Google Analytics —— Meta Pixel
April 15, 2026
Hindi Hindi
भारत

भारत (993)

मुंबई /शौर्यपथ / मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह की दायर जनहित याचिका पर आज बॉम्बे हाई कोर्ट में सुनवाई हुई. सीनियर काउंसिल विक्रम ननकानी पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह की ओर से पेश हुए. इस दौरान ननकानी मे कोर्ट में पत्र पढ़कर सुनाया और कहा कि जो पत्र लिखा है उसमे कठोर सत्य है. इसके पहले एडवोकेट जनरल ने दलील दी थी कि इस मुद्दे पर बहुत सारी मीडिया रिपोर्टिंग हुई हैं और संदेह और अधिक गहराता जा रहा है. मेरी दलील है कि परमबीर सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका कई SC आदेशों के अनुसार बनाए रखने योग्य नहीं है. अन्य 2 याचिकाएं भी योग्य नहीं हैं.
वहीं, विक्रम ननकानी ने कहा कि ये पत्र बताता है कि पुलिस फोर्स किस दबाव में काम कर रहा है और कितना राजनैतिक हस्तक्षेप है. दूसरा उदाहरण सांसद मोहन डेलकर की खुदकुशी मामले का है. विक्रम ननकानी ने कहा कि ये कठोर सत्य है. एक अनुभवी अफसर ने ये बातें रखी है. उन्होंने कमिश्नर ऑफ इंटेलिजेंस रश्मी शुक्ला की रिपोर्ट का जिक्र किया.
वहीं,चीफ जस्टिस ने पूछा, बिना FIR के कोर्ट जांच का आदेश कैसे दे सकती है? तरीका यही है कि पहले कंप्लेंट हो,उसके बाद ही CBI को जाँच दी जा सकती है. बिना किसी जांच एजेंसी को शिकायत दिये जांच किस आधार पर हो. ये एक लीगल मसला है. कोर्ट ने पूछा कि FIR फाइल करने से आपको कौन रोकता है? विक्रम ननकानी का कहना है कि ये पेटीशन ट्रांसफर से जुड़ी नहीं है. और इस बात के लिए वो कोर्ट को बताना चाहते हैं कि ये PIL क्यों मेन्टेनबल है. चीफ जस्टिस ने कहा, एफआईआर के बिना जांच नहीं हो सकती.विक्रम ननकानी ने कहा कि अदालत ने कई बार इस प्रक्रिया से गुजरने लायक नहीं पाया। ननकानी ने ललिता कुमारी मामले का हवाला दिया.
चीफ जस्टिस ने कहा कि आपको एफआईआर के माध्यम से पुलिस और जांच एजेंसी से संपर्क करना होगा. क्या बिना एफआईआर के सीधे जांच हो सकती है? न्यायाधीश ने दिखाने के लिए औचित्य के लिए कहा और प्रार्थना को बनाए रखने के लिए औचित्य देने के लिए कहता है.
विक्रम ननकानी ने कहा कि यह ट्रांसफर और पोस्टिंग से संबंधित है, यह मुझे नहीं, बल्कि कमिश्नर ऑफ इंटेलिजेंस से आता है और उसने लगभग 6 महीने पहले सचिव को रिपोर्ट दर्ज की थी. यह एक सतत समस्या है जो दिन और दिन में होती है. चीफ जस्टिस ने पूरा क्या सेवा संबंधी शिकायतों के लिए एक जनहित याचिका का उल्लेख किया जा सकता है?
विक्रम ननकानी ने कहा कि यह केवल सेवा शर्तों के बारे में नहीं बल्कि हस्तक्षेप के बारे में है. ननकानी ने आगे कहा कि मैं अपने ट्रांसफर ऑर्डर को चुनौती नहीं दे रहा हूं. चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर आप हमसे कोई अंतरिम राहत चाहते हैं तो आपको हमें इन बिंदुओं पर संतुष्ट करना होगा. विक्रम नानकानी ने कहा कि इस याचिका का स्थानांतरण आदेश से कोई लेना-देना नहीं है.
चीफ जस्टिस ने कहा कि यदि राज्य सरकार सहमति नहीं देती है, तो क्या HC के पास इसे CBI को सौंपने की शक्ति है? पहले के मामले में यह संवैधानिक पीठ के पास गया था. आप हमें एक निर्णय दिखाएं जो कहता है कि यदि कोई एफआईआर नहीं है तो भी HC एफआईआर और फिर प्रत्यक्ष जांच कार सकता है. हमें वह हिस्सा दिखाएं जो कहता है कि हम एक एफआईआर को निर्देशित कर सकते हैं.
चीफ जस्टिस ने कहा कि क्या आप हमें एक शिकायत दिखा सकते हैं जो आप से सीधे डिमांड की गई हो? कल कोई भी यहां खड़ा चीफ जस्टिस पर आरोप लगा सकता है क्या हम किसी की सुनी सुनाई बात पर भरोसा कर सकते हैं? विक्रम ननकानी ने कहा सर, ये सब अफसर हैं. चीफ जस्टिस ने पूछा क्या किसी ने शपथपत्र दिया है? विक्रम ननकानी बोले सांसद डेलकर का मामले में सीधे बात हुई है.
जज ने कहा कि संजय पाटिल का कोई हलफनामा नहीं है..तो भी आपने जो भी कहा है उसे सही मानते हुए, क्या आप कानून के सिद्धांत का समर्थन करते हैं कि किसी एफआईआर के बिना जांच नहीं हो सकती.. जज ने कहा कि हम ललितकुमारी से पढ़ रहे हैं. जज ने कहा कि संजय पाटिल का कोई हलफनामा नहीं है..तो भी आपने जो भी कहा है उसे सही मानते हुए, क्या आप कानून के सिद्धांत का समर्थन करते हैं कि किसी एफआईआर के बिना जांच नहीं हो सकती..जज ने कहा कि हम ललितकुमारी से पढ़ रहे हैं.
AG कुंभकोनी एक फैसले से पढ़ते हुए कहा, "अदालत द्वारा जांच शुरू करने के लिए निर्देश देना उचित नहीं है." AG ने एक और फैसले से से उद्धृत करते हुए कहा कि इसमें "स्वच्छ हृदय, स्वच्छ मन" की बात की गई है. लेकिन यहां हाथ और दिमाग दोनों गंदे हैं. AG ने रश्मी शुक्ला की टॉप सीक्रेट कॉपी जोड़ने पर पूछा इन्हें ये कॉपी कहाँ से मिली ? चीफ जस्टिस ने याद दिलाया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई थी. मीडिया में कॉपी सर्कुलेट हुई थी.

आगरा / शौर्यपथ / उत्तर प्रदेश के आगरा से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. जहां 3 लोगों ने महिला के पति के सामने ही उसके साथ गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया. महिला ने एत्मादपुर थाने में तहरीर दी है, जिसमें दो नामजद और एक अज्ञात युवक पर जंगल में ले जाकर गैंगरेप का आरोप लगाया. पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है.
इस मामले में एसपी ग्रामीण ने बताया कि महिला ने थाने में तहरीर दी है कि तीन लोगों ने उसके साथ गैंगरेप और लूटपाट की घटना को अंजाम दिया है. इस मामले पर एसपी आर ए वेस्ट सत्यजीत गुप्ता ने बताया कि पीड़िता की तहरीर पर सामूहिक दुष्कर्म, लूट और जान से मारने की धमकी की धारा में मुकदमा दर्ज किया गया है. पीड़िता को मेडिकल के लिए भेजा है. आरोपियों की गिफ्तारी के लिए टीम गठित कर दी गई है. आरोपी घरों पर नहीं मिले हैं, उन्हें जल्द से जल्द पकड़ लिया जाएगा.
मंगलवार दोपहर को दो बजे पीड़ित पति-पत्नी छलेसर चौकी पर आए. घटना की जानकारी दी. एसपी आरए सत्यजीत गुप्ता, सीओ एत्मादपुर अर्चना सिंह ने मौके पर पहुंचकर जांच की.
पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उसका मायका एत्माद्दौला इलाके में है और ससुराल एत्मादपुर है. सोमवार शाम छह बजे के आसपास वो अपने पति के साथ बाइक पर मायके जा रही थी. रास्ते में तीन युवकों ने उनका रास्ता रोक लिया, मारपीट करने के बाद जबरदस्ती वो हम दोनों को झाड़ियों में खींचकर ले गए. जहां उन्होंने हमारे कपड़े उतरवाए और पति के सामने ही एक के बाद एक ने रेप किया. इतना ही नहीं घटना का वीडियो भी बनाया. उनके पास से 10 हजार रुपये, कान के झुमके और सामान लूटकर फरार हो गए.
पुलिस इस मामले की जांच में जुट गई है और जल्द से जल्द आरोपियों को पकड़ने का दावा कर रही है. लेकिन घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की सारी पोल खोलकर रख दी है. इस घटना के बाद से महिला और उसका पति दहशत में है.

चेन्नई / शौर्यपथ / तमिलनाडु में छह अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव में चेन्नई की थाउजंड लाइट्स सीट पर मुकाबला द्रविड़ विचारधारा के कट्टर समर्थक, द्रमुक उम्मीदवार एवं पेशे से डॉक्टर एन इझिलान और भाजपा की प्रत्याशी एवं अभिनेत्री खुशबू सुंदर से है. सबसे रोचक बात है कि सभी प्रमुख पार्टियों- द्रमुक, भाजपा, एमएमके, अभिनिय से राजनीति में आए कमल हासन की पार्टी एमएनएम और अभिनय से ही राजनीति में आए सीमन की पार्टी नाम तमिझर कात्ची (एनटीके)- ने यहां ऐसे उम्मीदवार उतारे हैं जो पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं एवं जिन्हें तमिल में ‘अयिरम विलक्कू' कहा जाता है. खुशबू सुंदर लंबे समय से सक्रिय राजनीति में हैं और भगवा पार्टी में आने से पहले वह द्रमुक और कांग्रेस की सदस्य रह चुकी हैं लेकिन पहली बार वह चुनावी मैदान में है.
स्टार की ताकत या वैचारिक लड़ाई से अधिक यहां विकास के मुद्दे पर लड़ाई होती दिख रही है. सुंदर और इझिलान दोनों ही जनता से मिल रहे हैं और निर्वाचन क्षेत्र में और सुविधाओं और विकास का वादा कर रहे हैं. चेन्नई मध्य लोकसभा सीट का हिस्सा थाउजंड लाइ्ट्स सीट की पहचान बहुसांस्कृतिक है लेकिन यहां अमीरी एवं गरीबी की खाई भी दिखाई देती है. इस सीट में कई शानदार वाणिज्यिक इमारतें एवं अभिनेताओं, राजनेताओं के घर हैं, इसके साथ ही अच्छी तादाद में यहां झुग्गियां एवं हाउसिंग बोर्ड के जर्जर हो चुके अपार्टमेंट भी हैं.
आम सुविधाएं एवं स्थायी अवसंरचना इस इलाके के लोगों की लंबे समय से मांग रही है. सुंदर के यहां से मैदान में होने की वजह से यह सीट ‘स्टार' निर्वाचन क्षेत्र की श्रेणी में आ गया है और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी उनका प्रचार कर रही हैं. उन्हें उम्मीद है कि वह इस क्षेत्र के लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला सकेंगी.
प्रचार के दौरान सुंदर सब्र के साथ लोगों की समस्याओं को सुनती हैं और सड़क, पेयजल और नालियों की सुविधा को सुधारने का भरोसा देती है. पेयजल के साथ सीवर का पानी मिलने की एक समस्या है जिसका यहां के लोग सामना कर रहे हैं. भाजपा यहां पर अन्नाद्रमुक के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है. सुंदर के प्रतिद्वंद्वी इझिलान की भी योजना इस निर्वाचन क्षेत्र में खेल के मैदान एवं सामुदायिक सभागार मुहैया कराने की है. वह थाउजंड लाइट्स में पुस्ताकालय और इको-पार्क बनवाने को भी कृत संकल्प हैं.
अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम (एएमएमके)के प्रत्याशी एन वैद्यनाथन प्रेशर कुकर के चुनाव चिह्न पर मैदान में हैं और दोनों द्रविड पार्टियों पर इस निर्वाचन क्षेत्र के विकास को नजर अंदाज करने का आरोप लगा रहे हैं. एएमएमके के अध्यक्ष टीटीवी दिनाकरण है. एमएनएम प्रत्याशी केएम शरीफ और एनटीके की एजे शिरीन भी सुंदर, इझिलान एवं वैद्यनाथन की तरह पहली बार चुनावी मैदान में हैं. थाउजंड लाइ्टस सीट सुर्खियों में है क्योंकि द्रमुक अध्यक्ष एमके स्टालिन ने इस सीट का वर्ष 1989, 1996, 2001,20016 में प्रतिनिधित्व किया था. थाउजंड लाइट्स निर्वाचन क्षेत्र में 2.42 लाख मतदाता है और 20 प्रत्याशी इस सीट से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं.

नवादा / शौर्यपथ / बिहार के नवादा जिले के सदर प्रखंड के भदौनी पंचायत के गोंदापुर और खरीदीविगहा गांव में पिछले 48 घंटे के भीतर छह से अधिक लोगों की मौत हो गई है. जबकि सात लोग गंभीर रूप से बीमार हैं, जिन्हें पटना रेफर किया गया है. मौत के कारणों की अधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. हालांकि मृतक शक्ति सिंह के परिजन ने बताया कि जहरीली शराब पीने के कारण उनके परिजन की मौत हुई है. उन्होंने कहा कि कल शाम सोए उसके बाद नहीं उठे.
भदौनी पंचायत की मुखिया आब्दा आजमी और राजद के पूर्व नेता प्रिंस तमन्ना ने कहा कि दो दिनों के भीतर जहरीली शराब पीने के कारण कई लोगों की मौत हुई है. मृतकों के परिजनों को 20-20 लाख रूपए और उनके आश्रित को नौकरी देने की मांग की है. उन्होंने कहा है कि पुलिस प्रशासन की लापरवाही से मौत हुई है. अवैध ढंग से खुले आम जहरीली शराब की बिक्री होती रही है, जिसके चलते लोगों की जान गई है.
भदौनी पंचायत के गोंदापुर निवासी अजय यादव, रामदेव यादव, लोहा सिंह, शक्ति सिंह, शैलेंद्र यादव, टमाटर कुमार गुप्ता की मौत होने की सूचना है, जबकि सात से अधिक लोग बीमार हैं, जिन्हें पटना भेजा गया है. हालांकि अधिकतर मृतक के परिजन बोलने से परहेज कर रहे हैं, हालांकि सदर अस्पताल में किसी पीड़ित को नहीं दाखिल कराया गया है. वहीं, पुलिस प्रशासन मामले की जांच कर रही है.

नई दिल्ली / शौर्यपथ / कैबिनेट ने बुधवार को फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के लिए प्रोडक्शन लिंक स्कीम को मंजूरी दे दी है. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने बुधवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि कैबिनेट ने फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम के लिए 10,900 करोड रुपए इंसेंटिव या सब्सिडी के तौर पर देने को मंजूरी दी है. इस मौके पर केंद्रीय वाणिज्‍य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से लाए गए तीन कृषि कानूनों को लेकर कुछ लोगों ने किसानों को भ्रमित करने की कोशिश की है और एक नेगेटिव माहौल बनाने की कोशिश की है लेकिन आज देश के किसान समझ गए हैं कि नए कानून उनके लिए सिर्फ एक विकल्प है.
उन्‍होंने कहा क‍ि यह कानून किसानों के हित में बनाए गए हैं और इस संदर्भ में देश में फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में कैसे निवेश बढ़े, ग्लोबल प्लेयर्स भारत के फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में ज्यादा निवेश करें, इसका रास्ता प्रोडक्शन लिंग इंसेंटिव स्कीम से खुला है. फूड प्रोसेसिंग सेक्टर के लिए प्रोडक्शन लिंक इंसेंटिव स्कीम से करीब ढाई लाख रोजगार के अवसर पैदा होंगे

नई दिल्ली / शौर्यपथ / रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने रिकरिंग कार्ड पेमेंट में बड़ी राहत दी है. RBI ने एडीशनल ऑथेन्टिकेशन की डेडलाइन 30 सितंबर तक बढ़ाने का फैसला किया है.नए नियम के अंतर्गत, जिसे एक अप्रैल 2021 से लागू किया जाना था, आवर्ती लेनदेन को आगे बढ़ाने के लिए कस्‍टमर को एडीशनल ऑथेन्टिकेशन की जरूरत होती.
शुरुआत में इस नियम को 2,000 रुपये तक के आवर्ती लेनदेन के लिए लागू करने की योजना बनाई गई थी लेकिन आरबीआई ने दिसंबर में घोषणा की थी कि हितधारकों के आग्रह पर इस सीमा को 5000 रुपये तक बढ़ा दिया गया है. इस सीमा से अधिक के ट्रांजेक्‍शन को एडीशनल वनटाइम पासवर्ड की जरूरत होगी.आरबीआई ने अगस्‍त 2019 में सभी वाणिज्यिक बैंकों, कार्ड पेमेंट नेटवर्क और नेशनल पेमेंट कार्पोरेशन ऑफ इंडिया को आवर्ती लेनदेन के लिए इस बड़े बदलाव के बारे में सूचित किया था.यह नियम न केवल बैंकों और क्रेडिट-डेविट कार्ड व अन्‍य प्रीप्रेड पेमेंट इंस्‍ट्रुमेंट ऑफर करने वाले वित्‍तीय संस्‍थानों बल्कि मोबाइल पेमेंट वालेट्स और यूपीआई बेस्‍ड पेमेंट को सक्षम बनाने वाले साधनों पर लागू होगा

नंदीग्राम (पश्चिम बंगाल)/शौर्यपथ / निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले में नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र में बुधवार को सीआरपीसी की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी. इस हाई प्रोफाइल सीट पर गुरुवार को मतदान होगा. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इसके अलावा ईसी ने एक हेलीकॉप्टर की मदद से इलाके में निगरानी भी शुरू कर दी है. उन्होंने बताया कि निर्वाचन क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए जो लोग नंदीग्राम के मतदाता नहीं हैं उन्हें क्षेत्र में प्रवेश करने नहीं दिया जा रहा है.
अधिकारी ने बताया, ‘नंदीग्राम संवेदनशील निर्वाचन क्षेत्र है जहां ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी जैसे हाई प्रोफाइल उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं. हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि कानून एवं व्यवस्था की स्थिति बिगड़े नहीं और लोग बिना किसी डर के मतदान कर सकें.' उन्होंने कहा, ‘‘निषेधाज्ञा लगाने की यही वजह है जो शुक्रवार आधी रात तक लागू रहेगी. जो व्यक्ति नंदीग्राम का मतदाता नहीं होगा उसे मतदान खत्म होने तक इलाके में प्रवेश करने नहीं दिया जाएगा.''
उन्होंने बताया कि धारा 144 लागू होने से पांच या उससे अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर पाबंदी है.अधिकारी ने बताया कि इस निर्वाचन क्षेत्र में केंद्रीय बलों की 22 टुकड़ियों को तैनात किया जा रहा है. इस क्षेत्र में कुल 355 मतदान केंद्र हैं और इनमें से 75 प्रतिशत केंद्रों पर वेबकास्ट की सुविधा है. उन्होंने बताया कि राज्य पुलिस के साथ मिल कर केंद्रीय बलों ने इलाके में अहम स्थानों पर वाहनों की जांच शुरू कर दी है.

उन्होंने कहा, ‘‘नंदीग्राम में प्रवेश करने देने से पहले वाहनों की अच्छे से तलाशी ली जाएगी. बाहर के किसी वाहन को प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा.'' साथ ही उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति बाधा डालने की कोशिश करता पाया गया तो ‘‘उससे सख्ती से निपटा जाएगा.' अधिकारी ने बताया कि ईसी ने मतदान वाले दिन इलाके में 22 कर्मियों का त्वरित प्रतिक्रिया दल (क्यूआरटी) तैनात करने का भी फैसला किया है.
उन्होंने बताया कि ईसी ने अधिकारियों का एक दल भी गठित किया है जो मतदान वाले दिन नंदीग्राम में चुनावी प्रक्रिया पर नजर रखेगा.
उन्होंने कहा कि ईसी ने स्थानीय अधिकारियों से बुधवार रात तक सभी लंबित गिरफ्तारी वारंट लागू करने को भी कहा है और विभिन्न मामलों में आरोपी लोगों को हिरासत में लेने को कहा है.
नंदीग्राम में वीरानी छाई हुई और केवल कुछ ही दुकानें खुली हुई हैं. ई-रिक्शा और ऑटो जैसे वाहन नहीं चल रहे हैं और लोग घरों में हैं. सोनाचूरा के एक निवासी ने कहा, ‘‘हम एक अप्रैल को यहां शांतिपूर्ण मतदान चाहते हैं. लोगों को शांतिपूर्ण माहौल मिलना चाहिए ताकि वे बिना किसी डर के अपने वोट डाल सकें.''

कोलकाता / एजेंसी / तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने कांग्रेस की कार्यकारी अध्‍यक्ष सोनिया गांधी और विपक्ष के अन्‍य नेताओं को पत्र लिखा है. इस पत्र में ममता ने लिखा है कि लोकतंत्र पर बीजेपी के हमलों के खिलाफ पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव के बाद साझा संघर्ष करने का वक्‍त आ गया है. ममता का यह लेटर ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं. सख्‍त शब्‍दों वाले करीब सात पेज के इस लेटर में कहा गया है कि समय आ गया है कि बीजेपी की ओर से लोकतंत्र और संविधान पर किए जा रहे 'हमले' के खिलाफ एकजुट होकर प्रभावी तरीके से संघर्ष किया जाए और देश के लोगों के सामने विश्‍वसनीय विकल्‍प पेश किया जाए .विवादित नए कानून जो केंद्र के प्रतिनिधि, दिल्‍ली के उप राज्‍यपाल को दिल्‍ली की चुनी हुई सरकार के खिलाफ अधिकार देता है, के साथ ही ममता ने ऐसी सात घटनाओं का जिक्र किया है जिसे वे लोकतंत्र और संघीय ढांचे पर बीजेपी का हमला मानती हैं.
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के पत्र में कहा गया है कि गैर-भाजपा दलों द्वारा शासित राज्यों में केंद्र, राज्यपाल के कार्यालय का दुरुपयोग कर निर्वाचित सरकारों के लिए समस्याएं पैदा कर रहा है. ममता ने यह भी लिखा है कि NCT विधेयक का पारित होना एक ‘‘गंभीर विषय'' है और भाजपा सरकार ने लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित सरकार की सभी शक्तियों को छीन लिया है.एनसीटी एक्‍ट का जिक्र करते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने लिखा कि उप राज्यपाल को दिल्ली का अघोषित वायसराय बना दिया गया, जो गृह मंत्री और प्रधानमंत्री के लिए एक प्रतिनिधि (प्रॉक्सी) के रूप में काम कर रहे हैं.
सोनिया गांधी के अलावा यह पत्र एनसीपी अध्‍यक्ष शरद पवार, डीएमके के स्‍टालिन, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे, वायएसआर कांग्रेस प्रमुख जगनमोहन रेड्डी, बीजेडी प्रमुख नवीन पटनायक, तेलंगाना राष्‍ट्र समिति के प्रमुख के चंद्रशेखर राव, समाजवादी पार्टी के अध्‍यक्ष अखिलेश यादव, राष्‍ट्रीय जनता दल के तेजस्‍वी यादव और आम आदमी पार्टी के संयोजन अरविंद केजरीवाल को भी भेजा गया है. खास बात यह है कि माकपा और भाकपा को पत्र नहीं भेजा गया है .

शोर्यपथ खास । UPSC यानी यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (Union Public Service Commission) जैसा की नाम से ही प्रतीत होता है, यह परीक्षा कितना मुश्किल होता है। लेकिन फिर भी हर साल लाखों की तादाद में लोग इस परीक्षा के लिए फॉर्म भरते हैं और इस परीक्षा में सफल होने वाले लोग IAS, IPS और IFS जैसे पदों पर कार्यरत होते हैं। लेकिन बहुत से लोग IAS और IPS को एक ही मान लेते हैं और उन्हें इनके बीच के अंतर की जानकारी नहीं होती। इसलिए आज हम आपको यह बताने वाले हैं कि IAS और IPS किसे कहते हैं, इनमें से कौन-सा पोस्ट ऊंचा होता है, इनके बीच क्या अंतर होता है, ये किस पद पर कार्यरत हो सकते हैं या फिर इनकी सैलरी कितनी होती है इत्यादि के बारे में।
कौन हो सकता है आईएएस -
IAS जिसका फुल फॉर्म इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (Indian Administrative Service) है। UPSC की परीक्षा में ज़्यादा नंबर आने पर IAS पोस्ट प्राप्त होता है जिसके जरिए आप ब्यूरोक्रेसी में प्रवेश करते हैं। IAS के लिए चुने गए लोगों को विभिन्न मंत्रालयों या जिलों का मुखिया बनाया जाता है।
कौन हो सकता है आईपीएस -
वहीं IPS यानी इंडियन पुलिस सर्विस (Indian police service) के द्वारा आप पुलिस यूनिट के बड़े-बड़े अफसरों में शामिल होते हैं। इसमें अगर पोस्ट की बात की जाए तो आप ट्रेनी आईपीएस से डीजीपी या इंटेलिजेंस ब्यूरो, सीबीआई चीफ तक भी पहुँच सकते हैं। बता दें, यूपीएससी परीक्षा में 3 लेवल- प्रीलिम्स, मेंस और इंटरव्यू होता है.
एक आईएएस और आईपीएस में क्या अंतर होता है -
IAS और IPS में अंतर की बात करे तो इन दोनों में सबसे पहला अंतर होता है कि एक IAS हमेशा फॉर्मल ड्रेस में रहते हैं जिनका कोई ड्रेस कोड नहीं होता। तो वहीं, एक IPS को ड्यूटी के दौरान वर्दी पहनना अनिवार्य होता है। दूसरा अंतर है कि एक IAS अपने साथ एक या दो बॉडीगार्ड रख सकते हैं लेकिन एक IPS के साथ पूरी की पूरी पुलिस फोर्स चलती है। एक IAS को मेडल से सम्मानित किया जाता है तो वहीं एक IPS को “स्वॉर्ड ऑफ़ ऑनर अवार्ड” से नवाज़ा जाता है।
आईएएस और आईपीएस के क्या कार्य होते हैं -
बात अगर IAS और IPS के काम के बारे में की जाए तो एक IAS के कंधे पर पूरे लोक प्रशासन, नीति निर्माण और कार्यान्वयन की जिम्मेदारी होती है। तो वहीं एक IPS अपने क्षेत्र की कानून व्यवस्था बनाए रखने और अ पराधों को रोकने की जिम्मेदारियों को पूरी करता है।
कितनी होती है इनकी सैलरी -
एक IAS अफसर के कंधे पर ढेर सारी जिम्मेदारियाँ होती हैं। उन्हें सरकारी विभाग और कई मंत्रालयों का कार्य संभालना होता है और एक IPS अधिकारी को सिर्फ़ पुलिस विभाग में काम करना होता है। इनके काम और इनके जिम्मेदारियों को देखते हुए इनकी सैलरी निर्धारित की जाती है। दोनों की सैलरी में बहुत कम अंतर होता है। सातवें पे कमीशन के बाद एक IAS अधिकारी का वेतन 56,100 से 2.5 लाख प्रति माह होता है। इसके साथ ही उन्हें और भी कई सुविधाएँ मुहैया कराई जाती हैं। तो वहीं दूसरी ओर एक IPS अधिकारी की सैलरी प्रति माह 56,100 से लेकर 2,25,000 मिलते हैं। इन्हें भी कई सारी सुविधाएँ दी जाती हैं।
कौन ज्यादा शक्तिशाली होता है -
यहाँ एक और बात जानना बहुत आवश्यक है कि एक क्षेत्र में सिर्फ़ एक ही IAS होते हैं तो वही दूसरी ओर एक क्षेत्र में एक से अधिक IPS भी हो सकते हैं। IAS को उच्च पद का होने के कारण किसी भी जिले का डीएम बनाया जाता है तो वहीं उससे नीचे पद का होने के कारण IPS को जिले का एसपी बनाया जाता है। एक IAS और एक IPS दोनों UPSC परीक्षा के द्वारा ही आते हैं लेकिन सिर्फ़ रैंक ऊपर नीचे होने के कारण किसी को IAS का पद मिलता है तो किसी को IPS का। इन दोनों में IAS का पद ऊंचा होता है। एक IAS अगर डीएम बनता है तो वह पुलिस विभाग के साथ-साथ और भी कई विभागों का हेड होता है इसलिए इनके पास पावर ज़्यादा होता है और एक IPS को सिर्फ़ अपने पुलिस विभाग का काम देखना पड़ता है। इस तरह इस आर्टिकल के माध्यम से हमने आपको बताया कि एक आईएएस और एक आईपीएस में क्या फ़र्क़ होता है? इसके साथ ही आपको बताया इनके कार्यों को उनके वेतन और इनसे जुड़ी ढेर सारी बातों को।

हमारा शौर्य

हमारे बारे मे

whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
 
CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
CONTECT NO.  -  8962936808
EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)