August 14, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    मनोरन्जन / शौर्यपथ / बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। इसमें वह खुद की फिल्म ‘एमएस धोनी- द अनटोल्ड स्टोरी’ देखते नजर आ रहे हैं। हाथ में किताब है और नजरों के सामने टीवी। टीवी पर फिल्म चल रही है। फिल्म में सीन चल रहा है जब सुशांत धोनी के रूप में क्रिकेट पिच पर खड़े होते हैं। सुशांत बैठे धोनी-धोनी रे नारे लगाते नजर आते हैं। सुशांत के करियर की यह फिल्म एक ऐसी फिल्म रही, जिसने उनके फैन बेस को बढ़ाकर दोगुना कर दिया था। बॉक्स ऑफिस पर यह ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी। दुनिया में सुशांत के फैन बन गए थे।

    आपको बता दें कि सुशांत खुद एक बहुत बड़े धोनी फैन थे। धोनी के साथ क्रिकेट पिच पर खेलने का सपना उनका हमेशा से था और फिल्म के जरिए यह पूरा भी हुआ। धोनी फिल्म के लिए सुशांत ने काफी मेहनत की थी। उनके हू-ब-हू रूप में आने के लिए उन्होंने वीडियो में धोनी को क्रिकेट फील्ड पर खेलते हुए करीब 100 बार देखा था। फिल्म में कोई कह ही नहीं सकता था कि धोनी और सुशांत में कोई फर्क है। सुशांत इस तरह से धोनी के किरदार में ढले थे कि वह तारीफ के पात्र बने थे।

    फिल्में करने से पहले सुशांत सिंह राजपूत ने टीवी की दुनिया में अपना सिक्का जमाया। उन्होंने सीरियल ‘पवित्र रिश्ता’ से शुरुआत की और घर-घर में मानव देशमुख के नाम से जाने गए। शो इतना हिट हुआ कि अंकिता लोखंडे संग सुशांत की जोड़ी बेस्ट साबित हुई। बाद में हालांकि, दोनों रियल लाइफ में भी साथ आ गए। करीब 6 साल तक रिलेशनशिप में रहे। लेकिन फिल्मी दुनिया में कदम रखने के बाद दोनों का ब्रेकअप हो गया था। बताते चलें कि पिछले हफ्ते सुशांत सिंह राजपूत ने 14 जून को घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मुंबई पुलिस केस की छानबीन में जुटी है।

     

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    नई दिल्ली / शौर्यपथ / कोरोना को ठीक करने के दावे के साथ लांच की गई बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि की दवा कोरोनिल के प्रचार-प्रसार पर केंद्र सरकार ने रोक लगा दी है। सरकार ने इस दवा के लिए किए जा रहे दावों की जांच करने का फैसला किया है। आयुष मंत्रालय ने पतंजलि को चेतावनी दी है कि ठोस वैज्ञानिक सबूतों के बिना कोरोना के इलाज का दावे के साथ दवा का प्रचार-प्रचार किया गया तो उसे ड्रग एंड रेमेडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन) कानून के तहत संज्ञेय अपराध माना जाएगा।
               बाबा रामदेव ने जैसे ही मंगलवार को कोरोना को सात दिन में पूरी तरह ठीक करने के दावे के साथ दवा को लांच किया, आयुष मंत्रालय हरकत में आ गया। इसके बाद आयुष मंत्रालय ने तत्काल पतंजलि को दवा के प्रचार-प्रसार के विज्ञापनों पर रोक लगाने को कह दिया। मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया कि यदि इसके बाद दवा का विज्ञापन जारी रहा, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आयुष मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पतंजलि ने ऐसी किसी दवा के विकसित करने और उसके ट्रायल की कोई जानकारी मंत्रालय को नहीं दी है।
                  उन्होंने कहा कि मंत्रालय की अनुमति से कई आयुर्वेदिक दवाओं का कोरोना के इलाज में ट्रायल किया जा रहा है, लेकिन उनमें पतंजलि की दवा शामिल नहीं है। वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जब पूरी दुनिया कोरोना का इलाज खोजने के लिए जूझ रही है और कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में बिना वैज्ञानिक सबूत के किसी दवा से इलाज का दावा खतरनाक साबित हो सकता है और करोड़ों लोग इस भ्रामक प्रचार के जाल में फंस सकते हैं। इसीलिए इस दवा के प्रचार-प्रसार वाले विज्ञापनों पर तत्काल रोक लगाने के साथ ही पतंजलि को जल्द-से-जल्द कोरोनिल दवा में इस्तेमाल किए गए तत्वों का विवरण देने को कहा गया है।
    पतंजलि को यह भी बताना होगा कि इस दवा का ट्रायल किन-किन अस्पतालों में और कितने मरीजों पर किया गया। ट्रायल शुरू करने के क्लीनिकल ट्रायल रजिस्ट्री ऑफ इंडिया (सीटीआरआइ) में दवा का रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होता है। पतंजलि से सीटीआरआइ के रजिस्ट्रेशन के साथ-साथ ट्रयल के परिणाम का पूरा डाटा देने को कहा गया है।

             वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पूरी पड़ताल और तथ्यों के सही पाए जाने के बाद की इस दवा को कोरोना के इलाज में इस्तेमाल की अनुमति दी जाएगी। दरअसल आयुर्वेदिक दवा को विकसित करने और बेचने से पहले आयुष मंत्रालय से इजाजत लेने की जरूरत नहीं है। लेकिन जिस राज्य में इस दवा का उत्पादन किया जा रहा है, वहां के लाइसेंसिंग अथारिटी से इसके लिए अनुमति लेना अनिवार्य है। आयुष मंत्रालय ने उत्तराखंड के राज्य लाइसेंसिंग अथारिटी से इस दवा को दी गई मंजूरी और लाइसेंस की प्रति देने को कहा है।
    पतंजलि की दवा को इम्यूनिटी बूस्टर के रूप में लाइसेंस

              पतंजलि की दवा कोरोनिल को उत्तराखंड आयुष विभाग की तरफ से लाइसेंस जारी किया है। आयुष मंत्रालय ने विभाग से इस बारे में जानकारी मांगी है। विभाग के लाइसेंसिंग अधिकारी डॉ. यतेंद्र सिंह रावत का कहना है कि दिव्य फार्मेसी के नाम पर 12 जून को लाइसेंस जारी किया गया है। लाइसेंस में कोरोनिल वटी समेत दो अलग-अलग मात्रा वाली श्वासारी दवा को इम्यूनिटी बूस्टर बताया गया है। अब कंपनी को नोटिस जारी कर पूछा जाएगा कि वह किस आधार पर इम्यूनिटी बूस्टर की दवाओं को कोविड-19 की दवा बता रही है।
    पतंजलि की दवा पर आयुष मंत्रालय की गलतफहमी दूर : बालकृष्ण

                पतंजलि की दवा के विज्ञापन पर रोक लगाने के मामले पर आचार्य बालकृष्ण का बयान आया है। आचार्य बालकृष्ण पतंजलि योगपीठ के महामंत्री हैं। उन्होंने ट्वीट किया है, 'केंद्र सरकार आयुर्वेद को प्रोत्साहन देती आई है। पतंजलि की दवा को लेकर आयुष मंत्रालय को जो भी गलतफहमी थी, वह दूर कर दी गई है। पतंजलि ने आयुर्वेदिक दवाओं की जांच (रेंडमाइज्ड प्लेसबो कंट्रोल्ड क्लीनिकल ट्रायल) के सभी आधिकारिक मानकों को सौ प्रतिशत पूरा किया है। इसकी सभी जानकारी हमने आयुष मंत्रालय को दे दी है, अब कहीं कोई संशय नहीं रह गया है।'
    पतंजलि ने कोरोना वायरस की दवा

            आपको बता दें कि योग गुरु स्वामी रामदेव ने कोरोना वायरस की दवा कोरोनिल को मंगलवार को बाजार में उतारा और दावा किया कि आयुर्वेद पद्धति से जड़ी-बूटियों के गहन अध्ययन और शोध के बाद बनी यह दवा शत- प्रतिशत मरीजों को फायदा पहुंचा रही है। यहां पतंजलि योगपीठ में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए बाबा रामदेव ने कहा कि पतंजलि पूरे विश्व में पहला ऐसा आयुर्वेदिक संस्थान है, जिसने जड़ी-बूटियों के गहन अध्ययन और शोध के बाद कोरोना महामारी की दवाई प्रामाणिकता के साथ बाजार में उतारी है ।
    उन्होंने कहा कि यह दवाई शत-प्रतिशत मरीजों को फायदा पहुंचा रही है। उन्होंने कहा कि 100 मरीजों पर नियंत्रित क्लिनिकल ट्रायल किया गया, जिसमें तीन दिन के अंदर 69 प्रतिशत और चार दिन के अंदर शत-प्रतिशत मरीज ठीक हो गये और उनकी जांच रिपोर्ट पॉजिटिव से नेगेटिव हो गयी। ( साभार जागरण मिडिया ग्रुप )

    कृष्णा टंडन की रिपोर्ट
    जांजगीर चांपा / शौर्यपथ / विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक नारायण चंदेल का फेसबुक अकाउंट सैयद कमल नामक हैकर ने हैक कर लिया है। इस मामले का शिकायत विधायक ने पुलिस अधीक्षक सहित जांजगीर थाना में की है। विधायक नारायण चंदेल ने लोगों से अपील की है कि किसी भी तरह का मैसेज यदि उनके फेसबुक एकाउंट से किया तो इस पर तत्काल विधायक को सूचित किया जाए, हालांकि विधायक नारायण चंदेल ने अपना फेसबुक अकाउंट फिलहाल बंद कर दिया है जांजगीर चाम्पा क्षेत्र का विधायक जो विधानसभा का पूर्व उपाध्यक्ष भी रह चुका है इस तरह का अचानक फेसबुक अकाउंट हैक हो जाने से विधायक काफी सोच में पड़ गए है।

    दुर्ग / शौर्यपथ / भिलाई नगर के स्कूल शकुंतला विद्यालय के छात्र हर साल की भांति इस साल भी टॉप टेन में अपना स्थान बनाकर…

    जगदलपुर / शौर्यपथ / वैश्विक महामारी के लगातार बढ़ रहे संक्रमण ने महतारी एक्सप्रेस 102 कर्मचारियों का कार्य भी बड़ा दिया है| आजकल कोरोना संक्रमण के डर से लोग अस्पताल और स्वास्थ्य केन्द्रों में जाने से कतरा रहे हैं तो कर्मचारियों को पहले उनकी समझाइश भी करनी पड़ रही है | बस्‍तर के दूरस्‍थ क्षेत्रों में कार्यरत महतारी एक्सप्रेस 102 के कर्मचारी कोरोना वारियर बनकर अपनी विशेष भूमिका निभा रहे हैं। यहां 102 के कर्मचारी संक्रमित क्वारंटाइन सेंटरों में भी पहुंचकर मरीजों सहित गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने में जुटे है। साथ ही अस्पतालों में उपचार के बाद स्वस्थ्य होने पर उन्हें घर तक पहुंचाकर अपनी जिम्मेदारी का बखूबी निर्वहन करने में जुटे हैं।
    महतारी एक्सप्रेस 102 के पायलट और ईएमटी की टीम 24 घंटे सेवा दे रहे हैं। कोरोना वायरस से बचाव में महतारी एक्सप्रेस के कर्मचारी हर बार उपयोग में लाने से पहले एम्‍बुलेंस को सेनेटाइज कर साफ सफाई का पूरा ध्यान रखते है। साथ ही डिलेवरी महिलाओं के अलावा क्वारंटाइन मरीज को अस्पताल पहुंचाने व घर पहुंचाते समय 102 महतारी एक्सप्रेस को प्रत्येक बार सैनिटाइज किया जा रहा है। साथ ही प्रत्येक मरीजों को संक्रमण की रोकथाम व बचाव के लिए समझाइश देते हुए ग्लब्स व मास्क पहनाया जाता है।
    बस्‍तर जिला मुख्‍यालय से 50 किमी दूर भानपुरी सीएचसी के अंतर्गत आने वाले मुंडागांव प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र में तैनात महतारी एक्‍सप्रेस के पायलट रामफल बंजारे ने बताया सूदूर जंगल के इलाकों में पहुंच विहिन मार्गों से होकर डिलवरी के लिए गर्भवती महिला का लेबर पेन होने की सूचना कॉल सेंटर से मिलने पर एम्‍बुलेंस लेकर 30 मिनट में हितग्राही के घर पहुंचने की कोशिश रहती है। पायलेट श्री बंजारे ने बताया प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र से 20 से 25 किमी की दूर गांव होता है। सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक 12 घंटे की डयूटी करते हैं। वे चार साल से पायलट यानी एम्‍बुलेंस के ड्राइवर की नौकरी कर रहे हैं। ईएमटी घनश्‍याम बर्मन ने कहा ये उनका सौभाग्‍य है ऐसे दुरस्‍थ अंचल में जरुरतमंदों तक दिन रात कभी भी इमेंरजेंसी सेवा देते हैं। जब किसी गांव में पहुंचते हैं तो लोग डॉक्‍टर साहब कहकर पुकारने लगते हैं। मरीज की गंभीर हालत में लोगों उनकों किसी फिल्‍म नायक की तरह समझ कर सम्‍मान देते हैं।
    लॉकडाउन के दौरान मई महीने में पारापुर भंडामपुर ( चित्रकोट) निवासी फूलो बाई (28) के प्रसव पीड़ा का कॉल आया| जैसे ही महतारी एक्‍सप्रेस की टीम पहुंची इमेंरजेंसी मेडिकल टेक्‍निशयन घनश्‍याम बर्मन ने महिला की जांच की । प्रसव पीड़ा ज्‍यादा होने की वजह से मितानिन और स्‍थानीय महिलायों की मदद से घर पर ही डिलवरी करवाई गयी| प्रसूता ने जुड़वा बच्चों को जन्‍म दिया। बच्‍चा व जच्‍चा स्‍वस्‍थ्‍य होने पर एम्‍बुलेंस की टीम लोहांडीगुड़ा अस्‍पताल लेकर आयी जहाँ प्रभारी चिकित्‍सक द्वारा जांच व प्रसव बाद की दवाईयां दी गई। दूसरी टीम में गजेंद्र सिंह ईएमटी व पायलट मयाराम धुव्र महतारी एक्‍सप्रेस में सेवा देते हैं।
    वहीं हेल्‍थ एवं वेलनेस सेंटर मुंडागांव पीएचसी के प्रभारी चिकित्‍सक रोशन वर्मा (आरएमओ) ने बताया रेफरल केस में 50 किमी दूरी के दायरे में जिला मुख्‍यालय जगदलपुर में सिविल अस्‍पताल व मेडिकल कॉलेज तक इमेंरजेंसी में सेवा देकर मरीजों की जान बचाने का कार्य करते हैं। इन एम्बुलेंस से गर्भवती महिलाओं के उपचार के लिए उन्हें हॉस्पिटल तक मुफ्त लाया जाता है और वापस घर तक छोड़ा जाता है| महिने में 10 से 12 नार्मल डिलवरी कराया करवाई जाती है। डिलवरी के बाद जच्‍चा – बच्‍चा की जांच के बाद टीकाकारण भी किया जाता है।
    आरएमओ रोशन वर्मा ने बताया पिछले साल 179 सुरक्षित डिलवरी करवाई गयी थी । एम्‍बुलेंस की सुविधा मिलने से ग्रामीण क्षेत्र के हाई रिस्‍क प्रेग्‍नेंसी की 2 प्रतिशत मामलों को रेफर किया जाता है। श्री वर्मा ने बताया कोरोना संक्रमण को लेकर सहमें लोग जब अस्‍पताल आने से कतरा रहे हैं तब महतारी एक्‍सप्रेस की टीम ने मोर्चा संभाला और गर्भवती महिलाओं को समझाकर अस्‍पताल में संस्‍थागत डिलवरी कराने प्रोत्‍साहित किया।

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