Google Analytics —— Meta Pixel
June 16, 2026
Hindi Hindi

राजपत्र 28 जनवरी 2017 के नियमों से खिलवाड़? दुर्ग खाद्य विभाग पर फिर उठे सवाल

  • rounak group

80 लाख का राशन गायब, एक ही नाम बार-बार सामने आया, अब नई राशन दुकानों के आवंटन पर भी संशय
नियम कहता है 3 वर्ष पुराना समूह, विभाग मांग रहा केवल 3 माह का अनुभव; 8 दुकानों पर एक ही व्यक्ति के नियंत्रण की चर्चा से मचा हड़कंप

  दुर्ग, शौर्यपथ विशेष।
दुर्ग जिला खाद्य विभाग एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। पहले करोड़ों रुपये मूल्य के राशन की कमी, बार-बार जांच प्रतिवेदनों में एक ही व्यक्ति का नाम सामने आने और अब तक एफआईआर दर्ज नहीं होने को लेकर विभाग चर्चा में था, वहीं अब नई राशन दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया ने भी कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या जिला खाद्य विभाग स्वयं छत्तीसगढ़ शासन के नियमों का पालन कर रहा है अथवा अपने अलग नियमों के आधार पर राशन दुकानों का आवंटन करने की तैयारी चल रही है?
राजपत्र 28 जनवरी 2017 बनाम खाद्य विभाग की नई शर्तें
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा प्रकाशित राजपत्र दिनांक 28 जनवरी 2017 के अनुसार उचित मूल्य दुकान संचालन हेतु महिला स्व-सहायता समूहों के लिए स्पष्ट पात्रता निर्धारित की गई है।
राजपत्र के बिंदु 62(15) के अंतर्गत उल्लेखित प्रावधान क्रमांक-9 के अनुसार संबंधित समूह कम से कम तीन वर्ष पूर्व से पंजीकृत एवं सक्रिय रूप से कार्यरत होना चाहिए।
इसके विपरीत जिला खाद्य विभाग द्वारा हाल ही में जारी आवेदन प्रक्रिया में मात्र तीन माह पुराने समूहों को भी पात्र मानने जैसी शर्तें सामने आई हैं।
यही कारण है कि राशन दुकान संचालकों, महिला समूहों और आवेदकों के बीच यह चर्चा तेजी से फैल रही है कि आखिर विभाग शासन के राजपत्र का पालन कर रहा है या अपने स्तर पर नए नियम बना रहा है।
निरस्त हुईं 9 दुकानें, 24 दुकानों के लिए चल रही प्रक्रिया
जानकारी के अनुसार दुर्ग निगम क्षेत्र में 9 राशन दुकानों का संचालन निरस्त किया जा चुका है। वहीं जिले में कुल 24 दुकानों के संचालन हेतु नए महिला स्व-सहायता समूहों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।
लेकिन आवेदन प्रक्रिया शुरू होते ही पात्रता शर्तों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
8 दुकानों पर एक व्यक्ति के नियंत्रण की चर्चा
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी तेजी से फैल रही है कि दुर्ग नगर निगम क्षेत्र की राशन दुकान क्रमांक 100077, 1003, 1006, 1029, 1051, 1062, 1073 एवं 1077 का संचालन प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से एक ही व्यक्ति द्वारा प्रभावित किया जा रहा है।
चर्चा यह भी है कि जिन समूहों को दुकानें आवंटित की गई हैं, उनमें से कुछ का वास्तविक निवास और संचालन क्षेत्र संबंधित वार्डों से बाहर, भिलाई निगम क्षेत्र में है।
जबकि शासन की मूल भावना यह रही है कि संबंधित क्षेत्र के पात्र महिला समूहों को प्राथमिकता मिले ताकि स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे।
यदि इन चर्चाओं में तथ्य हैं तो यह विषय गंभीर प्रशासनिक जांच की मांग करता है।
पहले भी जांच प्रतिवेदनों में सामने आया था एक नाम
दुर्ग खाद्य विभाग के उपलब्ध जांच प्रतिवेदनों के अनुसार चार अलग-अलग राशन दुकानों की जांच में भारी स्टॉक कमी सामने आई थी।
कहीं 490 क्विंटल से अधिक चावल का अंतर मिला, कहीं 1169 क्विंटल चावल सहित अन्य खाद्यान्न कम पाया गया, तो कहीं 431 क्विंटल चावल की कमी दर्ज हुई।
इन जांच प्रतिवेदनों में कई बार नवीन राजपूत का नाम दुकान संचालन और खाद्यान्न वितरण से जुड़ा हुआ दर्ज किया गया।
एक जांच प्रतिवेदन में तो स्वयं यह स्वीकारोक्ति दर्ज है कि दुकान का संचालन उनके द्वारा किया जा रहा था।
इसके बावजूद अब तक किसी भी प्रकार की आपराधिक कार्रवाई या एफआईआर दर्ज नहीं होने से विभागीय कार्रवाई पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
अपील में मामला तो निरस्तीकरण किस आधार पर?
इस पूरे प्रकरण में एक नया प्रश्न तब सामने आया जब जिला खाद्य नियंत्रक द्वारा जानकारी दी गई कि नवीन राजपूत से संबंधित मामला अपील में विचाराधीन है।
यदि मामला वास्तव में अपील में लंबित है तो फिर संबंधित राशन दुकानों का निरस्तीकरण किन आधारों पर किया गया?
और यदि निरस्तीकरण वैधानिक रूप से सही है तो फिर अपील लंबित होने का तर्क किस सीमा तक प्रभावी माना जाएगा?
यह ऐसा प्रश्न है जिसका स्पष्ट उत्तर अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।
क्या दोहराई जा रही है पुरानी गलती?
जिन जांच प्रतिवेदनों में पहले भारी अनियमितताएं सामने आ चुकी हैं, उन्हीं परिस्थितियों जैसी चर्चाएं एक बार फिर राशन दुकान आवंटन प्रक्रिया में सुनाई दे रही हैं।
ऐसे में आशंका व्यक्त की जा रही है कि कहीं विभाग उन परिस्थितियों को दोबारा जन्म तो नहीं दे रहा जिनके कारण पूर्व में राशन वितरण व्यवस्था विवादों में आई थी।
जिलाधीश के संज्ञान की प्रतीक्षा
अब निगाहें जिला कलेक्टर दुर्ग पर टिकी हैं।
मुख्य प्रश्न हैं—
क्या छत्तीसगढ़ राजपत्र दिनांक 28 जनवरी 2017 के प्रावधानों का अक्षरशः पालन किया जा रहा है?
क्या पात्रता शर्तों में बदलाव शासन स्तर से स्वीकृत है?
क्या एक व्यक्ति के प्रभाव में कई राशन दुकानों के संचालन संबंधी चर्चाओं की जांच होगी?
क्या पूर्व जांच प्रतिवेदनों में सामने आई खाद्यान्न कमी के मामलों में एफआईआर दर्ज होगी?
क्या जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी समीक्षा की जाएगी?
दुर्ग जिले की सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़े इन सवालों के जवाब अब केवल विभागीय फाइलों में नहीं, बल्कि जनता के बीच भी तलाशे जा रहे हैं।
क्योंकि राशन केवल खाद्यान्न नहीं, बल्कि करोड़ों गरीब हितग्राहियों के अधिकारों से जुड़ा विषय है।

Rate this item
(0 votes)

Leave a comment

Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.

हमारा शौर्य

हमारे बारे मे

whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
 
CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
CONTECT NO.  -  8962936808
EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)