानीय समुदाय, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, स्व-सहायता समूहों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों का सहयोग लिया जाएगा। इच्छुक नागरिक अपनी ओर से बच्चों को स्लेट, पेंसिल, कॉपी, कंपास बॉक्स और स्कूल बैग जैसी सामग्रियां भी दान कर सकेंगे।
स्थानीय संसाधनों से होगा आयोजन
स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि शाला प्रवेश उत्सव के लिए कोई पृथक (अलग से) बजट जारी नहीं किया जाएगा। इसका आयोजन जिलों में पहले से उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से ही करना होगा। कार्यक्रम के सुचारू संचालन के लिए संयुक्त संचालक, जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मिशन समन्वयक, प्राचार्य डाइट, विकासखंड शिक्षा अधिकारी एवं अन्य अधिकारियों को विद्यालयों का सतत निरीक्षण कर आवश्यक अकादमिक मार्गदर्शन प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।
सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने उम्मीद जताई है कि सभी अधिकारी और कर्मचारी छात्रहित में व्यक्तिगत रुचि लेकर इस अभियान को सफल बनाएंगे, जिससे नए शिक्षा सत्र 2026-27 में प्रदेश को बेहतर शैक्षणिक परिणाम हासिल हो सकें।
इन्वेस्टर कनेक्ट में हैदराबाद के निवेशकों को मुख्यमंत्री साय का न्योता
आईटी, टेक्सटाइल, डेटा सेंटर, फार्मा के क्षेत्र में खुली 7,800 रोजगार की राह
हैदराबाद / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ ने निवेश आकर्षित करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। हैदराबाद में आयोजित 'छत्तीसगढ़ इन्वेस्टर कनेक्टÓ कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों की सात प्रमुख कंपनियों ने 9,580 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव दिए हैं, जिनसे 7,800 से अधिक रोजगार सृजित होने की संभावना है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने देश के प्रमुख उद्योगपतियों और निवेशकों को छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए आमंत्रित करते हुए कहा विकसित भारत के ग्रोथ इंजन के रूप में छत्तीसगढ़ तेजी से उभर रहा है और राज्य में निवेशकों के लिए 'रेड कारपेटÓ बिछा हुआ है।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन सहित दक्षिण भारत के कई बड़े उद्योगपति, निवेशक और कारोबारी प्रतिनिधि मौजूद रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि नई औद्योगिक नीति लागू होने के बाद दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु के साथ-साथ जापान और दक्षिण कोरिया में आयोजित इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रमों के माध्यम से राज्य को 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। राज्य सरकार इन प्रस्तावों को धरातल पर उतारने के लिए तेजी से कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज निवेश के लिए देश के सबसे बेहतर राज्यों में से एक बनकर उभर रहा है। राज्य में उद्योगों के लिए आसान प्रक्रियाएं, सिंगल विंडो व्यवस्था, बेहतर बुनियादी सुविधाएं और उद्योग अनुकूल नीतियां उपलब्ध हैं। उन्होंने निवेशकों को छत्तीसगढ़ में उद्योग स्थापित करने का आमंत्रण दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हैदराबाद ने आईटी, फार्मा, बायोटेक्नोलॉजी और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। छत्तीसगढ़ भी इन क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है और दोनों राज्यों के उद्योगपति एवं उद्यमी मिलकर नए अवसरों का लाभ उठा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि मध्य भारत में स्थित छत्तीसगढ़ देश का सबसे उपयुक्त लॉजिस्टिक हब बनने की क्षमता रखता है। छत्तीसगढ़ सात राज्यों से घिरा हुआ है और 60 करोड़ से अधिक उपभोक्ताओं तक सीधी पहुंच प्रदान करता है। रेलवे नेटवर्क, भारतमाला परियोजना, एयर कार्गो सुविधाओं तथा खनिज संसाधनों की उपलब्धता उद्योगों के लिए इसे अत्यंत अनुकूल बनाती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश में ग्रीन स्टील को बढ़ावा देने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल है। ऊर्जा क्षेत्र में राज्य को 3.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिससे प्रदेश देश के प्रमुख पावर हब के रूप में उभर रहा है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सात प्रमुख कंपनियों को छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए 'इन्विटेशन टू इन्वेस्टÓ (ऑफर लेटर) प्रदान किए। इनमें डेटा सेंटर, सीमेंट, सेमीकंडक्टर एवं जीपीयू इंफ्रास्ट्रक्चर, सौर ऊर्जा उपकरण निर्माण, वस्त्र, फार्मास्यूटिकल और डेयरी प्रसंस्करण क्षेत्रों की अग्रणी कंपनियां शामिल हैं।
सबसे बड़ा निवेश प्रस्ताव हाइपरनेक्स्ट डाटा सेंटर लिमिटेड की ओर से प्राप्त हुआ, जिसने छत्तीसगढ़ में भारत का पहला समर्पित डिजास्टर रिकवरी डेटा सेंटर कैंपस स्थापित करने के लिए ?4,200 करोड़ के निवेश का प्रस्ताव दिया। इस परियोजना से राज्य में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलेगी और छत्तीसगढ़ डेटा सेंटर क्षेत्र का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकेगा। इस परियोजना से लगभग 250 रोजगार सृजित होंगे।
फीग्रेड एंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड ने सीमेंट क्षेत्र में 2,912 करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव दिया है, जिससे लगभग 4,000 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। वहीं निवाई लैब्स प्राइवेट लिमिटेड ने ?1,000 करोड़ के निवेश से एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), जीपीयू इंफ्रास्ट्रक्चर, एडवांस कंप्यूटिंग और सेमीकंडक्टर असेंबली से जुड़ी सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव दिया। इससे राज्य में आधुनिक तकनीकी उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा एवं लगभग 200 रोजगार सृजित होंगे।
सौर ऊर्जा उपकरण निर्माण क्षेत्र की एसजी मार्ट लिमिटेड ने 700 करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव दिया है, जिससे लगभग 450 लोगों को रोजगार मिल सकता है।
श्री सरवणा मिल्स प्राइवेट लिमिटेड ने ?528 करोड़ के निवेश से अत्याधुनिक टेक्सटाइल और परिधान निर्माण इकाई स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। इस परियोजना से लगभग 2,500 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।
फार्मास्यूटिकल क्षेत्र की काबरा ड्रग्स ने 200 करोड़ रुपये तथा डेयरी क्षेत्र की दिनशॉज़ डेयरी फूड्स प्राइवेट लिमिटेड ने 40 करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव दिया है। इन दोनों परियोजनाओं से क्रमश: लगभग 250 और 150 रोजगार सृजित होंगे।
हैदराबाद दौरे के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और राज्य के प्रतिनिधिमंडल ने देश की कई अग्रणी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठकें कीं। इनमें पेज इंडस्ट्रीज और डेल्टा इलेक्ट्रॉनिक्स, एक्सिस एनर्जी, सेल्कॉन ग्रुप, मैग्नमविंग्स जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल रहीं। बैठकों में छत्तीसगढ़ में निवेश की संभावनाओं, उपलब्ध औद्योगिक सुविधाओं और राज्य सरकार की उद्योग-अनुकूल नीतियों पर विस्तार से चर्चा हुई।
इसके अलावा स्वामी नारायण गुरुकुल संगठन के प्रतिनिधियों ने भी मुख्यमंत्री से मुलाकात कर रायपुर के टाटीबंध में 650 बिस्तरों वाले चैरिटेबल अस्पताल की स्थापना के प्रस्ताव पर चर्चा की।
इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रम में आईटी, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, एयरोस्पेस एवं रक्षा, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) और उन्नत विनिर्माण जैसे भविष्य के उद्योगों में निवेश के अवसरों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। निवेशकों ने इन क्षेत्रों में विशेष रुचि दिखाई।
कार्यक्रम में सीएसआईडीसी के अध्यक्ष श्री राजीव अग्रवाल, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, उद्योग विभाग के सचिव श्री रजत कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, इन्वेस्टमेंट कमिश्नर सुश्री रितु सैन, सीएसआईडीसी के प्रबंध संचालक श्री विश्वेश कुमार, उद्योग विभाग के संचालक श्री प्रभात मलिक एवं अन्य अधिकारी भी शामिल रहे।
मनपसंद समितियों को प्राथमिकता देने और कथित लेन-देन के आरोपों पर स्वाभिमान मंच ने संभाग आयुक्त से की शिकायत
दुर्ग। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेह प्रशासन को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। शासन की मंशा स्पष्ट है कि प्रत्येक योजना का लाभ निष्पक्षता के साथ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं में किसी प्रकार का भेदभाव या मनमानी न हो। इसके बावजूद कुछ विभागों में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यशैली शासन की इस सकारात्मक छवि को धूमिल करने का प्रयास करती दिखाई दे रही है।
इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूरन लाल साहू ने दुर्ग संभाग के आयुक्त को एक विस्तृत शिकायत सौंपते हुए जिला विपणन कार्यालय (DMO), दुर्ग में धान उठाव एवं डिलीवरी ऑर्डर (DO) जारी करने की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, पक्षपातपूर्ण रवैये तथा संदिग्ध कार्यप्रणाली की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
शिकायत के अनुसार जिले की सेवा सहकारी समितियों द्वारा किसानों से धान का उपार्जन कर शासन को सौंपने की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है और किसानों को उनके धान का भुगतान भी प्राप्त हो चुका है। वर्तमान विवाद किसानों के भुगतान से नहीं, बल्कि समितियों से धान उठाव एवं मिलरों को DO जारी करने की प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है।
स्वाभिमान मंच का आरोप है कि DMO कार्यालय में DO जारी करने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं दिखाई दे रही है। शिकायत में कहा गया है कि कई समितियां नियमों के अनुरूप अपने क्रम की प्रतीक्षा कर रही हैं, लेकिन उन्हें समय पर DO नहीं मिल पा रहा है। वहीं कुछ चुनिंदा समितियों एवं मिलरों को प्राथमिकता दिए जाने की चर्चाएं लगातार सामने आ रही हैं। इससे विभागीय निष्पक्षता पर प्रश्नचिन्ह लग रहा है तथा समितियों के बीच असंतोष का वातावरण निर्मित हो रहा है।
शिकायत में विशेष रूप से DMO कार्यालय में पदस्थ कंप्यूटर ऑपरेटर कमल चंद्राकर की भूमिका का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया है कि DO वितरण की प्रक्रिया में मनमानी एवं पक्षपातपूर्ण निर्णय लिए जा रहे हैं। शिकायतकर्ता ने आशंका व्यक्त की है कि कुछ समितियों और मिलरों को प्राथमिकता देने के पीछे कथित आर्थिक लेन-देन की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही संभव होगी, लेकिन शिकायत में लगाए गए आरोपों की गंभीरता को देखते हुए मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक मानी जा रही है।
स्वाभिमान मंच का कहना है कि यदि DO वितरण और धान उठाव की प्रक्रिया में इसी प्रकार का भेदभाव जारी रहा तो इसका सीधा प्रभाव सहकारी समितियों की वित्तीय एवं संचालन क्षमता पर पड़ सकता है। कई समितियां निर्धारित समय पर धान उठाव नहीं होने के कारण अतिरिक्त प्रबंधन संबंधी समस्याओं का सामना कर रही हैं। ऐसी स्थिति में शासन की योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू करने वाली समितियों का मनोबल भी प्रभावित होने की आशंका है।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि पूर्व में भी कुछ समितियों के बीच DO वितरण को लेकर असंतोष की स्थिति बनी थी। ऐसे में आवश्यक है कि पूरे मामले की विभागीय स्तर पर गहन जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि DO जारी करने की प्राथमिकता किन मानकों के आधार पर तय की जा रही है और कहीं किसी स्तर पर पक्षपात या अनियमितता तो नहीं हो रही।
पूरन लाल साहू ने संभाग आयुक्त से मांग की है कि जिले की सभी धान उठाव प्रभावित समितियों से संबंधित अभिलेखों की जांच कराई जाए, DO वितरण की प्रक्रिया का ऑडिट कराया जाए तथा शिकायत में नामित कर्मचारियों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी शिकायतों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए DO प्रणाली को पूर्णतः ऑनलाइन, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए, जिससे किसी भी व्यक्ति विशेष की मनमर्जी या हस्तक्षेप की गुंजाइश समाप्त हो सके।
प्रदेश में सुशासन और पारदर्शी प्रशासन को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता को देखते हुए अब सभी की निगाहें संभागीय प्रशासन पर टिकी हैं। यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों में सत्यता पाई जाती है तो यह केवल एक कर्मचारी का मामला नहीं होगा, बल्कि पूरी व्यवस्था की जवाबदेही तय करने का विषय बन जाएगा। वहीं यदि जांच निष्पक्ष और समयबद्ध होती है तो इससे शासन की पारदर्शिता के प्रति जनता का विश्वास और अधिक मजबूत होगा तथा समितियों के हितों की भी रक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।
महापौर अलका बाघमार के सामने निष्पक्षता की अग्निपरीक्षा
दुर्ग। नगर पालिका निगम दुर्ग द्वारा हाल ही में शहर को पोस्टर-बैनर मुक्त बनाने और बिजली के खंभों, सार्वजनिक दीवारों तथा अन्य सरकारी संपत्तियों पर अवैध प्रचार सामग्री लगाने पर प्रतिबंध की घोषणा की गई है। 10 जून को जारी प्रेस विज्ञप्ति में निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया था कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
इस अभियान के दौरान एक सकारात्मक उदाहरण स्वयं महापौर अलका बाघमार ने प्रस्तुत किया था। अपने जन्मदिन के अवसर पर लगाए गए पोस्टर और बैनरों को उन्होंने हटवाकर यह संदेश देने का प्रयास किया कि नियम सभी के लिए समान हैं और शहर की सुंदरता तथा स्वच्छता सर्वोपरि है।
लेकिन अब शहर की राजनीति में एक नया सवाल खड़ा हो गया है। 15 जून को स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का जन्मदिन है और उनके समर्थकों द्वारा शहर के विभिन्न क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पोस्टर-बैनर लगाए जा रहे हैं। कई स्थानों पर बिजली के खंभों और सार्वजनिक स्थलों पर मंत्री के जन्मदिन की शुभकामनाओं वाले पोस्टर दिखाई दे रहे हैं।
ऐसे में नगर निगम की घोषित नीति और जमीनी स्थिति के बीच तुलना स्वाभाविक रूप से होने लगी है। शहर में चर्चा इस बात की है कि क्या निगम प्रशासन और महापौर अपने ही जारी निर्देशों का पालन कराते हुए इन पोस्टरों को भी हटवाएंगे, या फिर राजनीतिक दबाव और सत्ता समीकरणों के कारण नियमों के पालन में भेदभाव दिखाई देगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल पोस्टर-बैनर का मामला नहीं, बल्कि प्रशासनिक निष्पक्षता और कानून के समान अनुपालन की परीक्षा भी है। यदि नियम बनाए गए हैं तो उनका पालन हर व्यक्ति, संगठन और राजनीतिक दल पर समान रूप से लागू होना चाहिए। वहीं यदि कार्रवाई नहीं होती है तो निगम प्रशासन की मंशा और उसकी विश्वसनीयता पर प्रश्न उठ सकते हैं।
अब सबकी निगाहें महापौर अलका बाघमार और निगम प्रशासन पर टिकी हैं। संविधान और कानून के प्रति समान निष्ठा की बात करने वाली शहरी सरकार क्या अपने ही आदेशों को प्रभावी ढंग से लागू करेगी, या फिर यह मामला भी राजनीतिक अपवाद बनकर रह जाएगा? आने वाले दिनों में निगम का कदम इस प्रश्न का उत्तर तय करेगा।
(नोट: यह विषय सार्वजनिक स्थलों पर पोस्टर-बैनर संबंधी नियमों के समान अनुपालन और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा राजनीतिक-प्रशासनिक प्रश्न है।)
दुर्ग। आम जनता पर बढ़ते आर्थिक बोझ, अत्यधिक ई-चालान की कार्रवाई और परिवहन सेवाओं की बढ़ी हुई शुल्क दरों के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी दुर्ग शहर के अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल के नेतृत्व में कांग्रेसजनों ने जोरदार प्रदर्शन कर संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। कांग्रेस ने इसे आम नागरिकों, वाहन चालकों, विद्यार्थियों, श्रमिकों और मध्यमवर्गीय परिवारों से जुड़ा गंभीर जनहित का मुद्दा बताते हुए तत्काल राहतकारी कदम उठाने की मांग की।
ज्ञापन के माध्यम से कांग्रेस ने कहा कि यातायात पुलिस एवं परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली के कारण आम लोगों पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। ई-चालान की बढ़ती संख्या और परिवहन सेवाओं के शुल्क में वृद्धि से लोगों को अतिरिक्त वित्तीय भार उठाना पड़ रहा है, जिससे व्यापक जनअसंतोष की स्थिति निर्मित हो रही है।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल ने कहा कि कांग्रेस पार्टी जनता की आवाज बनकर सड़कों पर उतरी है। आम नागरिकों की जेब पर पड़ रहे अतिरिक्त बोझ को कम करने के लिए सरकार और संबंधित विभागों को संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनसुविधा के नाम पर जनता पर आर्थिक भार डालना उचित नहीं है और कांग्रेस इस मुद्दे पर लगातार संघर्ष करती रहेगी।
कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि ई-चालान प्रणाली को अधिक पारदर्शी, न्यायसंगत और जनहितकारी बनाया जाए तथा परिवहन सेवाओं की बढ़ी हुई शुल्क दरों की पुनर्समीक्षा कर आम लोगों को राहत प्रदान की जाए। साथ ही वाहन चालकों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करने की भी मांग की गई।
धीरज बाकलीवाल के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि पार्टी सदैव जनसरोकारों के मुद्दों पर जनता के साथ खड़ी रही है और भविष्य में भी आम नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी।
मुख्य मांगें
? अत्यधिक ई-चालान की कार्रवाई पर पुनर्विचार।
? परिवहन सेवाओं की बढ़ी हुई शुल्क दरों में कमी।
? ई-चालान प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करना।
? आम जनता पर बढ़ते आर्थिक बोझ को कम करने के लिए ठोस राहतकारी उपाय लागू करना।
कोंडागांव। छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिला मुख्यालय में इन दिनों पेट्रोल और डीजल की अचानक कमी से आम जनता और किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिले के कई पेट्रोल पंपों पर ईंधन खत्म होने की स्थिति बन गई है, वहीं कुछ पंपों को अस्थायी रूप से बंद भी करना पड़ा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, सुबह से ही कई पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं। कई उपभोक्ताओं को घंटों इंतजार के बाद भी खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। इस स्थिति ने परिवहन व्यवस्था के साथ-साथ कृषि कार्यों को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है।
मामले की पड़ताल के लिए आसपास के जिलों—कांकेर, नारायणपुर और जगदलपुर—में संपर्क किया गया, जहां से जानकारी मिली कि वहां पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है और सामान्य रूप से आपूर्ति जारी है। ऐसे में कोंडागांव में ही इस तरह की किल्लत सामने आना कई सवाल खड़े कर रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब आसपास के जिलों में पर्याप्त मात्रा में ईंधन उपलब्ध है, तो कोंडागांव में कमी क्यों? क्या यह कृत्रिम संकट पैदा कर कीमत बढ़ने की आशंका में ईंधन का भंडारण (डंपिंग) किया जा रहा है? या फिर कालाबाजारी के लिए आपूर्ति को जानबूझकर रोका जा रहा है?
इस मुद्दे पर स्थानीय प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आम नागरिकों और किसानों ने जिला प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित करने और ईंधन की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर समस्या का समाधान कितनी जल्दी करता है और जनता को राहत कब तक मिल पाती है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
