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मनीषा की मौत पर चुप है कंगना को इंसाफ दिलाने वाले ... Featured

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शौर्यपथ लेख । कंगना एक ऐसा नाम जो भारतीय मीडिया की trp बनी हुई है अपना ईमान बेचकर कंगना को इंसाफ दिलाने का ढोंग रचने वाले महिलाओं के सम्मान की बात करने वाले गंदी राजनीति के सेनापतियों क्या कंगना के साथ कोई गलत हुआ जो ऐसे चीख चीख कर इंसाफ की दुहाई देने निकले या सिर्फ सत्ता के लिए ही सारी गन्दी राजनीति करने की सोंच ली है । जाहिलो अगर कंगना के साथ गलत हुआ है तुम्हारे हिसाब से तो क्या मनीषा के साथ गलत नही हुआ कंगना का तो हिसाब कोर्ट में हो जाएगा दो चार फिल्में करेगी तो बंगला एक बार फिर बन जायेगा किन्तु क्या मनीषा वापस आएगी क्या मा की सुनी गोद फिर भर जाएगी । कंगना की महाराष्ट्र सरकार से जंग शुरू हुई और y श्रेणी सुरक्षा मिल गयी वो भी तुरंत , कोर्ट में मामला पहुंच गया वो भी तुरंत , दलाल मीडिया की फौज पहुंच गई कंगना के आस पास वो भी तुरंत अपने आप को झांसी रानी कहने लगी जिसे घोड़े में बैठने तक की जानकारी नही अपने आप को नशा के विरुद्ध एक नायिका पेश करने लगी जो बीफ खाती है जो ड्रग्स लेती है यह बात उस कंगना ने ही स्वीकार आज वही अपने को एक लड़ाकू महिला घोषित कर रही । कंगना जो कर रही अपने लिए कर रही किन्तु कंगना को इंसाफ देने की बात करने वाले अब कहा है जब एक मासूम के साथ अत्याचार हुआ और जिंदगी और मौत के जंग में मौत की जीत हो गई अब क्यो बोल नही फुट रहे महिलाओं के सम्मान की बात करने वाले क्या उनकी नजर में मनीषा का कोई अस्तित्व नही क्या मनीषा देश की बिटिया नही । मनीषा के मामले में क्यो नही बोल फुट रहे उन लोगो के जो कंगना को इंसाफ दिलाने निकले थे यहाँ तक अपनी प्रोफाइल पर भी कंगना की फ़ोटो लगा रखी उस कंगना की जिसे यह भी याद नही कि एक साल पहले उसने किस पार्टी को वोट दिया था आज उनके लिए कंगना बड़ी हो गई और मनीषा का कोई अस्तित्व नही राह गया । शर्म आती है ऐसे देशभक्तों पर हिन्दू होने का अभिमान करने वाले तलुवे चाटने वालो पर जो 10 दिनों में एक बार भी मनीषा के लिए इंसाफ की दुहाई नही दे रहे । अरे भाई वो मनीषा एक मासूम बच्ची थी जिसे 4 दरिंदो ने मारा है एक झटके में नही टिल टिल पल पल तड़फा कर मारा है और वह रे हिंदुत्व की राग अलापने वाली सरकार एक हिन्दू लड़की को एक कुवारी हिन्दू लड़की की मृत देह को परिजनों की अनुमति के बिना रात में अंतिम संस्कार कर दिए और पूरी प्रशासन मौन है । योगी जी आप तो हिंदुत्व का झंडा उठाते हो क्यो हो गया ऐसा जघन्य कांड आपके राज में माना आपका कोई दोष नही मासूम के बलात्कार की घटना से और ना ही आपकी सरकार का कोई दोष किन्तु घटना के बाद जो कार्यवाही हुई क्या वो त्वरित कार्यवाही की श्रेणी में आता है घटना के बाद मृत शरीर का जो अपमान हुआ वो हिन्दू भावना को आघात नही पहुंचता । कुवारी कन्या को हम हिन्दू पूजते है देवी का रूप मानते है कहते है जिस बाप के सौ भाग्यो के पुण्य का नतीजा सौभाग्यवती कन्या का रूप में घर मे प्रवेश करता है आज उस बाप के दिल मे क्या गुजर रही होगी जिसकी मासूम निरपराध बेटी के अंतिम दर्शन और दाह संस्कार का भी अवसर नही मिला आपके राज में क्या ऐसा ही होता है राम राज्य अगर ऐसा राम राज्य है तो नही चाहिए मुझे राम राज्य जहां एक हीरोइन की अवैध इमारत टूटने पर उसे देशभक्त घोषित कर दलाल मीडिया उसके तलवे चाट रही हो और एक मासूम की मौत पर कन्या को देवी का रूप मानने वाले दिखावटी लोग एक शब्द भी नही बोल रहे । एक हथनी की क्रूरता से मौत हुई तो कुत्ते जैसे भौकने वाले सोशल मीडिया की गली में आ कर चिल्लाने लगे वही जब एक मासूम की क्रूरता से मौत हुई तो सारे मौन है क्या ऐसे लोगो को ही समाज दोगला कहता है । मैं एक साधारण सा इंसान हूँ एक बेटा और एक बेटी का बाप हूँ मै कुछ नही कर सकता किन्तु दिल से उस मासूम के पिता के साथ हूँ । मासूम मनीषा को इंसाफ मिले या ना मिले किन्तु उस मासूम के पिता को जिंदगी भर का दर्द पहले बलात्कारियों ने दिया और उसके बाद प्रशासन के उन अधिकारियों ने दिया जिन्होंने मासूम मनीषा का बिना विधान के आधी रात में अंतिम संस्कार किया । ( शरद पंसारी - संपादक शौर्यपथ दैनिक समाचार )

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