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भिलाई भाजपा में 'अपनों' की जंग: जब पार्षद संतोष मौर्या का माइक हुआ बंद, तो उधड़ गई एकजुटता की कलई!

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भिलाई: नगर पालिक निगम भिलाई के चुनाव की आहट जैसे-जैसे करीब आ रही है, वैसे-वैसे सत्ताधारी दल पर हमलावर होने के बजाय भाजपा के भीतर की 'अंदरूनी खींचतान' सड़कों पर नुमाया होने लगी है। सोमवार, 4 मई को निगम के सामने हुए जंगी प्रदर्शन में जो कुछ भी हुआ, उसने भिलाई भाजपा के भीतर पनप रही गुटबाजी और 'वर्चस्व की जंग' को सार्वजनिक कर दिया है।

कमिश्नर का नाम लेते ही 'खामोश' हुआ माइक

प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य महापौर नीरज पाल और कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार को घेरना था, लेकिन सारा फोकस तब बदल गया जब भाजपा पार्षद संतोष मौर्या ने निगम कमिश्नर राजीव कुमार पांडेय पर निशाना साधा। हैरानी की बात यह रही कि किसी विरोधी दल ने नहीं, बल्कि अपनी ही पार्टी के एक विशेष नेता के निर्देश पर मौर्या का माइक बंद कर दिया गया।

यह घटना केवल एक माइक बंद होने की नहीं, बल्कि उस 'अदृश्य अंकुश' की ओर इशारा करती है, जो भाजपा के कुछ नेताओं का अधिकारियों के प्रति नरम रुख और अपने ही पार्षदों के प्रति कठोर नियंत्रण को दर्शाता है।

मीडिया को देख डैमेज कंट्रोल की कोशिश

जब जिलाध्यक्ष को इस बात का अहसास हुआ कि मीडिया के कैमरे इस पूरे घटनाक्रम को रिकॉर्ड कर रहे हैं और पार्टी की किरकिरी हो रही है, तब आनन-फानन में संतोष मौर्या को वापस बुलाया गया। हालांकि, तब तक तीर कमान से निकल चुका था। मंच पर ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच का विरोधाभास और गुटबाजी का आलम साफ नजर आ रहा था।

पीयूष मिश्रा का कड़ा रुख और अंदरूनी अंतर्विरोध

एक तरफ संतोष मौर्या का माइक बंद किया गया, तो दूसरी तरफ भाजपा पार्षद पीयूष मिश्रा ने भी कमिश्नर पर सीधा हमला बोला। एक ही मंच पर एक ही अधिकारी के खिलाफ दो पार्षदों के लिए अलग-अलग पैमाना होना यह बताता है कि भिलाई भाजपा में 'पावर सेंटर' बंटे हुए हैं।

संगठन में 'वर्चस्व' की पुरानी बीमारी

यह पहली बार नहीं है जब भिलाई में भाजपा के भीतर गुटबाजी दिखी हो। हाल ही में:

BJYM नियुक्तियां: BJYM के ब्लॉक अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर जिलाध्यक्ष और मंडल अध्यक्ष के बीच का टकराव अभी ठंडा भी नहीं हुआ था।

निकाय चुनाव का खतरा: आने वाले कुछ महीनों में भिलाई निगम के चुनाव होने वाले हैं। यदि गुटबाजी इसी तरह हावी रही, तो टिकट वितरण के समय 'गहमागहमी' और 'भितरघात' की संभावनाएं प्रबल हो जाएंगी।

निष्कर्ष: कांग्रेस से पहले अपनों से लड़ना होगा!

भिलाई में भाजपा के लिए यह आत्ममंथन का समय है। एक तरफ पार्टी भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जंगी प्रदर्शन' का दावा कर रही है, तो दूसरी तरफ मंच पर ही अपनों की आवाज दबाई जा रही है। अगर नेतृत्व ने समय रहते इन 'गुटों' को एक सूत्र में नहीं पिरोया, तो निकाय चुनाव में कांग्रेस के भ्रष्टाचार से ज्यादा भाजपा की यह अंदरूनी 'जंग' उस पर भारी पड़ सकती है।

राजनीतिक गलियारों का बड़ा सवाल: > "क्या भिलाई भाजपा के कुछ नेता पर्दे के पीछे से अधिकारियों को बचा रहे हैं, या फिर यह केवल अपनी ही पार्टी के भीतर एक-दूसरे को नीचा दिखाने का खेल है?"

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