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पंचगव्य विद्यापीठ्म कांचीपुरम् तमिलनाडु के कुलपति डॉ. कमल टावरी ने पंचगव्य डॉक्टर्स एवं गौसेवकों को दिया विशेष मार्गदर्शन

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छत्तीसगढ़ की कोसली गाय में अद्भूत गुण
   राजनांदगांव/शौर्यपथ / पंचगव्य विद्यापीठ्म कांचीपुरम् तमिलनाडु के कुलपति एवं पूर्व सचिव भारत सरकार डॉ. कमल टावरी (भूतपूर्व आईएएस) अपने छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान बंसतपुर स्थित माँ पंचगव्य अनुसंधान केन्द्र में पंचगव्य डॉक्टर्स एवं गौसेवकों की बैठक ली। बैठक में कुलपति डॉ. टावरी ने छत्तीसगढ़ में पाई जाने वाली कोसली नस्ल की गाय पर किए गए शोध के संबंध में चर्चा की। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में पाई जाने वाली कोसली नस्ल की गाय में अद्भूत गुण है। इसके गौमूत्र में यूरिया, खनिज लवण, एंजाइम व फसलों के लिए उपयोगी अन्य तत्वों की अधिकता होती है। इसके गौमूत्र में विशेष औषधि गुण होते है तथा कोसली गाय छत्तीसगढ़ की जलवायु के अनुकुल है। उन्होंने कहा कि देश की विलुप्त होती विभिन्न प्रजाति के गायों को संरक्षण करने की अति आवश्यकता है।
    कुलपति डॉ. कमल टावरी ने गौ आधारित कृषि, चिकित्सा, स्वरोजगार सृजन पर विशेष मार्गदर्शन दिया।  उन्होंने बताया कि मनुष्य का शरीर पांच तत्वों जल, अग्नि, वायु, आकाश, पृथ्वी से मिलकर बना है और गाय के पंचगव्यों का मनुष्य शरीर पर गहरा प्रभाव है। उन्होंने कहा कि आज देश को गौ आधारित अर्थव्यवस्था की ओर फिर से स्थापित करने की आवश्यकता है। इस दौरान गौ संस्कृति अनुसंधान संस्थान राजनांदगांव द्वारा गौ उत्पादन, पंचगव्य चिकित्सा, जैविक कृषि सहित अन्य क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। डॉ. टावरी ने संस्थान द्वारा किए जा रहे कार्यों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि राजनांदगांव जिले में गाय के  क्षेत्र में कार्य करने की असीम संभावनाएं है। इस दौरान जर्मनी से आयी इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ होलिस्टिक रिसर्च एंड वॉलेंटरी एक्शन की चेयरपर्सन इरमेलजी मारला ने भी अपने अनुभव साझा किए। इस अवसर पर राधेश्याम गुप्ता, राकेश ठाकुर एवं गव्यसिद्ध डॉक्टर अवधेश कुमार, प्रमोद कश्यप, डिलेश्वर साहू, ज्ञानचंद साहू, उपेन्द्र साहू, गिरधर साहू, किरण साहू सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।

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