दुर्ग / शौर्यपथ / प्रदेश में कांग्रेस की सरकार , दुर्ग विधान सभा में कांग्रेस के विधायक , दुर्ग निगम में कांग्रेस की सरकार होने के बाद भी अगर दुर्ग विधायक और महापौर अपने प्रशासनिक अधिकारियों की शिकायत लेकर जायेंगे तो क्या समस्या का हल निकल जाएगा क्या दुर्ग में जो आपदा आयी है वो कम हो जायेगी . दुर्ग इस समय विकट परिस्थितियों में जी रहा है . आम जनता दो वक्त के अच्छे भोजन के लिए तरस रही है बावजूद इसके जिला प्रशासन के साथ है . आये दिन निजी अस्पतालों की मनमानी , दवाइयों की कमी , बेड की कमी , शमशान घाट में अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी की कमी , स्थान की कमी , घर में पौष्टिक भोजन का अभाव , इलाज के अभाव में मौत के आंकड़ो का लगातार बढ़ना इन सब विपरीत स्थिति के बाद भी दुर्ग जिला प्रशासन अपने जिलाधिकारी के आदेश का पालन करते हुए २४ घंटे कार्यरत है . आज की तारीख में हर शासकीय कर्मचारी २४ घंटे की ड्यूटी में है कभी भी किसी भी समय कार्य के लिए बुलाने का आदेश हो रहा है . इस विषम परिस्थिति में जिला प्रशासन के हर अधिकारी कोरोना से जंग लड़ने की कोशिश कर रहे है , सामजिक संस्थाए अपने अपने स्तर पर मदद कर रही है , ऐसी ही कुछ सामजिक संस्थाओ ने निगम के द्वारा गरीबो को निःशुल्क भोजन उपलब्ध करा रहा है , अस्पतालों में साईं प्रसाद द्वारा निःशुल्क भोजन तो जन समर्पण समिति के सदस्यों द्वारा रेलवे स्टेशन में गरीबो को निर्बाध भोजन की व्यवस्था कराने में लगा है .
ये सही है कि स्थिति काबू से बाहर हो रही है बावजूद इसके दुर्ग जिलाधीश डॉ. नरेन्द्र भूरे लगातार कोशिश कर रहे है कि हर ज़रूरतमंद को समय से इलाज मिले इसके लिए निरंतर नए नए कदम उठा रहे है . निजी अस्पताल सहित शासकीय व शासन के अधिकृत अस्पताल में सभी श्रेणी के बेड बढाने की कवायद कर रहे है . स्वास्थ्यकर्मी अपनी जान की परवाह किये बिना सेवा दे रहे है . हालाँकि ऐसे समय में कुछ निजी नर्सिंग होम के संचालको द्वारा मरीजो के परिजनों से मनमानी शुल्क लेने की भी शिकायत मिल रही है जिस पर प्रशासन कार्यवाही भी कर रहा है , दवाइयों की कालाबाजारी रोकने नित नए नए कदम उठाये जा रहे है . सीमित संसाधनों के बाद भी सुविधाओ का विस्तार किया जा रहा है .
ऐसे विपत्ति के समय दुर्ग को हमर दुर्ग कहने वाले विधायक अरुण वोरा और उनके द्वारा दुर्ग निगम में चुने गए महापौर धीरज बाकलीवाल द्वारा जिला प्रशासन की शिकायत प्रदेश के मुख्यमंत्री से करना कहा तक उचित है . शिकायत करना नहीं करना उनका स्वाधिकार है पूर्व में भी दुर्ग विधायक एवं महापौर द्वारा बाजार अधिकारी की शिकायत तात्कालिक आयुक्त बर्मन से , तात्कालिक आयुक्त बर्मन की शुइकायत जिलाधीश से एवं सुनवाई ना होने पर मुख्यमंत्री से , अमृत मिशन की लचर कार्यप्रणाली पर अपनी ही सरकार को कठघरे में खड़ा करना ये समय समय पर सही भी हो सकता है किन्तु वर्तमान स्थिति में जब जिला प्रशासन के साथ क्या अमीर क्या गरीब हर कोई खडा है और दुवा कर रहा है कुछ अच्छा होने की ऐसे समय में जिला प्रशासन की शिकायत , स्वास्थ्य विभाग की शिकायत कही ना कही उन अधिकारियों / कर्मचारियों का मनोबल तोड़ रही है जो अपनी जान जोख़िम में डाल कर २४ घंटे कार्य कर रहे है .
आज दुर्ग निगम क्षेत्र के ऐसे कई मोहल्ले है जहाँ सेनेटाईजर तक नहीं हुआ है , कई परिवार ऐसे है जो तकलीफों में है , कई परिवार ऐसे है जो कु व्यवस्था से अपनों को खो चुके है ऐसे समय में उनका संबल बढाने की सबसे ज्यादा जिम्मेदारी निगम के महापौर और क्षेत्र के विधायक की रहती है किन्तु जिस तरह दो दिन पूर्व दुर्ग विधायक और निगम के महापौर ने जिले के स्वास्थ्य विभाग की लचर व्यवस्था की शिकायत मुख्यमंत्री से की और उसे प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सभी को सूचित किया इससे ये तो यही संकेत जाता है कि दुर्ग विधायक स्वयं ये मानते है कि भूपेश सरकार के अंतर्गत अधिकारी लापरवाह हो गए है और स्वास्थ्य मंत्री की विभाग में कोई पकड़ नहीं क्योकि कुछ दिन पहले ही प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव दुर्ग में मेराथन बैठक लेकर स्थिति के जल्द सुधरने की बात कही थी और अधिकारी उस दिशा में कलेक्टर भूरे के मार्गदर्शन में कार्य कर भी रहे है .