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दुर्ग / शौर्यपथ।
दुर्ग विधानसभा के मिलपारा वार्ड क्रमांक 38 में इन दिनों स्थानीय राजनीति गरमाई हुई है। वार्ड पार्षद रामचंद्र सेन पर लगातार भेदभाव, निष्क्रियता और जनता से दूरी के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन अब मामला केवल वार्ड की समस्याओं तक सीमित नहीं रहा—बल्कि सीधे प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव की छवि तक जुड़ता नजर आ रहा है।
वार्ड के कई मोहल्लों से लगातार यह शिकायत सामने आती रही है कि पार्षद न तो नियमित रूप से क्षेत्र में दिखाई देते हैं और न ही सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं पर पर्याप्त ध्यान दिया जा रहा है। निचले स्तर की सफाई व्यवस्था और जनसमस्याओं की अनदेखी ने पहले ही वार्डवासियों में असंतोष का माहौल बना रखा है। ऐसे में जब मंत्री गजेंद्र यादव द्वारा अपने विधानसभा क्षेत्र के वार्डों का दौरा कर जनता से सीधा संवाद स्थापित करने की पहल की गई, तो वार्ड क्रमांक 38 के लोगों को भी उम्मीद जगी।
“इंतजार करता रहा मोहल्ला, पर नहीं पहुंचे मंत्री”
जानकारी के अनुसार, मां संकट हरनी मंदिर लाइन (बरपेड चौक) क्षेत्र के लोग मंत्री के स्वागत और अपनी समस्याएं बताने के लिए एकत्रित हुए थे। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि पार्षद रामचंद्र सेन मंत्री को उस इलाके में लेकर ही नहीं पहुंचे, जहां उनके खिलाफ सबसे ज्यादा आक्रोश था। नतीजतन, मोहल्लेवासी लंबे समय तक इंतजार करते रहे और बाद में उन्हें पता चला कि मंत्री का दौरा महज 10-15 मिनट में समाप्त कर दिया गया।
“दौरे को सीमित कर क्या छिपाना चाहते हैं पार्षद?”
स्थानीय चर्चाओं में यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि क्या पार्षद ने जानबूझकर मंत्री का दौरा उन इलाकों तक सीमित रखा, जहां विरोध कम था? क्या यह उनकी निष्क्रियता और जनता के आक्रोश को छिपाने की कोशिश थी?
चुनाव के दौरान घंटों वार्ड में घूम-घूमकर समर्थन मांगने वाले पार्षद पर अब आरोप है कि जीत के बाद वे जनता से दूर हो गए हैं। ऐसे में मंत्री के दौरे को भी सीमित कर देना कई सवाल खड़े करता है।
मंत्री की पहल पर “स्थानीय बाधा”?
गौरतलब है कि मंत्री गजेंद्र यादव लगातार अपने क्षेत्र में जनसमस्याओं को समझने और उनका समाधान करने के लिए सक्रिय नजर आ रहे हैं। लेकिन वार्ड 38 की घटना ने यह संकेत दिया है कि जमीनी स्तर पर कुछ जनप्रतिनिधि ही इस प्रक्रिया में बाधा बन रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि मंत्री तक वास्तविक स्थिति नहीं पहुंचने दी जाएगी, तो इससे न केवल विकास कार्य प्रभावित होंगे बल्कि उनकी जन-छवि पर भी अनावश्यक सवाल खड़े हो सकते हैं।
जनता में बढ़ता असंतोष, जवाबदेही की मांग
वार्ड के रहवासियों में अब यह मांग तेज हो रही है कि पार्षद की कार्यप्रणाली की समीक्षा हो और मंत्री स्वयं बिना स्थानीय फिल्टर के सीधे जनता से संवाद करें।
फिलहाल, मिलपारा वार्ड में एक ही चर्चा जोरों पर है—
“क्या पार्षद की निष्क्रियता मंत्री की सक्रियता पर भारी पड़ रही है?”
अब देखना होगा कि इस पूरे घटनाक्रम पर पार्षद रामचंद्र सेन और मंत्री गजेंद्र यादव की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है, और क्या वार्ड 38 की जनता को उनके सवालों का जवाब मिल पाता है या नहीं।
दुर्ग। शौर्यपथ /
शुक्रवार दोपहर दुर्ग जिले में मानवता को झकझोर देने वाली एक सनसनीखेज घटना सामने आई, जहां एक दरिंदे ने साढ़े 5 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया। विरोध करने पर आरोपी ने बच्ची को बोरे में बंद कर अपने घर के पीछे बाड़ी में फेंक दिया।
बताया जा रहा है कि बच्ची शुक्रवार दोपहर अपने घर से कुछ दूरी पर स्थित दुकान से खाने का सामान लेने गई थी। इसी दौरान रास्ते में अकेली बच्ची को देखकर आरोपी ने कुछ खाने का लालच दिया और अपने घर में ले गया। वहां उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया। जब मासूम ने विरोध किया, तो आरोपी घबरा गया और पकड़े जाने के डर से बच्ची को बोरे में बंद कर अपने घर के पीछे स्थित बाड़ी में फेंक दिया।
कुछ देर बाद बोरे के अंदर से आ रही बच्ची की कराहने और तड़पने की आवाज सुनकर आसपास के लोगों को संदेह हुआ। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही उतई पुलिस मौके पर पहुंची और बच्ची को बोरे से बाहर निकालकर तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका उपचार जारी है।
पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी को पकड़ लिया है और पूरे मामले की जांच शुरु कर दी है। घटना के बाद इलाके में आक्रोश का माहौल है और लोग आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
दैनिक शौर्यपथ महासमुंद जिला ब्यूरो संतराम कुर्रे
महासमुंद जिले के पिथोरा विकासखंड के अंतर्गत सबसे बड़े ग्राम गौरव ग्राम बुंदेली आज भी विकास को तरस रहा है, यहां पर विकास के नाम पर सिर्फ खाना पूर्ति किया जा रहा है, यहां पर विकास के नाम पर कार्य स्वीकृति दी जाती है लेकिन न शासन न प्रशासन द्वारा जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं है, कांग्रेस कमेटी के मंडल अध्यक्ष एवं पूर्व उप सरपंच पूनम मानिकपुरी ने कहा कि पूर्व में शासन प्रशासन द्वारा कई काम स्वीकृति प्रदान करने के बाद भी गौरव ग्राम का बुरा हाल है कई बार कई समस्याओं को लेकर विभागीय अधिकारी को सूचित करने के बाद भी कार्यवाही शून्य है शासन सत्ता किसी भी पार्टी की हो गांव का विकास नहीं हो रहा सिंचाई की बात करे तो आज भी, गज गिधनी जलाशय में नहर लाइनिंग की स्वीकृति की बात कही गई लेकिन आज 1साल से कोई काम प्रमांभ नहीं पटियापली में नहर निर्माण की मांग भालू मूत्र री में स्टॉप डेम की मांग आज तक स्वीकृति नहीं न कोई कार्यवाही वही सड़क की बात करे तो बुंदेली से ठाकुर दिया वन मार्ग जो कई बार डामरीकरण की मांग करने के बाद भी आज तक स्वीकृति नहीं, शिक्षा की दयनीय स्थिति स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक नहीं होने से पढ़ाई प्रभावित वही बुंदेली में कॉलेज खोलने की मांग, स्वास्थ विभाग की बात करे तो यहां पर उप स्वास्थ केंद्र भवन नहीं है भवन के लिए पूर्व में 22 लाख स्वीकृति होने की बात कही गई लेकिन आज तक भवन नहीं बना बुंदेली नर्स डाक्टर की कमी, , बुंदेली में पूर्व में देना बैंक संचालित था उसके पिथोरा शिफ्ट होने के बाद आज एक भी कोई बैंक नहीं खुला कई बार मांग करने पर भी कोई कार्यवाही नहीं , बुंदेली को शासन के तरफ से गौरव ग्राम का दर्जा तो मिला लेकिन सिर्फ कागजों पर जमीनी हकीकत तो कुछ और है, , करोड़ों का पानी टंकी बना लेकिन लोगों के घरों तक सही तरीके से पानी नहीं पहुंचा, सिर्फ शो फीस के लिए बना पानी टंकी, कलेक्टर से शिकायत के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं हुई, जर्जर स्कूलों की नए भवन की मांग स्वास्थ विभाग में नर्स की नियुक्ति, वन मार्ग में डामरीकरण की मांग, पटियापली में नहर निर्माण की मांग स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक की मांग, नहर लाइनिंग की मांग 20 सालों से यह मांग लगातार उठाने पर भी शासन प्रशासन द्वारा इस गौरव ग्राम बुंदेली में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आनन्द दास मानिकपुरी के नाम पर यहां पर देसी शराब दुकान बंद किया गया, शाहिद कमलेश्वर सोनवानी के नाम पर विद्यालय का नाम रखा गया, और इस ग्राम को गौरव ग्राम का दर्जा मिला लेकिन इस की सुध लेना वाला कोई नहीं आगामी दिनों में, इस गौरव ग्राम का इन सभी मांगो का स्वीकृति या निराकरण नहीं किया गया तो बुंदेली के ग्रामीणों के साथ एक बड़ी बैठक आयोजित कर, सरकार को जगाने का प्रयास किया जाएगा या फिर बड़ा आंदोल करने विवश होंगे
महिला एवं बाल विकास विभाग भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया
भाजपा सरकार कमीशनखोरी में लगी, बिना कमीशन के काम नहीं होता
रायपुर/शौर्यपथ (राजनितिक)/ पूरी की पूरी भाजपा सरकार कमीशनखोरी में लगी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि साय सरकार में कोई ऐसा विभाग नहीं है जहां बिना कमीशन के काम हो जाए। सरकार का महिला एवं बाल विकास विभाग तो भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को छोटी साड़ी देकर सरकार ने भ्रष्टाचार की इंतहा को पार कर दिया। सरकार ने बहनों का चीरहरण घोटाला कर दिया। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को 6.3 मीटर की जगह 5 मीटर और 4.5 मीटर से भी कम लंबाई और चौड़ाई एवं घाटिया साड़ियां महिला एवं बाल विकास विभाग में वितरण किया गया है। साड़ियों के लंबाई और चौड़ाई में कम होने के कारण महिलाएं साड़ी का उपयोग नहीं कर पा रही। जो साड़ी हथकरघा के बुनकरों से 500 रू. में लेना था वही साड़ी गुजरात से 100 रू. में खरीद कर 500 रू. की बिलिंग करवा ली गयी।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग में एक महिला मंत्री के होते हुए महिलाओं के साथ उनके अधिकार पर डाका डाला जा रहा है और महिला मंत्री कमीशन-कमीशन खेल रही हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग में यह पहली बार नहीं हुआ है इससे पहले भी कई भ्रष्टाचार सामने आए हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों में 40 करोड़ से अधिक की पोषण सामग्री खरीद में अनियमितता की गयी तथा सामूहिक कन्या विवाह योजना में बिना टेंडर वर्क आर्डर के काम दे दिया गया एवं प्रदेश के लगभग 2899 आंगनबाड़ी केंद्रों में 16 करोड़ की लागत से टीवी और आरओ यूनिट की खरीद में नियमों की अनदेखी की गई है, इसमें केंद्रीकृत टेंडर के बजाय टुकड़ों में खरीद कर भ्रष्टाचार किया गया है। यही नहीं सुचिता योजना के तहत सेनेटरी पैड जैसे समान की खरीदी पर भ्रष्टाचार किया गया, पूरा विभाग भ्रष्टाचार का केंद्र बन चुका है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि आंगनवाड़ी के कार्यकर्ता और सहायिकाओं को जो घटिया गुणवत्ताहीन साड़ियां बांटी गई है, वह साड़ियां महिला एवं बाल विकास विभाग वापस ले और साथ ही आंगनवाड़ी के बहनों को अच्छी क्वालिटी का साड़ी प्रदान करें। 1.94 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए जो साड़ी खरीदी गई थी वह साड़ी महिला एवं बाल विकास विभाग के मंत्री जो स्वयं महिला है उसको देखे कैसे उस साड़ी को लोग पहनेंगे? महिला एवं बाल विकास विभाग में बार-बार ऐसा भ्रष्टाचार और कमीशन खोरी का खेल सामने आने के बाद मंत्री अपनी नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार कर इस्तीफा दे।
जामुल / शौर्यपथ /
नगर पालिका जामुल में चल रहे विशेष सफाई अभियान के तहत नपा अध्यक्ष ईश्वर सिंह ठाकुर ने छापामार शैली में विभिन्न वार्डों का निरीक्षण कर सफाई व्यवस्था का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने सफाई कार्यों में लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों और सुपरवाइजरों को सख्त निर्देश दिए।
नपा अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा कि सफाई किसी भी नगर की मूलभूत और सबसे महत्वपूर्ण सेवा है, इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही या हीलाहवाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सुपरवाइजरों को निर्देशित किया कि सफाई कार्यों की नियमित निगरानी रखें, शिकायत मिलने पर तत्काल निराकरण सुनिश्चित करें और समय-पालन पर विशेष ध्यान दें।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि सफाई कार्य में लापरवाही या समय से पहले अनुपस्थित रहने वाले कर्मियों पर नियमानुसार वेतन कटौती सहित कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सुपरवाइजरों को स्वयं भी फील्ड में उपस्थित रहकर कार्य की निगरानी करने के निर्देश दिए और कहा कि कभी भी अचानक निरीक्षण किया जा सकता है।
निरीक्षण के दौरान नपा अध्यक्ष ने आम नागरिकों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि नागरिक अपनी मूलभूत समस्याओं के लिए सीधे उनसे संपर्क कर सकते हैं। साथ ही नालियों की नियमित सफाई और आवश्यक दवाइयों के छिड़काव के निर्देश भी दिए गए, ताकि स्वच्छता के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके।
इस दौरान सफाई सुपरवाइजर बशीर खान, रमेश मारकण्डे सहित अन्य सफाई कर्मी उपस्थित रहे।
भिलाई / शौर्यपथ /
भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस के अवसर पर नगर पालिका परिषद अहिवारा में अटल परिसर स्थित अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित कर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व जिला उपाध्यक्ष नटवरलाल ताम्रकार ने किया, जिसमें अहिवारा मंडल के कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी रही।
इस दौरान वक्ताओं ने 6 अप्रैल 1980 को अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में पार्टी की स्थापना को याद करते हुए उनके सिद्धांतों और योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भाजपा ने अपने स्थापना काल से ही राष्ट्रवाद और विकास को केंद्र में रखते हुए देश को एक सशक्त और समृद्ध राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है।
कार्यक्रम के अंतर्गत एक विशाल रैली भी निकाली गई, जिसमें पूरे नगर में पार्टी की विचारधारा और संकल्पों को जन-जन तक पहुंचाया गया। वक्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पार्टी के विस्तार और उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भाजपा आज नए कीर्तिमान स्थापित करने की दिशा में अग्रसर है।
इस अवसर पर जनपद अध्यक्ष लीमन साहू, मंडल अध्यक्ष रामजी निर्मलकर, पार्षद अनुज साहू, शिवनारायण अग्रवाल, मीना जोशी, महिला मोर्चा अध्यक्ष ममता जंघेल, पुनीता रावत, लोकेश्वरी साहू सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जिनके सहयोग से कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
नई दिल्ली/दोहा / शौर्यपथ /
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी 9 से 10 अप्रैल 2026 तक कतर की राजधानी दोहा के दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर रहे। दौरे के दौरान उन्होंने कतर के ऊर्जा कार्य राज्य मंत्री एवं कतर एनर्जी के अध्यक्ष व सीईओ साद शेरिदा अल-काबी से महत्वपूर्ण मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों और ऊर्जा सहयोग को और सुदृढ़ करने पर विस्तृत चर्चा की।
बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से कतर के आमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी और प्रधानमंत्री व विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी को शुभकामनाएं और सहयोग का संदेश प्रेषित किया।
चर्चा में हालिया वैश्विक परिस्थितियों का भी उल्लेख हुआ। मार्च 2026 में प्रधानमंत्री मोदी और कतर के आमीर के बीच हुई टेलीफोन वार्ताओं को याद करते हुए क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए संवाद और कूटनीति की आवश्यकता पर जोर दिया गया। साथ ही, कतर में रह रहे भारतीय समुदाय के प्रति वहां की सरकार द्वारा किए जा रहे सहयोग के लिए आभार भी व्यक्त किया गया।
दोनों पक्षों ने भारत-कतर रणनीतिक संबंधों के विभिन्न आयामों—व्यापार, निवेश, ऊर्जा, संस्कृति और जन-से-जन संपर्क—पर व्यापक चर्चा की। कतर ने भारत के लिए एक विश्वसनीय ऊर्जा आपूर्तिकर्ता बने रहने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और भविष्य में ऊर्जा सहयोग को और मजबूत करने की इच्छा जताई।
बैठक में अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल को हुए दो सप्ताह के युद्धविराम समझौते का भी स्वागत किया गया। दोनों नेताओं ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में स्थिरता बहाल करने, आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुचारू बनाए रखने और निर्बाध नौवहन सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
दौरे के अंत में हरदीप सिंह पुरी ने कतर सरकार के आतिथ्य के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। दोनों देशों ने आने वाले समय में नियमित संवाद बनाए रखने और आपसी सहयोग को और गहरा करने पर सहमति जताई।
दुर्ग / शौर्यपथ /
स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) ने अनुरक्षण कार्यों के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। सिंटर संयंत्र–3 में 8.4 मेगावाट क्षमता वाले वेस्ट गैस फैन (WGF) मोटर की डीप क्लीनिंग के लिए पहली बार ड्राई आइस ब्लास्टिंग तकनीक का सफल उपयोग किया गया है। यह पहल पारंपरिक सफाई पद्धतियों से आगे बढ़ते हुए सुरक्षित, उन्नत और पर्यावरण अनुकूल तकनीक अपनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
यह कार्य प्लेट मिल में वेस्ट गैस फैन मोटर के इन-हाउस रिपेयर के दौरान प्लेट मिल टीम के सहयोग से पूरा किया गया। वेस्ट गैस फैन मोटर सिंटर उत्पादन प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण घटक है, जिसकी सुचारू कार्यप्रणाली उत्पादन की निरंतरता सुनिश्चित करती है।
ड्राई आइस ब्लास्टिंग तकनीक के माध्यम से मोटर के स्टेटर और रोटर में जमी धूल, गंदगी और सूक्ष्म कणों को बिना किसी यांत्रिक क्षति के प्रभावी रूप से हटाया गया। इस तकनीक की खासियत यह है कि इसमें न पानी का उपयोग होता है और न ही किसी रासायनिक पदार्थ का, जिससे यह संवेदनशील विद्युत उपकरणों के लिए पूरी तरह सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल साबित होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस आधुनिक तकनीक के उपयोग से मोटर के प्रदर्शन में सुधार, आयु में वृद्धि और विश्वसनीयता में मजबूती आएगी, जिससे दीर्घकालिक परिचालन दक्षता सुनिश्चित होगी।
इस कार्य का सफल क्रियान्वयन मुख्य महाप्रबंधक (ओएचपी एवं सिंटर संयंत्र–3) सजीव वर्गीस और विभागाध्यक्ष (सिंटर संयंत्र–3) राहुल बिजुरकर के नेतृत्व में सिंटर संयंत्र–3 की विद्युत टीम द्वारा किया गया। इस दौरान मुख्य महाप्रबंधक (मेंटेनेंस एवं यूटिलिटीज) बी. के. बेहरा, मुख्य महाप्रबंधक (विद्युत) टी. के. कृष्णा कुमार और मुख्य महाप्रबंधक (प्लेट मिल) कार्तिकेय बेहरा ने मार्गदर्शन प्रदान किया।
इस उपलब्धि में भदेव टुडू, विवेक श्रीवास्तव, दीपक गुप्ता, राजेश साहू, एस. सी. साहू और अरुणेश शर्मा सहित अन्य कर्मचारियों का विशेष योगदान रहा। संपूर्ण कार्य की निगरानी एचएमई, ईआरएस और ए एंड डी टीम द्वारा ए. के. डे, पी. के. पाढ़ी, के. बघेल, यू. एस. बरवाल और धीरेंद्र के नेतृत्व में की गई, जिसमें संतोष कुमार साहू, नरेंद्र राव और अतुल भादे का भी अहम सहयोग रहा।
रायपुर / शौर्यपथ /
युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के ‘मेरा युवा भारत’ (MY Bharat) अभियान के तहत आयोजित ‘बजट क्वेस्ट 2026’ का दो दिवसीय राष्ट्रीय फिनाले 12 और 13 अप्रैल को रायपुर में आयोजित किया जाएगा। इस प्रतिष्ठित आयोजन के समापन समारोह में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। उनके साथ उप-मुख्यमंत्री श्री अरुण साव और केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू की भी गरिमामयी उपस्थिति रहेगी।
यह आयोजन रायपुर के राजीव गांधी राष्ट्रीय भूजल प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान तथा ट्रिपल आईटी नया रायपुर परिसर में आयोजित होगा, जहां देशभर से चयनित युवा प्रतिभागी केंद्रीय बजट 2026 से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे।
देशभर के युवाओं का होगा संगम
इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश के 17 स्थानों से 15,000 से अधिक युवाओं ने विभिन्न चरणों में भाग लिया है, जिसमें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हुआ है। छत्तीसगढ़ से लगभग 30,000 युवाओं की भागीदारी में से चयनित 471 प्रतिभागी रायपुर में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे।
विचार-मंथन के प्रमुख विषय
कार्यक्रम के दौरान ‘मानव पूंजी: शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार’ तथा ‘विकसित कृषि: कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसान कल्याण’ जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर शिक्षाविदों, उद्योग जगत के विशेषज्ञों और युवाओं के बीच गहन चर्चा होगी। यह मंच युवाओं को नीति-निर्माण प्रक्रिया में अपनी भूमिका निभाने का अवसर प्रदान करेगा।
महिला युवा संसद का विशेष आयोजन
12 अप्रैल को प्रतिभागियों के पंजीकरण के साथ ही “नारी शक्ति: विकसित भारत की आवाज़” विषय पर ‘महिला युवा संसद’ का आयोजन किया जाएगा। इस सत्र में महिला प्रतिभागी महिला आरक्षण विधेयक पर संसदीय शैली में चर्चा करेंगी और एक सामूहिक प्रस्ताव के साथ सत्र का समापन होगा, जो नारी सशक्तिकरण की मजबूत अभिव्यक्ति बनेगा।
अमृत पीढ़ी की भागीदारी का उदाहरण
2 फरवरी 2026 को केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया द्वारा शुरू किए गए इस अभियान में देशभर से 12 लाख से अधिक युवाओं ने हिस्सा लिया। ‘बजट क्वेस्ट 2026’ का उद्देश्य यूनियन बजट को आम नागरिकों, विशेषकर युवाओं के लिए अधिक समझने योग्य, प्रासंगिक और सहभागी बनाना है।
यह आयोजन ‘अमृत पीढ़ी’ की उस सोच को दर्शाता है, जो न केवल देश की विरासत को आगे बढ़ा रही है, बल्कि भारत के भविष्य के निर्माण में सक्रिय भागीदारी भी निभा रही है।
लेख - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (भारत गणराज्य )
शौर्यपथ लेख / आज 11 अप्रैल हम सभी के लिए बहुत विशेष दिन है। आज भारत के महान समाज सुधारकों में से एक और पीढ़ियों को दिशा दिखाने वाले महात्मा ज्योतिराव फुले की जन्म-जयंती है। इस वर्ष यह अवसर और भी अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनके 200वें जयंती वर्ष का शुभारंभ भी हो रहा है।
महान समाज सुधारक महात्मा फुले का जीवन नैतिक साहस, आत्म चिंतन और समाज के हित के लिए अटूट समर्पण का प्रेरक उदाहरण है। महात्मा फुले को केवल उनकी संस्थाओं या आंदोलनों के लिए ही याद नहीं किया जाता, बल्कि उन्होंने लोगों के मन में जो आशा और आत्मविश्वास जगाया, उसका व्यापक प्रभाव हम आज भी महसूस करते हैं। उनके विचार देशवासियों के लिए प्रेरणापुंज हैं।
महात्मा फुले का जन्म 1827 में महाराष्ट्र में एक बहुत साधारण परिवार में हुआ। लेकिन शुरुआती चुनौतियां कभी उनकी शिक्षा, साहस और समाज के प्रति समर्पण को नहीं रोक पाईं। उन्होंने हमेशा यह माना कि चाहे कितनी भी कठिनाइयां क्यों न आएं, इंसान को मेहनत करनी चाहिए, ज्ञान हासिल करना चाहिए और समस्याओं का समाधान करना चाहिए, न कि उन्हें अनदेखा करना चाहिए। बचपन से ही महात्मा फुले बहुत जिज्ञासु थे और अपनी उम्र के अन्य बच्चों की अपेक्षा कहीं अधिक पुस्तकें पढ़ते थे। वो कहते भी थे, “हम जितना ज्यादा सवाल करते हैं, उनसे उतना ही अधिक ज्ञान निकलता है।” साफ है कि बचपन से मिली जिज्ञासा उनकी पूरी यात्रा में बनी रही।
महात्मा फुले के जीवन में शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण मिशन बनी। उनका मानना था कि ज्ञान किसी एक वर्ग की संपत्ति नहीं, बल्कि एक ऐसी शक्ति है, जिसे सभी के साथ साझा किया जाना चाहिए। जब समाज के बड़े हिस्से को शिक्षा से वंचित रखा जाता था, तब उन्होंने लड़कियों और वंचित वर्गों के लिए स्कूल खोले। वे कहते थे, “बच्चों में जो सुधार मां के माध्यम से आता है, वह बहुत महत्वपूर्ण होता है। इसलिए अगर स्कूल खोले जाएं, तो सबसे पहले लड़कियों के लिए खोले जाएं।” उन्होंने शिक्षा को न्याय और समानता का माध्यम बनाया।
शिक्षा के प्रति उनका दृष्टिकोण हमें आज भी बहुत प्रेरित करता है। पिछले एक दशक में भारत ने युवाओं के लिए रिसर्च और इनोवेशन को बहुत प्राथमिकता दी है। एक ऐसा इकोसिस्टम बनाने का प्रयास किया गया है, जिसमें युवा सवाल पूछने, नई चीजें सीखने और इनोवेशन के लिए प्रेरित हों। ज्ञान, कौशल और अवसरों में निवेश करके भारत अपने युवाओं को देश की प्रगति का आधारस्तंभ बना रहा है।
अपने शैक्षिक ज्ञान और बौद्धिकता से महात्मा फुले ने कृषि, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों की गहरी जानकारी हासिल की। वे कहते थे कि किसानों और मजदूरों के साथ अन्याय समाज को कमजोर करता है। उन्होंने देखा कि सामाजिक असमानताएं खेतों और गांवों में लोगों के जीवन को कैसे प्रभावित करती हैं। इसलिए उन्होंने गरीबों, वंचितों और कमजोर वर्गों को सम्मान दिलाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए भी हरसंभव प्रयास किए।
महात्मा फुले ने कहा था, “"जोपर्यंत समाजातील सर्वांना समान अधिकार मिळत नाहीत, तोपर्यंत खरे स्वातंत्र्य मिळत नाही” यानी जब तक समाज के सभी लोगों को समान अधिकार नहीं मिलते, तब तक सच्ची आजादी नहीं मिल सकती। इसी विचार को जमीन पर उतारने के लिए उन्होंने कई संस्थाओं की स्थापना की। उनका सत्यशोधक समाज, आधुनिक भारत के सबसे महत्वपूर्ण समाज सुधार आंदोलनों में से एक था। यह आंदोलन सामाजिक सुधार, सामुदायिक सेवा और मानवीय गरिमा को बढ़ावा देने में अग्रणी रहा था। यह महिलाओं, युवाओं और गांवों में रहने वाले लोगों की पुरजोर आवाज बना। यह आंदोलन उनके इस विश्वास को दर्शाता है कि समाज की मजबूती के लिए न्याय, हर व्यक्ति के प्रति सम्मान और सामूहिक प्रगति जरूरी है।
उनका व्यक्तिगत जीवन भी साहस की मिसाल रहा। लगातार लोगों के बीच रहकर काम करने का असर उनके स्वास्थ्य पर भी पड़ा। लेकिन गंभीर बीमारी भी उनके संकल्प को कमजोर नहीं कर सकी। एक गंभीर स्ट्रोक के बाद भी उन्होंने अपना काम और समाज के लिए संघर्ष जारी रखा। उनका शरीर कमजोर हुआ, लेकिन समाज के प्रति उनका समर्पण कभी नहीं डगमगाया। आज भी करोड़ों लोग उनके जीवन के इस पहलू से प्रेरणा लेते हैं।
महात्मा फुले का स्मरण, सावित्रीबाई फुले के सम्मानजनक उल्लेख के बिना अधूरा है। वह स्वयं भारत की महान समाज सुधारकों में से एक थीं। भारत की पहली महिला शिक्षिकाओं में शामिल सावित्रीबाई ने लड़कियों की शिक्षा को आगे बढ़ाने में बेहद अहम भूमिका निभाई। महात्मा फुले के निधन के बाद भी उन्होंने इस कार्य को जारी रखा। 1897 में प्लेग महामारी के दौरान उन्होंने मरीजों की इतनी सेवा की कि वह स्वयं भी इस बीमारी की शिकार हो गईं और उनका निधन हो गया।
भारतभूमि बार-बार ऐसी महान विभूतियों से धन्य होती रही है, जिन्होंने अपने विचार, त्याग और कर्म से समाज को मजबूत बनाया है। उन्होंने बदलाव का इंतजार नहीं किया, बल्कि स्वयं बदलाव का माध्यम बने। सदियों से हमारे देश में समाज सुधार की आवाज उन्हीं लोगों से उठी है, जिन्होंने पीड़ा को भाग्य नहीं माना, बल्कि उसे खत्म करने के प्रयासों में जुटे रहे। महात्मा ज्योतिराव फुले भी ऐसे ही महान व्यक्तित्व थे।
मुझे 2022 में पुणे की अपनी यात्रा याद है, जब मैंने शहर में महात्मा फुले की भव्य प्रतिमा पर उन्हें श्रद्धांजलि दी थी। उनके 200वें जयंती वर्ष की शुरुआत पर हम उनके विचारों को अपनाकर ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते हैं। हमें शिक्षा के प्रति अपने संकल्प को मजबूत करना होगा। अन्याय के प्रति संवेदनशील बनना होगा और यह विश्वास रखना होगा कि समाज अपने प्रयासों से ही खुद को बेहतर बना सकता है। उनका जीवन हमें सिखाता है कि समाज की शक्ति को जनहित और नैतिक मूल्यों से जोड़कर भारत में क्रांतिकारी बदलाव लाए जा सकते हैं। यही कारण है कि आज भी उनके विचार करोड़ों लोगों में नई उम्मीद जगाते हैं। महात्मा ज्योतिराव फुले 200 साल बाद भी केवल इतिहास का नाम नहीं, बल्कि भारत के भविष्य के मार्गदर्शक बने हुए हैं।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
