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April 15, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

रायपुर/ मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में ऑस्ट्रेलिया के महावाणिज्य दूत बर्नार्ड लिंच ने सौजन्य मुलाकात की।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने राज्य में चल रही विकास योजनाओं, विशेष रूप से आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य, पेयजल एवं पोषण सुधार के प्रयासों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार इन क्षेत्रों में तेजी से काम कर रही है और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से इन योजनाओं को और प्रभावी बनाया जा सकता है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने बर्नार्ड लिंच को बेल मेटल निर्मित धातु की प्रतिमा भेंट की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानंद, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, मुख्यमत्री के विशेष सचिव श्री रजत बंसल, सीनियर इकोनॉमिक रिसर्च अफसर सुश्री अनघा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

रायपुर /मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने विश्व स्वास्थ्य दिवस (7 अप्रैल) के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएँ देते हुए स्वस्थ और संतुलित जीवनशैली अपनाने की अपील की है।

उन्होंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि स्वास्थ्य ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। यह दिवस न केवल स्वास्थ्य से जुड़े वैश्विक मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने का अवसर है, बल्कि अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का भी संदेश देता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान - ये तीनों स्वस्थ जीवन के मूल आधार हैं। यदि हम अपनी दिनचर्या में छोटे-छोटे सुधार करें, तो बड़े स्तर पर सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने के लिए सतत प्रयासरत है। 

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे स्वयं स्वस्थ रहने के साथ-साथ अपने परिवार और समाज में भी स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाएँ, ताकि एक स्वस्थ, सक्षम और समृद्ध छत्तीसगढ़ के निर्माण में सबकी भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

 

 शौर्यपथ लेख /

कल्पना करें कि राजस्थान के दूरदराज के किसी कोने में जिला कलेक्टर को एक ऐसी महत्वाकांक्षी कल्याण योजना की जिम्मेदारी सौंपी जाती है जिसके बारे में उसकी जानकारी बहुत कम है। एक दशक पहले उसे जानकारी के लिए कहीं धूल खा रही किसी नियमावली का सहारा लेना होता। या फिर वह अपने किसी वरिष्ठ सहयोगी की तीन बैठकों और लंच के बाद खाली होने का इंतजार करता। उसकी उम्मीद उस प्रशिक्षण कार्यक्रम पर भी टिकी हो सकती थी जो शायद एक या दो साल में कभी आता। लेकिन आज वह अपने फोन के जरिए आईगॉट (इंटिग्रेटेड गर्वनमेंट ऑनलाइन ट्रेनिंग प्लेटफॉर्म) पर लॉग ऑन करता है। उसे मिनटों में ही अपनी जरूरत के अनुरूप एक सुव्यवस्थित कार्यकुशलता आधारित पाठ्यक्रम मिल जाता है। वह शाम तक सूचनाओं और आत्मविश्वास से लैस होकर योजना के लाभार्थियों की पहली बैठक की अध्यक्षता कर रहा होता है। यह बदलाव देखने में छोटा लग सकता है मगर हकीकत में किसी क्रांति से कम नहीं है।
चमक-दमक से दूर धैर्य के साथ पांच साल पहले शुरू किया गया मिशन कर्मयोगी एक क्रांति ला रहा है। यह नए भारत के लिए एक नई तरह के प्रशासनिक अधिकारी तैयार करने के उद्देश्य से चुपचाप काम कर रहा है।
इसके महत्व को समझने के लिए हमें पहले संदर्भ को जानना होगा। 2047 तक विकसित भारत के प्रधानमंत्री के निर्धारित लक्ष्य तक यूं ही नहीं पहुंचा जा सकता। इस मंजिल तक पहुंचने के लिए हमें भारत गणतंत्र को चलाने वाली संस्थाओं और व्यक्तियों के जरिए सावधानी से एक-एक कदम आगे बढ़ना होगा। इस यात्रा में सबसे महत्वपूर्ण पूंजी, प्रौद्योगिकी या नीति नहीं है। सबसे ज्यादा अहमियत उन लगभग 3.5 करोड़ प्रशिक्षित, उत्साही और नागरिक केंद्रित सरकारी कर्मियों की क्षमता की है जो हर सुबह उठ कर भारतीय शासन को संचालित करते हैं।
स्वतंत्र भारत के इतिहास में ज्यादातर समय क्षमता निर्माण का मॉडल सांयोगिक रहा है। किसी नौजवान अधिकारी को सेवा की शुरुआत के समय औपचारिक प्रशिक्षण दिया जाता था। फिर करियर के बीच में यदा-कदा उसे कुछ पाठ्यक्रमों में हिस्सा लेने का अवसर मिल सकता था। बाकी, उसे काम करते हुए और दूसरों को देख कर ही सीखना होता था। एक स्थिर और धीमी गति से आगे बढ़ते विश्व में यह काफी था। लेकिन कृत्रिम मेधा, जलवायु अवरोध, जनसांख्यिकीय दबाव और जबर्दस्त प्रौद्योगिकीय परिवर्तन के युग में यह सरासर नाकाफी है। प्रशासन के सामने चुनौतियां जिस रफ्तार से आती हैं उसके सामने प्रशिक्षण की पुरानी प्रणालियों की गति कहीं नहीं टिकती।
'मिशन कर्मयोगी' को इसी बेमेल स्थिति के समाधान के रूप में की गई थी। 2021 में शुरू किया गया यह मिशन—जिसे उसी वर्ष अप्रैल में स्थापित 'क्षमता निर्माण आयोग' द्वारा संस्थागत रूप से संचालित किया गया, एक सचमुच महत्वाकांक्षी लक्ष्य को पूरा करने के लिए आगे बढ़ा। भारतीय सिविल सेवाओं की सीखने की संस्कृति को, समय-समय पर होने वाली और केवल नियमों के पालन तक सीमित प्रक्रिया से बदलकर, एक निरंतर चलने वाली, भूमिका-आधारित और स्वयं-निर्देशित विकास यात्रा में रूपांतरित करना इसका मकसद है। जैसा कि आयोग इसका वर्णन करता है, यह बदलाव 'कर्मचारी'—यानी नियमों का पालन करने वाले एक पदाधिकारी से 'कर्मयोगी' बनने की ओर है: एक ऐसा लोक सेवक जो किसी उद्देश्य, सेवा-भाव और उत्कृष्टता से प्रेरित हो।
पाँच वर्षों के बाद, ये आंकड़े अत्यंत शिक्षाप्रद हैं। ‘आईगॉट’ (इंटीग्रेटेड गवर्नमेंट ऑनलाइन ट्रेनिंग) प्लेटफॉर्म पर अब 1.5 करोड़ से अधिक सरकारी अधिकारी सक्रिय शिक्षार्थी के रूप में जुड़े हैं — यह एक ऐसी संख्या है जो शुरुआत के समय काल्पनिक लगती थी। 4,600 से अधिक योग्यता-आधारित पाठ्यक्रमों के माध्यम से, इन अधिकारियों ने 8.3 करोड़ से अधिक पाठ्यक्रम पूरे किए हैं। अकेले पिछले 'राष्ट्रीय शिक्षण सप्ताह' के दौरान, भागीदारी के परिणामस्वरूप 4.5 मिलियन घंटे के पाठ्यक्रम नामांकन और 3.8 मिलियन घंटे की वास्तविक शिक्षा दर्ज की गई। ये केवल अमूर्त आंकड़े नहीं हैं। दर्ज किया गया प्रत्येक घंटा भारत में कहीं न कहीं एक लोक सेवक का प्रतिनिधित्व करता है — छत्तीसगढ़ में एक राजस्व निरीक्षक, पुणे में एक शहरी स्थानीय निकाय अधिकारी, मणिपुर में एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता, ये सब अपने साथी नागरिकों की बेहतर सेवा करने के लिए अपनी क्षमता बढ़ा रहें हैं।
जो बात आईगॉट प्लेटफॉर्म को वास्तव में परिवर्तनकारी बनाती है, वह केवल इसका पैमाना नहीं है, बल्कि इसकी 'पहुँच की संरचना' है। यह किसी भी समय और कहीं भी, स्मार्टफोन या डेस्कटॉप पर, कई भाषाओं में उपलब्ध है, और इसे शिक्षार्थी के पेशेवर प्रोफाइल के अनुसार बनाया गया है। पाठ्यक्रमों को हर तीन से छह महीने में अपडेट किया जाता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि शासन में एआई टूल का उपयोग कैसे करें या नए वित्तीय नियमों को कैसे समझें, इससे संबंधित सामग्री वर्तमान और प्रासंगिक बनी रहे। दूसरे शब्दों में, यह प्लेटफॉर्म धूल फांकने वाली कोई डिजिटल लाइब्रेरी नहीं है — बल्कि यह सीखने का एक जीवंत और अनुकूलन योग्य तंत्र है। इस पर विचार कीजिए कि एक आदिवासी जिले की जूनियर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के लिए इसका क्या अर्थ है, जिसे उसकी अपनी भाषा में बाल पोषण मूल्यांकन के नवीनतम प्रोटोकॉल समझाने वाला एक मॉड्यूल प्राप्त होता है। उसे अपने ब्लॉक में किसी प्रशिक्षक के आने का इंतज़ार करने की ज़रूरत नहीं है। वह सीखती है, और कार्य करती है। यही इस मिशन का 'लोकतांत्रिक लाभांश' है।
क्षमता निर्माण आयोग, इस तंत्र के रणनीतिक संरक्षक के रूप में, एक साथ 'वास्तुकार' और 'संचालक' दोनों की भूमिका निभाता है। राष्ट्रीय नीति बनाने वाले एक सचिव से लेकर ग्राम स्तर पर इसे लागू करने वाले एक पंचायत पदाधिकारी तक, यह पहचान करता है कि सार्वजनिक भूमिकाओं के विशाल स्पेक्ट्रम में किन योग्यताओं की आवश्यकता है। यह सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थानों के लिए राष्ट्रीय मानक 2.0 ढांचे के माध्यम से देश के प्रशिक्षण संस्थानों के लिए गुणवत्ता मानक निर्धारित करता है, जिसके तहत देश भर के 200 से अधिक प्रशिक्षण संस्थान पहले ही मान्यता प्राप्त कर चुके हैं। यह राज्यों के साथ मिलकर काम करता है। सभी 30 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अब औपचारिक समझौता ज्ञापनों के माध्यम से जुड़ चुके हैं ताकि ऐसी विशिष्ट 'क्षमता निर्माण योजनाएं' तैयार की जा सकें जो कार्यबल की दक्षताओं को संगठनात्मक लक्ष्यों के साथ जोड़ती हैं। 'राष्ट्रीय कर्मयोगी जन सेवा कार्यक्रम' जैसी ऐतिहासिक पहलों के माध्यम से, इसने एक मिलियन से अधिक प्रमाणित अधिकारियों को बड़े पैमाने पर व्यवहार प्रशिक्षण दिया है, जो प्रत्येक नागरिक को अंतिम हितधारक के रूप में मानने की सूक्ष्म लेकिन महत्वपूर्ण कला है।
मिशन के इस अंतिम आयाम पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है, क्योंकि यह एक ऐसी चीज़ के बारे में है जिसे 'पूर्णता प्रमाण पत्र' या 'लॉग किए गए घंटों' में आसानी से नहीं मापा जा सकता। मिशन कर्मयोगी की सबसे गहरी आकांक्षाओं में से एक है—दृष्टिकोण में बदलाव। यह राज्य और नागरिक के बीच एक 'लेन-देन' वाले संबंध से हटकर 'नागरिक देवो भव' की भावना से परिभाषित संबंध की ओर एक आंदोलन है: नागरिक ईश्वर के समान है, वह सर्वोच्च अधिकारी है जिसके प्रति राज्य का सेवक जवाबदेह है। जब रेलवे काउंटरों, राजस्व कार्यालयों और स्वास्थ्य केंद्रों पर नागरिक-केंद्रित अधिकारियों को इसके तहत प्रशिक्षित किया गया और बाद में नागरिकों का सर्वेक्षण किया गया तो प्रतिक्रिया आश्चर्यजनक थी। उन्होंने बदलाव को महसूस किया। न केवल दक्षता में, बल्कि व्यवहार की आत्मीयता, तत्परता और बातचीत की मानवीय गुणवत्ता में भी। एक ऐसे युग में जब एआई प्रशासनिक कार्यों के विशाल हिस्सों को स्वचालित करने की चुनौती दे रहा है, यह मानवीय परत, जो सहानुभूतिपूर्ण, सांस्कृतिक रूप से जागरूक और स्थानीय जड़ों से जुड़ी है कोई फालतू चीज़ नहीं, बल्कि भारत के शासन की सर्वोच्च शक्ति है।
इस मिशन ने अपनी तकनीकी महत्वाकांक्षाओं के साथ-साथ भारत की बौद्धिक विरासत का सम्मान करने का भी एक सचेत प्रयास किया है। 'भारतीय ज्ञान प्रणाली प्रकोष्ठ' के माध्यम से, पारंपरिक ज्ञान जिसमें सामुदायिक शासन और कृषि से लेकर वित्त और स्वास्थ्य सेवा तक के क्षेत्र शामिल हैं — को प्रशिक्षण सामग्री के ताने-बाने में बुना जा रहा है; इसे केवल अतीत की यादों के रूप में नहीं, बल्कि एक जीवंत ज्ञान के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। 'अमृत ज्ञान कोष' भंडार, जिसमें 70 से अधिक पूर्ण केस स्टडीज़ शामिल हैं, शासन-प्रशासन से जुड़े ऐसे ज्ञान का एक संग्रह तैयार कर रहा है जिसकी जड़ें भारतीय संदर्भों और भारतीय समाधानों में निहित हैं। प्रशासनिक मानसिकता का यह 'वि-औपनिवेशीकरण', जिसके तहत भारतीय लोक सेवकों को आधुनिक चुनौतियों का सामना करते हुए अपनी ही सभ्यतागत विरासत के साथ आत्मविश्वासपूर्ण जुड़ाव स्थापित करने की ओर लौटाया जाता है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रमुख आकांक्षाओं में से एक है और 'मिशन कर्मयोगी' इसी आकांक्षा को साकार रूप दे रहा है।
'साधना' सप्ताह 2 से 8 अप्रैल तक मनाया जाने वाला राष्ट्रीय शिक्षण सप्ताह — इस पांच वर्षीय यात्रा का उत्सव और इसके अधूरे कार्यों के प्रति पुनर्संकल्प, दोनों है। 'साधना' शब्द यहाँ अत्यंत उपयुक्त है। इसका अर्थ है समर्पित अभ्यास; एक ऐसे व्यक्ति का अनुशासित दैनिक प्रयास जो किसी एक असाधारण कार्य के माध्यम से नहीं, बल्कि अपने कौशल के प्रति निरंतर समर्पण के माध्यम से निपुणता प्राप्त करना चाहता है। जैसे ही हम सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थानों के एक 'राष्ट्रीय सम्मेलन' के साथ इस सप्ताह का उद्घाटन कर रहे हैं, जिसमें लगभग 700 वरिष्ठ अधिकारी व्यक्तिगत रूप से और 3,000 से अधिक वर्चुअल माध्यम से शामिल हो रहे हैं, हम केवल एक वर्षगाँठ नहीं मना रहे हैं। हम अगले पांच वर्षों के लिए अपना लक्ष्य निर्धारित कर रहे हैं — एक ऐसे भविष्य की ओर जिसमें हर स्तर पर प्रत्येक सिविल सेवक निरंतर सीखने वाला, एक 'नागरिक-चैंपियन' और भारत की आकांक्षाओं का एक आत्मविश्वासी संरक्षक होगा।
विकसित भारत 2047 के लक्ष्य — सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज से लेकर शून्य शुद्ध उत्सर्जन के संकल्प तक, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना से लेकर वैश्विक विनिर्माण नेतृत्व तक, केवल नीतिगत माध्यम से पूरे नहीं होंगे। वे लोगों के माध्यम से पूरे होंगे: उस जिला अधिकारी द्वारा जो योजना को सही ढंग से समझ कर उसे पूरी शुद्धता के साथ लागू कर सके; उस शहरी योजनाकार द्वारा जो स्थानिक डेटा टूल का उपयोग कर सके; उस अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कार्यकर्ता द्वारा जो सार्वजनिक स्वास्थ्य अलर्ट को इस तरह संप्रेषित करे कि उसका समुदाय उस पर भरोसा करे। मिशन कर्मयोगी न केवल कल के लिए, बल्कि आने वाले दशकों के लिए उसी दल का निर्माण कर रहा है।
भारत की शासन-व्यवस्था की कहानी के लंबे और प्रकाशमान सफर में, यह शायद वह अध्याय है जिसमें शासन ने आखिरकार 'सीखना' सीख लिया।

(लेखक केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग और कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्यमंत्री हैं)

भारतीय प्रबंधन संस्थान, रायपुर के 15वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में भारत के विदेश मंत्री हुए शामिल

डॉ. एस. जयशंकर ने आईआईएम रायपुर से स्नातक हुए 552 भावी लीडर्स के बीच राष्ट्र की वैश्विक स्थिति और आर्थिक विकास पर डाला प्रकाश

रायपुर / शौर्यपथ / भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर ने आज अपने नया रायपुर स्थित परिसर में अपना 15वां वार्षिक दीक्षांत समारोह मनाया। इस समारोह में विभिन्न कार्यक्रमों के 552 छात्रों को डिग्री प्रदान की गई, जिनमें प्रमुख एमबीए प्रोग्राम के 314, एग्जीक्यूटिव एमबीए प्रोग्राम के 230 और 8 डॉक्टरेट शोधार्थी शामिल थे। इस अवसर पर भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और उन्होंने दीक्षांत भाषण दिया।

दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. एस. जयशंकर ने जोर देकर कहा कि "स्नातक होने वाले इस बैच को खुद को भाग्यशाली मानना चाहिए, क्योंकि यह उस पीढ़ी का हिस्सा है जो 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नियत है। आप एक दशक की ठोस प्रगति और विकास के लाभार्थी हैं। आपको तकनीक और सूचना तक वह पहुंच प्राप्त हुई है, जिसकी कल्पना एक पीढ़ी पहले करना भी असंभव था। यही नहीं, आप वैश्वीकरण के उस युग में बड़े हुए हैं जिसने आपको शेष विश्व के साथ बहुत गहराई से जोड़ा है। आज, भारत अपनी विकास यात्रा में एक लंबी छलांग लगाने के लिए तैयार है और आपका यह समूह उन लोगों में शामिल होगा जो इस प्रयास का नेतृत्व करेंगे। आपके कौशल हमारे राष्ट्र को समृद्धि की खोज में आगे ले जाने में मदद करेंगे।"

अपने संबोधन में डॉ. जयशंकर ने यह भी कहा कि "यह स्वीकार किया जाना चाहिए कि आज भारत में स्नातक होने वालों की संभावनाएं पहले की तुलना में कहीं अधिक उज्ज्वल हैं। वास्तव में, हमारे समाज में एक ऐसा आशावाद है जो दुनिया के कई अन्य हिस्सों में नहीं दिखता। अब आप पूछ सकते हैं कि ऐसा क्यों है? शायद इसलिए, क्योंकि पिछले दस वर्ष बहुत बेहतर रहे हैं, जिससे यह विश्वास पैदा हुआ है कि अगले दस वर्ष और उसके बाद का समय भी वैसा ही होगा। आखिर हम अब दुनिया की शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं। कोई भी इस बात से इनकार नहीं कर सकता कि हाल के कई वैश्विक झटकों ने हमारी लचीलेपन (resilience) की परीक्षा ली है और भारत उससे मजबूती से बाहर निकला है। हमने घरेलू और बाहरी दोनों चुनौतियों का सफलतापूर्वक प्रबंधन किया है।"

स्नातक होने वाले बैच को अपने प्रारंभिक संबोधन में आईआईएम रायपुर के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष श्री पुनीत डालमिया ने कहा, "2026 के बैच, आप गहरे वैश्विक बदलाव के क्षण में स्नातक हो रहे हैं। हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल व्यवधान, भू-राजनीतिक बदलाव और तेजी से बदलते उपभोक्ता व्यवहार वाले युग में जी रहे हैं। ऐसी दुनिया में ज्ञान महत्वपूर्ण है, लेकिन अनुकूलन क्षमता (adaptability) अनिवार्य है। रणनीति मायने रखती है, लेकिन गति उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है। महत्वाकांक्षा आवश्यक है, लेकिन सत्यनिष्ठा (integrity) पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। जीवन भर सीखने वाले बने रहें, ईमानदारी के साथ नेतृत्व करें और स्वयं से परे प्रभाव पैदा करें। आपका मूल्यांकन आपके पद या वेतन से नहीं, बल्कि दूसरों के जीवन में आपके द्वारा लाए गए बदलाव से किया जाएगा।"

दीक्षांत समारोह का समापन शिवांग छिकारा, शालिनी दुबे और बोबन चाको सहित अन्य मेधावी छात्रों को स्वर्ण पदक प्रदान करने के साथ हुआ। अपने द्वितीय चरण के परिसर विस्तार और ₹20.93 लाख प्रति वर्ष के औसत पैकेज के साथ एक मजबूत प्लेसमेंट सीजन के साथ, आईआईएम रायपुर प्रबंधन उत्कृष्टता के लिए एक प्रमुख संस्थान और भारत के पेशेवर परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत कर रहा है।

दुर्ग | शौर्यपथ समाचार

छत्तीसगढ़ के दुर्ग की प्रतिभाशाली बेटी अम्बा शुक्ला को अंतरराष्ट्रीय मासिक पत्रिका ‘माही संदेश’ द्वारा आयोजित भव्य समारोह में “माही संदेश नारी शक्ति सम्मान” से नवाजा गया। यह सम्मान उन्हें उनके उत्कृष्ट सामाजिक और साहित्यिक योगदान के लिए प्रदान किया गया।

इस गरिमामय आयोजन में देश के आठ राज्यों, जिनमें राजस्थान प्रमुख रहा, से चयनित महिलाओं को विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया। समारोह में प्रेमा माथुर प्रेरणा पुरस्कार, माला माथुर नारी शक्ति सम्मान, तारा देवी नारी शक्ति सम्मान तथा एलिजाबेथ जरीन नारी शक्ति सम्मान 2026 जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार भी प्रदान किए गए।

अम्बा शुक्ला लंबे समय से सामाजिक सरोकारों और साहित्यिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उनके कार्य समाज में सकारात्मक बदलाव और जागरूकता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। इसी समर्पण और निरंतर प्रयासों के चलते उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान मिला है।

कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने महिला सशक्तिकरण के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि समाज और साहित्य के विकास में महिलाओं की भागीदारी अनिवार्य है। उन्होंने ऐसे आयोजनों को महिलाओं को प्रोत्साहित करने और उनके योगदान को पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

? यह सम्मान न केवल अम्बा शुक्ला की उपलब्धि है, बल्कि दुर्ग और पूरे छत्तीसगढ़ के लिए भी गर्व का विषय बन गया है।

धमतरी | रोमेश्वर दास सिन्हा| शौर्यपथ समाचार

धमतरी पुलिस ने गौवंशों के अवैध एवं अमानवीय परिवहन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 9 बछड़ों को मुक्त कराया है। इस दौरान बोलेरो पिकअप वाहन सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

मगरलोड थाना क्षेत्र के अंतर्गत चौकी करेलीबड़ी पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक सफेद महिंद्रा बोलेरो पिकअप (CG 04 QL 5867) में गौवंशों को बेहद क्रूर तरीके से ठूंसकर ले जाया जा रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने तत्काल ग्राम करेलीबड़ी नंगरा नाला, बजरंग बली मंदिर के पास घेराबंदी कर संदिग्ध वाहन को रोका।

जांच के दौरान वाहन में कुल 9 बछड़े (7 लाल और 2 सफेद) अत्यंत अमानवीय स्थिति में पाए गए। पशुओं को बिना चारा-पानी के ठूंस-ठूंसकर भरा गया था, जिससे उनकी हालत चिंताजनक बनी हुई थी।

पुलिस ने मौके पर वाहन चालक अभिलाष कुमार साहू (25 वर्ष) और उसके साथी राहुल यादव (27 वर्ष), दोनों निवासी बरबसपुर, थाना रानीतराई (जिला दुर्ग) को हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान आरोपी गौवंशों के परिवहन या खरीदी-बिक्री से संबंधित कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके।

⚖️ कानूनी कार्रवाई

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ

छत्तीसगढ़ कृषिक पशु परिरक्षण अधिनियम 2004 की धारा 4, 6, 10

एवं पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा 11

के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।

? जप्ती की कार्रवाई

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने

✔️ बोलेरो पिकअप वाहन

✔️ वाहन के दस्तावेज

✔️ 9 नग गौवंश

को जप्त किया है। बरामद गौवंशों को सुरक्षित गौशाला में भेज दिया गया है।

? पुलिस की अपील

धमतरी पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि पशुओं के साथ क्रूरता या अवैध परिवहन जैसी गतिविधियों की सूचना तत्काल पुलिस को दें, ताकि ऐसे अपराधों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

कवर्धा। शहर में यातायात व्यवस्था को और अधिक सुरक्षित एवं व्यवस्थित बनाने के लिए प्रशासन द्वारा बड़ा निर्णय लिया गया है। बिरकोना तिराहा, मिनी माता चौक, लालपुर तिराहा, लोहारा नाका, राजनांदगांव बायपास और समनापुर तिराहा जैसे प्रमुख स्थानों पर अत्याधुनिक कैमरे लगाए जाएंगे। 

प्रशासन की निगरानी में कार्य

यह पूरी व्यवस्था SP धर्मेंद्र सिंह के मार्गदर्शन में लागू की जा रही है। इस योजना को सफल बनाने में यातायात प्रभारी अजय कांत तिवारी की महत्वपूर्ण भूमिका है। यातायात प्रभारी अजय कांत तिवारी लगातार इस कार्य की निगरानी कर रहे हैं।

ऑनलाइन चालान प्रणाली लागू

कैमरे लगने के बाद शहर में पूरी तरह से ऑनलाइन चालान प्रणाली लागू हो जाएगी। यातायात प्रभारी अजय कांत तिवारी ने बताया कि अब नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों की पहचान कैमरों के माध्यम से स्वतः हो जाएगी और तुरंत चालान जारी किया जाएगा।

 नियमों का पालन अनिवार्य

यातायात प्रभारी अजय कांत तिवारी ने स्पष्ट किया कि अब सभी वाहन चालकों को नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा वाहन का वैध इंश्योरेंस, (प्रदूषण प्रमाण पत्र), तीन सवारी पर पूर्ण प्रतिबंध, सीट बेल्ट का अनिवार्य उपयोग, हेलमेट पहनना जरूरी, खतरनाक ड्राइविंग पर रोक, गलत दिशा में वाहन चलाने पर कार्रवाई. यातायात प्रभारी ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे अपनी सुरक्षा के लिए यातायात नियमों का पालन करें। यातायात प्रभारी अजय कांत तिवारी ने कहा कि यह कदम जनता की सुरक्षा और दुर्घटनाओं को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

सख्त कार्रवाई की चेतावनी

यातायात प्रभारी अजय कांत तिवारी ने चेतावनी दी है कि अब नियमों का उल्लंघन करने वालों पर किसी भी प्रकार की रियायत नहीं दी जाएगी। कैमरों की नजर से कोई भी बच नहीं पाएगा और हर उल्लंघन पर तुरंत चालान कटेगा।

सुरक्षित शहर की ओर कदम

प्रशासन को उम्मीद है कि इस नई व्यवस्था से शहर में यातायात व्यवस्था बेहतर होगी और सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी। यातायात प्रभारी अजय कांत तिवारी के इस प्रयास से शहर में सुरक्षित और व्यवस्थित यातायात व्यवस्था स्थापित होगी।

0 दो दशक से संगठन में सक्रिय, नियुक्ति पर समर्थकों में उत्साह

राजनांदगांव।शौर्यपथ / शहर जिला कांग्रेस कमेटी की नई कार्यकारिणी में कांग्रेस नेता मनीष गौतम को महामंत्री का दायित्व सौंपा गया है। दो अप्रैल को घोषित कार्यकारिणी में उनकी नियुक्ति के बाद संगठन में उत्साह का माहौल है। मनीष गौतम लंबे समय से कांग्रेस संगठन में निचले स्तर से बुथ अध्यक्ष, वार्ड प्रभारी, सेक्टर प्रभारी, जोन प्रभारी, मतदान एजेंट, मतगणना एजेंट तथा पिछले कार्यकाल में संयुक्त महामंत्री के साथ शहर कांग्रेस खेल-कूद प्रकोष्ठ के शहर अध्यक्ष की भी अहम भूमिका उन्होंने पूरी निष्ठा के साथ निर्वाह किया पार्टी द्वारा समय-समय पर दी गई जवाबदारियों को बखूबी निभाते आ रहे हैं और करीब दो दशक से सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

संगठनात्मक गतिविधियों के साथ ही वे धार्मिक और सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहे हैं। पूर्व में हॉकी के राष्ट्रीय खिलाड़ी भी रहे हैं और हॉकी खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे कर राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी भी उन्होंने तैयार किए हैं, सिटी स्पोर्ट्स क्लब, बाडी बिल्डिंग संघ सहित विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से समाज सेवा से उनका जुड़ाव है। नियुक्ति के बाद वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें शुभकामनाएं दी हैं वहीं समर्थकों और शुभचिंतकों ने हर्ष व्यक्त किया है। संगठन में उनकी सक्रियता और अनुभव को देखते हुए उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है।

मनीष गौतम ने नियुक्ति पर प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव, प्रदेश महामंत्री मलकित सिंह गैंदू सहित वरिष्ठ नेताओं के प्रति भी आभार जताया है। साथ ही शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जितेंद्र मुदलियार को भी धन्यवाद दिया है। उन्होंने कहा कि संगठन ने जो जिम्मेदारी सौंपी है, उसे पूरी निष्ठा और सक्रियता के साथ निभाया जाएगा तथा पार्टी की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

दुर्ग | नगर पालिक निगम | 04 अप्रैल

देशभर में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 लागू कर दिए हैं। ये नियम 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो चुके हैं और इनके तहत कचरा प्रबंधन को अधिक वैज्ञानिक, जवाबदेह और प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया है।

इन नियमों का सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब थोक अपशिष्ट उत्पादकों (Bulk Waste Generators) को अपने स्तर पर ही कचरे का प्रसंस्करण करना अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे नगर निकायों पर भार कम होगा और शहरों में कचरे के ढेर की समस्या पर नियंत्रण लगेगा।

? “वेस्ट हायरेरकी” पर आधारित नई व्यवस्था

नए नियम Waste Hierarchy के सिद्धांत पर आधारित हैं, जिसमें प्राथमिकताएं इस क्रम में तय की गई हैं—

कचरे का न्यूनतम उत्पादन

पुनः उपयोग (Reuse)

पुनर्चक्रण (Recycle)

ऊर्जा पुनर्प्राप्ति

अंत में सुरक्षित निपटान

यह प्रणाली चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

? लैंडफिल पर सख्ती, छंटाई जरूरी

अब केवल गैर-पुनर्चक्रणीय और निष्क्रिय कचरा ही लैंडफिल में भेजा जाएगा।

यदि बिना छंटाई के कचरा भेजा गया, तो उस पर अधिक शुल्क लगाया जाएगा, जिससे स्रोत स्तर पर ही पृथक्करण को बढ़ावा मिलेगा।

? थोक अपशिष्ट उत्पादकों की नई परिभाषा

नए नियमों के तहत इन संस्थाओं को थोक अपशिष्ट उत्पादक माना जाएगा—

20,000 वर्ग मीटर या अधिक क्षेत्र वाले भवन

प्रतिदिन 40,000 लीटर से अधिक जल उपयोग करने वाले संस्थान

100 किलोग्राम या अधिक दैनिक कचरा उत्पन्न करने वाली इकाइयाँ

इसमें हाउसिंग सोसायटी, विश्वविद्यालय, होटल, वाणिज्यिक प्रतिष्ठान और सरकारी संस्थान शामिल हैं।

? चार श्रेणियों में अनिवार्य कचरा पृथक्करण

अब हर स्तर पर कचरे को इन चार भागों में बांटना अनिवार्य होगा—

गीला कचरा

सूखा कचरा

सैनिटरी कचरा

विशेष कचरा (ई-वेस्ट, बैटरी, ट्यूबलाइट आदि)

इससे रीसाइक्लिंग प्रक्रिया तेज होगी और प्रदूषण में कमी आएगी।

? थोक उत्पादकों की जिम्मेदारी तय

नियमों के अनुसार—

गीले कचरे का स्थल पर ही निपटान/कम्पोस्टिंग अनिवार्य

बाहर प्रसंस्करण की स्थिति में EBWGR प्रमाणपत्र आवश्यक

सुरक्षित संग्रहण, परिवहन और प्रसंस्करण की जिम्मेदारी स्वयं की

इसके साथ ही, एक केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से रियल-टाइम मॉनिटरिंग भी की जाएगी।

? क्यों महत्वपूर्ण हैं ये नियम?

इन नियमों के लागू होने से—

नगर निगमों पर आर्थिक और संचालन भार कम होगा

कचरा प्रबंधन में जवाबदेही तय होगी

शहरों में लैंडफिल पर निर्भरता घटेगी

पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को मजबूती मिलेगी

? सार:

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 केवल कचरा निपटान का ढांचा नहीं, बल्कि व्यवहार परिवर्तन की पहल है। अब “कचरा फेंकना” नहीं, बल्कि “कचरा प्रबंधित करना” हर नागरिक और संस्था की जिम्मेदारी बन गई है।

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