दुर्ग / शौर्यपथ / आरएसएस के कार्यकर्ता डॉ दीप चटर्जी भिलाई के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता के साथ साथ सोसल मिडिया में अपनी बेबाक टिपण्णी के लिए जाने जाते है . कल की जो घटना उनके साथ हुई वह निंदनीय है किसी भी लोकतंत्र प्रधान देश में इस तरह की घटना के लिए कोई स्थान नहीं इस बात में कितनी सच्चाई और किसकी गलती ये जाँच का मुद्दा है किन्तु अब यह घटना धीरे धीरे भाजपा के आंतरिक कलह के साथ राजनितिक रंग भी लेने लगी है . घटना के अभी २४ घंटे भी पुरे नहीं हुए कई तरह के अलग अलग ब्यान आने लगे है .
मामला एक फेसबुक टिप्पणी को लेकर शुरू हुआ जिसमे डॉ. चटर्जी द्वारा ५० हजार वापसी की मांग की गयी और इसे शाही दशहरा के आयोजक समिति से जोड़ा गया . डॉ. चटर्जी के अनुसार भाजपा कार्यालय के लिए दिए चंदे के गलत उपयोग पर मामला शुरू हुआ वही चारुलता पाण्डेय के अनुसार वो ना तो भाजपा की सदस्य है और ना ही कार्यकर्त्ता बिना किसी प्रमाण के शाही दशहरा और चंदे की बात पर हुए विवाद में डॉ. चटर्जी ने बीती रात अपने ब्यान में छत्तीसगढ़ पुलिस की और भिलाई के कांग्रेस नेताओ की तारीफ़ की साथ ही कहा यह आंतरिक मामला है इसलिए सहयोग के लिए धन्यवाद वही अब इस मामले पर दुर्ग लोकसभा के सांसद विजय बघेल सरकार आर और छत्तीसगढ़ पुलिस पर भेदभाव का अओप लगा रहे है जबकि पुलिस प्रशासन जाँच के बाद कार्यवाही की बात कह रही है .
घटना हुए अभी २४ घंटे नहीं हुए और पीड़ित डॉ. चटर्जी के ब्यान एवं सांसद विजय बघेल के ब्यान में इतना विरोधाभास क्या मामले को राजनितिक दिशा में धकेलने का प्रयास है खैर जो भी होगा आगे स्पष्ट हो जाएगा किन्तु इन सब घटना से ये साफ उजागर हो गया कि आने वाले समय में दुर्ग / भिलाई भाजपा में जबरदस्त आंतरिक कलह देखने को मिलेगा जिसका असर होने वाले निगम चुनाव में साफ़ दिखेगा .