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राज्यसभा चुनाव: छत्तीसगढ़ से भाजपा ने लक्ष्मी वर्मा तो कांग्रेस ने फूलो देवी नेताम पर जताया भरोसा, 9 अप्रैल को होगा मतदान

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राज्यसभा चुनाव: छत्तीसगढ़ से भाजपा ने लक्ष्मी वर्मा तो कांग्रेस ने फूलो देवी नेताम पर जताया भरोसा, 9 अप्रैल को होगा मतदान

दुर्ग/रायपुर। आगामी 9 अप्रैल को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए छत्तीसगढ़ की राजनीति में सरगर्मी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी ओर से लक्ष्मी वर्मा को उम्मीदवार बनाया है, वहीं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (कांग्रेस) ने अपनी वर्तमान सांसद फूलो देवी नेताम को एक बार फिर मैदान में उतारते हुए उन पर भरोसा जताया है। दोनों दलों की ओर से घोषित इन नामों के साथ राज्यसभा चुनाव का राजनीतिक समीकरण लगभग स्पष्ट माना जा रहा है।

भाजपा की उम्मीदवार लक्ष्मी वर्मा: संगठन और सामाजिक समीकरण का संतुलन

भाजपा ने छत्तीसगढ़ से खाली हो रही दो राज्यसभा सीटों में से एक के लिए लक्ष्मी वर्मा के नाम की घोषणा की है। लक्ष्मी वर्मा वर्तमान में छत्तीसगढ़ भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष हैं और पूर्व में छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य भी रह चुकी हैं।

राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से उनका चयन भाजपा की रणनीतिक सोच को भी दर्शाता है। लक्ष्मी वर्मा कुर्मी समाज (ओबीसी वर्ग) से आती हैं, जिसे प्रदेश में एक प्रभावशाली सामाजिक वर्ग माना जाता है। पार्टी के इस निर्णय को ओबीसी वर्ग और महिला मतदाताओं यानी “मातृ शक्ति” को संदेश देने के रूप में देखा जा रहा है।

राजनीतिक अनुभव की बात करें तो लक्ष्मी वर्मा रायपुर जिला पंचायत की पूर्व अध्यक्ष रह चुकी हैं और लंबे समय से संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते हुए भाजपा के विभिन्न कार्यक्रमों और अभियानों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाती रही हैं।

कांग्रेस ने फूलो देवी नेताम पर दोबारा जताया भरोसा

वहीं कांग्रेस ने अपनी मौजूदा राज्यसभा सांसद फूलो देवी नेताम को दूसरी बार उम्मीदवार बनाकर उन पर भरोसा दोहराया है। फूलो देवी नेताम का वर्तमान राज्यसभा कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रहा है।

फूलो देवी नेताम छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र से आती हैं और कांग्रेस की ओर से एक प्रमुख आदिवासी महिला चेहरा मानी जाती हैं। उन्होंने वर्ष 1994 में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी और इसके बाद उन्होंने संगठन व जनप्रतिनिधि के रूप में कई जिम्मेदारियां निभाईं।

वह छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं और पूर्व में विधायक के रूप में भी अपनी भूमिका निभा चुकी हैं। आदिवासी समाज और महिला नेतृत्व के प्रतिनिधित्व के लिहाज से कांग्रेस का यह निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राज्यसभा चुनाव का गणित लगभग स्पष्ट

छत्तीसगढ़ से राज्यसभा की दो सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें के.टी.एस. तुलसी और फूलो देवी नेताम का कार्यकाल समाप्त हो रहा है।

90 सदस्यीय छत्तीसगढ़ विधानसभा में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कम से कम 31 प्रथम वरीयता मतों की आवश्यकता होती है। वर्तमान में विधानसभा में भाजपा के 54 विधायक और कांग्रेस के 35 विधायक हैं। इस संख्या बल को देखते हुए राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दोनों प्रमुख दलों का एक-एक सीट जीतना लगभग तय माना जा रहा है।

राजनीतिक संदेश भी अहम

राजनीतिक जानकारों के अनुसार इस बार के उम्मीदवार चयन में दोनों दलों ने सामाजिक प्रतिनिधित्व और क्षेत्रीय संतुलन को प्राथमिकता दी है। भाजपा ने ओबीसी महिला नेतृत्व को आगे बढ़ाने का संकेत दिया है, वहीं कांग्रेस ने आदिवासी महिला नेतृत्व को पुनः राज्यसभा में भेजने का निर्णय लिया है।

ऐसे में 9 अप्रैल को होने वाला राज्यसभा चुनाव भले ही गणितीय रूप से लगभग तय दिखाई दे रहा हो, लेकिन सामाजिक और राजनीतिक संदेश के लिहाज से यह चुनाव प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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