पटना। शौर्यपथ । :अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के बाद अब क्या बिहार की धरती पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक विशाल मंदिर बनने जा रहा है? बीते कुछ दिनों से गलियारों में यह खबर तेजी से तैर रही है कि करीब 112 करोड़ रुपये की लागत से पीएम मोदी का एक भव्य मंदिर तैयार किया जाएगा, जिसमें उनकी 'श्रीराम अवतार' जैसी सोने की मूर्ति स्थापित होगी। इस खबर ने सियासी और सामाजिक हलकों में हलचल तेज कर दी है। लेकिन क्या वाकई जमीन पर ऐसा कोई मंदिर बनने जा रहा है, या यह सिर्फ एक सियासी शिगूफा है? आइए जानते हैं इस पूरे मामले का असली सच।
? सस्पेंस से उठा पर्दा: कहाँ से आया यह अनोखा आइडिया?
इस पूरे मामले के पीछे कोई धार्मिक संस्था या मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टी नहीं है। दरअसल, यह चौंकाने वाला प्रस्ताव बिहार राज्य किन्नर कल्याण बोर्ड (Bihar State Transgender Welfare Board) की एक आंतरिक बैठक से निकलकर सामने आया है। बोर्ड के सदस्य डॉ. राजन सिंह ने देश के प्रति पीएम मोदी के योगदान को देखते हुए पटना में उनके नाम पर 5 एकड़ के परिसर में एक भव्य मंदिर और 'श्रीराम' रूपी स्वर्ण प्रतिमा बनाने की इच्छा जताई है।
?️ क्या है 'आधिकारिक सच' और कानूनी पेंच?
भले ही इस खबर को लेकर सोशल मीडिया और गलियारों में भारी उत्साह या चर्चा देखी जा रही हो, लेकिन कागजी और कानूनी हकीकत इससे कोसों दूर है:सिर्फ एक विभागीय इच्छा: यह प्रस्ताव केवल एक सलाहकार बोर्ड की बैठक में पारित हुआ है। यह बोर्ड बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग के तहत आता है।
कैबिनेट की मंजूरी बाकी: किसी भी बोर्ड के प्रस्ताव को हकीकत बनने के लिए राज्य सरकार के कैबिनेट सचिवालय विभाग की अंतिम मुहर की जरूरत होती है, जो कि अभी तक नहीं मिली है।
बजट और जमीन पर सस्पेंस: बोर्ड ने सरकार से 5 एकड़ जमीन और 112 करोड़ रुपये के फंड की मांग की है। लेकिन आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, बिहार सरकार या कैबिनेट ने इस भारी-भरकम बजट या जमीन आवंटन को लेकर कोई भी आधिकारिक या कानूनी स्वीकृति जारी नहीं की है।
? निष्कर्ष: मंदिर या सिर्फ एक प्रस्ताव?अंतिम सच यही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर मंदिर बनाने की यह योजना अभी सिर्फ फाइलों और शुरुआती चर्चाओं तक ही सीमित है। जब तक बिहार कैबिनेट इस पर कोई बड़ा फैसला नहीं लेती, तब तक इसे केवल एक 'प्रस्ताव' ही माना जाएगा, किसी मंदिर के निर्माण की शुरुआत नहीं।