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6 फरवरी को देशभर में किसानों का 'चक्का जाम', मुस्तैदी के साथ खड़ी पुलिस; किसान आंदोलन की 10 बड़ी बातें

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नई दिल्ली / शौर्यपथ / केंद्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन शुक्रवार को जारी रहा. किसान कानूनों को वापस लेने की मांग अपनी मांग पर बरकरार हैं. दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर डटे अन्नदाताओं का कहना है कि जब तक सरकार उनकी बात नहीं मानती है वे पीछे नहीं हटेंगे. इस बीच, किसान संगठन 6 फरवरी यानी शनिवार होने वाले राष्ट्रव्यापी चक्का जाम को लेकर तैयारी में जुटे हैं. वहीं, 26 जनवरी की घटना के बाद से दिल्ली की सीमों पर पुलिस और सुरक्षाबल पूरी तरह से मुस्तैद हैं. भारत में चल रहे किसान आंदोलन का रिहाना, ग्रेटा थनबर्ग समेत कई अतंरराष्ट्रीय हस्तियों ने समर्थन किया. वहीं, किसान आंदोलन और कृषि कानून को लेकर संसद में विपक्ष भी हंगामा कर रहा है.
मामले से जुड़ी अहम जानकारियां :
किसान आंदोलन का शुक्रवार को 72वां दिन है. सिंघु और टिकरी बॉर्डर पर अब भी इंटरनेट बंद है. कल होने वाले चक्का जाम को लेकर किसान संगठनों की अहम बैठक होनी है. मीडिया के प्रवेश पर अब भी रोक है. किसान संगठनों के मुताबिक़ अब भी दिल्ली जाने वाले 6 किसान लापता हैं.
भारत ने खालिस्तानी समूह सिख फॉर जस्टिस (Sikh For Justice) और उसके अलगाववादी अभियान रिफ्रेंडम 2020 की जांच के लिए अमेरिका से मदद मांगी है. यह अनुरोध अमेरिकी न्याय विभाग को भेजा गया है. किसान आंदोलन के तार खालिस्तानी गुटों से जुड़े होने के आरोपों को लेकर विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को यह जानकारी दी. अमेरिका ने कृषि सुधारों को लेकर भारत द्वारा उठाए गए कदमों को स्वीकार किया है.
विदेश मंत्रालय ने कहा कि ऐतिहासिक लाल किले पर हिंसा और तोड़फोड़ को लेकर भारत में वैसे भावनाएं सामने आईं, जैसे कि 6 जनवरी को अमेरिकी संसद कैपिटल हिल पर हुई घटना को लेकर. इन मामलों में स्थानीय कानूनों के अनुसार निपटा जा रहा है.
किसान आंदोलन पर केंद्र के ‘‘असंवेदनशील'' रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए राकांपा प्रमुख और पूर्व कृषि मंत्री शरद पवार ने कहा कि अगर किसानों ने प्रदर्शन का शांतिपूर्ण रास्ता छोड़ दिया, तो देश में बड़ा संकट पैदा हो जाएगा और भाजपा सरकार इसके लिए जिम्मेदार होगी. बहुस्तरीय बैरिकैड और कंटीले तार लगाने तथा सड़कों पर कीलें ठोंके जाने को लेकर उन्होंने सरकार की आलोचना की और दावा किया कि ऐसा तो अंग्रेजों के शासन के दौरान भी नहीं हुआ.
दस विपक्षी राजनीतिक दलों के सांसदों ने किसान आंदोलन को लेकर गुरुवार को लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखा. सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को लिखे पत्र में कहा है कि गाज़ीपुर बॉर्डर पर स्थिति भारत-पाकिस्तान सीमा जैसी है और किसानों की स्थिति जेल के कैदियों जैसी है.
केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन को अंतरराष्ट्रीय हस्तियों से मिल रहे समर्थन के बारे में पूछे जाने पर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के नेता राकेश टिकैत ने अपने ही अंदाज में कहा,
‘‘ मुझे क्या पता, करा होगा, मैं क्यों उन्हें जानू.'' पश्चिम उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के रहने वाले टिकैत ने हालांकि, रिहाना, ग्रेटा थनबर्ग सहित अंतरराष्ट्रीय कलाकारों एवं कार्यकर्ताओं द्वारा उनके आंदोलन को समर्थन देने का स्वागत किया लेकिन साथ ही कहा कि वह उन्हें नहीं जानते.
पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन की दिशा में काम करने वाली ग्रेटा थनबर्ग (Greta Thunberg) खिलाफ दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज की. कृषि कानूनों को लेकर स्‍वीडिश मूल की ग्रेटा की ओर से किए गए ट्वीट को लेकर यह एफआईआर दर्ज की गई है. दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने सेक्शन 153A और 120B के तहत यह केस दर्ज किया है. बता दें कि ग्रेटा ने केन्द्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के प्रदर्शनों के प्रति समर्थन व्यक्त किया था.
भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के एक अधिकारी ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने किसान नेता राकेश टिकैत के नाम से फर्जी फेसबुक पेज बनाया है और उस पर आपत्तिजनक तस्वीरें पोस्ट कर रहे हैं. बीकेयू के प्रेस प्रकोष्ठ के प्रभारी शमशेर राणा ने पीटीआई-भाषा को बताया कि शिकायत और पेज के स्क्रीनशॉट को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में कौशंबी थाने के अधिकारियों को भेजा गया है. उन्होंने कहा कि एक परिचित ने टिकैत की फर्जी आईडी के बारे में जानकारी दी.
किसान संगठनों ने 6 फरवरी यानी शनिवार को चक्का जाम करने का ऐलान किया है. किसान नेताओं की कोशिश है कि गणतंत्र दिवस को हिंसा की घटनाओं से धूमिल हुई आंदोलन की छवि को दोबारा मजबूत किया जाए.
चक्का जाम के संबंध में भारतीय किसान यूनियन (दोआबा) के अध्यक्ष मंजीत सिंह राय ने कहा कि 'हमने 6 तारीख़ को चक्का जाम का ऐलान किया है. दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक चक्का जाम रहेगा. हम इस चक्का जाम से दिखाना चाहते हैं कि पूरे देश के किसान एक हैं. पूरा देश किसानों के साथ हैं. हमें सरकार को अपनी ताकत दिखानी है.'

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