शौर्य की बाते / होली का त्योहार रंगों का त्योहार सोचे अगर जिंदगी में कोई रंग ही ना हो तो कैसी रहेगी जिंदगी आज सब यह कोशिश में लगे हैं कि कैसे भी प्रशासन की नजर से बस कर होली खेले खूब मस्ती करें किंतु क्या यह सही होगा कोरोना जैसी संक्रमण जो आज दुर्ग में और प्रदेश में तेजी से फैल रहा है ऐसे माहौल में होली खेलकर अपनी जिंदगी दाव में लगाना है क्या सही होगा होली तो हर साल आता है किंतु यह बीमारी है सदियों में पहली बार आई है आज जो भी इस दुनिया में है उसने ऐसी महामारी कभी नहीं देखी होगी अगर होली के रंग में डूब कर इस गंभीर बीमारी को गले लगाते हैं तो जीवन खतरे में पड़ सकता है ,
होली तो अगले साल भी बनाई जा सकती है किंतु यह सोचिए कि अगर इस बीमारी के कारण है कोई अपना हम से सदा के लिए दूर हो गया तो क्या कोई भी त्यौहार बना पाएंगे नहीं मना पाएंगे ऐसा इसलिए कह रहा हूं की होली के इस रंग में अब डूबने की इच्छा नहीं होती कोरोना तो पहली बार आया है किंतु जब से मेरा लाल मेरा निक्की मेरा शौर्य मुझसे दूर हुआ है तब से क्या होली क्या दिवाली हर त्यौहार बेरंग हो गई जिंदगी बियाबान है सिर्फ जी रहे हैं दो वक्त खा रहे हैं और सांस ले रहे हैं क्या खुशी क्या गम किसी बात का एहसास नहीं है .
मेरे लाल के बिना मेरी जिंदगी एक विराने से ज्यादा कुछ नहीं परिवार में एक भी व्यक्ति ना रहे तो परिवार का हो जाता है आज मेरा परिवार अधूरा है और हर खुशी मुझसे खुश हो दूर सिर्फ एक याद की ऐसी ही होली में मेरा निक्की रंग से सराबोर रहता था दिनभर होली के त्यौहार में मदमस्त रहता था उसे देख कर दिल खुश हो जाता था और बिना रंग के ही यह दुनिया रंगीन गलती थी आज उसके बिना हर रंग फीका है इस संक्रमण में आप अपना और अपने परिवार का ख्याल रखें एक 2 साल होली नहीं खेलने से जिंदगी नहीं रुकेगी किंतु अगर जिंदगी रुक गई तो पूरे परिवार टूट जाता है इसलिए निवेदन है कि जो दुख जो तकलीफ मैं मेरी पत्नी मेरी बेटी झेल रहे हैं पैसा दुख आपके पास कभी ना आए आपका परिवार हमेशा आपके साथ रहे लव यू निक्की