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नई दिल्ली ।
संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र के पहले ही दिन केंद्र सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए परिसीमन (डीलिमिटेशन) से जुड़े महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक पेश किए। इसके साथ ही लोकसभा की सीटों में भारी वृद्धि और महिलाओं को 33% आरक्षण देने का प्रस्ताव देश की राजनीति के केंद्र में आ गया है। सत्ता और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर तीखी टकराहट देखने को मिली।
सरकार के अनुसार, यह पहल महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को ऐतिहासिक स्तर पर बढ़ाने के उद्देश्य से लाई गई है। प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं—
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे लोकतंत्र के इतिहास का “महत्वपूर्ण क्षण” बताते हुए कहा—
“देश की बहनों पर भरोसा करें, 33 प्रतिशत महिलाओं को यहां आने दें और उन्हें निर्णय करने दें।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट संकेत दिया कि इस प्रस्ताव का विरोध राजनीतिक रूप से भारी पड़ सकता है।
केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि परिसीमन के बाद हर राज्य में सीटों की संख्या बढ़ेगी और महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलेगा।
बीजेपी और उसके सहयोगी दलों का तर्क है कि—
विपक्ष ने इस प्रस्ताव को लेकर गंभीर आपत्तियां उठाई हैं और इसे केवल महिला सशक्तिकरण का मुद्दा मानने से इनकार किया है।
मुख्य आरोप:
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे “खतरनाक योजना” बताते हुए कहा—
विपक्ष और दक्षिणी राज्यों के नेताओं की सबसे बड़ी चिंता—
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने इसे
“तमिलों पर हमला” बताते हुए विरोध प्रदर्शन तक किया।
केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने इसे
“जनसंख्या नियंत्रण में सफल राज्यों के साथ अन्याय” करार दिया।
कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल ने सवाल उठाया—
विपक्ष का कहना है कि यह विधेयक
इस पूरे विवाद का केंद्र एक जटिल सवाल है—
? क्या महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना जरूरी है?
वर्तमान बनाम संभावित स्थिति (विपक्ष के अनुमान अनुसार):
| राज्य | वर्तमान सीटें | संभावित सीटें |
|---|---|---|
| उत्तर प्रदेश | 80 | ~120 |
| तमिलनाडु | 39 | ~59 |
? अंतर 41 से बढ़कर 60+ तक जा सकता है — यही असंतुलन की आशंका विपक्ष जता रहा है।
यह प्रस्ताव एक साथ दो बड़े बदलावों का संकेत देता है—
सरकार इसे “न्याय और सशक्तिकरण” की दिशा में कदम बता रही है,
जबकि विपक्ष इसे “संवैधानिक संतुलन और प्रतिनिधित्व के साथ जोखिम” के रूप में देख रहा है।
स्पष्ट है कि यह केवल एक विधेयक नहीं, बल्कि 2029 और उसके बाद की भारतीय राजनीति की दिशा तय करने वाला निर्णायक मोड़ बन सकता है।
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
