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June 17, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ


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शहर में पढ़ाई करने के लिए आने वाले विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ

भिलाई में 4 हॉस्टल बनाने शासन ने दी मंजूरी

7करोड़ 66 लाख 4 हजार रुपए की लागत 2-2 एकड़, जमीन पर बनेगा 4 हास्टल


भिलाई / शौर्यपथ / भिलाई-दुर्ग सहित पूरे दुर्ग जिले के छात्र-छात्राओं के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। वे छात्र-छात्राएं जो अपने बुलंद इरादे से अपने सपनों को उड़ान देना चाहते हैं। अपनी मेहनत से बेहतर कॅरियर बनाना चाहते हैं। उन छात्र-छात्राओं को महापौर व भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव एक बड़ी सौगात दे रहे हैं। पढ़ने लिखने वाले छात्र-छात्राओं के लिए महापौर देवेंद्र यादव शहर में 4 नए छात्रावास बनाने जा रहे हैं। 7 करोड़ 66 लाख 4 हजार रुपए की लागत से चोरों छात्रावास का निर्माण किया जाएगा। प्रत्येक छात्रावास 2-2 एकड़ जमीन पर बनेगी। जहां छात्र छात्राओं के रहने के लिए सभी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध होगी।
ताकि गांव से आए विद्यार्थी यहां रह कर अपनी पढ़ाई पूरी कर सके और अपने सपने और अपने कॅरियर को गढ़ सके। ऐसे छात्राओं की मदद करने के प्रयास से ही महापौर देवेंद्र यादव ने छात्रावास बनाने की योजना बनाई थी और शासन को प्रस्ताव भेज कर स्वीकृति मांगी थी। शासन ने महापौर देवेंद्र यादव के इस सार्थक प्रयास से काफी प्रभावित हुए उन्होंने जल्द ही स्वीकृति दे दी है।
आज इस विषय को लेकर सहायक आयुक्त आदिवासी विकास श्रीमती प्रिंयवदा रामटेके ने भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव से चर्चा की। महापौर ने बताया कि प्रियदर्शनी सुपेला में चयनित 2 कन्या छात्रावास का भवन बनाया जाएगा। इसी प्रकार 2 बालक छात्रावास का भवन जवाहन नगर स्पोर्ट्स परिसर के पीछे बनाया जाएगा।

प्रियदर्शनी और जवाहर नगर में बनेगा छात्रावास
नगर निगम भिलाई क्षेत्र में भिलाई नगर विधायक व महापौर देवेंद्र यादव जी की पहल से एक साल 4 पोस्ट मैट्रीक छात्रावास बनाने की स्वीकृति मिली है। इसमें पोस्ट मैट्रिक अनुसूचित जाति बालक छात्रावास, पोस्ट मैट्रिक अनुसूचित जाति कन्या छात्रावास बनाया जाएगा। साथ ही पोस्ट मैट्रिक पिछड़ा वर्ग बालक छात्रावास और पोस्ट मैट्रिक पिछड़ा वर्ग कन्या छात्रावास बनाया जाएगा।

2-2 एकड़ में बनेगा छात्रावास
आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्रालय नया रायपुर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व भिलाई को पत्र दिया है। जिसमें साफ निर्देश दिया है कि चारों पोस्ट मैट्रिक छात्रावास होंगे। ये प्रत्येक छात्रावास 2 एकड़ जमीन पर बनाई जाएगी। इसके लिए शासन ने 7 दिन के अंदर चारों छात्रावास के लिए 2-2 एकड़ की जमीन तलाश कर नक्शा, खसरा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

छात्राओं की सुविधाएं मिलेंगी

महापौर व भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव का कहना है कि बाहर से जो छात्र-छात्राएं यहां पढ़ाई करने आते है। उन्हे हास्टल नहीं मिलने से बहुत परेशानी होती है। कई गरीब परिवार के बच्चे अपनी आगे की पढ़ाई भी इसी कारण से पूरा नहीं कर पाते। इसलिए उन्होंने हास्टल बनाने की योजना बनाई। जिस पर स्वीकृति मिल गई और पूरी उम्मीद है कि जल्द ही इसका निर्माण करके छात्र-छात्राओं को इसकी लाभ पहुंचाया जाएगा।

भाजपा कोरोना सन्कट में कर रही स्तरहीन राजनीति
भाजपा के ज्ञापन के मुद्दे बता रहे भाजपा की मंशा में खोट है


      रायपुर / शौर्यपथ / भाजपा द्वारा कोरोना सन्कट के समय की जा रही राजनीति को कांग्रेस ने स्तरहीन राजनीति कहा है। प्रदेश कांग्रेस के संचार विभाग के सदस्य वरिष्ठ प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि छत्तीसगढ़ भारतीय जनता पार्टी कोरोना जैसी महामारी और राष्ट्रीय त्रासदी के समय मे भी एक राजनैतिक दल के रूप में अपनी जिम्मेदारी को नही समझ पा रही है। भाजपा द्वारा राज्यपाल को दिए गए ज्ञापन को आधार बना कर कांग्रेस ने भाजपा को कटघरे में खड़ा करते हए उसकी मंशा पर ही प्रश्न चिन्ह लगाया है।
कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने भाजपा से पांच सवाल पूछा है

1 भाजपा छत्तीसगढ़ में शराब बंदी की मांग कर रही है क्या भाजपा अपनी इस मांग को प्रधानंत्री मंत्री नरेंद्र मोदी से भी करेगी ? केंद्र सरकार से पूछेगी उसने शराब दुकानों को खोलने के निर्देश क्यो दिए ? देश के अन्य भाजपा शाशित राज्यो में खुली शराब दुकानों के बारे में रमन ,धरम,विक्रम की क्या राय है?
2.किसानों के धान की अंतर राशि शीघ्र जारी करने की मांग भाजपा किस हैसियत से कर रही है ?क्या छत्तीसगढ़ भाजपा धान पर बोनस देने की मोदी सरकार के द्वारा रोक लगाए जाने पर असहमति व्यक्त करती है ? क्या इस सम्बंध में भाजपा केंद्र सरकार के रवैय्ये की निंदा करेगी ?क्या यह मांग भाजपा ने सिर्फ इसलिए कर दिया है कि राज्य की कांग्रेस सरकार धान के कीमत की अंतर राशि तो देने ही जा रही है इसलिए मांग कर के प्रोपोगेंडा कर लिया जाय ?
3 छत्तीगढ़ भाजपा रेडजोन और हॉट स्पॉट से राज्य में आने वालों को प्रवेश करने देने का दबाव बना कर राज्य के लोगो को कोरोना सन्कट की ओर क्यो झोंकना चाहती है ?
4 भाजपा बताए राज्य में उसके 9 लोकसभा के और राज्य सभा के सांसदों ने राज्य के बाहर फसे छत्तीसगढ़ के मजदूरों के बारे में क्या प्रयास किये ? भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रमन सिंह केंद्रीय मंत्री रेणुका सिंह ने राज्य सरकार की मांग पर मजदूरों को राज्य में वापस लाने स्पेशल ट्रेन चलाने में केंद्र पर दबाव डालने क्या प्रयास किया ?
5 मुख्य मंत्री भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री राहत कोष के आवक और खर्च को सार्वजनिक कर दिया क्या भाजपा के नेता प्रधानमंत्री से यह मांग करने का साहस दिखाएंगे की मोदी भी पीएम केयर के आवक और खर्च की राशि को सार्वजनिक करें?

    दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग लोकसभा के सांसद विजय बघेल द्वारा ये ब्यान दिया गया कि मजदूरो से केंद्र सरकार यात्रा पैसे नहीं ले रही और ८५ प्रतिशत की सब्सिडी दे रही किरायो में किन्तु सच्चाई यह है कि १ मई से ४ मई तक के हर प्रमुख अखबारों में चेनल में रेलवे विभाग द्वारा ब्यानके के आधार पर खबर प्रकाशित हुई थी कि रेल्वे द्वारा मजदूरो से टिकिट के पैसे लिए जा रहे है और कई विडिओ भी वाइरल हुए . टिकिट के घमासान में जब कांग्रेस अध्यक्ष ने टिकिट के खर्चे का वहां करने का एलान किया तब रेल विभाग द्वारा टिकिट में ८५ प्रतिशत केंद्र और १५ प्रतिशत का किराया राज्यों की सरकार से लेने की बात कही . दुर्ग सांसद विजय बघेल इसे राजनीती परिपेक्ष्य में जोड़ कर कांग्रेस को आड़े हांथो लिया किन्तु ब्यान देते समय शायद १ मई से ४ मई तक की कार्य प्रणाली और टिकिट के घमासान को याद नहीं रखे . क्या आम जनता को अधूरा सच परोसना वर्तमान समय में सही है ऐसी हालत में जब देश के प्रधानमंत्री बार-बार सन्देश दे रहे है कि सभी राज्य की सरकारों का पूर्ण सहयोग मिल रहा है ऐसे में अधूरी बातो के आधार पर राजनीती कहा तक न्यायसंगत है . देश की दो बड़ी पार्टी कांग्रेस और भाजपा के विचारधारा में विरोधाभास है और लोकतंत्र में लोकतान्त्रिक विरोध का भी एक महत्तवपूर्ण स्थान होता है यही लोकतंत्र की खूबसूरती भी है किन्तु वर्तमान समय में जिस तरह की पीड़ा देश झेल रहा है और आम जनता की आर्थिक स्थिति बिगड़ गयी है वैसे समय भी राजनीती का ऐसा परिदृश्य कहा तक जायज है . वर्तमान समय में संकट में सिर्फ जनता ही नहीं राज्य सरकारों की भी आर्थिक स्थिति डांवाडोल हो गयी है .
    सरकार आर्थिक स्थिति पर नियंत्रण करने अलग अलग तरह के उपाय कर रही है . छत्तीसगढ़ में शराब विक्रय पर राजनीती जोरो पर है विपक्ष भाजपा लगातार सरकार को चुनावी वादे याद दिला रही है . कोई भी पार्टी चुनावी के समय दर्जनों में चुनावी वादे करती है ऐसा सिर्फ एक ही पार्टी के साथ नहीं सभी के साथ होता है . भाजपा ने चुनावी वादे में प्रतिवर्ष करोडो की नौकरी की बात कही थी , अन्तराष्ट्रीय बाज़ार में रूपये की स्थिति मजबूती की बात कही थी कच्चे तेल की कीमत के अनुसार बाज़ार मूल्य की बात कही , ऍफ़डीआई में ४९ प्रतिशत का विरोध की बात कही ऐसे कई वादे है जो चुनावी वादे ही साबित हुए जिसका विरोध विपक्षी पार्टी करती रही है उसी तरह कांग्रेस ने भी चुनावी वादों की झड़ी लगाईं जिसमे किसानो की कर्ज माफ़ी , समर्थन मूल्य पर धान खरीदी , शराब बंदी , जैसे कई वादे किये उसमे से कुछ पूरा किये और कुछ को पूरा करने की तयारी कर रहे है . किन्तु वर्तमान समय में सांसद बघेल द्वारा शराब बंदी पर सरकार को घेरना ऐसे समय में जब सरकार ने आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए आम जनता से सहयोग की और मदद की अपील की उस समय सरकार को चुनावी वादे याद दिलाने से ज्यादा ज़रूरी है कि सांसद होने के नाते केंद्र सरकार से छत्तीसगढ़ की जनता के लिए आर्थिक सहायता राशि की मांग करे . छत्तीसगढ़ ने ९ सांसद देश को दिए है किन्तु ९ सांसद में से शायद ही किसी संसद ने प्रदेश के सरकार के लिए विशेष आर्थिक पैकेज की मांग की होगी . कहा थे ये संसद जब प्रदेश सरकार ने समर्थन मूल्य बढाने के लिए और किसानो को उनके फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए केंद्र से गुहार लगाईं थी आखिर फसल की कीमत में वृद्धि होती तो किसानो का ही फायदा होता ना कि प्रदेश सरकार कार का आखिर में प्रदेश सरकार ने ही किसानो के अंतर मूल्य को देने का वादा किया और इस संकट की घडी में उसे देने का भी एलान कर दिया . प्रदेश की जनता की खुशहाली के लिए प्रदेश के ही जनप्रतिनिधियों का मौन रहना क्या तर्क संगत है .
        भाजपा ने १५ साल के राज में ऐसी कई योजना निकाली और गरीब परिवार को जन्म से लेकर मृत्यु तक की वस्तुए मुफ्त में देने की कवायद शुरू की साथ ही प्रदेश में १५ सालो तक जनता को खुलकर शराब भी पिलाई सत्ता के आखिरी पड़ाव में शराब बिक्री का अधिकार भी शासन ने अपने हांथो में ले जनता को खूब झक कर शराब भी पिलाई अब शराब बंदी की बात कह रही है . भूपेश सरकार ने शराब बंदी का वडा किया और उसे चुनाव पूर्व तक इसको अमल में लाना ही होगा किन्तु शराब बंदी के कारण होने वाली आर्थिक हानि के भरपाई के लिए भी कोई मार्ग निकलना होगा . समय के साथ जिस तरह वादे पुरे हो रहे है शराबबंदी पर भी किया वादा पूरा होगा और अगर ऐसा न हुआ तो जनता मतदान में इसका जवाब देगी किन्तु वर्तमान समय में कोरोना संकट से जंग ज़रूरी है और इस समय कोरोना को हराना है ना कि एक दुसरे पर आरोप लगाना है .
      प्रदेश में दुर्ग सांसद जिस तरह से सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे है क्या उनका उद्देश्य शराबबंदी है या शराब बंदी के सहारे प्रदेश अध्यक्ष के दौड़ में अपनी उपस्थिति दर्ज करने की .स्थिति चाहे जो भी हो राजनितिक परिवेश चाहे जो भी हो किन्तु वर्तमान समय में राजनीति से ज्यादा ज़रूरी कोरोना से मुक्ति की है . कोरोना की जंग अगर समाज ना जीत पाए तो शायद राजनीती करने वाले ही ना रहे , आम जनता ही ना रहे , गरीब ही ना रहे . कोरोना के कारण ऐसे कई परिवार है जो आर्थिक बोझ के तले दबे हुए है और सामान्य स्थिति में आने में जाने कितने साल लग जाए . आज देश का हर नागरिक चिंतित है और कोरोना से मुक्ति का साधन खोज रहा है ऐसे समय में राजनीती ना कर सिर्फ जनता के हित का ही सोंचना ज्यादा ज़रूरी है . शराब समाज के लिए हानिकारक है किन्तु सालो की आदत को एक ही पल में ख़त्म करना असंभव सा है किन्तु असंभव नहीं शराब बंदी से एक स्वक्ष समाज का निर्माण होता है और इसका विरोध सही है किन्तु वर्तमान समय में शराबबंदी से ज्यादा ज़रूरी कोरोना से मुक्ति है जिसके लिए सभी को मिलकर लड़ना है और महामारी को भगाना है ...

फेसबुक लाइव से मिली थी महापौर को शिकायत
जनता की मांग पर अस्पताल को खोलने मेयर देवेंद्र यादव ने की थी पहल
महापौर ने बीएसपी प्रबंधन से बैठक कर अस्पताल को फिर से खोलने की मांग

    भिलाई / शौर्यपथ / भिलाई नगर विधायक व महापौर देवेंद्र यादव जी ने जनता की मांग पर एक सार्थक पहल की थी। जिसके परिणाम स्वरूप खुर्सीपार कर बीएसपी अस्पताल को फिर से शुरू कर दिया है। अस्पताल के शुरू होने से क्षेत्र के नागरिकों को काफी लाभ मिल रहा है। अब खुर्सीपार, छावनी इलाके के मरीज इस अस्पताल में अपना ट्रीटमेंट करा रहे हैं। अस्पताल खुलने से मरीजों को जिला अस्पताल दुर्ग या शास्त्री अस्पताल व अन्य प्राइवेट अस्पताल में महंगा खर्चा नहीं करना पड़ रहा है।
गौरतलब है कि लॉक डाउन की वजह से खुर्सीपार के बीएसपी हॉस्पिटल को बंद कर दिया गया था। कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से और मेन पवार की कमी के कारण अस्पताल बंद कर दिया गया था। यहां के डॉक्टर की ड्यूटी दूसरी जगह लगा दी गई थी। इस वजह से खुर्सीपार का हॉस्पिटल लॉक डाउन से बंद कर दिया गया। जिससे क्षेत्र के मरीजों को इलाज की पूरी सुविधा नहीं मिल पा रही है। अस्पताल बंद होने से क्षेत्र के लोगों को इलाज कराने में बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खुर्सीपार इलाके का यह इकलाैता अस्पताल है। ऐसे में इस अस्पताल के बंद होने से यहां के मरीजों को दूसरे अस्पताल में इलाज के लिए जाना पड़ रहा था। महंगी दवाइयां व महंगा इलाज कराना पड़ रहा है। इससे क्षेत्र के गरीब व सामान्य परिवार के लोगों को काफी परेशानी हो रही थी।
महापौर व भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव फेसबुक लाइव के माध्यम से जनता से रूबरू होकर उनकी समस्याओं को सुनकर उनका समाधान कर रहे थे। तब फेसबुक लाइफ पर खुर्सीपार क्षेत्र की जनता ने बीएसपी के हॉस्पिटल को शुरू करने की मांग की थी। जनता की मांग पर महापौर देवेंद्र यादव जी ने बीएसपी प्रबंधन से बैठक करके चर्चा की और हॉस्पिटल को शुरू करने के विषय पर प्रस्ताव रखा। जिस पर बीएसपी प्रबंधन ने आश्वासन दिया कि वे जल्द ही हॉस्पिटल शुरू कर देंगे।
महापौर से चर्चा के अनुसार बीएसपी प्रबंधन ने अस्पताल को फिर से शुरू कर दिया है। इससे क्षेत्र की जनता में काफी हर्ष का माहौल है। अब इस अस्पताल के ओपीडी में रोज 50 से 60 मरीजों का चैकअप व इलाज किया जा रहा है। बुखार,सर्दी खासी, उल्टी दस्त आदि सामान्य बीमारी के साथ ही अन्य जरूरी दवाइयां व इलाज सुविधा मरीजों को मिल रही है।

धमधा के केंद्रों में पहुंचे, स्वास्थ्य जांच और रैंडम चेकिंग की मॉनिटरिंग भी की, व्यवस्था से जताया संतोष
पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय अमले की अच्छा कार्य करने पर प्रशंसा भी की


     दुर्ग / शौर्यपथ / अन्य राज्यों से पहुंचने वाले जिले के श्रमिकों के ठहराए जाने एवं क्वारन्टीन करने की पूरी सुविधा जिला प्रशासन ने सुनिश्चित की है। सुविधाओं का जायजा लेने कलेक्टर अंकित आनंद एवं जिला पंचायत सीईओ कुंदन कुमार आज धमधा ब्लाक के विभिन्न ग्रामों में पहुंचे। कलेक्टर एवं सीईओ ने धमधा ब्लाक के मेदेसरा, दानिकोकडी, करेली, पेंड्री, दनगांव आदि गांवों का निरीक्षण किया। कलेक्टर ने यहां बुनियादी सुविधाओं का निरीक्षण किया। स्थानीय अमले ने कलेक्टर को बताया कि बाहर से आने वाले लोगों की क्वारन्टीन की व्यवस्था और रहने खाने की सुविधा उपलब्ध करा दी गई है। 15 दिन का राशन उपलब्ध करा दिया गया है। सिलेंडर वगैरह का इंतजाम कर दिया गया है। बिस्तर लगा दिए गए हैं। पीने के पानी की सुविधा उपलब्ध करा दी गई है। कलेक्टर ने सभी गांव में पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा किए गए कार्यों और ग्रामीणों द्वारा मिल रहे सहयोग की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि कोविड आपदा के इस दौर में मिलजुल कर कार्य कर तथा पूरी सावधानी बरतकर इस संक्रमण से बच सकते हैं।

     ग्रामीण क्षेत्रों में इस बात का खास ध्यान रखना है कि क्वारन्टीन में रह रहे लोगों को सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हो सके। इसके साथ ही इनकी लगातार मॉनिटरिंग भी होती रहे। उन्होंने कहा कि यदि यह पाया जाता है कि क्वारन्टीन अवधि के दौरान कोई क्वारन्टीन सेंटर से बाहर गया या उसने कोविड संक्रमण से संबंधित गाइडलाइन का पालन नहीं किया तो क्वारन्टीन अवधि समाप्त होने के पश्चात उस पर कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर ने यहां स्वास्थ्य जांच एवं रेंडम चेकिंग की समीक्षा भी की। उन्होंने कहा कि पर्याप्त मात्रा में गाइडलाइन के मुताबिक रेंडम चेकिंग की जाए ताकि संक्रमण का पता लगाया जा सके एवं पूरी तौर पर इसकी रोकथाम की जा सके। उन्होंने कहा कि मॉनिटरिंग कार्य में लगे सभी अधिकारी दायित्वों का पूर्णता से निर्वहन करें। इसके लिए 10 गांव पर एक क्लस्टर बनाया गया है।क्लस्टर प्रमुख अपनी रिपोर्ट दैनिक रूप से एसडीएम को उपलब्ध कराएं। कोविड संक्रमण को रोकना प्रशासन की पहली प्राथमिकता है। इसके लिए ग्राम वासियों के सहयोग से निश्चित ही सफलता मिलेगी। कलेक्टर ने इस मौके पर मनरेगा कार्य का निरीक्षण भी किया। साथ ही उन्होंने गर्मी को देखते हुए पेयजल आदि की वस्तुस्थिति की जानकारी भी ली।
       5600 लोगों के धमधा में क्वारन्टीन की व्यवस्था- एसडीएम सुश्री दिव्या वैष्णव ने बताया कि धमधा ब्लॉक में 5600 लोगों के क्वारन्टीन की व्यवस्था कर ली गई है। अभी 400 लोग क्वारन्टीन केंद्रों में रह रहे हैं। ब्लॉक में प्रवेश के दोनों नाकों पर पुलिस एवं स्वास्थ्य टीम मौजूद है। यहाँ स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है और जांच पर्ची देकर सीधे क्वारन्टीन केंद्रों में भेजा जा रहा है। आइसोलेशन वाले मामलों में भी स्वास्थ्य टीम निगरानी रख रही है।

    दुर्ग / शौर्यपथ / ईटली और अमेरिका सहित अन्य देशों के अलावा इंदौर में कोरेना के कारण लोग जिस प्रकार नोटों को बाहर सड़क पर फेंक रहे थे, और लोग कोरोना उसे उठाने पर कोरोना हो जाने के डर के कारण उठा नही रहे थे, उसी प्रकार का दहशत दुर्ग में भी देखने को मिला।
     हुआ यूं कि मोहन नगर थानाक्षेत्र के कादंबरी नगर के समीप बाईपास रोड पर आज सुबह नोट बिखरे पड़ें मिले, और लोगों की नजर पडऩे के बाद भी किसी ने उन नोटों को कोरोना के संक्रमण के डर से नही उठाया, लोगो को लगा कि कहीं कोरोना फैलाने की साजिश के तहत तो कही ये नोट नही फेंक दिया गया, इसलिए लोगो ने उसे छुआ तक नही। मोहल्ले के लोगों ने तत्काल इसकी सूचना पार्षद देवनारायण चंद्राकर को दी। पार्षद ने मोहन नगर थाने में फोन करके मामले से अवगत कराया। टीआई नरेश पटेल ने बताया कि पांच सौ के नौ, दो सौ के दो तथा दस रुपए के दो नोट सड़क पर पड़े मिले। जिसे सैनिटाइज कर जब्त किया गया है। जब्त किए गए नोट कुल चार हजार नौ सौ बीस रुपए है।

    भिलाई / शौर्यपथ / रायगढ़ के पेपर मिल में हुए हादसा अभी एक सप्ताह भी नही हुआ कि भिलाई इस्पात संयंत्र में देर रात्रि हादसा हो गया लेकिन राहत भरी ये खबर है कि इसमें किसी की मौत नही हुई बल्कि एक व्यक्ति घायल हो गया। बिती रात 11 बजे रेल मिल शिपिंग एवं इंस्पेक्शन एरिया में कार्य करते समय तीस 30 फीट ऊंचाई से क्रेन टूटकर केबिन पर गिर गया जिसमें क्रंन चालक उसी में दबकर फंस गया और घायल हो गया जिसे मौके पर तुरंत फायर बिग्रेड के जवानों ने वहां पहुंचकर केबिन काटकर ड्रायवर को निकाला एवं तत्काल ड्रायवल को अस्पतताल ले जाया गया। घायल ड्रायरव की हालत अभी पहले से ठीक बताया जा रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार बीती रात्रि करीब 11 बजे रेल मिल शिपिंग एवं इंस्पेक्शन एरिया में काम चल रहा था। इसी दौरान 16 नंबर क्रेन करीब 30 फीट ऊंचाई से टूटकर नीचे गिर पड़ी। इसके चलते क्रेन चला रहे ऑपरेटर मंसाराम ठाकुर केबिन के अंदर ही फंस गए। इस पर आसपास कर्मचारियों ने उन्हें निकालने का प्रयास किया और फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई। दमकल की टीम ने केबिन काटकर मंसाराम को बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया। प्लांट की ओर से बताया गया है कि क्रेन ऑपरेटर मंसाराम ठाकुर को हल्की चोट लगी है। घटना के बाद कर्मचारी को तत्काल मौके पर ही प्राथमिक इलाज दिया गया। इसके बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया। खतरे की कोई बात नहीं है। हालांकि हादसा कैसे और क्यों हुआ, इसकी जांच प्रबंधन द्वारा कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगेगा।

  दुर्ग / शौर्यपथ / निगमायुक्त के निर्देश पर शहर की सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने लगातार कवायद जारी है । आज रविवार को मेडिकल वेस्ट के प्रति लापरवाही बतरने करने वाले ओम साई मेडिकल स्टोर्स के संचालक प्रकाश ठाकुर को निगम टीम ने रंगे हाथ पकड़ा गया और उसे ₹11500 का जुर्माना लगाया गया । संचालक द्वारा शिवनाथ नदी रोड गंजपारा में मेडिकल वेस्ट का कचरा दुकान के बाहर सड़क पर भी फेंक दिया गया था निगम टीम द्वारा देखे जाने पर नगर निगम स्वस्थ्य अधिकारी दुर्गेश गुप्ता एव उनकी टीम ने जुर्माना लगा कर उन्हें सख्त हिदायत दी गई है ।
कचरे के लिए डस्टबिन रखने तथा एकत्र कचरा को नगर निगम की रिक्शा कचरा गाड़ी को दिये जाने कहा गया । कार्रवाही के दौरान सफाई दरोगा,राजू सिंह,सुरेश भारती, कपिल गोइर,शकील खोखर,बंटी के अलावा स्वस्थ्य विभाग टीम मौजूद थे । निगम आयुक्त इंद्रजीत बर्मन द्वारा शहर में संचालित हो रहे समस्त मेडिकल दुकाने क्लीनिक आदि से अपील कर कहा है की वह कोई भी मेडिकल वेस्ट शहर के किसी भी स्थान पर खुले में ना फेंके अन्यथा अधिक से अधिक राशि जुर्माना करने के साथ मेडिकल वेस्ट फेंकने वालों के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध की जाएगी ।
उन्होंने कहा अपने मेडिकल व क्लीनिक का मेडिकल वेस्ट का निष्पादन करें और निगम की कचरा गाड़ी में उस वेस्ट को दें उन्होंने बताया शहर में कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के लिए अनेक प्रयास किए जा रहे हैं इसके तहत समस्त वार्डों में सैनिटाइज करने के साथ ब्लीचिंग और दवाई का छिड़काव कचरा उठाने का कार्य प्राथमिकता से कराया जा रहा है अतः इस कार्य में नगर निगम को सहयोग प्रदान करें।

     रायपुर / शौर्यपथ / घरेलु हिंसा को रोकने के लिए राजधानी पुलिस की चुप्पी तोड़ो मुहिम कारगर साबित हो रहा है। पुलिस ने यह अभियान महिलाओं को घरेलू हिंसा से बचाने और उनकी शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए 29 अप्रैल को शुरू किया था। लॉकडाउन पीरियड में 50 दिन की सोशल डिसटेंसिंग से लोग घरों में रहने की वजह से तनावग्रस्त हो रहे हैं। इसका नतीजा घरेलू हिंसा के रुप में सामने आ रहाहै। घरेलू हिंसा के मामले लॉकडाउन शुरू होने के बाद से अचानक बढ़ गए हैं।

लॉकडाउन के दौरान घरेलू हिंसा को रोकने के लिए कॉल करने पर पीडि़तों के पास पुलिस की टीम पहुंच रही है। 1जनवरी 2020 से मार्च तक पुलिस के पास घरेलू हिंसा से जुड़े कुल 135 मामले आए थे। लेकिन केवल लॉकडाउन की अवधि 29 अप्रेल से 8 मई तक 10 दिन में 50 से ज्यादा नए प्रकरण पुलिस तक पहुंचे हैं।

     अमृता सोरी, ए एस पी (इन्वेस्टीगेशनयूनिट फॉर क्राइम अगेंस्ट वीमेन –आईयूसीएडब्ल्यू) के नेतृत्व में चल रहे चुप्पी तोड़ अभियान से जुड़ी पुलिस टीम वर्ष2018 से 1500 पेंडिंग शिकायतों में कॉल कर प्रतिदिन 100 महिलाओं से संपर्क कर रही है। पुराने शिकायतों से जुड़ी पीडि़त 550 महिलाओं से संपर्क कर शिकायत दर्ज किए गए हैं और उनकी समस्याओं पर निराकरण के लिए चर्चा कर काउंसिलिंग भी करायी जा रही है।

इसके बाद भी मामला नहीं सुलझने पर पुलिस ने 5 लोगों के खिलाफ एफआईआर और 2 लोगों पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई है। लॉकडाउन की अवधि में पीड़ित महिलाओं का थाना आकर शिकायत कर पाना संभव नहीं था इसलिए इस अभियान के तहत रायपुर पुलिस द्वारा पीड़ित महिलाओं को दूरभाष के माध्यम से संपर्क कर सहायता प्रदान की जा रही  है।

रायपुर पुलिस द्वारा शुरुआत किये गए चुप्पी तोड़ अभियान को अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही हैं। इस मुहिम के क्रियान्वयन हेतु अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक,आई.यू.सी.ए.डब्ल्यू. रायपुर के पर्यवेक्षण में दो टीम गठित की गयी है जिसमें महिला थाना एवं महिला सेल प्रभारी द्वारा प्रकरणों का निराकरण किया जायेगा एवं इस अभियान के तहत पीड़ित महिलाओं से संपर्क करने के लिए ग्यारह बिंदुओं का प्रोफार्मा तैयार किया गया था। वहीं शिकायत बताने के लिए जारी नंबर पर टेलीफोन, और वाट्सअप मैसेज के माध्यम से घर बैठे दर्ज करा सकते हैं। यह नम्बर हैं: 0771-4247110, 9479190127 और व्हाट्सअप्प नम्बर है: 9479191250.

घरेलू हिंसा बढऩे को लेकर स्पर्श क्लीनिंक के मनोरोग चिकित्सक डॉ. अविनाश शुक्ला का कहना है इनमें नशे की पूर्ति नहीं होने से चिड़चिड़ापन और आर्थिक तंगी को प्रमुख माना जा रहा है। साथ ही लॉकडाउन के कारण लोग इन दिनों सामान्या से ज्याजदा तनाव में हैं। चाहे व्यापारी हो, श्रमिक हो लॉकडाउन से काम बंद होने से आर्थिक बोझ व कोरोना वायरस को लेकर स्‍वास्‍थ्‍य की चिंता के बीच सोशल डिसटेंसिंग में पुरुष वर्ग द्वारा घरों से बाहर नहीं निकलने से तनाव महसूस कर रहे हैं।  घरों में 24 घंटे रहने से वक्त तो ज्यादा मिल रहा है परिवार के लिए लेकिन पति-पत्नी के बीच रिलेशनशीप में सौहाद्र नहीं है।  छुटियों के बीच दूसरे शहर घूमने जाने का प्लान और बच्चों का स्कू‍ल नहीं होने से दिनभर घर में माहौल उबाऊ होने लगा है। इस वजह से भी पति-पत्नी के बीच विवाद और झगड़े की स्थिति बन रही है।

मनोरोग चिकित्सक डॉ. शुक्ला ने बताया , कोरोना वायरस की वजह से जारी लॉक डाउन की स्थिति ने सभी की दिनचर्चा को बदलकर रख दिया है। ऐसे में घरों में बढ़ते आपसी तनाव यानी घरेलू हिंसा को खत्म करने के लिए पति –पत्नी के बीच बातचीत के तौर तरीकों में कुछ नयापन का एहसास होना चाहिए। एक दूसरे के भावनाओं का आदर करना चाहिए। किसी बात पर ठेस लगने जैसे कठोर भाषा का प्रयोग करने से बचना चाहिए। जो पत्नी को पसंद नहीं ऐसा कार्य बार-बार नहीं करना चाहिए। पत्नी् को बच्चों के सामने नहीं डांटना चाहिए बल्कि उनकी प्रशंसा करना चाहिए। जरुरत पड़े तो आपसी मतभेद को खत्म करने के लिए मैरीज काउंसलर से भी परामर्श लेना चाहिए।

    रायपुर /शौर्यपथ / प्रदेश कांग्रेस के संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने करोना को लेकर सवालिया निशान खड़े करते हुये कहा है कि देश सरकार से पूछना चाहता हैं कि हम भारत सरकार के ज्वाइंट सेक्रेटरी लव अग्रवाल साहब की बात मानें, जो कहते हैं कि पीक होगा ही नहीं; डॉक्टर गुलेरिया की बात मानें जो कहते हैं कि पीक जून-जुलाई में जाकर होगा या डॉक्टर वीके पॉल की बात मानें; जिन्होंने कहा था कि 16 मई को पीक होगा या मोदी जी आपके ऊपर हम भरोसा करें, जो आपने कहा था 24 मार्च को कि 21 दिन के बाद में हम कोरोना को हरा देंगे, महाभारत का युद्ध तो हमने 18 दिन में जीत लिया था? आज तो 21 दिन के दुगुने से ज्यादा दिन बीत गये हैं।
प्रधानमंत्री मोदी जी ने 24 मार्च को सबसे पहला लॉकडाउन- लॉकडाउन फर्स्ट को अनाउंस किया था। उसके बाद दोबारा से 3 मई तक के लिए 14 अप्रैल को लॉकडाउन- की घोषणा की। 2 बार तो मोदी जी ने लॉक डाउन की घोषणा की लेकिन तीसरे लॉकडाउन की घोषणा के समय मोदी जी खुद टीवी पर नहीं आये बल्कि एक प्रेस रिलीज़ के माध्यम से 17 मई तक एक और लॉकडाउन 3.0 की घोषणा कर दी गयी।
त्रिवेदी ने बताया कि छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश ने, कांग्रेस पार्टी ने, हम सब लोगों ने देश के प्रधानमंत्री के निर्णय का पालन किया है । कांग्रेस ने पूरे देश ने कहा है कि हम सब लोग देश के अंदर कोरोना के खिलाफ जो युद्ध है, उस युद्ध के अंदर हम सब इक्कट्ठे मिलकर हिस्सा लेंगे। संसार के अनेक देशों ने कोरोना से लड़ाई को जीता है । कई देशों ने बहुत जल्दी करोना पर काबू पाया है और अगर हम लोग उन मुल्कों को देखें कि उसमें क्या सक्सेफुल स्ट्रैटेजी थी, तो सबसे महत्वपूर्ण, सबसे बड़ी स्ट्रैटेजी जो उन लोगों ने अपनाई थी, उन मुल्कों में थी . वो यह थी कि उन्हें पता था कि ये कब पीक करेगा। उन्हें पता था कि यह लड़ाई कितनी लंबी है, किस हिसाब से उसकी तैयारी करनी है। किन्तु आज भारत में लॉकडाउन के लगभग 46-47 दिन हो गए हैं, फिर भी ऐसा स्पष्ट हो रहा है कि किसी को भी कुछ नहीं पता ही है।
            कांग्रेस पार्टी ने प्रधानमंत्री जी से, भारत सरकार से पूछा हैं कि हम किसकी बात पर विश्वास करें, क्योंकि 24 मार्च को जब मोदी जी ने सबसे पहले लॉकडाउन अनाउंस किया था, तो उन्होंने कहा था महाभारत का युद्ध 18 दिन में जीता था और मुझे सिर्फ 21 दिन चाहिएं। “21 दिन चाहिएं, हम कोरोना को हरा देंगे।” ये शब्द प्रधानमंत्री जी के थे और नीति आयोग के सदस्य प्रधानमंत्री जी को सलाह दे रहे हैं, टॉस्क फोर्स को सलाह दे रहे हैं, डॉक्टर वीके पॉल, उसी दिन उन्होंने एक ग्राफ को दिखाया था, जिसमें उन्होंने कहा था 16 मई तक केसेस जीरो हो जाएंगे । 16 मई के बाद हिंदुस्तान में कोई भी कोरोना के केस पॉजिटिव नहीं पाए जाएंगे।
एम्स दिल्ली के डॉक्टर गुलेरिया ने कहा है कि अभी पीक तो जून- जुलाई में आना है। डॉक्टर गुलेरिया, जो एम्स के डॉयरेक्टर हैं, हमारे देश का प्रीमियर इंस्टिट्यूट है, खुद पुलमोनोलोजिस्ट हैं, वो भी प्रधानमंत्री के टॉस्क फोर्स को अपना इनपुट देते हैं। तो अब हम डॉक्टर पॉल की बात को मानें, जिन्होंने कहा था कि 16 मई को ज़ीरो हो जाएगा या डॉक्टर गुलेरिया की बात मानें?
दोनों ही प्रधानमंत्री जी को सलाह देते हैं। लव अग्रवाल केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने कहा है कि पीक होगा ही नहीं । उन्होंने सारी बातों को खत्म कर दिया। उन्होंने कहा अब तो पीक होगा ही नहीं, हम बगैर पीक के चले जाएंगे जबकि देश में रोज के रोज केस बढ़ते जा रहे हैं।
           आज हमारे देश में सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि अत्यंत असमंजस की स्थिति में, जहाँ भारत सरकार में ही कन्फ्यूजन है, भारत सरकार के सभी अधिकारी जो कि प्रधानमंत्री को एडवाइज करते हैं, अलग-अलग स्टेटमेंट सबके आ रहे हैं तो फिर हम किसकी बात पर विश्वास रखें? आज की संकट की घड़ी में यह इतनी खराब स्थिति है। जब सरकार को ही मालूम नहीं है कि क्या सच्चाई है, क्या वास्तविकता है, कितनी गंभीर समस्या है, कब ये खत्म होगी, कितना लंबा इसका इंतजार करना है, तो आप यह समझ सकते हैं कि हम लोगों में कैसे कॉन्फिडेंस आएगा कि सरकार अपनी तैयारियों के प्रति संवेदनशील है, सरकार अपनी तैयारियों के प्रति सीरियस है। बड़े दुख की बात है कि हमारे देश के अंदर जिन लोगों के हाथ में जो कर्णधार हैं, उन लोगों के हाथ में देश की लगाम है उन्हें ही अगर इस चीज का आईडिया नहीं है कि ये डिजीज किस तरह से आगे पैन आउट करेगा तो फिर हम खुद अंदाजा लगा सकते हैं कि उसकी तैयारी सरकार कैसी कर रही है? जब सरकार को इस चीज का अंदेशा ही नहीं है, आईडिया ही नहीं तो देश सरकार पर कैसे भरोसा करे ???


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