कोण्डागांव / शौर्यपथ /
कहते हैं कि मनुष्य की आंखें भगवान के द्वारा मनुष्यों को दिये गये सबसे अनमोल उपहारों में से एक है। आंखों से ही हम इस दुनिया का अनुभव कर पाते हैं परंतु कुछ लोग को जन्म से या किसी दुर्घटनावश अपनी आंखों से इस दुनिया को देखने में असक्षम हो जाते हैं। ऐसे में उनकी जिंदगीयों में दोबारा रौशनी लाने नेत्रदान अभियान चलाया जाता है। इन अभियानों से प्रेरित होकर बड़ेराजपुर विकासखण्ड के ग्राम सलना निवासी शोभाराम पटेल ने भी कुछ वर्षों पहले नेत्रदान का संकल्प लेते हुए अपने परिवारजनों को अपने निर्णय के संबंध में बताया था।
शोभाराम की 29 मई को निधन होने पर परिवार की सूचना पर नेत्रदान संग्रहण केन्द्र कोण्डागांव द्वारा दल गठित कर त्वरित कार्यवाही करते हुए रात्रि 11.00 बजे सलना के दानीपारा स्थित उनके निवास पहुंचे। जहां नेत्र सहायक अधिकारी अनिल बैध, सीएचसी विश्रामपुरी के डॉ. दुर्गा दास, डीपीएम कमल गिलहर, पीएचसी चिपावण्ड के अशोक कश्यप, पीएचसी सलना के महावीर मरकाम सहित स्टॉफ नर्स नंदा शील एवं आरती महानंद द्वारा नेत्रदान हेतु आवश्यक कार्यवाही की गई। जिसके पश्चात् संग्रहित नेत्र को रात्रि 11.30 बजे ही पं0 जवाहर लाल नेहरू मेमोरियल मेडिकल कॉलेज रायपुर स्थित नेत्र बैंक में भेज दिया गया। जहां से नेत्रहीनों को नया जीवन देने हेतु आंखों को लगाया जायेगा।
इसके संबंध में नेत्र सहायक अधिकारी के पद पर जिला बस्तर में कार्यरत् पुत्र दयानंद पटेल ने बताया कि नेत्रदान अभियान के संबंध में मेरे पिता द्वारा मुझसे जानकारी पाकर जीवित रहते हुए नेत्रदान की घोषणा की थी। उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए पिता का वृद्धावस्था के कारण निधन होने पर नेत्रदान संग्रहण केन्द्र कोण्डागांव को सूचना दी गई थी। जिसपर नेत्रदान दल द्वारा रात को ही घर पहुंच नेत्रदान हेतु कॉर्निया को संग्रहित कर लिया गया था। इसके आगे दयानंद ने कहा कि उनके पिता ने अपने जाने के बाद भी अंधेरी जिंदगीयों में रौशनी भर कर उन्हें नया जीवन देने का कार्य किया है। जिसपर उन्हें गर्व है। उन्होंने अन्य लोगों को भी नेत्रदान करने की अपील की।
इसके संबंध में नेत्र सहायक अधिकारी एवं सहायक नोडल अधिकारी अनिल बैध ने बताया कि कोण्डागांव में नेत्रदान संग्रहण केन्द्र स्थापित किया गया है। जिसके पश्चात् यह पहला अवसर था जब सीएचएचओ डॉ0 टीआर कुंवर, सिविल सर्जन डॉ0 संजय बसाख एवं नेत्र विशेषज्ञ डॉ कल्पना मीणा, अंधत्व निवारण नोडल डॉ0 हरेन्द्र बघेल के मार्गदर्शन में जिला अस्पताल द्वारा नेत्रदान की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए राज्य के एकमात्र शासकीय नेत्र बैंक रायपुर भेजा जा सका है। नेत्रदान को महादान की उपाधि दी जाती है क्योंकि इससे दूसरों को जीने की उम्मीद प्राप्त होती है। उन्होंने लोगों को नेत्रदान के प्रति प्रेरित करते हुए बताया कि व्यक्ति की मृत्यु उपरांत 06 घण्टे तक आंखों को दान किया जा सकता है। नेत्रदान में केवल 10 से 15 मिनट का वक्त लगता है एवं इससे शरीर को किसी प्रकार की हानि नही होती न ही किसी सामाजिक मान्यता को प्रभाव पड़ता है। बल्कि एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो लोगों की जिंदगी को रौशनी एवं उनके परिवारों को खुशियां प्राप्त होती है।