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क्या है BECA, जानें चीन-PAK के मामले में भारत के लिए कैसे साबित हो सकता है कारगर, 10 बड़ी बातें

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नई दिल्ली / शौर्यपथ / भारत और अमेरिका ने टू प्लस टू मंत्रीस्तरीय वार्ता के दौरान आज रक्षा क्षेत्र में कई प्रमुख समझौतों पर हस्ताक्षर किए. इनमें एक समझौता है BECA (बुनियादी विनिमय और सहयोग समझौता). बीईसीए या बुनियादी विनिमय और सहयोग समझौता भारत को अमेरिकी सैन्य उपग्रहों से रियल टाइम आधार पर महत्वपूर्ण डेटा और स्थलाकृतिक तस्वीरों तक पहुंचने में सक्षम बनाएगा. अमेरिकी रक्षा मंत्री मार्क एस्पर और विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ तीसरी मंत्रिस्तरीय 'टू प्लस टू' वार्ता के लिए सोमवार को दो दिवसीय यात्रा पर भारत पहुंचे.
मामले से जुड़ी अहम जानकारियां :
BECA करार अमेरिका का भारत के साथ चौथा और अंतिम "मूलभूत" समझौता है. यह समझौता सूचनाओं के आदान-प्रदान की दिशा में नया आयाम स्थापित करेगा.
दोनों देशों ने सैन्य साजो-सामान और सुरक्षित संचार के आदान-प्रदान के लिए जनरल सिक्योरिटी ऑफ मिलिट्री इंफॉर्मेशन एग्रीमेंट (2002), लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (2016), कम्युनिकेशन कम्पेटिबिलिटी एंड सिक्योरिटी एग्रीमेंट (2018) पर पहले ही हस्ताक्षर किए हुए हैं.
बुनियादी विनिमय और सहयोग समझौता (बीईसीए) भारत को क्लासीफाइड भू-स्थानिक डेटा के साथ-साथ सैन्य एप्लीकेशंस से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी तक पहुंच प्रदान करेगा.
बीईसीए समझौते के तहत, दोनों देश मैप, नॉटिकल एवं एरोनॉटिकल चार्ट, वाणिज्यिक एवं अन्य अनक्लासिफाइड तस्वीर, भूभौतिकी, भू-चुंबकीय और गुरुत्वाकर्षण से जुड़े डेटा एक-दूसरे के साथ साझा कर सकते हैं.
BECA करार से अमेरिका अपने सैन्य सैटेलाइट के जरिये संवेदनशील भौगोलिक क्षेत्रों की अहम सूचनाएं और डेटा तुरंत ही भारत से साझा कर पाएगा.
साथ ही भारत हिंद महासागर में चीनी युद्धपोतों की गतिविधियों पर बरीकी से नजर रखने में सक्षम होगा.
पाकिस्तान के मामले में, अगर फिर कभी बालाकोट की तरह सर्जिकल स्ट्राइक की जाती है तो भारत अपनी टारगेट की सफलता को सत्यापित करने के लिए अमेरिका से उपग्रह और अन्य डेटा का उपयोग कर सकेगा.
एक बयान में सरकार ने कहा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनके अमेरिकी समकक्ष मिस्टर एस्पर ने संतोष व्यक्त किया कि इस यात्रा के दौरान BECA पर हस्ताक्षर किए जाएंगे और साथ ही दोनों देशों के सशस्त्र बलों के बीच घनिष्ठ जुड़ाव भी होगा.
यूपीए सरकार भारत की क्लासीफाइड लैब तक पहुंच और गोपनीय सूचनाओं की सुरक्षा को लेकर BECA पर चिंता जता चुकी है.
यह भारत औऱ अमेरिका के बीच टू प्लस टू स्तर के तीसरे चरण की वार्ता है. टू प्लस टू के तहत दोनों देशों के विदेश मंत्रियों और रक्षा मंत्रियों के बीच रणनीतिक मुद्दों पर वार्ता होती है.

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