February 11, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

  रायपुर / शौर्यपथ / पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी), भारत सरकार, रायपुर के नेतृत्‍व में अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में भारत सरकार प्रवर्तित लोक कल्‍याणकारी योजनाओं के कार्यान्‍वयन एवं प्रगति के अवलोकन के साथ ही साथ इस केन्‍द्र शासित प्रदेश की कला, संस्‍कृति और विरासत को जानने व समझने के लिए छत्‍तीसगढ़ की 12 सदस्‍यीय मीडिया टीम आज, 08 फरवरी, 2026 को रायपुर से पोर्ट ब्‍लेयर के लिए रवाना हो रही है ।
इस मीडिया टीम में हरिभूमि से श्री ब्रम्‍हवीर सिंह, नवप्रदेश से श्री यशवंत धोटे, स्‍वदेश से श्री जयप्रकाश मिश्रा, पिपुल्‍स समाचार से श्री वरूण कुमार चौहान, पत्रिका से श्री राहुल जैन, नवभारत से श्री जितेन्‍द्र मिश्रा, छत्‍तीसगढ़ से श्री पी. श्रीनिवास राव, दि हितवाद से श्री अभिषेक कुमार, आईबीसी-24 टीवी से श्री सौरभ सिंह परिहार, लल्‍लुराम डॉट कॉम से श्री प्रतीक चौहान और पीआईबी-रायपुर के दो ऑफिशियल्‍स श्री रमेश जायभाये तथा श्री परमानन्‍द साहू शामिल हैं ।

छत्‍तीसगढ़ की मीडिया टीम 09 से 14 फरवरी, 2026 तक केन्‍द्र शासित प्रदेश का भ्रमण करेगी । इस दौरान मीडिया टीम 20 मेगावाट एनएलसी सोलर पावर प्‍लांट, डालीगंज, सेंट्रल आईलैंड एग्रीकल्‍चर रिसर्च इंस्टीट्यूट, प्राणीशास्‍त्र संग्रहालय, मानव विज्ञान संग्रहालय, सेलुलर जेल, नार्थ-बे एवं नार्थ-बे लाइटहाऊस, एनएच-4 अपग्रेडेशन परियोजना, स्‍मार्ट सिटी परियोजना, भारतीय अं‍तरिक्ष अनुसंधान संगठन, नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ ओशन टेक्‍नोलॉजी, मि‍डिल स्‍ट्रेट क्रीक ब्रिज, बाराटांग लाइमस्‍टोन गुफाएं, मड वाल्‍केनो (गारामुखी), हम्‍प्रे स्‍ट्रेट ब्रिज, अमकुंज ईको-डेवलपमेंट साइट, धानी नल्‍ला मैंग्रेाव, कालीपुर ईको-टूरिज्‍म परियोजना, रॉस एवं स्मिथ द्वीप, चेन्‍नई-अंडमान सबमरीन ओएफसी परियोजना, बीएसएनएल केबल लैंडिंग स्‍टेशन, लालाजी बे इको-टूरिज्‍म रिसार्ट परियोजना, प्रस्‍तावित सी-प्‍लेन जेट्टी साइट, ताज एक्‍सोटिका एवं न्‍यू ईको-टूरज्मि स्‍थल और राधानगर बीच का भ्रमण करेगी ।
इसके अलावा मीडिया टीम अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के उपराज्‍यपाल, मुख्‍य सचिव, मत्‍स्‍य एवं पर्यटन सचिव, फिशरी सर्वे ऑफ इंडिया, भारतीय नौसेना, भारतीय कोस्‍ट गार्ड और भारत संचार निगम लिमिटेड के वरिष्‍ठ अधिकारियों से मुलाकात करेगी ।

 

जगदलपुर/बस्तर।
“मां दंतेश्वरी की जय… सियान-सज्जन, दादा-दीदी मनके जोहार।”
इन्हीं आत्मीय शब्दों के साथ भारत की राष्ट्रपति ने बस्तर पंडुम महोत्सव में अपने ऐतिहासिक संबोधन की शुरुआत की। मां दंतेश्वरी के पावन धाम में उपस्थित होकर राष्ट्रपति ने इसे अपना सौभाग्य बताया और कहा कि छत्तीसगढ़ आना उन्हें अपने घर आने जैसा लगता है। यहां के लोगों से मिलने वाला अपनत्व और स्नेह उनके लिए अमूल्य है।

राष्ट्रपति ने बस्तर को वीरों की धरती बताते हुए उन सभी सपूतों को नमन किया जिन्होंने भारत माता की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर किए। उन्होंने कहा कि बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक वैभव देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो मां दंतेश्वरी ने स्वयं इस धरती को संवारा हो।

जीवन को उत्सव की तरह जीता है बस्तर

राष्ट्रपति ने बस्तर की जनजातीय जीवन-शैली की सराहना करते हुए कहा कि यहां हर मौसम, हर फसल और हर ऋतु एक पंडुम है। बीज बोने से लेकर आम के मौसम तक, बस्तर के लोग जीवन को उत्सव के रूप में जीते हैं। यह जीवन-दर्शन पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत है।

उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष बस्तर पंडुम के माध्यम से देशभर के लोगों ने जनजातीय संस्कृति की झलक देखी थी और इस वर्ष 50 हजार से अधिक कलाकारों व प्रतिभागियों द्वारा जनजातीय संस्कृति और जीवन-शैली के विविध रूपों का प्रदर्शन किया जा रहा है। इसके लिए उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार की प्रशंसा की।

पर्यटन की अपार संभावनाएं, होम-स्टे को मिलेगा बढ़ावा

राष्ट्रपति ने कहा कि बस्तर क्षेत्र एक प्रमुख पर्यटन स्थल बनने की पूरी क्षमता रखता है। यहां की प्राचीन संस्कृति, जलप्रपात, गुफाएं और प्रकृति पर्यटकों को आकर्षित करने में सक्षम हैं। उन्होंने होम-स्टे जैसे नए पर्यटन मॉडल की सराहना करते हुए कहा कि इससे स्थानीय लोगों को रोजगार और आत्मनिर्भरता मिलेगी।

माओवाद से मुक्ति, विकास की ओर निर्णायक कदम

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि चार दशकों तक बस्तर माओवाद की हिंसा से पीड़ित रहा, जिसका सबसे अधिक नुकसान युवाओं, आदिवासियों और दलित समुदायों को हुआ। लेकिन अब भारत सरकार और राज्य सरकार की निर्णायक कार्रवाई से भय और असुरक्षा का माहौल समाप्त हो रहा है।

उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में माओवाद से प्रभावित लोगों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की है और सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि वे सम्मानजनक और सामान्य जीवन जी सकें। ‘नियद नेल्लानार योजना’ को उन्होंने ग्रामीण सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

गांव-गांव विकास का उजास

राष्ट्रपति ने कहा कि आज बस्तर में विकास का नया सूर्योदय हो रहा है। गांव-गांव बिजली, सड़क और पानी पहुंच रहा है। वर्षों से बंद पड़े स्कूल फिर से खुल रहे हैं और बच्चे शिक्षा की ओर लौट रहे हैं। यह बदलाव पूरे देश के लिए आशा और विश्वास का संदेश है।

लोकतंत्र की ताकत का उदाहरण

हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटे लोगों की सराहना करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि लोकतंत्र और संविधान में आस्था रखकर ही आगे बढ़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की यही ताकत है कि ओडिशा के एक छोटे से गांव की बेटी आज भारत की राष्ट्रपति बनकर बस्तर की जनता को संबोधित कर रही है।

जनजातीय उत्थान और शिक्षा पर विशेष जोर

राष्ट्रपति ने बताया कि पीएम जनमन योजना और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के माध्यम से सबसे पिछड़ी जनजातियों को विकास से जोड़ा जा रहा है। शिक्षा को उन्होंने व्यक्तिगत और सामुदायिक विकास की आधारशिला बताया और माता-पिता से अपील की कि वे अपने बच्चों को जरूर पढ़ाएं। जनजातीय क्षेत्रों में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों की स्थापना को उन्होंने भविष्य निर्माण की दिशा में अहम कदम बताया।

पद्म पुरस्कारों से बस्तर का गौरव बढ़ा

राष्ट्रपति ने वर्ष 2026 के पद्म पुरस्कार विजेताओं का उल्लेख करते हुए बताया कि इस क्षेत्र के डॉक्टर बुधरी ताती, डॉक्टर रामचंद्र गोडबोले एवं सुनीता गोडबोले को समाज सेवा, महिला सशक्तिकरण, आदिवासी उत्थान और दूरस्थ क्षेत्रों में नि:शुल्क चिकित्सा सेवा के लिए सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे निस्वार्थ सेवाभावी लोग ही समाज को संवेदनशील और समावेशी बनाते हैं।

विरासत के साथ विकास का संकल्प

अपने संबोधन के समापन में राष्ट्रपति ने कहा कि मां दंतेश्वरी को समर्पित बस्तर दशहरा हमारी प्राचीन परंपराओं और भाईचारे का प्रतीक है। विकास का वही मॉडल सफल होता है जो विरासत को संजोते हुए आगे बढ़े। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे आधुनिक विकास के साथ अपनी संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण करें।

राष्ट्रपति ने बस्तरवासियों से केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ उठाने की अपील करते हुए कहा कि आपकी प्रगति ही छत्तीसगढ़ और विकसित भारत की नींव है।

“जय जय छत्तीसगढ़ महतारी” के उद्घोष के साथ उन्होंने मां दंतेश्वरी से देशवासियों के कल्याण की प्रार्थना की।

 

 लेखक -डॉ. दीपक जायसवाल


          पीढ़ियों से, भारत के श्रमिकों ने एक पुरानी और टुकड़ों में बंटी श्रम प्रणाली का बोझ उठाया है, जो अक्सर उनके वेतन, सुरक्षा और कार्यस्थल पर गरिमा की रक्षा करने में विफल रही है। असंगठित, संविदा और उभरते गिग क्षेत्रों के करोड़ों श्रमिक नीति-परिदृश्य में अदृश्य रहे हैं और बुनियादी सामाजिक सुरक्षा से वंचित रहे हैं। चार श्रम संहिताएँ इन ऐतिहासिक अन्यायों का सुधार करने के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित प्रयास का प्रतिनिधित्व करती हैं। लगभग तीन दर्जन अलग-अलग कानूनों को एक सुसंगत, एकल ढांचे में लाकर, ये संहिताएँ न्यायसंगत वेतन, सुरक्षित कार्यस्थल और उन लोगों के लिए सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास करती हैं, जो लंबे समय से वंचित रहे हैं। वर्षों के परामर्श और बहस के बाद इनका कार्यान्वयन, श्रमिकों के अधिकारों को मजबूत करने तथा अधिक स्थिर और मानवतापूर्ण रोजगार वातावरण बनाने में निर्णायक क्षण का प्रतीक है।

एक जिम्मेदार ट्रेड यूनियन संगठन के रूप में, भारतीय ट्रेड यूनियनों का राष्ट्रीय मोर्चा (एनएफआईटीयू), कामगारों की दीर्घकालिक भलाई, गरिमा और सामाजिक सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। मोर्चा दृढ़ता से मानता है कि 12 फरवरी को श्रम संहिताओं के खिलाफ हड़ताल में भाग लेना न तो आवश्यक है और न ही वर्तमान समय में श्रमिक वर्ग के सर्वोत्तम हित में है।

श्रम संहिताएं कोई अचानक या एकतरफा हस्तक्षेप नहीं हैं। ये दो दशकों से अधिक समय तक चली सुधार प्रक्रिया का परिणाम हैं। 29 अलग-अलग श्रम कानूनों को चार व्यापक संहिताओं में समेकित करने की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी, ताकि अनुपालन को सरल बनाया जा सके, अस्पष्टता को कम किया जा सके तथा कार्य और रोजगार की बदलती वास्तविकताओं के अनुरूप भारत की श्रम रूपरेखा को आधुनिक बनाया जा सके।

श्रम संहिताओं को पूरी तरह खारिज करना उन मौलिक लाभों की उपेक्षा करता है, जो वे श्रमिकों को प्रदान करने का प्रयास करती हैं। वेतन संहिता सार्वभौमिक न्यूनतम वेतन कवरेज और समय पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करती है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में लंबे समय से मौजूद वेतन सुरक्षा के अंतर को दूर किया जा सकता है। सामाजिक सुरक्षा संहिता, पहली बार, असंगठित, संविदा, गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा की विधायी रूपरेखा तैयार करती है। इन श्रमिकों की संख्या लगभग 40 करोड़ है और पहले ये श्रमिक औपचारिक सुरक्षा व्यवस्था से बाहर थे। ये प्रावधान भारत में श्रमिकों के अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा कवरेज का ऐतिहासिक विस्तार प्रस्तुत करते हैं।

औद्योगिक संबंध संहिता तथा पेशे से जुड़ी सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य-परिस्थिति संहिता का उद्देश्य औद्योगिक सद्भाव, तेज विवाद निवारण और सुरक्षित, स्वस्थ व अधिक सम्मानजनक कार्यस्थलों को बढ़ावा देना है। कुछ प्रावधानों को लेकर चिंताएँ हो सकती हैं, अनुभव बताते हैं कि व्यापक विरोध और हड़तालों से शायद ही रचनात्मक परिणाम मिलते हैं। संवाद, नियम-आधारित सुधार और मुद्दा-विशेष पर चर्चा के जरिये श्रमिकों के हित बेहतर तरीके से पूरे किये जा सकते हैं, बजाय इसके कि आपस में टकराव हो, जिससे पारिश्रमिक हानि, उत्पादन में रुकावट और रोजगार असुरक्षा का जोखिम पैदा होता है—विशेष रूप से श्रम बल के सबसे कमजोर वर्गों के लिए।

यह दावा करना भी गलत है कि श्रम संहिताएँ बिना परामर्श के लागू की गई हैं। सुधार प्रक्रिया में त्रिपक्षीय चर्चाओं के कई दौर, संसद की स्थायी समितियों में विचार-विमर्श और विभिन्न हितधारकों के साथ संवाद शामिल थे। एक लोकतांत्रिक प्रणाली में, मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन इन्हें बातचीत और संस्थागत संवाद के माध्यम से हल किया जाना चाहिए, न कि उन व्यवधानों के द्वारा जो अंततः स्वयं श्रमिकों को ही नुकसान पहुंचाते हैं।

जब भारतीय अर्थव्यवस्था संरचनात्मक रूपांतरण के दौर से गुजर रही है और राष्ट्र विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है, श्रमिक संघों को विघटन के बजाय जिम्मेदार कार्रवाई का चयन करना चाहिए। हमारी भूमिका केवल सुधारों का विरोध करना नहीं है, बल्कि उन्हें इस तरह आकार देना है कि श्रमिकों के अधिकार, सामाजिक सुरक्षा और कार्यस्थल पर गरिमा को प्रभावी क्रियान्वयन और सतत सुधार के माध्यम से व्यावहारिक तौर पर मजबूत किया जा सके।

श्रमिक संघों की वास्तविक जिम्मेदारी केवल विरोध करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि मजदूरों को वास्तविक रूप में जमीनी स्तर पर लाभ हो। अब ध्यान इस बात पर होना चाहिए कि श्रम संहिताओं को न्यायपूर्ण तरीके से लागू किया जाए और इन्हें हर उस मजदूर तक पहुँचाया जाए, जिसे सुरक्षा की आवश्यकता है। हड़ताल की बजाय संवाद, सहयोग और निरंतर सुधार चुनकर, श्रमिक संघ एक ऐसा प्रणाली बनाने में मदद कर सकते हैं, जो श्रमिकों के लिए नौकरी की सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और गरिमा प्रदान करती हो और साथ ही 2047 तक विकसित भारत की ओर देश की यात्रा का भी समर्थन करती हो।
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(लेखक, भारतीय ट्रेड यूनियनों के राष्ट्रीय मोर्चा (एनएफआईटीयू) के अध्यक्ष हैं)

पुश्तैनी जमीन पर कब्जे का आरोप, किसान को धमकी
पुलिस ने बताया राजस्व विवाद, पीडि़त को न्यायालय जाने की सलाह
दबंगों के आगे असहाय किसान? दुर्ग में फिर उठा जमीन सुरक्षा का सवाल

दुर्ग / शौर्यपथ की विशेष रिपोर्ट

दुर्ग जिले में किसानों की जमीन से जुड़े विवाद लगातार गंभीर चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। ताजा मामला खंडेलवाल कॉलोनी से सटे क्षेत्र का है, जहां एक किसान ने अपनी पुश्तैनी भूमि पर जबरन कब्जा करने और धमकी देने का आरोप लगाया है। हालांकि पुलिस ने प्राथमिक जांच के बाद इसे राजस्व से जुड़ा भूमि विवाद बताते हुए हस्तक्षेप से इंकार कर दिया है।

पीडि़त किसान डुलेश्वर सिन्हा (48 वर्ष), निवासी दुर्ग, थाना पहुंचकर लिखित आवेदन प्रस्तुत किया। आवेदन में उन्होंने बताया कि उनके नाम दर्ज भूमि है, जो चार किसानों की संयुक्त पुश्तैनी जमीन से जुड़ी हुई है। इसी भूमि से लगी हुई जमीन रमेश कुमार ताराचंद जैन की बताई जा रही है।

पीडि़त के अनुसार, रमेश कुमार जैन द्वारा जिस भूमि पर बाउंड्रीवाल का निर्माण किया जा रहा है, वह उनकी पुश्तैनी जमीन का हिस्सा है। जब किसान ने इसका विरोध किया तो आरोपी ने कथित रूप से कहा—
"मैं अपना काम नहीं रोकूंगा, जो करना है कर लो,"
और उन्हें धमकी दी गई।

पुलिस ने माना राजस्व विवाद, दर्ज किया अपराध क्रमांक

मामले की प्राथमिक जांच के बाद पुलिस ने इसे भूमि विवाद एवं राजस्व से संबंधित प्रकरण बताया। पुलिस का कहना है कि फिलहाल किसी प्रकार की मारपीट या संज्ञेय अपराध के स्पष्ट तथ्य सामने नहीं आए हैं, ऐसे में पुलिस हस्तक्षेप की स्थिति नहीं बनती। पीडि़त किसान को न्यायालय की शरण लेकर वैधानिक प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी गई है।

प्रकरण को अपराध क्रमांक 0037/2026 के अंतर्गत धारा 174(2) क्चहृस्स् में दर्ज किया गया है, जो जांच के आधार पर दर्ज किया जाने वाला प्रावधान है।

पीडि़त किसान की चाची भी आईं सामने

मामले में नया मोड़ तब आया जब पीडि़त किसान की चाची और उनके परिजन भी सामने आए। उनका आरोप है कि उनकी जमीन को भी रमेश कुमार जैन द्वारा किसी अन्य राज्य के किसान को फसल उत्पादन के लिए दे दिया गया है। परिजनों का कहना है कि बिना सहमति और अधिकार के भूमि का उपयोग किया जा रहा है।

पूर्व विवादों से भी जुड़ा रहा नाम

क्षेत्र में चर्चा है कि ताराचंद रमेश कुमार जैन का नाम पूर्व में भी शासकीय नाले की जमीन के एक हिस्से पर कब्जा कर बाउंड्रीवाल निर्माण से जुड़े विवादों में सामने आ चुका है। हालांकि उस समय किसी ठोस कार्रवाई या जांच की जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई। स्थानीय लोगों का दावा है कि नाले की बड़ी भूमि पर अतिक्रमण हो चुका है, लेकिन प्रशासनिक कार्रवाई आज तक स्पष्ट नहीं है।

प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल

हाल के समय में जिले में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां रसूखदारों द्वारा किए गए कथित अवैधानिक कार्यों पर कार्रवाई किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच पाई। ऐसे में यह सवाल एक बार फिर खड़ा हो गया है कि क्या जमीन से जुड़े मामलों में किसानों को त्वरित और प्रभावी सुरक्षा मिल पा रही है, या फिर दबंगों के सामने किसान खुद को असहाय महसूस कर रहा है।

आरोपी पक्ष से संपर्क का प्रयास असफल

इस पूरे मामले में रमेश कुमार जैन से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। फिलहाल विवादित भूमि पर बाउंड्रीवाल निर्माण का कार्य रुका हुआ बताया जा रहा है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह मामला राजस्व न्यायालय और प्रशासनिक स्तर पर किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्या पीडि़त किसान को न्याय मिल पाता है, या यह मामला भी फाइलों और प्रक्रियाओं में उलझकर रह जाएगा।

आईटी पार्क से खेल सुविधाओं तक मंत्री का विजऩ, निगम में गंदगी और कब्ज़ों का राज
विकास बनाम बदहाली की दो तस्वीरें, दुर्ग की जनता के सामने

 दुर्ग। शौर्यपथ की विशेष रिपोर्ट
दुर्ग नगर निगम क्षेत्र में अगर बीते एक वर्ष के विकास कार्यों का निष्पक्ष आकलन किया जाए, तो एक कड़वा सच सामने आता है—शहर में विकास यदि कहीं दिखाई देता है, तो वह सिफऱ् पोस्टरों और दावों तक सीमित है। ज़मीनी स्तर पर आम नागरिक आज भी बुनियादी सुविधाओं और सुव्यवस्थित शहर की तलाश में भटक रहा है।
हालांकि, इस बदहाल परिदृश्य के बीच कुछ सकारात्मक प्रयास भी नजऱ आते हैं। शहर की प्रतिष्ठित समाजसेवी संस्था मेघ गंगा ग्रुप ने जनसहयोग और सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय देते हुए ग्रीन चौक, राजेंद्र प्रसाद चौक, कपड़ा लाइन स्थित वाई-शेप ब्रिज जैसे क्षेत्रों की तस्वीर बदल दी है। इन स्थानों की साज-सज्जा और हरियाली ने यह साबित किया है कि यदि इच्छाशक्ति हो, तो शहर की खूबसूरती संवारी जा सकती है।
लेकिन दुर्भाग्यवश, यह पहल शहरी सरकार की नहीं, बल्कि समाजसेवियों की देन है।
शहरी सरकार के कार्यकाल में बढ़ती अव्यवस्था
महापौर श्रीमती अलका बाघमार के एक वर्ष के कार्यकाल में दुर्ग शहर कई गंभीर समस्याओं से जूझता दिखाई दे रहा है।
कुआं चौक, महाराजा चौक, धमधा नाका स्थित शासकीय अस्पताल के सामने, सुराना कॉलेज के आसपास बदबूदार वातावरण आम नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है।
बस स्टैंड की बेशकीमती जमीन पर अनुबंध की शर्तें समाप्त होने के बावजूद कब्जा, गणेश मंदिर के सामने अवैध निर्माण, विश्वदीप स्कूल के पास नाली पर स्लैब डालकर संचालित अवैध बाजार—ये सभी उदाहरण प्रशासनिक लापरवाही और पक्षपातपूर्ण रवैये को उजागर करते हैं।
इतना ही नहीं, दुर्ग नगर निगम के लगभग 20–30 वर्षों के इतिहास में पहली बार भेदभावपूर्ण कार्रवाई के इतने मामले सामने आ रहे हैं। आम नागरिकों पर सख्ती और प्रभावशाली लोगों पर मेहरबानी—यह दोहरा मापदंड आज शहर में खुलकर चर्चा का विषय बना हुआ है।
आवारा पशुओं की सड़कों पर भरमार, कई वार्डों में जल संकट और गंदगी के ढेर ने जनता के धैर्य की परीक्षा ले ली है।
विधायक से मंत्री तक, गजेंद्र यादव की विकास यात्रा
दूसरी ओर, यदि दुर्ग के विकास की बात की जाए तो वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद शहर को विधायक के रूप में गजेंद्र यादव का नेतृत्व मिला। अल्प समय में विधायक से मंत्री पद तक पहुंचे स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने शहर को कई ठोस सौगातें दीं, जो अब केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि ज़मीनी हकीकत बन चुकी हैं।
आईटी पार्क दुर्ग की शुरुआत, जिसका एमओयू प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति में संपन्न हुआ, आने वाले समय में दुर्ग को आईटी और रोजगार के नक्शे पर नई पहचान देगा।
इसके अलावा स्विमिंग पूल, बैडमिंटन ग्राउंड, समृद्धि बाजार के सामने फुटकर सब्जी व्यापारियों के लिए व्यवस्थित शेड, गया नगर में सामाजिक भवन जैसी योजनाएं आज धरातल पर दिखाई दे रही हैं।
कभी अतिशयोक्ति मानी जाने वाली ये घोषणाएं अब साकार रूप ले चुकी हैं। कई और वादे हैं, जो भविष्य में पूरे होंगे या नहीं—यह समय तय करेगा, लेकिन वर्तमान में दो वर्षों के कार्यकाल में मंत्री गजेंद्र यादव ने दुर्ग की जनता को ठोस विकास का अहसास जरूर कराया है।
जनता के सामने दो मॉडल
आज दुर्ग शहर के सामने विकास के दो मॉडल स्पष्ट हैं—
एक ओर राज्य सरकार और मंत्री गजेंद्र यादव की योजनाएं, जो रोजगार, खेल, सामाजिक और आर्थिक विकास की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
दूसरी ओर, नगर निगम की शहरी सरकार, जहां अव्यवस्था, गंदगी, अवैध कब्जे और भेदभावपूर्ण कार्रवाई आम नागरिकों के लिए रोज़मर्रा की परेशानी बन चुकी है।
दुर्ग की जनता अब पोस्टरों में नहीं, ज़मीनी हकीकत में विकास देखना चाहती है। सवाल यह है कि क्या शहरी सरकार जनता की इस अपेक्षा पर खरी उतरेगी, या फिर विकास की असली कहानी सिफऱ् मंत्री स्तर तक ही सीमित रह जाएगी?

10वें दिन 130 से अधिक प्रदर्शनों का आंकड़ा पार; अंतर्राष्ट्रीय नाटकों और नुक्कड़ नाटकों ने जीता दर्शकों का दिल

    बिलासपुर / शौर्यपथ / नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा (एनएसडी) द्वारा आयोजित दुनिया का सबसे बड़ा अंतर्राष्ट्रीय थिएटर फेस्टिवल, 25वां भारत रंग महोत्सव (BRM), अपने 10वें दिन भी कला प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। सिल्वर जुबली मना रहे इस महोत्सव ने अपनी विविधता और भव्यता से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर सहित देशभर के 19 केंद्रों पर थिएटर की एक नई ऊर्जा का संचार किया है। अब तक इस फेस्टिवल में 130 से अधिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शन हो चुके हैं, जिनमें माइक्रो ड्रामा, वन-एक्ट प्ले और नुक्कड़ नाटक शामिल हैं।
महोत्सव के 10वें दिन कहानी कहने के कई अनूठे रंग देखने को मिले। दिल्ली के मंच पर "बदज़ात" और "डैडी" जैसे प्रभावशाली नाटकों का मंचन हुआ, वहीं कश्मीरी लोक परंपरा 'भांड पाथर' पर आधारित नाटक “अका नंदन (आँखों का तारा)” ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पोलैंड के प्रोडक्शन “उमादेवी ऑब्जर्व्स वांडा डायनोव्स्का” और रूस के नाटक “ए वेरी सिंपल स्टोरी” ने वैश्विक कलात्मक संवाद को मजबूती प्रदान की।एनएसडी स्टूडेंट्स यूनियन की पहल 'आद्वित्य' के तहत नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से गंभीर सामाजिक मुद्दों को उठाया गया। इसमें बाल शोषण जैसे संवेदनशील विषय पर "कुछ अनसुने", पेरेंटिंग स्टाइल पर आधारित "बेबी शार्क डू डू डू डू" और कैदियों के जीवन के संघर्ष को दर्शाते नाटकों ने युवाओं की रचनात्मक सोच और सामाजिक ज़िम्मेदारी को प्रदर्शित किया। इसके साथ ही एफटीआईआई की चुनिंदा डिप्लोमा फिल्मों की स्क्रीनिंग ने सिनेमाई बारीकियों से दर्शकों को परिचित कराया।

भारत रंग महोत्सव 2026 की खास बात इसकी व्यापक पहुंच है। दिल्ली के मुख्य केंद्र के साथ-साथ यह महोत्सव छत्तीसगढ़ के रायपुर में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। रायपुर के रंगमंच प्रेमी इन उच्च स्तरीय प्रस्तुतियों का गवाह बन रहे हैं, जिससे प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को एक अंतरराष्ट्रीय मंच और नई दृष्टि मिल रही है। रायपुर के अलावा बेंगलुरु, पटना, कोलकाता और पुणे जैसे शहरों में भी नाटकों का मंचन जारी है।
यह 25वां संस्करण 27 जनवरी से 20 फरवरी 2026 तक चलेगा। पूरे 25 दिनों के इस सफर में 9 देशों और भारत के हर राज्य व केंद्र शासित प्रदेश के थिएटर ग्रुप हिस्सा ले रहे हैं। कुल मिलाकर 228 भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय भाषाओं में 277 से अधिक प्रोडक्शन दिखाए जाएंगे, जिनमें कई दुर्लभ और कम बोली जाने वाली भाषाएं भी शामिल हैं।

   राजनांदगांव / शौर्यपथ / साहित्य समिति, भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज, राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) द्वारा वार्षिक साहित्यिक महोत्सव “आईरिस 2026” का आयोजन 2 फरवरी से 6 फरवरी 2026 तक किया गया। इस महोत्सव का उद्देश्य विद्यार्थियों की रचनात्मक सोच, ज्ञान और अभिव्यक्ति क्षमता को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
पांच दिनों तक चले इस आयोजन के अंतर्गत विभिन्न साहित्यिक और शैक्षणिक प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इनमें मिथोलॉजिकल क्विज, स्लोगन लेखन, कविता पाठ, गेस द डिज़ीज, मेडिकल एटलस, मेडिकल क्विज, एक्सटेम्पोर और वाद-विवाद प्रमुख रहे। सभी प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने पूरे जोश, आत्मविश्वास और अनुशासन के साथ भाग लिया। प्रतिभागियों ने अपने विचारों, ज्ञान और रचनात्मकता का अच्छा प्रदर्शन किया और अपनी प्रतिभा को सामने लाने का अवसर पाया।
सभी प्रतियोगिताओं का मूल्यांकन महाविद्यालय के अनुभवी और सम्मानित संकाय सदस्यों द्वारा निष्पक्ष रूप से किया गया। उनकी उपस्थिति और मार्गदर्शन से विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ा और कार्यक्रम की गुणवत्ता बनी रही।
महोत्सव के समापन पर पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया, जो माननीय अधिष्ठाता (डीन) डॉ. पी. एम. लुका की गरिमामयी उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर डॉ. लुका ने साहित्य समिति और आयोजक दल के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों के आत्मविश्वास और व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
यह संपूर्ण आयोजन संकाय समन्वयकों डॉ. दिव्या साहू, डॉ. अनिल बरन चौधरी, डॉ. इंदु पद्मेय एवं डॉ. रूबी साहू के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। वहीं छात्र समन्वयकों आशुतोष चंद्र कुमार एवं जी. सृष्टि ने कार्यक्रमों के सुचारु संचालन में अहम भूमिका निभाई और सभी व्यवस्थाओं को अच्छे ढंग से संभाला।
आईरिस 2026 का समापन अत्यंत सफल और यादगार रहा। इस महोत्सव ने विद्यार्थियों को सीखने, अपनी प्रतिभा दिखाने और आत्मविश्वास बढ़ाने का अच्छा अवसर प्रदान किया, जिससे महाविद्यालय का शैक्षणिक और सांस्कृतिक वातावरण और भी समृद्ध हुआ।

 

रायपुर | शौर्यपथ

राज्य सरकार ने आम नागरिकों को रजिस्ट्री एवं पंजीयन से जुड़ी सेवाएं सरल, सुलभ और समयबद्ध ढंग से उपलब्ध कराने की दिशा में एक अहम निर्णय लेते हुए प्रदेश में चार नए उप पंजीयक कार्यालयों की स्थापना को स्वीकृति प्रदान की है। यह निर्णय रजिस्ट्रीकरण अधिनियम–1908 के प्रावधानों के अंतर्गत लिया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, धमतरी जिले के भखारा, बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के तहसील मुख्यालय लवन, तथा बिलासपुर जिले के सकरी और राजकिशोर नगर में नवीन उप पंजीयक कार्यालय खोले जाएंगे। इन कार्यालयों की स्थापना से संबंधित क्षेत्रों के नागरिकों को रजिस्ट्री कार्यों के लिए जिला मुख्यालयों की लंबी दूरी तय करने से राहत मिलेगी।

नागरिकों को सीधा लाभ, समय और धन की बचत

नए उप पंजीयक कार्यालय खुलने से पंजीयन कार्यों में भीड़ कम होगी, प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी और समय व धन दोनों की बचत होगी। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा तथा प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी।

मुख्यमंत्री का संदेश: सुशासन की ओर सशक्त कदम

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य है कि शासन की सेवाएं नागरिकों तक उनके निकटतम स्तर पर उपलब्ध हों। नए उप पंजीयक कार्यालयों की स्वीकृति से आम लोगों को पंजीयन संबंधी कार्यों में बड़ी राहत मिलेगी। यह निर्णय सुशासन, पारदर्शिता और जन-सुविधा की दिशा में एक मजबूत पहल है।

ओ.पी. चौधरी: पंजीयन प्रणाली को बनाया जा रहा आधुनिक

वित्त एवं वाणिज्य कर पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि सरकार नागरिक सुविधाओं के विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। चार नए उप पंजीयक कार्यालयों की स्वीकृति इसी सोच का परिणाम है। इससे पंजीयन व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी तथा लोगों को उनके क्षेत्र में ही गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिल सकेंगी।

उन्होंने बताया कि पंजीयन विभाग द्वारा 10 क्रांतिकारी सुधार लागू किए गए हैं, जिनका लाभ अब इन क्षेत्रों के नागरिकों को भी मिलेगा। इनमें प्रमुख रूप से—

  • ऑटो डीड जनरेशन

  • आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन

  • घर बैठे रजिस्ट्री की सुविधा

  • स्वतः नामांतरण

  • ऑनलाइन भारमुक्त प्रमाणपत्र

  • एकीकृत कैशलेस भुगतान प्रणाली

  • व्हाट्सएप आधारित सेवाएं

  • डिजीलॉकर एकीकरण

  • डिजी-डॉक सेवा

  • खसरा नंबर के माध्यम से ऑनलाइन सर्च एवं रजिस्ट्री डाउनलोड

जनहित में बड़ा निर्णय

राज्य सरकार का यह फैसला पंजीयन व्यवस्था को विकेंद्रीकृत, आधुनिक और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल आम नागरिकों को सुविधा मिलेगी, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और कार्यकुशलता भी सुदृढ़ होगी।


भिलाई/हैदराबाद।

   सेल–भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) के जनसंपर्क विभाग की उप प्रबंधक सुश्री शालिनी चौरसिया ने प्रतिष्ठित ‘द हिंदू बिज़नेस लाइन सेरेब्रेशन कॉर्पोरेट क्विज़–2026’ के हैदराबाद क्षेत्रीय दौर में तृतीय पुरस्कार प्राप्त कर संयंत्र का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। यह प्रतियोगिता 1 फरवरी 2026 को हैदराबाद में आयोजित की गई थी।

इस प्रतिष्ठित क्विज़ प्रतियोगिता में देश के विभिन्न प्रमुख कॉर्पोरेट संगठनों से जुड़े अधिकारी एवं पेशेवर प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता के विभिन्न चरणों में व्यावसायिक समझ, वित्त, अर्थशास्त्र, बाजार, समसामयिक घटनाओं तथा विश्लेषणात्मक क्षमता का गहन मूल्यांकन किया गया। सुश्री शालिनी चौरसिया ने अपने सशक्त ज्ञान, तार्किक सोच और समसामयिक विषयों पर मजबूत पकड़ के बल पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए शीर्ष प्रतिभागियों में स्थान बनाया।

राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित क्विज़ श्रृंखला

‘द हिंदू बिज़नेस लाइन सेरेब्रेशन कॉर्पोरेट क्विज़’ देश की सबसे प्रतिष्ठित कॉर्पोरेट क्विज़ प्रतियोगिताओं में से एक है। यह प्रतियोगिता अपने 22वें संस्करण में आयोजित की जा रही है और बीते वर्षों में यह श्रृंखला कॉर्पोरेट जगत में ज्ञानवर्धन, रणनीतिक सोच और बौद्धिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने वाले एक सशक्त मंच के रूप में स्थापित हुई है।

राष्ट्रीय फाइनल की ओर अगला कदम

22वें सेरेब्रेशन कॉर्पोरेट क्विज़ के अंतर्गत देश के प्रमुख शहरों में क्षेत्रीय दौर आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागी राष्ट्रीय फाइनल के लिए चयनित होंगे।

सुश्री शालिनी चौरसिया की इस उपलब्धि पर भिलाई इस्पात संयंत्र के अधिकारियों, सहकर्मियों एवं कर्मचारियों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी हैं।

 

भिलाई।
युवाओं को नशे की गिरफ्त में जाने से रोकने के लिए दुर्ग पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी और समन्वित कार्रवाइयों में से एक को अंजाम दिया है। जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में एक साथ की गई छापेमारी में पुलिस ने गोगो/रोलिंग पेपर, हुक्का सामग्री, चिलम और प्रतिबंधित जर्दायुक्त पान मसाला की भारी खेप जब्त की है। इस दौरान COTPA Act के तहत 16 दुकानदारों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की गई है।

यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल के निर्देश पर संचालित विशेष अभियान के अंतर्गत की गई, जिसमें 35 से अधिक पुलिस टीमों ने एक साथ दुर्ग–भिलाई के संवेदनशील इलाकों में रेड की।


युवाओं में बढ़ते नशे पर पुलिस की सख्त नजर

पुलिस जांच में सामने आया कि शहर के विभिन्न पान ठेले, गुमटियां और डेली नीड्स की दुकानों पर गांजा सेवन के लिए उपयोग होने वाले गोगो/रोलिंग पेपर, चिलम, हुक्का फ्लेवर और प्रतिबंधित तंबाकू उत्पाद खुलेआम बेचे जा रहे थे। यह बिक्री खासतौर पर शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों के आसपास की जा रही थी।

संयुक्त पुलिस टीमों ने नियमानुसार तलाशी लेकर करीब ₹2 लाख मूल्य का नशीला सामान जब्त किया। इसके साथ ही संबंधित दुकानों के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के अंतर्गत इस्तगासा प्रस्तुत कर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई भी की गई।


इन थाना क्षेत्रों में हुई कार्रवाई

रेड के दौरान:

  • मोहन नगर – 8 दुकानें

  • स्मृतिनगर – 5 दुकानें

  • नेवई – 2 दुकानें

  • दुर्ग – 1 दुकान

कुल 17 व्यक्तियों के खिलाफ COTPA Act के तहत कार्रवाई की गई है।


सप्लाई चेन पर भी पुलिस की नजर

दुर्ग पुलिस ने जब्त सामग्री की सप्लाई चेन (Backward Linkage) का भी पता लगाया है। पुलिस के अनुसार, इन नशीले उत्पादों की आपूर्ति करने वालों के खिलाफ भी आगामी दिनों में वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।


आरोपियों का विवरण

कार्रवाई के दौरान जिन दुकानदारों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किए गए, उनमें प्रमुख रूप से—

  • अभिनंदन सिंह (30), प्रगति नगर

  • चित्रांश साहू उर्फ सोनू (23), रुआबांधा बस्ती, मिलाई

  • विजेश बारवे (44), मुखर्जी नगर, मोहन नगर

  • देवेन्द्र भोसले (20), सिकोला भाठा, दुर्ग

  • शंकर लाल बंछोर (65), मोहन नगर

  • संजय कुमार बडानी (48), दुर्ग

  • लोकेश कुमार साहू (35), मोहन नगर

  • कुशाल प्रजापति (30), मोहन नगर

  • अर्जुन यादव (46), मोहन नगर

  • राजकुमार महोबिया (39), दुर्ग

  • राजेश कुमार द्विवेदी (57), सुपेला/स्मृतिनगर

  • मनोज कुमार चौहान, मॉडल टाउन, स्मृतिनगर

  • त्रिवेणी साहू (50), जुनवानी

  • लक्की चंदानी (43), मोहन नगर

  • भगवान साहू, हाउसिंग बोर्ड

  • विमल जसवानी (23), सिंधी कॉलोनी, दुर्ग


स्पष्ट संदेश

दुर्ग पुलिस की इस कार्रवाई से साफ संकेत है कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नशे के खिलाफ यह अभियान निरंतर और और भी सख्त रूप में जारी रहेगा।

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