
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
Google Analytics —— Meta Pixel
रायपुर / शौर्यपथ / सिकल सेल रोग नियंत्रण एवं जन-जागरूकता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए आनंद देव ताम्रकार को राज्य स्तरीय अलंकरण सम्मान समारोह में सम्मानित किया गया। राजधानी रायपुर स्थित होटल बेबीलोन इंटरनेशनल में आयोजित भव्य समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उन्हें राजकीय गमछा, छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान बस्तरिहा स्मृति-चिह्न तथा प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।
इस अवसर पर आनंद देव ताम्रकार ने इसे अपने जीवन का गौरवपूर्ण और अविस्मरणीय क्षण बताते हुए कहा कि यह सम्मान उन्हें समाज सेवा के क्षेत्र में और अधिक समर्पण एवं जिम्मेदारी के साथ कार्य करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं छत्तीसगढ़ राज्य फिल्म विकास निगम की प्रथम अध्यक्ष सुश्री मोना सेन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके विश्वास और मार्गदर्शन से यह उपलब्धि संभव हो सकी।
ताम्रकार ने कहा कि वे भविष्य में भी सिकल सेल रोग नियंत्रण, स्वास्थ्य जागरूकता और जनसेवा के क्षेत्र में पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करते रहेंगे, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक जागरूकता और स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ पहुंच सके।
यह सम्मान न केवल आनंद देव ताम्रकार के कार्यों की सराहना है, बल्कि सिकल सेल जैसी गंभीर बीमारी के खिलाफ समाज में जागरूकता फैलाने वाले सभी कार्यकर्ताओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।
रायपुर / शौर्यपथ / संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय, छत्तीसगढ़ द्वारा जारी पत्र दिनांक 12 जून 2026 के अनुसार राज्य की समस्त शासकीय एवं अशासकीय शालाओं में शैक्षणिक सत्र 2026-27 का विधिवत संचालन 16 जून 2026 (मंगलवार) से प्रारंभ किया जाएगा। इस संबंध में सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों पर प्रसारित की जा रही यह सूचना कि शैक्षणिक सत्र 01 जुलाई 2026 से प्रारंभ होगा, पूर्णतः असत्य, भ्रामक तथ्यों से परे एवं फर्जी है।
लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा स्पष्ट किया गया है कि विद्यालयों के संचालन की अधिकृत तिथि 16 जून 2026 ही है। अतः विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं आम नागरिकों से अपील की जाती है कि वे केवल विभाग द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास करें तथा सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट एवं भ्रामक जानकारी पर ध्यान न दें।
रायपुर / शौर्यपथ / विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी, छत्तीसगढ़ राज्य शाखा द्वारा लोकभवन में आयोजित सम्मान समारोह में राज्यपाल एवं छत्तीसगढ़ रेडक्रॉस सोसायटी के अध्यक्ष श्री रमेन डेका ने प्रदेश के 30 सर्वाधिक स्वैच्छिक रक्तदाताओं तथा विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।
इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि “दूसरे के जीवन की रक्षा करना मानवता का सबसे बड़ा धर्म है और रक्तदान सबसे बड़ा दान है। रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प नहीं है, इसलिए स्वैच्छिक रक्तदाता समाज के वास्तविक जीवनदाता हैं।” उन्होंने कहा कि थैलेसीमिया, सिकल सेल, एनीमिया, कैंसर, हिमोफिलिया तथा दुर्घटना जैसी आपात स्थितियों में रक्त जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर तय करता है।
राज्यपाल ने छत्तीसगढ़ के रक्तदाताओं की सेवा भावना की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने वर्षों से निःस्वार्थ भाव से रक्तदान कर हजारों लोगों को नया जीवन दिया है। उन्होंने रेडक्रॉस ब्लड बैंक की टीम के कार्यों की भी प्रशंसा की।
कार्यक्रम के दौरान रेडक्रॉस स्मारिका का विमोचन किया गया तथा लोकभवन में आयोजित रक्तदान शिविर में अधिकारियों, कर्मचारियों एवं नागरिकों ने उत्साहपूर्वक रक्तदान किया। समारोह में रेडक्रॉस पदाधिकारियों, स्वैच्छिक रक्तदाताओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रायपुर में आयोजित एनएचएम कर्मचारी संघ के प्रदेश स्तरीय महासम्मेलन में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए 33 दिनों की हड़ताल अवधि का वेतन देने की घोषणा की। उन्होंने एनएचएम कर्मियों को स्वास्थ्य व्यवस्था की “रीढ़ की हड्डी” बताते हुए दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में उनकी भूमिका की सराहना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना, डॉक्टरों एवं पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती तथा स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक सुदृढ़ हुई हैं। उन्होंने कोरोना काल में स्वास्थ्य कर्मियों के योगदान को याद करते हुए उनके समर्पण की प्रशंसा की।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बताया कि एनएचएम कर्मचारियों को कैशलेस उपचार योजना का लाभ मिलेगा तथा उनके लिए जीवन बीमा सुविधा भी लागू की गई है। इसके तहत सामान्य मृत्यु पर 6 लाख रुपये तथा दुर्घटना में मृत्यु या स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में 1.40 करोड़ रुपये तक की सहायता प्रदान की जाएगी।
कार्यक्रम में “मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान” की सफलता, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी तथा 116 नए विशेषीकृत स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना की जानकारी भी दी गई। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद एनएचएम कर्मचारियों ने उनका भव्य स्वागत और अभिनंदन किया।
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से की सौजन्य भेंट
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का शाल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय एवं निरंतर संवाद की भावना ने विकास कार्यों को नई गति प्रदान की है। इसी सहयोगात्मक दृष्टिकोण के परिणामस्वरूप जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंच रहा है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केंद्र और राज्य के बीच मजबूत साझेदारी से अधोसंरचना विकास, उद्योग, रोजगार, कौशल विकास तथा जनसेवा से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में नए अवसर निर्मित हो रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आपसी सहयोग और समन्वय से छत्तीसगढ़ के विकास को और अधिक मजबूती मिलेगी तथा विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने में सहायता प्राप्त होगी। इस अवसर पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल उपस्थित थे।
पेरिस/नई दिल्ली, । फ्रांस में आयोजित ‘भारत इनोवेट्स 2026’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-फ्रांस संबंधों को साझा मूल्यों, नवाचार और वैश्विक दृष्टि पर आधारित साझेदारी बताया। उन्होंने कहा कि भारत और फ्रांस केवल रणनीतिक सहयोगी नहीं, बल्कि मानवता की चुनौतियों के समाधान के लिए साथ काम करने वाले साझेदार हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है और देश के 2 लाख से अधिक स्टार्टअप्स कृषि, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), अंतरिक्ष, रक्षा, ग्रीन हाइड्रोजन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी तथा उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में वैश्विक स्तर के समाधान विकसित कर रहे हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की प्राथमिकता “Technology for Humanity” और “AI for All” है। भारत का मानना है कि किसी भी नवाचार की वास्तविक सफलता उसके मूल्यांकन (Valuation) में नहीं, बल्कि उसके मानवीय प्रभाव (Human Impact) में निहित होती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि पिछले 11-12 वर्षों में स्टार्टअप इंडिया, अटल टिंकरिंग लैब्स, हैकाथॉन, अनुसंधान संस्थानों और नवाचार केंद्रों के विस्तार से देश में मजबूत नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र विकसित हुआ है। महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, रक्षा एवं अंतरिक्ष क्षेत्र में स्टार्टअप्स की सक्रियता तथा हाल में परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में किए गए सुधारों को उन्होंने भारत के तकनीकी भविष्य की महत्वपूर्ण उपलब्धियां बताया।
उन्होंने कहा कि एक दशक पहले दुनिया भारत को तकनीक अपनाने वाले देश के रूप में देखती थी, जबकि आज भारत तकनीक और समाधान उपलब्ध कराने वाले देश के रूप में उभर रहा है।
कार्यक्रम में उपस्थित वैश्विक निवेशकों, विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को आमंत्रित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वे भारत में आकर डिजाइन, विकास, संयुक्त अनुसंधान, सह-निर्माण और दीर्घकालिक साझेदारी के नए अवसरों का लाभ उठाएं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि “Bharat Innovates” दुनिया को भारत के साथ मिलकर वैश्विक नवाचार के अगले अध्याय का सह-निर्माण करने का निमंत्रण है।
तीस हजारी फैमिली कोर्ट में भावनाओं का अनोखा दृश्य, कानूनी लड़ाई के बीच मानवता की मिसाल बनी पति की संवेदनशीलता, टूटता परिवार फिर हुआ एक
नई दिल्ली। कभी एक-दूसरे के खिलाफ अदालत में खड़े शिखा सिंह और सौरभ की कहानी ने दिल्ली के तीस हजारी फैमिली कोर्ट में मौजूद लोगों की आंखें नम कर दीं। तलाक की दहलीज तक पहुंच चुके इस दंपति के रिश्ते को आखिरकार किसी कानूनी दलील ने नहीं, बल्कि इंसानियत, संवेदना और परिवार के प्रति जिम्मेदारी ने बचा लिया।
वर्ष 2020 में विवाह बंधन में बंधे शिखा और सौरभ के रिश्तों में समय के साथ खटास बढ़ती गई। विवाद इतना गहरा गया कि शिखा ने सौरभ के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज करा दिया और मामला अदालत तक पहुंच गया। दोनों के बीच संवाद लगभग समाप्त हो चुका था और तलाक की प्रक्रिया चल रही थी।
इसी बीच परिस्थितियों ने अचानक ऐसा मोड़ लिया, जिसने दोनों के जीवन की दिशा बदल दी। शिखा के पिता को गंभीर हार्ट अटैक आया और उनकी हालत बेहद नाजुक हो गई। जब यह खबर सौरभ तक पहुंची, तो उन्होंने पुराने विवाद, आरोप और अदालत की लड़ाई को एक तरफ रख दिया। बिना किसी हिचकिचाहट के वे अस्पताल पहुंचे और अपने ससुर के इलाज की जिम्मेदारी संभाली।
सौरभ ने उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए गुरुग्राम के प्रतिष्ठित मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया तथा इलाज में हर संभव सहयोग किया। समय पर मिले उपचार और देखभाल के कारण शिखा के पिता की जान बच गई।
इसके बाद जब अगली सुनवाई के लिए दोनों तीस हजारी फैमिली कोर्ट पहुंचे, तो माहौल पूरी तरह बदल चुका था। शिखा ने महसूस किया कि रिश्ते केवल विवादों और आरोपों से नहीं, बल्कि मुश्किल समय में निभाए गए साथ और संवेदनाओं से भी परिभाषित होते हैं। सौरभ की मानवता और परिवार के प्रति उनके समर्पण ने उनके मन में जमी नाराजगी को पिघला दिया।
अदालत परिसर में ही भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। शिखा ने तलाक से जुड़े दस्तावेज फाड़ दिए और सौरभ को गले लगाकर फूट-फूटकर रो पड़ीं। दोनों ने अपने सारे मतभेद भुलाकर एक नई शुरुआत करने और साथ रहने का निर्णय लिया।
यह घटना केवल एक दंपति के पुनर्मिलन की कहानी नहीं, बल्कि इस बात का जीवंत उदाहरण है कि कभी-कभी रिश्तों को बचाने के लिए कानूनी फैसलों से अधिक जरूरी इंसानियत, संवेदनशीलता और मुश्किल वक्त में दिया गया साथ होता है। प्रेम जब करुणा और जिम्मेदारी के रूप में सामने आता है, तो टूटते हुए रिश्तों को भी फिर से जोड़ सकता है।
चार दुकानों की जांच में भारी स्टॉक कमी उजागर, जिला खाद्य विभाग की कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल
दुर्ग। दुर्ग नगर निगम क्षेत्र की शासकीय उचित मूल्य दुकानों में सामने आ रही करोड़ों रुपये के राशन घोटाले जैसी गंभीर अनियमितताओं ने जिला खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। विडंबना यह है कि विभागीय जांच प्रतिवेदनों में बार-बार एक ही व्यक्ति का नाम सामने आने, लाखों रुपये मूल्य के खाद्यान्न की कमी पाए जाने और स्वयं जांच अधिकारियों द्वारा अनियमितताओं की पुष्टि किए जाने के बावजूद अब तक किसी भी प्रकार की आपराधिक कार्रवाई या एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।
जिला खाद्य विभाग के रिकॉर्ड में उपलब्ध चार अलग-अलग जांच प्रतिवेदनों का अध्ययन करने पर चौंकाने वाले तथ्य सामने आते हैं। इन सभी मामलों में किसी न किसी रूप में नवीन राजपूत का नाम दुकान संचालन और खाद्यान्न वितरण से जुड़ा हुआ पाया गया है।
पहली जांच : 490 क्विंटल से अधिक चावल का अंतर
24 जनवरी 2025 को आईडी 431001006 की आकस्मिक जांच में ऑनलाइन स्टॉक और भौतिक स्टॉक के बीच भारी अंतर पाया गया। जांच प्रतिवेदन के अनुसार लगभग 490.66 क्विंटल चावल तथा 14 लीटर केरोसिन भौतिक रूप से कम पाया गया। विक्रेता ने इस संबंध में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया और बताया कि वह केवल नवीन राजपूत के निर्देश पर खाद्यान्न वितरण करता है।
दूसरी जांच : 1169 क्विंटल चावल का अंतर
7 दिसंबर 2024 को आईडी 431001025 की जांच में स्थिति और भी गंभीर मिली। विभागीय प्रतिवेदन के अनुसार 1169.72 क्विंटल चावल, 1.12 क्विंटल शक्कर, 4.19 क्विंटल नमक तथा 21 लीटर केरोसिन स्टॉक में कम पाया गया।
जांच के दौरान विक्रेता ने स्वीकार किया कि वह केवल खाद्यान्न वितरण का कार्य करता है और संचालन संबंधी निर्देश नवीन राजपूत द्वारा दिए जाते हैं।
तीसरी जांच : मोहन नगर पश्चिम दुकान में 431 क्विंटल चावल कम
20 फरवरी 2025 को आईडी 431001017 की जांच में भी 431.03 क्विंटल चावल भौतिक रूप से कम पाया गया। यहां स्वयं नवीन राजपूत का कथन दर्ज किया गया जिसमें उन्होंने तकनीकी कारणों और एपीएल-बीपीएल स्टॉक के मिश्रित प्रदर्शन का तर्क दिया।
प्रश्न यह है कि यदि वास्तव में तकनीकी समस्या थी तो इसकी सूचना तत्काल विभाग को क्यों नहीं दी गई? और यदि दी गई थी तो उसका रिकॉर्ड कहां है?
चौथी जांच : दुकान का पूरा संचालन नवीन राजपूत के हाथ में होने की स्वीकारोक्ति
आईडी 431001073 की जांच रिपोर्ट सबसे गंभीर मानी जा रही है।
प्रतिवेदन में उल्लेख है कि:
दुकान की अध्यक्ष को स्टॉक और रिकॉर्ड की जानकारी नहीं थी।
नियुक्त विक्रेता कार्य नहीं कर रही थी।
किसी अन्य व्यक्ति के मोबाइल पर OTP प्राप्त कर ई-पॉस मशीन संचालित की जा रही थी।
नवीन राजपूत ने स्वीकार किया कि दुकान का पूर्ण संचालन उनके द्वारा किया जाता है।
उन्होंने कम पाए गए खाद्यान्न की भरपाई दो माह में करने की बात भी कही।
यह स्वीकारोक्ति अपने आप में कई गंभीर प्रशासनिक और आपराधिक प्रश्न खड़े करती है।
आखिर एफआईआर क्यों नहीं?
यदि कोई सामान्य नागरिक हजार या दो हजार रुपये की चोरी के आरोप में पकड़ा जाता है तो पुलिस तत्काल अपराध दर्ज कर कार्रवाई करती है। लेकिन यहां विभागीय रिकॉर्ड में सैकड़ों-हजारों क्विंटल खाद्यान्न की कमी दर्ज होने, बार-बार अनियमितताएं सामने आने और लाखों रुपये मूल्य के सरकारी राशन का हिसाब नहीं मिलने के बावजूद अब तक एफआईआर दर्ज नहीं होना आश्चर्यजनक है।
जानकारी के अनुसार अप्रैल 2025 तक जिले में लगभग 9 करोड़ रुपये मूल्य के खाद्यान्न की कमी से संबंधित मामलों का संज्ञान विभाग द्वारा लिया जा चुका था। यदि यह तथ्य सही है तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि इतने बड़े वित्तीय नुकसान के मामलों में आपराधिक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या कलेक्टर को पूरी सच्चाई बताई जा रही है?
जिले में लगातार सामने आ रही जांच रिपोर्टों और विभागीय नोटशीटों के बावजूद यदि कार्रवाई केवल नोटिस, जवाब-तलब और फाइलों तक सीमित है तो यह भी जांच का विषय है कि कहीं जिला प्रशासन और कलेक्टर स्तर तक मामलों की गंभीरता को कम करके तो प्रस्तुत नहीं किया जा रहा।
क्योंकि उपलब्ध दस्तावेज बताते हैं कि अनियमितताएं कोई एक बार की घटना नहीं बल्कि लगातार सामने आ रही हैं।
नई दुकानों का आवंटन और पुराने सवाल
इसी बीच नई राशन दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। ऐसे समय में सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जिन मामलों में जांच प्रतिवेदन तैयार हो चुके हैं, वहां जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध क्या दंडात्मक कार्रवाई होगी?
क्या लाखों रुपये मूल्य के राशन की कमी को केवल विभागीय नोटिसों तक सीमित कर दिया जाएगा?
क्या दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज होगी?
क्या राशन घोटाले की स्वतंत्र जांच कराई जाएगी?
क्या जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी समीक्षा होगी?
जनता जानना चाहती है जवाब
दुर्ग शहर प्रदेश के वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों का राजनीतिक केंद्र माना जाता है। ऐसे में सार्वजनिक वितरण प्रणाली जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था में सामने आई गंभीर अनियमितताओं पर यदि कठोर कार्रवाई नहीं होती तो इससे पूरे तंत्र की विश्वसनीयता प्रभावित होगी।
अब निगाहें जिला प्रशासन, कलेक्टर दुर्ग और खाद्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर टिकी हैं। जनता यह जानना चाहती है कि सरकारी राशन के लाखों रुपये के इस कथित खेल में आखिर जिम्मेदार कौन है और उन पर कार्रवाई कब होगी?
क्योंकि जांच प्रतिवेदन तो बहुत कुछ कह रहे हैं, लेकिन कार्रवाई अब भी सवालों के घेरे में है।
दिल्ली के उमराव सिंह ज्वैलर्स में 2023 की सनसनीखेज चोरी का खुलासा, दुर्ग और दिल्ली पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 18.5 किलो सोना-हीरा बरामद, आरोपी लोकेश श्रीवास गिरफ्तार।
दुर्ग/नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में वर्ष 2023 की सबसे चर्चित और दुस्साहसिक ज्वेलरी चोरी की वारदातों में शामिल ‘उमराव सिंह ज्वैलर्स मेगा हेइस्ट’ का खुलासा करते हुए दुर्ग और दिल्ली पुलिस ने महज चार दिनों के भीतर मास्टरमाइंड लोकेश श्रीवास को भिलाई के स्मृति नगर से गिरफ्तार कर लिया था। करीब 20 से 25 करोड़ रुपये मूल्य के सोने, हीरे के आभूषण और नकदी की चोरी करने वाले इस शातिर अपराधी को पकड़कर पुलिस ने लगभग शत-प्रतिशत माल बरामद कर लिया था।
यह मामला न केवल चोरी की बड़ी वारदात के कारण बल्कि आरोपी की पेशेवर कार्यशैली, डिजिटल ट्रैकिंग और पुलिस के तेज़ एवं समन्वित ऑपरेशन के कारण पूरे देश में चर्चा का विषय बना था।
पुलिस जांच के अनुसार, 24 सितंबर 2023 (रविवार) की रात लगभग 10:45 बजे लोकेश श्रीवास दिल्ली के भोगल इलाके में स्थित प्रतिष्ठित उमराव सिंह ज्वैलर्स के समीप पहुंचा। उसने पहले से की गई रेकी के आधार पर शोरूम के बगल की इमारत की छत से प्रवेश का रास्ता चुना।
हाथ में हथौड़ी, छीनी और कटर मशीन लेकर वह छत से नीचे उतरा और शोरूम की मजबूत कंक्रीट दीवार में बड़ा सुराख कर अंदर प्रवेश कर गया। अंदर पहुंचते ही उसने सीसीटीवी कैमरों और सुरक्षा अलार्म सिस्टम को निष्क्रिय कर दिया ताकि उसकी गतिविधियां रिकॉर्ड न हो सकें।
25 सितंबर 2023 (सोमवार) को पूरा बाजार बंद था। इसी का फायदा उठाकर लोकेश करीब 15 से 18 घंटे तक शोरूम के भीतर ही मौजूद रहा।
उसने स्ट्रॉन्ग रूम की दीवार काटकर अंदर प्रवेश किया और बेहद सुनियोजित तरीके से सोने के आभूषण, हीरे-जवाहरात तथा नकदी समेटता रहा। पुलिस के अनुसार आरोपी ने अकेले ही इस पूरी वारदात को अंजाम दिया।
शोरूम के भीतर कई घंटे बिताने के बाद वह करोड़ों रुपये का माल लेकर फरार हो गया और बस के माध्यम से छत्तीसगढ़ की ओर निकल पड़ा।
26 सितंबर 2023 (मंगलवार) को सुबह लगभग 10:30 बजे जब शोरूम के संचालक दुकान खोलने पहुंचे तो स्ट्रॉन्ग रूम में सेंधमारी और करोड़ों के माल की चोरी का पता चला।
घटना की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस की कई टीमें सक्रिय हो गईं। शोरूम के कैमरे बंद होने के कारण शुरुआती जांच चुनौतीपूर्ण थी, लेकिन पुलिस ने तकनीकी जांच का सहारा लिया।
हालांकि आरोपी ने शोरूम के सभी कैमरे बंद कर दिए थे, लेकिन भागते समय वह कश्मीरी गेट आईएसबीटी के एक बाहरी सीसीटीवी कैमरे में दिखाई दे गया।
दिल्ली पुलिस ने फुटेज से प्राप्त तस्वीरों का तकनीकी विश्लेषण किया। जांच के दौरान आरोपी की तस्वीर पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और छत्तीसगढ़ पुलिस की प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़ी तस्वीरों से मेल खा गई।
इसके बाद मोबाइल सर्विलांस, कॉल डिटेल्स और डिजिटल लोकेशन ट्रैकिंग के जरिए पुलिस को यह महत्वपूर्ण सुराग मिला कि आरोपी दिल्ली छोड़कर छत्तीसगढ़ पहुंच चुका है।
जांच के दौरान मिले इनपुट के आधार पर दिल्ली पुलिस की टीम छत्तीसगढ़ पहुंची। दुर्ग पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपी ने भिलाई के स्मृति नगर क्षेत्र में पुलिस चौकी के पास ही किराए का कमरा लिया हुआ है।
29 सितंबर 2023 की सुबह दुर्ग जिला पुलिस और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीम ने उसके ठिकाने पर दबिश दी।
पुलिस को देखते ही लोकेश श्रीवास ने खिड़की से कूदकर भागने का प्रयास किया, लेकिन पहले से घेराबंदी कर चुकी पुलिस टीम ने उसे मौके पर ही दबोच लिया।
गिरफ्तारी के बाद की गई तलाशी में पुलिस ने आरोपी के कब्जे से लगभग 18.5 किलोग्राम सोना, बड़ी मात्रा में हीरे के आभूषण और करीब 12.5 लाख रुपये नकद बरामद किए।
चोरी का अधिकांश माल सूटकेस और बोरों में भरकर छिपाया गया था। बरामदगी की मात्रा इतनी अधिक थी कि इसे देश की हालिया सबसे बड़ी और सफल रिकवरी में शामिल माना गया।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में दुर्ग पुलिस की सक्रियता और स्थानीय स्तर पर जुटाई गई खुफिया जानकारी निर्णायक साबित हुई। दिल्ली पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर आरोपी को पकड़ने और करोड़ों का माल बरामद करने में दुर्ग पुलिस ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
महज 96 घंटे के भीतर देशभर में चर्चा का विषय बनी इस चोरी का खुलासा कर पुलिस ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की थी।
? 24 सितंबर 2023, रात 10:45 बजे – लोकेश श्रीवास शोरूम में दाखिल हुआ।
? 25 सितंबर 2023 – बंद बाजार का फायदा उठाकर स्ट्रॉन्ग रूम से करोड़ों की ज्वेलरी चोरी की।
? 26 सितंबर 2023, सुबह 10:30 बजे – शोरूम खुलने पर चोरी का खुलासा।
? 29 सितंबर 2023, तड़के – भिलाई के स्मृति नगर से आरोपी गिरफ्तार।
? 18.5 किलो सोना, हीरे और ₹12.5 लाख नकद बरामद।
? कुल चोरी का मूल्य: लगभग ₹20 से ₹25 करोड़।
नई दिल्ली, ।
दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने प्रमुख क्षेत्रों में चल रहे उपायों की व्यापक समीक्षा करते हुए राज्यों और संबंधित एजेंसियों को सख्त एवं समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। आयोग की सुरक्षा एवं प्रवर्तन उप-समिति की 25वीं बैठक में दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पंजाब सरकारों द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रगति का मूल्यांकन किया गया।
बैठक में वाहन प्रदूषण नियंत्रण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए 1 अक्टूबर 2026 से बिना वैध पीयूसीसी वाले वाहनों को ईंधन उपलब्ध नहीं कराने की व्यवस्था लागू करने हेतु पेट्रोल पंपों एवं सीएनजी स्टेशनों पर एएनपीआर कैमरे लगाने की समीक्षा की गई। साथ ही स्वच्छ परिवहन, बीएस-III और उससे पुराने वाहनों पर कार्रवाई तथा यातायात जाम वाले क्षेत्रों में प्रदूषण कम करने के उपायों पर भी चर्चा हुई।
सड़क धूल एवं निर्माण अपशिष्ट प्रबंधन के तहत दिल्ली में प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले 5,500–6,000 मीट्रिक टन सीएंडडी कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण, प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने और मैकेनिकल रोड स्वीपिंग को तेज करने पर जोर दिया गया।
पराली जलाने की घटनाओं को पूरी तरह समाप्त करने के लक्ष्य के साथ पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की तैयारियों की समीक्षा की गई। आयोग ने ईंट भट्टों में पराली आधारित बायोमास पेलेट्स के उपयोग को चरणबद्ध रूप से बढ़ाकर 1 नवंबर 2026 तक न्यूनतम 30 प्रतिशत सुनिश्चित करने के निर्देशों के पालन पर विशेष जोर दिया।
नगरपालिका ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, खुले में कचरा जलाने की रोकथाम, लैंडफिल स्थलों पर आग नियंत्रण और प्रदूषण निगरानी ढांचे को मजबूत बनाने की दिशा में भी प्रगति की समीक्षा की गई।
बैठक में उद्योगों के लिए नए उत्सर्जन मानकों के अनुपालन को लेकर स्पष्ट चेतावनी दी गई कि निर्धारित पीएम उत्सर्जन सीमा का पालन नहीं करने वाली औद्योगिक इकाइयों पर बंदी सहित कठोर कार्रवाई की जाएगी।
सीएक्यूएम ने स्पष्ट किया कि वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए सभी एजेंसियां सख्त प्रवर्तन, नियमित समीक्षा और त्वरित सुधारात्मक कदमों के साथ निर्धारित समयसीमा में निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
