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Big breaking: “सरकारी नौकरी और राजनीति साथ-साथ नहीं” — छत्तीसगढ़ सरकार का सख्त फरमान

  • rounak group

रायपुर/नवा रायपुर। शौर्यपथ । 

छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने प्रशासनिक निष्पक्षता और पारदर्शिता को मजबूत करने के उद्देश्य से एक बड़ा और सख्त फैसला लिया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी ताजा निर्देशों में स्पष्ट कर दिया गया है कि कोई भी शासकीय सेवक अब किसी भी राजनीतिक दल, संगठन या अन्य पद पर आसीन नहीं रह सकेगा।

? क्या है आदेश का आधार?

यह निर्देश छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के तहत जारी किया गया है, जिसमें सरकारी कर्मचारियों के आचरण, निष्पक्षता और कर्तव्यों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश पहले से ही निर्धारित हैं।

साथ ही, आदेश में 21 अप्रैल 2026 को जारी सामान्य प्रशासन विभाग के ज्ञापन का हवाला दिया गया है।

⚖️ क्या-क्या प्रतिबंध लगाए गए?

सरकार के आदेश के मुताबिक—

❌ कोई भी शासकीय सेवक किसी राजनीतिक दल का सक्रिय सदस्य नहीं होगा

❌ किसी भी प्रकार की राजनीतिक गतिविधियों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भागीदारी पूरी तरह प्रतिबंधित

❌ बिना अनुमति किसी भी सरकारी या गैर-सरकारी संस्था, समिति या संगठन में पद धारण नहीं कर सकेगा

❌ ऐसी किसी गतिविधि में शामिल नहीं होगा जिससे उसके सरकारी कार्यों की निष्पक्षता प्रभावित हो

? उल्लंघन पर क्या होगा?

सरकार ने साफ कर दिया है कि नियमों की अनदेखी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी।

⚠️ दोषी पाए जाने पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत

⚠️ कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी

? सरकार का संदेश

इस फैसले के पीछे सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि—

? सरकारी तंत्र पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और राजनीतिक प्रभाव से मुक्त रहे

? जनता को निष्पक्ष और ईमानदार प्रशासनिक सेवा मिले

? क्या बदल सकता है?

इस आदेश के बाद प्रदेश में—

सरकारी कर्मचारियों की राजनीतिक सक्रियता पर लगाम लगेगी

प्रशासनिक निर्णयों में पारदर्शिता और भरोसा बढ़ेगा

शासन-प्रशासन में हितों के टकराव (Conflict of Interest) की स्थिति कम होगी

? निष्कर्ष:

छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम साफ संकेत देता है कि अब “सरकारी सेवा = पूर्ण निष्पक्षता”।

राजनीति और सरकारी जिम्मेदारी को अलग रखने की यह पहल आने वाले समय में प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत बना सकती है।

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शौर्यपथ