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June 18, 2026
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दुर्ग

दुर्ग (5112)

दुर्ग / शौर्यपथ / पटरी पार औद्योगिक नगर क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही नशाखोरी और आपराधिक गतिविधियों को लेकर नगर पालिका निगम दुर्ग के पार्षद देवनारायण चंद्राकर ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल से मुलाकात कर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने क्षेत्र में सघन पुलिस गश्त बढ़ाने और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए आवेदन सौंपा।
लोक कर्म विभाग प्रभारी देवनारायण चंद्राकर ने बताया कि मोहन नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत पटरी पार के शक्ति नगर, शांति नगर, सिकोला भाटा, सिकोला बस्ती, कैलाश नगर चरला सहित कई वार्डों में गांजा, नशीली दवाओं और अवैध शराब का कारोबार बढ़ता जा रहा है। इससे युवा वर्ग और स्कूल जाने वाले बच्चे भी प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि शक्ति नगर तालाब के आसपास शाम से देर रात तक नशाखोरी और जुआ का जमावड़ा लगा रहता है। नियमित पुलिस गश्त नहीं होने से असामाजिक तत्वों के हौसले बुलंद हैं, जिससे क्षेत्र में अपराध की घटनाएं बढ़ रही हैं। हाल के दिनों में शक्ति नगर और शांति नगर में हुई गंभीर वारदातों के कारण आम नागरिकों में दहशत और असुरक्षा का माहौल है।
पार्षद ने एसएसपी से मांग की है कि क्षेत्र में विशेष अभियान चलाकर अवैध नशे के कारोबार पर सख्त कार्रवाई की जाए और नियमित गश्त सुनिश्चित कर आम जनता को सुरक्षा का भरोसा दिलाया जाए।

  दुर्ग। मोहन नगर थाना क्षेत्र अंतर्गत शक्ति नगर में सोमवार रात्रि शिव बारात के दौरान पुरानी रंजिश को लेकर हुए विवाद ने गंभीर आपराधिक रूप ले लिया। घटना में 17 वर्षीय क्षय कुमार गोड उर्फ नानू की धारदार हथियार से हमला कर हत्या कर दी गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले में संलिप्त सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है तथा घटना में प्रयुक्त हथियार जप्त कर लिया गया है।

पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, वार्ड क्रमांक 17 शांति नगर निवासी शिव कुमार गोड (51 वर्ष) द्वारा थाना मोहन नगर में रिपोर्ट दर्ज कराई गई कि उनका पुत्र क्षय कुमार गोड शिव बारात देखने गया था। इसी दौरान कुछ युवकों के साथ पुरानी रंजिश को लेकर विवाद हो गया। विवाद शीघ्र ही मारपीट में परिवर्तित हो गया और आरोपियों ने क्षय कुमार पर धारदार हथियार से प्राणघातक हमला कर दिया।

घायल अवस्था में परिजन उसे तत्काल उपचार हेतु सिकोला अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने परीक्षण उपरांत उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के पश्चात क्षेत्र में तनाव की स्थिति निर्मित हो गई थी, जिसे देखते हुए पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती की गई।

सीसीटीवी फुटेज एवं तकनीकी साक्ष्यों से हुई पहचान

प्रकरण की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में विशेष टीम गठित की गई। घटनास्थल एवं आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज का सूक्ष्म परीक्षण किया गया। साथ ही तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर संदेहियों की पहचान कर विभिन्न स्थानों पर दबिश दी गई। घेराबंदी कर सातों आरोपियों को हिरासत में लिया गया। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने पुरानी रंजिश के चलते घटना को अंजाम देना स्वीकार किया।

गिरफ्तार आरोपी

  1. करण उर्फ बाटा

  2. मनीष देशमुख उर्फ पाडू

  3. अश्वनीद चंद्राकर

  4. आशीष चतुर्वेदी उर्फ मोनू

  5. शुभम देवांगन उर्फ राजा

  6. जितेश वर्मा उर्फ पोगो

  7. आदित्य सेन उर्फ ब्राण्डेड
    (सभी निवासी शक्ति नगर, दुर्ग)  

पुलिस द्वारा सभी आरोपियों को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है। प्रकरण में अग्रिम वैधानिक कार्रवाई प्रचलित है।

पुलिस प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी प्रकार के विवाद की स्थिति में कानून को हाथ में न लें तथा शांति एवं सद्भाव बनाए रखें।

श्री बीरा सिंह मल्टी स्पेशालिटी हॉस्पिटल, भिलाई में चार वर्षों से निरंतर नि:शुल्क डायलिसिस सेवा, 496 मरीजों को मिला लाभ

दुर्ग / शौर्यपथ / समाज सेवा और मानव कल्याण के क्षेत्र में एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत करते हुए सर्व समाज कल्याण समिति के अध्यक्ष एवं श्री बीरा सिंह मल्टी स्पेशालिटी हॉस्पिटल के डायरेक्टर इंद्रजीत सिंह ने जरूरतमंद डायलिसिस मरीजों के लिए एक सराहनीय पहल की है। उनकी इस पहल से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के सैकड़ों मरीजों को न केवल जीवनरक्षक उपचार मिला है, बल्कि उन्हें सम्मान और संबल भी प्राप्त हुआ है।
फल मंडी, भिलाई स्थित श्री बीरा सिंह मल्टी स्पेशालिटी हॉस्पिटल में पिछले चार वर्षों से निरंतर नि:शुल्क डायलिसिस सेवा संचालित की जा रही है। इस सेवा के अंतर्गत अब तक 496 जरूरतमंद मरीजों का पूरी तरह मुफ्त डायलिसिस किया जा चुका है, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।

इलाज ही नहीं, हर खर्च का भी ध्यान

हॉस्पिटल प्रबंधन द्वारा केवल डायलिसिस तक ही सीमित न रहते हुए, इलाज के दौरान लाइन लगाने से लेकर अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं में आने वाले खर्चों का भार भी स्वयं वहन किया जा रहा है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को इलाज के दौरान किसी प्रकार की परेशानी या मानसिक तनाव का सामना नहीं करना पड़ता।
इसके अतिरिक्त, जरूरतमंद मरीजों को समय-समय पर आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है, ताकि उपचार की निरंतरता बनी रहे और किसी भी मरीज को धन के अभाव में इलाज से वंचित न होना पड़े।

सेवा ही उद्देश्य, लाभ नहीं लक्ष्य
इंद्रजीत सिंह का मानना है कि स्वास्थ्य सेवा केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि मानव सेवा का सर्वोच्च रूप है। उनका कहना है कि समाज के कमजोर वर्ग को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रत्येक सक्षम व्यक्ति का नैतिक दायित्व है। इसी सोच के साथ वे वर्षों से निस्वार्थ भाव से इस सेवा को संचालित कर रहे हैं।

जरूरतमंदों के लिए आशा की किरण
नि:शुल्क डायलिसिस जैसी महंगी चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराकर श्री बीरा सिंह मल्टी स्पेशालिटी हॉस्पिटल आज उन मरीजों के लिए आशा की किरण बन चुका है, जो आर्थिक तंगी के कारण इलाज कराने में असमर्थ थे। स्थानीय नागरिकों और मरीजों के परिजनों ने इस सेवा के लिए इंद्रजीत सिंह एवं हॉस्पिटल प्रबंधन के प्रति आभार व्यक्त किया है।

  भिलाई / शौर्यपथ / शासकीय नर्सिंग कॉलेज, दुर्ग (स्व. चंदूलाल चंद्राकर शासकीय मेडिकल कॉलेज बिल्डिंग) की ओर से एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कान्फ्रेंस (हाइब्रिड मोड) का आयोजन 14 फरवरी शनिवार को सुबह 11 बजे से कला मंदिर, सिविक सेंटर भिलाई में किया गया है। आयोजन की चेयरपर्सन और नर्सिंग कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. रीमा राजेश ने बताया कि दिन भर चलने वाली इस कॉन्फ्रेंस में विभिन्न विषयों पर चर्चा और प्रस्तुतिकरण के सत्र होंगे।
आयोजन सचिव सपना ठाकुर एसोसिएट प्रोफेसर गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ़ नर्सिंग दुर्ग, समन्वयक डॉ. वंदना चौहान एसोसिएट प्रोफेसर गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ़ नर्सिंग दुर्ग,डॉ. ममता शशि साहू एसोसिएट प्रोफेसर गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ़ नर्सिंग, दुर्ग,डॉ. कल्पना भूषण जोशी एसोसिएट प्रोफेसर गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ़ नर्सिंग दुर्ग तैयारियों में जुटे हैं।
इस दौरान विभिन्न सत्रों में प्रमुख रूप से डॉ. नैन्सी फर्नांडीस परेरा एकेडमिक एडवाइजर, एसएस कॉलेज ऑफ नर्सिंग, वापी, पूर्व प्रिंसिपल, एलटी कॉलेज ऑफ नर्सिंग एसएनडीटी यूनिवर्सिटी, मुंबई,चेयरपर्सन डॉ. भावना चक्रवर्ती एसोसिएट प्रोफेसर गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ़ नर्सिंग, दुर्ग, डॉ. विष्णु रंजीत और रंजुला यशोधरन, डॉ. जिबी जॉर्ज सीईओ आदेश्वर ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूशंस, जगदलपुर और डॉ. कल्पना भूषण जोशी एसोसिएट प्रोफेसर, गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ़ नर्सिंग, दुर्ग मार्गदर्शन देंगे। समापन समारोह में प्रमाणपत्र वितरण व अन्य आयोजन होंगे।

भिलाई/शौर्यपथ। भिलाई स्थित डॉ. संतोष राय इंस्टीट्यूट ने CMA इंटर एवं फाइनल परीक्षा परिणामों में उल्लेखनीय सफलता दर्ज करते हुए एक बार फिर शहर को गौरवान्वित किया है। हाल ही में घोषित परिणामों में संस्थान के 70 से अधिक विद्यार्थियों ने परीक्षा उत्तीर्ण की, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड उपलब्धि मानी जा रही है। इनमें से 14 विद्यार्थियों ने CMA फाइनल परीक्षा पास कर विधिवत कॉस्ट अकाउंटेंट (Cost Accountant) का दर्जा प्राप्त किया, जिससे संस्था और भिलाई का नाम प्रदेश स्तर पर रोशन हुआ है।

संस्थान प्रबंधन के अनुसार यह सफलता विद्यार्थियों की कड़ी मेहनत, अनुशासन और नियमित अध्ययन का परिणाम है, वहीं विद्यार्थियों ने अपनी उपलब्धि का श्रेय अनुभवी फैकल्टी, नियमित टेस्ट सीरीज़ और सुनियोजित मार्गदर्शन को दिया। संस्था के डायरेक्टर डॉ. संतोष राय ने सभी सफल छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि संस्थान आने वाले वर्षों में भी इसी प्रकार उत्कृष्ट परिणाम देकर सफलता के नए आयाम स्थापित करता रहेगा।

सेक्टर-10, जोनल मार्केट (196), भिलाई में स्थित यह संस्थान कॉमर्स शिक्षा के क्षेत्र में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। यहां CMA फाउंडेशन, इंटर एवं फाइनल की नई कक्षाओं के लिए प्रवेश प्रारंभ हो चुके हैं और इच्छुक विद्यार्थियों से शीघ्र प्रवेश लेने की अपील की गई है।

संस्थान में प्रोफेशनल शिक्षकों की सशक्त टीम कार्यरत है, जिसमें डॉ. संतोष राय (गिनीज बुक रिकॉर्ड होल्डर), डॉ. मिठू, सीए प्रवीण बाफना, सीए केतन ठक्कर, डॉ. पीयूष जोशी, मिस अविनाश कौर, इंजीनियर अमित बाफना, डॉ. अमित श्रीवास्तव, सीए विक्रांत रघुवंशी एवं सीए पल्लवी अग्रवाल शामिल हैं। यहां 11वीं-12वीं (CBSE), CA, CMA और CUET की कक्षाओं के साथ-साथ पर्सनालिटी डेवलपमेंट, ग्रुप डिस्कशन, पर्सनल इंटरव्यू और पब्लिक स्पीकिंग का प्रशिक्षण भी दिया जाता है, जिससे विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाता है।

दुर्ग /शौर्यपथ। नवदृष्टि फाउंडेशन के सक्रिय सदस्य प्रभुदयाल उजाला के चाचा श्री जगदीश चंद्र उजाला के निधन के पश्चात उनके नेत्रदान की प्रेरक पहल ने दो नेत्रहीन व्यक्तियों के जीवन में नई रोशनी भर दी। संतराबाड़ी निवासी श्री उजाला के देहावसान के बाद उनकी पत्नी श्रीमती रामकुंवर उजाला, पुत्र रूपेश उजाला एवं खेमचंद उजाला तथा बहुएं सपना व गायत्री की सहमति से नेत्रदान की प्रक्रिया सम्पन्न कराई गई।

निधन का समाचार मिलते ही नवदृष्टि फाउंडेशन के सदस्य राज आढ़तिया, कुलवंत भाटिया, राजेश पारख और मंगल अग्रवाल मध्य रात्रि में उजाला भवन पहुंचे और नेत्रदान की संपूर्ण व्यवस्था संभाली। श्री शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज की टीम—डॉ. संदीप बचकर, डॉ. लीजन एवं नेत्र प्रभारी विवेक कसार—ने बंसल निवास पहुंचकर कॉर्निया संग्रहित किए। विवेक कसार ने उजाला परिवार को इस मानवीय निर्णय के लिए साधुवाद दिया।

प्रभुदयाल उजाला ने कहा कि संस्था से जुड़े होने के कारण वे प्रतिदिन लोगों की पीड़ा और अंधत्व का दर्द देखते हैं, इसलिए परिवार ने वही किया जिसके लिए वे समाज को प्रेरित करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि चाचाजी के नेत्रों से दो परिवारों को नई ज्योति मिलेगी। यह उनके परिवार का पहला नेत्रदान है और आगे इसे पारिवारिक परंपरा बनाने का संकल्प लिया गया है।

पुत्र रूपेश उजाला ने भावुक स्वर में कहा कि पिता के निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है, किंतु इस कठिन घड़ी में नेत्रदान कर उन्होंने समाज के प्रति अपना कर्तव्य निभाया है। फाउंडेशन के सदस्य राजेश पारख ने कहा कि प्रभुदयाल उजाला सदैव सामाजिक दायित्व निभाते आए हैं और अपने परिवार से शुरुआत कर उन्होंने समाज को अनुकरणीय संदेश दिया है।

नवदृष्टि फाउंडेशन की ओर से अनिल बल्लेवार, कुलवंत भाटिया, राज आढ़तिया, प्रवीण तिवारी, मुकेश आढ़तिया, हरमन दुलई, रितेश जैन, राजेश पारख, जितेंद्र हासवानी, मंगल अग्रवाल, किरण भंडारी, उज्जवल पींचा, सत्येंद्र राजपूत, सुरेश जैन, पीयूष मालवीय, दीपक बंसल, विकास जायसवाल, मुकेश राठी, प्रभुदयाल उजाला, प्रमोद बाघ, सपन जैन, यतीन्द्र चावड़ा, जितेंद्र कारिया, बंसी अग्रवाल, अभिजीत पारख, मोहित अग्रवाल, चेतन जैन, दयाराम टांक, विनोद जैन एवं राकेश जैन ने स्व. जगदीश चंद्र उजाला को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उजाला परिवार को इस प्रेरणादायी निर्णय के लिए साधुवाद दिया।

मानवीय संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी की यह मिसाल समाज को नेत्रदान जैसे पुनीत कार्य के लिए प्रेरित करती है।

आयुक्त सुमित अग्रवाल ने किया निरीक्षण, महापौर ने की अधिकाधिक सहभागिता की अपील

दुर्ग, ।
नगर पालिक निगम दुर्ग द्वारा आयोजित होने वाला बहुप्रतीक्षित फ्लावर शो इस वर्ष और भी भव्य स्वरूप में 14 फरवरी को शहर के प्रमुख उद्यान राजेंद्र पार्क में आयोजित किया जाएगा। तैयारियां अंतिम चरण में हैं और पूरा पार्क रंग-बिरंगे पुष्पों, सुसज्जित क्यारियों और आकर्षक सजावटी पौधों से सजकर मानो प्रकृति का उत्सव मनाने को तैयार है।

नगर निगम प्रशासन आयोजन को सफल और यादगार बनाने के लिए पूरे उत्साह और तत्परता से जुटा हुआ है। पार्क में विशेष सजावट, आकर्षक फ्लोरल डिस्प्ले और प्रतियोगिताओं के लिए अलग-अलग श्रेणियों की व्यवस्था की जा रही है, जिससे आगंतुकों को एक अनूठा अनुभव मिल सके।

आयुक्त ने लिया तैयारियों का जायजा

आयुक्त सुमित अग्रवाल ने पर्यावरण प्रभारी काशीराम कोसरे सहित अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ आयोजन स्थल का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने साफ-सफाई, सुरक्षा, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और आगंतुकों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

आयुक्त ने कहा कि फ्लावर शो नगरवासियों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र होगा, इसलिए आयोजन स्थल पर सभी व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित और दुरुस्त रहनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को समयबद्धता और समन्वय के साथ कार्य करते हुए कार्यक्रम को सफल बनाने के निर्देश दिए।

शहर में बढ़ा उत्साह, दूर-दूर से हो रहा पंजीयन

फ्लावर शो को लेकर शहरवासियों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए शहर के अंतिम छोर से भी नागरिक पंजीयन कराने पहुंच रहे हैं। घर-आंगन में उगाए गए आकर्षक फूलों और सजावटी पौधों को प्रदर्शित करने के लिए लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।

आयोजन के दौरान विभिन्न श्रेणियों में प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी, जिनमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित एवं पुरस्कृत किया जाएगा।

पर्यावरण संरक्षण का संदेश

महापौर अलका बाघमार ने कहा कि यह फ्लावर शो केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने का एक सार्थक प्रयास है। उन्होंने शहरवासियों से अधिकाधिक संख्या में सहभागिता करने और अपने घरों में हरियाली बढ़ाने का संदेश दिया।

पर्यावरण प्रभारी काशीराम कोसरे ने कहा कि इस आयोजन के माध्यम से नागरिकों को प्रकृति से जोड़ने तथा स्वच्छ एवं हरित दुर्ग के निर्माण का संकल्प साकार करने का अवसर मिलेगा।

अनुमान है कि बड़ी संख्या में नागरिक इस भव्य फ्लावर शो का आनंद लेने पहुंचेंगे और राजेंद्र पार्क एक दिन के लिए सचमुच फूलों की खुशबू से महक उठेगा।

रसूख के दम पर कब्जे का आरोप: पुलगांव नाले से पचरी घाट तक भूमि विवाद, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

 दुर्ग। शौर्यपथ की विशेष रिपोर्ट
शहर के प्रतिष्ठित व्यापारी के रूप में पहचाने जाने वाले ताराचंद रमेश कुमार जैन एक बार फिर भूमि विवाद के केंद्र में हैं। आरोप है कि उन्होंने सरकारी नाले से सटी भूमि, समाज की जमीन, मंदिर परिसर और अब एक गरीब किसान की निजी भूमि तक पर कब्जा करने की कोशिश की है। मामले ने तूल पकड़ लिया है और स्थानीय लोगों में आक्रोश व्याप्त है।
किसान की जमीन पर फिर खड़ा हुआ विवाद
किसान डोमन सिन्हा ने आरोप लगाया है कि उनकी कृषि भूमि के सीमांकन से पूर्व ही ताराचंद रमेश कुमार जैन द्वारा खेत की मेड़ से लगभग 6 फीट बाहर बाउंड्री वॉल खड़ी कर दी गई।
बताया जा रहा है कि पूर्व में समाचार प्रकाशित होने के बाद जैन ने बाउंड्री तोड़कर मेड़ के अनुरूप दीवार उठाने का आश्वासन दिया था। किसान के अनुसार, कुछ दिनों तक काम रुका रहा, लेकिन जब वह खेत की ओर नहीं गया तो दोबारा निर्माण शुरू कर दिया गया।
डोमन सिन्हा का कहना है कि सीमांकन की मांग के बावजूद सुबह 6 बजे से देर रात तक मजदूर लगाकर विवादित हिस्से में दीवार निर्माण जारी है।
नाले की सरकारी भूमि और मंदिर परिसर पर भी आरोप
स्थानीय सूत्रों के अनुसार पुलगांव नाले से सटी सरकारी भूमि पर भी पहले विवाद खड़ा हुआ था। जांच प्रक्रिया लंबित रहने के दौरान कथित रूप से बाउंड्री निर्माण कर लिया गया।
इसी तरह समाज की जमीन पर बने मंदिर को "नए स्वरूप" देने के नाम पर बड़े भूभाग पर निर्माण का आरोप लगाया गया है।
पचरी घाट का मुद्दा फिर गरमाया
पूर्व मंत्री स्वर्गीय हेमचंद यादव द्वारा निर्मित पचरी घाट का हिस्सा भी कथित रूप से अतिक्रमण की जद में बताया जा रहा है। घाट के पास लगी शिलालेख आज भी मौजूद है, लेकिन स्थानीय नागरिकों का कहना है कि घाट का एक बड़ा हिस्सा आम जनता की पहुंच से बाहर हो चुका है।
प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल
मामले की शिकायत थाना स्तर पर की जा चुकी है। किसान सीमांकन की मांग कर रहे हैं, वहीं आरोप है कि प्रशासनिक प्रक्रिया की धीमी रफ्तार का लाभ उठाकर निर्माण कार्य पूरा किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष राजस्व सीमांकन और स्थलीय जांच नहीं हुई तो विवाद और गहरा सकता है।
जनहित का सवाल
भूमि विवाद केवल दो पक्षों का मामला नहीं रह जाता, जब उसमें सरकारी जमीन, सार्वजनिक घाट और समाज की संपत्ति शामिल हो। ऐसे मामलों में पारदर्शिता, त्वरित सीमांकन और स्पष्ट प्रशासनिक निर्णय आवश्यक है, ताकि न तो किसी गरीब किसान के अधिकारों का हनन हो और न ही सार्वजनिक संपत्ति पर अतिक्रमण हो।
"शौर्यपथ" की ओर से यह स्पष्ट है कि कानून सबके लिए समान है—चाहे वह रसूखदार व्यापारी हो या साधारण किसान। यदि आरोपों में सच्चाई है तो संबंधित विभागों—राजस्व, नगर निगम और जिला प्रशासन—को तत्काल संयुक्त जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
अब निगाहें जिला प्रशासन पर हैं—क्या सीमांकन कराकर विवादित भूमि की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाएगी?
या फिर जांच और कागजी प्रक्रिया के बीच निर्माण की दीवारें और ऊंची होती जाएंगी?
आम जनता उम्मीद कर रही है कि सुशासन का दावा जमीनी स्तर पर भी दिखाई दे और सार्वजनिक व निजी भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

?? कॉलम बॉक्स: मामले की प्रमुख बातें
?? किसान की जमीन पर विवाद – डोमन सिन्हा ने आरोप लगाया कि खेत की मेड़ से लगभग 6 फीट बाहर बाउंड्री वॉल खड़ी की गई।
?? पूर्व में दिया गया आश्वासन – समाचार प्रकाशन के बाद दीवार तोड़कर मेड़ पर निर्माण का वादा, लेकिन दोबारा निर्माण शुरू होने का आरोप।
?? सीमांकन की मांग लंबित – किसान द्वारा राजस्व सीमांकन की मांग, निर्माण कार्य जारी रहने से विवाद गहराया।
?? सरकारी नाले की भूमि पर सवाल – पुलगांव नाले से सटी जमीन पर भी पहले कब्जे के आरोप और जांच प्रक्रिया जारी।
?? समाज की जमीन व मंदिर परिसर – "नए स्वरूप" के नाम पर बड़े हिस्से में निर्माण का आरोप।
?? स्व. हेमचंद यादव का पचरी घाट – पूर्व मंत्री द्वारा निर्मित घाट के हिस्से पर कथित अतिक्रमण, शिलालेख आज भी मौजूद।
?? प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल – शिकायत के बावजूद त्वरित कार्रवाई न होने से स्थानीय नागरिकों में असंतोष।

दुर्ग / शौर्यपथ।
दुर्ग जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) श्री बजरंग कुमार दुबे द्वारा 12 फरवरी 2026 को जिला पंचायत सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक अब प्रशासनिक निर्णय की संवेदनशीलता और व्यावहारिकता को लेकर चर्चा के केंद्र में है। बैठक का उद्देश्य मनरेगा निर्माण कार्य, समर्थ पोर्टल, संपदा पोर्टल, प्रधानमंत्री आवास योजना एवं स्वच्छ भारत मिशन सहित विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा था, किंतु इसके आयोजन की पद्धति ने कर्मचारियों के बीच असंतोष को जन्म दिया है।

बैठक में धमधा जनपद से सचिव, रोजगार सहायक, तकनीकी सहायक सहित लगभग 160 से अधिक फील्ड स्तरीय कर्मचारियों को जिला मुख्यालय उपस्थित होने के निर्देश दिए गए। समीक्षा का एजेंडा महत्वपूर्ण अवश्य था, परंतु प्रश्न यह उठ रहा है कि क्या इस प्रकार की समीक्षा जनपद स्तर पर आयोजित नहीं की जा सकती थी?

बैठक के उपरांत नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कुछ कर्मचारियों ने बताया कि औसतन प्रत्येक कर्मचारी को लगभग ?300 या उससे अधिक का पेट्रोल/डीजल व्यय कर जिला मुख्यालय पहुंचना पड़ा। सामूहिक रूप से देखा जाए तो यह राशि ?50,000 से अधिक बैठती है। कर्मचारियों का मत है कि यदि जिला स्तरीय अधिकारी अपनी सीमित टीम के साथ जनपद स्तर पर बैठक आयोजित करते, तो ईंधन व्यय नगण्य रहता—अनुमानत: ?1,000 से भी कम में कार्य संपन्न हो सकता था।

विकेंद्रीकरण बनाम केंद्रीकृत समीक्षा

पंचायती राज अधिनियम एवं मनरेगा दिशा-निर्देशों में प्रशासनिक विकेंद्रीकरण और स्थानीय स्तर पर निगरानी पर विशेष बल दिया गया है। ऐसे में यह प्रश्न स्वाभाविक है कि जब समीक्षा जनपद या वर्चुअल माध्यम से भी संभव थी, तब इतने बड़े पैमाने पर कर्मचारियों को जिला मुख्यालय बुलाने की आवश्यकता क्यों पड़ी?

कर्मचारियों का कहना है कि वे पहले से वेतन संबंधी अनिश्चितताओं और आर्थिक दबाव से जूझ रहे हैं। ऐसे में व्यक्तिगत व्यय पर जिला स्तर पर बुलाया जाना उनके लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ के समान है। इसे कुछ कर्मचारियों ने "नीतिगत संवेदनशीलता की कमी" और "मैदानी अमले की परिस्थितियों की अनदेखी" बताया।

प्रशासनिक प्राथमिकताएं या प्रोटोकॉल का प्रदर्शन?

प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा भी है कि जिला स्तर की बैठकें आवश्यक अवश्य होती हैं, किंतु संसाधनों की मितव्ययिता, समय की बचत और मैदानी अमले की कार्यक्षमता को ध्यान में रखते हुए आयोजन की पद्धति पर विचार अपेक्षित है। डिजिटल माध्यमों की उपलब्धता और स्थानीय समीक्षा तंत्र के रहते केंद्रीकृत बुलावे को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

यह भी उल्लेखनीय है कि पूर्व में भी कुछ प्रशासनिक निर्णय—जैसे अल्प पारदर्शिता वाले व्यय, टेंडर प्रक्रियाओं को लेकर उठी चर्चाएं—समीक्षा के दायरे में रहे हैं। हालांकि इन विषयों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है, किंतु कर्मचारियों के बीच असंतोष की पृष्ठभूमि में यह बैठक एक और उदाहरण के रूप में देखी जा रही है।

विकास समीक्षा या मनोबल पर प्रभाव?

विकास योजनाओं की समीक्षा प्रशासनिक दायित्व है, इसमें कोई दो राय नहीं। किंतु जब समीक्षा की प्रक्रिया ही कर्मचारियों के मनोबल और संसाधनों पर प्रतिकूल प्रभाव डालने लगे, तब प्रशासनिक दृष्टिकोण पर पुनर्विचार अपेक्षित हो जाता है।

जिला पंचायत के इस निर्णय ने एक बड़ा प्रश्न खड़ा किया है—
क्या प्रशासनिक सख्ती और संवेदनशीलता के बीच संतुलन बन पाना अब भी चुनौती बना हुआ है?

दुर्ग जिला पंचायत की यह बैठक विकास योजनाओं की प्रगति के लिए आयोजित की गई थी, किंतु अब यह स्वयं प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर समीक्षा का विषय बन चुकी है।

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