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“महापौर साहिबा का ‘सरोज-सिंड्रोम’: शहर ठप, राजनीति पॉप” Featured

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दुर्ग। शौर्यपथ
दुर्ग की राजनीति में एक नया ट्रेंड चल पड़ा है—नेता बनने से पहले सरोज पांडे का वर्ज़न अपडेट बनना। लेकिन अफसोस, शहर की वर्तमान महापौर अलका बाघमार इस अपडेट में कहीं सिस्टम क्रैश का शिकार हो गई लगती हैं। चुनाव में मिली भारी जीत शायद इतना भारी पड़ गई कि प्रशासन पर पकड़ हल्की पड़ती चली गई।
बीते छह महीनों में दुर्ग नगर निगम की हालत ऐसी हो गई है कि लोग धीरज बाकलीवाल के समय को “गोल्डन एरा” की तरह याद करने लगे हैं। शहर के विकास काम अपनी ही बदहाली देखकर खुद को सांत्वना देते मिल जाते हैं।

कपड़ा लाइन—वादा हाई, एक्शन डाई

अतिक्रमण हटाने का ऐलान ऐसे किया गया मानो शहर अगले ही दिन क्लीन-सिटी अवार्ड लेने वाला हो। लेकिन न हटे व्यापारी, न बना विस्थापन, और देखते ही देखते मुद्दा महापौर की फाइलों में “फॉरवर्डेड टू नेक्स्ट ईयर” मोड में चला गया।
अब “मोर शहर मा जिम्मेदारी” के लोग सड़क पर ज्यादा जिम्मेदार दिख रहे हैं, सरकार में नहीं।

धनवानों के अतिक्रमण पर ‘एयरप्लेन मोड’

समृद्धि बाजार के सामने अवैध कब्जा?
शहर के चौक-चौराहों पर मनमानी?
सभी का जवाब—महापौर की मौन साधना।

जनता को समझ नहीं आ रहा कि यह प्रशासन है या किसी बड़ी कंपनी का VIP कस्टमर सपोर्ट, जहां अमीरों की शिकायतों पर ही रिस्पॉन्स मिलता है।

सड़कों पर मवेशी—शहर का असली ‘ट्रैफिक मैनेजर’

गाय, बैल, भैंस—सभी ने शहर के यातायात पर ऐसा कब्जा किया है कि लगता है मानो यही ऑफिशियल रोड सेफ्टी एडवाइजर्स हों। महापौर कार्यालय के बगल में चल रहा अवैध बाजार देखकर तो ऐसा लगता है कि प्रशासन ने इसे “सांस्कृतिक धरोहर” घोषित कर दिया हो।

निगम में गुटबाजी: ‘टीम महापौर बनाम टीम बाकी सब’

भाजपा के पार्षदों में भी अब चर्चा यही है कि महापौर अपने ही संगठन से दूर और चंद प्रशंसकों के करीब हो गई हैं। प्रेस रिलीज़ और सोशल मीडिया रीलों से शहर को सजाने-संवारने की कोशिश में असली शहर कहीं पीछे छूट गया है।

राजनीतिक भविष्य—रेड अलर्ट

यदि दुर्ग के विधायक और मंत्री गजेंद्र यादव दोबारा टिकट की तैयारी में हैं, तो वर्तमान शहरी अव्यवस्था उनके लिए भी “बोनस” नुकसान लेकर आ सकती है। दो साल बीत गए, कुछ नहीं बदला—अब बचे दो साल शहर की किस्मत लिखेंगे या गुटबाजी का अगला अध्याय, यह देखना दिलचस्प होगा।

दुर्ग में ट्रिपल इंजन की सरकार फिलहाल तीन दिशाओं में दौड़ रही है और शहर बीच में धूल फांक रहा है।
नकल की राजनीति + निष्क्रिय प्रशासन + प्रोटोकॉल प्रेम

एक ऐसा महापौर कार्यकाल, जिसे भविष्य में लोग कह सकते हैं—
“ये रहा दुर्ग का सबसे अवसरवादी और सबसे कमज़ोर शहरी शासन।”

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Last modified on Friday, 26 December 2025 07:35
शौर्यपथ