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April 15, 2026
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भारत

भारत (993)

राज्य में टेस्टिंग की संख्या बढ़ी, ट्रेसिंग में भी तेजी
पॉजिटिविटी रेट में निरंतर कमी, मरीजों की संख्या घट रही
ग्रामीण क्षेत्रों में टीमें तैनात कर दिया जा रहा विशेष ध्यान
अस्तपालों में बेड की उपलब्धता की गई है आनलाइन
राज्य में आक्सीजन की कमी नहीं
वैक्सीनेशन की कमी को दूर करने का अनुरोध
आक्सीजन की पर्याप्त उपलब्धता को देखते हुए उद्योगों को 80ः20 के अनुपात में आक्सीजन उपलब्ध कराने का भी अनुरोध
प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री की दोनों मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का दिया आश्वासन

रायपुर / शौर्यपथ / प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज दूरभाष पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से प्रदेश में कोविड-19 के संबंध में विस्तृत चर्चा की। मुख्यमंत्री भूपेश बघले ने प्रधानमंत्री से कहा कि कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए उनके और केन्द्र सरकार द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशोें का छत्तीसगढ़ द्वारा पूरा पालन किया जा रहा है। राज्य में टेस्टिंग की संख्या में बढ़ोतरी की गई है। ट्रेसिंग में भी तेजी आई है। पॉजिटिविटी दर में निरंतर कमी आ रही है, मरीजों की संख्या घट रही है। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जिन इलाकों में अभी भी केस बढ़ रहे हैं वहां अतिरिक्त टीमें लगायी गई हैं।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को यह भी जानकारी दी कि प्रदेश में शासकीय और निजी कोविड अस्पतालों और केयर सेंटरों के बेडों की पूरी जानकारी को आनलाईन किया गया है ताकि कोई भी व्यक्ति आसानी से इनका लाभ ले सके। मुख्यमंत्री बघेल ने प्रधानमंत्री का राज्य में वैक्सीनेशन की कमी की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री से यह भी अनुरोध किया कि चूकि वर्तमान में आक्सीजन की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध है कि अतः 80 प्रतिशत अस्पतालों को और 20 प्रतिशत छोटे-मोटे उद्योगों को उपलब्ध कराने की मंजूरी दी जाए ताकि ये उद्योग भी अपना काम प्रारंभ कर सके। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उक्त दोनो मांगों पर सहानुभूति पूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया है।

• होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों को रेमेडेसिवीर इंजेक्शन इस्तेमाल नहीं करने की सलाह
• मरीज की देखभाल करने वालों को भी सतर्क रहने की जरूरत
• सांस लेने में दिक्कत, छाती में दर्द एवं ऑक्सीजन स्तर 94 से कम होने पर ही अस्पताल जाने की सलाह
• कम से कम 10 दिन होम आईसोलेशन में रहना जरुरी
• मास्क के भींगने पर तुरंत बदल लें मास्क, आठ घंटे से अधिक नहीं करें इस्तेमाल

 

रायपुर / शौर्यपथ / पिछले साल 2 जुलाई को केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने कोविड-19 के माइल्ड (हल्के) एवं बिना लक्षण वाले मरीजों के लिए होम आईसोलेशन की सलाह दी थी एवं इसको लेकर दिशा-निर्देश भी जारी किया था. इस वर्ष पूरे देश में कोरोना की दूसरी लहर के कारण संक्रमण के स्वरुप में काफ़ी बदलाव देखने को मिल रहे हैं. इसे ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने होम आईसोलेशन के लिए संशोधित दिशा-निर्देश जारी किया है, जिसमें होम आईसोलेशन के लिए मरीजों की योग्यता, होम आईसोलेशन में मरीजों द्वारा ध्यान देने योग्य बातें, मरीजों की देखभाल करने वाले लोगों के लिए सलाह, चिकित्सकीय सलाह एवं अस्पताल में भर्ती होने की परिस्थितियों सहित होम आईसोलेशन में जरुरी ईलाज आदि बातों की विस्तार से जानकारी दी गयी है.
गाइडलाइन में कहा गया है कि माइल्ड या बिना लक्षण(असिम्टोमेटिक) वाले रोगी ही होम आइसोलेशन के लिए योग्य हैं. माइल्ड लक्षण वाले रोगियों को बुखार, कफ, खांसी, नाक बहना या बदं होना, सिरदर्द, थकान आदि रहता है.
चिकित्सा पदाधिकारी की सलाह के बाद होम आइसोलेशन:
गाइडलाइन में कहा गया है कि चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा कोरोना संक्रमित मरीज में माइल्ड अथवा बिना लक्षणों की पुष्टि किये जाने के बाद रोगी को होम आइसोलेशन में रहना चाहिए. सेल्फ आइसोलेशन के दौरान ऐसे रोगियों के लिए हरसमय एक देखभालकर्ता को मौजूद होना जरूरी है. होम आइसोलेशन के दौरान रोगी के स्वास्थ्य के निगरानी व अद्यतन जानकारी देने के लिए देखभालकर्ता को अस्पताल के साथ संवाद बनाये रखना बहुत जरूरी है. वैसे कोविड मरीज जिनकी उम्र 60 साल से अधिक है तथा हाइपरटेंशन, मधुमेह तथा लंग, लीवर, किडनी तथा तंत्रिका तंत्र से जुड़े गंभीर रोग से ग्रसित हैं उन्हें चिकित्सा पदाधिकारी के निर्देश व सलाह के बाद ही होम आइसोलेशन में रखा जाना चाहिए.
इन मरीजों को होम आइसोलेशन में नहीं रखने की सलाह:
गाइडलाइन में कहा गया है कि होम आइसोलेशन के दौरान रेमेडिसिविर का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करना है. इसके साथ ही यह जानकारी दी गयी है कि वैसे रोगी जिनका अंग प्रत्यारोपण हुआ हो, एचआइवी ग्रसित हों या फिर कैंसर थेरेपी आदि हुआ है उन्हें होम आइसोलेशन में नहीं रखा जाना चाहिए. ऐसे मरीजों के लिए चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा सभी जांच के बाद ही होम आइसोलेशन में रखे जाने की सलाह दी गयी है. कोविड रोगी के देखभाल करने वाले व उनके संपर्क में आने वाले सभी लोगों को तीन लेयर वाले मास्क का इस्तेमाल करें.
कोविड रोगी एवं देखभालकर्ता इन बातों का रखें ध्यान:
गाइडलाइन में कोविड रोगी को घर के एक कमरे में रहने तथा विशेषतौर पर परिवार में मौजूद गंभीर रोगों से ग्रसित लोगों से दूरी बनाकर रहने के लिए कहा गया है. साथ ही कमरे में पर्याप्त फ्रेश हवा की मौजूदगी एवं इसके लिए वेंटिलेशन का पूरा ध्यान रखने की सलाह दी गयी है. कमरे में देखभालकर्ता तथा रोगी दोनों तीन लेयर के मास्क इस्तेमाल करने की सलाह दी गयी है. साथ ही अधिकतम आठ घंटे तक ही एक मास्क का इस्तेमाल करने की बात कही गयी है. मास्क के भींग जाने के बाद उसे तुरंत बदल लें. देखभालकर्ता को मरीज से शारीरिक दूरी, नियमित अन्तराल पर हाथों की सफ़ाई एवं रोगी के द्वारा इस्तेमाल की जा रही चीजों का घर के अन्य सदस्यों से दूर रखने की हिदायत भी दी गयी है. गाइडलाइन में मास्क एवं अन्य चीजों के सुरक्षित डिस्पोजल की भी सलाह दी गयी है.
इन परिस्थितियों में चिकित्सकीय सलाह जरुरी:
·सांस लेने में तकलीफ़ होने पर
·ऑक्सीजन का स्तर 94 से कम होने पर
·छाती में लगातार दर्द का बने रहना या अचानक बढ़ जाना
·मानसिक रूप से अधिक परेशान होने पर
10 दिन बाद आ सकते हैं आइसोलेशन से बाहर:
होम आइसोलेशन में रहने वाले रोगी 10 दिनों के बाद बाहर आ सकते हैं. होम आइसोलेशन से बाहर आने के बाद जांच की कोई आवश्यकता नहीं होती है. होम आइसोलेशन के दौरान रोगी अधिक से अधिक आराम करें और खूब पानी पीकर शरीर में पानी की मात्रा को बढ़ायें. श्वसन संबंधी सुरक्षा तथा व्यवहार के नियमों का पालन करें. साबुन पानी से हाथों को नियमित रूप से 40 सेकेंड तक अवश्य धोंयें. व्यक्तिगत इस्तेमाल वाली चीजें साझा नहीं करें. रोगी के कमरे को एक प्रति हाइपोक्लोराइट से टेबल, दरवाजे, आदि साफ करें. कोविड के माइल्ड लक्षण वाले रोगी अपने शरीर के आॅक्सीजन स्तर की निगरानी करते रहें.

रायपुर / शौर्यपथ / भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने दूरभाष पर राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके से चर्चा कर प्रदेश में कोरोना संक्रमण की स्थिति तथा वैक्सीनेशन की स्थिति की जानकारी ली । उन्होंने कहा कि प्रदेश में कोविड संक्रमण की स्थिति को देखते हुए इस संकट से निपटने के लिये प्रदेश में निवासरत सेना के भूतपूर्व चिकित्सकों, नर्स, लैब टैक्नेशियन एवं भूतपूर्व सैनिकों की सेवाये ली जा सकती हैं। इसके साथ ही साथ स्काउट गाईड, एनएसएस के स्वंयसेवक, एनसीसी केडेटों की भी सेवाएं ली जा सकता है। इसके लिये संबंधितों के साथ वर्चुअल बैठक कर सुझाव एवं सहयोग लिया जा सकता है। रक्षामंत्री ने कहा है कि इस संबंध में प्रदेश के मुख्यमंत्री से चर्चा करें और उन्हें इस सुझाव से अवगत करावें।

इसके उपरांत राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल से फोन पर चर्चा कर रक्षामंत्री के इन सुझावों एवं निर्देशों से अवगत कराते हुए कहा कि सेना के इन पूर्व कर्मियों से सहयोग प्राप्त करने के लिये इनके प्रमुखों के साथ वर्चुअल मीटिंग लेकर इनके सुझाव प्राप्त किया जाए ताकि प्रदेश में कोरोना संक्रमण से उत्पन्न संकट से निपटने में सहायता मिल सके। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कहा कि भूतपूर्व सेना कर्मियों का कोरोनो संकट काल में सहयोग लेने का सुझाव बहुत अच्छा है और संकट की स्थिति से निपटने में उपयोगी हो सकता है। राज्यपाल सुश्री उइके ने मुख्यमंत्री श्री बघेल से भूतपूर्व सैनिकों और सैन्य सेवा में रहे पूर्व चिकित्सकों के साथ शीघ्र वर्चुअल बैठक आयोजित कर सहयोग की कार्ययोजना तैयार कर प्रभावी रूप से क्रियान्वयन कराने की बात कही है।

रेडमेसिविर और अन्य जीवन रक्षक दवाईयों के उत्पादक राज्यों द्वारा अन्य राज्यों में भी प्राथमिकता से आपूर्ति के लिए मुख्यमंत्री ने गाइडलाइन जारी करने प्रधानमंत्री से किया अनुरोध
स्टील उद्योगों की ऑक्सीजन की आपूर्ति रुकने से हज़ारों लोगों का रोज़गार प्रभावित होगा, निर्णय पर पुनर्विचार की मांग
मुख्यमंत्री कोरोना नियंत्रण की व्यवस्था और टीकाकरण की प्रगति की समीक्षा के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित मुख्यमंत्रियों की वर्चुअल बैठक में हुए शामिल

रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से केंद्र सरकार को कोरोना के टीके मिलने की दर पर ही राज्यों को भी टीका उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि इससे राज्यों पर वित्तीय भार कम होगा। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य कर्मियों, फ्रंटलाइन वर्कर्स और 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के टीकाकरण के लिए प्रदेश को केंद्र सरकार से मिलने वाले वैक्सीन की आपूर्ति की समय सारणी से भी अवगत कराने का आग्रह किया है, जिससे राज्य में सभी पात्र लोगों के टीकाकरण की कार्ययोजना बनाई जा सके। मुख्यमंत्री बघेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ कोरोना नियंत्रण की व्यवस्था और टीकाकरण की प्रगति की वर्चुअल समीक्षा बैठक में यह अनुरोध किया। बैठक में स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव, गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू और मुख्य सचिव अमिताभ जैन भी शामिल हुए। वहीं नई दिल्ली में प्रधानमंत्री के साथ गृहमंत्री अमित शाह, रेल मंत्री पीयूष गोयल और नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी.के. पॉल भी मौजूद थे।
मुख्यमंत्री बघेल ने बैठक में प्रधानमंत्री से कहा कि जिस तरह से ऑक्सीजन उत्पादक राज्य अपनी जरूरत के बाद का अतिरिक्त आक्सीजन प्राथमिकता से दूसरे राज्यों को उपलब्ध करा रहे हैं। वैसे ही रेडमेसिविर और अन्य जीवन रक्षक दवाइयों के उत्पादक राज्य प्राथमिकता से इन्हें दूसरे राज्यों को भी उपलब्ध कराएं। इसके लिए भारत सरकार द्वारा गाइडलाइन जारी किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री से यह अनुरोध भी किया कि छत्तीसगढ़ में इस्पात उद्योगों की अधिकता को देखते हुए औद्योगिक ऑक्सीजन के उत्पादन और उसके उपयोग की अनुमति दी जाए, जिससे अर्थव्यवस्था पर विपरीत प्रभाव न पड़े और इन उद्योगों से जुड़े हज़ारों परिवारों के समक्ष रोज़गार का संकट न उत्पन्न हो।
मुख्यमंत्री बघेल ने कोरोना टीकाकरण की प्रगति के बारे में प्रधानमंत्री को बताया कि प्रदेश की 18 प्रतिशत आबादी को इसकी पहली खुराक दी जा चुकी है। उन्होंने जानकारी दी कि 90 प्रतिशत स्वास्थ्य कर्मियों, 84 प्रतिशत फ्रंटलाइन वर्कर्स और 45 वर्ष से अधिक के 69 प्रतिशत लोगों को कोरोना से बचाव का पहला टीका लगाया जा चुका है। उन्होंने बताया कि दूसरे राज्यों से कोरोना संक्रमितों का प्रवेश रोकने के लिए अंतर्राज्यीय सीमाओं, एयरपोर्ट, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों पर कोरोना की जांच की जा रही है।
मुख्यमंत्री बघेल ने बताया कि कोरोना मरीजों के इलाज के लिए अस्पतालों और कोविड केयर सेंटर्स में व्यवस्थाएं लगातार बढ़ाई जा रही हैं। निजी अस्पतालों में भी संक्रमितों के इलाज की दरें तय की गई हैं। चिकित्सा क्षेत्र में मानव संसाधन बढ़ाने के लिए सेवानिवृत्त डॉक्टरों और अन्य मेडिकल स्टाफ के साथ ही नए डॉक्टरों की भर्ती की जा रही है। रेडमेसिविर की कालाबाजारी रोकने और जरुरतमंदों तक इसे पहुंचाने के लिए व्यवस्था बनाई गई है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को अवगत कराया कि चिकित्सा विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों के साथ ही सभी नगरीय निकायों एवं पंचायतीराज संस्थाओं से लगातार चर्चा कर कोरोना प्रबंधन में उनकी सहायता ली जा रही है। डीएमएफ, सीएसआर, सांसद निधि विधायक निधि और महापौर निधि की राशियों का भी उपयोग कोविड-19 की रोकथाम के लिए व्यवस्थाएं विकसित करने में की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि छत्तीसगढ़ में ऑक्सीजन उत्पादन के लिए आठ नई औद्योगिक इकाइयों को लाइसेंस जारी किए गए हैं। प्रदेश में कुल 29 यूनिटों द्वारा मेडिकल ऑक्सीजन का उत्पादन किया जा रहा है। राज्य की जरूरत के बाद का अतिरिक्त ऑक्सीजन हम दूसरे राज्यों को भी दे रहे हैं। समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती रेणु जी. पिल्लै, मुख्यमंत्री के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला भी मौजूद थीं।

1 मई 2021 से राज्य में टीकाकरण का महा-अभियान होगा आरंभ
18 वर्ष से अधिक आयु वाले सभी नागरिकों के लिये वैक्सीन की राज्य सरकार द्वारा की जायेगी निःशुल्क व्यवस्था
बड़े पैमाने पर वैक्सीनेशन कार्यक्रम संचालित करने हेतु वृहद कार्य योजना तैयार करना आवश्यक
भारत सरकार की ओर से राज्य को माहवार प्रदाय की जाने वाली वैक्सीन की संख्या की मांगी जानकारी

रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर छत्तीसगढ़ में 18 वर्ष से अधिक आयु वाले सभी नागरिकों के लिये वैक्सीन की राज्य सरकार द्वारा निःशुल्क व्यवस्था करते हुए बड़े पैमाने पर वैक्सीनेशन कार्यक्रम संचालित करने हेतु वृहद कार्य योजना तैयार करने हेतु आवश्यक जानकारी प्रदान करने की मांग की है। उन्होंने मांग किया है कि वैक्सीन के लिए केन्द्र एवं राज्य सरकारों से समान दरें ली जाये।
मुख्यमंत्री ने पत्र में उल्लेख किया है कि भारत सरकार के 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों के 1 मई 2021 से वैक्सीनेशन किये जाने के निर्णय के परिपेक्ष्य में राज्य सरकार द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि भारत सरकार से प्राप्त होने वाली वैक्सीन के अतिरिक्त शेष 18 वर्ष से अधिक आयु वाले सभी नागरिकों के लिये वैक्सीन की व्यवस्था राज्य सरकार द्वारा निःशुल्क की जायेगी। बड़े पैमाने पर वैक्सीनेशन कार्यक्रम संचालित करने हेतु वृहद कार्य योजना तैयार करना आवश्यक है। 1 मई 2021 आने में 9 दिनों से भी कम समय शेष है। अतः भारत सरकार की ओर से राज्य को माहवार प्रदाय की जाने वाली वैक्सीन की संख्या, सीरम इन्स्टीट्यूट एवं भारत बायोटेक द्वारा राज्य को माहवार उपलब्ध करायी जाने वाली वैक्सीन की अनुमानित संख्या, सीरम इन्स्टीट्यूट एवं भारत बायोटेक द्वारा केन्द्र एवं राज्य सरकार को उपलब्ध करायी जाने वाली वैक्सीन की दरों के संबंध में भारत सरकार से त्वरित जानकारी अपेक्षित है।
मुख्यमंत्री बघेल ने पत्र में अनुरोध किया है कि केन्द्र एवं राज्य सरकारों से समान दरें ली जाये। चूंकि को-वैक्सीन भारत सरकार के सहयोग से विकसित की गयी है , अतः भारत बायोटेक द्वारा "सीरम" की तुलना में कम दरों पर वैक्सीन की आपूर्ति की जाये। चूंकि केन्द्र एवं राज्य सरकारें दोनों ही नागरिकों से करों के माध्यम से आय अर्जित करती है अतः वैक्सीन की दरें समान होना न्यायोचित होगा।
मुख्यमंत्री बघेल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से अनुरोध किया है कि उपरोक्त जानकारी शीघ्र उपलब्ध कराने हेतु सम्बन्धितो को निर्देशित करने का कष्ट करें ताकि राज्य सरकार इस हेतु आवश्यक बजट व्यवस्था, तकनीकी कर्मचारियों के प्रशिक्षण एवं अन्य आवश्यक तैयारी कर सकें। साथ ही 1 मई 2021 से ही राज्य में टीकाकरण का महा-अभियान आरंभ किया जा सके तथा निर्धारित समयावधि में सभी पात्र नागरिकों के टीकाकरण का कार्य पूर्ण किया जा सके।

गोरखपुर / शौर्यपथ / कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच केंद्र सरकार ने 18 साल से ऊपर के सभी नागरिकों को टीका लगवाने का ऐलान कर दिया है। एक मई से टीकाकरण का विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस बीच गोरखपुर से भाजपा विधायक डा.राधा मोहन दास अग्रवाल ने वैक्‍सीन की लागत और आम आदमी के लिए कंपनी द्वारा बताई जा रही उसकी कीमत को लेकर सवाल उठाया है। विधायक ने एक ट्वीट के जरिए कहा कि वैक्‍सीन कोविशील्‍ड को जिन कीमतों पर भारत सरकार, राज्‍य सरकार और आम नागरिकों को उपलब्‍ध कराने की बात कही गई है उसमें बड़ी विसंगति है।
पेशे से चिकित्‍सक, डा.राधा मोहन दास अग्रवाल ने बताया कि कंपनी ने कहा है कि भारत सरकार को यह वैक्‍सीन दो सौ रुपए, राज्‍य सरकार को चार सौ और जनता को छह सौ रुपए में दी जाएगी। कंपनी ने वैक्‍सीन की लागत 220 रुपए बताई है। जब कंपनी भारत सरकार को 200 रुपए में वैक्‍सीन दे सकती है तो जनता को छह सौ रुपए में क्‍यों देगी? क्‍या इस संकट काल में वैक्‍सीन से कमाई की सीमा नहीं तय होनी चाहिए? पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्‍ट्रीय संगठन महासचिव बीएल संतोष और स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री हर्षवर्धन को टैग करते हुए उन्‍होंने लिखा कि ऐसी फैक्‍ट्री का एपिडेमिक ऐक्ट में अधिग्रहण कर लेना चाहिए। विधायक ने कहा कि संकट काल में आखिर इन्‍हें कितना प्राफिट मार्जिन चाहिए। ( साभार हिन्दुस्तान टाइम्स )

नई दिल्ली / शौर्यपथ / भारत में कोरोना संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार राष्ट्र को संबोधित किया. पीएमओ की ओर से रात करीब 8 बजे संबोधन के संबंध में जानकारी दी गई. पीएम के संबोधन के लिए 8:45 का समय बताया गया. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'कोरोना के खिलाफ देश आज फिर एक बहुत बड़ी लड़ाई लड़ रहा है. कुछ समय पहले तक स्थितियां संभली हुई थीं, फिर ये कोरोना की दूसरी वेव तूफान बनकर आ गई. जो पीड़ा आपने सही है, जो आप सह रहे हैं, उसका मुझे पूरा अहसास है. जिन लोगों ने बीते दिनों में अपने को खोया है, मैं सभी देशवासियों की तरफ से संवेदनाएं प्रकट करता हूं. मैं आपके दुख मैं शामिल हूं. चुनौती बड़ी है लेकिन हमें मिलकर अपने संकल्प, अपने हौसले और तैयारी के साथ इसको पार करना है.'
पीएम मोदी ने कहा, 'इस बार जैसे ही कोरोना के केस बढ़े, फार्मा सेक्टर ने दवाइयों का उत्पादन और बढ़ा दिया है. इसे अभी और तेज किया जा रहा है. प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए हर तरीके से दवाई कंपनियों की मदद ली जा रही है. हमारे पास इतना मजबूत फार्मा सेक्टर है. अस्पतालों में बेड की संख्या को बढ़ाने का भी काम चल रहा है.'
पीएम मोदी ने कहा, 'कठिन से कठिन समय में भी हमें धैर्य नहीं खोना चाहिए. तभी हम विजय हासिल कर सकते हैं. जो फैसले लिए गए हैं, वह स्थिति को तेजी से सुधारेंगे. ऑक्सीजन की डिमांड बहुत ज्यादा बड़ी है. इस दिशा में बहुत तेजी से काम किया जा रहा है.'
पीएम ने कहा, 'हर जरूरतमंद को ऑक्सीजन मिले इसके लिए कई स्तर पर उपाय किए जा रहे हैं. राज्यों में नए ऑक्सीजन प्लांट, राज्यों को 1,00,000 सिलेंडर पहुंचाने हो, औद्योगिक इकाइयों में इस्तेमाल हो रही ऑक्सीजन का मेडिकल इस्तेमाल हो, रेल हो...हर स्तर पर प्रयास हो रहा है.'
उन्होंने आगे कहा, 'आज दुनिया की सबसे सस्ती वैक्सीन भारत में है. वैक्सीन को फास्ट ट्रैक अप्रूवल और रेगुलेटरी सेवक के तहत तैयार किया गया. दुनिया में सबसे तेजी से भारत में 12 करोड़ से ज्यादा लोगों को वैक्सीन दिया गया है. 1 मई के बाद से 18 वर्ष के ऊपर के किसी भी व्यक्ति को वैक्सीनेट किया जा सकेगा. पहले की तरह सरकारी अस्पतालों में मुफ्त वैक्सीन मिलती रहेगी.'
पीएम मोदी ने कहा, 'यह एक टीम एफर्ट है, जिसके कारण हमारा भारत, दो मेड इन इंडिया वैक्सीन्स के साथ दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान शुरू कर पाया. टीकाकरण के पहले चरण से ही गति के साथ ही इस बात पर जोर दिया गया कि ज्यादा से ज्यादा क्षेत्रों तक, जरूरतमंद लोगों तक वैक्सीन पहुंचे.'
पीएम मोदी ने कहा, 'मैं राज्यों से कहूंगा कि वह लॉकडाउन को आखिरी विकल्प के तौर पर ही देखें. लॉकडाउन से हमें बचने की भरपूर कोशिश करनी है. राज्य माइक्रो कंटेनमेंट जोन पर ज्यादा ध्यान दें. युवा साथियों से अनुरोध है कि अपने मोहल्ले में कमेटियां बनाकर कोविड-19 शासन करवाने में मदद करें. घर का माहौल कम करना जरूरी लोग अफवाहों में ना आए.'
प्रधानमंत्री ने कहा, 'मेरा राज्य प्रशासन से आग्रह है कि वो श्रमिकों का भरोसा जगाए रखें. उनसे आग्रह करें कि वो जहां हैं, वहीं रहें. राज्यों द्वारा दिया गया ये भरोसा उनकी बहुत मदद करेगा कि वो जिस शहर में हैं, वहीं पर अगले कुछ दिनों में वैक्सीन भी लगेगी और उनका काम भी बंद नहीं होगा.'
प्रधानमंत्री ने कहा, 'हमारे शास्त्रों में कहा गया है- त्याज्यं न धैर्यं विधुरेऽपि काले. कठिन से कठिन समय में भी हमें धैर्य नहीं खोना चाहिए. किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए हम सही निर्णय लें, सही दिशा में प्रयास करें तभी विजय हासिल कर सकते हैं. इसी मंत्र को लेकर आज देश दिन-रात काम कर रहा है.'
पीएम मोदी ने कहा, 'अपने बाल मित्रों से एक बात विशेष तौर पर कहना चाहता हूं. मेरे बाल मित्र, घर में ऐसा माहौल बनाएं कि बिना काम, बिना कारण घर के लोग, घर से बाहर न निकलें. आपकी जिद बहुत बड़ा परिणाम ला सकती है.'
बता दे कि भारत में COVID-19 के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. कोरोना से मौतों का भी आंकड़ा बढ़ा है. आज (मंगलवार) सुबह केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,59,170 नए मामले सामने आए. संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर 1,53,21,089 हो गई है. इस दौरान 1,761 और लोगों की मौत हो गई. कुल मृतक संख्या बढ़कर 1,80,530 हो गई है. देश में इस समय कोरोना से संक्रमित 20,31,977 लोगों का इलाज चल रहा है.

साभार - डी डी न्यूज़

1000 बिस्तरों के आईसीयू की स्थापना के लिए केन्द्र सरकार दे सहायता
टेस्टिंग और वैक्सीनेशन में छत्तीसगढ़ का प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से बेहतर
प्रदेश में अब तक 33.61 लाख वैक्सीन की डोज दी गई
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में कोविड-19 संक्रमण पर मुख्यमंत्रियों की वर्चुअल बैठक में शामिल हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बघेल

रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में कोविड-19 संक्रमण से उत्पन्न परिस्थितियों और टीकाकरण की प्रगति की समीक्षा के लिये आज आयोजित वर्चुअल बैठक में केन्द्र सरकार से छत्तीसगढ़ राज्य की भौगोलिक परिस्थिति को देखते हुए छत्तीसगढ़ को एक सप्ताह की जरूरत का वैक्सीन एडवांस में उपलब्ध कराने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इससे दूरस्थ क्षेत्रों के जिलों में वैक्सिनेशन में आसानी होगी। श्री बघेल ने कोरोना के उपचार में उपयोग की जाने वाली दवाईयों और उपकरणों पर जीएसटी की दर कम करने का आग्रह भी किया। उन्होंने कहा कि इससे इलाज के दौरान कोरोना संक्रमित मरीजों पर कम आर्थिक भार पड़ेगा। श्री बघेल ने केन्द्र सरकार से राज्य की वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए रेमडेसीवीर इंजेक्शन और ऑक्सीजन सिलेण्डर्स की सतत आपूर्ति करने, प्रदेश में 4 वायरोलॉजी लैब और एक बीएसएल-4 लैब की स्थापना तथा 1000 बिस्तरों के आईसीयू के इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए सहायता उपलब्ध कराने का भी आग्रह किया।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपने रायपुर स्थित निवास से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से इस बैठक में शामिल हुए। बैठक में स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव, गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, स्वास्थ्य विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती रेणु जी. पिल्ले, मुख्यमंत्री के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, संचालक स्वास्थ्य नीरज बंसोड़ और संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डॉ. प्रियंका शुक्ला उपस्थित थीं।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में टीकाकरण की स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ में 87 प्रतिशत हेल्थ केयर वर्करों, 84 प्रतिशत फ्रंटलाईन वर्कर और 45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के 43 प्रतिशत लोगों को टीके की प्रथम डोज दी जा चुकी है। राज्य में 7 अप्रैल तक 33 लाख 61 हजार वैक्सीन डोज दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि राज्य में टेस्टिंग क्षमता विशेषकर आरटीपीसीआर और ट्रू नॉट टेस्ट की क्षमता बढ़ाने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। माह फरवरी में दैनिक औसत टेस्टिंग 21 हजार 142 थी, जो मार्च में बढ़कर 30 हजार 501 और अप्रैल में बढ़कर 39 हजार हो गई है। छत्तीसगढ़ में प्रति 10 लाख पर 2 लाख 4 हजार 420 टेस्ट किए जा रहे हैं, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर प्रति 10 लाख पर एक लाख 89 हजार 664 टेस्ट किए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में प्रतिदिन 10 लाख आबादी पर 1435 टेस्ट किए जा रहे हैं, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिदिन 10 लाख आबादी पर 929 है। उन्होंने बताया कि राज्य में अक्टूबर 2020 में आरटीपीसीआर जांच का प्रतिशत 26 प्रतिशत था, जो अप्रैल 2021 में बढ़कर लगभग 40 प्रतिशत हो गया है। राज्य में वर्तमान में 7 शासकीय लैब तथा 5 निजी लैब में आरटीपीसीआर जांच की सुविधा उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त राज्य में 4 नई शासकीय आरटीपीसीआर लैब महासमुंद, कांकेर, कोरबा और कोरिया में स्थापित की जा रही हैं। इसके साथ ही 31 शासकीय लैब तथा 5 निजी लैब में ट्रू नॉट जांच की सुविधा उपलब्ध हैं।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में कोरोना संक्रमण की रोकथाम और बचाव के उपायों की जानकारी देते हुए कहा कि कोरोना संक्रमित मरीज चिकित्सकों से जल्द इलाज कराएं इसके लिए शासकीय अमले के अलावा राज्य के सभी सामाजिक संगठनों के माध्यम से प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त मरीजों की शीघ्र पहचान के लिए एक्टिव सर्विलेंस पर भी जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 207 कंटेनमेंट जोन घोषित किये गए हैं। प्रत्येक कंटेनमेंट जोन में घर-घर जाकर एक्टिव सर्विलेंस और टेस्टिंग की जा रही है। सार्वजनिक स्थलों में मास्क न पहनने की स्थिति में 500 रुपए के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थिति को देखते हुए ट्रांसमिशन की चेन तोड़ने के लिए रायपुर, दुर्ग, बेमेतरा जिले में लॉकडाउन भी लगाया गया है।

नई दिल्ली: शौर्यपथ :

अगर आपने अभी तक अपने PAN (Permanent Account Number) को अपने आधार कार्ड (Aadhaar) से लिंक नहीं किया है, तो फटाफट पहले ये काम कर लीजिए, क्योंकि PAN से आधार कार्ड लिंक करने की आखिरी तारीख आज यानी 31, 2021 मार्च को है और अगर आज आपका PAN आपके आधार से लिंक नहीं हुआ, तो अब उस पर 1,000 रुपये तक का जुर्माना अदा करना होगा.

इससे पहले, केंद्र सरकार ने कई बार आधार से PAN को लिंक करने की मियाद बढ़ाई है, लेकिन अब ऐसा न होने की स्थिति में जुर्माना लगाने का प्रावधान लाया गया है. वहीं, कार्डहोल्डर के PAN को अवैध भी घोषित कर दिया जाएगा.

गौरतलब है कि पिछले मंगलवार (23 मार्च, 2021) को लोकसभा में फाइनेंस बिल, 2021 पास किया गया था, जिसमें इनकम टैक्स एक्ट, 1961 में नई धारा 234एच के तहत नया प्रावधान किया गया है कि PAN से आधार लिंक नहीं होने की स्थिति में अब किसी भी व्यक्ति को अधिकतम 1,000 रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है. इसके अलावा उस व्यक्ति का PAN अवैध घोषित होने की वजह से जो दिक्कतें होंगी, सो अलग. ध्यान रहे, इनकम टैक्स की धारा 139एए(2) में कहा गया है कि हर व्यक्ति, जिसके पास 1 जुलाई, 2017 को PAN कार्ड था, या वह आधार कार्ड बनवाने के योग्य था, उसे PAN को आधार से लिंक करना होगा. वहीं, जिनके पास आधार कार्ड है, उन्हें अपने रिटर्न फाइल और PAN अलॉटमेंट के फॉर्म में अपना आधार नंबर टैक्स अधिकारियों को देना अनिवार्य है.

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