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May 07, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

नई दिल्ली / शौर्यपथ / केंद्र सरकार ने किसानों के हित में बड़ा निर्णय लेते हुए प्राकृतिक गैस (आपूर्ति विनियमन) आदेश 2026 जारी किया है, जिसके तहत उर्वरक संयंत्रों को प्राकृतिक गैस आपूर्ति के लिए प्राथमिकता क्षेत्र में शामिल किया गया है। इस फैसले का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश में उर्वरक उत्पादन प्रभावित न हो और किसानों को समय पर खाद उपलब्ध हो सके।

सरकार के अनुसार उर्वरक संयंत्रों को उनके पिछले छह महीनों की औसत गैस खपत का कम से कम 70 प्रतिशत प्राकृतिक गैस उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे उत्पादन निरंतर जारी रह सके। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक LNG आपूर्ति प्रभावित हो रही है।

उर्वरक विभाग ने बताया कि संभावित वैश्विक संकट को देखते हुए सरकार ने पहले से ही उर्वरकों का बड़ा बफर स्टॉक तैयार कर लिया है। 10 मार्च 2026 तक देश में कुल 180.12 लाख मीट्रिक टन उर्वरक भंडार उपलब्ध है, जो पिछले वर्ष इसी अवधि के 131.79 लाख मीट्रिक टन की तुलना में लगभग 36.6 प्रतिशत अधिक है। इसमें यूरिया 61.51 लाख मीट्रिक टन, डीएपी 25.17 लाख मीट्रिक टन और एनपीके 56.30 लाख मीट्रिक टन का प्रमुख योगदान है।

सरकार ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि खरीफ सीजन में उर्वरकों की किसी प्रकार की कमी नहीं होने दी जाएगी। इसके लिए आवश्यक शिपमेंट की व्यवस्था पहले ही कर ली गई है। फरवरी 2026 तक भारत 98 लाख मीट्रिक टन यूरिया का आयात कर चुका है और अगले तीन महीनों में 17 लाख मीट्रिक टन से अधिक यूरिया का अतिरिक्त आयात भी पाइपलाइन में है।

उर्वरक विभाग के अनुसार यह निर्णय किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने और खेती-किसानी को निर्बाध बनाए रखने की दिशा में सरकार की प्राथमिकता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

  रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज विधानसभा स्थित उनके कार्यालय कक्ष में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण और दूरगामी निर्णय लिए गए। बैठक में कानून व्यवस्था, प्रशासनिक सुधार, ऊर्जा, भर्ती प्रणाली और खेल अधोसंरचना जैसे कई अहम विषयों पर चर्चा करते हुए विभिन्न विधेयकों के प्रारूप को मंजूरी दी गई। इन फैसलों का उद्देश्य शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और जनहितकारी बनाना बताया गया है।

मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 के प्रारूप को मंजूरी दी है। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य राज्य में किसी व्यक्ति के धर्म परिवर्तन के लिए बल प्रयोग, प्रलोभन, कपटपूर्ण साधनों, अनुचित प्रभाव या मिथ्या निरूपण जैसे माध्यमों पर प्रभावी रोक लगाना है। सरकार का मानना है कि इस विधेयक के लागू होने से धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता आएगी और किसी भी प्रकार के दबाव या प्रलोभन के माध्यम से धर्म परिवर्तन की घटनाओं पर नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।

बैठक में एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए विशुद्ध रूप से राजनीतिक आंदोलनों से संबंधित 13 प्रकरणों को न्यायालय से वापस लेने की स्वीकृति दी गई। ये प्रकरण मंत्रिपरिषद की उप-समिति की अनुशंसा पर वापस लेने का निर्णय लिया गया है।

ऊर्जा के क्षेत्र में भी कैबिनेट ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मंत्रिपरिषद ने अपारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर आधारित संयंत्रों और परियोजनाओं के लिए अनुदान दरों के निर्धारण के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसके तहत क्रेडा द्वारा स्थापित किए जाने वाले सोलर हाईमास्ट संयंत्रों के लिए वर्ष 2024-25 और 2025-26 में 1 लाख 50 हजार रुपये का राज्य अनुदान प्रदान किया जाएगा। वहीं वर्ष 2026-27 और आगामी वर्षों में निविदा दर का 30 प्रतिशत या 1 लाख 50 हजार रुपये (जो भी कम हो) अनुदान के रूप में दिया जाएगा। इसी तरह घरेलू बायोगैस संयंत्रों के लिए वर्ष 2024-25 और 2025-26 में 2 से 6 घन मीटर क्षमता तक 9 हजार रुपये प्रति संयंत्र तथा वर्ष 2026-27 से आगे सभी क्षमताओं के लिए 9 हजार रुपये प्रति संयंत्र अनुदान प्रस्तावित किया गया है।

कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ उपकर (संशोधन) विधेयक 2026 के प्रारूप को भी मंजूरी दी है, जिसके तहत पंजीयन पर लगने वाले अतिरिक्त उपकर शुल्क को समाप्त कर दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 में राजीव गांधी मितान क्लब योजना के वित्तपोषण के लिए संपत्ति के अंतरण पर स्टाम्प शुल्क के अतिरिक्त 12 प्रतिशत उपकर लगाया गया था। चूंकि वर्तमान में यह योजना संचालित नहीं है, इसलिए अतिरिक्त उपकर को समाप्त करने का निर्णय लिया गया।

इसके अलावा मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश (संशोधन) विधेयक 2026 तथा छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल अधिनियम 1972 (संशोधन) विधेयक 2026 के प्रारूप को भी स्वीकृति प्रदान की।

राज्य में सरकारी भर्तियों को सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल विधेयक 2026 के प्रारूप को मंजूरी दी। इसके तहत राज्य शासन के विभिन्न विभागों में तकनीकी और गैर-तकनीकी तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती के लिए छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल का गठन किया जाएगा, जो परीक्षा आयोजित करने और उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया को संचालित करेगा।

भर्ती परीक्षाओं में होने वाली अनियमितताओं को रोकने के उद्देश्य से मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ (लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक 2026 को भी मंजूरी दी। इस विधेयक का उद्देश्य लोक परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को सुनिश्चित करना है तथा परीक्षा में नकल या अन्य अनुचित साधनों के उपयोग पर सख्त नियंत्रण स्थापित करना है।

बैठक में छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 40, 50 और 59 में संशोधन से संबंधित विधेयक के प्रारूप को भी मंजूरी दी गई, जिससे राजस्व प्रशासन को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

खेलों के विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मंत्रिपरिषद ने जिला क्रिकेट एसोसिएशन राजनांदगांव को राजगामी संपदा की 5 एकड़ भूमि आवंटित करने का निर्णय लिया है। इस भूमि पर अत्याधुनिक क्रिकेट मैदान और क्रिकेट अकादमी का निर्माण किया जाएगा, जिससे प्रदेश में क्रिकेट प्रतिभाओं को प्रशिक्षण और बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

मंत्रिपरिषद की इस बैठक में लिए गए निर्णयों को राज्य के प्रशासनिक सुधार, ऊर्जा विस्तार, भर्ती प्रणाली में पारदर्शिता और खेल अधोसंरचना के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

 

  रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ विधानसभा में उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के अधीन आने वाले पंचायत एवं ग्रामीण विकास, गृह, जेल तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का बजट पारित कर दिया गया। बजट में ग्रामीण विकास, आवास, सड़क निर्माण, पुलिस सुदृढ़ीकरण, जेल सुधार और विज्ञान अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं।

उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने बताया कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के लिए 16 हजार 560 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद पहली ही बैठक में 18 लाख से अधिक लंबित आवासों के निर्माण को स्वीकृति दी गई थी और अब एसईसीसी 2011 व आवास प्लस-2018 के सभी पात्र हितग्राहियों के आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं। विशेष पिछड़ी जनजाति समुदाय के लिए प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान के तहत 33,255 परिवारों को आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 19,199 आवास पूर्ण हो चुके हैं।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आत्मसमर्पित नक्सलियों एवं पीड़ित परिवारों के लिए 15 हजार आवास उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वहीं मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना के अंतर्गत 38 हजार से अधिक आवास स्वीकृत और 15 हजार से अधिक पूर्ण हो चुके हैं।

सड़क संपर्क बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 2237.97 करोड़ रुपये और मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं विकास योजना के लिए 550 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे 774 सड़कों के माध्यम से 781 बसाहटें लाभान्वित होंगी। इसके अलावा विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन के लिए 4000 करोड़ रुपये, प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के लिए 4265 करोड़ रुपये, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के लिए 350 करोड़ रुपये और छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के लिए 850 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।

गृह विभाग के लिए 7721.01 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसमें पुलिस बल को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर नए पदों की स्वीकृति दी गई है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 15 नए पुलिस थानों की स्थापना, कई चौकियों को थाना में उन्नयन तथा बस्तर फाइटर बल, एटीएस, एन्टी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और साइबर थानों के लिए अतिरिक्त पदों का प्रावधान किया गया है। पुलिस आधुनिकीकरण के तहत आईटी सेंटर, साइबर थाना और आधुनिक अनुसंधान सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

जेल विभाग में सुधार के लिए प्रदेश की 16 जेलों में प्रिजन कॉलिंग सिस्टम स्थापित किया जाएगा, जिससे बंदी अपने परिजनों से वॉयस और वीडियो कॉल के माध्यम से संवाद कर सकेंगे। साथ ही 21 जेलों में 31 नई बैरकों के निर्माण और जेल अधोसंरचना सुधार के लिए भी बजट प्रावधान किया गया है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के लिए 225 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। इसके अंतर्गत विज्ञान तीर्थ दर्शन अभियान शुरू किया जाएगा, जिससे शोधार्थियों को राष्ट्रीय स्तर के अनुसंधान संस्थानों का अवलोकन कराया जाएगा। इसके अलावा सूरजपुर जिले के मायापुर में 6.65 करोड़ रुपये की लागत से एस्ट्रो साइंस सेंटर, पांच जिलों में नए साइंस पार्क, तथा सरगुजा और बस्तर संभाग में मोबाइल साइंस लैब स्थापित करने का प्रावधान किया गया है।

इस बजट पर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित कई विधायकों ने चर्चा में भाग लिया। सरकार का कहना है कि यह बजट ग्रामीण विकास, आंतरिक सुरक्षा, जेल सुधार और विज्ञान अनुसंधान को नई गति देगा।

  बिलासपुर / शौर्यपथ / अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2026 के अवसर पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर के यूनिटी ऑडिटोरियम में एक गरिमामय सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ न्यायाधीशगण एवं विशिष्ट अतिथियों के आगमन के बाद राष्ट्रीय गान और पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर न्यायपालिका और विधिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली कुल 54 महिलाओं को सम्मानित किया गया, जिनमें न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता तथा उच्च न्यायालय में कार्यरत विभिन्न श्रेणियों की महिला कर्मचारी शामिल रहीं।

समारोह के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने अपने प्रेरक उद्बोधन में महिलाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी केवल समानता का प्रश्न नहीं है, बल्कि इससे न्याय व्यवस्था अधिक संवेदनशील, संतुलित और सशक्त बनती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की बुद्धिमत्ता, संवेदनशीलता और समर्पण न्याय व्यवस्था को अधिक मानवीय और प्रभावी बनाते हैं।

मुख्य न्यायाधीश ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2026 के थीम “Give to Gain” का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाना और उन्हें बेंच तथा बार में समान अवसर प्रदान करना लोकतांत्रिक मूल्यों और विधि के शासन को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि जब महिलाओं को न्यायपालिका में समान अवसर मिलते हैं, तो उसका लाभ केवल महिलाओं तक सीमित नहीं रहता बल्कि पूरा समाज इससे लाभान्वित होता है।

न्यायमूर्ति सिन्हा ने इस अवसर पर उच्च न्यायालय, जिला न्यायालयों, सिविल न्यायालयों और विभिन्न शासकीय कार्यालयों में कार्यरत महिलाओं के समर्पण और योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनकी प्रतिबद्धता और कार्यकुशलता विधिक क्षेत्र को समृद्ध बनाती है तथा न्याय को निष्पक्ष और संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने यह भी कहा कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस केवल महिलाओं का सम्मान करने का अवसर नहीं है, बल्कि समाज में समानता, सुरक्षा और समावेशिता सुनिश्चित करने की सामूहिक प्रतिबद्धता को मजबूत करने का भी महत्वपूर्ण अवसर है।

कार्यक्रम में न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू, न्यायमूर्ति रजनी दुबे, न्यायमूर्ति नरेन्द्र कुमार व्यास, न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी, न्यायमूर्ति सचिन सिंह राजपूत, न्यायमूर्ति राकेश मोहन पाण्डेय, न्यायमूर्ति राधाकिशन अग्रवाल, न्यायमूर्ति संजय कुमार जायसवाल, न्यायमूर्ति रविन्द्र कुमार अग्रवाल, न्यायमूर्ति अरविन्द कुमार वर्मा, न्यायमूर्ति बिभू दत्ता गुरु और न्यायमूर्ति अमितेन्द्र किशोर प्रसाद सहित कई वरिष्ठ न्यायाधीश उपस्थित रहे।

इसके अलावा महाधिवक्ता, वरिष्ठ अधिवक्तागण, उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ के पदाधिकारी, रजिस्ट्रार जनरल, रजिस्ट्री के अधिकारी, न्यायिक कर्मचारी तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी भी समारोह में शामिल हुए।

उल्लेखनीय है कि मुख्य न्यायाधीश के मार्गदर्शन में राज्य के सभी जिला न्यायालयों में भी अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिला न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित करने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिससे न्यायिक व्यवस्था में महिलाओं के योगदान को सम्मानित करने की परंपरा को और सशक्त बनाया गया।

सुबह 9 से शाम 7 बजे तक जमा होगा टैक्स, ऑनलाइन भुगतान की भी सुविधा
 15 मार्च तक ही चेक से भुगतान मान्य, बाद में लगेगा ₹1000 शास्ति शुल्क व 15% अधिभार

दुर्ग / शौर्यपथ / वित्तीय वर्ष के अंतिम दिनों को ध्यान में रखते हुए नगर पालिक निगम दुर्ग ने करदाताओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्था की है। निगम प्रशासन ने घोषणा की है कि शहर के सभी करदाताओं को अपना बकाया टैक्स जमा करने में सुविधा देने के लिए शनिवार, रविवार और अन्य अवकाश के दिनों में भी निगम मुख्य कार्यालय तथा सभी जोन कार्यालय खुले रहेंगे

नगर निगम द्वारा टैक्स जमा करने के लिए सुबह 9:00 बजे से शाम 7:00 बजे तक काउंटर संचालित किए जाएंगे। नागरिक नगर निगम मुख्य कार्यालय के साथ-साथ अपने-अपने जोन कार्यालयों में भी टैक्स जमा कर सकते हैं। इसके अलावा करदाताओं को घर बैठे ऑनलाइन टैक्स जमा करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। इसके लिए निगम के पोर्टल https://municipalcorporation.in के माध्यम से ऑनलाइन भुगतान किया जा सकता है।

निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि चेक के माध्यम से टैक्स भुगतान केवल 15 मार्च तक ही स्वीकार किया जाएगा। इसके बाद चेक से भुगतान की सुविधा बंद कर दी जाएगी। इसलिए नागरिकों से समय रहते टैक्स जमा करने की अपील की गई है।

नगर निगम आयुक्त सुमित अग्रवाल ने शहर के सभी करदाताओं से अपील करते हुए कहा कि वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद यदि किसी करदाता का टैक्स बकाया रहता है तो उस पर ₹1000 शास्ति शुल्क के साथ 15 प्रतिशत अधिभार लगाया जाएगा। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि अतिरिक्त शुल्क से बचने के लिए समय पर टैक्स जमा करें और नगर निगम के कार्यों में सहयोग दें।

दुर्ग / शौर्यपथ / कुम्हारी थाना क्षेत्र में सोमवार रात एक दर्दनाक सड़क हादसे में मजदूरों से भरे ऑटो को पीछे से आ रहे मिनी ट्रक ने जोरदार टक्कर मार दी। इस दुर्घटना में एक मजदूर की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य मजदूर घायल हो गए। घायलों को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार हादसा सोमवार रात करीब 9 बजे कुम्हारी थाना क्षेत्र के महाराष्ट्र बैंक के पास हुआ। बताया जा रहा है कि चरोदा से रायपुर की ओर जा रहे मजदूरों से भरे ऑटो को पीछे से आ रहे एक मिनी ट्रक ने टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि ऑटो पलट गया और उसमें सवार चार मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और सभी घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने टीकाराम खूंटे (निवासी गोगांव, रायपुर) को मृत घोषित कर दिया, जबकि अन्य तीन मजदूरों को हल्की चोटें आई हैं। घायलों में पिंकी देवी शाह, शारदा पाल और रामाधार पाल शामिल हैं।

बताया जा रहा है कि सभी मजदूर गोगांव से मजदूरी के लिए देवभोग दुग्ध संघ के पास रेलवे क्रॉसिंग चरोदा गए थे और काम खत्म होने के बाद ऑटो से वापस रायपुर लौट रहे थे। इसी दौरान कुम्हारी फ्लाईओवर ब्रिज के नीचे पीछे से आ रहे मिनी ट्रक ने ऑटो को टक्कर मार दी, जिससे ऑटो और मिनी ट्रक दोनों पलट गए।

पुलिस ने मृतक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वहीं ऑटो और मिनी ट्रक को जब्त कर ट्रक चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है

दुर्ग / शौर्यपथ।

दुर्ग नगर निगम की राजनीति एक बार फिर शहर के मुख्य बस स्टैंड की बेशकीमती जमीन को लेकर गरमा गई है। आरोप है कि पूर्व महापौर धीरज बाकलीवाल के कार्यकाल के अंतिम दिनों में बस स्टैंड की कीमती जमीन का आवंटन कथित रूप से नियमों के विपरीत किया गया, और अब वर्तमान महापौर श्रीमती अलका बाघमार के कार्यकाल में भी इस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि महिला आरक्षण लागू होने से ठीक पहले, जब तत्कालीन महापौर धीरज बाकलीवाल को यह स्पष्ट हो गया था कि आगामी परिषद में उनकी भूमिका सीमित हो सकती है, तब एमआईसी परिषद की अंतिम बैठकों में बस स्टैंड क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण जमीन का अनुबंध चतुर्भुज राठी से जुड़े संचालन के लिए कर दिया गया। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि यह अनुबंध नगर निगम के स्थापित नियमों और शर्तों के अनुरूप नहीं था।

अनुबंध की अवधि समाप्त, लेकिन ढांचा बरकरार

जानकारी के अनुसार जिस अनुबंध के तहत जमीन का उपयोग दिया गया था, उसकी अवधि समाप्त हुए कई महीने बीत चुके हैं। इसके बावजूद बस स्टैंड परिसर के एक बड़े हिस्से में अभी भी ढांचा मौजूद है और वहां “राम रसोई” का संचालन किया जा रहा है।

आलोचकों का कहना है कि अनुबंध की शर्तों का पालन नहीं होने के बावजूद नगर निगम प्रशासन की ओर से अब तक कोई सख्त कार्रवाई सामने नहीं आई है।

मंच साझा करने पर भी उठे सवाल

राजनीतिक हलकों में यह मुद्दा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि नगर निगम की महापौर अलका बाघमार द्वारा संबंधित संचालक के साथ सार्वजनिक मंच साझा करने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्षी और कुछ सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि अनुबंध और जमीन आवंटन में अनियमितताएं हैं तो निगम प्रशासन को पहले उसकी जांच और कार्रवाई करनी चाहिए।

300 करोड़ के दावे बनाम जमीनी हकीकत

दुर्ग नगर निगम की महापौर अलका बाघमार द्वारा पिछले एक वर्ष में शहर के लिए लगभग 300 करोड़ रुपये की राशि लाने का दावा भी सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। आलोचकों का कहना है कि शहर में विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति को देखते हुए यह राशि जमीन पर उतनी स्पष्ट दिखाई नहीं दे रही, जितनी प्रचार में दिखाई जा रही है।

शहर के कई क्षेत्रों में गंदगी, अव्यवस्थित बाजार, अतिक्रमण और अवैध बाजार संचालन की समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं। कपड़ा लाइन क्षेत्र में किए गए सौंदर्यीकरण कार्य को लेकर भी स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ स्थानों पर अभी भी अव्यवस्था के कारण सौंदर्यीकरण की छवि प्रभावित हो रही है।

बुलडोजर कार्रवाई पर भी सवाल

नगर निगम द्वारा समय-समय पर अतिक्रमण के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई की जाती रही है, लेकिन आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि प्रभावशाली लोगों के मामलों में प्रशासन अपेक्षाकृत नरम रवैया अपनाता है।

जांच की मांग तेज

बस स्टैंड की बेशकीमती जमीन, अनुबंध की वैधता और उसकी शर्तों के पालन को लेकर अब स्थानीय स्तर पर स्वतंत्र जांच की मांग उठने लगी है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि इस मामले की पारदर्शी जांच होती है तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि जमीन आवंटन प्रक्रिया में वास्तव में क्या हुआ और वर्तमान प्रशासन की जिम्मेदारी क्या बनती है।

फिलहाल यह मामला शहर की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है, और आने वाले दिनों में इस पर निगम प्रशासन या संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

कलेक्टर की अध्यक्षता वाली जीवनदीप समिति के अधीन पार्किंग ठेका, फिर भी नियमों की अनदेखी… पर्ची लेकर वापस लेना भी संदेह के घेरे में ?

दुर्ग।

देशभक्ति, राष्ट्रसेवा और सुशासन की बात करने वाली भारतीय जनता पार्टी को प्रदेश की जनता ने विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत देकर सरकार बनाने का अवसर दिया था। प्रदेश सरकार लगातार जनहित के कार्यों और सुशासन की प्रतिबद्धता का संदेश देती रही है, लेकिन दुर्ग जिला अस्पताल परिसर में चल रही वाहन पार्किंग व्यवस्था इन दावों पर सवाल खड़े करती नजर आ रही है।

जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल परिसर में वाहन पार्किंग का ठेका जीवनदीप समिति की अनुशंसा से दिया जाता है, जिसमें वर्तमान समय में भाजपा समर्थित समाजसेवियों की महत्वपूर्ण भूमिका है और इस समिति के प्रमुख जिला कलेक्टर होते हैं। इसके बावजूद अस्पताल परिसर में पार्किंग ठेकेदारों द्वारा आम जनता से निर्धारित शुल्क से दुगुनी-तिगुनी राशि वसूले जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

तय शुल्क कुछ और, वसूली कुछ और

जिला अस्पताल कार्यालय के प्रभारी स्टीवर्ड के अनुसार पार्किंग का ठेका गोपीनाथ मांडले के नाम पर है, जिसे प्रतिदिन लगभग ₹4100 की राशि जमा करनी होती है।

नियमों के अनुसार पार्किंग शुल्क इस प्रकार निर्धारित है—

दोपहिया वाहन : ₹5

चारपहिया वाहन : ₹15

लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत बताई जा रही है। अस्पताल आने वाले लोगों का कहना है कि

दोपहिया वाहन से ₹10

चारपहिया वाहन से ₹20 से ₹25 तक

की राशि खुलेआम वसूली जा रही है।

पर्ची देकर वापस ले लेना भी सवालों में

एक और चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि पार्किंग ठेकेदार वाहन खड़ा करते समय पर्ची तो देते हैं, लेकिन वाहन निकालते समय वही पर्ची वापस ले लेते हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि यदि पर्चियां ही वापस ले ली जाती हैं तो वास्तविक वसूली का रिकॉर्ड कैसे सुरक्षित रहेगा।

नियमों के अनुसार बोर्ड भी नहीं

जिला अस्पताल कार्यालय के प्रभारी स्टीवर्ड के मुताबिक पार्किंग स्थल पर शुल्क दरों का स्पष्ट बोर्ड लगाना अनिवार्य होता है, लेकिन पूरे पार्किंग परिसर में ऐसा कोई बोर्ड दिखाई नहीं देता। इससे आम लोगों को निर्धारित शुल्क की जानकारी ही नहीं मिल पाती और ठेकेदार मनमाने तरीके से वसूली कर रहे हैं।

किसकी शह पर चल रही मनमानी?

यह स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

कलेक्टर की अध्यक्षता वाली जीवनदीप समिति, अस्पताल प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद यदि पार्किंग ठेकेदार तय दर से अधिक वसूली कर रहे हैं तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं है, या फिर उन्हें अंधेरे में रखा जा रहा है?

सुशासन के दावे और जमीनी हकीकत

प्रदेश सरकार समय-समय पर यह संदेश देती रही है कि आम जनता के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हाल ही में विनायक ताम्रकार के निष्कासन जैसे उदाहरण भी सामने आए हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पार्टी अनुशासन के मामले में सख्त रुख अपनाती है।

ऐसे में अब नजर इस बात पर टिकी है कि जिला अस्पताल की पार्किंग में हो रही कथित अतिरिक्त वसूली के मामले में जीवनदीप समिति, अस्पताल प्रबंधन और जिला प्रशासन किस तरह की जांच और कार्रवाई करते हैं।

सीसीटीवी और रिकॉर्ड से खुल सकती है सच्चाई

अस्पताल परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं और वाहनों के आवक-जावक का रिकॉर्ड भी मौजूद है। ऐसे में यदि प्रशासन निष्पक्ष जांच करे तो वाहन मालिकों से पूछताछ और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर वास्तविक स्थिति आसानी से सामने आ सकती है।

अब देखना यह होगा कि जिला अस्पताल प्रबंधन और जीवनदीप समिति इस मामले की गंभीरता को समझते हुए अधिक वसूली के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करते हैं, या फिर यह मामला यूं ही दबा रहेगा और अस्पताल आने वाली आम जनता की जेब लगातार ढीली होती रहेगी।

विशेष लेख

छत्तीसगढ़ की पावन धरती ने समय-समय पर ऐसे महान व्यक्तित्वों को जन्म दिया है, जिन्होंने अपने कर्म, सेवा और त्याग से समाज को नई दिशा दी। इन्हीं महान विभूतियों में एक नाम अत्यंत श्रद्धा और सम्मान से लिया जाना चाहिए—महादानी दाऊ कल्याण सिंह अग्रवाल का।

4 अप्रैल 1876 को जन्मे दाऊ कल्याण सिंह अग्रवाल न केवल अपने समय के अत्यंत समृद्ध उद्यमी थे, बल्कि उससे कहीं बढ़कर वे समाज सेवा, परोपकार और मानव कल्याण के प्रतीक थे। आज भी रायपुर और आसपास के अनेक महत्वपूर्ण संस्थान उनकी दानशीलता के प्रमाण हैं, लेकिन दुर्भाग्य यह है कि समय के साथ उनका नाम धीरे-धीरे जनस्मृति से ओझल होता चला गया।

डी.के. अस्पताल से जुड़ा नाम, लेकिन योगदान उससे कहीं बड़ा

रायपुर का प्रतिष्ठित डी.के. (दाऊ कल्याण) अस्पताल आज भी उनके नाम से जाना जाता है। बहुत से लोग उन्हें केवल इसी अस्पताल की जमीन के दानदाता के रूप में जानते हैं, जबकि उनकी दानशीलता का दायरा इससे कहीं अधिक विशाल था।

1944 में दाऊ कल्याण सिंह अग्रवाल ने डी.के. अस्पताल के लिए जमीन के साथ भवन निर्माण हेतु 1,25,000 रुपये नकद दान किए, जो आज के मूल्यांकन में लगभग 70 करोड़ रुपये के बराबर माने जाते हैं।

एम्स सहित कई संस्थानों की नींव में उनका योगदान

रायपुर में स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) भी उसी भूमि पर बना है, जिसे दाऊ कल्याण सिंह अग्रवाल ने समाज के हित में दान किया था। यह तथ्य उनकी दूरदर्शिता और समाज के प्रति समर्पण को दर्शाता है।

शिक्षा और कृषि के क्षेत्र में भी उदार योगदान

दाऊ जी ने केवल स्वास्थ्य सेवाओं तक ही अपने दान को सीमित नहीं रखा।

उन्होंने लभांडी क्षेत्र की जमीन के साथ कृषि महाविद्यालय और गरीब छात्रों के लिए छात्रावास निर्माण हेतु 1,12,000 रुपये दान किए, जो आज के मूल्य में लगभग 62 करोड़ रुपये के बराबर माने जाते हैं।

इसके अतिरिक्त उन्होंने—

टीबी अस्पताल के लिए 323 एकड़ भूमि दान की

बरोंडा ग्राम में कृषि अनुसंधान के लिए भूमि प्रदान की

भाटापारा में कृषि विज्ञान के लिए विशाल भूमि दान दी

धार्मिक और सामाजिक सेवा में भी अग्रणी

दाऊ कल्याण सिंह अग्रवाल की आस्था और सेवा भाव धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र में भी दिखाई देता है।

उन्होंने रायपुर के प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर के संचालन हेतु पूरा खैरा गांव दान कर दिया।

भाटापारा में अकाल के समय लोगों की पीड़ा को देखते हुए उन्होंने “कल्याण सागर” जलाशय का निर्माण कराया, जिससे हजारों लोगों और पशुओं को पानी की सुविधा मिली।

पशु सेवा और ज्ञान के प्रसार में योगदान

भाटापारा में विशाल पशु चिकित्सालय का निर्माण

गरीबों और विद्यार्थियों के लिए पुस्तकालय की स्थापना

ये सभी कार्य इस बात का प्रमाण हैं कि दाऊ जी का दृष्टिकोण केवल तत्कालीन समाज तक सीमित नहीं था, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के कल्याण की सोच से जुड़ा था।

छत्तीसगढ़ से बाहर भी उदार दान

उनकी परोपकारिता केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं रही। देश के विभिन्न हिस्सों में भी उन्होंने जरूरत के समय उदारतापूर्वक सहयोग किया।

प्रमुख योगदानों में शामिल हैं—

नागपुर के लेडी इरविन अस्पताल के निर्माण में सहयोग

सेंट्रल महिला कॉलेज के निर्माण में प्रमुख दान

बिहार के भूकंप पीड़ितों के लिए सहायता

वर्धा की भीषण बाढ़ में उदार दान

अपने समय के अत्यंत समृद्ध उद्यमी

दाऊ कल्याण सिंह अग्रवाल अपने समय के अत्यंत संपन्न उद्यमियों में गिने जाते थे।

1937 में उन्होंने लगभग 70,000 रुपये का राजस्व भुगतान किया, जो आज की गणना में लगभग 39 करोड़ रुपये से अधिक के बराबर माना जा सकता है।

आज क्यों धुंधला पड़ गया यह नाम?

इतने विशाल और ऐतिहासिक योगदान के बावजूद आज यह विडंबना है कि छत्तीसगढ़ की नई पीढ़ी तो दूर, बहुत से लोग इस महान माटीपुत्र के नाम और कार्यों से परिचित भी नहीं हैं।

यह केवल इतिहास की भूल नहीं, बल्कि उस विरासत के प्रति हमारी उपेक्षा भी है जिसने इस प्रदेश की सामाजिक, शैक्षणिक और स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूत नींव रखी।

स्मरण और सम्मान की आवश्यकता

आज आवश्यकता है कि छत्तीसगढ़ की जनता, सामाजिक संस्थाएं और सरकार मिलकर दाऊ कल्याण सिंह अग्रवाल जैसे महादानी व्यक्तित्वों को पुनः जनस्मृति में स्थापित करें।

क्योंकि किसी भी समाज की पहचान केवल उसकी वर्तमान उपलब्धियों से नहीं, बल्कि उन महान व्यक्तियों से होती है जिन्होंने अपना सर्वस्व समाज के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया।

दाऊ कल्याण सिंह अग्रवाल न केवल छत्तीसगढ़ के गौरव हैं, बल्कि वे भारतीय परोपकार की परंपरा के एक उज्ज्वल अध्याय भी हैं।

मृणेन्द्र चौबे
राजनांदगांव।शौर्यपथ /छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त नीलू शर्मा आज पश्चिम बंगाल के पुरुलिया ज़िले के मानबाजार विधानसभा क्षेत्र में आयोजित परिवर्तन यात्रा (रथ यात्रा) में शामिल हुए। इस दौरान कार्यक्रम स्थल पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों की भीड़ उमड़ी और लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला।
नीलू शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी विकास, पारदर्शिता और जनकल्याण की नई दिशा देने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि परिवर्तन यात्रा में कार्यकर्ताओं और नागरिकों का उत्साह इस बात का संकेत है कि पश्चिम बंगाल में अब बदलाव की मजबूत इच्छा दिखाई दे रही है और जनता भाजपा के विज़न को स्वीकार कर रही है।
उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन यात्रा केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि जनता के विश्वास और समर्थन का प्रतीक है। भाजपा का उद्देश्य प्रदेश में विकास, सुशासन और जनकल्याण की नई शुरुआत करना है।
कार्यक्रम में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, केंद्रीय राज्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद सतीश चंद्र दुबे, पुरुलिया के सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो और वरिष्ठ नेत्री एवं पूर्व राज्यसभा सांसद रूपा गांगुली सहित प्रदेश और जिला स्तर के कई पदाधिकारी मौजूद रहे।
मानबाजार विधानसभा में आयोजित परिवर्तन यात्रा ने यह संदेश दिया कि पश्चिम बंगाल अब बदलाव की राह पर आगे बढ़ रहा है और भाजपा के नेतृत्व में विकास का नया अध्याय लिखने के लिए तैयार है।

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