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खेल / शौर्यपथ / अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के अंपायरों के एलीट पैनल के सबसे युवा सदस्य नितिन मेनन एशेज सीरीज को सर्वोच्च चुनौती मानते हैं लेकिन उनका कहना है कि मौजूदा हालात में सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि खिलाड़ी जानबूझकर या अनजाने में गेंद पर लार नहीं लगाएं। 22 साल की उम्र में क्रिकेट खेलना छोड़ने वाले 36 साल के मेनन इसके बाद अंपायरिंग से जुड़े जिसका हिस्सा उनके परिवार में कई सदस्य हैं। मेनन ने तीन साल पहले अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया और सोमवार को 12 सदस्यीय एलीट पैनल में उनका प्रवेश सोने पर सुहागा रहा।
कोविड-19 महामारी के बीच एलीट पैनल का हिस्सा बने मेनन को नहीं पता कि उन्हें कब अंपायरिंग का मौका मिलेगा, लेकिन उन्हें पता है कि आईसीसी के मौजूदा दिशानिर्देशों को लागू करना बड़ी चुनौती होगी। मेनन ने पीटीआई से कहा, ''मुख्य चुनौती गेंद को संभालना होगा, यह चुनौती टेस्ट मैचों में अधिक होगी। शुरुआत में नियमों को लागू करने से पहले हम खिलाड़ियों को चेतावनी देंगे, जैसा कि हम तब करते हैं जब कोई खिलाड़ी खतरनाक तरीके से पिच पर दौड़ता है।''
इंदौर के रहने वाले इस अंपायर ने कहा, ''खिलाड़ियों के जानबूझकर की जगह गलती से लार लगाने की संभावना अधिक है, इसलिए हम इसी के अनुसार कार्रवाई करेंगे। इंग्लैंड में सीरीज (अगले महीने शुरू होने वाली) के बाद खेलने के हालात को लेकर विस्तृत नियम आएंगे जिसके बाद हमें बेहतर पता चलेगा कि खेल में हाल में किए गए बदलावों को कैसे लागू करना है।''
स्थिति सामान्य होने पर मेनन को इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच ऐतिहासिक एशेज सीरीज का हिस्सा बनने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, ''इसमें कोई संदेह नहीं कि मैंने एशेज में अंपायरिंग का सपना देखा है। यह एकमात्र सीरीज है जो मैं टीवी पर देखता हूं। वहां का माहौल, जिस तरह से सीरीज खेली जाती है उसका मैं भी हिस्सा बनना चाहता हूं। यह इंग्लैंड में हो या ऑस्ट्रेलिया में मैं इसका हिस्सा बनना पसंद करूंगा। और विश्व कप में अंपायरिंग, यह चाहे टी20 हो या वनडे अंतरराष्ट्रीय।''
कोरोना वायरस महामारी के कारण यात्रा संबंधी पाबंदियों को देखते हुए आईसीसी ने फैसला किया है कि सीरीजओं में केवल स्थानीय अंपायर अंपायरिंग करेंगे। इंग्लैंड में पहुंचने के बाद ट्रेनिंग शुरू करने से पहले वेस्टइंडीज टीम को जिस तरह पृथकवास में रहना पड़ा अंपायरों को भी वैसा ही करना होगा और मेनन को लगता है कि इसका अंपायरों पर मानसिक प्रभाव पड़ेगा।
खिलाड़ियों का गेंद पर लार नहीं लगाना सुनिश्चित करने के अलावा अंपायरों को यह भी देखना होगा कि खिलाड़ी सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करें और गेंद के संपर्क में आने के बाद वे हाथ को नियमित रूप से सैनिटाइज करें। अंपायरों को भी सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करना होगा ओर अब उन्हें मैदान पर खिलाड़ी की निजी चीजों को नहीं संभालना होगा।
मेनन ने कहा, ''ग्लव्स पहनना अंपायरों की व्यक्तिगत पसंद होगी लेकिन हमने फैसला किया है कि हम अपनी जेब में सैनिटाइजर रखेंगे। विकेट गिरने के बाद और ड्रिंक्स ब्रेक के दौरान हमें हाथ में गेंद रखी होगी इसलिए सुरक्षित रहना बेहतर है।'' उन्होंने कहा, ''और अगर खिलाड़ी गेंद पर लार लगा देते हैं तो हमें उसे तुरंत सेनेटाइज करना होगा। यह चौथे अंपायर का काम होगा। वह वाइप्स लेकर आएगा और गेंद को सैनिटाइज करेगा।''
खेल में हो रहे इन बदलावों का ओवर गति पर असर पड़ सकता है लेकिन मेनन ने कहा कि अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा, ''हम वेस्टइंडीज और पाकिस्तान के खिलाफ इंग्लैंड की घरेलू सीरीज में अंपायरिंग करने वालों की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। आईसीसी जो भी नियम बनाएगा हम उसका पालन करेंगे।''
तीन टेस्ट सहित 43 अंतरराष्ट्रीय मैचों में अंपायरिंग कर चुके मेनन ने कहा कि घरेलू अंपायर पर अधिक दबाव होता है और एलीट पैनल का हिस्सा होने के कारण उन पर इस तरह का कोई दबाव नहीं होगा। भारत नियमित रूप से विश्वस्तरीय अंपायर तैयार करने में विफल रहा है लेकिन मेनन का मानना है कि अब स्थिति बेहतर हो रही है।
खेल / शौर्यपथ / वेस्टइंडीज के खिलाफ 8 जुलाई से शुरू होने वाली तीन मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए इंग्लैंड के सिलेक्टर्स टॉप ऑर्डर के बल्लेबाजों के सिलेक्शन को लेकर दुविधा में पड़ गए हैं। सिलेक्टर एड स्मिथ, जेम्स टेलर और कोच क्रिस सिल्वरवुड पहले टेस्ट के लिए टॉप ऑर्डर को लेकर रॉरी बर्न्स, डोम सिबली, जो डेनली और जैक क्राउली के नामों पर विचार कर सकते हैं। बर्न्स ने पिछले करीब 18 महीनों के दौरान दो शतकों के साथ शानदार प्रदर्शन कर टॉप ऑर्डर के बल्लेबाज के रूप में अपनी दावेदारी मजबूत की है।
दक्षिण अफ्रीका दौरे में लगी चोट से बर्न्स पूरी तरह से ठीक हो चुके हैं और ऐसा माना जा रहा है कि वो सलामी बल्लेबाज के रूप में इंग्लैंड की ओर से पारी की शुरुआत करेंगे। वहीं दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ लगातार तीन टेस्ट जीतने में क्राउली, सिबली और डेनली ने इंग्लिश टीम की ओर से शानदार प्रदर्शन किया था। सिबली ने उस सीरीज में अपने करियर का पहला शतक जमाया था। इंग्लैंड का टॉप ऑर्डर इस समय उतना मजबूत नहीं है, जितना कि पहले था। एंड्रयू स्ट्रॉस और फिर उसके बाद जॉनाथन ट्रॉट के संन्यास लेने के बाद इंग्लैंड की टीम में सलामी बल्लेबाज की कमी खलती रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सिबली और बर्न्स सलामी जोड़ी के रूप में इंग्लिश पारी की शुरुआत कर सकते हैं, जबकि क्राउली या डेनली तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी कर टीम के बैटिंग ऑर्डर को मजबूती दे सकते हैं। क्राउली ने टीम में खुद के सिलेक्शन की संभावना को लेकर कहा, 'मुझे नहीं लगता कि अभी तक कोई फैसला लिया गया है। मुझे विश्वास है कि आने वाले कुछ सप्ताह में प्रैक्टिस मैच में बेहतर प्रदर्शन कर मैं अपनी दावेदारी को मजबूत कर सकता हूं।'
खेल /शौर्यपथ / भारत के पूर्व बल्लेबाज कृष्णामाचारी श्रीकांत ने 1983 विश्वकप विजेता टीम के अपने कप्तान कपिल देव की सराहना करते हुए कहा है कि उन्होंने खिलाडिय़ों को खुद पर भरोसा रखना सिखाया। श्रीकांत ने स्टार स्पोट्र्स के कार्यक्रम 'विनिंग द वल्र्ड कप-1983Ó में विश्वकप फाइनल के लम्हों को याद करते हुए कहा, "वेस्टइंडीज ने टॉस जीतकर फील्डिंग करने का फैसला किया। ओस पडऩे के कारण विकेट पर काफी नमी थी। हमें पहले बल्लेबाजी करनी थी और हमारे पास लॉड्र्स में खेलने के कोई खास अनुभव नहीं था। यह हमारे लिए बहुत नया था।"
पूर्व सलामी बल्लेबाज ने कहा, "वहीं अगर आप वेस्टइंडीज की गेंदबाजी आक्रमण को देखें तो उनमें एक से एक दिग्गज गेंदबाज थे और जोएल गार्नर ने अपनी लंबाई का पूरा इस्तेमाल करते हुए बल्लेबाजों को गेंद ठीक से देखना और खेलना मुश्किल बना दिया था।"
श्रीकांत ने कहा, "ऐसे वक्त में कपिल ने हमारे सामने उदाहरण पेश किया। उनका आत्मविश्वास और खेल के प्रति उनका नजरिया उनके बारे में सबसे अच्छी चीजें हैं। कपिल की खासियत थी कि उन्होंने भारतीयों को खुद पर भरोसा रखना सिखाया और यही उनकी महानता है। "
बता दें कि श्रीकांत ने कम स्कोर वाले फाइनल में सर्वाधिक रन बनाए थे। इस दौरान गेंद ओस के बीच 10 फीट की ऊंचाई से आ रही थी। श्रीकांत जूझ रहे थे, लेकिन मैंने उन्होंने अमरनाथ से बात की और उन्होंने श्रीकांत को अपना स्वाभाविक खेल खेलने को कहा। अगले ओवर में श्रीकांत ने चौका जड़ा और अंत में 38 रन बनाए, जो विश्व कप फाइनल का सर्वोच्च स्कोर रहा था।
फाइनल मैच में 183 रनों पर आउट होने के बावजूद भारत ने दिग्गजों से सजी वेस्टइंडीज की टीम को लॉर्डस में 43 रनों से हराकर पूरी दुनिया को चकित कर दिया। पहला विश्व कप 1975 में खेला गया था। वेस्टइंडीज दो बार विश्व कप जीत चुका था, लेकिन कपिल देव ने तीसरी बात खिताब जीतने का उनका सपना चूर-चूर कर दिया।
खेल / शौर्यपथ / अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने सोमवार को दावा किया कि ऑस्ट्रेलिया में इस साल खेले गए टी20 विश्व कप को रिकॉर्ड लोगों ने देखा और इस वैश्विक संस्था के डिजीटल चैनलों के जरिये रिकॉर्ड एक अरब एक करोड़ बार इससे जुड़े वीडियो देखे गए। यह आंकड़ा 2018 में खेली गई प्रतियोगिता की तुलना में 20 गुना अधिक है। आईसीसी ने विज्ञप्ति में कहा कि फरवरी-मार्च में आयोजित किए गए टूर्नामेंट के वीडियो को महिला क्रिकेट की पूर्व की सबसे सफल प्रतियोगिता वनडे विश्व कप 2017 की तुलना में 10 गुना अधिक बार देखा गया।
इन दोनों टूर्नामेंट में भारत उप विजेता रहा था, लेकिन दर्शकों की संख्या के मामले में उसने अहम योगदान दिया। आईसीसी ने कहा, ''विश्व कप के इन आंकड़ों से यह (2020 महिला टी20) विश्व कप 2019 (पुरुष वनडे) के बाद आईसीसी की सबसे सफल प्रतियोगिता बन गई और फाइनल को विश्व भर में सर्वाधिक दर्शकों ने देखा।''
इसमें कहा गया है, ''भारत के फाइनल में पहुंचने से दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ी, क्योंकि 2018 की तुलना में नाकआउट चरण की दर्शक संख्या 423 प्रतिशत अधिक थी। विज्ञप्ति के अनुसार, ''भारत में कुल आठ करोड़ 61 लाख 50 हजार घंटे टूर्नामेंट देखा गया जो कि 2018 के टूर्नामेंट की तुलना में 152 प्रतिशत अधिक है। भारत के फाइनल में पहुंचने और प्रसारक स्टार स्पोर्ट्स के भारतीय मैचों का पांच भाषाओं (अंग्रेजी, हिन्दी, तमिल, तेलुगु और कन्नड़) में प्रसारण करने से यह सफलता मिली।
बता दें कि दोनों टूर्नामेंट में भारत उप विजेता रहा था, लेकिन दर्शकों की संख्या ने आंकड़ों में प्रमुख योगदान दिया। यह आंकड़े आईसीसी पुरुष क्रिकेट विश्व कप 2019 के बाद आईसीसी का दूसरा सबसे सफल इवेंट है। भारत के फाइनल में पहुंचने से दर्शकों के उत्साह में वृद्धि आई और 2018 की तुलना में नॉकआउट चरण की दर्शक संख्या 423 प्रतिशत अधिक थी।
खेल / शौर्यपथ / इंग्लैंड क्रिकेट टीम ने 2001 में नासिर हुसैन की कप्तानी में भारत का दौरान किया था। दोनों टीमों के बीच तीन मैचों की टेस्ट सीरीज खेली गई थी, जिसे भारत ने 1-0 से जीता था। इस सीरीज की शुरुआत से पहले माना जा रहा था कि भारत 3-0 से टेस्ट सीरीज में क्लीनस्वीप करेगा। पहला टेस्ट मैच भारत ने 10 विकेट से जीता था, लेकिन फिर इंग्लैंड ने वापसी की और बाकी दो टेस्ट मैच ड्रॉ कराए। इस टेस्ट सीरीज का आखिरी टेस्ट मैच बेंगलुरु में खेला गया था। उस मैच में सचिन तेंदुलकर सेंचुरी से चूके थे और टेस्ट क्रिकेट में पहली बार स्टंपिंग आउट हुए थे, एश्ले जाइल्स नेगेटिव लेंथ पर गेंदबाजी करने के चलते निशाने पर रहे थे। नासिर हुसैन ने 19 साल बाद बताया कि किस तरह से सचिन को आउट करने का पूरा प्लान बनाया गया था।
बेंगलुरु टेस्ट में इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 336 रन बनाए, जवाब में टीम इंडिया ने 121 रनों तक पांच विकेट गंवा दिए थे। वीरेंद्र सहवाग और तेंदुलकर क्रीज पर मौजूद थे। सहवाग सातवें नंबर पर बल्लेबाजी के लिए आए थे। सचिन 143 टेस्ट पारियों में पहली बार स्टंप आउट हुए थे। नासिर हुसैन ने बताया कि किस तरह से तेंदुलकर को आउट करने का प्लान बनाया गया था। हुसैन ने 'सोनी टेन पिट स्टॉप' पर कहा, 'सचिन और सहवाग जब मैदान के चारों तरफ शॉट्स खेल रहे हों और पूरा स्टेडियम सचिन... सचिन... से गूंज रहा हो तो मुझे अपने गेंदबाजों की आंखों में दिख रहा था कि वो चिंता में हैं। मुझे पता था कि सबसे जरूरी है स्टेडियम में मौजूद लोगों को शांत कराना। ऐसा करना तभी मुमकिन था जब सचिन को रन बनाने से रोका जा सके।'
'एश्ले जाइल्स को लेकर आया गेंदबाजी कराने'
उन्होंने आगे कहा, 'बेंगलुरु की पिच में एक रफ एरिया था, लेकिन मेन पिच में कुछ भी नहीं था। अगर गेंदबाज नॉर्मल गेंदबाजी करते तो उनके लिए कुछ नहीं था। मैं गेंदबाजी एश्ले जाइल्स को लेकर आया, जो कसी हुई लाइन से गेंदबाजी कर रहे थे। एश्ले स्टंप्स के काफी करीब गेंदबाजी कर रहे थे काफी कसी लाइन से गेंद फेंक रहे थे जिससे उस रफ पैच को हिट कर सकें।' जाइल्स ओवर द विकेट गेंदबाजी कर रहे थे, रन नहीं बना पाने पर तेंदुलकर भी परेशान होने लगे, एक गेंद उन्होंने मिस की और क्रीज से थोड़ा बाहर निकले ही थे कि जेम्स फोस्टर ने उन्हें स्टंप आउट कर दिया।
'चालाकी भरा प्लान था'
इंग्लैंड को 'नेगेटिव लाइन' से गेंदबाजी के लिए काफी आलोचना का सामना करना पड़ा था। हुसैन ने कहा, 'सचिन आउट हुए, यह काफी चालाकी भरा प्लान था। इसके बाद लोग भी शांत हो गए। उस समय इंग्लैंड में भी किसी ने कहा था कि यह शर्मनाक है और इंग्लैंड ऐसे नेगेटिव प्लान का इस्तेमाल कर रहा है। यह लोगों को शांत करने के लिए था। यह इकलौता ऐसा मौका था जब तेंदुलकर स्टंप आउट हुए थे। भारत उस मैच में पहली पारी में करीब 300 (असल में 238) रनों पर ऑलआउट हुआ था, जो मेरी जीत थी।
खेल / शौर्यपथ / ब्यूनस आयर्स। मुफलिसी में पले-बढ़े अर्जेंटीना के इन युवाओं के लिए उम्मीद की किरण थी तो बस फुटबॉल। अभावों के बीच अभ्यास में इन्होंने भविष्य का लियोनेल मेस्सी या कार्लोस टेवेज बनने का सपना संजोया लेकिन कोरोनावायरस महामारी ने इनकी उम्मीदों पर मानों तुषारापात कर दिया।
यहां फोर्ट अपाचे के अपार्टमेंट ब्लॉक के बाहर कार्लोस टेवेज का भित्तिचित्र और उसके नीचे लिखा वाक्य ‘मैं उस जगह से आया हूं, जहां कामयाब होना नामुमकिन माना जाता है’, इन युवा फुटबॉलरों के लिए संजीवनी की भांति रहा है।
टेवेज ब्यूनस आयर्स के सबसे गरीब इलाके से निकलकर दूसरी श्रेणी के क्लब अलमाग्रो तक पहुंचे। 16 बरस के आसपास के तमाम फुटबॉलरों के लिए उनकी कामयाबी मील का पत्थर बन गई लेकिन फिर कोरोनावायरस ने दुनिया में दस्तक दी।
पिछले 80 दिन से यहां कोई खेल नहीं हुआ है और ना ही भविष्य में जल्दी होने की संभावना है। ऐसे में अर्जेंटीना के गरीब इलाकों से निकले फुटबॉलरों की बेहतर जिंदगी की एकमात्र उम्मीद भी छिनती नजर आ रही है।
एक फुटबॉलर ने कहा, ‘इस महामारी ने सब कुछ छीन लिया। यह भयावह है। हम घर में बैठे हुए हैं।’ ब्राजील, चिली या पेरू जैसे बाकी लातिन अमेरिकी देशों की तरह तबाही का मंजर अर्जेंटीना में नहीं दिखा लेकिन फुटबॉल के दीवाने इस देश में महामारी के दूरगामी दुष्प्रभाव युवा फुटबॉलरों के कैरियर पर जरूर दिख रहे हैं। इनमें से कइयों ने फुटबॉल छोड़ने का मन बना लिया तो कई ड्रग्स या शराब की लत के शिकार हो रहे हैं । कई खतरनाक अवैध खेलों में शामिल हो गए हैं जो फुटबॉल मैदानों के पास रहने वाले खिलाड़ियों और दर्शकों के बीच इस समय लोकप्रिय है।
सांता क्लारा क्लब के अध्यक्ष डेनियल लोपेज ने कहा, ‘सड़क पर यह सब दिख रहा है। बच्चों ने यहां शरण ली थी पर अब नहीं रह सकते।’ इस क्लब में 170 लड़के लड़कियां प्रशिक्षण ले रहे थे लेकिन अब इस क्लब को किचन में बदल दिया गया है, जहां गरीबों के लिए खाना पकता है।
खेल /शौर्यपथ / ''मेरे क्रिकेट करियर में सौरव गांगुली की भूमिका सबसे बड़ी थी। एक समय में मैं ऐसे मोड़ पर था, जब मुझे समझ नहीं आता था कि कौन मेरे साथ है, क्योंकि लोग मेरे सामने कुछ कहते थे और पीछे कुछ।''
हरभजन सिंह अपने करियर में कई कप्तानों के साथ खेले हैं। दिग्गज ऑफ स्पिनर हरभजन ने मोहम्मद अजहरुद्दीन की कप्तानी में डेब्यू किया। वह सौरव गांगुली के नेतृत्व में टीम के नियमित सदस्य बने। हरभजन 2007 के टी-20 वर्ल्ड कप और 2011 के विश्व कप में महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में सदस्य रहे। 2007 के वनडे विश्व कप में राहुल द्रविड़ की कप्तानी में टीम इंडिया पहले ही चरण में बाहर हो गई थी। कई कप्तानों के साथ खेलने वाले हरभजन सिंह का कहना है कु उनके करियर में सबसे ज्यादा प्रभाव सौरव गांगुली का रहा है। उन्होंने ही मुझे गेंदबाजी की छूट दी और निडर स्पिनर बनाया।
हरभजन सिंह इंडियन प्रीमियर लीग में अनिल कुंबले, विराट कोहली और रोहित शर्मा की कप्तानी में भी खेले। हरभजन पर किस कप्तान का सबसे अधिक प्रभाव पड़ा? जब उनसे यह पूछा गया तो 39 साल के भज्जी ने सौरव गांगुली का नाम लिया।
भज्जी ने आकाश चोपड़ा के साथ एक यूट्यूब चैनल पर कहा, ''मेरे क्रिकेट करियर में सौरव गांगुली की भूमिका सबसे बड़ी थी। एक समय में मैं ऐसे मोड़ पर था, जब मुझे समझ नहीं आता था कि कौन मेरे साथ है, क्योंकि लोग मेरे सामने कुछ कहते थे और पीछे कुछ।''
उन्होंने आगे कहा, ''लेकिन सौरव गांगुली ने उस वक्त मेरा समर्थन किया, जब मेरे पास किसी का समर्थन नहीं था।'' हरभजन ने आकाश चोपड़ा के आकाशवाणी प्रोग्राम में बातचीत के दौरान कहा, ''चयनकर्ता मेरे खिलाफ थे। उन्होंने बहुत-सी बातें मेरे सामने कीं, जिन्हें मैं नहीं बता सकता। मेरे लिए गांगुली की तारीफ के लिए शब्द नहीं हैं। यदि वह कप्तान न होते तो मैं कह नहीं सकता कि दूसरा कप्तान मुझे सपोर्ट करता या नहीं।''
हरभजन ने कहा, ''अगर सौरव गांगुली नहीं होते तो मैं कभी 100 टेस्ट नहीं खेल पाता।'' हरभजन ने कहा, ''गांगुली हमेशा गेंदबाजों के साथ खड़े रहे। वह गेंदबाजों को मर्जी से गेंदबाजी की छूट देती थे।'' उन्होंने कहा, ''यदि आप कैच पकड़ने के लिए 4-5 फील्डर सामने चाहते हैं तो गांगुली वही करते थे। कभी-कभी वह वनडे में 6-7 ओवर फिंकवाते। मैं उनका शुक्रिया अदा करते। उन्होंने मुझे एक अच्छे गेंदबाज के रूप में तैयार किया। उनकी वजह से ही मैं साहसी और भरोसे का निडर स्पिनर बन पाया।''
खेल / शौर्यपथ / पूर्व भारतीय क्रिकेटर गौतम गंभीर का मानना है कि टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी ने यदि अपने करियर के दौरान तीसरे क्रम पर बल्लेबाजी की होती तो वह कई रिकॉर्ड तोड़कर एक बेहतरीन बल्लेबाज साबित होते। गंभीर ने कहा,“संभवत विश्व क्रिकेट ने एक महत्वपूर्ण चीज खोई है और वह है धोनी का तीसरे क्रम पर बल्लेबाजी नहीं करना। यदि धोनी ने भारतीय टीम की कप्तानी नहीं की होती और तीसरे क्रम पर बल्लेबाजी की होती तो शायद दुनिया को बिलकुल अलग तरह का खिलाड़ी देखने को मिलता। ऐसा कर धोनी ने ढेरों रन बनाए होते और कई रिकॉर्ड तोड़े होते। यदि धोनी ने भारत की कप्तानी नहीं की होती और तीसरे क्रम पर बल्लेबाजी करते तो वह विश्व में सबसे रोमांचक क्रिकेटर होते।”
बाएं हाथ के बल्लेबाज गंभीर ने कहा, “संभवत: मैं धोनी को चुनना पसंद करूंगा। सपाट पिचों पर धोनी का तीसरे क्रम पर बल्लेबाजी करना और अब विश्व क्रिकेट में जिस तरह की गेंदबाजी का स्तर है। श्रीलंका, बंगलादेश, वेस्टइंडीज की टीम की ओर देखने से लगता है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के मौजूदा स्तर के हिसाब से धोनी ने कई रिकॉर्ड तोड़े होते।”
धोनी ने वर्ष 2004 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने के साथ ही खुद को भारतीय क्रिकेट की सभी पीढ़ियों के सर्वश्रेष्ठ कप्तानों में से एक के रूप में स्थापित किया है। धोनी ने जब अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत की थी तो उनकी पहचान देश में असाधारण प्रतिभा वाले एक गैर-परंपरागत बल्लेबाजी तकनीक वाले खिलाड़ी के रूप में होती थी।
धोनी ने 2005 में पाकिस्तान के खिलाफ तीसरे क्रम पर बल्लेबाजी करते हुए अपने वनडे करियर का पहला शतक लगाया था। पाकिस्तान के खिलाफ विशाखापत्तनम में खेले गए वनडे में धोनी ने तीसरे क्रम पर बल्लेबाजी करते हुए 123 गेंदों का सामना कर 15 चौकों और चार छक्कों की मदद से 148 रनों की विस्फोटक पारी खेली थी। धोनी ने अपने करियर में तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए 82.75 के औसत से 993 रन बनाये थे।
धोनी ने इसके बाद शीर्ष क्रम पर बल्लेबाजी करना छोड़ दिया और क्रिकेट के सभी प्रारूपों में टीम इंडिया की कप्तानी संभालने के बाद खुद को क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ फिनिशर के रूप में स्थापित किया। अपनी शानदार रणनीति और विस्फोटक बल्लेबाजी के दम पर धोनी ने फिनिशर के तौर पर भारत को कई मैचों में यादगार जीत दिलाई है। हालांकि धोनी के साथी खिलाड़ी रहे गंभीर का मानना है कि धोनी तीसरे क्रम पर बल्लेबाजी कर अपने करियर में अधिक रन बना सकते थे।
उल्लेखनीय है कि धोनी को क्रिकेट की दुनिया में अब तक के सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटरों में गिना जाता है। वनडे में कप्तान के तौर पर सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में धोनी दूसरे नंबर पर हैं। दिग्गज विकेटकीपर बल्लेबाज धोनी ने 200 वनडे में टीम इंडिया की कप्तानी की है और 6641 रन बनाए हैं।
धोनी ने अपनी कप्तानी में भारत को 2007 में पहले आईसीसी टी-20 विश्व कप और 2011 में वनडे विश्व कप में जीत दिलाई है। इसके अलावा टीम इंडिया ने धोनी की कप्तानी में 2013 में आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी भी जीती थी। धोनी की ही कप्तानी में भारत ने टेस्ट क्रिकेट में शीर्ष रैंकिंग हासिल की थी।
खेल / शौर्यपथ / टीम इंडिया के लिमिटेड ओवर्स के उपकप्तान सोशल मीडिया पर अपनी हाजिर जवाबी के लिए जाने जाते हैं। कोरोना वायरस की वजह से सभी क्रिकेट गतिविधियों पर ब्रेक लगा हुआ है। आईपीएल 2020 भी अनिश्चितकाल के लिए स्थगित है। देशभर में लगे लॉकडाउन के दौरान क्रिकेटरों ने भी घर में परिवार के साथ वक्त बिताया। इस दौरान ये क्रिकेटर सोशल मीडिया पर भी बराबर बने रहे। लॉकडाउन के दौरान रोहित शर्मा भी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव नजर आए। इस दौरान उन्होंने कई बार अपने साथी खिलाड़ियों को भी ट्रोल किया।
कुछ दिन पहले युजवेंद्र चहल को ट्रोल करने के बाद इस बार रोहित शर्मा ने अजिंक्य रहाणे की ट्रोलिंग की। दरअसल, अजिंक्य रहाणे लैपटॉप के सामने बैठे हुए अपनी एक तस्वीर शेयर की, जिस पर रोहित शर्मा ने उनकी खिंचाई कर दी।
अजिंक्य रहाणे ने इस तस्वीर को शेयर करते हुए कैप्शन दिया- ''हर दिन मैं कुछ समय अपने लिए निकालता हूं जहां मैं कुछ चीजों के बारे में सोचता हूं, उन्हें लिखता हूं और कुछ पुरानी तस्वीरें देखता हूं। यह मेरे दिमाग को शांत रखने में मदद करता है।''
रहाणे की पोस्ट पर जवाब देते हुए रोहित शर्मा ने लिखा, ''सच में भाई। तुम्हें जितना जल्दी हो सके खेलना शुरू कर देना चाहिए।'' इस पर अजिंक्य रहाण ने कहा, ''क्रिकेट शुरू होते ही हम भी शुरू।''
बता दें कि भारत के सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा ने कहा है कि वह चोट से उबरकर वापसी की तैयारी में थे, लेकिन कोरोना वायरस के कारण लागू लॉकडाउन की वजह से ऐसा नहीं कर सके और अब उन्हें राष्ट्रीय टीम में लौटने से पहले फिटनेस टेस्ट पास करना होगा। रोहित को फरवरी में न्यूजीलैंड दौरे के बीच से ही स्वदेश लौटना पड़ा था। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू सीरीज में भी उन्हें आराम दिया गया था। हालांकि, तीन मैचों की वनडे सीरीज पहला मैच बारिश की वजह से धुल गया था। इसके बाद कोरोना वायरस की वजह से दोनों बचे हुए मैच रद्द कर दिए गए थे।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
