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April 22, 2026
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शौर्यपथ

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MyGov और 8CPC पोर्टल के माध्यम से ही ऑनलाइन भेजे जा सकेंगे ज्ञापन, कागजी या ई-मेल आवेदन स्वीकार नहीं

नई दिल्ली / शौर्यपथ।

आठवें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) ने अपनी सिफारिशों को व्यापक और व्यवहारिक बनाने के उद्देश्य से विभिन्न हितधारकों से सुझाव और ज्ञापन आमंत्रित किए हैं। आयोग ने सेवारत कर्मचारियों, पेंशनभोगियों, उनके संगठनों, यूनियनों तथा अन्य इच्छुक व्यक्तियों से आग्रह किया है कि वे अपने सुझाव निर्धारित ऑनलाइन प्रारूप में प्रस्तुत करें।

आयोग की आधिकारिक वेबसाइट 8cpc.gov.in पर कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के संघों, यूनियनों, संस्थाओं तथा संगठनों के लिए ज्ञापन प्रस्तुत करने का विशेष ऑनलाइन प्रारूप उपलब्ध कराया गया है। इसके माध्यम से संबंधित पक्ष अपने सुझाव सीधे आयोग तक पहुंचा सकते हैं।

इसके अतिरिक्त, सुझाव देने के लिए MyGov पोर्टल (innovateindia.mygov.in) पर भी ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जहां कर्मचारी, पेंशनभोगी और आम नागरिक भी अपने विचार और सुझाव दर्ज कर सकते हैं।

आयोग ने स्पष्ट किया है कि सभी ज्ञापन और सुझाव केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। कागजी प्रतियां, ई-मेल या पीडीएफ के माध्यम से भेजे गए सुझावों पर विचार नहीं किया जाएगा।

आठवें केंद्रीय वेतन आयोग ने सभी हितधारकों से अपील की है कि वे 30 अप्रैल 2026 तक अपने सुझाव और ज्ञापन निर्धारित पोर्टलों के माध्यम से प्रस्तुत करें, ताकि आयोग विभिन्न पक्षों के विचारों को ध्यान में रखते हुए अपनी सिफारिशें तैयार कर सके।

ड्रोन निगरानी, फ्लैग मार्च और लगातार पेट्रोलिंग से कानून व्यवस्था रही पूरी तरह नियंत्रण में

धमतरी / शौर्यपथ।

होली पर्व के अवसर पर धमतरी जिले में पुलिस प्रशासन द्वारा किए गए कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच त्योहार पूरी तरह शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण और हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। पुलिस अधीक्षक धमतरी के निर्देशन में जिले के सभी थाना क्षेत्रों में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई थी, जिसके अंतर्गत लगातार पेट्रोलिंग, संवेदनशील स्थानों पर फिक्स पिकेट की स्थापना तथा पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित की गई।

त्योहार के दौरान पुलिस अधिकारी एवं जवान पूरी मुस्तैदी और सतर्कता के साथ ड्यूटी पर तैनात रहे। प्रमुख चौक-चौराहों, बाजार क्षेत्रों तथा भीड़भाड़ वाले स्थानों पर पुलिस बल की सक्रिय उपस्थिति रही, जिससे पूरे जिले में कानून व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में बनी रही।

ड्रोन कैमरों से रखी गई शहर के चप्पे-चप्पे पर नजर

होली के दौरान आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए ड्रोन कैमरों के माध्यम से शहर के प्रमुख क्षेत्रों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर लगातार निगरानी रखी गई। इससे पुलिस को स्थिति पर त्वरित नियंत्रण बनाए रखने में सहायता मिली। वहीं पुलिस अधीक्षक धमतरी द्वारा कंट्रोल रूम के माध्यम से लगातार जिले की स्थिति की मॉनिटरिंग की जाती रही तथा सभी थाना प्रभारियों और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाते रहे।

होली पूर्व गुंडा-बदमाशों पर कसी नकेल

होली पर्व से पूर्व धमतरी पुलिस द्वारा असामाजिक तत्वों के विरुद्ध विशेष अभियान चलाया गया। इस दौरान जिले के लगभग 35 गुंडा बदमाशों, निगरानी बदमाशों एवं उभरते अपराधियों की परेड कराई गई तथा उन्हें अच्छे आचरण बनाए रखने की शपथ दिलाई गई। इसके अतिरिक्त 60 से अधिक गुंडा बदमाशों, निगरानी बदमाशों एवं चाकूबाजों के विरुद्ध प्रतिबंधक कार्यवाही की गई।

फ्लैग मार्च से बढ़ा पुलिस पर भरोसा

जिले के सभी अनुभागों में पुलिस द्वारा फ्लैग मार्च भी निकाला गया, जिसका उद्देश्य असामाजिक तत्वों में कानून का भय उत्पन्न करना तथा आम नागरिकों में सुरक्षा की भावना को मजबूत करना था। त्योहार के दौरान लगातार पेट्रोलिंग करते हुए संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी गई और फिक्स पिकेट में तैनात जवानों द्वारा क्षेत्र में सतत निगरानी रखी गई।

इन प्रभावी व्यवस्थाओं के चलते जिले में कहीं भी किसी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली और होली का पर्व शांतिपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ।

त्योहारों के लिए पूर्व से तैयार रहती है पुलिस

उल्लेखनीय है कि धमतरी पुलिस द्वारा त्योहारों के मद्देनजर पूर्व से ही प्रभावी सुरक्षा रणनीति बनाकर कार्य किया जाता है। इसी का परिणाम है कि जिले में पिछले एक वर्ष में मनाए गए सभी प्रमुख त्योहार पूर्णतः शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुए हैं।

धमतरी पुलिस आम नागरिकों की सुरक्षा, शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।

— धमतरी ब्यूरो : रोमेश्वर दास सिन्हा

  रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने टी-20 विश्वकप के सेमीफाइनल मुकाबले में इंग्लैंड को पराजित कर फाइनल में पहुँचने पर भारतीय क्रिकेट टीम को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दी हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने ट्वीट में कहा है कि टी-20 विश्वकप के सेमीफाइनल मुकाबले में शानदार और जुझारू प्रदर्शन करते हुए भारतीय क्रिकेट टीम ने इंग्लैंड को हराकर भव्य अंदाज़ में फाइनल में प्रवेश किया है। यह पूरे देश के लिए गर्व और उत्साह का क्षण है।

उन्होंने कहा कि भारतीय टीम के सभी खिलाड़ियों ने अद्भुत टीमवर्क, साहस और उत्कृष्ट खेल कौशल का परिचय देते हुए पूरे देश को गर्व से भर दिया है। यह जीत केवल एक मैच की जीत नहीं, बल्कि हर भारतीय के आत्मविश्वास और तिरंगे की शान का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने भारतीय क्रिकेट टीम को फाइनल मुकाबले के लिए अपनी हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि उन्हें विश्वास है कि भारतीय टीम इसी जज़्बे और प्रदर्शन के साथ आगे बढ़ते हुए विश्व मंच पर एक नया इतिहास रचेगी।

  रायपुर /शौर्यपथ /मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने जशपुर के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता और लोकतंत्र सेनानी श्री महावीर प्रसाद जैन के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि श्री महावीर प्रसाद जैन ने अपने जीवन को समाजसेवा, राष्ट्रहित और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए समर्पित किया।आपातकाल के कठिन दौर में उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए साहसपूर्वक संघर्ष किया और अपने सिद्धांतों पर अडिग रहे। उस समय उनके द्वारा किया गया त्याग और समर्पण लोकतांत्रिक चेतना के प्रति उनकी अटूट निष्ठा का परिचायक है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि श्री जैन का जीवन समाज के लिए प्रेरणादायी रहा है। उनका योगदान सदैव स्मरण किया जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने ईश्वर से प्रार्थना की है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोक संतप्त परिवार को इस दुःख की घड़ी में संबल प्रदान करें।

राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में गणेश शंकर मिश्रा ने संभाला पदभार, मुख्यमंत्री ने दी शुभकामनाएँ

रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज नवा रायपुर स्थित नीति भवन में छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग के नवनियुक्त उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा के पदभार ग्रहण समारोह में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने उन्हें इस महत्वपूर्ण दायित्व के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य नीति आयोग प्रदेश के दीर्घकालिक विकास विज़न, साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण और विभिन्न विभागों के बेहतर समन्वय के माध्यम से छत्तीसगढ़ के विकास को नई दिशा और गति देने वाला एक महत्वपूर्ण संस्थान है। उन्होंने कहा कि भविष्य की जरूरतों और चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए विकास की योजनाएँ और रणनीतियाँ तैयार करने में आयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी दृष्टि को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ में भी छत्तीसगढ़ विज़न डॉक्युमेंट 2047 तैयार किया गया है, जिससे प्रदेश के समग्र और दीर्घकालिक विकास की रूपरेखा तय की जा रही है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा योजना आयोग के स्थान पर नीति आयोग के गठन का निर्णय दूरदर्शी सोच का परिणाम था। आज नीति आयोग द्वारा संचालित आकांक्षी जिलों का कार्यक्रम देश के पिछड़े क्षेत्रों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जिसका सकारात्मक प्रभाव छत्तीसगढ़ के आकांक्षी जिलों में भी देखने को मिला है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नीति आयोग की विशेषता यह है कि यह क्षेत्र की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नीति और योजना निर्माण को बढ़ावा देता है। इसी सोच के साथ राज्यों में भी राज्य नीति आयोग का गठन किया गया है, जो विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सुशासन, पारदर्शिता और जनभागीदारी के साथ प्रदेश में विकास को नई गति देने के लिए लगातार कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि श्री गणेश शंकर मिश्रा के प्रशासनिक अनुभव से राज्य नीति आयोग को नई दिशा और गति मिलेगी। आयोग की ओर से प्राप्त अच्छे सुझावों को राज्य सरकार गंभीरता से लेकर प्रभावी ढंग से लागू करने का प्रयास करेगी।

राज्य नीति आयोग के नवनियुक्त उपाध्यक्ष श्री गणेश शंकर मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में प्रदेश निरंतर विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि बेहतर और भविष्योन्मुखी नीतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ को अधिक समृद्ध और विकसित बनाने की दिशा में सभी के साथ मिलकर कार्य किया जाएगा।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, विधायक सुश्री लता उसेंडी, विधायक श्री अमर अग्रवाल, महापौर धमतरी श्री रामू रोहरा, राज्य नीति आयोग के सदस्य डॉ. के. सुब्रह्मण्यम, सदस्य सचिव श्री आशीष भट्ट, सचिव श्री भुवनेश यादव सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

   पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। लगभग दो दशकों तक राज्य की सत्ता संभालने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 5 मार्च 2026 को राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल कर दिया, जिसके बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनने की चर्चा तेज हो गई है। उनके इस निर्णय को जहां वे अपनी व्यक्तिगत संसदीय यात्रा की अधूरी इच्छा से जोड़ रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक रणनीति और जनादेश के साथ विश्वासघात बता रहा है।

संसदीय यात्रा पूरी करने की इच्छा

नीतीश कुमार ने अपने इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया के माध्यम से स्पष्ट किया कि उनकी लंबे समय से इच्छा थी कि वे बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों (विधानसभा और विधान परिषद) और संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सदस्य रहें।
वे पहले ही तीन सदनों के सदस्य रह चुके हैं, इसलिए राज्यसभा जाना उनकी इस राजनीतिक यात्रा को पूर्ण करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

बिहार में नए राजनीतिक समीकरण की शुरुआत

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने से बिहार की सत्ता संरचना में बड़ा बदलाव संभव है। करीब 20 वर्षों तक मुख्यमंत्री रहने के बाद उनके पद छोड़ने से भाजपा को बिहार में अपना मुख्यमंत्री बनाने का अवसर मिल सकता है
सूत्रों के अनुसार यह कदम भाजपा और जदयू के बीच हुए बड़े राजनीतिक समझौते का हिस्सा भी माना जा रहा है।

बेटे निशांत कुमार की राजनीति में संभावित एंट्री

इस घटनाक्रम के बीच यह भी चर्चा तेज है कि नीतीश कुमार अपने बेटे निशांत कुमार को सक्रिय राजनीति में उतारने की तैयारी कर रहे हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि उन्हें जदयू में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है और नई सरकार में उपमुख्यमंत्री पद भी मिल सकता है।

मार्गदर्शक की भूमिका निभाने की बात

नीतीश कुमार ने कहा है कि मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी वे नई सरकार को अपना सहयोग और मार्गदर्शन देते रहेंगे और गठबंधन की मजबूती के लिए काम करेंगे।


विपक्ष के आरोप: “जनादेश के साथ विश्वासघात”

नीतीश कुमार के इस फैसले पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने इसे बिहार में “महाराष्ट्र जैसा खेल” बताते हुए आरोप लगाया कि भाजपा ने सत्ता परिवर्तन की रणनीति के तहत यह कदम उठाया है।
वहीं आरजेडी के राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा ने इसे “Kidnapping with consent” यानी “सहमति से अपहरण” की संज्ञा दी।

विपक्ष का कहना है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में जनता से नीतीश कुमार के चेहरे पर वोट मांगे गए थे, ऐसे में बीच कार्यकाल में उनका पद छोड़ना जनता के जनादेश के साथ विश्वासघात है।

भाजपा का बढ़ता दबाव भी चर्चा में

राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि बिहार विधानसभा में अब भाजपा के विधायक जदयू से अधिक (भाजपा 85, जदयू 77) हैं। ऐसे में भाजपा लंबे समय से राज्य में अपना मुख्यमंत्री बनाने की इच्छुक थी और यह घटनाक्रम उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

स्वास्थ्य और पार्टी के भीतर असंतोष की अटकलें

कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा जा रहा है कि स्वास्थ्य संबंधी कारणों से भी नीतीश कुमार सक्रिय प्रशासनिक जिम्मेदारी से पीछे हटना चाहते थे।
वहीं उनके इस अचानक फैसले से जदयू कार्यकर्ताओं में भी असंतोष देखने को मिला और पटना में पार्टी कार्यालय के बाहर कुछ कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन भी किया।


कौन होगा बिहार का अगला मुख्यमंत्री?

नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की स्थिति में बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर भाजपा खेमे में कई नाम चर्चा में हैं

मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं —

1. सम्राट चौधरी – वर्तमान उपमुख्यमंत्री और भाजपा के मजबूत ओबीसी चेहरा, जिन्हें सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है।
2. नित्यानंद राय – केंद्रीय गृह राज्य मंत्री और अमित शाह के करीबी नेता, यादव समुदाय से आने के कारण सामाजिक समीकरण में महत्वपूर्ण।
3. विजय कुमार सिन्हा – वर्तमान उपमुख्यमंत्री और विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष, संगठन व प्रशासनिक अनुभव के कारण मजबूत विकल्प।
4. दिलीप कुमार जायसवाल – बिहार सरकार में मंत्री और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष।

सरकार का संभावित स्वरूप

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री पद भाजपा के पास रह सकता है, जबकि जदयू को दो उपमुख्यमंत्री पद दिए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।


राज्यसभा चुनाव: 16 मार्च को मतदान

बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों के लिए चुनाव 16 मार्च 2026 को होना तय है
नामांकन की अंतिम तिथि 5 मार्च थी और कुल 6 उम्मीदवारों ने पर्चा दाखिल किया है, जिससे चुनाव रोचक होने की संभावना बढ़ गई है।

एनडीए के उम्मीदवार

एनडीए ने अपनी ओर से 5 उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं —

  • नीतीश कुमार (JD-U)

  • नितिन नबीन (BJP)

  • शिवेश कुमार राम (BJP)

  • रामनाथ ठाकुर (JD-U)

  • उपेन्द्र कुशवाहा (RLM)

विपक्ष का उम्मीदवार

वहीं आरजेडी ने पांचवीं सीट के लिए अपना उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है, हालांकि संख्या बल के लिहाज से एनडीए की स्थिति मजबूत मानी जा रही है।

खाली हो रही सीटें

ये सीटें हरिवंश नारायण सिंह, रामनाथ ठाकुर, प्रेमचंद गुप्ता, अमरेंद्र धारी सिंह और उपेंद्र कुशवाहा का कार्यकाल पूरा होने के कारण रिक्त हो रही हैं।

जीत का गणित

राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कम से कम 41 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है।
एनडीए के पास चार सीटें जीतने का स्पष्ट गणित मौजूद है, जबकि पांचवीं सीट को लेकर मुकाबला दिलचस्प हो सकता है।


राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार का राज्यसभा की ओर यह कदम केवल व्यक्तिगत संसदीय यात्रा का विस्तार नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत भी साबित हो सकता है। अब सबकी नजर भाजपा नेतृत्व के अंतिम निर्णय और बिहार के अगले मुख्यमंत्री के नाम पर टिकी हुई है।

चंद लोगों की एकाधिकार मानसिकता से बढ़ रहा आंतरिक द्वंद, जमीनी पत्रकारों में असंतोष

दुर्ग। शौर्यपथ।

लोकतंत्र में पत्रकारिता को चौथा स्तंभ कहा जाता है। समाज में पत्रकारों को केवल सूचना देने वाला माध्यम नहीं बल्कि एक जिम्मेदार और बुद्धिजीवी वर्ग के रूप में देखा जाता है, जो सत्ता, समाज और व्यवस्था को आईना दिखाने का कार्य करता है। परंतु जब स्वयं पत्रकारिता का मंच ही आंतरिक विवाद, एकाधिकार और गुटबाजी का शिकार हो जाए, तब यह स्थिति न केवल पत्रकारों के लिए बल्कि लोकतंत्र के लिए भी चिंता का विषय बन जाती है।

दुर्ग शहर का प्रेस क्लब प्रदेश के पुराने प्रेस क्लबों में गिना जाता है, लेकिन इन दिनों इसकी कार्यप्रणाली को लेकर पत्रकारों के बीच कई तरह की चर्चाएं और असंतोष सामने आ रहे हैं। आरोप यह भी है कि प्रेस क्लब का संचालन एक लोकतांत्रिक संस्था के रूप में नहीं बल्कि कुछ चुनिंदा लोगों की मर्जी से होता हुआ दिखाई देता है। यही कारण है कि कई पत्रकार स्वयं को इस व्यवस्था से उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।

प्रेस क्लब में पहले भी हो चुकी है टूट

दुर्ग के पत्रकार जगत में यह कोई नई स्थिति नहीं है। कुछ वर्षों पहले भी मतभेद इतने बढ़ गए थे कि प्रेस क्लब दो हिस्सों में बंट गया था। समय के साथ स्थिति सामान्य होने की उम्मीद थी, लेकिन अब फिर से वैसी ही परिस्थितियां बनती दिखाई दे रही हैं।

हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि एक नए प्रेस क्लब के गठन की चर्चा भी सामने आ चुकी है। इतना ही नहीं, नए समूह को कमजोर करने या उसे तोड़ने के प्रयासों की बातें भी पत्रकारों के बीच चर्चा का विषय बन रही हैं।

अपनी लाइन बड़ी करने के बजाय दूसरे की छोटी करने की होड़

कहावत है कि आगे बढ़ने के लिए अपनी लाइन बड़ी करनी चाहिए, लेकिन दुर्ग के पत्रकार जगत में स्थिति इसके विपरीत नजर आती है। यहां आगे बढ़ने की बजाय दूसरे की पहचान और अवसर को छोटा करने की प्रवृत्ति अधिक दिखाई दे रही है।

कई युवा और जमीनी स्तर पर काम करने वाले पत्रकारों का कहना है कि इस मानसिकता के कारण उन्हें अपनी पहचान बनाने और आगे बढ़ने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

चुनाव प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में

प्रदेश के अधिकांश प्रेस क्लबों में नियमित चुनाव होते हैं और उनकी चर्चा पत्रकारों के बीच खुलकर होती है। छोटे कस्बों में भी प्रेस क्लब चुनाव एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया के रूप में दिखाई देते हैं।

लेकिन दुर्ग प्रेस क्लब के संबंध में कई पत्रकारों का कहना है कि यहां चुनाव तो होते हैं, पर इतनी “शांतिपूर्ण” तरीके से कि अधिकांश पत्रकारों को इसकी जानकारी तक नहीं हो पाती। यह स्थिति भी पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े करती है।

चाटुकारिता बनाम काबिलियत

पत्रकारों के बीच यह चर्चा भी आम है कि नियम-कायदे और सदस्यता से जुड़े निर्णय कुछ लोगों की पसंद-नापसंद पर आधारित दिखाई देते हैं। कई ऐसे लोग भी प्रेस क्लब से जुड़े बताए जाते हैं जो सक्रिय पत्रकारिता से दूर हैं, लेकिन सुविधाओं का लाभ लेने में आगे रहते हैं।

कुछ मामलों में यह भी आरोप सामने आते हैं कि अपने स्वयं के प्रकाशन होने के बावजूद दूसरे मीडिया संस्थानों से जुड़ाव दिखाकर सदस्यता बनाए रखने की प्रवृत्ति भी देखी जा रही है।

भिलाई का उदाहरण, दुर्ग में अलग तस्वीर

दुर्ग जिला मुख्यालय के समीप भिलाई शहर में प्रेस क्लब की पहचान प्रदेश स्तर पर एक संगठित और सक्रिय संस्था के रूप में देखी जाती है। वहां पत्रकारों के बीच सामूहिकता और संवाद का माहौल दिखाई देता है।

इसके विपरीत दुर्ग के पत्रकार जगत में लगातार बढ़ती दूरी और गुटबाजी की चर्चा चिंता का विषय बनती जा रही है।

सम्मान से तिरस्कार तक का सफर

एक समय था जब दुर्ग के वरिष्ठ पत्रकारों का सम्मान न केवल पत्रकारों के बीच बल्कि समाज और राजनीतिक क्षेत्र में भी अत्यंत ऊंचा था। लेकिन बदलते समय के साथ अब कुछ वरिष्ठ पत्रकारों के प्रति असंतोष की भावना भी सामने आने लगी है।

कई लोग खुलकर तो नहीं बोलते, लेकिन दबे स्वर में यह जरूर कहते हैं कि वरिष्ठता का अर्थ मार्गदर्शन होना चाहिए, न कि एकाधिकार।

सभी पत्रकार एक जैसे नहीं

यह भी सच है कि दुर्ग के पत्रकार जगत में आज भी अनेक ऐसे पत्रकार हैं जिनकी ईमानदारी, जमीनी रिपोर्टिंग और निष्पक्ष लेखन के कारण समाज में सम्मान है। उनके काम की सराहना भी होती है और उन्हें आदर्श के रूप में देखा जाता है।

लेकिन कुछ विवादित प्रवृत्तियों के कारण पूरी बिरादरी की छवि प्रभावित होती है। जैसा कि कहा जाता है — एक गंदी मछली पूरे तालाब को गंदा कर देती है।

जमीनी पत्रकारों की चिंता

दुर्ग शहर में सक्रिय पत्रकारों की संख्या सैकड़ों में है। इसका प्रमाण यह भी है कि शासन-प्रशासन और राजनीतिक दल अपनी प्रेस विज्ञप्तियां सभी पत्रकारों को भेजते हैं।इसके बावजूद यदि कुछ लोग खुद को ही प्रतिनिधि मानने का दावा करें तो यह स्थिति जमीनी स्तर पर काम कर रहे पत्रकारों के लिए निराशाजनक बन जाती है।

प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती 

शासन प्रशासन द्वारा पत्रकारिता से जुड़े पत्रकारों के लिए कई सुविधाएं भी समय समय पर प्रदान की जाती हैं ऐसे में भविष्य में कुछ ऐसा होगा तो अन्य पत्रकारों द्वारा भी सुविधाओं का दावा किया जाएगा ऐसे में प्रशासन के सामने किसे सुविधा दे किसे नहीं यह फैसला लेना मुश्किल होगा हो सकता है सुविधाओं को ही ठंडे बस्ते में डाल दिया जाए क्योंकि एक पक्ष के लिए फैसला लेना प्रशासन की नजर में भी अनुचित होगा जिसका नुकसान जमीनी स्तर से जुड़े सभी पत्रकारों को हो तो कोई अतिशयोक्ति नही होगी 

भविष्य के लिए चेतावनी

फिलहाल यह विवाद सांकेतिक रूप में ही दिखाई दे रहा है, लेकिन यदि समय रहते संवाद और पारदर्शिता का रास्ता नहीं अपनाया गया तो यह खुला संघर्ष भी बन सकता है।

और यदि ऐसा हुआ तो इसका सबसे बड़ा नुकसान पत्रकारिता की साख और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की गरिमा को होगा।

नोट: लेख दुर्ग के पत्रकारों की स्थिति के अनुसार, समाचार पत्र किसी भी क्लब और संस्था से परोक्ष/अपरोक्ष रुप संबंधित नहीं है 

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आज 5 मार्च 2026 (गुरुवार) को राजधानी रायपुर में विभिन्न बैठकों और कार्यक्रमों में व्यस्त कार्यक्रम निर्धारित है। जारी आधिकारिक दौरा कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री सुबह से दोपहर तक भाजपा प्रदेश कार्यालय, विधानसभा और राज्य नीति आयोग में महत्वपूर्ण बैठकों में भाग लेंगे।

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री सुबह 9:40 बजे मुख्यमंत्री निवास, सिविल लाइन रायपुर से कार द्वारा प्रस्थान करेंगे। इसके बाद वे सुबह 9:55 बजे भाजपा प्रदेश कार्यालय, कुशाभाऊ ठाकरे परिसर, बोरियाकला रायपुर पहुंचेंगे, जहां उनका आगमन एवं संक्षिप्त प्रवास निर्धारित है।

इसके पश्चात मुख्यमंत्री सुबह 10:00 बजे भाजपा प्रदेश कार्यालय से प्रस्थान कर सुबह 10:20 बजे छत्तीसगढ़ विधानसभा, सेक्टर-19, नवा रायपुर अटल नगर पहुंचेंगे। यहां वे दोपहर 12:30 बजे तक विधानसभा में निर्धारित कार्यक्रमों में शामिल रहेंगे।

विधानसभा में कार्यक्रम समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री दोपहर 12:30 बजे नवा रायपुर से प्रस्थान कर 12:35 बजे छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग, नॉर्थ ब्लॉक, सेक्टर-19, नवा रायपुर अटल नगर पहुंचेंगे, जहां वे आयोग से जुड़े कार्यों और बैठकों में भाग लेंगे।

इसके बाद मुख्यमंत्री दोपहर 1:05 बजे राज्य नीति आयोग से प्रस्थान करेंगे और दोपहर 1:35 बजे मुख्यमंत्री निवास, सिविल लाइन रायपुर पहुंचेंगे।

मुख्यमंत्री के इस दौरे को शासन और संगठन दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण बैठकों और समन्वय के रूप में देखा जा रहा है। राजधानी रायपुर में आज होने वाली इन बैठकों में विधानसभा संबंधी कार्यों, नीतिगत मुद्दों और संगठनात्मक गतिविधियों पर चर्चा होने की संभावना है।

रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ पूरे उत्साह और उमंग के साथ होली का पर्व मनाया। पारंपरिक फाग गीतों और हर्षोल्लास के वातावरण में रंग और उल्लास से सराबोर इस अवसर पर सभी ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएँ दीं। अधिकारियों और कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री श्री साय को गुलाल लगाकर उन्हें बधाई दी, वहीं मुख्यमंत्री श्री साय ने भी आत्मीयता के साथ सभी को गुलाल लगाकर रंगोत्सव की शुभकामनाएँ दीं और स्नेह, विश्वास तथा आपसी भाईचारे का संदेश दिया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, सद्भाव और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। यह पर्व समाज में एकता, भाईचारे और सकारात्मकता की भावना को सुदृढ़ करता है तथा जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के पर्व हमें आपसी मतभेद भुलाकर मिल-जुलकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज मुख्यमंत्री निवास में आयोजित होली मिलन समारोह में सभी से आत्मीय भेंट कर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हुई। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों, साथियों और प्रदेशवासियों के साथ स्नेह, विश्वास और अपनत्व के रंग साझा करना इस पर्व की सबसे बड़ी विशेषता है। उन्होंने कहा कि प्रदेशवासियों का स्नेह और आशीर्वाद ही जनसेवा के उनके संकल्प को और अधिक सशक्त बनाता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए सभी को होली की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि रंगों का यह पावन पर्व सभी के जीवन में सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और नई ऊर्जा का संचार करे तथा हमारा छत्तीसगढ़ निरंतर विकास और खुशहाली के नए आयाम स्थापित करता रहे। 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, पुलिस महानिदेशक श्री अरुण देव गौतम, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री अमित कुमार, रायपुर के पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला सहित मुख्यमंत्री सचिवालय एवं निवास कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

राज्यसभा चुनाव: छत्तीसगढ़ से भाजपा ने लक्ष्मी वर्मा तो कांग्रेस ने फूलो देवी नेताम पर जताया भरोसा, 9 अप्रैल को होगा मतदान

दुर्ग/रायपुर। आगामी 9 अप्रैल को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए छत्तीसगढ़ की राजनीति में सरगर्मी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी ओर से लक्ष्मी वर्मा को उम्मीदवार बनाया है, वहीं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (कांग्रेस) ने अपनी वर्तमान सांसद फूलो देवी नेताम को एक बार फिर मैदान में उतारते हुए उन पर भरोसा जताया है। दोनों दलों की ओर से घोषित इन नामों के साथ राज्यसभा चुनाव का राजनीतिक समीकरण लगभग स्पष्ट माना जा रहा है।

भाजपा की उम्मीदवार लक्ष्मी वर्मा: संगठन और सामाजिक समीकरण का संतुलन

भाजपा ने छत्तीसगढ़ से खाली हो रही दो राज्यसभा सीटों में से एक के लिए लक्ष्मी वर्मा के नाम की घोषणा की है। लक्ष्मी वर्मा वर्तमान में छत्तीसगढ़ भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष हैं और पूर्व में छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य भी रह चुकी हैं।

राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से उनका चयन भाजपा की रणनीतिक सोच को भी दर्शाता है। लक्ष्मी वर्मा कुर्मी समाज (ओबीसी वर्ग) से आती हैं, जिसे प्रदेश में एक प्रभावशाली सामाजिक वर्ग माना जाता है। पार्टी के इस निर्णय को ओबीसी वर्ग और महिला मतदाताओं यानी “मातृ शक्ति” को संदेश देने के रूप में देखा जा रहा है।

राजनीतिक अनुभव की बात करें तो लक्ष्मी वर्मा रायपुर जिला पंचायत की पूर्व अध्यक्ष रह चुकी हैं और लंबे समय से संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते हुए भाजपा के विभिन्न कार्यक्रमों और अभियानों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाती रही हैं।

कांग्रेस ने फूलो देवी नेताम पर दोबारा जताया भरोसा

वहीं कांग्रेस ने अपनी मौजूदा राज्यसभा सांसद फूलो देवी नेताम को दूसरी बार उम्मीदवार बनाकर उन पर भरोसा दोहराया है। फूलो देवी नेताम का वर्तमान राज्यसभा कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रहा है।

फूलो देवी नेताम छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र से आती हैं और कांग्रेस की ओर से एक प्रमुख आदिवासी महिला चेहरा मानी जाती हैं। उन्होंने वर्ष 1994 में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी और इसके बाद उन्होंने संगठन व जनप्रतिनिधि के रूप में कई जिम्मेदारियां निभाईं।

वह छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं और पूर्व में विधायक के रूप में भी अपनी भूमिका निभा चुकी हैं। आदिवासी समाज और महिला नेतृत्व के प्रतिनिधित्व के लिहाज से कांग्रेस का यह निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राज्यसभा चुनाव का गणित लगभग स्पष्ट

छत्तीसगढ़ से राज्यसभा की दो सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें के.टी.एस. तुलसी और फूलो देवी नेताम का कार्यकाल समाप्त हो रहा है।

90 सदस्यीय छत्तीसगढ़ विधानसभा में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कम से कम 31 प्रथम वरीयता मतों की आवश्यकता होती है। वर्तमान में विधानसभा में भाजपा के 54 विधायक और कांग्रेस के 35 विधायक हैं। इस संख्या बल को देखते हुए राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दोनों प्रमुख दलों का एक-एक सीट जीतना लगभग तय माना जा रहा है।

राजनीतिक संदेश भी अहम

राजनीतिक जानकारों के अनुसार इस बार के उम्मीदवार चयन में दोनों दलों ने सामाजिक प्रतिनिधित्व और क्षेत्रीय संतुलन को प्राथमिकता दी है। भाजपा ने ओबीसी महिला नेतृत्व को आगे बढ़ाने का संकेत दिया है, वहीं कांग्रेस ने आदिवासी महिला नेतृत्व को पुनः राज्यसभा में भेजने का निर्णय लिया है।

ऐसे में 9 अप्रैल को होने वाला राज्यसभा चुनाव भले ही गणितीय रूप से लगभग तय दिखाई दे रहा हो, लेकिन सामाजिक और राजनीतिक संदेश के लिहाज से यह चुनाव प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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