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सेवा के बदले नाम यही है आज के दुनिया की रीत

  • rounak group

शौर्यपथ नजरिया / ऑक्सीजन सिलेंडर पर गुजरात के नेताजी ने अपनी फोटो क्या लगाई बवाल मच गया है। इसकी आलोचना के साथ लोग तरह-तरह की टिप्पणियां कर रहे है। किंतु इस पर मेरा अपना एक नज़रिया है। मेरा मानना है कि कोई अपने जेब के पैसे खर्च कर सेवा कर रहा है तो सेवा का महत्व होना चाहिए। 200 बिस्तरों का कोविड अस्पताल बनाना और मरीजों को सिलेंडर उपलब्ध कराना कोई छोटा काम नही है। ऐसे में अगर वो पैसे खर्च कर नेम और फेम चाहता है तो इसमें गलत क्या है। यहा तो ऐसे भी है जो भ्रष्टाचार से करोड़ों-अरबों कमाकर भी आज के इस बुरे दौर में घर के भीतर दुबके बैठे है। मित्रों, मोदी जी हो या भुपेश बघेल जी किस सरकारी योजना में इनकी फोटो नही है यह बताइये? हमने तो मोबाइल बस्ते,राशनकार्ड तक में कभी रमन सिंह जी फिर भुपेश बघेल जी की फोटो देखी है।
इतना सब तर्क करने के पीछे मेरा यही मकसद है कि सेवा में लगे किसी व्यक्ति की आलोचना नही होनी चाहिए। अगर नाम और सम्मान के मकसद से ही सही अगर कोई जरूरतमंदों की मदद कर रहा है तो उसे सराहे। एक बात और ध्यान रखना चाहिए कि हमारे देश का सरकारी सिस्टम कोरोना से लड़ाई में बेहद कमजोर है। आज जो भी बेहतर स्थिति बन रही है उसके पीछे कही न कही विभिन्न सामाजिक संस्थाओं, स्वयंसेवी लोगों का अमूल्य योगदान है। ऐसे में उनसे जुड़े किसी तुच्छ विषय को अगर कोई बहस का मुद्दा बनाता है तो निश्चित ही वे हतोत्साहित होंगे। यह मेरी सोंच है, इस मुद्दे पर आपकी राय क्या है बताये?
( देवेन्द्र गुप्ता के फेसबुक वाल से )

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