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रामगढ़ महोत्सव में संस्कृति का अनुपम उत्सव: रामलीला, ‘जटायु मोक्ष’ और कवि सम्मेलन ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

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रायपुर/सरगुजा ।
सरगुजा अंचल की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को समर्पित दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव-2026 के प्रथम दिवस पर संस्कृति, साहित्य और लोककला का भव्य संगम देखने को मिला। नई दिल्ली के कलाकारों की प्रभावशाली रामलीला, कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत भावपूर्ण ‘जटायु मोक्ष’ नृत्य-नाटिका तथा ओजपूर्ण कवि सम्मेलन ने दर्शकों को देर तक बांधे रखा।

रामलीला ने कराया त्रेतायुग का सजीव अनुभव

नई दिल्ली से आए कलाकारों ने भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों का प्रभावशाली मंचन किया। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्श जीवन, धर्म, सत्य, त्याग और कर्तव्यपरायणता को आकर्षक वेशभूषा, प्रभावी संवाद, भव्य मंच सज्जा और मधुर संगीत के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुति के दौरान पूरा परिसर तालियों की गूंज से गूंजता रहा।

‘जटायु मोक्ष’ की प्रस्तुति ने किया भावविभोर

कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, उदयपुर की छात्राओं ने ‘जटायु मोक्ष’ पर आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत कर दर्शकों को भावुक कर दिया। भगवान श्रीराम और जटायु के प्रसंग को संवेदनशील अभिनय, पारंपरिक वेशभूषा, सुमधुर संगीत और प्रभावशाली नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुति के बाद सभागार देर तक तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा।

कवि सम्मेलन में गूंजी राष्ट्रभक्ति और सामाजिक सरोकार

महोत्सव के प्रमुख आकर्षणों में शामिल कवि सम्मेलन में प्रतिष्ठित कवियों ने ओज, वीर रस, श्रृंगार, हास्य-व्यंग्य और समसामयिक विषयों पर आधारित रचनाओं का पाठ किया। राष्ट्रभक्ति, भारतीय संस्कृति, सामाजिक सरोकार और मानवीय मूल्यों पर आधारित कविताओं ने श्रोताओं को प्रभावित किया, जबकि हास्य-व्यंग्य की प्रस्तुतियों ने माहौल को आनंदमय बना दिया।

लोक संस्कृति की भी दिखी शानदार झलक

कार्यक्रम में सरगुजिहा लोकनृत्य, करमा नृत्य, लोकगीत, स्वागत गीत और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। स्थानीय और क्षेत्रीय कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से सरगुजा की समृद्ध लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत परिचय दिया।

आयोजकों के अनुसार, रामगढ़ महोत्सव का उद्देश्य सरगुजा की ऐतिहासिक धरोहर, सांस्कृतिक विरासत और साहित्यिक परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाना तथा नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध संस्कृति से जोड़ना है। प्रथम दिवस के विविध कार्यक्रमों ने इस उद्देश्य को प्रभावी ढंग से साकार किया।

मुख्य आकर्षण
नई दिल्ली के कलाकारों द्वारा भव्य रामलीला का मंचन।
कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की छात्राओं की भावपूर्ण ‘जटायु मोक्ष’ नृत्य-नाटिका।
प्रतिष्ठित कवियों का ओजपूर्ण कवि सम्मेलन।
सरगुजिहा लोकनृत्य, करमा नृत्य और लोकगीतों की मनमोहक प्रस्तुतियां।
संस्कृति, साहित्य और लोककला के माध्यम से सरगुजा की समृद्ध विरासत का प्रभावशाली प्रदर्शन।

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