केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास आठवले ने किया सम्मानित, बोले— "यह सम्मान पूरे समाज का है"
दुर्ग। मेघगंगा ग्रुप के चेयरमैन मनीष पारख को सामाजिक सेवा, जनकल्याण और सामाजिक दायित्वों के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया। यह सम्मान भारत सरकार के केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री Ramdas Athawale द्वारा प्रदान किया गया।
दुर्ग जिले के सफल उद्यमी के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुके मनीष पारख ने व्यापारिक उपलब्धियों के साथ-साथ सामाजिक उत्तरदायित्व को भी अपनी प्राथमिकता बनाया है। उन्होंने अपने पिता से मिली सेवा, संस्कार और समाज के प्रति समर्पण की प्रेरणा को आगे बढ़ाते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, साइबर जागरूकता और सामाजिक विकास के अनेक क्षेत्रों में लगातार कार्य किया है।
सम्मान प्राप्त करने के बाद मनीष पारख ने कहा, "डॉक्टरेट की इस उपाधि के लिए मैं आप सभी के सहयोग, विश्वास और स्नेह के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। यह सम्मान मुझे समाज की सेवा के लिए और अधिक प्रेरित करेगा।"
सामाजिक सरोकारों में उल्लेखनीय योगदान
मनीष पारख के नेतृत्व में विभिन्न जनहितकारी पहलें संचालित की गई हैं, जिनमें प्रमुख रूप से—
लाइफकेयर डायग्नोस्टिक्स (NABL मान्यता प्राप्त) के माध्यम से नियमित निःशुल्क चिकित्सा शिविरों का आयोजन।
पिछले 7 वर्षों से निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा का सतत संचालन।
आम नागरिकों में नियमित स्वास्थ्य जांच की संस्कृति विकसित करने के लिए हेल्थ कार्ड योजना की शुरुआत।
युवाओं के कौशल विकास हेतु विशेष स्किल डेवलपमेंट एवं डिग्री प्रोग्राम का संचालन।
"मोर शहर, मोर जिम्मेदारी" अभियान के अंतर्गत दुर्ग के गांधी चौक, शहीद चौक, वाई-शेप ब्रिज चौक एवं कचहरी चौक सहित कई प्रमुख स्थलों के सौंदर्यीकरण एवं निर्माण कार्य में योगदान।
शहर की यातायात व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए पुलिस विभाग को ट्रैफिक बैरिकेड्स उपलब्ध कराना।
महावीर स्कूल के अध्यक्ष के रूप में विद्यालय के जीर्णोद्धार, आधुनिक शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देना।
दुर्ग पुलिस एवं तत्कालीन रेंज आईजी राम गोपाल गर्ग के साथ मिलकर "साइबर प्रहरी" अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए साइबर अपराध के प्रति व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाना।
मनीष पारख को मिला यह सम्मान न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि उद्योग जगत से जुड़े लोग यदि सामाजिक दायित्वों को प्राथमिकता दें, तो समाज में सकारात्मक और स्थायी परिवर्तन संभव है। यह उपलब्धि दुर्ग जिले के लिए भी गर्व का विषय मानी जा रही है।