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नई दिल्ली /
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा केरल का आधिकारिक नाम बदलकर 'केरलमÓ किए जाने के ऐतिहासिक निर्णय पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राज्य के लोगों को हार्दिक बधाई दी है। यह फैसला केरल के लोगों की लंबे समय से चली आ रही सांस्कृतिक और भाषाई मांग को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सम्मानजनक कदम माना जा रहा है।
राज्य की विरासत को उसकी असली पहचान
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ङ्ग पर साझा किए गए अपने संदेश में श्री अमित शाह ने कहा कि 'केरलमÓ नाम राज्य की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भाषाई विरासत को उसकी पूरी सच्चाई के साथ प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने कहा कि यह नाम न केवल राज्य की प्राचीन पहचान को सहेजता है, बल्कि उसके गौरव और आत्मसम्मान को भी बनाए रखेगा।
लंबे समय की मांग को मिला संवैधानिक सम्मान
श्री शाह ने कहा कि केंद्र सरकार का यह निर्णय केरलवासियों की उस भावना का सम्मान है, जो वर्षों से अपनी मातृभाषा और परंपरा के अनुरूप राज्य के नाम को मान्यता दिलाने की मांग कर रहे थे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम भारत की विविधता में एकता के सिद्धांत को और अधिक सशक्त करता है।
मोदी सरकार की सांस्कृतिक संवेदनशीलता का प्रतीक
राजनीतिक और सांस्कृतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह निर्णय मोदी सरकार की उस नीति को दर्शाता है, जिसमें स्थानीय पहचान, भाषा और परंपरा को राष्ट्रीय सम्मान देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इससे पहले भी केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नामों को पुनस्र्थापित करने की दिशा में कई अहम फैसले किए हैं।
केरलम: नाम नहीं, आत्मा की पहचान
'केरलमÓ शब्द मलयालम भाषा और राज्य की सभ्यता से गहराई से जुड़ा हुआ है। यह नाम राज्य के इतिहास, समुद्री व्यापार, आयुर्वेद, साहित्य और सामाजिक चेतना की पहचान को और अधिक प्रामाणिक रूप में प्रस्तुत करता है।
नवंबर 2025 में दोनों पक्षों ने वार्ता के लिए संदर्भ की शर्तों (टीओआर) पर हस्ताक्षर कर एक संरचित ढांचा तैयार किया था। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और इजरायल के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार 3.62 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा। दोनों देश कई क्षेत्रों में एक-दूसरे के पूरक हैं, ऐसे में प्रस्तावित एफटीए से व्यापार में स्थिरता और पूर्वानुमेयता आएगी, विशेषकर एमएसएमई क्षेत्र को इसका लाभ मिलेगा।
वार्ता के इस दौर में तकनीकी विशेषज्ञ वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार, रूल्स ऑफ ओरिजिन, स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता उपाय (SPS), व्यापार में तकनीकी बाधाएं (TBT), सीमा शुल्क प्रक्रिया एवं व्यापार सुगमीकरण, तथा बौद्धिक संपदा अधिकार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा करेंगे।
उद्घाटन सत्र में वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि यह वार्ता 25-26 फरवरी 2026 को नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा के अवसर पर प्रारंभ होना दोनों देशों के लिए विशेष महत्व रखता है। उन्होंने नवाचार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, हाई-टेक विनिर्माण, कृषि और सेवाओं के क्षेत्रों में अपार संभावनाओं पर जोर दिया।
भारत के मुख्य वार्ताकार और वाणिज्य विभाग के अपर सचिव अजय भादू ने संतुलित और भविष्योन्मुखी समझौते की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं इजरायल की मुख्य वार्ताकार यिफ़त अलोन पेरेल ने कहा कि यह एफटीए आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने, सहयोग बढ़ाने और नए बाजारों के द्वार खोलने में सहायक होगा।
यह पहल भारत-इजरायल संबंधों के रणनीतिक महत्व को रेखांकित करती है। दोनों देश एक संतुलित, पारस्परिक रूप से लाभकारी और दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी को साकार करने की दिशा में प्रतिबद्ध हैं। प्रस्तावित एफटीए को द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत करने के लिए एक अहम कदम माना जा रहा है।
इसी योजना से सूरजपुर जिला के प्रतापपुर जनपद पंचायत अंतर्गत जजावल ग्राम पंचायत निवासी अकालू पिता भुवाली के जीवन में नई सुबह आई है। कभी भटके रास्ते पर चल पड़े और बाद में आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटे अकालू को शासन की विशेष परियोजना के तहत प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) से पक्का मकान मिला है।
पहले अकालू और उनका परिवार जर्जर एवं असुरक्षित कच्चे मकान में रहने को मजबूर था। हर मौसम में डर और असुरक्षा का वातावरण बना रहता था। योजना के अंतर्गत मिली आर्थिक सहायता से अब उनका पक्का घर बन चुका है, जिससे उनके परिवार को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिला है।
अकालू का कहना है कि शासन की इस पहल ने उन्हें समाज में नई पहचान और आत्मविश्वास दिया है। आत्मसमर्पण के बाद पुनर्वास की दिशा में मिला यह सहयोग उनके लिए किसी नई शुरुआत से कम नहीं है।
यह कहानी केवल एक व्यक्ति के जीवन परिवर्तन की मिसाल नहीं, बल्कि यह संदेश भी देती है कि सही मार्ग चुनने वालों के साथ शासन हर कदम पर खड़ा है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) जरूरतमंद परिवारों को केवल मकान ही नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और भविष्य की नई उम्मीद भी प्रदान कर रही है।
अकालू का पक्का घर आज इस बात का प्रतीक है कि विकास और पुनर्वास की योजनाएँ समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखती हैं।
विकासखंड के अंतर्गत माध्यमिक शाला पतरापाली का किचन गार्डन पोषण सुदृढ़ीकरण का प्रेरक उदाहरण बन चुका है। जिला शिक्षा अधिकारी के निर्देशन एवं विकास खंड शिक्षा अधिकारी के मार्गदर्शन में संचालित इस योजना के तहत विद्यालय परिसर में शिक्षकों की देखरेख में सब्जियों की खेती की जा रही है।
इसी क्रम में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक बगीचे से लगभग 4 किलोग्राम ताज़ी सेमी (फली) की तुड़ाई की, जिसे सीधे मध्यान्ह भोजन में शामिल किया गया। इससे बच्चों को अतिरिक्त पोषण मिल रहा है और भोजन की गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
बच्चे स्वयं पौधों की देखभाल, सिंचाई, निराई-गुड़ाई और तुड़ाई जैसी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। इस प्रक्रिया से वे श्रम का महत्व समझ रहे हैं और कृषि एवं पर्यावरण के प्रति व्यावहारिक ज्ञान अर्जित कर रहे हैं।
विद्यालय के शिक्षक योगेश साहू ने बताया कि योजना का उद्देश्य विद्यार्थियों को पोषणयुक्त भोजन उपलब्ध कराने के साथ-साथ जैविक खेती के प्रति जागरूक बनाना है। ताज़ी सब्जियों के उपयोग से मध्यान्ह भोजन की पौष्टिकता बढ़ी है, जिसका सकारात्मक प्रभाव बच्चों के स्वास्थ्य में स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है।
विद्यालय परिवार का मानना है कि इस तरह की गतिविधियाँ बच्चों में प्रकृति प्रेम, जिम्मेदारी और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित करती हैं।
इस अवसर पर शिक्षक कृष्णकुमार यादव, अनिता सिंह, योगेश साहू, रघुनाथ जायसवाल सहित अभिभावक एवं स्थानीय समुदाय के सदस्य उपस्थित रहे। अभिभावकों ने विद्यालय प्रबंधन की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी योजनाएँ बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य दोनों के लिए अत्यंत लाभकारी हैं।
विद्यालय प्रशासन ने संकल्प लिया है कि किचन गार्डन में आगे भी विभिन्न मौसमी सब्जियों की खेती जारी रखी जाएगी, ताकि बच्चों को निरंतर पौष्टिक आहार और व्यवहारिक शिक्षा मिलती रहे।
भिलाई / शौर्यपथ / माहे रमजान जारी है और इन दिनों रोजेदारों की दिनचर्या भी बदल गई है। रोजा रखते हुए खास इबादत में लोग डूबे हैं। रोजाना सहरी के वक्त सुबह उठने से लेकर शाम को इफ्तार और रात में विशेष नमाज तरावीह में लोग अपनी भागीदारी दे रहे हैं। रमजान के इस खास महीने की अजमत को देखते हुए लोग इबादत के साथ-साथ दूसरी तैयारियों में भी व्यस्त हैं। मस्जिदों में नमाजियों की तादाद बढ़ गई है, वहीं अफ्तार के वक्त लोग एक साथ रोजा खोलने जुट रहे हैं।
मस्जिद आयशा हाउसिंग बोर्ड भिलाई के इमाम व खतीब मौलाना सैय्यद फैसल अमीन कहते हैं कहा कि इसी महीने में अल्लाह ने अपने आखिरी नबी हजऱत मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहिस्सलाम पर पवित्र कुरान नाजिल की और इसे तेइस साल में पूरा किया गया। इस महीने के रोजों को फज़ऱ् किया गया है। मुफ्ती मोहम्मद सोहेल काजी दारूल कजा भिलाई कहते हैं रोजा पाबंदी से रखना चाहिए क्योंकि यह हर बालिग मर्द और औरतें पर फज़ऱ् है। अगर कोई बीमार है या सफऱ में है तो उसको कुछ छूट है लेकिन बाद में उसकी भरपाई जरूर करे। जब बीमार सेहतमंद हो जाए और मुसाफिर अपने मुकाम पर पहुंच जाए। शेखुल हदीस मौलाना जकरिया रहमतुल्लाह अलैहि ने अपने रिसाले फजाईले रमजान मुबारक मे लिखा है कि खुदा की तरफ़ से अपने बंदों पर रमजान बहुत बड़ा इनाम है। इस महीने में खुद रोजा रखे ,अहकामे खुदावन्दी पूरा पूरा अदा करें। पांच वक्त की नमाज़ पढऩे के साथ तिलावत कुरान करें जो सारे इंसानियत के लिए हिदायत (सीधा रास्ता) बताने वाली है। मदरसा ताज उल उलूम रूआबांधा भिलाई के प्रिंसिपल मुहम्मद शाहिद अली मिस्बाही कहते हैं रमजान सिफऱ् रोज़ा रखने का नाम नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि, सब्र की परीक्षा और इंसानियत की सेवा का महीना है। यह महीना हमें अपने रब से जुडऩे, अपने दिल को साफ़ करने और समाज के कमजोर तबकों के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश देता है। रमज़ान का असली पैग़ाम सब्र है। दिन भर की भूख-प्यास इंसान को यह एहसास दिलाती है कि समाज में कितने लोग ऐसे हैं जो रोज़ाना इसी हालात से गुजरते हैं। जब इंसान खुद भूखा रहता है तो उसे गरीब और जरूरतमंद लोगों का दर्द समझ में आता है। यही एहसास उसे दूसरों की मदद के लिए प्रेरित करता है। इस महीने में जकात, सदका और फितरा देने की खास हिदायत है, ताकि समाज में आर्थिक संतुलन बना रहे और कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए। रमज़ान रहमत और बरकत का महीना है। इस महीने में की गई इबादतों का सवाब कई गुना बढ़ा दिया जाता है।
रायपुर/ शौर्यपथ / प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि विष्णुदेव साय सरकार का तीसरा बजट आम जनता के अपेक्षा और उम्मीदों के विपरीत घोर निराशाजनक है। यह बजट काल्पनिक है, धरातल पर बिल्कुल शून्य है। बजट महिलाओं को निराशा किया है। प्रदेश की महिलाओं को इस बजट से यह विश्वास था कि महिला सुरक्षा और महिलाओं के रोजगार पर कुछ विशेष पैकेज रहेगा लेकिन इस बजट में ऐसा कुछ भी नहीं रहा। बजट में महिलाओं को रोजगार देने के लिये कुछ नहीं है। रानी दुर्गावती योजना भी स्पष्ट नहीं है। बस्तर में वनोपज संग्रहण काम में लगी महिलाओं के लिये भी बजट में कुछ नहीं है।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 रू. में एलपीजी गैस देने का आश्वासन दिया था। 500 रुपए में गैस सिलेंडर देने का वादा करने वाले भाजपाई गैस सब्सिडी के लिए एक रुपए का भी बजट प्रावधान नहीं कर पाए हैं। यह बजट सिर्फ लोक लुभावन और कागजों की शोभा बढ़ाने वाली बजट है मध्यमवर्गी एवं गरीब वर्ग परिवार के लिए कुछ भी नहीं। छात्राओं का स्कूल, कालेज बिना शुल्क पहुंचाने का वादा किया था, इस बजट में उस पर भी कुछ नही है।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि बजट में महिला स्व-सहायता समूह को रोजगार देने के लिए कोई प्रावधान नहीं है। भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में महिला स्व-सहायता समूह से रेडी-टू-ईट का काम कराने का वादा किया था, लेकिन भूल गये।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि वित्त मंत्री पिछले बजट में भी बहुत सारे घोषणाएं किए गए थे उस बजट का जिसमें से 70 प्रतिशत तक की राशि से अधिक खर्च नहीं कर पाए। जिसके कारण आज प्रदेश के जनता मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित है। इसमें ना युवाओं के रोजगार के संदर्भ में कोई रोडमैप है और ना ही महंगाई से निपटने कोई ठोस रणनीति। कॉलेज जाने वाले छात्रों से यात्रा भत्ता देने का वादा किया था पर इसके लिए कोई बजट का प्रावधान नहीं है। आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल के सफल संचालन के लिए इस बजट में कुछ भी नहीं।
रायपुर / शौर्यपथ / उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने छत्तीसगढ़ के बजट 2026-27 को प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में दूरदर्शी, संतुलित और विकासोन्मुख बजट बताया है। उन्होंने कहा कि यह बजट केवल आय-व्यय का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि 'ज्ञानÓ और 'गतिÓ के संकल्प के साथ विकसित छत्तीसगढ़ की सशक्त कार्ययोजना है।
उन्होंने बताया कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के लिए 16 हजार 5 करोड़ रुपए से अधिक तथा गृह विभाग के लिए 8,380 करोड़ रुपए का प्रावधान राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करता है। शिक्षा, कौशल विकास, अधोसंरचना, निवेश, अंत्योदय, आजीविका और कुशल मानव संसाधन निर्माण पर केंद्रित यह बजट सर्वस्पर्शी विकास का प्रतीक है। आवासहीनों को सम्मानजनक जीवन देने हेतु प्रधानमंत्री आवास योजना एवं विकसित भारत जी राम जी योजना के लिए 4-4 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान राज्य की संवेदनशील और प्रतिबद्ध सरकार का प्रमाण है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सशस्त्र नक्सलवाद के प्रभाव से उबरते बस्तर में अब विकास की नई धारा बहेगी। 1500 बस्तर फाइटरों की भर्ती स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करेगी। अबूझमाड़ और जगरगुंडा में 100 करोड़ रुपए की लागत से स्थापित होने वाली एजुकेशन सिटी क्षेत्र के शैक्षणिक परिदृश्य को नई दिशा देगी।
प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत 500 करोड़ रुपए के सड़क निर्माण और 200 करोड़ रुपए के आवास निर्माण हेतु तथा धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के लिए 200 करोड़ रुपए का प्रावधान जनजातीय अंचलों के समग्र उत्थान का मार्ग प्रशस्त करेगा।
सीजी एसीई योजना के लिए 33 करोड़ रुपये का प्रावधान कर राज्य सरकार ने नीट, जेईई, क्लैट, यूपीएससी, सीजीपीएससी, रेलवे और बैंकिंग जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को मजबूत आधार दिया है। मुख्यमंत्री शिक्षा सहयोग योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर मेधावी विद्यार्थियों को रेंटल आवास सुविधा हेतु 10 करोड़ रुपए का प्रावधान सामाजिक न्याय और समान अवसर की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग सहित कवर्धा, रायगढ़, जशपुर और जगदलपुर में नए सीजीआईटी संस्थानों के लिए 38 करोड़ रुपए तथा 36 सीजी इनोवेशन केंद्र एवं एसटीपीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए 35 करोड़ रुपए का प्रावधान युवाओं को तकनीकी और नवाचार के क्षेत्र में नई ऊर्जा देगा।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत 1725 करोड़ रुपए से 70 नई सड़कों और 21 पुलों का निर्माण किया जाएगा। वहीं मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 150 से अधिक नई सड़कों के लिए 475 करोड़ रुपए का प्रावधान ग्रामीण क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोडऩे का कार्य करेगा।
बजट में बालोद, बेमेतरा, खैरागढ़, सक्ती और बलरामपुर में 5 नए साइबर थानों की स्थापना, 15 नए पुलिस थानों का गठन और 25 थानों के नवीन भवन निर्माण का प्रावधान राज्य में सुदृढ़ कानून-व्यवस्था का संकेत है। महिला अपराधों की रोकथाम हेतु महिला थानों की संख्या बढ़ाकर 10 करना सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है। अपराध विवेचना को वैज्ञानिक और साक्ष्य आधारित बनाने के लिए सीन ऑफ क्राइम यूनिट हेतु 3.50 करोड़ रुपये का प्रावधान पुलिस तंत्र को आधुनिक बनाने की दिशा में सराहनीय पहल है।
मुख्यमंत्री एआई मिशन के माध्यम से एआई टैलेंट विकास, स्टार्टअप प्रोत्साहन और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक एआई मानचित्र पर स्थापित करेगा। मुख्यमंत्री स्टार्ट-अप एवं निपुण (हृढ्ढक्कहृ) मिशन युवाओं को जॉब-सीकर से जॉब-क्रिएटर बनाने की दिशा में नई संभावनाएं खोलेगा।
बवरिष्ठ नागरिकों की गरिमा, स्वास्थ्य और सामाजिक सहभागिता बनाने के लिए प्रदेश के प्रत्येक जिला मुख्यालय में 'सियान गुड़ीÓ को वरिष्ठ नागरिकों के डे-केयर सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा जो समाज के विकास में एक बेहतर कदम है।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने विश्वास व्यक्त किया कि यह बजट प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति देगा, युवाओं को व्यापक अवसर प्रदान करेगा और ग्रामीण-शहरी संतुलन के साथ छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य बनाने की दिशा में मार्ग प्रशस्त करेगा।
दुर्ग / शौर्यपथ / भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. (सुश्री) सरोज पाण्डेय ने प्रदेश सरकार के बजट का स्वागत करते हुए कहा कि कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने बजट में महिलाओं पर भी फोकस करते हुए महतारी वंदन योजना के तहत महिलाओं को आत्मनिर्भर, उद्यमी और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए 8,200 करोड का प्रावधान किया गया है। यह योजना महिलाओं की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है। सुश्री पांडेय ने कहा कि प्रदेश सरकार ने एक नई योजना रानी दुर्गावती योजना लायी है। इस योजना के तहत परिवार में बालिका के जन्म पश्चात् बालिका के 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर 1.50 लाख रूपये दिये जाएंगे। रानी दुर्गावती योजना के लिए 15 करोड का प्रावधान किया गया है।
भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पाण्डेय ने आगे कहा कि यह बजट प्रदेश के सर्वांगीण विकास, जनकल्याण और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने वाला दूरदर्शी एवं जनहितैषी बजट है। यह बजट प्रदेश की 3 करोड़ जनता की आकांक्षाओं और सपनों का प्रतिबिंब है। इस बजट में किसानों, युवाओं, महिलाओं, श्रमिकों, गरीब एवं मध्यम वर्ग के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। कृषि एवं ग्रामीण विकास के लिए विशेष प्रावधान कर अन्नदाता को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का कार्य किया गया है। साथ ही अधोसंरचना, सड़कों, सिंचाई, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक निवेश कर विकास की गति को और तेज करने का संकल्प लिया गया है।
रायपुर / शौर्यपथ / उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने आज विधानसभा में वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी द्वारा प्रस्तुत श्री विष्णु देव साय सरकार के तीसरे बजट को राज्य के विकास को नई ऊंचाईयों पर ले जाने वाला बजट बताया है। उन्होंने बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हम जिस संकल्प को लेकर सरकार में आए हैं, यह बजट ठीक उसी के अनुरूप है। छत्तीसगढ़ को हमने बनाया है और हम ही इसे संवारेंगे। छत्तीसगढ़ को संवारने का यह बजट एक-एक क्षेत्र, एक-एक वर्ग को ध्यान में रखकर बनाया गया है। यह विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का बजट है।
उप मुख्यमंत्री साव ने कहा कि आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 का यह बजट हर क्षेत्र और हर वर्ग को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें अनेक नई योजनाओं और नवाचारी प्रावधानों को शामिल किया गया है। राज्य के शहरों को आधुनिक और सुविधासंपन्न बनाने के लिए 'मुख्यमंत्री आदर्श शहर समृद्धि योजनाÓ का प्रावधान किया गया है। वहीं लोक निर्माण विभाग के माध्यम से सड़क अधोसंरचना को नई गति देने के लिए 'द्रुतगामी सड़क संपर्क योजनाÓ भी इसमें शामिल है। इन योजनाओं से शहरी विकास और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में बड़ा परिवर्तन देखने को मिलेगा।
श्री साव ने कहा कि नया बजट प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार देगा और युवाओं, किसानों, महिलाओं तथा व्यापारियों सहित समाज के सभी वर्गों के लिए नए अवसर पैदा करेगा। सरकार का उद्देश्य केवल विकास कार्य करना नहीं, बल्कि ऐसा समावेशी विकास सुनिश्चित करना है जिससे हर नागरिक को लाभ मिले। उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण सरकार का मूल संकल्प है और यह बजट उसी दिशा में एक ठोस और निर्णायक कदम है। प्रदेश के लोगों के विश्वास और अपेक्षाओं पर खरा उतरते हुए सरकार आगामी वर्षों में विकास की रफ्तार को और तेज करेगी। प्रदेशवासियों के कल्याण और समग्र विकास को केंद्र में रखकर यह बजट तैयार किया गया है।
राज्य का बजट आकार बढ़कर ₹1 लाख 72 हजार करोड़ पहुंच गया है, जो शुरुआती वर्षों के ₹5 हजार करोड़ की तुलना में 35 गुना अधिक है। सरकार ने स्पष्ट किया कि विकास की इस दौड़ में समाज का कोई भी वर्ग या क्षेत्र पीछे नहीं रहेगा।
बजट की थीम SANKALP के तहत सात प्रमुख स्तंभ निर्धारित किए गए हैं—
S – समावेशी विकास
A – अधोसंरचना
N – निवेश
K – कुशल मानव संसाधन
A – अंत्योदय
L – लाइवलीहुड (आजीविका)
P – पॉलिसी से परिणाम तक
सरकार ने स्पष्ट किया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विकास के बिना समावेशी विकास संभव नहीं।
अबूझमाड़ और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी स्थापना हेतु ₹100 करोड़।
बस्तर और सरगुजा ओलंपिक के लिए 5-5 करोड़ का प्रावधान।
होम-स्टे नीति लागू।
मैनपाट, जशपुर सहित धार्मिक व प्राकृतिक पर्यटन स्थलों के विकास के लिए विशेष प्रावधान।
इंद्रावती पर बैराज निर्माण (₹2,024 करोड़)
विभिन्न बैराज और लिफ्ट इरिगेशन परियोजनाओं के लिए सैकड़ों करोड़ का प्रावधान।
दूरस्थ गांवों को जोड़ने के लिए विशेष सड़क परियोजनाएं।
206 दुर्गम गांवों को बारहमासी सड़क संपर्क से जोड़ने की योजना।
महिलाओं के लिए बजट में बड़े प्रावधान किए गए हैं—
महतारी वंदन योजना हेतु ₹8,200 करोड़।
अब तक 70 लाख महिलाओं को ₹14,000 करोड़ से अधिक राशि वितरित।
‘लखपति दीदी भ्रमण योजना’ की घोषणा।
250 महतारी सदन निर्माण के लिए ₹75 करोड़।
बालिकाओं के 18 वर्ष पूर्ण होने पर ₹1.5 लाख देने हेतु नई योजना (₹15 करोड़ प्रावधान)।
सभी वर्गों को सुलभ और सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं देने पर जोर—
शहीद वीर नारायण सिंह आयुष्मान योजना के लिए ₹1,500 करोड़।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन हेतु ₹2,000 करोड़।
220 बिस्तर जिला अस्पताल (अंबिकापुर) एवं 200 बिस्तर जिला अस्पताल (धमतरी) निर्माण।
नए मेडिकल कॉलेजों का संचालन और नर्सिंग कॉलेज स्थापना।
रायपुर में एडवांस कार्डियक इंस्टिट्यूट विस्तार।
राज्य में लगभग ₹47 हजार करोड़ की रेल परियोजनाएं प्रगति पर।
“द्रुतगामी सड़क संपर्क योजना” के तहत 36 सड़कों का उन्नयन।
लोक निर्माण विभाग के लिए ₹9,450 करोड़ का प्रावधान।
प्रमुख फ्लाईओवर और सड़कों के लिए सैकड़ों करोड़।
बिजली लाइनों का अंडरग्राउंडीकरण।
मेट्रो रेल परियोजना के लिए सर्वे पूर्ण, बजटीय प्रावधान शामिल।
सिकलसार–कोडार नहर लिंकिंग परियोजना (₹3,047 करोड़ स्वीकृति)।
महानदी पर मोहम्मेला–सिरपुर बैराज (₹690 करोड़)।
जल संसाधन विभाग के पूंजीगत प्रावधान में ऐतिहासिक वृद्धि।
ब्याज मुक्त ऋण योजना के लिए ₹300 करोड़।
50 नए गोदाम निर्माण हेतु ₹150 करोड़।
सहकारी समितियों को कॉमन सर्विस सेंटर के रूप में विकसित करने की योजना।
बजट में स्पष्ट संदेश दिया गया कि राज्य की प्राथमिकता समावेशी विकास, अधोसंरचना विस्तार, महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और स्वास्थ्य सुधार है।
वित्त मंत्री ने कहा कि यह बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि प्रदेश की 3 करोड़ जनता के सपनों को साकार करने का रोडमैप है।
वित्त वर्ष 2026-27 का यह बजट छत्तीसगढ़ को 2030 के मध्यकालिक लक्ष्य और 2047 के विकसित राज्य के विज़न की ओर ले जाने वाला बताया जा रहा है। विशेषकर बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित निवेश राज्य की क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
