पटना, ।
बिहार की राजनीति में ऐतिहासिक मोड़ आ गया है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सम्राट चौधरी को भाजपा विधायक दल का नेता चुन लिया गया है और वे अब राज्य के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं।
? 15 अप्रैल को शपथ, सत्ता परिवर्तन तय
सूत्रों के अनुसार सम्राट चौधरी 15 अप्रैल 2026 को सुबह 10 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। यह समारोह पटना के राजभवन या लोक भवन में आयोजित होने की संभावना है।
यह बदलाव नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद हुआ है, जिन्हें राज्यसभा के लिए चुना गया है।
? गठबंधन की नई संरचना
नई सरकार में विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चा तेज है।
कैबिनेट में नए और युवा चेहरों को मौका देकर भाजपा-जदयू संतुलन साधने की रणनीति अपनाई जा रही है।
?️ विरासत से सत्ता तक का सफर
सम्राट चौधरी का जन्म 16 नवंबर 1968 को मुंगेर जिले में हुआ। वे राजनीतिक रूप से मजबूत परिवार से आते हैं—उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार की लव-कुश राजनीति के बड़े स्तंभ रहे हैं।
? राजनीतिक यात्रा
1990: राजनीति में प्रवेश
1999: राबड़ी देवी सरकार में कृषि मंत्री
2014: राजद से जदयू में शामिल
2017: भाजपा में प्रवेश
2024: बिहार के उपमुख्यमंत्री बने
? संगठन से सरकार तक प्रभावशाली भूमिका
2023–2024: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए OBC आधार मजबूत किया
2022: विधान परिषद में विपक्ष के नेता
2024: GST रेट रेशनलाइजेशन पैनल के संयोजक
? प्रतीक और राजनीति
सम्राट चौधरी अपनी “पगड़ी राजनीति” को लेकर भी चर्चा में रहे।
उन्होंने नीतीश कुमार को सत्ता से हटाने तक पगड़ी न उतारने का संकल्प लिया था, जिसे बाद में अयोध्या में पूरा किया।
⚠️ विवाद भी रहे साथ
उनके राजनीतिक सफर में शैक्षणिक योग्यता और उम्र को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे, लेकिन इसके बावजूद वे संगठन और सत्ता दोनों में अपनी पकड़ मजबूत करने में सफल रहे।
? क्या बदलेगा बिहार?
बिहार में पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री बनना केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि राजनीतिक दिशा परिवर्तन का संकेत माना जा रहा है।
अब नजर रहेगी कि सम्राट चौधरी किस तरह विकास, सामाजिक समीकरण और गठबंधन संतुलन को साधते हैं।
✍️ निष्कर्ष:
बिहार की राजनीति में “सम्राट युग” की शुरुआत हो चुकी है—अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह बदलाव राज्य के भविष्य को किस दिशा में ले जाता है।