शौर्य की बातें / आपदा में अवसर का मतलब आज हर कोई धन कमाने के बारे में सोंचने लगता है किन्तु जगदलपुर के इस चिकित्सक ने आपदा में अवसर मानव सेवा के रूप में अर्जित किया है . बहुत ही कम सुनने में आया कि कोई चिकित्सक इस समय मुफ्त में कार्य कर रहा हो , डॉक्टर अपनी गरिमा का ध्यान रख कर कुछ गरीब लोगों का इलाज़ फ्री कर देंगे तो शायद कुछ लोगों का जीवन बचाया जा सकेगा। भगवान का नाम बाद में पहले डॉक्टर याद आता है शारीरिक पीड़ा होने पर भगवान् से पहले कोई याद आता है तो वो चिकित्सक ही होता है इंसान बड़ी उम्मीद के साथ उसके पास
उसका केवल यह कहना कि चिन्ता की कोई बात नहीं मन को सुकून मिल जाता है आधी बीमारी भाग जाती है . प्रसव से लेकर मृत्यु तक साथ निभाने वाला ,नन्हें दूधमुँहे बच्चे को भी उसके इलाज पर छोड़कर निश्चिंत यहां सब कोई बराबर होता है न कोई अमीर न कोई गरीब न जात- पात न धर्म का बंधन अपनी जीवन की डोर उस पर सौंपते हैं .रात हो या दिन हर वक्त इलाज को तत्पर दंगा-फ़साद हो या दुर्घटना लाइलाज बीमारी हो या सर्दी-जुखाम वह भी अपनी पूरी ताकत और ज्ञान के साथ अगर अच्छा हो जाए तो तमाम दुआएं मिलती है .हर शख्स धन्यवाद देता है चेहरे खिल उठते हैं पर अगर वह सफल न हुआ तो तोड़-फोड़ शुरु हो जाती है .वह ईश्वर तो नहीं है वह भी जब ऑपरेशन करता होगा
तो कामना करता होगा कि उसके हाथ कांपें नहीं तभी तो कहता है ऑपरेशन सफ़ल है आगे ऊपर वाले के हाथ में है जीवन बचाने वाले का धन्यवाद तो करना ही चाहिए कोशिश तो की .डॉक्टर का सम्मान करना सभी की जिम्मेदारी है आखऱि उसके भरोसे तो हम हैं ऊपर वाला तो नहीं आ सकता तभी तो उसने अपने प्रतिनिधि के रूप में उसे भेजा है .
एक ऐसे ही चिकित्सक है जगदालपुर निवासी डॉ. भंवर शर्मा जिन्होंने इस आपदा के समय मोबाइल द्वारा निशुल्क परामर्श देने की पहल की और आम जनता से अपील की कि जो भी होम आइसोलेशन में है वो निर्धारित समय में स्वास्थ्य सम्बन्धी परामर्श ले सकते है . डॉक्टर भंवर शर्मा के विषय में जिन्होंने मानव सेवा में अपना 10 वर्ष लगा दिया तथा मरीजों का साथ कभी फीस के कारण नहीं छोड़ा अपनी सामथ्र्य अनुसार हर संभव मदद की धन्य हैं ऐसे डॉक्टर, यदि मैं डॉक्टर होता तो मैं भी ऐसा करने का प्रयत्न करता.
नरेन्द्र भवानी के कलम से - संभाग प्रमुख ( जगदलपुर - दैनिक शौर्यपथ समाचार )