August 13, 2026
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    Naresh Dewangan

    Naresh Dewangan

    280 जोड़ों के विवाह से ‘गोल्डन बुक’ में नाम दर्ज, लेकिन व्यवस्थागत खामियों ने बिगाड़ा आयोजन का स्वाद

    By- नरेश देवांगन 

    जगदलपुर, शौर्यपथ। छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक खुशहाली पहुँचाने के संकल्प के साथ काम कर रही है। मंगलवार को जगदलपुर में संपन्न हुआ मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का भव्य आयोजन मुख्यमंत्री के इसी 'सुशासन' का प्रतीक था, जहाँ 280 गरीब परिवारों की बेटियों का घर बसाया गया। मुख्यमंत्री ने स्वयं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़कर पिता की तरह नवदंपत्तियों को आशीर्वाद दिया। लेकिन, अफ़सोस कि मुख्यमंत्री की इस पवित्र मंशा को जमीन पर उतारने वाले महिला एवं बाल विकास विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने अपनी कार्यप्रणाली से सुशासन को 'कुशासन' की ओर धकेलने में कोई कसर नहीं छोड़ी?

     मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता बनाम अफसरों की संवेदनहीनता

    एक ओर साय सरकार ने प्रदेशभर में 6,412 जोड़ों का विवाह संपन्न कराकर छत्तीसगढ़ का नाम 'गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड' में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कराया, वहीं दूसरी ओर जगदलपुर के सिटी ग्राउंड में विभाग की घोर लापरवाही ने इस गौरवशाली क्षण को शर्मसार कर दिया। शासन की योजना तो बेटियों को सम्मान देने की थी, लेकिन विभाग के लापरवाह प्रबंधन ने कई नवविवाहित जोड़ों और उनके परिजनों को तपती धूप में खुले आसमान के नीचे जमीन पर बैठकर भोजन करने के लिए मजबूर कर दिया।

     क्या यही है सुशासन?

    आयोजन स्थल पर टेंट, दरी और पानी जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं का कमी विभाग की तैयारियों की पोल खोल रहा था। जिस आयोजन को विभाग की देखरेख में यादगार और सम्मानजनक होना चाहिए था, उसे अधिकारियों की उदासीनता ने बदइंतजामी की भेंट चढ़ा दिया। बारातियों को घंटों भोजन के लिए तरसना पड़ा, जो यह सवाल खड़ा करता है कि जब सरकार ने बजट की कोई कमी नहीं रखी, तो फिर व्यवस्थाओं में यह 'कंजूसी' और 'लापरवाही' किसके संरक्षण में हुई?

     जिम्मेदारों पर कार्रवाई की दरकार

    स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति के बावजूद विभाग के मैदानी अमले की निष्क्रियता साफ दिखी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जहाँ अपनी योजनाओं से छत्तीसगढ़ का मान बढ़ा रहे हैं, वहीं महिला एवं बाल विकास विभाग के ऐसे जिम्मेदार अधिकारी अपनी लचर व्यवस्था से सरकार की छवि धूमिल करने का काम कर रहे हैं। जनता अब यह सवाल पूछ रही है कि क्या इन लापरवाह जिम्मेदारों पर गाज गिरेगी, या फिर रिकॉर्ड की आड़ में इन व्यवस्थागत खामियों को दबा दिया जाएगा?

    इस कार्यक्रम मे महापौर संजय पांडे, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती वेदवती कश्यप, नगर निगम सभापति खेमसिंह देवांगन, राजस्व सभापति संग्राम सिंह राणा, जिला पंचायत उपाध्यक्ष बलदेव मंडावी, जनपद पंचायत अध्यक्ष पदलाम नाग सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी में विवाह संस्कार संपन्न हुए, पर सामने आई व्यवस्थागत कमियों ने आयोजन की गरिमा पर प्रश्नचिह्न लगाया।

     विभाग का पक्ष

    जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी श्री सिन्हा ने कहा कि 280 जोड़ों का सामूहिक विवाह योजनानुसार संपन्न हुआ। भोजन में दाल, चावल, पूड़ी, सब्जी और रसगुल्ला रखा गया था तथा सभी को भोजन उपलब्ध कराया गया। उनके अनुसार आयोजन स्थल पर सामूहिक रूप से भोजन कराया गया और वे स्वयं निरीक्षण किये हैं।

    हालाँकि, मौके पर मौजूद कुछ नवविवाहित जोड़ों ने अव्यवस्था के चलते भोजन नहीं कर पाने की बात कही, जिससे विभागीय दावे पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    जगदलपुर, शौर्यपथ। शहर की भागदौड़, धूल और शोर-शराबे से दूर बस्तरवासियों को प्रकृति की गोद में सुकून के पल बिताने का एक अनुपम स्थल मिल गया है। कुम्हड़ाकोट में निर्मित जनजातीय गौरव वाटिका का लोकार्पण शुक्रवार को छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप तथा विधायक किरण सिंह देव के कर-कमलों से हुआ। लगभग तीन करोड़ रुपये की लागत से विकसित यह वाटिका अब आमजन के लिए समर्पित कर दी गई है, जो बस्तर की समृद्ध जनजातीय विरासत, संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य का जीवंत प्रतीक बनकर उभरी है।

    लोकार्पण समारोह में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती वेदवती कश्यप, छत्तीसगढ़ बेवरेजेस कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष श्रीनिवास मद्दी, मुख्य वन संरक्षक आलोक तिवारी, संचालक कांगेर वैली सुश्री स्टायलो मंडावी सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

    लोकार्पण के पश्चात अतिथियों ने वाटिका का अवलोकन किया। वन मंडलाधिकारी उत्तम कुमार गुप्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि लगभग 25 एकड़ क्षेत्र में फैली इस परियोजना की शुरुआत हेल्थ पार्क की अवधारणा से हुई थी, जिसे बाद में एक बहुआयामी और आकर्षक वाटिका के रूप में विकसित किया गया। उप मुख्यमंत्री ने 1700 मीटर लंबे वॉकिंग ट्रेल, योगा शेड, योगा जोन, ओपन जिम जैसी आधुनिक सुविधाओं की सराहना करते हुए इसे स्वास्थ्य जागरूकता की दिशा में सराहनीय पहल बताया।

    वाटिका में बनाए गए गपशप जोन, पारिवारिक आयोजनों के लिए निर्मित पाँच सुंदर पगोड़ा, प्लास्टिक फ्री जोन की व्यवस्था तथा इको-फ्रेंडली अवधारणा ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। परिसर के मध्य स्थित तालाब और आइलैंड ने वाटिका की सुंदरता को और निखार दिया है। आगंतुकों की सुविधा के लिए प्रवेश द्वार पर पार्किंग और प्रसाधन की समुचित व्यवस्था भी की गई है। वन विभाग द्वारा भविष्य में ट्री-हाउस और एडवेंचर गतिविधियों की योजना भी प्रस्तावित है। लोकार्पण के साथ ही जनजातीय गौरव वाटिका अब बस्तर के पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख आकर्षण के रूप में दर्ज हो गई है।

    इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप द्वारा विभिन्न स्व-सहायता समूहों एवं हितग्राहियों को एक करोड़ 22 लाख रुपये से अधिक की सहायता राशि के चेक वितरित किए गए। वृत्त स्तरीय चक्रीय निधि के अंतर्गत महिला स्व-सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से एक करोड़ 20 लाख 13 हजार रुपये का ऋण प्रदान किया गया।

    बकावण्ड की मां धारणी करणी स्व-सहायता समूह को काजू प्रसंस्करण एवं विपणन हेतु 50 लाख रुपये, आसना के गोधन स्व-सहायता समूह को गाय पालन के लिए 34 लाख रुपये, घोटिया एवं भानपुरी के समूहों को इमली संग्रहण व प्रसंस्करण के लिए 13-13 लाख रुपये तथा कोलेंग की समिति को दोना-पत्तल निर्माण हेतु 10 लाख रुपये की सहायता दी गई। यह पहल स्थानीय रोजगार को मजबूती देने की दिशा में मील का पत्थर मानी जा रही है।

    कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री ने मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा बीमा योजना के तहत कुरंदी निवासी कमलोचन नाग को दो लाख रुपये की बीमा सहायता राशि का चेक सौंपा। यह सहायता उनकी पत्नी स्वर्गीय भारती नाग के आकस्मिक निधन के पश्चात स्वीकृत की गई थी।

    उप मुख्यमंत्री ने महिला स्व-सहायता समूहों से संवाद करते हुए इमली एवं काजू प्रसंस्करण जैसी गतिविधियों के विस्तार, बाजार उपलब्धता और मार्केटिंग व्यवस्था पर भी चर्चा की। यह कार्यक्रम न केवल विकास और पर्यटन को गति देने वाला रहा, बल्कि बस्तर के वनांचलों में रोजगार, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को भी स्पष्ट करता नजर आया।

    आदिवासी-ओबीसी-माइनोरिटी समाजों ने जताई नाराज़गी

    प्रमुख प्रश्न: DMFT व CSR फंड के उपयोग को लेकर पारदर्शिता की मांग

    जगदलपुर, शौर्यपथ। वीर आदिवासी क्रांतिकारी गुंडाधुर की जयंती (भूमकाल दिवस) के आयोजन को लेकर बस्तर संभाग में विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा कुछ प्रश्न और आपत्तियाँ सामने रखी गई हैं। सर्व आदिवासी समाज सहित एसटी-एससी-ओबीसी-माइनोरिटी समाजों का कहना है कि उन्होंने नगरनार स्टील लिमिटेड (NMDC) से कार्यक्रम के लिए सहयोग का अनुरोध किया था, लेकिन उन्हें सकारात्मक जवाब नहीं मिला।

    समाज प्रतिनिधियों के अनुसार, 10 फरवरी को प्रस्तावित गुंडाधुर जयंती कार्यक्रम के संबंध में बस्तर संभाग के विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों ने नगरनार स्टील लिमिटेड के एडीजीएम बाबजी से मुलाकात कर औपचारिक आमंत्रण सौंपा था। इस दौरान सामाजिक सहभागिता और सहयोग का निवेदन किया गया।

    समाज प्रतिनिधियों का कहना है कि उन्हें प्रबंधन की ओर से यह जानकारी दी गई कि स्टील प्लांट आर्थिक चुनौतियों से गुजर रहा है, जिस कारण किसी प्रकार का सहयोग फिलहाल संभव नहीं है। इसके बाद उन्हें परियोजना से जुड़े अन्य अधिकारियों से संपर्क करने की सलाह दी गई, जहाँ से भी उन्हें कोई स्पष्ट उत्तर नहीं मिल पाया।

    प्रतिनिधियों ने यह भी बताया कि कार्यकारी निदेशक से मुलाकात के प्रयास के दौरान व्यस्तता का हवाला दिया गया, जिससे वे अपनी बात सीधे रखने में असमर्थ रहे। इस स्थिति से समाजों में असंतोष व्यक्त किया जा रहा है।

    इसी क्रम में समाजों की ओर से यह प्रश्न भी उठाया गया है कि जिले के लिए स्वीकृत DMFT और CSR फंड का उपयोग किन-किन कार्यों में किया जा रहा है। समाजों का कहना है कि यदि यह राशि स्थानीय विकास और सामाजिक गतिविधियों के लिए है, तो ऐसे ऐतिहासिक व सांस्कृतिक आयोजनों में सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार किया जाना चाहिए।

    सर्व आदिवासी समाज के संभागीय अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर ने कहा कि गुंडाधुर जयंती बस्तर के आदिवासी समाज के लिए ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व रखती है। उन्होंने अपेक्षा जताई कि भविष्य में सामाजिक संवाद और समन्वय के माध्यम से ऐसे विषयों का समाधान निकाला जाएगा।

    ओबीसी महासभा एवं अन्य समाज संगठनों ने मांग की है कि स्थानीय युवाओं के रोजगार, सामाजिक सहभागिता तथा DMFT-CSR फंड के उपयोग से संबंधित जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जाए, ताकि किसी प्रकार का भ्रम न रहे।

    समाज प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि वे इस विषय पर संवाद और संवैधानिक दायरे में रहकर अपनी बात रखना चाहते हैं।

    जगदलपुर, शौर्यपथ। महामहिम राष्ट्रपति महोदय के 7 फरवरी को बस्तर जिले के प्रवास के दौरान लालबाग मैदान जगदलपुर में प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर यातायात पुलिस द्वारा ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की गई है। आम जनता को आवागमन में असुविधा न हो, इसके लिए 7 फरवरी को प्रातः 7 बजे से दोपहर 1 बजे तक यातायात व्यवस्था में परिवर्तन किया गया है।

    जारी एडवाइजरी के अनुसार, आमागुड़ा चौक से लालबाग की ओर एवं वीवीआईपी मार्ग पर आम जनता के वाहनों का आवागमन प्रातः 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक यातायात एवं सुरक्षा कारणों से प्रतिबंधित रहेगा। वहीं, भारी वाहनों का जगदलपुर शहर में प्रवेश प्रातः 7 बजे से दोपहर 2 बजे तक वर्जित रहेगा। हालांकि, आपातकालीन सेवा से संबंधित वाहनों को प्रतिबंध से मुक्त रखा गया है।

    आम जनता के लिए निर्धारित पार्किंग स्थल

    यातायात पुलिस द्वारा आम नागरिकों के वाहनों की पार्किंग के लिए कुम्हड़ाकोट, गणपति रिसॉर्ट के सामने मैदान तथा रिलायंस पेट्रोल पंप के बाजू स्थित खाली मैदान को चिन्हित किया गया है।

    परिवर्तित मार्ग

    चांदनी चौक से नयामुंडा होते हुए हाटकचोरा मार्ग से राष्ट्रीय राजमार्ग 30 की ओर आवागमन किया जा सकेगा।

    कार्यक्रम स्थल पहुंचने के मार्ग

    मुख्य मंच पर बैठने वाले अतिथियों के लिए आईजीपी बंगला तिराहा से होकर गणतंत्र द्वार के सामने पहुंचने के पश्चात लालबाग पीटीएस ग्राउंड में पार्किंग की व्यवस्था रहेगी।

    मीडिया एवं मंच के सामने बैठने वाले अतिथियों को जेल तिराहा, आईजीपी बंगला तिराहा होते हुए लालबाग सनसिटी मार्ग से क्योरों स्कूल के पीछे खाली मैदान में पार्किंग कर प्रवेश द्वार से कार्यक्रम स्थल में प्रवेश दिया जाएगा।

    आम जनता के पहुंच मार्ग

    कोडागांव, नगरनार एवं बकावंड से आने वाले आमागुड़ा चौक, गीदम एवं सुकमा रोड से आने वाले तेली मारेंगा बाईपास आड़ावाल से आमागुड़ा चौक, लोहंडीगुड़ा एवं जगदलपुर शहर के लिए चांदनी चौक नयामुंडा बोधघाट थाना के पीछे हाटकचोरा मार्ग से आमागुड़ा चौक पहुंच सकेंगे।

    यातायात पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे ट्रैफिक एडवाइजरी का पालन करें, वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें तथा यातायात कर्मियों के निर्देशों का सहयोग करें ताकि कार्यक्रम के दौरान यातायात व्यवस्था सुचारू बनी रहे।

    By- नरेश देवांगन 

    जगदलपुर, शौर्यपथ। बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और प्राकृतिक सौंदर्य को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में कुम्हड़ाकोट में निर्मित ‘जनजातीय गौरव वाटिका’ का लोकार्पण आज किया जाएगा। इस भव्य वाटिका का उद्घाटन छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज शुक्रवार 6 फरवरी को शाम 5 बजे अपने कर-कमलों से करेंगे।

    बस्तर वन मंडल द्वारा निर्मित इस वाटिका का उद्देश्य बस्तर की अनमोल जनजातीय विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ आमजन और पर्यटकों को जनजातीय जीवनशैली, कला और परंपराओं से परिचित कराना है। यह वाटिका आने वाले समय में बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का कार्य करेगी।

    लोकार्पण समारोह में मुख्यमंत्री के साथ उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा एवं अरुण साव अति विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे, वहीं वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे।

    इस अवसर पर बस्तर सांसद महेश कश्यप, जगदलपुर विधायक किरण देव, चित्रकोट विधायक विनायक गोयल, बस्तर विधायक लखेश्वर बघेल, जिला पंचायत अध्यक्ष वेदवती कश्यप तथा महापौर संजय पांडेय सहित अनेक जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहेंगे।

    जनजातीय गौरव वाटिका के उद्घाटन को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। यह पहल बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है।

    By - नरेश देवांगन 

    जगदलपुर, शौर्यपथ। "शौर्यपथ अख़बार" में प्रकाशित खबर के बाद प्रशासन की संवेदनशीलता और कार्यकुशलता का सराहनीय उदाहरण सामने आया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए नवपदस्थ कलेक्टर ने बिना विलंब संज्ञान लिया और स्पष्ट निर्देश दिए कि गरीब व विकलांग महिला को शासन की किसी भी पात्र योजना से वंचित न रहने दिया जाए।

    कलेक्टर के निर्देश मिलते ही जनपद पंचायत तोकापाल के सीईओ ने सक्रिय भूमिका निभाते हुए पूरी टीम के साथ त्वरित कार्रवाई शुरू की। जमीनी हकीकत को समझते हुए जनपद स्तर पर न केवल फाइलों में सुधार की पहल की गई, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण के साथ समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में काम किया गया।

    वहीं खाद्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों की कार्यशैली भी प्रशंसनीय रही। मामला संज्ञान में आते ही विभागीय अमला बिना किसी औपचारिक देरी के सक्रिय हुआ और राशन कार्ड से जुड़ी त्रुटियों को सुधारने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। अधिकारियों और कर्मचारियों ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि शासन की योजनाएं काग़ज़ों तक सीमित नहीं, बल्कि ज़रूरतमंद तक पहुँचाने की जिम्मेदारी भी उनकी है।

    जनपद सीईओ, खाद्य विभाग के अधिकारियों और उनकी पूरी टीम ने आपसी समन्वय के साथ जिस तत्परता और संवेदनशीलता का परिचय दिया, वह प्रशासनिक व्यवस्था की सकारात्मक तस्वीर पेश करता है। विकलांग महिला को चावल, पेंशन और आवास जैसी बुनियादी सुविधाओं से जोड़ने की प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ाई जा रही है। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही महिला को चावल, पेंशन और आवास जैसी सभी बुनियादी सुविधाओं का नियमित लाभ मिलेगा और भविष्य में ऐसी संवेदनहीनता की पुनरावृत्ति नहीं होगी।

    यह कार्रवाई न केवल एक गरीब और असहाय महिला के जीवन में राहत लेकर आई है, बल्कि यह भी साबित करती है कि जब प्रशासन इच्छाशक्ति और मानवीय सोच के साथ काम करता है, तो शासन की योजनाएं सचमुच ज़मीन पर उतरती हैं। क्षेत्र में जनपद पंचायत तोकापाल और खाद्य विभाग की इस तत्पर कार्यशैली की सराहना की जा रही है। यह कदम न केवल एक गरीब विकलांग महिला के लिए राहत बना है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि मीडिया में उठी आवाज़ और प्रशासनिक संवेदनशीलता मिलकर ज़मीन पर बदलाव ला सकती है।

    By- नरेश देवांगन 

    जगदलपुर, शौर्यपथ । न्यू बस स्टैंड पर महापौर की तस्वीर को लेकर "शौर्यपथ" में प्रमुखता से प्रकाशित खबर का असर तुरंत देखने को मिला। खबर सामने आने के बाद निगम स्तर पर संज्ञान लिया गया और बस स्टैंड परिसर में लगे पोस्टर से पूर्व महापौर का फोटो हटा दिया गया।

    अख़बार के माध्यम से उठे सवाल ने उस स्थिति की ओर ध्यान खींचा, जहां अन्य नेताओं की तस्वीरें तो समय के साथ बदली जा चुकी थीं, लेकिन महापौर की तस्वीर अपडेट होना जैसे यादों के भरोसे छोड़ दिया गया था। सवाल सामने आते ही तस्वीर हटाई गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि सुधार की ज़रूरत पहले से थी, बस उसे रेखांकित किया जाना बाकी था।

    यह संयोग ही कहा जाएगा कि जो बात लंबे समय तक नजरअंदाज होती रही, वह खबर प्रकाशित होते ही स्मरण में आ गई। कार्रवाई की गति ने यह भी दिखा दिया कि जब मुद्दा प्रमुखता से सामने आता है, तो समाधान में देर नहीं लगती।

    फिलहाल, इस त्वरित सुधार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सार्वजनिक स्थलों पर लगी तस्वीरें केवल सजावट नहीं होतीं, बल्कि वे व्यवस्था की सजगता और सतर्कता का भी संकेत देती हैं। जनहित से जुड़े विषयों को जब जिम्मेदारी से उजागर किया जाता है, तो व्यवस्था भी उसी जिम्मेदारी के साथ प्रतिक्रिया देती है।

    By- नरेश देवांगन 

    जगदलपुर, शौर्यपथ । नगर निगम जगदलपुर में वर्तमान महापौर संजय पांडे हैं, लेकिन न्यू बस स्टैंड मे लगी पोस्टर कुछ और ही कहानी कहती नजर आ रही हैं। यहां अब भी पूर्व महापौर सफ़िरा साहू का फोटो प्रमुखता से लगा हुआ है, जबकि उसी बोर्ड पर मौजूद अन्य पूर्व नेताओं की तस्वीरों पर वर्तमान सरकार के नेताओं के फोटो चिपकाए जा चुके हैं।

    हैरानी की बात यह है कि जहां “अपडेट” करने की फुर्ती दिखाई गई, वहां महापौर की तस्वीर को जस का तस छोड़ दिया गया। सवाल यह है कि क्या निगम की नज़र में महापौर का पद इतना गौण है कि उसकी तस्वीर बदलने की ज़रूरत ही नहीं समझी गई? या फिर जिम्मेदारों के लिए यह तय करना ही मुश्किल हो गया है कि शहर का वर्तमान महापौर आखिर है कौन?

    शहर में यह चर्चा आम है कि निगम कार्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर लगी तस्वीरें सिर्फ शोपीस नहीं होतीं, वे व्यवस्था की सजगता भी दिखाती हैं। ऐसे में न्यू बस स्टैंड पर टंगी तस्वीरें निगम की प्राथमिकताओं पर तंज कसती प्रतीत हो रही हैं।

    अब निगाहें निगम के जिम्मेदारों पर टिकी हैं—क्या वे इसे सामान्य भूल बताकर नजरअंदाज करेंगे, या फिर समय के साथ तस्वीरें भी बदलेंगी? फिलहाल, न्यू बस स्टैंड पर सवाल टंगा है, जवाब नहीं।

    By- नरेश देवांगन  

    जगदलपुर, शौर्यपथ। साय सरकार जनता के प्रति संवेदनशीलता और सुशासन को लेकर लगातार प्रयासरत दिखाई दे रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों की कार्यप्रणाली सरकार की मंशा पर सवाल खड़े कर रही है। इसका खामियाजा गरीब और असहाय लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

    तस्वीर में दिखाई दे रही ब्लॉक तोकापाल के ग्राम बुरूंगपाल तेलीमारेंगा की विकलांग 55 वर्षीय महिला सुकरी नाग शारीरिक रूप से असमर्थ और बीमारी से पीड़ित हैं। उनका जीवन शासकीय सहायता पर निर्भर है, किंतु बीते लगभग छह महीनों से उन्हें उचित मूल्य दुकान से चावल नहीं मिल रहा है। जानकारी के अनुसार, सुकरी नाग हर माह उम्मीद लेकर शासकीय उचित मूल्य दुकान पहुंचती रहीं, जहां उन्हें यह कहकर लौटा दिया गया कि “आपके नाम का राशन नहीं आया है।” उन्हें यह जानकारी तक नहीं दी गई कि उनका राशन कार्ड बंद किया जा चुका है।

    विभागीय सूत्रों से पता चला है कि राशन कार्ड बंद करने के कारण में महिला को “गांव से पलायन” बताया गया है, जबकि वह आज भी उसी गांव में रह रही हैं। न उनके पास पक्का मकान है, न शौचालय की पक्की व्यवस्था और न ही किसी प्रकार की स्थायी आय। यह भी सामने आया है कि उन्हें अब तक विकलांग पेंशन जैसी बुनियादी योजना का लाभ भी नहीं मिल रहा है।

    ऐसे हालात में राशन बंद होना उनके लिए जीवन यापन की सबसे बड़ी चुनौती बन गया है और कई बार उन्हें बिना भोजन के ही दिन गुजारना पड़ता है। यह मामला प्रशासनिक प्रक्रिया में हुई गंभीर चूक की ओर संकेत करता है और यह जांच का विषय है कि बिना भौतिक सत्यापन के राशन कार्ड बंद करने की कार्रवाई कैसे हुई।

    यह स्थिति कई गंभीर सवाल भी खड़े करती है। जब विकलांग महिला आज भी उसी गांव में रह रही है, तो किस आधार पर उसे “पलायन” बताया गया? क्या यह प्रविष्टि बिना स्थल सत्यापन और बिना संवेदनशीलता के दर्ज कर दी गई? क्या यह नहीं सोचा गया कि एक बेसहारा और विकलांग महिला का राशन बंद होना सीधे भूख से जूझने जैसा है? ऐसे मामलों में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि कहीं न कहीं मानवीय जिम्मेदारी और जवाबदेही की अनदेखी तो नहीं हुई।

    गौरतलब है कि जिले में हाल ही में नवपदस्थ कलेक्टर ने पदभार संभाला है और वे शासकीय योजनाओं का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए विभागीय निरीक्षण और निर्देश दे रहे हैं। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेकर त्वरित संज्ञान लेगा, राशन कार्ड पुनः चालू कराएगा और विकलांग महिला को शासन की पात्र योजनाओं का लाभ दिलाएगा।

    जगदलपुर, शौर्यपथ। जन अधिकार सामाजिक कल्याण संघ के प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश अध्यक्ष चंद्रिका सिंह के नेतृत्व में बस्तर के नवपदस्थ कलेक्टर आकाश छिकारा से सौजन्य भेंट कर उनका आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर संघ के उद्देश्यों एवं जनहित में किए जा रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी कलेक्टर को दी गई।

    प्रतिनिधिमंडल द्वारा संघ के कुल 31 सामाजिक एवं जनकल्याणकारी उद्देश्यों के साथ-साथ अब तक किए गए जनहित कार्यों से कलेक्टर को अवगत कराया गया। संघ के कार्यों से प्रभावित होकर कलेक्टर श्री छिकारा ने संघ की भूमिका की सराहना की तथा आश्वस्त किया कि प्रशासन द्वारा समय-समय पर संघ के सहयोग को महत्व दिया जाएगा और जनहित के कार्यों में हर संभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।

    इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष के साथ प्रदेश प्रवक्ता अनंत महतो, प्रदेश उपाध्यक्ष अनवर हुसैन, बलराम कश्यप, पी. शिंदे, रवि तिवारी, प्रदेश महासचिव अनिल ठाकुर, विपिन तिवारी, संभागीय अध्यक्ष शंकर लाल श्रीवास्तव, संभागीय संयोजक विनय मंडल, बस्तर जिला अध्यक्ष के.के. भटनागर, जिला कोषाध्यक्ष विशाल सतमान, संघ सदस्य भरोसी राम साहू सहित अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में प्रदेश अध्यक्ष चंद्रिका सिंह ने कलेक्टर बस्तर का आभार व्यक्त किया।

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